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प्रधानमंत्री पद की शपथ के बाद PM मोदी का पहला बड़ा फैसला, देश के 9.3 करोड़ किसानों को लाभ: सेंसेक्स में बहार, छुआ 77,000 अंक का आँकड़ा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में तीसरी बार एनडीए की सरकार बनने के बाद से बाजार में भी रौनक छाई हुई है। इस बीच, सोमवार (10 जून 2024) को भारत के शेयर बाजारों में काफी बढ़त देखी गई। सुबह के कारोबार में सेंसेक्स से 77 हजार अंक तक का रिकॉर्ड स्तर हासिल कर लिया था। हालाँकि बाद में बाजार थोड़ा गिरा, क्योंकि लोग मुनाफा वसूली में लग गए। वहीं, पीएम मोदी ने प्रधानमंत्री पद संभालने के बाद पहली फाइल पर हस्ताक्षर किए। उन्होंने पीएम किसान सम्मान निधि से जुड़ी फाइल पर हस्ताक्षर किए और किसानों को 17वीं किस्त जारी करने का आदेश दिया।

पीएम मोदी की सत्ता में तीसरी बार वापसी के बाद बीएसई का 30 शेयर वाला सेंसेक्स शुरुआती कारोबार में 385.68 अंक चढ़कर 77,079.04 अंक के नए रिकॉर्ड स्तर तक पहुँचा, तो एनएसई निफ्टी भी 121.75 अंक की बढ़त के साथ 23,411.90 अंक के अपने सर्वकालिक उच्चतम स्तर पर पहुँचने में कामयाब रहा। इस दौरान सेंसेक्स में सूचीबद्ध 30 कंपनियों में से पावर ग्रिड, एक्सिस बैंक, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, बजाज फिनसर्व, रिलायंस इंडस्ट्रीज और एनटीपीसी के शेयरों को सबसे ज्यादा लाभ हुआ।

इस बीच, प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने के बाद पीएम मोदी ने पहला बड़ा फैसला लिया और किसान सम्मान निधि की राशि जारी करने को मंजूरी दे दी। पीएम मोदी ने पीएम किसान निधि की 17वीं किस्त जारी करने के लिए फाइल पर हस्ताक्षर किए। इस फैसले से 9.3 करोड़ किसानों को फायदा होगा और लगभग 20,000 करोड़ रुपये वितरित किए जाएँगे। फाइल पर हस्ताक्षर के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने कहा है कि उनकी सरकार किसानों के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा, “हमारी सरकार किसान कल्याण के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। इसलिए यह सही है कि कार्यभार संभालने पर हस्ताक्षरित पहली फाइल किसान कल्याण से संबंधित है। हम आने वाले समय में किसानों और कृषि क्षेत्र के लिए और भी अधिक काम करना चाहते हैं।”

बता दें कि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना को 1 दिसंबर 2018 को शुरू किया गया था। इस योजना के अंतर्गत सरकार द्वारा लाभार्थी किसानों को सलाना 6000 रूपये की धनराशि दी जाती है। यह 2000 रूपये की तीन किस्तें दी जाती है, जो सीधे किसानों के बैंक अकाउंट में भेज दिया जाता है। किसानों को अब तक 16 किस्त भेजी जा चुकी हैं।

गौरतलब है कि पीएम मोदी ने रविवार (09 जून 2024) को राष्ट्रपति भवन के प्रांगण में आयोजित समारोह में प्रधानमंत्री पद की शपथ ली थी। उनके साथ मंत्रिपरिषद के 71 सदस्यों ने भी शपथ ली थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शपथ ग्रहण समारोह में करीब 8 हजार मेहमान पहुँचे थे, जिसमें कई देशों के राष्ट्राध्यक्ष भी मौजूद रहे थे।

लड़की को गुस्सा था…इसलिए मारा : कंगना रनौत थप्पड़ केस में कुलविंदर के बचाव में बोले पंजाब CM भगवंत मान, समर्थन देना दूर, सांसद पर ही उठाए सवाल

हिमाचल प्रदेश के मंडी से नवनिर्वाचित सांसद कंगना रनौत को सरेआम थप्पड़ मारने वाली सीआईएसएफ महिला जवान को पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान खुलेआम समर्थन देते गए।

उन्होंने मीडिया से बातचीत में कुलविंदर कौर का पक्ष लेते हुए कंगना को ही दोषी दिखाया। सीएम मान ने कहा कंगना रनौत के पहले दिए गए बयानों की वजह से लड़की के मन में गुस्सा था जिसकी वजह से उसने ऐसा कदम उठाया।

आगे मीडिया में अपना बयान बैलेंस करने के लिए सीएम मान ने कहा कि जो हुआ वैसा होना नहीं चाहिए थे लेकिन कंगना रनौत को पब्लिक फिगर होने के नाते ऐसी बात नहीं कहनी चाहिए थे वो फिल्म स्टार हैं और निर्वाचित सांसद है। ऐसी बातें कहना कि सारा पंजाब ही आतंकवादी है, बहुत गलत है।

बता दें कि 6 जून को कंगना रनौत को चंडीगढ़ एयरपोर्ट पर एक सीआईएसएफ सुरक्षाकर्मी ने पीछे से आकर झापड़ मारा था। महिला का नाम कुलविंदर कौर है जो कि पंजाब के सुल्तानपुर लोधी की रहने वाली है। इस घटना के बाद कंगना ने पंजाब में बढ़ रहे कट्टरपंथ पर सवाल उठाए थे। वहीं दूसरी ओर कई सिख संगठनों ने कुलविंदर का समर्थन किया था और उसके घर पर जाकर उसे सम्मानित भी करके आए।

ऐसे में सवाल उठे थे कि अगर इस तरह लोग अपनी नाराजगी हिंसक होकर जताने लगे तो देश में अराजकता आ जाएगी, लेकिन कई लोगों को कुलविंदर का झापड़ मारना अच्छा लगा और उन्होंने कंगना से नफरत जाहिर करने के लिए कुलविंदर को खूब सपोर्ट किया। इस घटना के बाद कुलविंद कौर को उसकी ड्यूटी से सस्पेंड कर दिया गया है।

पहले 70 घरों में आग… अब मुख्यमंत्री के काफिले पर गोलियाँ: मणिपुर में 2 जवान घायल, टीमें जाँच में जुटीं; विजुअल्स सामने आए

मणिपुर के जिरीबाम में हुई हिंसा के बाद अब मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह के काफिले पर जानलेवा हमले की खबर है। सीएम के जेड श्रेणी के सुरक्षाकर्मियों पर ये हमला हुआ है। इस अटैक में दो सुरक्षाकर्मी घायल हो गए हैं। उन्हें अस्पताल में भर्ती कराकर इलाज कराया जा रहा है।

घटना सोमवार (10 जून 2024) सुबह राष्ट्रीय राजमार्ग-37 पर कांगपोकपी जिले के कोटलेन के पास टी लाइजांग गाँव में घटी। कहा जा रहा है कि सीएम कल चूँकि जिरीबाम दौरे के लिए जाने वाले थे इसलिए उससे पहले सुरक्षाकर्मी वहाँ मुआयना करने गए थे। इसी दौरान उनके काफिले पर उग्रवादियों द्वारा अटैक किया गया। काफिले पर अचानक गोलियाँ चलीं और सुरक्षाकर्मी घायल हो गए। हमले के बाद मणिपुर पुलिस कमांडो और असम राइफल्स ने एक संयुक्त टीम बनाई है और अपराधियों का पता लगाने के लिए तलाशी अभियान चलाया जा रहा है।

समाचार एजेंसी एएनआई ने कुछ विजुअल्स साझा किए हैं। इसमें घायल सुरक्षाकर्मी को अस्पताल में ले जाया जा रहा है। उनकी पीठ में पट्टी बँधी देखी जा सकती है। एक अधिकारी ने पीटीआई को बताया, “सीएम बीरेन सिंह अभी दिल्ली से इंफाल नहीं पहुँचे हैं, जिले में स्थिति का जायजा लेने के लिए जिरीबाम जाने की योजना बना रहे थे।”

बता दें कि अभी हाल में मणिपुर के जिरीबाम इलाके में हिंसा हुई थी। वहाँ उग्रवादियों द्वारा 6 जून को दो पुलिस चौकियों और कम से कम 70 मकानों को आग लगा दी गई थी। बाद में स्थिति ‘तनावपूर्ण’ हो गए थे। इसी क्रम में मुख्यमंत्री को हालातों का जायजा लेने जाना था इसीलिए काफिला मुआएना के लिए निकला था। हालाँकि बीच रास्ते में ही काफिले पर अटैक कर दिया गया और 2 जवान घायल हो गए। ये जवाब सीआईडी राज्य पुलिस और सीआईएसएफ के हैं। इनमें एक घायल को इंफाल भेजा गया है। और दूसरी ओर हमला करने वालों के बारे में पता लगाने का प्रयास हो रहा है।

राहुल गाँधी की माँग बकवास, विशेषज्ञों ने बताया कारण: ‘भागेगा शेयर बाजार’ को लेकर PM मोदी और अमित शाह के बयान का मामला

कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी ने आरोप लगाया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय मंत्री अमित शाह 4 जून को हुए शेयर बाजार में भारी गिरावट में सीधे तौर पर शामिल थे। उन्होंने कहा कि इससे निवेशकों की 30 लाख करोड़ रुपए डूब गए। इसलिए इस मामले की जाँच के लिए एक संयुक्त संसदीय समिति (JPC) बनाई जाए। वहीं, सुप्रीम कोर्ट में एक आवेदन दायर करके केंद्र सरकार और भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) को शेयर बाजार में गिरावट और निवेशकों को हुए नुकसान पर एक विस्तृत स्थिति रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश देने की माँग की गई है।

शेयर बाजार में गिरावट को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका

सुप्रीम कोर्ट में दायर यह आवेदन अडानी-हिंडनबर्ग मामले में दायर किया गया है, जो सर्वोच्च न्यायालय में लंबित है। इस वर्ष 3 जनवरी को सर्वोच्च न्यायालय ने सेबी और केंद्र सरकार से यह जाँच करने को कहा था कि क्या अमेरिका स्थित शॉर्टसेलर हिंडनबर्ग रिसर्च के आचरण में कोई कानून का उल्लंघन हुआ है, जिसके कारण भारतीय शेयर बाजार में अस्थिरता आई और भारतीय निवेशकों को नुकसान हुआ।

न्यायालय ने यह निर्णय लिया था कि अडानी समूह की कंपनियों के खिलाफ हिंडनबर्ग रिसर्च द्वारा लगाए गए स्टॉक हेरफेर के आरोपों पर कोई कार्रवाई करने की कोई आवश्यकता नहीं है। न्यायालय ने सेबी और सरकार को उसके द्वारा पहले नियुक्त एक विशेषज्ञ समिति की सिफारिशों पर विचार करने का निर्देश दिया था, जिसने निवेशकों के हितों की रक्षा के लिए नियामक ढाँचे को मजबूत करने का सुझाए था।

अधिवक्ता विशाल तिवारी द्वारा दायर इस याचिका में तर्क दिया गया है कि यह स्पष्ट नहीं है कि सेबी ने न्यायालय के आदेश के अनुपालन में लंबित जाँच पूरी की है या नहीं और न्यायालय को कोई रिकॉर्ड प्रस्तुत किया है या नहीं। याचिका में यह भी कहा गया है कि यह स्पष्ट नहीं है कि सरकार ने विशेषज्ञ समिति द्वारा की गई सिफारिशों पर विचार किया है या नहीं।

तिवारी ने अपनी याचिका में कहा है, “नुकसान उठाने वाले लोगों को यह जानने का अधिकार है कि क्या किसी कॉर्पोरेट समूह द्वारा कुछ अनियमितताओं और उल्लंघनों के कारण हिंडनबर्ग रिपोर्ट के बाद भारतीय शेयर बाजार में जनता के पैसे को बड़ा नुकसान हुआ। इस संबंध में सेबी द्वारा की गई जाँच के परिणाम को रिकॉर्ड में रखा जाना चाहिए, ताकि चीजें छिपी और दबी हुई न रहें।”

तिवारी ने याचिका में 2024 के लोकसभा चुनाव के नतीजों के बाद शेयर बाजार में आई गिरावट को लेकर कहा है कि एग्जिट पोल की घोषणा के बाद शेयर बाजार में तेजी आई, लेकिन जब वास्तविक नतीजे घोषित हुए तो शेयर बाजार में गिरावट आई। इसलिए सवाल उठता है कि क्या नियामक प्राधिकरण और तंत्र विफल हो गया है। क्या एग्जिट पोल आने के बाद फिर से कुछ हेरफेर किए गए थे?

इसको लेकर याचिका में शीर्ष अदालत के 3 जनवरी के निर्देशों के अनुसार अडानी-हिंडनबर्ग मामले में जाँच रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए सेबी को निर्देश देने की माँग की गई है। इसमें केंद्र सरकार और सेबी दोनों को 2024 के लोकसभा चुनाव परिणामों के बाद शेयर बाजार में गिरावट और निवेशकों के नुकसान पर एक विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश देने की भी माँग की गई है।

राहुल गाँधी के आरोप

इस मामले में राहुल गाँधी ने 6 जून 2024 को कॉन्ग्रेस मुख्यालय में एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए 4 जून की गिरावट को सबसे बड़ा शेयर बाजार गिरावट घोटाला कहा बताया था। उन्होंने कहा था कि फर्जी एग्जिट पोल के बाद शेयर बाजार को ऊपर धकेल दिया गया। उन्होंने आरोप लगाया था कि 3 जून को बाजार में रिकॉर्ड लेनदेन देखा था और फिर एक दिन बाद वोटों की गिनती के समय बाजार में गिरावट आ गई।

उन्होंने कहा था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने चुनाव के दौरान पहली बार शेयर बाजार पर टिप्पणी की थी। उन्होंने सवाल किया था, “हम कुछ सवाल पूछना चाहते हैं: प्रधानमंत्री और गृह मंत्री ने शेयर बाज़ार में निवेश करने वाले 5 करोड़ परिवारों को विशेष निवेश सलाह क्यों दी? क्या लोगों को निवेश सलाह देना उनका काम है?”

उन्होंने कहा था, “दोनों साक्षात्कार एक ही मीडिया हाउस को क्यों दिए गए, जिसका स्वामित्व एक ही व्यापारिक समूह के पास है, जो शेयर बाजारों में हेराफेरी करने के लिए सेबी की जाँच के दायरे में भी है? भाजपा, फर्जी एग्जिट पोल करने वालों और संदिग्ध विदेशी निवेशकों के बीच क्या संबंध है, जिन्होंने एग्जिट पोल घोषित होने से एक दिन पहले निवेश किया और 5 करोड़ परिवारों की कीमत पर भारी मुनाफा कमाया?”

इस मामले की जाँच की जाँच के लिए जेपीसी की माँग करते हुए राहुल गाँधी ने इस घटनाक्रम को समझने की बात कही थी। उन्होंने कहा था, “13 मई को शाह ने लोगों को ‘4 जून से पहले शेयर खरीदने’ की सलाह दी थी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 19 मई को कहा था कि शेयर बाजार 4 जून को सारे रिकॉर्ड तोड़ देगा।”

उन्होंने आरोप लगाया था कि भाजपा का शीर्ष नेतृत्व जानता है कि एग्जिट पोल ‘फर्जी’ हैं, क्योंकि पार्टी के आंतरिक सर्वेक्षण ने भाजपा को 220 सीटें दी गई थीं। इतना ही नहीं, खुफिया एजेंसियों के आकलन में कहा गया था कि सत्तारूढ़ पार्टी 200 से 220 सीटें जीतेगी। उन्होंने कहा, “यह एक घोटाला है। किसी ने भारतीय खुदरा निवेशकों की कीमत पर हजारों करोड़ रुपए कमाए हैं। प्रधानमंत्री और गृह मंत्री ने खरीदने का संकेत दिया था और यह एक आपराधिक कृत्य है।”

पीएम और गृहमंत्री के बयान से शेयर बाजार का लेना-देना नहीं: एक्सपर्ट

प्रधानमंत्री मोदी और गृहमंत्री अमित शाह द्वारा शेयर बाजार को लेकर दिए बयान को लेकर शेयर बाजार के विशेषज्ञों का कहना है कि ये बयान सेबी के नियमों का उल्लंघन नहीं करते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि प्रधानमंत्री और अमित शाह द्वारा दिया गया विशुद्ध राजनीतिक बयान है और इसमें व्यवसायिक विचार शामिल नहीं हैं और ना ही किसी शेयर को खरीदने या बेचने के लिए कहा गया है।

रेगस्ट्रीट लॉ एडवाइजर्स के सुमित अग्रवाल और सेबी के पूर्व अधिकारी ने ईटीमार्केट्स को बताया, “पीएम मोदी और अमित शाह द्वारा दिए गए बयान राजनीतिक प्रकृति के हैं। जब तक यह साबित नहीं हो जाता कि ये बयान ‘व्यावसायिक विचारों’ या विशिष्ट ‘स्टॉक’ के संदर्भ में दिए गए थे, तब तक उन्हें सेबी (निवेश सलाहकार) विनियम, 2013 का उल्लंघन नहीं माना जा सकता है।”

सेबी के निवेश सलाहकार विनियम 2013 के विनियमन 2(1)(l) के अनुसार, “निवेश सलाह का अर्थ है प्रतिभूतियों या निवेश उत्पादों में निवेश, खरीद, बिक्री या अन्यथा व्यवहार से संबंधित सलाह तथा प्रतिभूतियों या निवेश उत्पादों वाले निवेश पोर्टफोलियो पर सलाह और इसमें वित्तीय नियोजन शामिल होगा।”

नवभारत टाइम्स के हवाले से इकोनॉमी टाइम्स ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि इस कानून में यह भी कहा गया है कि समाचार पत्र, पत्रिकाओं, किसी इलेक्ट्रॉनिक या प्रसारण या दूरसंचार माध्यम के माध्यम से दी गई ऐसी कोई भी सलाह, जो जनता के लिए व्यापक रूप से उपलब्ध हो, इन विनियमों के उद्देश्य के लिए निवेश सलाह नहीं मानी जाएगी।

निवेश सलाहकार विनियमन की धारा 4 (ए) में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि कोई भी व्यक्ति, जो वित्तीय या प्रतिभूति बाजार या आर्थिक स्थिति में रुझानों के संबंध में सामान्य टिप्पणियाँ देता है, जहाँ ऐसी टिप्पणियाँ किसी विशेष प्रतिभूति या निवेश उत्पाद को निर्दिष्ट नहीं करती हैं, उसे सलाहकार के रूप में पंजीकरण लेने की आवश्यकता नहीं होगी।

AAP को सुप्रीम कोर्ट से ‘आखिरी मौका’, 10 अगस्त तक जमीन खाली नहीं करने पर कड़ा एक्शन : DelHI HC की जमीन पर बना है पार्टी ऑफिस

सुप्रीम कोर्ट ने आम आदमी पार्टी को आखिरी मौका देते हुए चेतावनी दी है कि वो 10 अगस्त तक अपने दफ्तर पर कब्जे वाली जमीन को खाली कर दे, क्योंकि इससे दिल्ली हाई कोर्ट के विस्तार को लेकर दिक्कत हो रही है। सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि ये आम आदमी पार्टी के लिए आखिरी मौका है, फिर से कोई तारीख नहीं बढ़ाई जाएगी। जल्द से जल्द आम आदमी पार्टी अपने कब्जे वाली जमीन को खाली कर दे, क्योंकि ये दिल्ली हाई कोर्ट के लिए 2020 में ही आबंटित की जा चुकी है।

Live Law की रिपोर्ट के मुताबिक, जस्टिस विक्रम नाथ और संदीप मेहता की अवकाशकालीन बेंच ने आम आदमी पार्टी की तरफ से पेश हुए वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी की दलीलों को स्वीकार कर लिया और समय सीमा 10 अगस्त तक बढ़ाने का आदेश दिया। बेंच ने याचिका स्वीकार करते हुए कहा, ‘तथ्यों और परिस्थितियों पर विचार करते हुए अंतिम मौके के रूप में हम 4 मार्च के आदेश में दिए गए समय को विस्तार दे रहे हैं।’ कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता (आप) को एक सप्ताह के भीतर कोर्ट की रजिस्ट्री को लिखकर देना है कि वे 10 अगस्त तक शांतिपूर्वक जमीन हैंडओवर कर देंगे।

सुप्रीम कोर्ट ने ‘आम आदमी पार्टी’ को यह राहत उसकी उस याचिका पर सुनवाई के बाद दी, जिसमें पार्टी ने 15 जून तक मिले समय को बढ़ाने की गुजारिश की थी। 4 मार्च 2024 को कोर्ट ने 15 जून तक दफ्तर खाली करने का आदेश दिया था। कोर्ट ने ‘आम आदमी पार्टी’ से कहा कि यह अंतिम बार मौका दिया जा रहा है और यह शपथ पत्र दिया जाए कि संपत्ति को 10 अगस्त तक हैंडओवर कर दिया जाएगा। वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि 10 अगस्त तक मोहलत माँगी जा रही है क्योंकि दिल्ली हाई कोर्ट ने हाल ही में केंद्र सरकार को आम आदमी पार्टी की अपील पर वैकल्पिक दफ्तर के लिए छह सप्ताह में जमीन देने को कहा है।

ये जगह दिल्ली हाई कोर्ट को साल 2020 में ही दे दी गई थी। दिल्ली हाई कोर्ट की तरफ से पेश हुए वकील के परमेश्वर ने कहा कि 4 साल बाद भी हाई कोर्ट को कब्जा नहीं मिला है। परमेश्वर ने कहा, ‘आवदेक और केंद्र के बीच खींचतान चलती रहेगी। क्योंकि उन्होंने राजधानी के केंद्रीय इलाके में जमीन माँगी है। हम नहीं चाहते कि इस वजह से देर हो। हम कोर्ट रूम्स की कमी के कारण गंभीर संकट में हैं। हम न्यायिक अधिकारियों के लिए जगह किराए पर लेने के लिए मजबूर हैं।’

हाई कोर्ट ने कहा कि भवन निर्माण में हर साल 30-40 प्रतिशत की बढ़ोतरी हो रही है, जिसकी वजह से हमारा प्रोजेक्ट पीछे हो रहा है। कोर्ट की तरफ से पेश हुए वकील परमेश्वर ने कहा कि दिल्ली हाई कोर्ट के पास 90 कोर्ट रूम की कमी है। नए अधिकारी सितंबर में ट्रेनिंग पूरी करके हाई कोर्ट में काम संभालने वाले हैं, लेकिन हमारे पास बिल्डिंग ही नहीं है। ऐसे ही हाल रहा, तो हमें किराए की बिल्डिंग में शिफ्ट होना पड़ेगा। वकील ने कहा कि हम आम आदमी पार्टी और केंद्र सरकार के बीच झगड़े में नहीं पड़ना चाहे। हमें सिर्फ अपनी जमीन से मतलब है।

लड़की का अंडरवियर निकालना, नंगा करना और खुद भी नंगा होना रेप का प्रयास नहीं: राजस्थान हाई कोर्ट

राजस्थान हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि लड़की के इनरवियर उतारना और खुद को नंगा करना बलात्कार का प्रयास नहीं, बल्कि महिला की शील भंग करने के लिए हमला है। हाई कोर्ट ने कहा कि यह अपराध भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 376 के साथ धारा 511 के तहत ‘बलात्कार करने का प्रयास’ का अपराध नहीं, यह धारा 354 के तहत महिला की शील भंग करने के लिए हमला करने का दंडनीय अपराध है।

राजस्थान उच्च न्यायालय ने हाल ही में साल 1991 में यौन अपराध के एक मामले में दोषी ठहराए गए, एक व्यक्ति को राहत प्रदान की है। इस शख्स ने छह साल की पीड़िता के अंतःवस्त्र उतार दिया था और खुद के कपड़े उतारकर उसका बलात्कार करने का प्रयास किया था। हालाँकि, हाई कोर्ट के जस्टिस अनूप कुमार ढांड ने इसे बलात्कार के प्रयास का अपराध नहीं माना है।

राजस्थान हाई कोर्ट के जस्टिस अनूप कुमार ढांड की एकल पीठ ने इस बात पर जोर दिया कि ‘प्रयास’ क्या होता है और बलात्कार करने के प्रयास और महिला के शील भंग करने के लिए हमला करने के बीच अंतर क्या है। उन्होंने कहा कि बलात्कार के प्रयास के लिए आरोपित को तैयारी के चरण से आगे जाना होगा।

अपने वक्तव्य में जस्टिस ढाड ने कहा कि ‘बलात्कार के प्रयास’ के अपराध के लिए तीन चरणों को पूरा करने की आवश्यकता है- सबसे पहले अपराध करने का इरादा होना चाहिए, दूसरा उस अपराध को करने की दिशा में कार्य करना और तीसरा यह कृत्य अपराध की परिणति के काफी करीब होना चाहिए। न्यायालय ने कहा कि तैयारी के चरण को पार करने वाला चरण IPC की धारा 354 तक अभद्र हमला है।

अदालत ने कहा, “अपराधी होने के लिए ऐसे खुले कृत्य या कदम को अपराध करने की दिशा में अंतिम कार्य होना जरूरी नहीं है। यह पर्याप्त है कि यदि ऐसा कृत्य जानबूझकर किए गए हों और अपराध करने के लिए स्पष्ट इरादा प्रकट करते हों, जो अपराध की परिणति के काफी करीब हो।” इस मामले में ऐसा कोई आरोप नहीं है कि आरोपित ने (निजी अंग में) प्रवेश करने का प्रयास किया।

रिपोर्ट के मुताबिक, इस मामले में अदालत ने सिट्टू बनाम राजस्थान राज्य के मामले का हवाला दिया। इस मामले में लड़की को जबरन नग्न किया गया था और आरोपित ने लड़की के विरोध के बावजूद उसके साथ यौन संबंध बनाने का प्रयास किया था। इस कृत्य को तैयारी के चरण को पार करने के रूप में देखा गया और इसे बलात्कार करने के प्रयास के बराबर माना गया था।

इसी तरह, दामोदर बेहरा बनाम उड़ीसा राज्य के मामले में आरोपित ने पीड़िता की साड़ी उतार दी थी, लेकिन कुछ लोगों को देखकर वह भाग गया। इस कृत्य को बलात्कार करने के प्रयास के चरण तक पहुँचने के रूप में नहीं देखा गया। इसे भी भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 354 के तहत शीलभंग के लिए हमला करने के अपराध के रूप में देखा गया था।

दरअसल 6 वर्षीय पीड़िता ने कहा था कि आरोपित सुवालाल ने उसके और अपने दोनों के कपड़े उतार दिए थे और जब उसने शोर मचाया तो आरोपित घटनास्थल से भाग गया था। उस समय 25 साल के रहे सुवालाल को टोंक की अदालत ने 1991 में रेप के प्रयास का दोषी ठहराया था। वह दोषसिद्धि से पहले और बाद में सिर्फ ढाई महीने ही जेल में रहा था।

निचली अदालत ने उसे 3 साल 6 महीने की कठोर कारावास की सजा सुनाई थी। इसके हाई कोर्ट ने उसकी दोष सिद्धि और सजा को संशोधित कर दिया। ऐसा करते हुए हाई कोर्ट ने कहा, “यह घटना 09.03.1991 को हुई थी और लगभग 33 वर्ष बीत चुके हैं। यह अवधि किसी को भी मानसिक, शारीरिक और आर्थिक रूप से थका देने के लिए पर्याप्त है।”

पीएम मोदी के शपथ ग्रहण का जश्न मना रहे BJP कार्यकर्ताओं पर मुस्लिम भीड़ का चाकुओं से हमला: कर्नाटक में 3 घायल, 1 की हालत गंभीर

मुस्लिमों के मन में पीएम मोदी और बीजेपी को लेकर कितना जहर भरा है, इसका अंदाजा कर्नाटक के मेंगलुरु की घटना से लगाया जा सकता है, जहाँ मुस्लिमों द्वारा पीएम मोदी के तीसरी बार प्रधानमंत्री बनने के बाद शपथ ग्रहण का जश्न मनाने पर बीजेपी कार्यकर्ताओं को घेरकर मारा गया। उन्हें चाकुओं से गोदा गया। बाकायदा 2 दर्जन से अधिक मुस्लिमों ने बीजेपी कार्यकर्ताओं को मोटरसाइकिलों से पीछा कर रोका और हमला किया। इस हमले में तीन बीजेपी कार्यकर्ता बुरी तरह से घायल हो गए हैं, जिसमें से एक की हालत गंभीर बताई जा रही है।

ये मामला रविवार (9 जून 2024) का है, जहाँ बेंगलुरु के बोलियारू गाँव में 3 बीजेपी कार्यकर्ताओं को 2 दर्जन से अधिक मुस्लिमों ने बेरहमी से चाकुओं से गोद दिया, क्योंकि वो मोदी सरकार की वापसी का जश्न मना रहे थे। मुस्लिमों की हिंसा का निशाना बनने वाले बीजेपी कार्यकर्ताओं के नाम हरीश अंचन (41 वर्ष) और नंदकुमार (24 वर्ष) है। इसके अलावा कृष्ण कुमार नाम का बीजेपी कार्यकर्ता भी इस हमले में घायल हो गया।

ऑपइंडिया को मिली एक्सक्लूसिव जानकारी के अनुसार, मुदिपु गाँव और पास के बोलियारु गाँव में बीजेपी कार्यकर्ता केंद्र में तीसरी बार एनडीए की सरकार बनने का जश्न मना रहे थे। उन्होंने सड़कों पर रैलियाँ भी निकाली और नारेबाजी की थी, लेकिन जैसे ही ये रैली बोलियार गाँव की मस्जिद के सामने से गुजरी, तुरंत ही स्थानीय मुस्लिमों ने बाइकों से बीजेपी कार्यकर्ताओं का पीछा करना शुरू कर दिया। उन्होंने समाधान रेस्टो-बार के सामने बीजेपी कार्यकर्ताओं को रोक लिया। उन्होंने पीएम मोदी और लोकसभा चुनाव में जीते बृजेश चौटा के पक्ष में नारेबाजी से मना करते हुए बीजेपी के नारों को बंद करने के लिए कहा और बीजेपी कार्यकर्ताओं के साथ झगड़ा शुरू कर दिया।

मामूली कहासुनी के तुरंत बाद ही 25-30 मुस्लिमों की भीड़ ने हमला कर दिया। इस दौरान स्थानीय लोगों ने बीच-बचाव की भी कोशिश की, लेकिन मुस्लिम पक्ष ने चाकुओं से हमला कर दिया, जिसमें हरीश और नंदकुमार बुरी तरह से घायल हो गए। इसी हमले में कृष्ण कुमार नाम के बीजेपी कार्यकर्ता को भी काफी चोटें आई, जिसने पुलिस में एफआईआर दर्ज कराई।

ऑपइंडिया को मिली जानकारी के मुताबिक, मुस्लिमों ने बीजेपी कार्यकर्ताओं द्वारा पहने गए भगवा दुपट्टे और कपड़े भी फाड़ दिए। मुस्लिमों के हमले में घायल हुए बीजेपी कार्यकर्ताओं को डेरालकट्टे क्षेत्र के केएस हेगड़े अस्पताल में भर्ती कराया गया है। घायल बीजेपी कार्यकर्ताओं में से एक की हालत गंभीर बताई जा रही है, जबकि अन्य का इलाज चल रहा है।

मंगलुरु पुलिस ने मुस्लिमों के इस हमले में घायल बीजेपी कार्यकर्ता कृष्ण कुमार की शिकायत के आधार पर एफआईआर दर्ज कर जाँच शुरू कर दी है। पुलिस घटनास्थल और आसपास के सीसीटीवी कैमरों की की भी जाँच कर रही है, साथ ही मुदिपु गाँव और बोलियारू गाँव में हिंसा को और बढ़ने से रोकने के लिए सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है। ऑपइंडिया की टीम ने मौके पर मौजूद कुछ बीजेपी कार्यकर्ताओं से बात की जिन्होंने घटना की निंदा की। उन्होंने बीजेपी कार्यकर्ताओं पर हमला करने वाले मुस्लिमों के खिलाफ सख्त सजा की माँग की।

ऑपइंडिया ने इस मामले में अपडेट के लिए मंगलुरु पुलिस से भी संपर्क किया है। हालाँकि अभी तक कोई अपडेट नहीं मिल पाई है। जैसे ही कोई अपडेट मिलता है, खबर को उसी तरह से अपडेट किया जाएगा। फिलहाल पुलिस ने एफआईआर में 4 नामजदों कों शामिल किया है और कुछ अन्य की भी पहचान कर ली है। इस मामले में अभी तक कोई गिरफ्तारी नहीं की गई है।

ऑपइंडिया के पास FIR की एक्सक्लूसिव जानकारी

FIR की कॉपी में हमलावरों के नाम

ऑपइंडिया के पास इस मामले में दर्ज की गई एफआईआर मौजूद है। इस केस में बशीर, सिद्दीक, मोनू, अबूबकर और 20 अन्य अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। मुस्लिम भीड़ ने हमला करने से पहले कार्यकर्ताओं को गाली दी और धमकाया। उन्होंने कथित तौर पर बीजेपी कार्यकर्ताओं को धमकाते हुए कहा, “तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई मोदी का समर्थन करने की?, हम तुम सबको जान से मार देंगे।” फिलहाल पुलिस ने सभी के खिलाफ आईपीसी की धारा 341, 143, 147, 148, 504, 506, 323, 324, 307, 149 के तहत केस दर्ज कर लिया है।

हिंदुओं को जब इस्लामी आतंकियों ने मारा तो इंस्टाग्राम ने ब्लॉक किया #AllEyesOnReasi हैशटैग, राफा पर 2 लाख पोस्ट अब भी विजिबल

जम्मू-कश्मीर के रियासी में हुए आतंकी हमले में 10 हिंदू श्रद्धालुओं ने अपनी जान गँवा दी है लेकिन अभी तक किसी भी ‘All Eyes On Rafah’ वाली गैंग ने आतंकी हमले पर कुछ नहीं बोला है। इस घटना ने जहाँ इस गिरोह का दोहरा चेहरा उजागर किया है,वहीं मेटा के इंस्टाग्राम प्लेटफॉर्म पर हिंदुओं की आवाज दबाने वाले रवैये को भी जगजाहिर किया है। इंस्टा ने अपने प्लेटफॉर्म पर #Alleyesonreasi को ही ब्लॉक कर दिया है।

जी हाँ, अगर आप अपने इंस्टाग्राम से इस हैशटैग के साथ पोस्ट डालेंगे और सोचेंगे कि ये ट्रेंड पकड़ेगा तो ऐसा नहीं होने वाला, क्योंकि इंस्टा ने इस हैशटैग को हाइड किया हुआ है। यानी आप अपने पोस्ट में ##Alleyesonreasi डाल सकते हैं लेकिन जैसे ही इस पर क्लिक करके आप बाकी अन्य पोस्टों को देखेंगे तो आपको कुछ नहीं दिखेगा।

उदाहरण के लिए ऊपर लगाई तस्वी देख सकते हैं। राजस्थान कोठा ने पोस्ट में ये हैशटैग लगाया है, लेकिन जब हमने इनके हैशटैग पर क्लिक किया तो लिखा आया कि ये हैशटैग हिडन हैं। वहीं अब अगर यही चीज हम राफाह वाले हैशटैग के लिए देखें तो पाएँगे कि वो हैशटैग भी एक्टिव है और उसपर डाले गए पोस्ट भी साफ दिख रहे हैं। करीबन 295481 पोस्ट इस पर किए गए हैं।

कई इंस्टाग्राम यूजर जो रियासी पर इस हैशटैग को डाल रहे थे, उन्होंने इस समस्या को अपनी टाइमलाइन पर उठाया है। जैसे मधुर सिंह लिखते हैं- “ये इकोसिस्टम इतना ताकतवर है कि इन्होंने #Alleyesonreasi को ही ब्लॉक करवा दिया है। देख सकते हैं कि सर्च सेक्शन में मधुर ने भी हैशटैग डाला है लेकिन दिखाई कुछ नहीं दे रहा। सिर्फ स्क्रीन पर लिखा है- ये हैशटैग हिडन है।”

इस पोस्ट को देखने के बाद अब लोग कह रहे हैं कि आईटी मंत्रालय को इस मामले में एक्शन लेना चाहिए। वहीं कुछ लोग हैरान है कि ये इकोसिस्टम हिंदुओं से कितनी घृणा करते हैं कि 10 लोगों की मौत होने के बावजूद ये नहीं चाहते ये आतंकी हमले की जानकारी दुनिया के सामने आए।

अफवाहें सही थीं… बॉलीवुड अभिनेत्री सोनाक्षी सिन्हा करेंगी जहीर इकबाल से निकाह: रिपोर्ट्स में दावा, लोगों ने पूछा- धर्म भी बदल लोगी?

बॉलीवुड अभिनेत्री सोनाक्षी सिन्हा को लेकर खबर है कि वो जल्द ही अपने ब्वॉयफ्रेंड जहीर इकबाल से निकाह करने वाली हैं। ये खबर पूरे मीडिया में चर्चा में है, हालाँकि सोनाक्षी ने अभी इस पर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है।

रिपोर्ट्स में कहा जा रहा है कि 37 वर्षीय सोनाक्षी सिन्हा अपने परिवार और करीबी दोस्तों की मौजूदगी में जहीर से निकाह करेंगी। इंडिया टुडे की रिपोर्ट बताती है कि सोनाक्षी और जहीर 23 जून को निकाह करेंगे।

इस दौरान कार्यक्रम में सिर्फ इनके परिवार वाले और कुछ करीबी दोस्त शामिल होंगे। शादी को लेकर पहले ही इनवाइट कार्ड जा चुके हैं। कहा जा रहा है इनवाइट कार्ड मैग्जीन कवर जैसा है जिसपर लिखा है- अफवाहें सही थीं।

इसके अलावा ये जानकारी भी सामने आई है कि कार्यक्रम मुंबई के ही रेस्टोरेंट में होगा। कार्यक्रम में हीरामंडी की पूरी कास्ट भी आएगी। मेहमानों को फॉर्मल कपड़े पहनकर आने को कहा गया है।

बता दें कि जहीर इकबाल और सोनाक्षी सिन्हा काफी लंबे समय से एक दूसरे के साथ रिश्ते में थे, लेकिन कभी ऑफिशियली अनॉउंस नहीं करते थे। उनकी फोटोज देख लोग अपने आप अंदाजा लगाते थे कि शायद दोनों में दोस्ती से ज्यादा कुछ है। जहीर के अकॉउंट पर डली तस्वीरों को देख तो लोग और भी ज्यादा कयास लगाते थे। उनकी कई फोटोज में सोनाक्षी उनके साथ दिखती हैं।

गौरतलब है कि सोनाक्षी सिन्हा की शादी की बातें सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर अलग से चर्चा होती रही है। लोग उनसे पूछते रहे हैं कि अपना धर्म छोड़कर दूसरे मजहब के व्यक्ति से शादी यदि सोनाक्षी करना चाहती हैं तो क्या वो निकाह के बाद अपना धर्म भी बदलेंगी।

हिंदू थे इसलिए मारे गए… साँस रोक, लाश बन कर जिन्होंने बचाई अपनी जान, सुनिए उनकी आँखों-देखी: लश्कर-ए-तैयबा ने किया था हमला

जम्मू-कश्मीर के रियासी में शिवखोड़ी से कटरा लौट रहे तीर्थयात्रियों की बस पर आतंकी हमला हुआ। घटना में एक बच्चे समेत 10 लोगों की मौत हो गई जबकि 30 से ज्यादा लोग घायल हैं। पाकिस्तान के लश्कर-ए-तैयबा आतंकी संगठन ने इस हमले की जिम्मेदारी ली है। आतंकियों ने बस के ऊपर चारों ओर से गोलियाँ चलाईं और जब तक बस खाई में नहीं गिरी तब तक ये ताबड़तोड़ गोली बरसाते रहे। सूत्रों के हवाले से आए शीर्ष अधिकारियों के बयान से पता चलता है कि जानबूझकर इस हमले को 9 जून को ही अंजाम दिया गया क्योंकि नरेंद्र मोदी लगातार तीसरी बार प्रधानमंत्री पद की शपथ ले रहे थे।

अब इस आतंकी हमले के संबंध में चश्मदीदों ने कुछ खुलासे किए हैं। उत्तर प्रदेश के बलरामपुर के रहने वाले संतोष कुमार वर्मा ने बताया कि वो लोग शिवखोड़ी में दर्शन के बाद वो कटरा की ओर जा रहे थे, जब बस ऊपर से नीचे उतर रही थी तभी एक आतंकवादी बीच सड़क पर फायरिंग शुरू कर दी। इस बीच ड्राइवर को एक गोली लग गई और बस अनियंत्रित होकर खाई में गिर गई। इस दौरान सामने खड़े होकर एक आतंकी ने करीबन 20 मिनट तक गोली चलाई थी। बाकी आतंकी इधर-उधर से फायरिंग कर रहे थे।

चश्मदीदों के अनुसार, आतंकी 5-6 मिनट रुकते थे और फिर से फायरिंग करनी शुरू कर देते थे। उन्होंने ऐसा तब तक किया जब तक बस गिरी नहीं। गोंडा की नीलम गुप्ता कहती है कि बस में 40 लोग थे, बच्चे भी थे। हमारे हाथ-पैर में चोट आई है। साथ में पति और ननद-नंदोई भी है। वहीं नीलम गुप्ता का बेटा पल्लव इस घटना पर कहता है- पता नहीं गोलियाँ किसने चलाई थी, लेकिन जब बस खाई में गिरी तो मेरा सिर सीट के नीचे आ गया था, डैडी ने मुझे निकाला।

तीर्थ यात्रियो के अनुसार, 6-7 आतंकियो ने उनपर हमला किया था। उनके चेहरे नकाब से ढके थे। शुरू में उन्होंने बस को खाई में गिराने के लिए गोलीबारी की। बाद में जब सब गिर गए तो वो इसलिए गोली चलाते रहे कि सारे लोग मर जाएँ। तीर्थ यात्री बताते है कि वो लोग एक दम चुप हो गए थे ताकि आतंकियों को पता न चले कि वो लोग जिंदा हैं। कुछ समय बाद स्थानियों और सुरक्षाकर्मियों ने आकर उन्हें बचाया।

इस घटना के बारे में सुनने के बाद हर कोई सिर्फ यही कह रहा है कि श्रद्धालुओं पर हमला सिर्फ इसलिए हुआ क्योंकि वो हिंदू थे। ये भी कहा जा रहा है कि जानबूझकर 9 जून को ये हमला हुआ क्योंकि इसी दन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तीसरी बार पीएम बनने की शपथ ले रहे थे।

बता दें कि घटना में मरने वाले वाले अधिकतर यूपी के रहने वाले थे। इनमें तीन महिला और एक बच्चे की भी मौत हुई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस घटना की जानकारी होने पर स्थिति का जायजा लिया और उपराज्यपाल मनोज सिन्हा को स्थिति पर लगातार निगरानी रखने के लिए कहा। वहीं केंद्रीय मंत्री अमित शाह ने कहा कि वह तीर्थ यात्रियों पर हुए हमले में शामिल आतंकियों को बख्शेंगे नहीं।