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‘ईदगाह के पास है बरगद का पेड़, नहीं करने देंगे पूजा’: बिहार के मधुबनी में वट सावित्री पूजा करने आई महिलाओं पर हमला, पिछले साल भी हुआ था बवाल

बिहार के मधुबनी में वट सावित्री व्रत के बाद पूजा कर रही हिंदू महिलाओं और पुरुषों पर मुस्लिमों की भीड़ ने धावा बोल दिया। इस हमले और मारपीट में एक दर्जन लोग घायल हो गए हैं। बताया जा रहा है कि ईदगाह से करीब 50 फीट की दूरी पर पुराना बरगद का पेड़ है, जहाँ हिंदू समुदाय प्राचीन समय से ही पूजा करता आ रही है, लेकिन मुस्लिम समुदाय पिछले कुछ सालों से विरोध करता आ रहा है। इस बार भी जब हिंदू पूजा करने लगे, तो मुस्लिमों ने मना किया और फिर हमला बोल दिया।

लाइव हिंदुस्तान की रिपोर्ट के मुताबिक, बिहार के मधुबनी जिले में स्थित बासोपट्टी पूर्वी पंचायत के कौआहा में वट सावित्री पूजा के दौरान मुस्लिमों की भीड़ ने हिंदुओं पर हमला कर दिया। ये हमला गुरुवार (06 जून 2024) को हुआ, जहाँ पूजा कर रहे हिंदू पक्ष पर हमला बोल दिया गया, जिसके बाद दो पक्षों के बीच जमकर मारपीट हुई। इस हमले में कई लोग घायल हो गए, जिसमें कई महिलाएँ भी शामिल हैं। घायलों को बासोपट्टी सीएचसी में भर्ती कराया गया। इस दौरान मौके पर लोगों को समझाने पहुँची बासोपट्टी पुलिस के कई जवानों को भी चोटें लगी हैं। इस घटनाक्रम के बाद पूरे गाँव में तनाव का माहौल है और एसडीओ बीरेंद्र कुमार के नेतृत्व में पुलिस गाँव में कैम्प कर रही है।

ग्रामीणों के मुताबिक, कौआहा स्थान के एक सैरात के पोखरा के दक्षिणवारी भिंडा पर ईदगाह है। उसकी चारदीवारी से करीब 50 फुट की दूरी पट वट का वृक्ष है। यहाँ हिंदू पक्ष के लोग पूजा करते रहे हैं, तो मुस्लिम पक्ष इसे ईदगाह की प्रॉपर्टी बताता है और उस पर हक जमाता है। पिछले साल भी यहाँ पर विवाद हुआ था और इस साल भी जमकर दोनों पक्षों में मारपीट हुई है। प्रशासन का कहना है कि वट वृक्ष और जिस जमीन पर वृक्ष है, उस जमीन के कागजात किसी के भी पास नहीं है।

जानकारी के मुताबिक, हिंदू महिलाओं के पूजा करने के समय मुस्लिम पक्ष के दर्जनों लोग मौके पर पहुँच गए और पूजा-पाठ कर रही महिलाओं और पुरुषों को अपना निशाना बनाया। यही नहीं, यहाँ पर पथराव भी हुआ। सूचना मिलते ही मौके पर पहुँची पुलिस ने बीच-बचाव की कोशिश की, तो कई पुलिस कर्मी भी घायल हो गए, जिसके बाद कई अधिकारी मौके पर पहुँचे और एसएसबी जवानों ने गाँव में फ्लैग मार्च किया।

इस पूरे घटनाक्रम के बाद थानाध्यक्ष अरविन्द कुमार, बीडीओ अजीत कुमार, सीओ पूजा कुमारी, इंस्पेक्टर सरवर आलम जैसे अधिकारियों ने पुलिस और एसएसबी जवानों के साथ फ्लैग मार्च किया। थानाध्यक्ष अरविन्द कुमार ने बताया कि गाँव में स्थिति नियंत्रण में है। थानाध्यक्ष अरविन्द कुमार ने बताया कि मामले को लेकर दोनो पक्षों से प्राथमिकी दर्ज करने की कार्रवाई की जा रही है। तीसरी प्राथमिकी पुलिस के तरफ से भी दर्ज की गई है। इसमें दोनों पक्षों से 30 से ऊपर लोगों को नामजद किया गया है। आरोपियों को गिरफ्तार करने के लिए पुलिस छापेमारी कर रही है।

NDA का नेता चुने जाने के बाद नरेंद्र मोदी ने आडवाणी-मुरली मनोहर का लिया आशीर्वाद,9 जून को तीसरी बार प्रधानमंत्री पद की लेंगे शपथ

नरेन्द्र मोदी को शुक्रवार (7 जून, 2024) को राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) ने अपना संसदीय दल का नेता चुना। इससे पहले पीएम मोदी भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी और पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से मिलने पहुँचे।

पीएम मोदी ने इससे पहले आधिकारिक रूप से NDA के घटक दलों का समर्थन हासिल किया। पुराने संसद भवन के केन्द्रीय कक्ष में हुई NDA सांसदों की बैठक में घटक दलों ने उन्हें अपना समर्थन दिया। JDU मुखिया नीतीश कुमार, TDP मुखिया चंद्रबाबू नायडू, शिवसेना मुखिया एकनाथ शिंदे और लोजपा के मुखिया चिराग पासवान ने इस बैठक में प्रधानमंत्री मोदी को अपना नेता घोषित किया और उन्हें संसदीय दल का नेता चुना। इस दौरान NDA नेताओं ने भाजपा के साथ मिलकर काम करने की बात कही।

पीएम मोदी इसके बाद भाजपा नेता और पूर्व उप प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी और पूर्ण केन्द्रीय मंत्री मुरली मनोहर जोशी से मिलने उनके दिल्ली स्थित आवास पर पहुँचे। वह पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से भी मिले। यहाँ उन्होंने सरकार बनाने का दावा पेश करने से पहले दोनों नेताओं का आशीर्वाद लिया और बातचीत की।

नई सरकार का गठन रविवार (9 जून, 2024) को होगा। नरेन्द्र मोदी रविवार (9 जून, 2024) को राष्ट्रपति भवन में तीसरी बार देश के प्रधानमंत्री पद की शपथ लेंगे। उन्हें राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू पद और गोपनीयता की शपथ दिलाएँगी। उनके साथ ही नए मंत्रिमंडल को भी शपथ दिलाई जाएगी।

शपथ लेने के साथ ही वह जवाहर लाल नेहरू के बाद लगातार तीन बार सरकार बनाने वाले नेता बन जाएँगे। वह कुल कार्यकाल के मामले में भी अभी देश के इतिहास में तीसरे नम्बर पर हैं। उनसे अधिक समय तक केवल जवाहर लाल नेहरू और इंदिरा गाँधी ही प्रधानमंत्री रही हैं।

नरेन्द्र मोदी 26 मई, 2014 को पहली बार देश के प्रधानमंत्री बने थे। 2019 में वह दोबारा देश के प्रधानमंत्री बने। इससे पहले वह गुजरात के मुख्यमंत्री रहे थे। उनके नेतृत्व में NDA ने 2024 लोकसभा चुनावों में 290 से अधिक सीटें हासिल की हैं जो कि स्पष्ट बहुमत है।

चिकन लाकर बनाया, पूरे परिवार ने खाया: प्रज्जवल रेवन्ना की हार की पीड़िता ने ऐसे मनाई खुशी, सेक्स स्कैंडल में कर्नाटक के नेता की न्यायिक हिरासत 10 दिन के लिए बढ़ी

सेक्स कांड मामले में प्रज्वल रेवन्ना हर ओर से घिरा है। एक ओर बेंगलुरु कोर्ट ने उसकी न्यायिक हिरासत 10 जून तक बढ़ा दी गई है। दूसरी ओर लोकसभा चुनावों में उसे करारी हाल मिली है। इन दोनों खबरों को सुनने के बाद सेक्स कांड की पीड़िताएँ जश्न मना रही हैं।

द न्यूज मिनट की रिपोर्ट के अनुसार, सुनीता (बदला हुआ नाम) नाम की एक पीड़िता ने कहा कि वो खुश है कि प्रज्वल हार गया। शुरू में जब वो लीड कर रहा था तब बहुत डर लगा। मगर बूाद में श्रेयस पटेल को लीड करता देख राहत आई। सुनीता बोलीं, “मैं इतनी खुश थी मैं जाकर बाहर से मिठाई लाई और चिकन लाई। रात में हमने यही खाया।”

प्रज्वल को लेकर सुनीता* ने बताया कि उनके दो बच्चे हैं। 10 साल के बेटे को नहीं पता कि प्रज्वल रेवन्ना ने किया क्या है, लेकिन वो भी रेवन्ना की हार सुन खुश हो गया। सुनीता कहती हैं कि उन्हें अच्छे से याद है ये मामला खुलने के बाद रेवन्ना की माँ ने उन्हें जब घर से निकाला था तो वो लोग बारिश में सोए थे। सुनीता कहती हैं कि उनकी माँ प्रज्वल रेवन्ना की माँ की रिश्तेदार थीं और बहुत समय से काम उनके घर में काम करती थीं।

कथिततौर पर रेवन्ना परिवार ने उनसे उनका घर बिकवाया, फिर उन्हें एक जमीन होलेनरसिपुरा शहर में दिलाई। यहाँ उन्होंने घर बेचकर जो पैसा आया था उससे फिर घर बनवाया, लेकिन बावजूद इसके उन्हें उस जमीन से बेदखल कर दिया गया था। ऐसे ज्यादती सहने के बाद जब प्रज्वल रेवन्ना की हार चुनावों में देखने को मिली तो सुनीता ने इसकी खुशी मनाई।

बता दें कि प्रज्वल रेवन्ना 4 जून को हासन लोकसभा सीट पर कॉन्ग्रेस के श्रेयस पटेस से 42 हजार 649 वोटों के अंतर से हारा। इस हार का एक प्रमुख खारण सुनीता और माँ गिरिजा है। उन्ही दोनों ने हिम्मत दिखाते हुए कन्नड़ टीवी पर रेवन्ना का असली चेहरा खोला था। इसके बाद रेवन्ना भारत से दजर्मनी भाग गया था। बाद में उसके भारत आते ही उसे गिरफ्तार किया गया।

पुलिस ने भी जाँच में पाया था कि लगबग 70 महिलाओ के 3000 वीडियो थे, जिनमें से 4 महिलाएँ रेवन्ना के खिलाफ आवाज उठाने को खड़ी हुई। शुरू मे आवाज उठाने के बदले उन्हें बहिष्कार झेलना पड़ा लेकिन बाद मे उनकी सुनवाई हुई और आरोपित पकड़ा गया।

पैर छूने के लिए झुके नीतीश कुमार, नरेंद्र मोदी ने पकड़ लिए हाथ… क्या बिहार के लिए आ गया है वह क्षण जिसकी 10 साल से प्रतीक्षा, लौटेगा ‘सुशासन’ का पहला दौर

NDA (राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन) के घटक दलों की बैठक शुक्रवार (7 जून, 2024) को नई दिल्ली में संपन्न हुई, जिसमें नरेंद्र मोदी को संसदीय दल का नेता चुन लिया गया। इस बैठक में सबका ध्यान नीतीश कुमार पर था, जो अब तक कई बार पलटी मार चुके हैं। 1998 से 2013 तक वो भाजपा के साथ रहे, फिर राजद के साथ मिल कर उन्होंने सरकार बना ली। 2017 में फिर भाजपा के साथ आ गए, 2019 का लोकसभा चुनाव भाजपा के साथ लड़े, फिर 2020 का चुनाव भाजपा के साथ लड़ने के बाद राजद के साथ चले गए। अब फिर से वो भाजपा के साथ आए हैं।

2024 का लोकसभा चुनाव में NDA को 40 में से 30 सीटें प्राप्त हुई हैं, जदयू-भाजपा दोनों ने 12-12 सीटों पर जीत दर्ज की। NDA की ताज़ा बैठक से पहले मीडिया में अटकलें थीं कि जदयू दबाव की राजनीति खेल रही है और रेल समेत कई मंत्रालय माँगे गए हैं। हालाँकि, जिस तरह से नीतीश कुमार ने इस बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पाँव छूने की कोशिश की और पीएम मोदी ने उन्हें रोकते हुए गले लगाया, उसके बाद स्पष्ट हो गया है कि जदयू और भाजपा में कम से कम फ़िलहाल के लिए तो कोई तनातनी नहीं है।

पाँव छुए, पीछे से जाने की कोशिश: नीतीश कुमार ने क्या-क्या कहा

एक और बात ध्यान देने लायक है कि मंच पर जब नीतीश कुमार बोलने के लिए जा रहे थे तो वो कुर्सी के पीछे से जाना चाहते थे, लेकिन पीएम मोदी ने हस्तक्षेप करते हुए उन्हें अपने से आगे से जाने के लिए कहा। इस गेस्चर को देख कर आप समझ सकते हैं कि दोनों के मन में एक-दूसरे के लिए कितना सम्मान है। इसके लिए हमें नीतीश कुमार के उस संबोधन को समझना होगा, जो उन्होंने नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री पद के लिए समर्थन दिए जाने के राजनाथ सिंह के प्रस्ताव का अनुमोदन करते हुए उन्होंने कहा।

नीतीश कुमार ने NDA की इस बैठक में कहा कि उनकी पार्टी जदयू खुल कर भाजपा संसदीय दल के नेता नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को समर्थन देती है और ये बहुत ख़ुशी की बात है कि ये पिछले एक दशक से प्रधानमंत्री हैं और आगे भी बनने जा रहे हैं। उन्होंने इस दौरान बड़ी बात कही कि उन्हें भरोसा है कि हर राज्य का जो कुछ भी बचा हुआ है, इस कार्यकाल में PM नरेंद्र मोदी वो पूरा कर देंगे। उन्होंने साफ़ किया कि वो पूरे तौर पर आने वाले समय में पीएम मोदी के साथ रहेंगे।

नीतीश कुमार ने कहा, “जो कुछ भी है, और जिस तरह से आप करेंगे, बहुत अच्छा है। इस बार इधर-उधर जो लोग कुछ जीत गए हैं, अगली बार आप आइएगा तो ये लोग वो भी हारेंगे। इनलोगों ने बिना मतलब की बातें कर-कर के ये सब किया है। इन्होंने आज तक कोई काम नहीं किया है। देश की कोई सेवा नहीं की, लेकिन आपने सेवा की है और आपको मौका मिला है। आगे उनलोगों के लिए कोई गुंजाइश नहीं रहेगी, सब खत्म हो जाएगा। देश बहुत आगे बढ़ेगा, बिहार का भी जो कुछ बचा हुआ है सब कार्य हो ही जाएगा।”

नीतीश कुमार ने कहा कि बिहार सबसे पुराना इलाका है, हम पूरे तौर पर हर तरह से आपके साथ हैं, आप जो चाहिएगा उसमें हम साथ देंगे। उन्होंने कहा कि सब कोई मिल कर चलेंगे, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ रहेंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश को आगे बढ़ाएँगे। इस दौरान वो नरेंद्र मोदी के शपथग्रहण के लिए भी बेचैन दिखे और कहा कि जल्द से जल्द शपथग्रहण कर के काम शुरू करना चाहिए। उन्होंने कहा कि इसी में देश का फायदा है, कोई इधर-उधर करना भी चाहता है तो इसका कोई फायदा नहीं है।

बिहार को मिल सकता है विशेष पैकेज, तेज़ी से होंगे कार्य

नीतीश कुमार के संबोधन की 3 बड़ी बातें हैं – उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नेतृत्व खुल कर स्वीकार है, गठबंधन में सभी दल एकदम खुश हैं और बिहार को कुछ विशेष मिलना चाहिए। बता दें कि बिहार को विशेष राज्य का दर्जा नीतीश कुमार की पुरानी माँग है। इस बार उन्होंने NDA की बैठक में खुद कर ऐसा नहीं कहा लेकिन उनका ‘जो कुछ भी बचा हुआ है’ वाला बयान इसी तरफ इशारा करता है। यानी, विशेष दर्जा न सही तो कम से कम विशेष पैकेज तो मिल जाए राज्य को।

आपको पीएम नरेंद्र मोदी का एक 2015 का भाषण याद होगा। तब उन्होंने जनता से पूछ कर बिहार को पैकेज दिया था। उन्होंने पूछा था कि 50,000 करोड़ दिया जाए या कितना दिया जाए? फिर वो 71,000 करोड़ तक पहुँचे, 75,000 करोड़ तक पहुँचे, फिर इसी तरह 80-90 तक पहुँच गए। फिर उन्होंने वादा किया कि बिहार को सवा लाख करोड़ रुपए का पैकेज दिया जाएगा। उन्होंने कहा था कि बिहार का भाग्य बदलने के लिए ये 1.25 लाख करोड़ रुपए दिए जाएँगे।

अब हो सकता है कि बिहार में डबल इंजन की सरकार है और सारी गलतफहमियाँ दूर हो गई हैं तो बिहार को सवा लाख करोड़ रुपए का पैकेज औपचारिक रूप से आवंटित कर दिया जाए। जहाँ तक मंत्रालय वगैरह की बात है, वो हर सत्ताधारी गठबंधन में चलता रहता है और भाजपा जब 2014-19 में पूर्ण बहुमत के साथ सत्ता में थी तब भी उसने गठबंधन सहयोगियों को मंत्रालय दिए थे। नीतीश कुमार ने अब तक परिपक्वता का परिचय दिया है इस चुनाव में, आगे भी ऐसा रहा तो ये बिहार के लिए बहुत अच्छी बात है।

बिहार में विकास कार्यों में तेज़ी आएगी। 2005-2013 तक बिहार 8 वर्षों तक जिस रफ़्तार से दौड़ा था, वो रफ़्तार वो फिर से पकड़ लेगा। केंद्र सरकार का सहयोग होगा तो परियोजनाएँ सही समय पर पूरी होंगी। बिहार को अधिक मंत्री मिलेंगे तो जनता का काम ज़्यादा होगा। संसद में प्रतिनिधित्व अच्छा रहेगा। 11 विपक्षी सांसद भी हैं राज्य में, ऐसे में बिहार की आवाज़ वो भी उठाएँगे ही। नीतीश कुमार ने प्रतीकात्मक रूप से जनता को ये सन्देश दे दिया है कि इस बार वो कहीं नहीं जाने वाले हैं और उनकी पार्टी पूरी तरह से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ है।

नीतीश कुमार को लेकर बिहार में कुछ आक्रोश हो सकता है, लेकिन इसमें कोई शक नहीं है कि उनकी छवि बेदाग़ रही है। पश्चिम बंगाल के गैसल में जब ट्रेन हादसे में 300 लोग मारे गए थे तब रेल मंत्री रहे नीतीश कुमार ने इसकी नैतिक जिम्मेदारी देते हुए इस्तीफा दे दिया था। अगस्त 1999 का ये वीडियो आज तक वायरल होता है, जिसमें उन्होंने कहा था कि ये रेलवे की पूर्ण विफलता है, आपराधिक चूक है और इसीलिए वो इस्तीफा दे रहे हैं। लोग नीतीश कुमार को इसी छवि में देखना चाहते हैं।

2025 है चुनौती, गठबंधन का मौजूदा स्वरूप में रहना ज़रूरी

नीतीश कुमार ने एक तरह से साफ़ कर दिया है कि 2029 का लोकसभा चुनाव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में ही लड़ा जाएगा। इसका सीधा अर्थ है कि 2025 में भाजपा, RLJP, HAM(S), RLM और JDU साथ मिल कर लड़ेगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, चिराग पासवान, जीतन राम माँझी और उपेंद्र कुशवाहा साथ आ गए तो 2025 में तेजस्वी यादव के बढ़ते ग्राफ को रोका जा सकता है, क्योंकि RJD ने कॉन्ग्रेस और CPI(ML) के साथ मिल कर एक बड़ा वोट बैंक अपने लिए तैयार कर लिया है।

बिहार का फायदा अभी स्थिरता में है और ये स्थिरता तभी बनी रह सकती है जब मौजूदा गठबंधन केंद्र और राज्य में साथ-साथ काम करता रहे। 2013 से लेकर अब तक नीतीश कुमार के बार-बार पलटी मारने और तेजस्वी यादव के दो-दो बार उप-मुख्यमंत्री बन जाने के कारण ‘जंगलराज’ का ट्रेलर जनता ने देखा और बिहार में हो रहे कामकाज में अड़चन आई। नीतीश कुमार ने जो परिपक्वता दिखाई है NDA की बैठक में, शायद आगे भी यही स्थिति रहे तो बिहार के लिए बेहतर है।

‘बीमार सास पोता-पोती संग खेलना चाहती है’: बीवी ने लगाई फरियाद, हाई कोर्ट ने हत्या के दोषी को संतान प्राप्ति के लिए 30 दिन की परोल दी, शादी के लिए भी मिली थी परोल

कर्नाटक उच्च न्यायालय ने हत्या के दोष में आजीवन कारावास की सजा काट रहे 28 वर्षीय आनंद को संतान पैदा करने के लिए 30 दिन की परोल दी है। कैदी की 31 वर्षीय पत्नी ने संतान प्राप्ति के अपने अधिकार और अपनी सास की स्वास्थ्य स्थिति के आधार पर अपने पति की रिहाई की माँग के लिए याचिका दाखिल की थी।

हाई कोर्ट के न्यायाधीश एसआर कृष्ण कुमार ने कैदी को नजदीकी थाने में हर हफ्ते हाजिरी देने का भी आदेश दिया। न्यायाधीश ने आनंद के आचरण के आधार पर पत्नी को परोल की अवधि बढ़ाने का अनुरोध करने की भी अनुमति दी। पत्नी ने याचिका में कहा कि उसे संतान के अधिकार से वंचित किया जा रहा है। उसकी सास बुजुर्ग और बीमार हैं। वह अपने पोते-पोतियों के साथ समय बिताना चाहती थी।

दरअसल, कोलार निवासी आनंद को हत्या के आरोप में गिरफ्तार किया गया था और साल 2019 में जिला सत्र न्यायालय ने उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। उसने इस फैसले को कर्नाटक उच्च न्यायालय में चुनौती दी, जिसने उसकी सजा को घटाकर 10 साल कर दिया। इस समय तक आनंद पहले ही पाँच साल जेल में बिता चुका था।

इससे पहले 5 अप्रैल से 20 अप्रैल 2023 तक की पिछली परोल के दौरान आनंद ने याचिकाकर्ता से विवाह किया था। शादी के बाद पत्नी ने अपने पति के साथ अधिक समय बिताने के लिए 60 दिन की विस्तारित पैरोल माँगी। आनंद के जेल लौटने के बाद उसने जेल अधिकारियों से 90 दिन की पैरोल माँगी, जिसे अस्वीकार कर दिया गया था।

फिर उसने गर्भधारण करने के उद्देश्य से कर्नाटक उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। अदालत ने अब संभावित विस्तार के साथ 30 दिन की पैरोल मंजूर की है। हाईकोर्ट के निर्देशानुसार परप्पना अग्रहारा केंद्रीय कारागार के जेल अधीक्षक आनंद को 5 जून से 4 जुलाई तक रिहा करेंगे। इस बार उसने बच्चा पैदा करने के अपने अधिकार के तहत अपने पति के लिए यह परोल माँगी है।

हाई कोर्ट ने हाल ही में एक याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें एक पति ने पारिवारिक अदालत द्वारा अलग रह रही अपनी पत्नी और नाबालिग बच्चे को दिए गए अंतरिम भरण-पोषण भत्ते पर सवाल उठाया था। न्यायमूर्ति सचिन शंकर मगदुम ने पति की दलील को खारिज कर दिया कि नौकरी छूटने के बाद वह बेरोजगार है और अंतरिम भरण-पोषण देने के लिए उसके पास आय के अन्य स्वतंत्र स्रोत नहीं हैं।

अदालत की एकल पीठ के न्यायाधीश सचिन शंकर मगदुम ने कहा कि पति की आर्थिक स्थिति चाहे जो भी हो, अगर उसने अपनी पत्नी और नाबालिग बच्चों को छोड़ दिया है तो वह उनका भरण-पोषण करने के लिए बाध्य है और वह अपनी जिम्मेदारियों से पीछे नहीं हट सकता। इसलिए उसे एक निश्चित रकम देनी होगी।

पारिवारिक अदालत ने पत्नी के लिए 7,000 रुपए और बच्चे के लिए 3,000 रुपए का अंतरिम भरण-पोषण देने का आदेश दिया था। न्यायमूर्ति मगदुम ने कहा कि वर्तमान समय में महंगाई लगातार बढ़ रही है और जीवनयापन की लागत बहुत अधिक है। ऐसे में पत्नी को खुद का भरण-पोषण करने, नाबालिग बेटी का जीवन चलाने और चल रहे मुकदमे को लड़ने के लिए उक्त राशि की आवश्यकता होगी।

ओरेकल का इंजीनियर, U-19 में टीम इंडिया सितारा, अब बाबर की फौज को धूल चटाई: जानिए कौन हैं सौरभ नेत्रावलकर, T-20 वर्ल्ड कप के सुपर ओवर से हुए हिट

आईसीसी टी-20 क्रिकेट विश्वकप में अब तक का सबसे बड़ा उलटफेर हुआ है। अमेरिका ने सुपर ओवर तक खिंचे मैच में पाकिस्तान को हरा कर सभी को चौंका दिया है। इस मैच में जीत के हीरो भारतीय मूल के खिलाड़ी रहे, जो अब काफी चर्चा बटोर रहे हैं। अमेरिका की जीत में जिन भारतीय खिलाड़ियों ने सर्वाधिक योगदान दिया, उनमें कप्तान मोनाँक पटेल, बाएँ हाथ के तेज गेंदबाज सौरभ नेत्रावलकर, स्लो लेफ्ट आर्म स्पिनर नोस्तुशा प्रदीप केन्जिगे का नाम शामिल है। इसके अलावा हरमीत सिंह, जसदीप सिंह, नीतीश कुमार का भी अहम योगदान दिया। मैन ऑफ द मैच कप्तान मोनाँक पटेल रहे, जिन्होंने शानदार अर्धशतकीय पारी खेली और अमेरिकी टीम को जीत दिलाई।

अमेरिकी जीत के हीरो रहे 3 सबसे बड़े खिलाड़ी

अमेरिकी क्रिकेट टीम ने जिस पाकिस्तानी टीम को हराया, उसके हारने की उम्मीद किसी को नहीं थी, लेकिन भारतीय मूल के जिन खिलाड़ियों की चर्चा हो रही है, उनमें सौरभ नेत्रावलकर, मोनाँक पटेल, नोस्तुशा प्रदीप केन्जिगे का नाम है। इसके साथ ही हरमीत सिंह ने भी शानदार प्रदर्शन किया। सौरभ, नोस्तुशा और हरमीत ने बॉलिंग में पाकिस्तान को बाँधकर रखा, तो मोनाँक पटेल ने शानदार अर्थशतक लगाते हुए अमेरिकी टीम को रनों का पीछा करते हुए कभी धीमा नहीं पड़ने दिया। आइए, जानते हैं इन खिलाड़ियों को…

सौरभ नेत्रावलकल, सॉफ्टवेयर इंजीनियर जिसने पढ़ाई के लिए छोड़ दिया था क्रिकेट

सौरभ नेत्रावलकर साल 2010 में भारतीय क्रिकेट के उदीयमान सितारे थे। आईसीसी क्रिकेट अंडर-19 विश्वकप में भारत के लिए सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले सौरभ ने मुंबई के लिए रणजी ट्रॉफी भी खेला। पढ़ाई बीच में आड़े आई, तो 2 साल पढ़ाई भी छोड़ी और जब घरेलू क्रिकेट में ज्यादा मौके नहीं मिले, तो पढ़ाई पूरी करने के लिए अमेरिका चले गए। कभी रोहित शर्मा, धवल कुलकर्णी, के एल राहुल जैसे खिलाड़ियों के साथ ड्रेसिंग रूप शेयर करने वाले सौरभ को अमेरिका में क्रिकेट से जुड़े एक ऐप को बनाने के लिए इंटर्नशिप और बाद में ओरेकल कंपनी में नौकरी मिल गई।

अमेरिका में घूम-घूम कर क्रिकेट खेलने वाले सौरभ की किस्मत खुली 2018 में। सौरभ ने अमेरिका में तीन साल पूरे किए और उसी समय आईसीसी ने सात साल की शर्त को घटाकर तीन साल कर दिया। जब अमेरिकी टीम ट्रेनिंग के लिए लॉस एंजिल्स आई तो वहाँ के कोच को सौरभ का खेल पसंद आया और धीरे-धीरे अमेरिकी टीम के दरवाजे उनके लिए खुलते गए। बाद में उन्होंने अमेरिका में मेजर लीग क्रिकेट, कैरेबियन प्रीमियर लीग और इंटरनेशनल लीग 20-20 में हिस्सा लिया।

सौरभ नेत्रावलकर अब अमेरिकी टीम के प्रमुख स्तंभ हैं। उनकी अगुवाई में अमेरिकी टीम ने बांग्लादेश को 2-1 से हराया, तो विश्वकप के पहले मैच में अमेरिका ने कनाडा को हराया। कनाडा के बाद अमेरिका ने पाकिस्तान को हराया, जिसमें सौरभ ने खतरनाक पाकिस्तानी बल्लेबाज इफ्तिखार अहमद को 2 बार आउट किया। एक बार मुख्य पारी में, तो दूसरी बार सुपर ओवर में, उन्होंने मोहम्मद रिजवान जैसे धाकड़ बल्लेबाज को अपना शिकार बनाकर पाकिस्तान को पहला झटका दिया था। अब तक दोनों मैच जीत चुके अमेरिका के लिए सौरभ नेत्रावलकर उसके मिचेल स्टार्क साबित हो रहे हैं। सौरभ अमेरिका के लिए 48 वनडे मैचों में 73 विकेट ले चुके हैं, तो 29 टी-20 मैचों में 29 विकेट लेकर सबसे आगे हैं। सौरभ के नाम लिस्ट-1 क्रिकेट में 117 विकेट दर्ज हैं।

मोनाँक पटेल कौन हैं?

मोनाँक पटेल गुजरात के आणंद में पैदा हुए। वो 31 साल के हैं और विकेटकीपिंग भी करते हैं। गुजरात अंडर-19 खेलने के बाद वो अमेरिका की मेजर क्रिकेट लीग और माइनर क्रिकेट लीग में भी खेलते हैं। अमेरिका के कप्तान मोनाँक पटेल वनडे क्रिकेट में 2 शतक और 10 अर्धशतक लगा चुके हैं, तो टी-20 में भी 3 अर्धशतक उनके नाम है। हाल ही में बांग्लादेश के खिलाफ अमेरिकी टीम की 2-1 से सीरीज जीत में भी उन्होंने अहम भूमिका निभाई थी।

इसके अलावा नोस्तुश केनजिगे भी भारतीय मूल के हैं। हालाँकि वो अमेरिका में ही पैदा हुए। नोस्तुश बाएँ हाथ की स्पिन गेंदबाजी करते हैं और पॉवरप्ले में विकेट निकालने के लिए माहिर माने जाते हैं।

हरमीत सिंह, जो कभी माना जाता था भारतीय क्रिकेट का भविष्य

अमेरिकी टीम में भारतीय क्रिकेट के अहम सितारे रहे हरमीत सिंह भी शामिल हैं। वो बॉलिंग आल राउंडर हैं। कभी भारतीय क्रिकेट के बड़े खिलाड़ियों को चौंकाने वाले हरमीत सिंह मुंबई में ही पैदा हुए और मुंबई के अलावा त्रिपुरा के लिए भी खेल चुके हैं। उन्होंने आईपीएल में भी हिस्सा लिया था और राजस्थान रॉयल्स टीम के लिए मैच बी खेले थे। दिलीप सरदेसाई जैसे महान क्रिकेट को उनमें बिशन सिंह बेदी की छवि दिखती थी।

खास बात ये है कि हरमीत सिंह उन गिने-चुने खिलाड़ियों में शामिल हैं, जिन्होंने 2-2 अंडर-19 क्रिकेट विश्वकप में भारत के लिए हिस्सा लिया था। हालाँकि पाकिस्तान के खिलाफ उन्हें विकेट भले नहीं मिला, लेकिन उन्होंने अपनी स्पिन गेंदबाजी से पाकिस्तानी कप्तान बाबर आजम और शादाब खान को खुलकर खेलने का मौका नहीं दिया और सुपरओवर में बिना कोई बड़ा शॉट लगाए भी अमेरिकी टीम के लिए अहम रन जुटाए।

ऐसा रहा मैच का हाल

आईसीसी टी-20 विश्वकप के 11वें मैच में अमेरिका के कप्तान मोनाँक पटेल ने टॉस जीता और पहले गेंदबाजी का फैसला लिया। अमेरिकी गेंदबाजों ने पाकिस्तान पाकिस्तान को झटके पर झटके दिए और महज पाँचवें ओवर में ही 26 रनों पर पाकिस्तान के तीन विकेट गिरा दिए। मोहम्मद रिजवान (9), उस्मान खान (3) और फखर जमान (11) आउट हो गए। पाकिस्तान को पहला झटका रिजवान के रूप में सौरभ नेत्रावलकर ने दिया, तो उनके साथी नोस्तुश केनजिगे ने दूसरा झटका दिया। पाकिस्तान किसी तरह से 20 ओवरों में 7 विकेट पर 159 रन बनाने में सफल रहा। केन्जिगे ने 4 ओवरों में 30 रन देकर तीन विकेट लिए, तो सौरभ नेत्रावलकर ने 4 ओवरों में महज 18 रन देकर 2 विकेट लिए। एक-एक विकेट अली खान और जसदीप सिंह को मिला।

इसके जवाब में अमेरिकी टीम ने शानदार खेल दिया। अमेरिकी टीम ने 20 ओवरों में 3 विकेट खोकर 159 रन बनाए। कप्तान मोनाँक पटेल ने शानदार अर्धशतक लगाते हुए 50 रनों की पारी खेली। हालाँकि आखिरी गेंद पर नीतीश कुमार ने चौका लगाकर मैच को टाई कराया। हैरिस राउफ 15 रनों का बचाव नहीं कर सके। आरोन जोन्स ने छक्का और नीतीश कुमार ने चौका लगाकर 14 रन जुटा लिए। इसके बाद आया जादुई ओवर, जिसमें शाहीन शाह अफरीदी ने 18 रन दे दिए। लेकिन सौरभ नेत्रावलकर ने इफ्तिखाद अहमद जैसे बड़े खिलाड़ी को चकमा देकर आउट कर दिया और पाकिस्तान 5 रनों से पीछे रह गया।

इकलौती नहीं हैं कुलविंदर कौर, सिस्टम में भरे पड़े हैं आतंकवादियों-खालिस्तानियों के ‘हमदर्द’: लोकसभा चुनाव के नतीजे भी करते हैं तस्दीक, कौन करेगा व्यवस्था को इनसे मुक्त

अभिनेत्री और अब भाजपा सांसद कंगना रनौत पर गुरुवार (6 जून, 2024) को चंडीगढ़ एयरपोर्ट में हमला हुआ। यह हमला एक CISF सुरक्षाकर्मी ने किया। सुरक्षाकर्मी का नाम कुलविंदर कौर है और उसने किसान आन्दोलन को इस हमले का कारण बताया है। उसे CISF की सेवा से निलम्बित कर दिया गया है और मामले की आगे जाँच चल रही है।

इस हमले के बाद लोगों ने हैरानी जताई है कि कोई सरकारी कर्मचारी चुने हुए सांसद के विरुद्ध ऐसा काम कर सकता है क्या, लोगों का यह भी प्रश्न है कि सरकारी कर्मचारी कैसे कट्टरपंथी विचारों के घेरे में आ रहे हैं। कुलविंदर का एक सांसद के प्रति यह बर्ताव उसकी अनुशासनहीनता के साथ ही उसका अपनी विचारधारा के प्रति कट्टरता को भी प्रदर्शित करता है।

कुलविंदर कौर ने जो किया है, वह कोई नई बात नहीं है। वह ऐसी पहली सरकारी कर्मचारी नहीं है जिसने अनुशासनहीनता की। इससे पहले के सैकड़ों ऐसे उदाहरण हैं जो दिखाते हैं कि लोग इस राष्ट्र के करदाता का पैसा मोटी तनख्वाह के रूप में उठा कर भी अपने कर्तव्य का निर्वहन नहीं करते।

यह इकोसिस्टम तमाम दिनों से मौजूद है और इसके उदाहरण भी मौजूद हैं। देश में 2014 में NDA सरकार आने के बाद से कश्मीर में दसियों ऐसे कार्रवाई हुई है जिनमें सरकारी कर्मचारियों को आतंकियों से संबंध रखने, उनकी वित्तीय मदद करने, उनको शरण देने और आतंकी गतिविधियों में भाग लेने के कारण नौकरी से हटाया गया है। अकेले 2023 में ही कम से कम 7 ऐसे कर्मचारी नौकरी से निकाले गए जिनके आतंकियों से लिंक थे।

इस इकोसिस्टम ने जम्मू कश्मीर को बहुत नुकसान पहुँचाया है। सरकारी कर्मचारियों के देश से गद्दारी के कारण सुरक्षा व्यवस्था में सेंध लगती है, संस्थाएँ और उनमें आमजनों का विश्वास कमजोर होता है। हाल में ही इसका एक बड़ा उदाहरण सामने आया है।

अलगाववादियों को सरकारी कर्मचारियों का मत

लोकसभा चुनाव 2024 में ऐसा ही एक उदाहरण सरकारी कर्मचारियों द्वारा अलगाववादियों के पक्ष में मतदान किया जाना रहा है। 2024 लोकसभा चुनाव में पंजाब और जम्मू-कश्मीर से तीन अलगावादियों को जीत मिली है। पंजाब में जहाँ UAPA मामले में जेल में बंद भिंडरांवाले समर्थक अमृतपाल सिंह को खडूर साहिब से तो वहीं फरीदकोट से सरबजीत सिंह खालसा को विजय मिली। सरबजीत सिंह खालसा पंजाब के मुख्यमंत्री बेअंत सिंह के हत्यारे का बेटा है।

कश्मीर में आतंक को फंडिग करने के मामले में जेल में बंद अलगाववादी राशिद को भी बारामूला से जीत हासिल हुई। इनके जीत हासिल करने का अर्थ है कि उनके लोकसभा क्षेत्र की जनता उनके कर्मों पर ध्यान नहीं देती। लेकिन इन सबके बीच इन तीनों ही लोगों को सरकारी कर्मचारियों के वोट भी हासिल हुए हैं। चुनाव आयोग का आँकड़ा दिखाता है कि अमृतपाल सिंह को खडूर साहिब में 1830 पोस्टल बैलट वोट मिले। पोस्टल बैलट के वोट सामायतः उन कर्मचारियों के होते हैं जो कि मतदान के काम में लगे होते हैं।

इसके अलावा सरबजीत सिंह खालसा को 1140 वोट पोस्टल बैलट से हासिल हुए।

इंजीनियर राशिद को 2907 वोट पोस्टल बैलट के जरिए हासिल हुए हैं।

क्या होता है पोस्टल बैलट, क्यों महत्वपूर्ण?

पोस्टल बैलट एक ऐसी सुविधा है जिसमें एक मतदाता अपने मत का प्रयोग बूथ पर ना जाकर उससे पहले ही निजी तौर पर करता है और उसे चुनाव अधिकारियों को भेज दिया जाता है। यह सुविधा मतदान में लगे सरकारी कर्मचारी, सेना और अर्धसैनिक बलों के जवानों, दिव्यांगो और मीडिया कर्मियों को मिलती है ताकि उनका मतदान नहीं छूटे। इन मतों में अधिकांश मत ऐसे होते हैं जो सरकारी कर्मचारियों द्वारा दिए गए होते हैं।

इंजीनियर राशिद, सरबजीत सिंह खालसा और अमृतपाल सिंह को मिले पोस्टल बैलट वोट में अधिकांश वोट इन सरकारी कर्मचारियों के रहे होंगे। ऐसे में यह माना जाना चाहिए कि इन सरकारी कर्मचारियों ने अलगाववाद की विचारधारा रखने वालों को वोट दिया। ऐसे कर्मचारियों का झुकाव सुरक्षा एजेंसियों के लिए चिंता की बात होनी चाहिए।

‘मोटी रकम मिली होगी इसे खालिस्तानियों से’ : कंगना रनौत के साथ बदसलूकी पर भड़कीं बहन रंगोली चंदेल; अभिनेत्री ने बॉलीवुड की चुप्पी पर उठाए सवाल​

बॉलीवुड अभिनेत्री और भाजपा की नवनिर्वाचत सांसद कंगना रनौत को चंडीगढ़ एयरपोर्ट पर CISF की महिला जवान द्वारा थप्पड़ मारने की घटना को लेकर रंगोली चंदेल काफी नाराज हैं। अपने इंस्टाग्राम पर रंगोली ने स्टोरी पोस्ट करते हुए महिला जवान के खिलाफ और सख्त कार्रवाई डिमांड की है।

उन्होंने खालिस्तान विचारधारा पर बनाए गए कंगना रनौत के वीडियो को शेयर करते हुए स्टोरी में लिखा, प्रतिक्रिया की वीडियो को साझा करते हुए, “खालिस्तानियों, बस यही औकात है तुम लोगों की। पीछे से प्लान करना और अटैक करना… लेकिन, मेरी बहन की रीढ़ की हड्डी बहुत मजबूत है। स्टील की बनी है। उसे तुम तोड़ नहीं सकते। वो अपने दम पर इस स्थिति को हैंडल कर लेगी।”

उन्होंने आगे पंजाब पर लिखा, “पंजाब तेरा क्या होगा? किसानों का आंदोलन खालिस्तानियों का अड्डा था एक बात और कि ये बात साबित हो चुकी है कि ये सिक्योरिटी की बहुत बड़ी गलती है? इस तरह से नहीं होना चाहिए था। हम सभी को इसके खिलाफ आवाज उठानी होगी।” इसके अलावा एक अन्य स्टोरी में रंगोली ने कहा, “सस्पेंड करने से इसको फर्क नहीं पड़ेगा, मोटी रकम आ गई होगी खालिस्तानियों से। रिमांड पर लेना होगा इसको।”

बता दें कि कंगना रनौत ने मारपीट के मामले में वीडियो शेयर की थी। इसमें वह बताती नजर आई थी कि एयरपोर्ट पर क्या हुआ। इसके अलावा उन्होंने पंजाब में बढ़ते आतंकवाद और उग्रवाद के मुद्दे को भी उठाया था। इसके अलावा मीडिया में कहा जा रहा है कि उन्होंने इस घटना के बाद अपने इंस्टा अकॉउंट पर कुछ स्टोरी और लगाई थी जिसमें उन्होंने इस मामले में बॉलीवुड की चुप्पी पर सवाल उठाए थे।

रंगोली के अकॉउंट पर कंगना की स्टोरी को शेयर किया गया। इस स्टोरी में लिखा था- “डियर फिल्म इंडस्ट्री आप सभी लोग या तो एयरपोर्ट पर मुझ पर हुए हमले को सेलिब्रेट कर रहे हैं या फिर इस पर पूरी तरह चुप्पी साधे हुए हैं, लेकिन याद रखना अगर कल को आप अपने देश की किसी सड़क पर या दुनिया में कहीं और चल रहे होंगे, तब कुछ इजरायली/फिलिस्तानी आप या आपके बच्चे पर हमला करते हैं…बस इसलिए क्योंकि आप सभी राफा के लिए खड़े थे, इजरायली होस्टेज के समर्थन में थे…तब आप देखेंगे मैं आपके बोलने की आजादी के लिए लड़ूंगी… अगर किसी दिन आपको लगे कि मैं क्यों, मैं कहाँ हूँ या याद रखना मैं आपमें ही हूँ।”

रिपोर्ट के मुताबिक, एक अन्य पोस्ट में उन्होंने कहा, “ऑल आइज ऑन राफा’ गैंग ये आपके और आपके बच्चों के साथ भी हो सकता है, जब आप किसी पर आतंकी हमले को सेलिब्रेट करते हैं, उस दिन के लिए तैयार हो जाओ जब ये सब आपके साथ होगा।”

बता दें कि कंगना रनौत को 6 जून को एक सीआईएसएफ महिला जवान ने चंडीगढ़ एयरपोर्ट पर थप्पड़ मारा था। वह पिछले 15 सालों से सीआईएसएफ में काम कर रही थी। कंगना ने फिलहाल इस केस में कोई एफआईआर नहीं कराई है। लेकिन बहन ने माँग की है कि उस महिला जवान को हिरासत में लेकर पूछताछ हो।

‘हर दिन आती है चुनावी हिंसा की खबरें, बंगाल में 5 साल के लिए तैनात कर देंगे CAPF’: ममता सरकार को हाई कोर्ट ने फटकारा, DGP से माँगी FIR की सूची

कलकत्ता उच्च न्यायालय ने लोकसभा चुनाव 2024 के बाद पश्चिम बंगाल में हुई हिंसा पर चिंता व्यक्त की है। हाई कोर्ट ने गुरुवार (6 जून 2024) को कहा कि अगर राज्य सरकार हिंसा को रोकने में विफल रहती है तो वह केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (सीएपीएफ) को अगले पाँच वर्षों तक राज्य में तैनात रहने के लिए कह सकता है।

एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति कौशिक चंदा और न्यायमूर्ति अपूर्व सिन्हा रे की खंडपीठ ने राज्य की ममता बनर्जी की सरकार को निर्देश दिया कि वह हिंसा से प्रभावित लोगों को ईमेल के माध्यम से राज्य के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) को शिकायत दर्ज करने की अनुमति दे। पीठ ने कहा, “हम किसी भी कीमत पर राज्य के लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना चाहते हैं।”

यह याचिका राष्ट्रवादी आइनजीवी नाम के संगठन द्वारा दायर की गई थी। इसमें कहा गया था कि याचिकाकर्ताओं को लोकसभा आम चुनाव 2024 के तुरंत बाद एक विशिष्ट राजनीतिक दल से जुड़े होने के कारण चुनाव के बाद की हिंसा का सामना करना पड़ा था। याचिकाकर्ताओं ने यह भी दावा किया कि स्थानीय पुलिस अधिकारियों द्वारा उनकी शिकायतें दर्ज नहीं की जा रही हैं।

अदालत ने डीजीपी संजय मुखोपाध्याय को 10 दिनों के भीतर चुनाव बाद हिंसा की मिली शिकायतों की संख्या, दर्ज की गई एफआईआर की संख्या और उसके बाद की गई कार्रवाई (यदि कोई हो) पर एक रिपोर्ट प्रस्तुत करने का भी आदेश दिया। अदालत ने पुलिस को प्राप्त शिकायतों को तुरंत अपनी वेबसाइट पर अपलोड करने का भी निर्देश दिया।

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता सुस्मिता साहा दत्ता की वकील ने अदालत को बताया कि पिछले शनिवार (1 जून 2024) को राज्य में सात चरणों के मतदान समाप्त होने के बाद से 11 लोगों की मौत हो चुकी है। दत्ता ने अदालत को बताया, “1 जून को चुनाव प्रक्रिया पूरी हो गई थी। उसके बाद गुरुवार तक चुनाव बाद की हिंसा में 11 लोगों की मौत हो चुकी है।”

इसके बाद दो जजों की खंडपीठ ने पूछा, “हम कैसे मान लें कि 11 लोग मारे गए हैं?” इस पर दत्ता ने जवाब दिया, “हमारे पास पर्याप्त दस्तावेज हैं।” राज्य सरकार का प्रतिनिधित्व कर रहे महाधिवक्ता किशोर दत्ता ने हस्तक्षेप करते हुए कहा, “ये सच नहीं हैं।”

जस्टिस कौशिक चंदा ने कहा, “हम हर दिन मीडिया में चुनाव के बाद की हिंसा के बारे में देख रहे हैं। पिछले विधानसभा चुनाव के बाद जो हुआ, वही इस बार भी हो रहा है। आपको (राज्य को) शर्म आनी चाहिए। अगर राज्य इस हिंसा को नियंत्रित करने में विफल रहता है तो हमें यह निर्णय लेना होगा कि अगले पांच वर्षों तक केंद्रीय बल इस राज्य में रहेंगे।”

बता दें कि पश्चिम बंगाल में विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी ने भी गुरुवार (6 जून 2024) को राज्यपाल सीवी आनंद बोस को पत्र लिखकर चुनाव बाद की हिंसा में सत्ताधारी तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) की कथित भूमिका पर चिंता जताई। उन्होंने अपने पत्र में राज्यपाल से साल 2021 में चुनाव के बाद ऐसी स्थिति की पुनरावृत्ति रोकने के लिए कदम उठाने का आग्रह किया।

पश्चिम बंगाल के राज्यपाल को लिखे पत्र में भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी ने कहा कि 4 जून 2024 के संसदीय चुनाव के नतीजे घोषित होने के बाद पश्चिम बंगाल में ‘सत्तारूढ़ सरकार के गुंडे’ भाजपा के कार्यकर्ताओं को लेकर पागल हो गए हैं। उन्होंने कहा कि यह हिंसा पश्चिम बंगाल के लिए पर्याय बन चुकी है।

भाजपा नेता ने कहा, “यह बंगाल में 2021 के विधानसभा चुनाव परिणामों की घोषणा के बाद हुई घटनाओं की पुनरावृत्ति प्रतीत होती है, जिसके परिणामस्वरूप कई भाजपा कार्यकर्ताओं की मौत हो गई थी।” उन्होंने कहा कि चुनावों के बाद केंद्रीय सशस्त्र बलों का उपयोग बिगड़ती स्थिति को नियंत्रित करने के लिए नहीं किया जा रहा है और सत्तारूढ़ पार्टी के गुंडे भाजपा कार्यकर्ताओं को निशाना बना रहे हैं।

NDA ने नरेंद्र मोदी को चुना नेता: नीतीश बोले – अगली बार भी आपके नेतृत्व में ही लड़ेंगे, आपके हर फैसले में साथ रहेंगे; नायडू ने बताया गर्व का क्षण

राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली में NDA के सभी सांसदों की बैठक हुई, जिसमें नरेंद्र मोदी को संसदीय दल का नेता चुन लिया गया। इसके साथ ही अब NDA गठबंधन राष्ट्रपति के समक्ष सरकार बनाने का दावा पेश करेगा और इसे स्वीकार किए जाने के साथ ही शनिवार (8 जून, 2024) को नरेंद्र मोदी लगातार तीसरी बार प्रधानमंत्री पद की शपथ लेंगे। इस दौरान TDP के चंद्रबाबू नायडू ने कहा कि नरेंद्र मोदी ने हमेशा जनता के लिए काम किया है और वो NTR के मानवता के सिद्धांतों पर चलते हैं।

उन्होंने स्पष्ट किया कि ये उनके जीवन में सबसे गर्व का क्षण है। वहीं बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि उनकी पार्टी JDU भाजपा के संसदीय दल के नेता नरेंद्र मोदी को भारत के प्रधानमंत्री पद के लिए समर्थन देती है। उन्होंने इसे ख़ुशी की बात बताते हुए कहा कि 10 वर्षों से ये PM हैं और फिर बनने जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी ने देश की सेवा की और जो कुछ भी बचा है सब पूरा कर देंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि सब दिन पीएम मोदी के वो साथ रहेंगे और वो जो भी करेंगे उसका समर्थन करेंगे।

इस दौरान उन्होंने महागठबंधन को मिली सीटों का जिक्र करते हुए कहा कि इस बार तो उनलोगों को कुछ सीटें मिल भी गई हैं, आगे हम सब मिल कर चुनाव लड़ेंगे तो ये एक भी सीट नहीं जीत पाएँगे। नीतीश कुमार ने कहा कि विपक्षियों ने देश में कोई काम नहीं किया है, लेकिन नरेंद्र मोदी ने देश की बहुत सेवा की है और इसीलिए उन्हें ये मौका मिला है। उन्होंने कहा कि विपक्षी दलों के लिए अब कोई गुंजाइश नहीं रहेगी, बिहार और देश बहुत आगे बढ़ेगा।

नीतीश कुमार ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जो भी चाहेंगे, उस हिसाब से हम सब चलेंगे और हमेशा उनके साथ रहेंगे, वो देश को आगे बढ़ाएँगे। उन्होंने आग्रह किया कि जल्द से जल्द प्रधानमंत्री पद का शपथग्रहण हो जाए, आज भी हो जाए तो अच्छा है क्योंकि काम तेज़ी से शुरू हो जाएगा। उन्होंने कहा कि अगर कोई इधर-उधर करना भी चाहता है तो इसका कोई लाभ नहीं है। उन्होंने कहा कि हम सब नरेंद्र मोदी की बात को मानते हुए आगे चलेंगे।

इसके बाद नीतीश कुमार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पाँव भी छुए। वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि ये उनके लिए लिए खुशी की बात है कि इतने बड़े समूह का स्वागत करने का उन्हें मौका मिला है। उन्होंने कहा कि जो साथी विजयी होकर आए हैं वो सभी अभिनंदन के अधिकारी हैं, लेकिन जिन लाखों कार्यकर्ताओं ने दिन-रात परिश्रम किया है, इतनी भयंकर गर्मी में हर दल के कार्यकर्ता ने जो पुरुषार्थ और परिश्रम किया है – वो आज उनको सिर झुका कर नमन करते हैं।

पीएम मोदी ने कहा कि ये उनका सौभाग्य है कि उन्हें NDA के नेता के रूप में सभी साथियों ने सर्वसम्मति से चुनकर एक नया दायित्व दिया है। उन्होंने सभी सहयोगी दलों का बहुत-बहुत आभार जताते हुए कहा कि हिंदुस्तान के इतने महान लोकतंत्र की ताकत देखिए कि NDA को आज देश के 22 राज्यों में लोगों ने सरकार बनाकर उनको सेवा करने का मौका दिया है, हमारा ये अलायंस सच्चे अर्थ में भारत की आत्मा है। बकौल पीएम मोदी, हिंदुस्तान की राजनीतिक इतिहास में और हिंदुस्तान की राजनीति के गठबंधन के इतिहास में चुनाव पूर्व गठबंधन इतना सफल कभी भी नहीं हुआ है, जितना कि NDA हुआ है।

प्रधानमंत्री ने कहा, “एनडीए के सत्ता प्राप्त करने का या सरकार चलाने का कुछ दलों का जमावड़ा नहीं है। ये राष्ट्र प्रथम की मूल भावना से नेशन फर्स्ट के प्रति प्रतिबद्ध समूह है। NDA सरकार ने देश को गुड गवर्नेंस दिया है और एक प्रकार से NDA कहते ही गुड गवर्नेंस का पर्यायवाची बन जाता है। हम सबके केंद्र बिंदु में गरीब कल्याण और गुड गवर्नेंस सर्वोपरि रहा है। मैं बहुत जिम्मेदारी के साथ कह रहा हूँ कि अगले 10 साल में गुड गवर्नेंस, विकास, नागरिकों के जीवन में क्वॉलिटी ऑफ लाइफ – मेरा व्यक्तिगत रूप से एक सपना है। सामान्य मानवी के जीवन में से सरकार की दखल जितनी कम होगी, उतनी ही लोकतंत्र की मजबूती होगी।”

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि हम विकास का नया अध्याय लिखेंगे, गुड गवर्नेंस का नया अध्याय लिखेंगे, जनता-जनार्दन की भागीदारी का नया अध्याय लिखेंगे, और सब मिलकर के विकसित भारत के सपने को साकार करके रहेंगे। बता दें कि इस बैठक में भाजपा के पूर्व अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने नरेंद्र मोदी के नाम का प्रस्ताव रखा, जिसका सभी ने अनुमोदन किया। पीएम मोदी ने कहा कि इस चुनाव में दक्षिण भारत में एनडीए ने एक नई राजनीति की नींव मजबूत की है।

उन्होंने जिक्र किया कि कैसे कर्नाटक और तेलंगाना, जहाँ अभी हाल ही में कॉन्ग्रेस की सरकारें बनी थीं, लेकिन पल भर में इनसे लोगों का विश्वास टूट गया और NDA को गले लगा लिया। उन्होंने तमिलनाडु की टीम को भी बधाई देते हुए कहा कि आज तमिलनाडु में काफी तेजी से NDA का वोट शेयर बढ़ा है। उन्होंने बताया कि कैसे इसी तरह पहली बार केरल से हमारा प्रतिनिधि बन कर आया है। बता दें कि केरल से अभिनेता सुरेश गोपी त्रिशूर से जीत कर भाजपा सांसद बने हैं।