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3 बेटी है, बेटा हो नहीं रहा… बाजार से 9 महीने का बच्चा चुरा लाई राहत जहाँ, अम्मी रोशन जहाँ ने भी दिया साथ: 600+ CCTV की जाँच कर पुलिस ने दबोचा

उत्तर प्रदेश के कानपुर में दो महिलाओं ने एक बच्चा चोरी कर लिया। बच्चा चोरी करने वाली दोनों महिलाएँ माँ-बेटी हैं। बच्चा चुराने के पीछे बेटे की चाहत का मामला सामने आया है। पुलिस बच्चे को सकुशल बरामद कर असली अभिभावकों को सौंप दिया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कानपुर की राहत जहाँ के तीन बेटियाँ हैं। उसे एक बेटे की इच्छा थी। बेटा ना होने के कारण उसने लड़का गोद लेने की कोशिश की जिसमें वह सफल नहीं हुई। इसके बाद उसने अपनी माँ रोशन जहाँ को इस विषय में बताया। दोनों ने इसके बाद चोरी की योजना बनाई।

दोनों ने कानपुर के बेकनगंज बाजार में अपने 9 महीने के बच्चे को लेकर घूम रहीं दो छोटी बच्चियों को निशाना बनाया। महिलाओं ने बच्चियों को झाँसे में लेकर उनसे बच्चा चोरी करने की योजना बनाई। महिलाओं ने पहले बच्चियों को गोलगप्पे खिलाए और जब उन्हें इससे तीखा लगा तो पैसे देकर लस्सी पीने भेज दिया।

महिलाओं ने बच्चियों से बच्चे को ले लिया। इसके बाद जब बच्चियाँ वहाँ से चली गईं तो दोनों वहाँ से रफूचक्कर हो गईं। इसके बाद बच्चियों ने अपने घर में यह बात बताई। जिस बच्चे की चोरी हुई, उसके अभिभावकों ने पुलिस के पास इस मामले की धिकय्त दर्ज करवाई।

पुलिस इसके बाद बच्चे की तलाश में जुट गई। पुलिस ने इसके लिए आठ टीमों को काम पर लगाया। इसके बाद उस इलाके के लगभग 600 CCTV की जाँच की गई। CCTV की मदद से पुलिस ने महिलाओं की पहचान की और उनके पते तक पहुँची। पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार कर लिया।

पुलिस की जाँच में यह सामने आया है कि राहत जहाँ ने घर ले जाकर अपने पति से यह बताया कि वह यह बच्चा खरीद कर लाई है। पति ने इस विषय में तफ्तीश नहीं की। वहीं दोनों महिलाओं ने कार्रवाई के डर से अब बताया है कि उन्हें यह बच्चा सड़क पर मिला, जिसे वह उठा लाईं।

18 साल के लड़के को अगवा किया, टॉयलेट साफ कराया, मुँह पर किया पेशाब: इंस्टाग्राम पर Video शेयर करने की फिटनेस ‘इन्फ्लुएंसर’ ने दी ‘सजा’, अहमदाबाद पुलिस ने किया गिरफ्तार

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर फिटनेस ‘इन्फ्लुएंसर’ का टैग रखने वाले रजत दलाल को अहमदाबाद पुलिस ने गिरफ्तार किया है। उस पर 18 साल के लड़के पर मारपीट, अगवा करने और उसके मुँह पर पेशाब करने का आरोप है। लड़के ने कथित तौर पर रजत दलाल का एक वीडियो शेयर किया था, जिसके बाद रजत ने उसे अगवा कर क्रूरता की।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, पीड़ित एक कॉलेज स्टूडेंट है। उसे रजत दलाल और उसके साथियों ने अगवा कर लिया। टॉयलेट साफ कराया और क्रूरता बरती। उसके मुँह पर गोबर भी डाला गया। यही नहीं, रजत दलाल ने पीड़ित युवक को मारने-पीटाने के साथ ही उसके चेहरे पर पेशाब भी किया। इसके बाद पीड़ित को उसके घर के सामने छोड़ते हुए उसकी माँ को भी धमकाया कि हमारा कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता, हम ‘हरियाणा’ के जाट हैं। इस मामले में पीड़ित और उसकी माँ ने पुलिस से शिकायत की, जिसके बाद पुलिस ने रजत दलाल और उसके साथियों को गिरफ्तार कर लिया।

रजत दलाल की गिरफ्तारी के बाद एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ, जिसमें युवक ने रजत का जिम के अंदर का वीडियो शेयर किया। उस पर उसका कैप्शन भी लिखा है, ‘रोज सुबह अपना मुँह जिम में दिखाकर मेरा दिन खराब करता है।’ इसके बाद इस वीडियो में आगे दिख रहा है, जिसमें रजत दलाल और उसके दोस्त युवक को कार में पीटते दिख रहे हैं और रजत दलाल को ‘पापा’ कहने के लिए मजबूर कर रहे हैं, साथ ही वीडियो शेयर करने के लिए माफी भी मँगवा रहे हैं।

रजत दलाल के इंस्टाग्राम पर 1 मिलियन फॉलोवर हैं। वो अपने फिटनेस वीडियो के लिए जाना जाता है और सोशल मीडिया पर अक्सर उसके वीडियो शेयर किए जाते हैं।

रजत दलाल का इंस्टाग्राम हैंडल

बताया जा रहा है कि रजत का वीडियो जिस युवक ने शेयर किया था, वो वीडियो वायरल होने के बाद रजत ने युवक को सोसायटी के बाहर बुलाया और अपने दोस्तों के साथ उसे अगवा कर लिया। रजत दलाल और उसके साथियों ने लड़के को गालियाँ दी और पूछा कि ‘तेरी हिम्मत कैसे हुई मेरा वीडियो बनाने की। मैं तुझे टुकड़े-टुकड़े कर दूँगा, तुझे छोड़ने वाला नहीं हूँ।’

इसके बाद रजत दलाल और उसके साथी युवक को जगतपुर स्थित ग्रीन गैल्स सोसायटी के एक फ्लैट में ले गए और उसके पीटते हुए फ्लैट का टॉयलेट साफ कराया। लड़का जब पिटाई की वजह से बेहोश हो गया, तो रजत दलाल ने उसके चेहरे पर पेशाब कर दिया। जब लड़का होथ में आया, तो रजत ने उसके उसकी माँ के पास छोड़ दिया और दोनों को धमकाया।

रजत दलाल ने कथित तौर पर उसकी माँ से कहा, ‘मैं इस लड़के को जान से भी मार सकता था, लेकिन ये बहुत छोटा है, तो इसे छोड़ रहा हूँ। मैं हरियाणा का जाट हूँ। यहाँ मेरे बड़े लोगों से कनेक्शन हैं। पुलिस मेरा कुछ नहीं बिगाड़ पाएगी, वो मेरी जेब में है।’ इस घटनाक्रम के बाद पीड़ित और उसकी माँ ने अहमदाबाद के साबरमती पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद पुलिस ने मामले की जाँच शुरू करते हुए रजत दलाल और उसके तीन साथियों को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने इस मामले में अपहरण और मारपीट का मामला दर्ज किया है।

इमरान मसूद के जीतते ही समर्थकों ने दिखाया ‘रंग’, 150+ बाइक पर सवार हो सहारनपुर की सड़कों पर किया हुड़दंग: महिलाओं को किए अश्लील इशारे, Video वायरल

उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में कॉन्ग्रेस के नवनिर्वाचित लोकसभा सांसद इमरान मसूद की जीत के बाद उनके समर्थकों ने सड़कों पर जमकर हुड़दंग किया और महिलाओं से अश्लील इशारे किए। इसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वीडियो में दिख रहा है कि सैकड़ों बाइक पर सवार उनके हुड़दंगी समर्थक हंगामा कर रहे हैं। एक-एक बाइक पर चार-चार हुड़दंगी बैठे और खड़े थे। इसमें चारपहिया वाहन पर शामिल थे।

वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर हंगामा मच गया और पश्चिमी यूपी में एक बार फिर अराजकता को लेकर लोग चिंता जाहिर करने लगे। फिलहाल, पुलिस ने इस वीडियो का संज्ञान लिया है और 5 नामजद सहित 50 अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है। हुड़दंग करने वाले लोगों की पहचान करने की भी कोशिश की जा रही है। जागरण के अनुसार, रैली में 150 बाइक शामिल थी।

कहा जा रहा है कि बाइकों पर सवार हुड़दंगियों का काफिला कुतुबशेर थाने के सामने हूटिंग करते हुए और महिलाओं को अश्लील इशारे करते हुए निकला। इस दौरान पुलिस विवश नजर आती रही। सहारनपुर शहर के ही रहने वाले एक व्यक्ति ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करके कार्रवाई की माँग की है। इसके बाद यह वीडियो वायरल हो गया है।

दरअसल, पश्चिमी उत्तर प्रदेश के सहारनपुर लोकसभा सीट से कॉन्ग्रेस-समाजवादी पार्टी गठबंधन ने इमरान मसूद को मैदान उतारा था। उन्हें इस लोकसभा चुनाव में भारी जीत मिली है। इमरान मसूद को 5,47,967 वोट मिले हैं। वहीं, उनके निकटतम प्रतिद्वंदी बीजेपी के राघव लखनपाल शर्मा को 4,83,425 वोट मिले। इस तरह इमरान मसूद ने 64,542 वोटों से जीत हासिल की है।

इसी जीत को लेकर उनके समर्थक हुड़दंग मचा रहे थे। बाइक रैली में एक-एक बाइक पर चार-चार, पाँच-पाँच लोग बैठे थे। कुछ बाइकों पर तो दो लोग बैठे दिखे और दो लोग खड़े दिखे। इस दौरान लोगों ने जमकर नारे लगाए और हंगामा किया। कुछ समर्थकों के सिर पर नमाजी टोपी भी दिखी। रैली के दौरान जाम की स्थिति बन गई। इसी दौरान किसी राहगीर ने इसकी वीडियो बनाकर वायरल कर दिया।

बताया जा रहा है कि वायरल वीडियो 4 जून 2024 की रात का है। वीडियो अंबाला रोड के पास की है। अंबाला रोड कुतुबशेर थाने के पास का है। इस मामले में सहारनपुर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक विपिन टाडा ने कहा कि वायरल वीडियो का संज्ञान लेते हुए 50 अज्ञात लोगों और 5 नामजद के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। उन्होंने कहा कि चुनाव के नतीजे के बाद कुछ युवक हंगामा कर रहे थे।

वन नेशन वन इलेक्शन पर साथ, समान नागरिक संहिता में नहीं बनेगी बाधा, पर अग्निवीर में चाहिए बदलाव: NDA सरकार बनने से पहले सामने आया JDU का एजेंडा

NDA सरकार के शपथ ग्रहण से पहले ही घटक दलों ने अपनी अपनी माँगे आगे रखना चालू कर दी हैं। NDA के घटक दल JDU ने माँग की है कि मोदी सरकार द्वारा लाई गई सेना भर्ती की अग्निवीर योजना पर दोबारा से विचार हो। JDU ने समान नागरिक संहिता (UCC) को लेकर भी बदलावों की माँग की है। कई मुद्दों पर JDU ने BJP की नीतियों का समर्थन किया है।

JDU प्रवक्ता केसी त्यागी ने NDA सरकार के गठन से पहले एक बयान में कई मुद्दों पर पार्टी का स्टैंड साफ किया है। केसी त्यागी ने मीडिया से कहा, “अग्निवीर योजना को लेकर के मतदाताओं में नाराजगी रही है, हमारी पार्टी चाहती है विस्तार से इन कमियों को दूर किया जाए। UCC पर JDU अध्यक्ष नीतीश कुमार पत्र लिख चुके हैं, इसमें जितनी कमियाँ हैं, उनको पहचान कर इस पर काम किया जाना चाहिए।”

जहाँ एक ओर JDU ने अग्निवीर योजना और UCC को लेकर फिर से विचार और इसकी कमियों को दूर किए जाने की बात कही है तो वहीं उसने एक देश एक चुनाव (ONOP) जैसे मुद्दों पर सहमति जताई है। JDU ने UCC को लेकर समर्थन की बात कही लेकिन वह इस मामले में सभी भागीदारों से बातचीत चाहती है।

JDU, सत्ताधारी NDA का हिस्सा है और उसने 2024 लोकसभा चुनाव 12 सीटें बिहार में जीती हैं। वह NDA की गठबंधन सरकार का महत्वपूर्ण हिस्सा है, 240 सीटों वाली भाजपा के लिए उसका समर्थन बहुमत में काफी आवश्यक है। कयास हैं कि सरकार के गठन के बाद अग्निवीर योजना पर जेडीयू दोबारा विचार को लेकर बातचीत करेगी।

UCC के मुद्दे पर अभी बातचीत में समय लगने के कयास हैं क्योंकि सरकार ने इसको देश में लागू करने को लेकर कोई समयसीमा नहीं बताई है। ऐसे में इसको लेकर सरकार क्या कदम उठाती है, यह देखने वाली बात होगी। JDU ने अभी बाकी मुद्दों पर अपने पत्ते नहीं खोले हैं।

गौरतलब है कि लोकसभा चुनाव 2024 में NDA गठबंधन को स्पष्ट बहुमत मिला है। उसे देश में 290 से अधिक सीटें मिली हैं। बुधवार (5 जून, 2024) को प्रधानमंत्री आवास पर हुई बैठक में NDA के घटक दलों ने पीएम मोदी को तीसरी बार प्रधानमंत्री बनाने के लिए समर्थन दिया है। संभावना जताई जा रही है कि देश में 10 जून, 2024 से पहले नई सरकार का गठन हो जाएगा।

सहेली ने इरफान से कराई दोस्ती और अजमेर की बेटी की जिंदगी हो गई जहन्नुम: गैंगरेप का वो केस जिसके ‘जिहादी मिशन’ से जुड़े होने की आशंका, अब तक 7 गिरफ्तार

अजमेर में पिछले दिनों 11वीं क्लास की लड़की के साथ हुए गैंगरेप के मामले में अब तक 7 लोग गिरफ्तार हो चुके है। इसमें तीन को पुलिस ने शिकायत दर्ज होने के तुरंत बाद गिरफ्तार किया था। वहीं 4 की गिरफ्तारी 17 पुलिसकर्मियों की एसआईटी टीम गठित होने के बाद हुई थी। इनमें एक नाबालिग है। बाकी का नाम इरफान, अरबाज, असलम, रज्जाक, मुबारक खान और इमरान खान है।

बता दें कि ये मामला अजमेर के क्रिश्चियनगंज थाना का था। एक 11वीं क्लास की लड़की के पिता की शिकायत पर पता चला था कि इंस्टाग्राम के जरिए इरफान ने लड़की को फँसाया और फिर उसका गैंगरेप करके, उसकी वीडियो बनकर उसे ब्लैकमेल करते हुए लाखों रुपए लूटे। पिता ने ये भी बताया था कि उनकी बेटी को उसकी एक सहेली ने इरफान से दोस्ती करने का दबाव बनाया था। उसी के बाद वो इस पूरे जाल में फँसी।

अब पुलिस द्वारा आरोपितों की गिरफ्तारी के बाद खुलासा हुआ है कि सारे आरोपित मिलकर गैंग चला रहे थे। इनका टारगेट एक समुदाय की लड़कियाँ थीं।। एसपी देवेंद्र कुमार बिश्नोई ने भी कहा है कि अब तक की जाँच में संगठित गिरोह की लिप्तता सामने आई है। इनके जेहादी मिशन की तफ्तीश चल रही है। ये गिरोह कई लड़कियों के संपर्क में थे। इनके फोन से अश्लील कमेंट्स, रील्स और अश्लील वीडियो एक दूसरे को भेजने के सबूत मिले हैं। ये भी सामने आया है कि यये आरोपित एक दूसरे के रिश्तेदार हैं।

पुलिस ने ये भी बताया है कि आरोपितों को पोर्न देखने की और नशा करने की आदत थी। पुलिस इनसे इनके नेटवर्क के बारे में पूछताछ कर रही है। वहीं प्रशासन ने कहा है कि गैंगरेप के आरोपितों की संपत्ति पर बुलडोजर चलाने से परहेज नहीं किया जाएगा। अभी जाँच हो रही है।

आरोपितों ने अपने मोबाइल से डेटा को गायब कर दिया है, पुलिस डेट रिकवर करने की कोशिस कर रही। वहीं छानबीन और पुलिस पूछताछ से ये साफ हो गया है कि ये लोग इंस्टाग्राम के जरिए लड़कियों को फँसाते थे और फिर उन्हें अपने जाल में फँसाकर उनका यौन शोषण करते थे। बाद में उनके पैसे ऐंठते थे। छानबीन से ये भी पता चला है कि ये सारे आरोप कई लड़कियों के संपर्क में थे। इसके अलावा ब्लैकमेल कांड के ये भी सामने आया है कि आरोपितों में कॉन्ग्रेस के पूर्व पार्षद के नाते-रिश्तेदार और गाँव निवासी भी शामिल हैं।

गैंगरेप की घटना सामने आने बाद इस मामले में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। भाजपा के जिला अध्यक्ष रमेश सोनी ने भी इस मामले में गहनता से जाँच की माँग की है। उन्होंने आशंका जताई है कि ये अजमेर 1992 जैसा कांड को दोहराने का प्रयास हो सकता है। मामले में विधानसभा स्पीकर वासुदेव देवनानी ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने साफ कहा कि अजमेर में ब्लैकमेल कांड की पुनरावृत्ति होने नहीं दी जाएगी। आरोपित चाहे कितने भी प्रभावशाली हों, उन्हें बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने अभिभावकों को कहा है कि बच्चों का खास ध्यान रखें।

अजमेर 1992 कांड

उल्लेखनीय है कि 3 दिन पहले ये मामला मीडिया में आया था। उसके बाद से अंदाजा लग रहा था कि कहीं 1992 की तरह ये कोई स्कैंडल तो नहीं। बता दें कि 1992 में 100 से ज्यादा लड़कियों को फँसाकर उनके साथ रेप किया गया था। फारुक चिश्ती, नफीस चिश्ती और अनवर चिश्ती- इस कांड के मुख्य आरोपित थे। तीनों ही यूथ कॉन्ग्रेस के लीडर थे। फारूक उस समय इंडियन यूथ कॉन्ग्रेस की अजमेर यूनिट का अध्यक्ष था। नफीस चिश्ती कॉन्ग्रेस की अजमेर यूनिट का उपाध्यक्ष था। अनवर चिश्ती अजमेर में पार्टी का ज्वाइंट सेक्रेटरी था। साथ ही तीनों अजमेर के ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह के खादिम भी थे।

बताया जाता है कि आरोपितों ने सबसे पहले एक बिजनेसमैन के बेटे के साथ कुकर्म कर उसकी अश्लील तस्वीर उतारी और उसे अपनी गर्लफ्रेंड को लाने के लिए मजबूर किया। उसकी गर्लफ्रेंड से रेप के बाद उसकी अश्लील तस्वीरें निकाल ली और लड़की को अपनी सहेलियों को लाने के लिए कहा गया। फिर यह सिलसिला ही चल पड़ा। एक के बाद एक लड़की के साथ रेप करना, न्यूड तस्वीरें लेना, ब्लैकमेल कर उसकी भी बहन/ सहेलियों को लाने के लिए कहना और उन लड़कियों के साथ भी यही घृणित कृत्य करना- इस चेन सिस्टम में 100 से ज्यादा लड़कियों के साथ भी शर्मनाक कृत्य किया।

राम की अयोध्या वाली सीट कैसे हार गई BJP? वो सवाल जो पूरा देश पूछ रहा, 6 बिंदुओं में छिपा है उसका जवाब: जानिए अवधेश प्रसाद से क्यों लल्लू सिंह को मिली पटखनी

लोकसभा चुनाव 2024 का परिणाम आ चुका है। देश भर में कई जगह मतदाताओं ने चौंकाने वाले परिणाम दिए हैं। इनमे से सबसे अधिक चौंकाने वाला परिणाम उत्तर प्रदेश के अयोध्या (फैजाबाद) से आया है। यहाँ भाजपा हार गई है। यहाँ भाजपा सांसद लल्लू सिंह को सपा प्रत्याशी अवधेश प्रसाद ने हरा दिया है। अवधेश प्रसाद ने लल्लू सिंह को 54,567 वोटों से शिकस्त दी है। यह सीट सपा 1998 के बाद पहली बार जीती है।

लोगों का कहना है कि भाजपा वह सीट हारी है जहाँ भव्य राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा हुई है, वहाँ ऐसा कैसे हो सकता है। राम मंदिर को लेकर संघर्ष करने वाली पार्टी का अयोध्या से ही हार जाना लोगों को अचरज में डाल रहा है। 4 जून, 2024 को परिणाम आने के बाद देश भर में यह सीट चर्चा का बिंदु बनी हुई है। इस मुद्दे पर आम जनता से लेकर राजनीतिक पंडित तक लगातार चर्चा कर रहे हैं, वह यह पता लगाने का प्रयास कर रहे हैं कि आखिर क्यों भाजपा अयोध्या सीट हारी।

चुनाव के परिणामों के बाद मीडिया ने इस मामले पर अपने हिसाब से कई निष्कर्ष दिए हैं। मीडिया ने अयोध्या में भाजपा की इस हार के एक से अधिक कारण बताए हैं। इसमें कार्यकर्ताओं की नाराजगी से लेकर सांसद रहते लल्लू सिंह का जमीन पर ना जाना और भाजपा के दलित वोट खिसकना आदि शामिल है। जमीन अधिग्रहण से जुड़े मुद्दे भी अहम् बताए गए हैं।

कार्यकर्ताओं की उपेक्षा और सांसद से नाराजगी

मीडिया रिपोर्ट्स ने बताया है कि अयोध्या जिले में भाजपा के सामान्य कार्यकर्ताओं की उपेक्षा की गई। मंदिर बनने के बाद VIP जिला होने से यहाँ बड़े नेताओं की ही चली और स्थानीय कार्यकर्ताओं का फीडबैक ऊपर तक नहीं पहुँचा। इसी कारण से कार्यकर्ताओं का एक बड़ा वर्ग उदासीन हो गया और नाराज रहा, जिससे नुकसान हुआ।

इसके अलावा 2014 से लगातार सांसद रहे लल्लू सिंह का जमीन पर ना उतरना भी मुद्दा बताया गया, इससे उनकी जनता में छवि को धक्का लगा। लल्लू सिंह ने नाराजगी के अलावा जो भी वोट भाजपा को मिले वह पीएम मोदी की लोकप्रियता और राम मंदिर के मुद्दे पर ही पड़े।

सपा का दलित प्रत्याशी उतारना+ मुस्लिम वोट

सपा ने इस सीट से दलित प्रत्याशी उतारा। सपा प्रत्याशी अवधेश प्रसाद 9 बार के विधायक हैं। उनको दलितों का वोट काफी बड़े स्तर पर मिला। भाजपा से दलित वोट का छिटकना भी एक हार का एक बड़ा कारण रहा। बताया गया कि इस लोकसभा क्षेत्र में 26% दलित वोट को सपा ने अपने प्रत्याशी के चयन से ही अपनी तरफ मिला लिया।

इसके अलावा मुस्लिम वोटर भी एकतरफा सपा की तरफ गए जिसने यहाँ उसे बढ़त दिलाई। सपा से कॉन्ग्रेस के गठबंधन के कारण मुस्लिम वोट छिटका नहीं। बड़े स्तर पर मुस्लिम वोट ने सपा को यहाँ बढ़त दिलाई, जिससे उसे जीत हासिल करने में आसानी हुई।

संविधान वाले बयान ने किया बेड़ा गर्क

भाजपा प्रत्याशी लल्लू सिंह ने चुनाव प्रचार के दौरान एक बयान में भाजपा के 400 सीट वाले नारे पर संविधान बदलने का तर्क दिया। उन्होंने कहा कि 400 सीट होंगी तो संविधान बदला जा सकेगा। इस बयान का संदेश उनके लोकसभा क्षेत्र में सही नहीं गया। दलित वोटर्स में इस कारण से उनके प्रति दुराव आया और उन्हें इस तबके के वोट नहीं मिले।

जमीन अधिग्रहण, तोड़फोड़

अयोध्या में विकास के लिए काफी जमीन अधिग्रहण किया गया। प्रशासन ने इसके लिए स्थानीय लोगों की काफी जमीन ली। मीडिया रिपोर्ट्स में दावा है कि अयोध्या में जमीन अधिग्रहण में गड़बड़ियाँ हुईं और मुआवजे का बँटवारा सही से नहीं हुआ। कई लोगों के घर तोड़े गए और उनकी सुनी नहीं गई। इस कारण से लोगों में गुस्सा रहा और उन्होंने वोट नहीं दिया।

शहरों में वोट, गाँवों पर फोकस नहीं

मीडिया रिपोर्ट्स में यह भी बताया गया कि चुनाव अभियान का पूरा फोकस मात्र शहरों की तरफ ही रहा। गाँवों के उन क्षेत्रों पर ध्यान नहीं दिया गया जिन पर मंदिर से प्रभाव पड़ा हो। यहाँ के मतदाताओं तक ढंग से भाजपा नहीं पहुँच पाई, इस कारण से ग्रामीण क्षेत्र में वोट कट गया और भाजपा हारी।

भाजपा कार्यकर्ता का बसपा में जाना भी रहा नुकसानदेह

फैजाबाद सीट पर बसपा उम्मीदवार सच्चिदानंद पांडेय को 46,407 वोट मिले। वह पूर्व में भाजपा कार्यकर्ता ही थे लेकिन किन्हीं कारणों से बसपा में चले गए। उन्होंने चुनाव भी लड़ा और भाजपा का काफी वोट काटा। इसके अलावा NOTA को भी 7536 वोट मिले जो कि यह दर्शाता है कि लोग उम्मीदवार से नाराज थे। ऐसे में भाजपा को 50,000 वोट से अधिक नुकसान यहाँ हुआ। इतने ही अंतर से वह चुनाव हारी है।

अहिल्याबाई होल्कर की जयंती पर हिंदुओं ने निकाली रैली तो मुस्लिमों ने कर दिया हमला: पथराव में कई नाबालिग और पुलिस कर्मी भी घायल, महाराष्ट्र में 16 गिरफ्तार

पिछले महीने के अंतिम तारीख यानी 31 मई को महाराष्ट्र के यवतमाल जिले के मुलावा क्षेत्र में अहिल्याबाई होल्कर जयंती पर आयोजित हिंदुओं की रैली पर मुस्लिमों की उपद्रवी भीड़ ने हमला कर दिया।बताया जा रहा है कि रैली के दौरान मुस्लिम बहुल इलाके में डीजे सिस्टम पर गाने बजाए जाने के कारण मुस्लिमों की भीड़ द्वारा यह हमला किया गया।

ऑपइंडिया को मिली शिकायत की कॉपी के अनुसार, रैली जब टीपू सुल्तान चौक पर पहुँची तो इसमें शामिल हिंदुओं पर शेख साहिल, शेख इरशाद, शेख मोहसिन, शेख गफ्फार, शेख सरवर, इलियास अहमद अब्दुल कादर, मोहम्मद नवीर अब्दुल गफ्फार, सैय्यद माजिद, सैय्यद गनी, अजीज खान, गुलाब खान सहित अन्य आरोपितों ने पथराव कर दिया।

पुलिस ने ऑपइंडिया को पुष्टि की है कि अहिल्याबाई होल्कर की जयंती पर आयोजित रैली के दौरान मुस्लिमों की उपद्रवी भीड़ ने हिंदुओं पर हमला किया। इस हमले में ड्यूटी पर मौजूद पुलिस अधिकारियों को भी चोटें लगी हैं। वहीं, पथराव एवं हमले में रैली में शामिल नाबालिगों सहित कई लोग घायल हो गए हैं।

इस मामले में भारतीय दंड संहिता 1860 (IPC) की धारा 143, 147, 148, 149, 324, 353, 332, 504 और 506 के तहत शिकायत दर्ज की गई है। इन पर महाराष्ट्र पुलिस अधिनियम की धारा 135 भी लगाई गई है। पुलिस ने करीब 16 उपद्रवियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार लोगों में रैली में शामिल कुछ हिंदू भी हैं। इन लोगों ने मुस्लिमों के हमले का जवाब देने की कोशिश की थी।

हमला सुनियोजित था, पहले से ही पत्थर जुटा लिए गए थे

स्थानीय समाचार रिपोर्ट के अनुसार, घटना 31 मई 2024 की रात 8:30 बजे की बताई जा रही है। रैली उमरखेड तालुका के मुलावा क्षेत्र से शांतिपूर्ण तरीके से गुजर रही थी। रैली टीपू सुल्तान चौक पर ज़मज़म किराना दुकान के पास पहुँची तो मुस्लिमों की भीड़ ने रैली में शामिल लोगों पर हमला कर दिया। कहा जाता है कि डीजे सिस्टम पर बज रहे गानों से मुस्लिम भड़क गए।

बिना किसी बात के भीड़ ने रैली में शामिल हिंदुओं पर पत्थरबाजी शुरू कर दी। रैली में शामिल नाबालिगों सहित कई हिंदुओं को गंभीर चोटें आईं और उन्हें अस्पताल ले जाना पड़ा। इसके बाद रैली में शामिल कुछ लोगों ने भी जवाबी कार्रवाई में हमला किया। पुलिस अधिकारियों को घटना की जानकारी मिली और वे तुरंत मौके पर पहुँच गए।

अधिकारी देवीदास अठावले, संदीप शेरे हिम्मत बंदगर और समाधान नरवाड़े मौके पर पहुँचे और मामले को शांत करने की कोशिश की, लेकिन पत्थरबाजी जारी रही। इसके परिणामस्वरूप कुछ पुलिस अधिकारियों को भी चोटें आईं। इस मामले में पुलिस अधिकारी देवीदास अठावले ने शिकायत दर्ज कराई है। वहीं, इलाके में शांति के लिए भारी पुलिस बल तैनात किया गया है।

ऑपइंडिया को कुछ स्थानीय लोगों ने बताया कि उपद्रवी मुस्लिमों ने पहले ही हमले की योजना बना ली थी और पत्थरों को इकट्ठा कर लिया था। नाम नहीं बताने की शर्त पर एक स्थानीय व्यक्ति ने बताया, “जिस इलाके में घटना हुई, वहाँ सीमेंट की सड़कें हैं और उन्हें सड़क के किनारे पत्थर नहीं मिल पाए। वे ज़मज़म किराना दुकान के पास पत्थरों के साथ तैयार थे और जैसे ही रैली टीपू सुल्तान चौक पर पहुँची, उन्होंने तुरंत हमला करना शुरू कर दिया।”

वहीं, एक अन्य व्यक्ति ने दावा किया कि मुस्लिमों ने हमला करने से पहले सड़क पर लगी लाइटें बंद कर दी थीं, ताकि कोई यह न जान सके कि पत्थर किसने फेंके। उस शख्स ने ऑपइंडिया को बताया, “मुस्लिमों ने हमला करने से पहले लाइटें बंद कर दी थीं। यह सब योजनाबद्ध लग रहा था। वे बड़े-बड़े पत्थरों के साथ तैयार थे।”

पुलिस अधिकारी और हिंदू नाबालिगों को भी चोटें आईं

इस घटना के बाद यवतमाल के एसपी पवन बनसोडे, पीआई पीयूष जगताप और हनुमंतराव गायकवाड़ ने 1 जून 2024 को इलाके का दौरा किया, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि इलाके में शांति बनी रहे। एसपी बनसोडे ने कहा, “लोगों को शांति बनाए रखनी चाहिए। नागरिकों को किसी बात की चिंता नहीं करनी चाहिए।”

पुलिस अधीक्षक पवन बनसोडे ने आगे कहा, “लोगों को किए बिना दिक्कत के अपनी दिनचर्या जारी रखनी चाहिए। वे अफवाहों पर विश्वास न करें। हम मामले की जाँच कर रहे हैं। रैली के दौरान पत्थरबाजी करने वाले 16 लोगों पर मामला दर्ज किया गया है और उनमें से कुछ लोगों को गिरफ्तार भी किया गया है। आगे की जाँच जारी है।”

ऑपइंडिया द्वारा प्राप्त पुलिस प्रति के अनुसार, मुस्लिम समुदाय द्वारा किए गए हमले का जवाब देने का प्रयास करने वाले कुछ हिंदू व्यक्तियों पर भी पुलिस ने मामला दर्ज किया है। इनकी पहचान ज्ञानेश्वर कदम, वैभव गोरे, विट्ठल लाडके और अन्य के रूप में की गई है।

मुस्लिमों ने किया हमला, 2 मुख्य आरोपी गिरफ्तार: पुलिस

ऑपइंडिया ने इस संबंध में पोफली थाने के एपीआई पंकज दाभाड़े से खास बातचीत की। उन्होंने टीपू सुल्तान चौक पर रैली निकाल रहे हिंदुओं पर मुस्लिम समुदाय के लोगों द्वारा हमले की पुष्टि की। एपीआई दाभाड़े ने कहा, “रैली पर मुस्लिमों के हमले में शामिल कई लोग घायल हो गए। मुस्लिमों ने पत्थरबाजी की, जिसके बाद रैली में शामिल कई अन्य लोगों ने भी जवाबी हमला किया।”

उन्होंने आगे कहा कि मामले को शांत करने की कोशिश करने वाले कई पुलिस अधिकारियों पर भी हमला किया गया और उन्हें चोटें आई हैं। उन्होंने कहा, “अब तक कुल 16 लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें मुस्लिम समुदाय से जुड़े 2 मुख्य आरोपित शामिल हैं। इन 16 लोगों में 7 हिंदू हैं। जाँच चल रही है और मुख्य आरोपित को कानून के अनुसार कड़ी सजा दी जाएगी।”

यवतमाल जिले में और उसके आसपास के इलाकों में इस तरह की घटनाएँ अक्सर देखने को मिलती रहती हैं। पिछले साल महाराष्ट्र पुलिस ने छत्रपति शिवाजी महाराज की जयंती के अवसर पर सोशल मीडिया पर इस्लामवादी प्रोपेगेंडा वाली स्टोरी अपलोड करने पर शेख आफताब शेख मन्नान के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी।

आरोपित शेख आफताब शेख मन्नान ने एक वीडियो पोस्ट किया था, जिसमें छत्रपति शिवाजी महाराज को मुस्लिम आक्रांता औरंगजेब के सामने झुकते हुए दिखाया गया था। आरोपित ने इस वीडियो के कैप्शन में लिखा था, “औरंगजेब हिंदुस्तान का बाप।” इस घटना के बाद मामले में आवश्यक गिरफ्तारियाँ भी की गई थीं।

गुफराना ने चचेरे भाई रेहान को रोहित बता हिंदू लड़की से कराई दोस्ती, 4 साल लूटी अस्मत: आधार कार्ड से खुली पोल, शकील-नूर बानो-जहाँगीर ने पीड़िता को पीटा

दिल्ली की एक हिंदू युवती के पड़ोस में रहने वाली गुफराना नाम की महिला ने अपने भाई रेहान को रोहित बताकर दोस्ती कराई। रोहित बनकर रेहान ने हिंदू लड़की को न सिर्फ प्रेम जाल में फँसा लिया, बल्कि 4 साल तक उसकी आबरू भी लूटता रहा। लड़की ने काफी समय बाद जब रोहित का आधार कार्ड देखा, तो उसका नाम रेहान पाया। रेहान उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले का निवासी है।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, युवती जब रेहान के आधार कार्ड में लिखे पते पर उसके गाँव पहुँची, तो रेहान ने अपने बहनोई शकील अहमद, बहन नूर बानो और जहाँगीर ने उसके साथ जमकर मारपीट की और उसका मोबाइल भी तोड़ दिया। इसके बाद युवती ने खीरी कोतवाली में शिकायत दर्ज कराई। इस मामले में 16 मई 2024 को सुलह-समझौता भी हुआ था, लेकिन इसके बावजूद आरोपित उसे जान से मारने की धमकी देता रहा। अब पुलिस ने आरोपित रेहान के खिलाफ विभिन्न धाराओं में केस दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया है।

युवती ने अपनी शिकायत में बताया है कि इस जाल को बुनने वाली गुफराना दिल्ली में उसके पड़ोस में रहती है। उसने रोहित कह कर जिस लड़के से उसकी फोन पर बात कराई और दोस्ती कराई वो रेहान निकला। उसे इस बात का काफी समय तक पता नहीं चला। रोहित उर्फ रेहान ने उसके साथ दोस्ती और प्यार का नाटक करते हुए करीब 4 साल तक शारीरिक उत्पीड़न किया और जब उसने रोहित का आधार कार्ड देखा, तब पता चला कि रोहित का असली नाम रेहान है। इसके बाद वो रेहान के पते पर पहुँची, तो उसके साथ मारपीट की गई।

कोतवाली के प्रभारी निरीक्षक इंद्रजीत सिंह ने बताया है कि आरोपित युवक रेहान को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है। मामले की जाँच की जा रही है, जल्द ही अन्य आरोपितों को भी गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

दिहाड़ी मजदूर का किया काम, ट्रक के खलासी बने… जानिए कौन हैं 5 बार के CM को हराने वाले लक्ष्मण बाग, पहली बार चुनाव हारे हैं नवीन पटनायक

ओडिशा के विधानसभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी का प्रदर्शन लगातार चर्चा में है। इस बीच उस व्यक्ति के नाम पर भी बात हो रही है जिन्होंने बीजू जनता दल के प्रमुख चेहरे व ओडिशा के 5 बार के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक को 16000 वोटों से हराया है। ये हार नवीन पटनायक के राजनीतिक जीवन में प्रवेश करने के बाद पहली हार है जो उन्हें कांटाबांजी से मिली है। नवीन पटनायक को हराने वाले भारतीय जनता पार्टी के लक्ष्मण बाग हैं।

आगे बढ़ने से पहले बता दें कि नवीन पटनायक ने ओडिशा में दो सीटों पर चुनाव लड़ा था। एक हिंजिली और दूसरा कांटाबांजी। हिंजिली में उन्हें मात्र 4600 वोटों के अंतर से जीत मिली है। वहीं कांटाबांजी में उनकी किस्मत ने उनका साथ नहीं दिया और वो 16000 वोट से हार गए।

चुनाव आयोग की साइट पर मौजूद जानकारी के अनुसार लक्ष्मण बाग को 90876 वोट मिले हैं। वहीं नवीन पटनायक सिर्फ 74 हजार 532 वोट जुटा पाए। लक्ष्मण बाग की जीत के बाद अब लोग उनके बैकग्राउंड को देखते हुए उनकी तारीफ कर रहे हैं।

दरअसल, लक्ष्मण बाग एक गरीब किसान परिवार से आते हैं और एक समय में दिहाड़ी मजदूरी किया करते थे। उन्होंने ट्रक पर खलासी (ट्रक पर सामान उतारने-चढ़ाने) का काम करके भी अपना जीवन गुजारा था। बाद में जाकर उन्होंने खुद ट्रक खरीद ली और ट्रांसपोर्ट व्यवसाय में लग गए।

इसके बाद उन्होंने इसी व्यापार में ध्यान देते हुए बढ़त बनाई। बाद में काम चलने पर राजनीति में किस्मत आजमाई। 2014 में चुनाव लड़ा तो वो तीसरे स्थान पर रहे। फिर 2019 में दोबारा इसी जगह से खड़े हुए पर कॉन्ग्रेस के संतोष सिंह सलूजा से मात्र 128 वोटों से हार गए थे। इसके बाद उन्होंने 5 साल काम किया और अपनी पैठ बनाई। 2024 आते ही उनकी मेहनत का परिणाम उन्हें मिला। उन्होंने 90 हजार वोट पाकर जीत हासिल की। वहीं कॉन्ग्रेस के संतोष सिंह को 64 हजार वोटों से हराया।

हर पार्टी के स्थानीय नेता भी उनकी इस जीत पर हैरान हैं। कहा जा रहा है कि उन लोगों को पता था कि लक्ष्मण आगे चल रहे हैं लेकिन उन्हें ये नहीं लगा था कि वो नवीन पटनायक को हरा सकते हैं। ये बेहद अकल्पनीय है।

जिस जगह से लक्ष्मण जीते हैं वहाँ उन्होंने श्रमिकों के पलायन का मुद्दा उठाया था। जीत के बाद भी वह इस मामले पर बोलते दिखे। उन्होंने कहा- कांटाबाजी में बेरोजगारी, श्रमिक पलायन और शिक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था के बुनियादी ढाँचे की कमी है। ये सभी समस्याएँ 10 जून के बाद खत्म होंगी जब नई सरकार बनेगी। अब यहाँ नई शुरुआतज होगी। जनता ने जो किया है पीएम उसका उन्हें रिटर्न गिफ्ट देंगे। विकास मार्ग दिखाएँगे।

चुनाव प्रचार किया, दौरे किए… लगता नहीं अरविंद केजरीवाल ‘गंभीर बीमारी’ से पीड़ित हैं: कोर्ट ने दिल्ली CM का बताया ‘हेल्थ रिपोर्ट’, पूछा- कौन सा टेस्ट जो कस्टडी में नहीं होता

दिल्ली के एक कोर्ट ने CM अरविन्द केजरीवाल की स्वास्थ्य आधार पर जमानत याचिका को खारिज करते हुए खूब सुनाया है। कोर्ट ने उनकी चुनाव प्रचार में चुस्ती को देखते हुए मानने से इनकार कर दिया है कि उन्हें कोई गंभीर बीमारी है। कोर्ट ने उन्हें स्वास्थ्य आधार पर अंतरिम जमानत देने से मना कर दिया है।

बुधवार (5 जून, 2024) को दिल्ली के राउज अवेन्यु कोर्ट में जज कावेरी बावेजा ने CM केजरीवाल की जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए अहम टिप्पणियाँ की है। उन्होंने कहा, “अरविन्द केजरीवाल द्वारा किए गए व्यापक प्रचार, दौरे और कार्यक्रम, यह संकेत देते हैं कि वह किसी गंभीर या ‘जीवन के लिए खतरे’ वाली बीमारी से पीड़ित नहीं हैं, जिससे कि वे PMLA की धारा 45 के अनुसार जमानत ले सकें।”

कोर्ट ने कहा कि CM केजरीवाल ने इस बात पर जमानत माँगी है कि उनका कीटोन का स्तर गिरा है और वजन कम हुआ है जो कि मेडिकल आधार से भी बदतर है। कोर्ट ने यह भी पूछा कि आखिर जेल के भीतर उनके टेस्ट क्यों नहीं किए जा सकते और इसके लिए अलग जमानत की माँग क्यों की गई।

कोर्ट ने कहा, “केजरीवाल के अनुसार, वह एक संभावित बीमारी के ‘निदान’ के लिए अंतरिम जमानत चाहते है, इसे जमानत के लिए वैध आधार नहीं कहा जा सकता है, खासकर जब उनके हिरासत में रहते हुए इस बात का समाधान किया जा सकता है।”

कोर्ट ने केजरीवाल की स्वास्थ्य जाँच के लिए AIIMS के डॉक्टरों का एक बोर्ड बनाने और उसके आधार पर आगे की कार्रवाई करने के आदेश दिए हैं। उन्होंने इस मामले में आदेश दिए हैं कि जो भी टेस्ट जरूरी समझे जाएँ, वह जल्द हों। कोर्ट ने यह आदेश देने के साथ ही CM केजरीवाल को स्वास्थ्य आधार पर अंतरिम जमानत देने से मना कर दिया।

गौरलतब है कि दिल्ली CM केजरीवाल ने राउज अवेन्यु कोर्ट में स्वास्थ्य आधार पर अंतरिम जमानत के लिए याचिका लगाई थी। उन्होंने 7 दिनों के अंतरिम जमानत दिए जाने की माँग की थी ताकि वह अपने मेडिकल टेस्ट करवा सकें। उन्होंने इसके नियमित जमानत के लिए भी कोर्ट में याचिका लगाई थी, इस पर शुक्रवार (7 जून, 2024) को सुनवाई है।

इससे पहले उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में भी 7 दिनों की अंतरिम जमानत के लिए एक याचिका लगाई थी। इस पर उन्हें कोई राहत नहीं मिली थी। यह याचिका उन्होंने अपनी 21 दिन की चुनावी जमानत को बढ़ाने के लिए लगाई थी। उन्होंने 2 जून, 2024 को कोर्ट के सामने सरेंडर कर दिया था।

दिल्ली CM केजरीवाल को मार्च, 2024 में प्रवर्तन निदेशलय (ED) ने दिल्ली शराब घोटाला मामले में गिरफ्तार किया था। एजेंसी ने उन्हें इस मामले का सरगना बताया था। एजेंसी उन्हें हर बार जमानत देने का विरोध करती आई है।