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‘पूर्णिया में अगले 5 साल रहना है, तो ₹1 करोड़ देने ही पड़ेंगे’: रंगदारी माँगने के आरोप में नवनर्वाचित सांसद पप्पू यादव और उनके सहयोगी पर FIR

बिहार के पूर्णिया से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव और उनके सहयोगी अमित यादव के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई है। उनके खिलाफ फोन पर रंगदारी माँगने के आरोप में मुफस्सिल थाने में एफआईआर दर्ज हुई है। बताया जा रहा है कि पप्पू यादव के सहयोगी अमित यादव ने एक कारोबारी से फोन पर 1 करोड़ रुपए की डिमाँड की थी, जिसके बाद पीड़ित ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बीते 4 जून 2024 को फर्नीचर व्यवसाई के मोबाइल पर पप्पू यादव के करीबी अमित यादव ने धमकी दी कि 5 साल पूर्णिया में रहना है तो एक करोड़ रूपए देने होंगे। अगर 1 करोड़ नहीं दिए गए, तो उन्हें पूर्णिया छोड़कर जाना पड़ेगा। यही नहीं, उन्हें जान से भी मारने की धमकी दी गई है। इस शिकायत के आधार पर सांसद पप्पू यादव और अमित यादव के खिलाफ मुफस्सिल थाना कांड संख्या 93/2024 दिनांक 10.06.2024 धारा-385/504/506/34 भादवि में मामला दर्ज कर जाँच शुरू कर दी गई है।

पूर्णिया के एसपी ने दी जानकारी

पूर्णिया के एसपी की तरफ से जारी प्रेस विज्ञप्ति में बताया गया है कि पूर्णिया के नए सांसद के खिलाफ यह प्राथमिकी एक फर्नीचर व्यवसाई की शिकायत पर दर्ज की गई है। आरोप है कि तीन साल पहले 02.04.2021 को माननीय सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव के द्वारा 10 लाख रूपए रंगदारी टैक्स की माँगी की गई थी। वर्ष 2023 के दुर्गा पूजा के दौरान मोबाईल एवं वाटसएप काल पर 15 लाख रुपए, दो सोफा सेट माँगने के साथ-साथ धमकी और गाली-गलौच की गई।

पुलिस ने आगे बताया है कि लोकसभा चुनाव के दौरान भी माननीय सांसद राजीव रंजन उर्फ पप्पू यादव के खास अमित यादव के द्वारा दिनांक-05.04.2024 को मोबाइल पर करीब 10 से 15 कॉल करके अर्जुन भवन पूर्णिया, माननीय सांसद पप्पु यादव के आवास पर बुलाने एवं 25 लाख रुपए रंगदारी की बात फर्नीचर व्यवसाई द्वारा आवेदन में उल्लेख किया गया है। इसके अतिरिक्त दिनांक-04.06.2024 को दुबारा फर्नीचर व्यवसायी के मोबाइल पर अमित यादव द्वारा धमकी दिया गया कि 05 साल पूर्णिया में ही रहना है और एक करोड़ रूपया नहीं देने पर पूर्णिया छोड़कर जाने की धमकी के साथ जान से मारने की भी धमकी दी गई।

बता दें कि बाहुबली और दबंग की छवि वाले पप्पू यादव के खिलाफ अलग-अलग थाने में 41 केस लंबित हैं। पप्पू यादव को दो मामलों में सजा भी हो चुकी है। इन दोनों केसों में पप्पू यादव जमानत पर हैं।

जेल में बंद सपा के हिस्ट्रीशीटर MLA रफीक अंसारी की जमानत याचिका खारिज: 101 गैर-जमानती वारंट और कुर्की के बावजूद कोर्ट में नहीं हुए थे पेश

मेरठ की जिला अदालत ने समाजवादी पार्टी के हिस्ट्रीशीटर विधायक रफीक अंसारी की जमानत याचिका ख़ारिज कर दी है। सोमवार (10 जून) को उनकी 2 जमानत अर्जियों पर सुनवाई के बाद मेरठ की जिला अदालत के एडीजे 9 ने यह फैसला सुनाया। 101 गैर जमानती वारंट जारी होने के बावजूद रफीक अंसारी अदालत में पेश नहीं हो रहे थे। यह वारंट 32 साल पुराने के एक केस में जारी हुए थे, जिसमें मुस्लिम समुदाय की 2 जातियाँ आपस में भिड़ गईं थीं। रफीक 27 मई 2024 से जेल में बंद हैं।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, इलाहबाद हाईकोर्ट से गैर-जमानती वारंट जारी होने के बाद 27 मई को समाजवादी पार्टी के विधायक रफीक अंसारी को पुलिस ने गिरफ्तार किया था। उनकी गिरफ्तारी लखनऊ से हुई थी। उसके बाद उन्हें मेरठ जेल में शिफ्ट कर दिया गया था। न्यायिक हिरासत के 14 दिन पूरे होने के बाद रफ़ीक अंसारी के वकीलों ने मेरठ जिला सत्र न्यायालय में 2 अलग-अलग जमानत अर्जियाँ दाखिल की थीं। इन दोनों अर्जियों की सुनवाई अतिरिक्त जिला व सत्र न्यायाधीश 9 बृजेशमणि त्रिपाठी की अदालत में हुई।

अदालत रफीक अंसारी के वकीलों द्वारा पेश की गई दलीलों से संतुष्ट नहीं हुई। दोनों जमानत अर्जियाँ ख़ारिज कर दी गईं। जिला अदालत के फैसले के बाद अब सपा विधायक को जेल में ही रहना होगा। रफीक अंसारी के वकील अब जमानत अर्जी दाखिल करने के लिए इलाहबाद हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटा सकते हैं। हालाँकि, उच्च न्यायलय में फिलहाल गर्मी की छुट्टियाँ चल रही हैं, जिसकी वजह से सुनवाई में देरी हो सकती है। इस बीच समाजवादी पार्टी के नेताओं ने जेल में रफीक अंसारी से मिलकर उनका हालचाल जाना।

बताते चलें कि सपा विधायक रफीक अंसारी जिस मामले में जेल में बंद हैं, वह साल 1992 का है। तब हापुड़ रोड पर माँस की दुकानों को लेकर मुस्लिम पक्ष के अंसारी और कुरैशी जातियों के लोग आपस में भिड़ गए थे। इस दौरान हिंसक हो गई भीड़ ने आगजनी के साथ तोड़फोड़ भी की थी। इस हिंसा की 2 अलग-अलग FIR मेरठ के लिसाड़ी गेट और नौचंदी थानों में दर्ज हुई थी। तब पुलिस ने रफीक अंसारी के साथ हाजी बुंडू को भी नामजद आरोपित बनाया था।

रफीक और हाजी बुंडू सहित कुल 22 लोगों के खिलाफ पुलिस ने साल 1995 में अदालत में चार्जशीट दाखिल की थी। इन सभी पर IPC की धारा 147, 427 और 436 के तहत कार्रवाई की गई थी। इस केस में रफीक अंसारी अदालत में हाजिर नहीं हो रहे थे। रफीक के खिलाफ साल 1997 में पहला गैर-जमानती वारंट जारी हुआ था। तब से अब तक उनके खिलाफ अलग-अलग मौकों पर 101 गैर-जमानती वारंट जारी हो चुके थे। इस दौरान रफीक के खिलाफ CRPC की धारा 82 के तहत कुर्की की भी कार्रवाई की गई थी।

कुर्की के बावजूद रफीक अंसारी कोर्ट में पेश नहीं हुए। इसके बाद हाईकोर्ट ने डीजीपी को रफीक अंसारी को गिरफ्तार करने का आदेश दिया था। इस मामले से पहले भी रफीक अंसारी के खिलाफ वारंट जारी हुए हैं। 30 जनवरी 2020 को रफीक अंसारी के खिलाफ मेरठ की एक अदालत ने 13 पुराने एक मामले में गिरफ्तारी का वारंट जारी किया था। दरअसल, साल 2007 में नगर निगम के एक ठेकेदार ने आरोप लगाया था कि रफीक अंसारी ने उनके ऊपर चाकू से हमला किया है। इस मामले में चार साल बाद 2011 में चार्जशीट दाखिल हुई थी। हालांकि, रफीक की गिरफ्तारी नहीं हुई।

साल 2022 में हुए विधानसभा चुनावों में भाजपा ने रफीक अंसारी पर आरोप लगाया था कि उन्होंने नामांकन के दौरान दिए गए अपने शपथ पत्र में खुद पर दर्ज मुकदमे की बात छिपाई थी। आखिरकार 27 मई 2024 को मेरठ की नौचंदी पुलिस ने मेरठ शहर से वर्तमान विधायक रफीक अंसारी को लखनऊ से गिरफ्तार करके जेल भेज दिया।

अनिल बन खलील ने हिंदू लड़की को फँसाया, वर्षों तक रेप के दौरान 3 बार कराया गर्भपात: भेद खुला तो इस्लाम कबूलने का बनाया दबाव, हमीरपुर पुलिस ने दबोचा

उत्तर प्रदेश के हमीरपुर जिले से लव जिहाद का मामला सामने आया है। यहाँ एक मुस्लिम युवक ने हिन्दू लड़की का रेप करके इस्लाम कबूल करवाने का प्रयास किया है। आरोपित लड़की को हिन्दू नाम से मिला था। वह शादीशुदा था, लेकिन खुद को कुँवारा बताया था। उसने पीड़िता को 2 वर्षों तक बंधक बनाए रखा और कई बार गर्भपात भी करवाया गया। इस दौरान उसने लड़की की कई बार पिटाई की। पुलिस ने केस दर्ज कर के शनिवार (8 जून 2024) को आरोपित को गिरफ्तार कर लिया।

यह मामला हमीरपुर जिले के थाना क्षेत्र बिम्वार का है। यहाँ मूल रूप से गोरखपुर जिले की रहने वाली एक लड़की ने जिलाधिकारी (DM) से मिलकर 1 जून 2024 को आवेदन दिया। शिकायत में पीड़िता ने बताया कि वह हरियाणा में फ्लिपकार्ट कम्पनी में जॉब कर रही थी। इसी कम्पनी में उसकी मुलाकात एक लड़के से हुई, जिसने खुद को अनिल यादव बताया। अनिल यादव ने पीड़िता को कुछ ही दिनों में अपने प्यार के जाल में फँसा लिया। इसके बाद शादी का झाँसा देकर वह साल 2022 से पीड़िता से लगातार रेप करने लगा।

कुछ दिनों बाद लड़की को पता चला कि जिसे वह अनिल यादव समझ रही है, वह असल में खलील खान है। जानकारी होने पर लड़की ने खुद को खलील से दूर करने की कोशिश की। इस पर खलील नाराज हो गया। उसने लड़की को बंधक बना लिया। इस दौरान उसने पीड़िता को शारीरिक और मानसिक तौर पर बुरी तरह प्रताड़ित किया। बंधक बनाए जाने के दौरान लड़की के साथ वह रेप करता रहा। जब वह मना करती तो खलील उसे बुरी तरह पिटाता। लगभग 2 साल तक बंधक रहने के दौरान पीड़िता 3 बार प्रेग्नेंट हुई। तीनों बार खलील ने दवा खिलाकर उसका गर्भपात करवा दिया।

लगातार 3 बार गर्भपात की वजह से लड़की बेहद कमजोर हो गई। 8 मार्च 2024 को जैसे-तैसे पीड़िता खलील के गाँव गई और वहाँ उसके अम्मी-अब्बा मिले। खलील के अम्मी-अब्बा ने बताया कि उनका बेटा पहले से शादीशुदा है। उसका अपनी बीवी से कोर्ट में केस भी चल रहा है। जब खलील को पता चला कि उसकी पूरी पोल पीड़िता के आगे खुल चुकी है, तब उसने लड़की पर इस्लाम कबूल करने का दबाव बनाना शुरू कर दिया। पीड़िता ने पुलिस से खलील पर कड़ी कार्रवाई की माँग की है।

पुलिस ने खलील के खिलाफ 1 जून 2024 को FIR दर्ज कर ली। खलील पर IPC की धारा 376 (2)(n), 342, 313, 323 और 506 के साथ उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम के सेक्शन 3/5(1) के तहत कार्रवाई की गई है। ऑपइंडिया के पास शिकायत कॉपी मौजूद है। शनिवार (8 जून) को पुलिस को खलील की लोकेशन हमीरपुर के बिरहना तिराहा के पास मिली। दबिश देकर पुलिस ने खलील को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है।

मोदी कैबिनेट की बैठक में मंत्रालयों का बँटवारा: राजनाथ सिंह को रक्षा, अमित शाह को गृह, जयशंकर विदेश; गडकरी सड़क परिवहन और वैष्णव रेलवे को सँभालेंगे, देखिए सूची

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई में एनडीए की तीसरी सरकार के कार्यकाल में पहली कैबिनेट बैठक का आयोजन किया गया। इस कैबिनेट बैठक में बीजेपी और सहयोगी दलों के वो तमाम नेता शामिल हुए, जिन्हें मंत्रिमंडल में शामिल किया गया है। इस बैठक में पीएम मोदी के साथ ही राजनाथ सिंह, अमित शाह, जेपी नड्डा, मनोहर लाल खट्टर और ललन सिंह, शिवराज सिंह चौहान आदि भी मौजूद रहे। इस बैठक में सबसे अहम काम मंत्रालयों के बँटवारे का रहा, जो अब पूरा हो चुका है और मोदी मंत्रिमंडल की पूरी तस्वीर सामने आ चुकी है।

अमित शाह पहले की तरह ही गृह मंत्री और सहकारिता मंत्री के तौर पर काम संभालेंगे, तो मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल में भी नितिन गडकरी को सड़क परिवहन मंत्री बनाया गया है। उनके साथ इस मंत्रालय के लिए दो राज्य मंत्री अजय टमटा और हर्ष मल्होत्रा को जिम्मेदारी सौंपी गई है। मोदी सरकार 3.0 में मनोहर लाल खट्टर को ऊर्जा मंत्रालय दिया गया है। इसके साथ ही उन्हें शहरी विकास मंत्रालय की भी जिम्मेदारी सौंपी गई है। मनोहर लाल खट्टर हरियाण के पूर्व सीएम हैं और उन्होंने पहली बार लोकसभा चुनाव लड़कर जीता है। श्रीपद नाईक को इन विभागों का राज्य मंत्री नियुक्त किया गया है। चिराग पासवान को खेल मंत्रालय की जिम्मेदारी दी गई है। चिराग पासवान को खाद्य प्रसंस्करण और उद्योग विभाग का भी जिम्मा दिया गया है।

लखनऊ से लगातार सांसद बनते आ रहे बीजेपी के वरिष्ठ नेता राजनाथ सिंह को एक बार फिर रक्षा विभाग की जिम्मेदारी दी गई है। निर्मला सीतारमण को फिर वित्त मंत्रालय की जिम्मेदारी सौंपी गई है। मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को कृषि एवं किसान कल्याण और पंचायत एवं ग्रामिण विकास मंत्रालय की जिम्मेदारी सौंपी गई है। हिंदुस्तान आवाम मोर्चा के इकलौते सांसद और मोदी कैबिनेट के सबसे वरिष्ठ सदस्य (79) जीतन राम मांझी को सूक्ष्म लघु एवं मध्यम उद्योग मंत्रालय की जिम्मेदारी दी गई है। उनके इस विभाग में शोभा करंदलाजे को राज्य मंत्री बनाया गया है।

जेपी नड्डा के पास स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के अलावा केमिकल और फर्टिलाइजर विभा की भी जिम्मेदारी होगी। एचडी कुमारस्वामी को भारी उद्योग के साथ स्टील मंत्रालय की जिम्मेदारी दी गई है। ललन सिंह को पंचायती राज और फिशरीज, एनीमल हस्बैंड्री और डेयरी विभाग दिया गया है, तो डॉ. वीरेंद्र कुमार को सामाजिक न्याय मंत्रालय दी गई है। सीआर पाटिल को जल शक्ति विभाग दिया गया है। वहीं धर्मेंद्र प्रधान को शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी दी गई है। प्रह्लाद जोशी का इस बार विभाग बदला गया है। उन्हें इस बार खाद्य, उपभोक्ता और रिन्यूएबल एनर्जी विभागों की जिम्मेदारी दी गई है।

एनडीए सरकार में सहयोगी दल टीडीपी के नेता राम मोहन नायडू को नागरिक उड्डयन मंत्रालय मिला है। अन्नपूर्णा देवी को महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की जिम्मेदारी दी गई है। इनके अलावा रवनीत सिंह बिट्टू को अल्पसंख्यक मामलों के विभाग में राज्य मंत्री बनाया गया है। गजेंद्र सिंह शेखावत को संस्कृति एवं पर्यटन मंत्रालय को जिम्मेदारी मिली है। सुरेश गोपी और राव इंद्रजीत सिंह को संस्कृति एवं पर्यटन मंत्रालय में राज्य मंत्री बनाया गया है।

राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) को भी मंत्रालयों का बँटवारा

राव इंद्रजीत सिंह- सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), योजना मंत्रालय के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और संस्कृति मंत्रालय में राज्य मंत्री बनाया गया है। डॉ. जितेन्द्र सिंह को विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री, कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन मंत्रालय में राज्य मंत्री, परमाणु ऊर्जा विभाग में राज्य मंत्री तथा अंतरिक्ष विभाग में राज्य मंत्री बनाया गया है।

अर्जुन राम मेघवाल को कानून एवं न्याय मंत्रालय के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) तथा संसदीय कार्य मंत्रालय में राज्य मंत्री भी बनाया गया है, तो जाधव प्रतापराव गणपतराव को आयुष मंत्रालय के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) तथा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय में राज्य मंत्री बनाया गया है। इसके साथ ही जयंत चौधरी को कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) तथा शिक्षा मंत्रालय में राज्य मंत्री बनाया गया है।

बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को अपनी पूरी कैबिनेट के साथ लगातार तीसरी बार पद की शपथ ली थी। प्रधानमंत्री पद की शपथ के लगभग 16 घंटे बाद उन्होंने इस कार्यकाल की अपनी पहली फाइल पर हस्ताक्षर किए। पीएम मोदी ने सोमवार को विधिवत तरीके से प्रधानमंत्री पद का कार्यभार संभाला। इसके बाद अब कैबिनेट की पहली बैठक हुई, जिसमें मंत्रालयों का बँटवारा भी किया गया। मोदी कैबिनेट की पहली बैठक में जो फैसला सामने आया है, उसके अनुसार पीएम आवास योजना को और बढ़ाया गया है। सामने आया है कि पीएम आवास योजना के तहत तीन करोड़ नए घर बनवाए जाएँगे। इसके पहले 4.21 करोड़ घर बन चुके हैं।

BJP के IT सेल हेड अमित मालवीय ने शांतनु सिन्हा पर किया ₹10 करोड़ का मानहानि केस: यौन उत्पीड़न का आरोप लगाने वाले को भेजा नोटिस

भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने पश्चिम बंगाल के शांतनु सिन्हा नामक एक व्यक्ति को 8 जून 2024 को उनके खिलाफ यौन दुराचार के आरोप लगाने के लिए कानूनी नोटिस भेजा है और 10 करोड़ की मानहानि का दावा किया है। हालाँकि, यह नोटिस सोशल मीडिया पर तब आया, जब कॉन्ग्रेस नेता और आईटी सेल प्रमुख सुप्रिया श्रीनेत ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में मालवीय के खिलाफ आरोपों के बारे में बात की।

कानूनी नोटिस के मुताबिक, मालवीय के खिलाफ पोस्ट 7 जून 2024 को फेसबुक पर प्रकाशित की गई थी। मालवीय की ओर से सुप्रीम कोर्ट के वकील अभिजीत ने शांतनु को यह नोटिस भेजा था, जिसमें पोस्ट हटाने और बिना शर्त माफी माँगने को कहा गया था। नोटिस में बताया गया है कि शांतनु द्वारा फेसबुक पर पोस्ट में मालवीय के खिलाफ़ “झूठे और अपमानजनक” आरोप लगाए गए थे, जिसका उद्देश्य “उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुँचाना” था।

नोटिस में लिखा है, “आरोपों की प्रकृति बेहद आपत्तिजनक है क्योंकि वे मेरे मुवक्किल द्वारा कथित तौर पर किए गए यौन दुराचार का झूठा आरोप लगाते हैं। यह मेरे मुवक्किल की गरिमा और प्रतिष्ठा के लिए घातक है, जो अपने पेशेवर प्रोफ़ाइल के अनुसार एक सार्वजनिक व्यक्ति हैं। उनकी प्रतिष्ठा को धूमिल करने के लिए जानबूझकर इस तरह के दुर्भावनापूर्ण बयान दिए गए हैं।”

शांतनु को तीन दिन के भीतर पोस्ट हटाने के लिए कहा गया है। हालाँकि, नोटिस का समय खत्म होने से पहले ही श्रीनेत ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस मुद्दे को उठाया। मालवीय के हवाले से समाचार एजेंसी एएनआई ने लिखा, “चूँकि कॉन्ग्रेस और उससे पहले पश्चिम बंगाल में टीएमसी ने अपमानजनक पोस्ट पर प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी। तीन दिन का नोटिस का समय 11 जून 2024 को समाप्त हो रहा है। इसके बाद उचित कार्रवाई की जाएगी।”

सुप्रिया श्रीनेत ने मालवीय पर यौन उत्पीड़न के लगाए आरोप

इस बीच, 10 जून 2024 को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कॉन्ग्रेस की आईटी सेल की हेड सुप्रिया श्रीनेत ने फेसबुक पर आरएसएस के शांतनु सिन्हा के सोशल मीडिया पोस्ट के आधार पर बीजेपी के अमित मालवीय पर यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए। अपने बयान में श्रीनेत ने कहा, “बीजेपी नेता राहुल सिन्हा से जुड़े आरएसएस सदस्य शांतनु सिन्हा ने कहा है कि बीजेपी आईटी सेल के हेड अमित मालवीय गलत गतिविधियों में शामिल हैं। वह महिलाओं के यौन शोषण में लिप्त हैं। सिर्फ 5 स्टार होटलों में ही नहीं, बल्कि पश्चिम बंगाल के बीजेपी कार्यालयों में भी। हम बीजेपी से केवल एक ही चीज चाहते हैं, महिलाओं के लिए न्याय… सच्चाई यह है कि पीएम मोदी के शपथ ग्रहण के 24 घंटे से भी कम समय में बीजेपी के एक बहुत ही प्रमुख पदाधिकारी, इसके आईटी सेल के प्रमुख के खिलाफ यौन शोषण के गंभीर आरोप लगाए गए हैं… आज हम अमित मालवीय को उनके पद से तत्काल हटाने की माँग करते हैं। जब तक उन्हें उनके पद से नहीं हटाया जाता, तब तक न्याय नहीं हो सकता।”

शांतनु सिन्हा ने अमित मालवीय पर लगाए गंभीर आरोप

कानूनी नोटिस के बावजूद शांतनु सिन्हा ने फेसबुक से पोस्ट नहीं हटाई है। बंगाली में लिखे पोस्ट में शांतनु ने अमित मालवीय और बीजेपी के अन्य वरिष्ठ नेतृत्व पर पश्चिम बंगाल के नेताओं से यौन संबंध बनाने और बदले में उन्हें पार्टी में पद दिलाने का आरोप लगाया। उन्होंने पश्चिम बंगाल के बीजेपी नेताओं पर आरोप लगाया कि वे अध्यक्ष पद हासिल करने के लिए मालवीय और बीजेपी के अन्य वरिष्ठ नेताओं को 5 स्टार होटलों में महिलाओं को भेजते हैं। उन्होंने लिखा, “क्या अमित मालवीय अभी भी कोलकाता के किसी 5 स्टार होटल में बंगाल नेतृत्व द्वारा सुंदर महिलाएँ मुहैया कराए जाने का इंतज़ार कर रहे हैं? क्या बंगाल नेतृत्व के बीच यह प्रतिस्पर्धा बंद हो गई है कि अध्यक्ष पद हासिल करने के लिए कौन सबसे सुंदर महिलाएँ मुहैया करा सकता है? कृपया, अपने कार्यकर्ताओं और समर्थकों के साथ खड़े होने में प्रतिस्पर्धा करें। अमित मालवीय या दिल्ली से अध्यक्ष या सचिव पद हासिल करने के लिए भेजे गए पर्यवेक्षकों को सुंदर महिलाएँ मुहैया कराने में नहीं। आखिरकार, उन्होंने आपके आश्वासनों और आपके शब्दों के आधार पर अपने जीवन में जोखिम उठाया है। बंगाल नेतृत्व, कृपया एक नाममात्र के व्यक्ति की तरह निष्क्रिय न बैठें।”

सांतनु सिन्हा की फेसबुक पोस्ट

गौरतलब है कि इस साल की शुरुआत में संदेशखाली में टीएमसी नेता शेख शाहजहाँ और उनके सहयोगियों के खिलाफ यौन शोषण के गंभीर आरोप सामने आए थे। शेख शाहजहाँ और उसके गुँडों पर इलाके में सालों से महिलाओं का शोषण करने का आरोप है।

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‘गाँव के मुस्लिमों ने हिन्दुओं का हुक्का-पानी किया बंद’: मंदिर के आगे दरवाजा खोलने की जिद, प्रशासन ने किया इनकार… पढ़िए वायरल खबर की जमीनी पड़ताल

उत्तर प्रदेश के कौशाम्बी जिले का थाना पश्चिम शरीरा इस समय सुर्ख़ियों में है। इसकी वजह सोशल मीडिया में गाँव जाफरपुर महावा की चर्चा है। इन चर्चाओं में मुस्लिम पक्ष द्वारा हिन्दू समुदाय का हुक्का-पानी बंद करने जैसी बातें कही जा रही हैं। कुछ मीडिया संस्थानों ने इसी से मिलती-जुलती खबरों को प्रकाशित किया है। हालाँकि, पुलिस इन खबरों का खंडन कर रही है। हिन्दू संगठनों ने स्थानीय प्रशासन के रवैये पर असंतोष जताते हुए थाने पर प्रदर्शन किया है। ऑपइंडिया ने इस खबर के सभी पहलुओं की पड़ताल की।

जड़ में है जमीनी विवाद

इस पूरे मामले की जड़ में जमीनी विवाद है। गाँव में एक मंदिर है, जो छोटेलाल गुप्ता के घर के बगल है। इस मंदिर से सटी एक जमीन पहले किसी हिन्दू की हुआ करती थी। इस जमीन को गाँव के ही एक मुस्लिम ने खरीद लिया। आरोप है कि खरीदार अब मंदिर की तरफ अपना दरवाजा खोलना चाहता है। दूसरी तरफ होने के बावजूद मुस्लिम खरीदार ‘मेरी जमीन-मेरा अधिकार’ कहकर मंदिर के आगे ही दरवाजा खोलने पर अड़ा हुआ है। हिन्दू पक्ष का मानना है कि ऐसा होने से भविष्य में आए दिन साम्प्रदायिक तनाव फैलेगा, क्योंकि मुस्लिम परिवार के तौर-तरीकों से मंदिर अपवित्र हो सकता है।

हिन्दू पक्ष ने लगाए गंभीर आरोप

इस मामले में गाँव के निवासी छोटेलाल गुप्ता, महेश और वीरेंद्र दिवाकर आदि के बयान सामने आए हैं। इन सभी ने एक स्वर में कहा है कि जमीनी विवाद की कागजी लड़ाई से हटकर मुस्लिम पक्ष अब सामाजिक बहिष्कार पर उतारू हो गया है। आरोप है कि गाँव में मुस्लिम वर्ग के लोगों ने मीटिंग की और इसमें सर्वसम्मति से तय किया गया कि हिन्दुओं के घरों से किसी भी प्रकार का कोई भी लेन-देन नहीं होगा। ऑपइंडिया को स्थानीय डिप्टी एसपी के नाम भेजी गई एक चिट्ठी भी मिली है। पत्र के नीचे छोटेलाल, महेश, राजेश कुमार, रूपेंद्र कुमार शर्मा, धीरेन्द्र सिंह और जगदीश कुमार के दस्तखत हैं।

शिकायत की कॉपी

इस चिट्ठी में गाँव के प्रधान नसीर अहमद, अबरार के बेटे गुड्डू, अकरम, नौशाद और वहाब को हिन्दुओं के बहिष्कार का सूत्रधार बताया गया है। बहिष्कार में हिन्दुओं की दुकान से सामान लेना, उनसे बातचीत करना और इनके खेतों में पानी देने से रोकने के आरोप लगाए गए हैं। इस फरमान को न मानने वाले मुस्लिम पर 5 हजार रुपए जुर्माना और बिरादरी से निकालने की चेतावनी दी गई है। शिकायत में गाँव के हिन्दुओं के अंदर दहशत का माहौल होने की बात कही गई है। सिंचाई के लिए पानी न मिलने से प्रभावित हिन्दुओं के नाम वैजनाथ और राजेश लिखे गए हैं। प्रार्थी के तौर पर समस्त हिन्दू समाज लिखा हुआ है।

ग्राम प्रधान ने आरोपों को आंशिक रूप से स्वीकारा

ऑपइंडिया को इस पूरे विवाद पर ग्राम प्रधान नस्सन उर्फ़ नसीर अहमद की एक वीडियो बाइट मिली है। नसीर अहमद ने पहले तो हिन्दू-मुस्लिम एकता जैसी तमाम बातें कहीं। उन्होंने जमीनी विवाद में भी मुस्लिम खरीदार का ही पक्ष लिया और उसके द्वारा कराए जा रहे निर्माण को सही करार दिया। ग्राम प्रधान ने किसी के भी सामाजिक बहिष्कार जैसी बातों से इनकार किया। अंत में उन्होंने यह माना कि हिन्दू-मुस्लिम की बातें करने वाले कुछ लोगों के खिलाफ कड़े कदम उठाए गए है।

पुलिस द्वारा तमाम आरोपों का खंडन

इस पूरे मामले में कौशाम्बी पुलिस ने सोमवार (10 जून 2024) को अपना बयान जारी किया है। पुलिस के मुताबिक, गाँव में किसी के बहिष्कार करने जैसा फतवा देने आदि की बातें निराधार और भ्रामक हैं। साथ ही पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया है कि सिंचाई के लिए पानी न देने का मामला सामूहिक नहीं, बल्कि एक व्यक्ति का था। तब फकीरे ने पानी लेने से पहले पुराना बकाया खत्म करने के लिए कहा था। गाँव में आंतरिक शान्ति का दावा करते हुए पुलिस ने कहा है कि कुछ बाहरी लोग वहाँ का माहौल खराब करना चाहते हैं, जिनको कड़ी हिदायत दी गई है।

प्रशासन की कार्यशैली से हिन्दू संगठन नाखुश

वहीं, हिन्दू संगठनों ने प्रशासनिक कार्यशैली पर नाराजगी जताई है। गाँव में हिन्दुओं के साथ अन्याय का आरोप लगाकर हिन्दू संगठन से जुड़े सदस्यों ने 9 जून 2024 (रविवार) को पश्चिम शरीरा पुलिस स्टेशन में धरना दिया। धरने के दौरान पुलिस पर हिन्दू पक्ष को धमकाने, राजस्व अधिकारियों द्वारा एकतरफा फैसले लेने जैसे आरोप लगाए गए। धरने के दौरान मामले की शिकायत सीधे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से करने का एलान किया गया है।

गाँव में मुस्लिम और हिन्दू आबादी लगभग बराबर बताई गई। हिन्दू संगठनों ने घोषणा की है कि गाँव के हिन्दुओं को किसी भी अन्याय का शिकार नहीं होने देंगे। फिलहाल गाँव में शांति है। प्रशासन हालत पर लगातार नजर रखे हुए है। इसको लेकर सोशल मीडिया की भी निगरानी की जा रही है।

तेंदुआ, कुत्ता, एलियन या कुछ और: पीएम मोदी के शपथ ग्रहण समारोह के दौरान राष्ट्रपति भवन में टहलता रहस्यमयी जानवर, वीडियो देख लोग हैरान

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार (9 जून 2024) को तीसरी बार भारत के प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली। पीएम मोदी के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय लोकतांत्रिक गठबंधन (NDA) ने हाल ही में संपन्न लोकसभा चुनाव में बहुमत हासिल किया और कॉन्ग्रेस के नेतृत्व वाले INDI गठबंधन को हराया है।

शपथ ग्रहण समारोह की कार्यवाही देख रहे लोगों ने एक दिलचस्प मेहमान को देखा, लेकिन आधिकारिक तौर पर इस कार्यक्रम में आमंत्रित 8,000 मेहमानों में से कोई नहीं था। यह घटना उस समय हुई जब मध्य प्रदेश के सांसद डीडी उइके नाम से विख्यात दुर्गादास उइके केंद्रीय मंत्रियों में से एक के रूप में शपथ ले रहे थे।

इस दौरान लोगों ने पृष्ठभूमि में एक जानवर को देखा। अब इस बात को लेकर कयास लगाए जा रहे हैं कि वह कौन-सा जानवर हो सकता है। इस जानवर को लेकर लोगों में उत्सुकता देखने को मिली। हालाँकि, उस दौरान कोई यह स्पष्ट रूप से नहीं जान सका कि यह कौन सा जानवर है और शपथ ग्रहण समारोह के दौरान क्या कर रहा है।

ज़्यादातर लोग अनुमान लगा रहे हैं कि यह तेंदुआ था, लेकिन राष्ट्रपति भवन में खुलेआम तेंदुआ घूमना थोड़ा दूर की कौड़ी लगता है। वहीं, कुछ लोगों का कहना है कि यह कोई पालतू जानवर है। बता दें कि रविवार को राष्ट्रपति मुर्मू ने 72 सदस्यीय मंत्रिपरिषद को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई, जिसमें 30 कैबिनेट मंत्री, 36 राज्य मंत्री और पांच स्वतंत्र प्रभार वाले राज्य मंत्री शामिल हैं।

रियासी में आतंकी हमले के बाद भड़के डच नेता गीर्ट वाइल्डर्स, बोले – ‘पाकिस्तानी आतंकियों को कश्मीर में घुसने मत दो, अपने हिंदुओं को बचाए भारत’

जम्मू-कश्मीर के रियासी में रविवार (9 जून 2024) को हुए आतंकी हमले पर नीडरलैंड्स के दक्षिणपंथी नेता गीर्ट वाइल्डर्स ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने भारत सरकार से अपील की है कि वो कश्मीर घाटी में पाकिस्तानी आतंकियों को घुसने से रोके और देश के हिंदुओं की रक्षा करे। बता दें कि रियासी में एक टूरिस्ट बस पर आतंकियों ने हमला कर दिया था। आतंकियों की फायरिंग की वजह से बस घाटी में गिर गई थी, जिसमें 10 लोगों की मौत हो गई, तो 30 से अधिक लोग घायल हो गए थे।

गीर्ट वाइल्डर्स ने एक ट्वीट कर भारत से अपने लोगों की रक्षा करने की अपील की है। गीर्ट वाइल्डर्स ने ट्वीट कर कहा है, कि “कश्मीर घाटी में पाकिस्तानी आतंकवादियों को हिंदुओं की हत्या करने की इजाजत न दें। अपने लोगों की रक्षा करें भारत!”

भारत और हिंदुओं को लेकर गीर्ट वाइल्डर्स अक्सर अपनी बात रखते हैं। पिछले साल नीदरलैंड्स में चुनाव में उनकी पार्टी को काफी अच्छा जनसमर्थन मिला था। उन्हें पूरी दुनिया से बधाइयाँ मिल रही थी। इस दौरान उन्होंने भारत और हिंदुओं को लेकर खास पोस्ट किया था और हिंदुओं का समर्थन करते रहने की बात कही है।

कौन हैं गीर्ट वाइल्डर्स?

नीदरलैंड के वेनलो में 6 सितंबर 1963 में जन्मे गीर्ट वाइल्डर्स एक दक्षिणपंथी डच नेता हैं। वह अपने इस्लाम विरोधी रुख के लिए जाने जाते हैं। वह वर्ष 2004 के बाद से लगातार पुलिस सुरक्षा में रहते हैं। उनके एक बार मोरक्को के लोगों को कूड़ा बोलने पर काफी विवाद हुआ था। पीवीवी की स्थापना उन्होंने 2006 में की थी। उन्हें अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप का डच अवतार भी कहा जाता है।

वाइल्डर्स को अवैध प्रवासियों के प्रति उनके कठोर रवैए और डच हितों को सबसे आगे रखने के लिए जाना जाता है। उन्होंने जुलाई 2022 में भाजपा की पूर्व प्रवक्ता नूपुर शर्मा और बांग्लादेशी हिंदुओं का मुद्दा भी डच संसद में उठाया था। उन्होंने अक्टूबर 2022 में भी नूपुर शर्मा के समर्थन में ट्वीट किया था। डच सांसद ने भारत में हिंदुओं पर हमले की घटनाओं का भी जिक्र किया था। उन्होंने नूपुर शर्मा का समर्थन करने पर इस्लामी कट्टरपंथियों द्वारा एक हिंदू दर्जी (कन्हैया लाल) का सिर कलम करने की घटना पर भी प्रकाश डाला था। यही नहीं, उन्होंने अभी अप्रैल 2024 में भी नूपुर शर्मा से फोन पर बातचीत की थी और उसके बारे में सोशल मीडिया पर भी पोस्ट किया था।

मोदी मंत्रिमंडल 3.0: कोई पंच से केंद्रीय कैबिनेट में पहुँचा तो किसी ने पार्षद से शुरू की थी राजनीतिक सफर, एक ने तो पंचर बनाने का भी किया काम

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में लगातार तीसरी बार राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) की सरकार बन गई है। पीएम मोदी और उनके मंत्रिमंडल के साथियों ने रविवार (9 जून 2024) को शपथ ग्रहण कर लिया। इस बार के मंत्रिमंडल में कुछ ऐसे लोग भी शामिल हैं, जिन्होंने जमीन से शुरूआत की है। एक मंत्री तो ऐसे हैं, जो राजनीति में आने से पहले पंचर बनाने का काम करते थे।

पीएम मोदी के तीसरे कार्यकाल में जिन पाँच मंत्रियों की हम बात करेंगे, वे हैं- वीरेंद्र कुमार, तोखन साहू, हर्ष मल्होत्रा, अजय टम्टा और बंडी संजय कुमार। ये सभी नेता अलग-अलग राज्यों से ताल्लुक रखते हैं और लोकतंत्र के सबसे निचले पायदान से अपनी राजनीति शुरू की है और आज ये अपनी मेहनत एवं लगन के बल पर केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल किए गए हैं।

वीरेंद्र कुमार खटीक

वीरेंद्र कुमार खटीक मध्य प्रदेश के बुंदेलखंड के बड़े नेता माने जाते हैं। वे 8वीं बार सांसद चुने जाने के बाद केंद्र में मंत्री बनाए गए हैं। खटीक टीकमगढ़ से सांसद हैं। उन्होंने कॉन्ग्रेस के पंकज अहिरवार को 4 लाख से ज्यादा वोटों से हराया है। पीएम मोदी की पहली कैबिनेट में साल 2017 में उन्हें महिला एवं बाल विकास राज्यमंत्री और दूसरी कैबिनेट में साल 2021 में सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री बनाया गया था।

वीरेंद्र कुमार का जन्म सागर जिले के एक बेहद गरीब परिवार में 27 फरवरी 1954 को हुआ था। उन्होंने सागर यूनिवर्सिटी से डॉक्टरेट की उपाधि हासिल की। वे पढ़ाई के लिए साइकिल का पंचर बनाने से लेकर गाड़ियों की रिपेयरिंग तक का काम करते थे। वे आज भी अपने पुराने और संघर्ष के दिनों के स्कूटर पर सवार होकर आम जनता से मिलने निकल जाते हैं। वे 1996 से लगातार चुनाव जीत रहे हैं।

खटीक संघ से जुड़े रहे हैं। साल 1975 में लोकनायक जयप्रकाश नारायण द्वारा शुरू किए गए संपूर्ण क्रांति आंदोलन में भाग लिया और आपातकाल में 16 महीने तक सागर और जबलपुर जेल में रहे। वे छात्रों की समस्याओं के समाधान के लिए आंदोलन शुरू किया। साल 1982 में वे राजनीति में आए और तब से भाजपा के विभिन्न प्रकल्पों से जुड़े रहे।

तोखन साहू

तोखन साहू छत्तीसगढ़ के बिलासपुर से सांसद हैं। उन्हें केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल करते हुए राज्यमंत्री बनाया गया है। तोखन साहू पहली बार लोकसभा का चुनाव जीतकर सांसद बने हैं। उन्होंने कॉन्ग्रेस प्रत्याशी देवेंद्र यादव को लगभग 1.64 लाख वोटों के अंतर से हराया है। वे एक बेहद साधारण किसान परिवार से आते हैं। वे वर्ष 2013 में पहली बार लोरमी विधानसभा सीट से विधायक निर्वाचित हुए थे।

तोखन साहू का जन्म लोरमी के छोटे से गाँव सूरजपुरा में हुआ है। उन्होंने साल 1994 में पंच पद से अपने राजनैतिक जीवन की शुरुआत की थी। तोखन पंच से सरपंच, फिर जिला परिषद सदस्य और उसके बाद वर्ष 2013 में लोरमी विधानसभा सीट से विधायक निर्वाचित हुए। साल 2015 में विधायक रहते हुए उन्हें रमन सिंह के कार्यकाल में संसदीय सचिव का पद भी दिया गया था।

हर्ष मल्होत्रा

हर्ष मल्होत्रा पूर्वी दिल्ली लोकसभा चुनाव जीतकर मोदी मंत्रिमंडल में मंत्री बने हैं। दिल्ली की सभी 7 सीटों पर भाजपा ने जीत हासिल की है, लेकिन सिर्फ हर्ष मल्होत्रा को ही मंत्री पद दिया गया है। हर्ष मल्होत्रा ने आम आदमी पार्टी के विधायक एवं सफाई कर्मी के बेटे कुलदीप कुमार उर्फ मोनू को लगभग 93 हजार वोटों से हराया है।

हर्ष मल्होत्रा ने साल 2012 में दिल्ली के वेलकम कॉलोनी से पार्षद बनकर आगे मंत्री तक का सफर तय किया है। वे साल 2015-16 में ईस्ट दिल्ली म्यूनिसिपल कॉरपोरेशन के मेयर रह चुके हैं। हर्ष मल्होत्रा ने दिल्ली विश्वविद्यालय से पढ़ाई की है और उन्होंने एलएलबी की भी डिग्री हासिल की है।

अजय टम्टा

उत्तराखंड के अल्मोड़ा से भाजपा सांसद अजय टम्टा को इस बार केंद्रीय मंत्रिमंडल में जगह दी गई है। वे साल 2014 में मोदी सरकार के पहले मंत्रिमंडल में भी शामिल हुए थे। वे अल्मोड़ा से तीसरी बार सांसद चुने गए हैं। उन्होंने कॉन्ग्रेस के प्रदीप टम्टा को लगातार तीसरी बार हराया है। टम्टा उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के करीबी माने जाते हैं और प्रदेश के बड़े दलित चेहरा हैं।

उत्तराखंड के अल्मोड़ा में 16 जुलाई 1972 को जन्मे अजय टम्टा ने 23 साल में अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत की थी। साल 1996 में वे जिला पंचायत के सदस्य चुने गए और 1997 में जिला पंचायत अध्यक्ष निर्वाचित हुए। साल 2007 में वे सोमेश्वर से विधायक चुने गए। साल 2014 में पहली बार अल्मोड़ा से सांसद बने। उन्होंने स्नातक तक पढ़ाई की है।

बंडी संजय कुमार

तेलंगाना के रहने वाले बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव बंडी संजय कुमार को इस बार मंत्रिमंडल में शामिल किया गया है। उन्होंने तेलंगाना के करीमनगर लोकसभा सीट से लगातार दूसरी बार जीत दर्ज की है। संजय कुमार ने कॉन्ग्रेस उम्मीदवार वेलिचला राजेंद्र राव को लगभग 2.25 लाख वोटों से हराया है। संजय कुमार कट्टर हिंदुत्ववादी विचारधारा के जाने जाते हैं।

संजय कुमार का जन्म 11 जुलाई 1971 को बी. नरसेया और बी. शकुंतला के यहाँ हुआ था। उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा संघ के सरस्वती शिशु मंदिर में ली है। संजय कुमार 12 साल की उम्र में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़ गए थे। संजय ने आडवाणी की रथ यात्रा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

संजय कुमार 2005 में करीमनगर के 48वें डिवीजन के लिए नगर निगम पार्षद चुने गए थे। साल 2019 में लोकसभा चुनाव जीतने से पहले तक वे इस पद पर रहे। संजय कुमार 2014 और 2018 में हुए तेलंगाना विधानसभा चुनावों में करीमनगर से भाजपा के प्रत्याशी थे, लेकिन दोनों बार उन्हें हार मिली। तेलंगाना में भाजपा को खड़ा करने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका मानी जाती है।

फिल्मों के लिए छोड़ दूँगा मंत्री पद… केरल के BJP सांसद सुरेश गोपी पर मीडिया ने फैलाया झूठ, कॉन्ग्रेस ने हवा दी: जानें क्या है सच्चाई

केरल में पहली बार भारतीय जनता पार्टी का खाता खोलने वाले सांसद सुरेश गोपी को लेकर सुबह से खबरें चलाई जा रही थीं कि वो मंत्री पद की शपथ लेने के बाद अब उस पद से इस्तीफा दे रहे हैं। वायरल दावे में कहा जा रहा था कि उन्होंने पहले से कुछ फिल्में साइन की हुई हैं इसलिए वो इस पद को छोड़ रहे हैं। हालाँकि शाम होते-होते इस मामले पर खुद सुरेश गोपी का बयान आया है।

सुरेश गोपी ने अपने ट्वीट में वायरल होते दावों का खंडन किया है। उन्होंने एक्स पर ट्वीट करके कहा, “कुछ मीडिया प्लेटफॉर्म गलत खबर फैला रहे हैं कि मैं मोदी सरकार के मंत्रिपरिषद से इस्तीफा देने जा रहा हूँ। यह सरासर गलत है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में हम केरल के विकास और समृद्धि के लिए प्रतिबद्ध हैं।”

उल्लेखनीय के सुरेश गोपी के बारे में झूठ फैलाने में कॉन्ग्रेस भी पीछे नहीं थी। कॉन्ग्रेस केरल ने एक वीडियो ट्वीट कर कहा था कि वो भाजपा सांसद सुरेश गोपी ने कल मंत्री होने की शपथ ली अब उसे छोड़ना चाहते हैं क्योंकि उन्हें फिल्म करनी है। ये तो मतदाताओं का मजाक है…।

कॉन्ग्रेस के इसी ट्वीट के नीचे अब लोग उन्हें जवाब दे रहे हैं और सुरेश गोपी का ट्वीट टैग करके कहा जा रहा है कि चुनाव पूरे हो गए पर कॉन्ग्रेस ने प्रोपगेंडा करना बंद नहीं किया है।

बता दें कि सुरेश गोपी ने साल 2024 के चुनावों में त्रिशूर निर्वाचन क्षेत्र से जीत हासिल की है। ये भाजपा की केरल में पहली जीत थी इसलिए मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल में उन्हें उतनी ही महत्ता देते हुए मंत्री पद दिया गया है। उन्होंने इन चुनावों में वकील और सीपीएम उम्मीदवार वीएस सुनील कुमार को 74 हजार 686 वोटों से हराया है।