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स्तन काटे, प्राइवेट पार्ट्स जलाए, हड्डियाँ तोड़ी, जाँघें मसली… भाग्यशाली हैं कंगना रनौत कि उन्हें बलजीत जैसी ‘सजा’ नहीं मिली, क्योंकि थप्पड़ जितने समय में ही गोली भी मारी जा सकती है

लोकसभा चुनाव में मंडी से सांसदी जीतने के बाद कंगना रनौत के साथ एयरपोर्ट पर जो घटना घटी है वो सामान्य नहीं है। उनके सांसद बनने के बाद उन्हें सरेआम थप्पड़ मारा गया है। अब कुछ लोग इस मामले में उनकी ओर से बोलना तो दूर उलटा उन पर ही सवाल उठा रहे हैं। वहीं सीआईएसएफ की कर्मी कुलविंदर कौर को ‘नायिका’ बनाकर पेश कर रहे हैं।

उदाहरण के लिए कॉन्ग्रेस की महिला नेत्री को लीजिए। वो इस मामले में दिखावे के लिए सांसद को थप्पड़ मारे जाने की निंदा जरूर करती हैं, लेकिन बाद में ये दिखाने की कोशिश करती हैं कि कंगना ने सोचो कैसी बात कही होगी जिसकी टीस सीआईएसएफ कर्मी के मन में रह गई और उसने ऐसा कदम उठाया।

ऐसी घटना को जस्टिफाई करना दिखाता है कि इकोसिस्टम के लोगों के मन में घटना की गंभीरता को लेकर चिंता बिलकुल नहीं है बल्कि खुशी इस बात की है कि भाजपा की सांसद को थप्पड़ पड़ा तो सही हुआ और थप्पड़ मारने वाला निर्दोष ही होगा… जबकि ये मामला पूर्ण रूप से सोचने वाला है।

आज के समय में हर राजनेता अपने आप को सिद्ध करने के लिए कहीं न कहीं से कुछ न कुछ उदाहरण देता है। कभी किसी मामले पर तो कभी किसी प्रतिद्वंद्वी पर… ऐसे में कुछ लोग होते हैं तो राजनेताओं की बातों से कभी असहमत होते हैं या आहत होते हैं कानूनी कार्रवाई की माँग करते हैं, मानहानि का केस दर्ज करते हैं…लोकतांत्रिक देश में ऐसे मामलों में यही विकल्प सबसे अच्छा होता है। मगर, वहीं दूसरी ओर अगर बातें बुरा लगने पर जनता में बैठे लोग इस तरह हिंसा पर उतर जाएँगे तो क्या स्थिति अराजकता वाली पैदा नहीं हो जाएगाी। क्या हम ऐसी घटनाओं को सोच भी सकते हैं कि राजनेताओं को उनके बयानों के लिए सरेआम मारा जा रहा है। ऊपर से लोग ऐसे कृत्यों का समर्थन भी कर रहे हैं।

घटना के बाद जब कंगना रनौत ने इस घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए पंजाब में बढ़ रही खालिस्तानी विचारधारा पर सवाल उठाए तो इसके खिलाफ शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधन कमेटी ने बयान जारी किया। इसमें कहा गया कि कंगना के नफरत भरे बयान पंजाबियों का अपमान हैं। उन्हें नहीं भूलना चाहिए कि आज अगर देश में बहुजातीय व बहुभाषी संस्कृति जीवित है तो उसके पीछे का कारण पंजाबियों द्वारा दी गई कुर्बानियाँ हैं। SGPC ने अपील की है कि भाजपा उन्हें नैतिकता का पाठ पढ़ाए और एयरपोर्ट पर हुई घटना के कारणों की जाँच करे।

हैरानी की बात है कि एसजीपीसी जिस सक्रियता से कंगना के विरोध में उतरा है, उतनी सक्रियता से खालिस्तान समर्थकों के विरुद्ध उनसे कुछ नहीं कहा जा रहा। अभी 1 दिन पहले की ही बात है, स्वर्ण मंदिर में खालिस्तान समर्थन में नारेबाजी हुई है। लेकिन, कहीं इसका किसी सिख संगठन ने विरोध नहीं किया। उलटा आज वो लोग कुलविंदर कौर को महान दिखाने के लिए उसके घर पहुँचे हुए हैं। उसे सम्मान दे रहे हैं, उनके परिवार को पीड़ित दिखा रहे हैं।

हाथ में गोली होती तो…

सोचिए, जो काम कुलविंदर कौर ने आवेश में आकर किया है, उसकी चरम क्या हो सकती थी। गुस्से में उन्होंने थप्पड़ मारा, थोड़ा और गुस्सा आता और हाथ में हथियार मिलता तो वो गोली भी मार देतीं… वहीं वो लोग जो आज कुलविंदर के झापड़ मारने को केवल आवेश में उठाया गया कदम बताकर हल्का दिखाने का प्रयास कर रहे हैं वो तो गोली चलाने की घटना को भी ऐसा ही कह देते और कई संगठन पहुँच जाते तब भी कुलविंदर को सम्मानित करने।

मालूम हो गोली वाली घटना का जिक्र करना कोई अतिशयोक्ति नहीं है। अगर लगे, तो 1984 में इंदिरा गाँधी के साथ क्या हुआ था उसे याद कर लीजिए। ऑपरेशन ब्लू स्टार के बाद इसी तरह कुछ लोग इंदिरा गाँधी से नाराज हुए थे और बाद में उन्हें सरेआम गोली मार दी गई थी…। ऐसी मानसिकता के लोग तो उस घटना को भी जायज दिखा देते जबकि उस समय की रिपोर्ट्स खुद बताती हैं कि ऑपरेशन ब्लू स्टार में जिस भिंडरावाले और उसकी सोच के खात्मे का काम हुआ था उसने स्वर्ण मंदिर के परिसर में ही कई लोगों की हत्या को अंजाम दिया था। इन लोगों की लिस्ट में एक नाम बलजीत कौर का भी था।

बलजीत कौर की निर्मम हत्या

बलजीत कौर वह महिला थीं, जिन्होंने भिंडरावाले के दाएँ हाथ सुरिंदर सिंह सोढी की हत्या में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। जब भिंडरावाले को इस संबंध में पता चला तो उसने पहले मुख्य साजिशकर्ता का गला कटवाया और उसके बाद भिंडरावाले के लोगों का मारने का अंजाम क्या होता है, ये संदेश देने के लिए बलजीत कौर को अकाल तख्त में लाया गया।

बलजीत ने चूँकि सोढी पर गोली दागी थी, तो उसे सजा और भयानक मिली। हत्या से पहले उसे तमाम प्रताड़नाएँ दी गईं। अंत में उसके दोनों स्तनों को काट कर उसे वहीं मार दिया गया। रिपोर्ट बताती हैं कि बलजीत के प्राइवेट पार्ट्स को जला दिया गया था। उसकी हड्डियाँ तोड़ी जा चुकी थीं। जांघें और हाथ बुरी तरह मसल दिए गए थे। शुरू में किसी को समझ भी नहीं आ रहा था कि ये शव किसका है। हालाँकि बाद में पुलिस ने कयास लगाए कि ऐसी बर्बरता खालिस्तानी सिर्फ बलजीत के साथ कर सकते हैं, जिसने सोढी को मारा था।

नाराजगी नहीं, नफरत

सोचिए, अगर कोई भिंडरावाले की भावनाओं का हवाला देकर बलजीत कौर की निर्मम हत्या को जस्टिफाई करने लग जाएँ तो क्या आप अपेक्षा करेंगे कि लोगों में कानून का सम्मान बचा है। एक सामान्य नागरिक भी जानता है कि किसी बात से आहत होने पर कानून का सहारा लेकर कार्रवाई करने का अधिकार लोकतांत्रिक देश में हर नागरिक पर होता है। कानून का सहारा लेने का काम सिर्फ वो नहीं करते देश को, उसके संविधान को नकारते हैं और कट्टरपंथ की विचारधारा के रास्ते पर होते हैं जैसे भिंडरावाला था। लेकिन खुद सरकारी ड्यूटी पर तैनात कुलविंदर कौर ने ऐसा क्यों किया होगा ये सोचने का विषय है… अगर उनका देश के सामान्य नागरिक जैसा बर्ताव होता तो वो उस भाषण के विरोध में अपनी शिकायत दे सकती थीं, मानहानि का मुकदमा डाल सकती थीं, आहत होने की बात लोगों को खुलेआम बता सकती थीं… मगर उन्होंने ऐसा कुछ नहीं किया। पहले थप्पड़ मारा, फिर सफाई देती घूमीं। उनकी सीधा आकर कंगना को थप्पड़ मारने की हरकत साफ बताती है कि उनके मन में सिर्फ एक नाराजगी नहीं बल्कि नफरत थी। ऐसी नफरत जिसे सही समय पर नहीं रोका जाए तो देश में अराजक माहौल हो सकता है।

कंगना को थप्पड़ मारा, बदले में कुलविंदर के परिवार को सम्मान दे रहे सिख संगठन: SGPC ने भी बीजेपी MP को ही बताया कसूरवार, कहा- उनका बयान माहौल खराब कर रहा

शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) के अध्यक्ष एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी ने भाजपा सांसद कंगना रनौत पर चंडीगढ़ एयरपोर्ट पर हुए हमले को सही ठहराते हुए एक बयान जारी किया है। धामी ने CISF महिला सुरक्षाकर्मी कुलविंदर कौर के हमले को लेकर कहा है कि कंगना का वह पंजाब और पंजाबियों को लगातार निशाना बना रही थीं जो कि काफी पीड़ादायक है।

SGPC मुखिया कंगना के इस दावे को नकार दिया कि पंजाब में आतंकवाद बढ़ रहा है। उन्होंने दावा किया कि कंगना के बयान से देश का माहौल खराब हो रहा है। उन्होंने कंगना रनौत को पंजाबियों के देश के लिए किए बलिदान भी याद दिलाने की बात कही। धामी का कहना था कि लोकप्रियता हासिल करने के लिए देश के नागरिकों की आपसी शान्ति और उनके सामाजिक मेलजोल को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए, लेकिन कंगना इसी रास्ते पर चल रही हैं।

एडवोकेट धामी ने भाजपा नेताओं से आग्रह किया कि वे कंगना रनौत को संयम और नैतिकता की शिक्षा दें। उन्होंने लिखा, “चंडीगढ़ एयरपोर्ट पर हुई घटना के कारणों की गहन जाँच होनी चाहिए कि कहीं कंगना रनौत ने पंजाब के खिलाफ नफरत का माहौल बनाने के लिए कोई शरारती बात तो नहीं की। केंद्रीय सुरक्षा बल द्वारा की गई जाँच बिना किसी राजनीतिक या व्यक्तिगत प्रभाव के होनी चाहिए ताकि किसी के साथ गलत व्यवहार ना हो।”

सिख संगठनों ने किया कुलविंदर के परिवार को किया सम्मानित

इस बीच, यह बात भी सामने आई कि एक सिख संगठन ने चंडीगढ़ एयरपोर्ट पर कंगना रनौत पर हमला करने वाली निलंबित CISF अधिकारी कुलविंदर कौर के परिवार के लोगों को सम्मानित किया। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है जिसमें सिख संगठन के सदस्यों को कुलविंदर कौर के परिवार के सदस्यों को सम्मानित करते देखा जा सकता है।

वीडियों में कुछ सिख सत श्री अकाल और अन्य नारे लगाते हुए देखे जा सकते हैं, वह एक बुजुर्ग पुरुष और महिला को शाल ओढ़ाते हैं और बधाई भी देते हैं। वह महिला के गले भी मिलते हैं। यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है। इससे पहले शिवसेना UBT की सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने कंगना रनौत पर हुए हमले को सही ठहराने की कोशिश की थी।

गौरतलब है कि CISF सुरक्षाकर्मी कुलविंदर कौर ने गुरुवार (6 जून, 2024) को चंडीगढ़ एयरपोर्ट पर दिल्ली जा रहीं सांसद कंगना रनौत को सुरक्षा जाँच के दौरान थप्पड़ मार दिया था। उसने इसके बाद एयरपोर्ट पर हंगामा भी मचाया था, इसकी कुछ वीडियो भी सामने आईं थी। इसमें वह कहते सुनी जा सकती है, ‘इसने ₹100-₹100 में महिलाओं बैठने को कहा था, ये बैठेगी वहाँ पर, मेरी माँ बैठी थी।”

कुलविंदर कौर का कहना था कि उसने कंगना रनौत को इसलिए थप्पड़ मारा क्योंकि उन्होंने किसान आंदोलन में बैठी महिलाओं को लेकर बयान दिया था। उसने बताया था कि इस किसान आंदोलन में उसकी माँ भी शामिल थी और उसे कंगना का बयान अखर रहा था।

कंगना रनौत ने इस मुद्दे के बाद एक वीडियो जारी किया था। उन्होंने बताया, “मैं बताना चाहती हूँ कि मैं पूरी तरीके से ठीक हूँ, सुरक्षित हूँ। आज जो चंडीगढ़ एयरपोर्ट पर जो हादसा सुरक्षा जाँच के दौरान हुआ। मैं सुरक्षा जाँच के बाद जैसे ही निकली, इसके बाद दूसरे केबिन में बैठी एक सुरक्षाकर्मी ने आकर मेरे मुँह पर मारा। वह गालियाँ देने लगी, उन्होंने पूछने पर बताया कि वह किसान आंदोलन का समर्थन करती हैं। मैं सुरक्षित हूँ लेकिन मैं पंजाब में उग्रवाद और आतंकवाद के बढ़ने को लेकर चिंतित हूँ।”

बीजेपी का एक कार्यकर्ता ऐसा भी! काउंटिंग के दौरान पार्टी पिछड़ी तो देवी माँ से माँगी ‘मन्नत’, कमल खिलने के बाद अपनी ‘उंगली’ काट मंदिर में कर दिया अर्पित

छत्तीसगढ़ के बलरामपुर में एक युवक ने देश में भाजपा की जीत की मन्नत पूरी करने के लिए देवी को अपनी उंगली अर्पित कर दी। युवक भाजपा का समर्थक है और वह 4 जून को आए आ रहे रुझानों से हताश हो रहा था, इसके बाद उसने यह कदम उठाया।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, बलरामपुर जिले के डीपाडीह निवासी कृषक दुर्गेश पांडेय भाजपा के बड़े समर्थक हैं। 4 जून, 2024 को लोकसभा चुनाव 2024 को दोपहर तक आ रहे रुझानों और कॉन्ग्रेस नेताओं के बयानों से वह चिंतित हो गए थे। उनकी चिंता थी कि देश में तिबारा भाजपा सरकार नहीं बनेगी।

दुर्गेश पांडेय ने भाजपा की जीत के लिए सावंत सरना स्थित पुरातन काली मंदिर जाकर भाजपा की जीत लिए पूजा अर्चना की। देवी माँ के सामने उन्होंने भाजपा की जीत की मन्नत मानते हुए अपनी तर्जनी उंगली काट कर माता को चढ़ा दी और बहते हुए रक्त से उनका अभिषेक भी किया।

अत्यधिक खून बहने के बाद वह स्थानीय अस्पताल अपनी कटी हुई उंगली लेकर गए। यहाँ शंकरगढ़ में उनका प्राथमिक उपचार करने बाद अंबिकापुर के बड़े अस्पताल भेज दिया गया। यहाँ उनका इलाज विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम ने किया। उनकी उंगली को दोबारा जोड़ा गया है। उनको अस्पताल से छुट्टी मिल गई है। उनका स्वास्थ्य अब ठीक है।

दुर्गेश पांडेय ने बताया कि वह भाजपा या उसके किसी अनुषांगिक संगठन से सीधे तौर पर नहीं जुड़े हैं लेकिन वह पीएम मोदी और पार्टी के समर्थक हैं। उन्होंने मीडिया को बताया है कि वह केंद्र में NDA की 400 सीटों पर जीत चाहते थे। उन्होंने कहा है कि NDA सरकार बनने से खुश हैं। उनका कहना है कि NDA सरकार बनती तो वह दोगुना खुश होते।

गौरतलब है कि 4 जून, 2024 को आए नतीजों में भाजपा को 240 सीटें मिली हैं जबकि NDA गठबंधन को स्पष्ट बहुमत हासिल हुआ है। NDA पार्टियों ने नरेन्द्र मोदी को अपना नेता चुना है और सरकार गठन का काम तेज हो चुका है। रविवार (9 जून, 2024) को देश की नई सरकार के शपथ लेने की संभावना है।

मुस्लिमों के बीच रहने को कश्मीर लौटा एक हिंदू परिवार, चुनावी नतीजों के बाद वही हुआ जो आप सोच रहे हैं: देखिए Video, पुलिस बोली – सरकारी जमीन को लेकर हुआ झगड़ा

अपडेट: अनंतनाग प्रशासन ने कहा है कि ये मामला किसी एक द्वारा दूसरे को घर बनाने से रोकने का नहीं, बल्कि 2 पड़ोसियों के बीच स्थित छोटी सी सरकारी जमीन के इस्तेमाल को लेकर है। जिला प्रशासन के अनुसार, इस जमीन का इस्तेमाल प्राइवेट पार्किंग के लिए दोनों पक्ष कर रहे थे, एक पक्ष ने जब बाउंड्री पर दीवार बनानी चाहिए तो विवाद उत्पन्न हुआ। जिला प्रशासन और पुलिस ने मौके पर पहुँच कर दोनों पक्षों का समझौता करा दिया है।

जम्मू कश्मीर के अनंतनाग में एक बार फिर एक कश्मीरी पंडित परिवार का उत्पीड़न किया गया। घाटी में शांति लौटने के बाद फिर से बसने की कोशिश कर रहे एक कश्मीरी पंडित परिवार पर हमला किया गया। उसे घर बनाने से रोका गया और सारा सामान तहस नहस कर दिया गया। कश्मीरी पंडित के मुस्लिम पड़ोसियों ने घाटी छोड़ने को लेकर उसे धमकाया।

नवभारत टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, अनंतनाग के वेरीनाग इलाके में संजय वली नाम के एक कश्मीरी पंडित ने 1990 के नरसंहार के बाद दोबारा से हिम्मत करके यहाँ अपना घर बनाना चालू किया था। वह पुरानी हिंसा भूल कर अपने इलाके में लौटे थे। यह घर उन्होंने अपनी जमीन बनाना चालू किया था। जहाँ वह घर बना रहे हैं वहाँ अन्य सभी मुस्लिम परिवार रहते हैं।

संजय वली ने बताया कि वह अपने घर का निर्माण करवा रहे हैं लेकिन इसमें आसपास के मुस्लिम अड़ंगा डाल रहे हैं। उनको मानसिक तौर पर प्रताड़ित किया जा रहा है। संजय वली के परिवार को लगातार गालियाँ दी जाती हैं और और उनके घर बनाने के निर्णय को लेकर नाराजगी जताई जाती है।

चुनाव परिणाम के बाद हमला

कश्मीरी पंडित संजय वली ने बताया है कि 4 जून, 2024 को लोकसभा चुनाव का परिणाम आने के बाद उनके परिवार पर हमला कर दिया गया। कुछ लोगों ने आकर उनके परिवार से अभद्रता की और उन पर हमला कर दिया। उनका घर बनाने का सारा सामान बाहर फेंक दिया गया। उनका घर बनाने का सारा सामान दूसरे लोग उठा ले गए। उनके परिवार की पिटाई की गई।

संजय को धमकियाँ दी गई और कहा गया कि वह यह इलाका छोड़ दें और अपना घर दोबारा ना बनाएँ। संजय के परिवार के साथ हुई इस मारपीट का एक वीडियो सोशल मीडिया पर अब वायरल हो रहा है। इसमें कुछ लोग महिलाओं से झगड़ा करते हुए दिखाई देते हैं। संजय वली अब इस घटना के बाद से डरे हुए हैं। उनका डर है कि 1990 वाली त्रासदी कहीं उनके साथ दोबारा ना घटित हो जाए। चुनाव परिणाम के 24 घंटों के भीतर इस हमले के बाद सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चिंता जताई गई है।

सोशल मीडिया में बताया जा रहा जमीन विवाद

संजय वली का सोशल मीडिया में कई जगह नाम सुनील वली बताया जा रहा है। एक्स (पहले ट्विटर) पर कुछ लोगों ने इस मामले के निपटने का दावा किया है। कश्मीर में काम करने वाली से शारदा कमेटी नाम की एक संस्था के रविंदर पंडिता ने इस मामले का अपडेट दिया है। उन्होंने बताया, “वेरीनाग कमेटी ने इस मामले में तुरंत हस्तक्षेप किया और जिला प्रशासन से वेरीनाग में पंडित परिवार के साथ हुए विवाद के बारे में बात की। प्रशासन ने हमें आश्वस्त किया है कि चिंता की कोई बात नहीं है और हमलावरों पर कानून के तहत मामला दर्ज किया गया है।”

रविंदर पंडिता ने आगे बताया है कि इस मामले को संजय/सुनील वली के परिवार ने हमलावरों के साथ सुलझा लिया है और आगे विवाद ना होने को लेकर भी दोनों में सहमति बनी है। जिस अनंतनाग क्षेत्र में संजय वली के परिवार पर हमला हुआ है, वहाँ 4 जून को मियाँ अल्ताफ अहमद जीते हैं। वह नेशनल कॉन्फ्रेंस से उम्मीदवार थे, उन्होंने PDP मुखिया महबूबा मुफ़्ती को हराया है। मामले में अभी प्रशासन की तरफ से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।

गौरतलब है कि कश्मीर घाटी में 1990 में कश्मीरी पंडितों का नरसंहार किया गया था। उन्हें घाटी से भगा दिया गया था और उनकी संपत्तियों पर कब्जा कर लिया गया था। बड़ी संख्या में कश्मीरी पंडित मार दिए गए थे। इस्लामी आतंकियों ने कश्मीरी पंडित महिलाओं के साथ बलात्कार भी किया था। तब से कश्मीरी पंडित देश के अलग अलग हिस्सों में रहने को मजबूर हैं।

कासिम, मोनिस और शोएब… संसद में घुसपैठ करते CISF ने पकड़ा, फर्जी आधार कार्ड मिले: पूछताछ में जुटी दिल्ली पुलिस

लोकसभा चुनावों में नतीजे आने के बाद संसद में घुसपैठ की कोशिश का मामला सामने आया है। आधिकारिक सूत्रों के हवाले से बताया जा रहा है कि संसद परिसर में प्रवेश करने का प्रयास करते हुए तीन मजदूरों को CISF कर्मियों ने पकड़ा और बाद में इनकी गिरफ्तारी हुई।

इन तीनों के नाम कासिम, मोनिस और सोएब है। इनके खिलाफ जालसाजी, धोखाधड़ी से संबंधित आईपीसी धाराएँ लगाई गई हैं। खबरों के अनुसार, इन तीनों की गिरफ्तारी उस समय हुई जब तीनों नियमित सुरक्षा और पहचान जाँच के दौरान संसद भवन के फ्लैप गेट एंट्री से घुस रहे थे। इसी बीच सीआईएसएफ कर्मियों को इनकी एक्टिविटी संदिग्ध लगी।

सीआईएसएफ कर्मियों ने तीनों को रोका और हिरासत में लिया जाँच हुई तो ये भी सामने आया कि उन लोगों के आधार कार्ड जाली थे और तीनों ही डीवी प्रोजेक्ट्स लिमिटेड में कार्यरत थे, जिसे संसदर परिसर के अंदर सांसदों के लिए लाउंज बनाने का ठेका दिया गया है।

सीआईएसएफ ने तीनों को दिल्ली पुलिस को सौंप दिया है। उन्होंने इनके विरुद्ध एफआईआर दर्ज कर ली है और आईपीसी की धाराओं 465, 419, 120 बी, 471, 468 के तहत मामला दर्ज किया गया है।

गौरतलब है कि साल 2023 में भी संसद में सुरक्षा चूक का मामला सामने आया था, जिस पर हाल की खबरें बताती हैं कि उस केस के 6 आरोपितों के विरुद्ध गैरकानूनी गतिविधिया रोकथाम अधिनियम के तहत केस चलेगा। इन 6 आरोपितों के नाम  ललित झा, सागर शर्मा, मनोरंजन डी, अमोल धनराज शिंदे, नीलम रानोलिया और महेश कुमावत हैं।

इन लोगों ने संसद में उपद्रव मचाने के लिए कई समय से प्लानिंग की थीं। इसके अलावा इन्होंने एक मोची से विशेष जूते बनवाए थे जिनके तलवे में 2.5 इंच गहरी जगह थी। ये लोग धुएँ के केन इसी स्पेस में छिपाकर संसद में लाए थे। हालाँकि सांसदों की तेजी के बाद ये सारे पकड़ लिए गए और इनके पास से पर्चे बरामद हुए थे जिनपर प्रधानमंत्री के लापता होने जैसी बात लिखी थी।

कर्नाटक की कॉन्ग्रेस सरकार ने ‘हमारे बारह’ को किया बैन, फिल्म का विरोध कर रहे हैं इस्लामी संगठन: अन्नू कपूर को मिल चुकी है हत्या की धमकी

मुस्लिम महिलाओं की स्थिति दिखाने वाली ‘हमारे बारह’ फिल्म को कर्नाटक सरकार ने बैन करने का फैसला किया है। कहा जा रहा है कि तमाम मुस्लिम संगठनों से शिकायत पाने के बाद कर्नाटक की कॉन्ग्रेस सरकार ने यह निर्णय लिया।

समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार, “कर्नाटक सिनेमा (विनियमन) अधिनियम, 1964 की धाराओं के तहत कर्नाटक सरकार ने फिल्म ‘हमारे बारह’ के प्रसारण या रिलीज पर दो सप्ताह या अगले आदेश तक रोक लगा दी है।”

ANI के ट्वीट में आगे बताया गया कि सरकार का इस मामले में कहना है कि अगर इसे राज्य में रिलीज होने दिया गया तो इससे सांप्रदायिक तनाव पैदा होगा। कर्नाटक सरकार के मुताबिक उन्होंने यह फैसला फिल्म का ट्रेलर देखने के बाद कई अल्पसंख्यक संगठनों और प्रतिनिधिमंडलों के अनुरोध पर लिया गया है।

बता दें कि कर्नाटक सरकार के इस फैसले से पहले ‘हमारे बारह’ फिल्म की रिलीज पर बॉम्बे हाईकोर्ट द्वारा भी रोक लगाई गई थी। हालाँकि बाद में इस रोक को हटा लिया गया है।

कोर्ट ने पहले इसके निर्माताओं को फिल्म की रिलीज 14 जून 2024 तक स्थगित करने को कहा था। फिल्म रुकवाने के लिए अजहर तंबोली द्वारा इस मामले में याचिका दायर की गई थी। उन्होंने याचिका में फिल्म के खिलाफ कानूनी हस्तक्षेप की माँग की थी। इसके अलावा फिल्म की विषय वस्तु को चुनौती दी गई थी जिसमें इस्लामी भावनाओं को ठेस पहुँचाने की बात थी।

वहीं केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सीबीएफसी) के अधिवक्ता अद्वैत सेठना ने इन दावों का खंडन करते हुए कहा था कि फिल्म का ट्रेलर सीबीएफसी समिति द्वारा फिल्म की जाँच के बाद रिलीज हुआ था। प्रमाणन देने से पहले कई सीन को एडिट करने के लिए कहा गया था। उन्होंने कहा था कि यह सीबीएफसी फिल्म की सीमाओं को नियंत्रित करता है मगर प्रचार और ट्रेलर के नियंत्रण इसके पास नहीं हैं।

बता दें कि कोर्ट का पहले वाला निर्देश कई घटनाओं के बाद दिया गया था। इन घटनाओं में इस्लामी संगठनों का विरोध तो था ही, साथ में मुख्य अभिनेता अन्नू कपूर को मिल रही जान से मारने की धमकियाँ भी शामिल थी। हाल में इस संबंध में, एक्टर ने महाराष्ट्र सीएम एकनाथ शिंदे से मुलाकात भी की थी।

‘ये बैठेगी वहाँ पे, मेरी माँ वहाँ बैठी थी’: कंगना रनौत को थप्पड़ मारने वाली कुलविंदर का भाई है ‘किसान नेता’, CISF में पति भी तैनात

हिमाचल प्रदेश के मंडी से सांसद चुनी गई अभिनेत्री कंगना रनौत को चंडीगढ़ एयरपोर्ट पर थप्पड़ मारने वाली CISF सुरक्षाकर्मी कुलविंदर कौर के बारे में कई जानकारियाँ निकल कर सामने आई हैं। उसके खिलाफ CISF ने कार्रवाई भी चालू कर दी है।

यह सामने आया है कि वह पंजाब के सुल्तानपुर लोधी की रहने वाली है। उसकी आयु 35 वर्ष है। पता चला है कि कुलविंदर कौर का पति भी CISF में तैनात है। कुलविंदर का भाई शेर सिंह किसान मजदूर संघर्ष कमेटी का संगठन सचिव है। वह किसान आन्दोलन में सक्रिय रहा है। कुलविंदर कौर के भाई शेर सिंह ने इस घटना के बाद अपनी बहन का समर्थन किया है।

कुलविंदर कौर को चंडीगढ़ एयरपोर्ट पर दो वर्ष पहले तैनात किया गया था। घटना के बाद उसे हिरासत में ले लिया गया है। CISF ने उसके विरुद्ध निलम्बन की कार्रवाई की है। CISF ने इस घटना की जाँच के लिए एक पैनल का गठन किया है।

कुलविंदर कौर ने गुरुवार (6 जून, 2024) को चंडीगढ़ एयरपोर्ट पर दिल्ली जा रहीं सांसद कंगना रनौत को सुरक्षा जाँच के दौरान थप्पड़ मार दिया था। उसने इसके बाद एयरपोर्ट पर हंगामा भी मचाया था, इसकी कुछ वीडियो भी सामने आईं थी। इसमें वह कहते सुनी जा सकती है, ‘इसने ₹100-₹100 में महिलाओं बैठने को कहा था, ये बैठेगी वहाँ पर, मेरी माँ बैठी थी।”

कुलविंदर कौर का कहना था कि उसने कंगना रनौत को इसलिए थप्पड़ मारा क्योंकि उन्होंने किसान आंदोलन में बैठी महिलाओं को लेकर बयान दिया था। उसने बताया था कि इस किसान आंदोलन में उसकी माँ भी शामिल थी और उसे कंगना का बयान अखर रहा था।

कंगना रनौत ने इस मुद्दे के बाद एक वीडियो जारी किया था। उन्होंने बताया, “मैं बताना चाहती हूँ कि मैं पूरी तरीके से ठीक हूँ, सुरक्षित हूँ। आज जो चंडीगढ़ एयरपोर्ट पर जो हादसा सुरक्षा जाँच के दौरान हुआ। मैं सुरक्षा जाँच के बाद जैसे ही निकली, इसके बाद दूसरे केबिन में बैठी एक सुरक्षाकर्मी ने आकर मेरे मुँह पर मारा। वह गालियाँ देने लगी, उन्होंने पूछने पर बताया कि वह किसान आंदोलन का समर्थन करती हैं। मैं सुरक्षित हूँ लेकिन मैं पंजाब में उग्रवाद और आतंकवाद के बढ़ने को लेकर चिंतित हूँ।”

‘निवेशकों में भय पैदा कर रहे राहुल गाँधी’: पीयूष गोयल बोले- INDI को बढ़त मिलते ही मार्केट गिरा, मोदी सरकार की वापसी पर बाजार स्थिर हुआ

एग्‍ज‍िट पोल और स्‍टॉक मार्केट में ग‍िरावट को मिलाकर घोटाला बताने वाले कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी के आरोपों पर बीजेपी ने पलटवार किया है। राहुल गाँधी के आरोपों पर बीजेपी के वरिष्ठ नेता और निवर्तमान केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने कहा, राहुल गाँधी लोकसभा चुनाव में विपक्ष की हार से अभी भी उबर नहीं पाए हैं। वे अब मार्केट के लोगों का कॉन्फिडेंस कम कर रहे हैं। निवेशकों में भय पैदा करने की कोश‍िश कर रहे हैं।

पीयूष गोयल ने कहा कि भारत विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने जा रहा है और पूरी दुनिया उसको इसी न‍िगाह से देख रही है। उन्होंने कहा कि राहुल गाँधी द्वारा जेपीसी की माँग बेबुनियाद है।

इससे पहले राहुल गाँधी ने प्रेस कांफ्रेंस कर कहा था क‍ि चुनावी एग्‍ज‍िट पोल की वजह से शेयर बाजार में लोगों के 30 लाख करोड़ रुपये डूब गए, क्‍योंक‍ि प्रधानमंत्री और गृहमंत्री ने दावा किया था क‍ि चुनाव के बाद स्टॉक मार्केट तेजी से आगे बढ़ने वाला है। उन्‍होंने पूरे मामले की संयुक्‍त संसदीय समि‍त‍ि से जाँच कराने की माँग की। इसी का जवाब देते हुए पीयूष गोयल ने कहा, बाजार में उतार चढ़ाव सामान्‍य बात है। आम निवेशकों को फायदा मिलता रहता है। कॉन्ग्रेस को बताना चाह‍िए क‍ि उनके समय में मार्केट कैसे क्रैश होते थे। उन्‍हें निवेशकों का कॉन्फिडेंस कम करने की कोश‍िश नहीं करनी चाहिए।

पीयूष गोयल ने कहा, राहुल को चिंता करनी चाहिए कि रुझान में जब उनको बढ़त मिली तो मार्केट गिरा। वो ये साबित करता है कि जनता निवेशकों को उनपर भरोसा नहीं है। जब ये पक्का हो गया है कि मोदी सरकार ही है तब निवेशकों का भरोसा बढ़ा है। उन्‍होंने दावा किया क‍ि सारे रिफार्म जारी रहेंगे। हमारे सहयोगी दल ये समझते हैं। प्रधानमंत्री मोदी के विजन से भारत आगे बढ़ रहा है। इंडी गठबंधन सिर्फ सीट एडजस्टमेंट बन गया है।

गोयल ने कहा, “दुनिया भर में इस तरह से इक्विटी मार्केट चलती है। देखना यह है कि लंबे अरसे में इक्विटी मार्केट में क्या हुआ है। देश के निवेशक जानते हैं कि पिछले दस वर्ष के सफलतापूर्वक मोदी सरकार के कार्यकाल में हमारा मार्केट कैप पहली बार 400 लाख करोड़ का कीर्तिमान हासिल किया है। पीएसयू का मार्केट कैप भी चार गुना मोदी सरकार के कार्यकाल में बढ़ा है। यूपीए काल में भारत का मार्केट कैप मात्र 67 लाख करोड़ रुपये था। आज यह बढ़कर 415 लाख करोड़ रुपये हो गया है। यह 348 लाख करोड़ रुपये की बढ़त पिछले दस वर्षों में हुई है।”

‘कंगना रनौत को सुरक्षा जाँच को लेकर पड़ा थप्पड़’: ‘फैक्ट-चेकर’ मोहम्मद जुबैर ने फिर फैलाया झूठ, हमलावर बोली- किसान आंदोलन पर कमेंट से थी नाराज

चंडीगढ़ एयरपोर्ट पर बीजेपी सांसद और अभिनेत्री कंगना रनौत को CISF कॉन्स्टेबल ने थप्पड़ जड़ा था, जब वो 6 जून को दिल्ली के लिए उड़ान भरने वाली थी। कंगना रनौत ने खुद हमला करने वाली कॉन्स्टेबल कुलविंदर कौर से पूछा था कि उसने ऐसा क्यों किया, जिसके बाद उसने साफ तौर पर कहा था कि वो ‘किसान आंदोलन को लेकर कंगना के कमेंट’ से नाराज थी। हालाँकि इस मामले में फेक न्यूज पेडलर मोहम्मद जुबैर ने फर्जी खबर फैलाने की कोशिश की।

खुद को फैक्ट चेकर कहने वाले मोहम्मद जुबैर ने कंगना रनौत के बयान को ही खारिज कर दिया, जबकि वो खुद पीड़ित हैं। जुबैर ने एक्स पर दावा किया कि ‘कंगना पर हमला किसान आंदोलन पर कमेंट के लिए नहीं, बल्कि सिक्योरिटी चेक के दौरान प्रक्रिया का पालन न करने की वजह से थप्पड़ पड़ा।’ ऑल्ट न्यूज के को-फाइंडर मोहम्मद जुबैर ने हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट को एक्स पर पोस्ट किया, जिसमें दावा किया गया है कि कंगना को “सुरक्षा जांच के दौरान सुरक्षा कर्मियों को धक्का देने के लिए थप्पड़ मारा गया था, क्योंकि अभिनेता-राजनेता ने सुरक्षा जाँच के दौरान अपना फोन ट्रे में रखने से इनकार कर दिया था। कंगना रनौत दोपहर 3 बजे विस्तारा की फ्लाइट से दिल्ली के लिए रवाना हुईं”।

हालाँकि बाद में जुबैर ने कंगना के पक्ष को भी जोड़ा, लेकिन उसे ‘सोशल मीडिया पर अपुष्ट दावा’ करार दिया। उसने आगे लिखा, ‘उम्मीद है कि CISF वजह का खुलासा करेगी।’

जुबैर ने किसान आंदोलन पर कंगना के बयान को ‘अपुष्ट सोशल मीडिया दावा’ करार दिया, जोकि पूरी तरह से गलत है। क्योंकि ये दावा किसी आम सोशल मीडिया यूजर ने नहीं किया, बल्कि ये बात खुद कंगना रनौत के हवाले से सामने आई। इस घटना के बाद दिल्ली पहुँचनी कंगना रनौत ने एक वीडियो भी जारी किया, जिसमें उन्होंने साफ तौर पर कहा कि उन्होंने उन्हें थप्पड़ मारने वाली कुलविंदर कौर से पूछा था कि उसने हमला क्यों किया, इसके जवाब में खुद कुलविंदर कौर ने कहा कि वो कंगना रनौत के किसानों के प्रदर्शन के दौरान दिए बयान से नाराज थी।

रनौत ने यह भी कहा कि कॉन्स्टेबल को एयरपोर्ट पर सुरक्षा जाँच के लिए बगल की केबिन में तैनात किया गया था, इसका मतलब है कि कुलविंदर कौर ने रनौत की तलाशी नहीं ली। और इसलिए, यह दावा कि कंगना को इसलिए थप्पड़ मारा गया क्योंकि उन्होंने अपना फोन ट्रे में रखने से इनकार कर दिया और कॉन्स्टेबल को धक्का दिया, ये पूरी तरह से झूठ है। इसके अलावा ये भी संभावना नहीं है कि कंगना रनौत ने सिक्योरिटी जाँच से जुड़े प्रोटोकॉल का पालन करने इनकार कर दिया हो, क्योंकि सारी बातें सामने आ चुकी हैं।

यहाँ ध्यान देने वाली बात ये है कि एयरपोर्ट पर हुई उस घटना से जुड़े कई वीडियो सोशल मीडिया पर भी दिख रहे हैं, जिसमें कथित तौर पर कुलविंदर कौर को ये कहते हुए सुना जा सकता है कि ‘उसने कंगना रनौत को इसलिए माना, क्योंकि कंगना ने किसान आंदोलन पर जो बयान दिया था, वो गलत था।’ कुलविंदर कौर ने बताया कि उसकी माँ भी किसान आंदोलन में शामिल हुई थी। वो कंगना रनौत के साल 2020 में किए ट्वीट से नाराज थी, जिसमें रनौत ने कहा था कि किसानों के आंदोलन में हिस्सा लेने वाली महिलाएँ 100-100 रुपए लेकर आ रही हैं।

इन वीडियो से ये बात तो पूरी तरह साफ हो जाता है कि सीआईएसएफ कॉन्स्टेबल ने कंगना रनौत के ट्वीट की नाराजगी की वजह से हमला किया था। जबकि वो कहीं भी ‘सिक्योरिटी जाँच के लिए मोबाइल ट्रे में नहीं रखने’ जैसी कोई भी बात कहती नहीं दिख रही है। ऐसे में जुबैर जो झूठ ‘सोशल मीडिया पर दावे’ के हवाले से फैला रहा था, वो पूरी तरह से गलत निकला है।

बता दें कि कंगना रनौत ने 2020 में एक बुजुर्ग महिला की ओर इशारा करते हुए टिप्पणी की थी, जिन्हें तीन किसान कानूनों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन में देखा गया था, उन्होंने महिला की गलत पहचान बिलकिस बानो के रूप में की थी।

रनौत ने ट्वीट किया था, “वह वही दादी हैं, जो टाइम मैगजीन में सबसे शक्तिशाली भारतीय होने के लिए छपी थीं… और वह 100 रुपये में उपलब्ध हैं। पाकिस्तानी जुर्माने ने शर्मनाक तरीके से भारत के लिए अंतरराष्ट्रीय पीआर को हाईजैक कर लिया है। हमें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हमारे लिए बोलने के लिए अपने लोगों की जरूरत है।” CISF कांस्टेबल कुलविंदर कौर के अनुसार, उनकी माँ भी उस विरोध प्रदर्शन का हिस्सा थीं, और वह कंगना की टिप्पणियों से आहत थीं क्योंकि यह बात उनकी माँ पर भी लागू होती थी।

इसके अलावा ये भी बता दें कि अगर कोई यात्री सुरक्षा जाँच का पालन करने से इनकार करता है, जैसे कि फोन को एक्स-रे जाँच के लिए ट्रे पर न रखना, तो भी सुरक्षा कर्मियों को ऐसे किसी भी यात्री पर हमला करने का अधिकार नहीं है। प्रोटोकॉल के मुताबिक, ऐसे यात्रियों को सुरक्षा जाँच में सहयोग न करने के लिए विमान में चढ़ने से मना कर दिया जाएगा और अगर यात्री इस पर हंगामा करता है, तो उसे स्थानीय पुलिस के हवाले किया जा सकता है। किसी भी परिस्थिति में, एयरपोर्ट पर तैनात CISF का कोई भी जवान सुरक्षा जाँच का पालन न करने पर किसी यात्री को थप्पड़ नहीं मार सकता।

जानकारी के मुताबिक, इस मामले में केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल की कॉन्स्टेबल को निलंबित कर दिया गया है और उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली गई है।

मूल रूप से ये रिपोर्ट अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित की गई है। मूल खबर पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।

संसद में अवैध रूप से घुसने के 6 आरोपितों पर UAPA के तहत चलेगा केस, उपराज्यपाल ने दी मंजूरी: सत्र के दौरान फेंका था धुएँ का कनस्तर, लंबे समय तक की थी प्लानिंग

सुरक्षा में सेंध लगाकर संसद में घुसने वाले 6 आरोपितों पर गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत केस चलाने की मंजूरी दिल्ली के उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने दे दी है। आरोपितों के नाम- ललित झा, सागर शर्मा, मनोरंजन डी, अमोल धनराज शिंदे, नीलम रानोलिया और महेश कुमावत हैं। इन पर संसद में घुसने और लोकसभा सत्र के दौरान धुएँ के कनस्तर फेंकने के आरोप हैं।

संसद का इलाका अति संवेदनशील क्षेत्र में आता है और यहाँ हाई सिक्योरिटी रहती है। हाई सिक्योरिटी होने के बावजूद आरोपित सदन में दो लोग घुस गए थे। जिस समय उन्होंने इस वारदात को अंजाम दिया था, उस समय संसद का शीतकालीन अधिवेशन चल रहा था। इन लोगों ने दर्शक दीर्घा में जाकर सरकार के खिलाफ नारे लगाए थे। इस दौरान दर्शक दीर्घा से दोनों आरोपित नीचे कूद गए थे।

दोनों ने कनस्तर फेंके थे, जिससे सदन में धुआँ फैल गया था। अचानक हुई घटना से सदन में अफरा-तफरी का माहौल बन गया था। इस पूरे मामले का साजिशकर्ता ललित झा है। ललित ने इसका वीडियो एक युवक को भेजकर कहा था, “प्रोटेस्ट किया हूँ। सर्कुलेट करो।” बवाल के बाद ललित झा ने विजय पथ पुलिस स्टेशन में आकर सरेंडर कर दिया था। बाकी आरोपितों को भी गिरफ्तार कर लिया गया था।

धुएँ की केन छिपाने के लिए बनवाए थे विशेष जूते

इस मामले में एक हैरान करने वाली जानकारी सामने आई थी। दरअसल, आरोपितों ने इस घटना के लिए लखनऊ के एक मोची से विशेष जूते बनवाए थे, जिनके तलवे में 2.5 इंच गहरी जगह थी। धुएँ के केन इसी स्पेस में छिपाकर संसद में लाए गए। इनका प्रयास था कि 1929 में भगत सिंह ने जो ब्रिटिश शासन के साथ जो किया था, वही काम वो भारत सरकार के साथ कर दें। हालाँकि, सांसदों की तेजी के कारण ये पकड़े गए थे। इनके पास से पर्चे भी बरामद हुए थे। इन पर लिखा था- ‘प्रधानमंत्री लापता है। जो उन्हें ढूँढेगा उन्हें स्विस बैंक से पैसा मिलेगा।’

संसद में रेकी करके दिया घटना को अंजाम

संसद में हुई घटना को अंजाम देने के लिए ललित झा और उसके साथी काफी समय से प्लानिंग किया था। उन्होंने संसद भवन की 2 बार रेकी भी की थी। संसद भवन की रेकी सागर शर्मा और मनोरंजन ने मार्च और जुलाई 2023 महीने में की थी। इन्हें पहली बार में ही बड़ी सफलता मिल गई थी और वो संसद में घुसने में कामयाब भी हो गए थे।

सभी आरोपित फेसबुक पेज के माध्यम से एक-दूसरे से मिले थे। बाद में वे लंबे समय से संसद में घुसने की प्लानिंग कर रहे थे। वो लोग आपस में कई बार मिले थे और आखिरी बार गुरुग्राम में विशाल के फ्लैट में एक साथ भी रहे थे। पुलिस सूत्रों ने कहा था कि छह लोगों ने साज़िश रचकर और अच्छी तरह से किए गए समन्वय के जरिए घटना को अंजाम दिया था।

उस समय पुलिस ने बताया था कि ये सभी आरोपित इंस्टाग्राम और अन्य सोशल मीडिया मंचों के जरिए एक-दूसरे के संपर्क में थे, जहाँ उन्होंने साज़िश रची थी। यही नहीं, ये सभी 6 आरोपित संसद के अंदर जाना चाहते थे, लेकिन केवल दो को ही पास मिल पाया था।