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वामपंथी छात्र संगठन AISA का उपाध्यक्ष है हर्ष राज की हत्या में गिरफ्तार चंदन यादव: लालू यादव और राहुल गाँधी की रैली में सक्रिय, महागठबंधन के लिए घूम-घूम माँगे वोट

बिहार की राजधानी पटना में लॉ कॉलेज के सामने हर्ष राज नामक छात्र की पीट-पीट कर हत्या कर दी गई थी। इस मामले के मुख्य साजिशकर्ता चंदन यादव को पुलिस ने 24 घंटे के भीतर गिरफ्तार करने में कामयाबी पाई है। पुलिस ने गिरफ्तार चंदन यादव के लिए ‘कुख्यात’ और ‘लाइनर’ बताया है। हालाँकि, पुलिस ने उसके चेहरे को नकाब से ढँक दिया। बिहटा के अम्हारा गाँव के रहने वाले चंदन के पिता का नाम जितेंद्र यादव है। हर्ष राज की हत्या में एक दर्जन के करीब बदमाश शामिल थे।

चंदन यादव वामपंथी छात्र संगठन AISA (ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन) से जुड़ा हुआ है। अब जो खुलासे सामने आए हैं, उसके बाद लगता है कि बिहार का जो महागठबंधन इस हत्याकांड को लेकर NDA सरकार को कोस रहा था और आरोपितों की गिरफ़्तारी की माँग कर रहा था, अब उसे ही कटघरे में खड़ा होना पड़ सकता है। सोशल मीडिया पर वो नालंदा से महागठबंधन के उम्मीदवार CPI(ML)L के संदीप सौरव के लिए वोट माँगता हुआ नज़र आ रहा है।

संदीप सौरव पटना के पालीगंज से 2020 में विधायक बने। वो एसिस्टेंट प्रोफेसर का पद छोड़ कर राजनीति में आए हैं। चंदन यादव पटना यूनिवर्सिटी में पत्रकारिता का छात्र है। वो फाइनल ईयर में है। साथ ही वो पटना विश्वविद्यालय में AISA का उपाध्यक्ष भी है। 2 वर्षों से वो जैक्शन हॉस्टल में रह रहा था। नालंदा से महागठबंधन उम्मीदवार के लिए उसने घूम-घूम कर वोट भी माँगे हैं। 3 मार्च को पटना के गाँधी मैदान में महागठबंधन की जो संयुक्त रैली हुई थी, उसमें भी वो खासा सक्रिय था।

उस रैली को राहुल गाँधी ने भी संबोधित किया था, वहीं मंच पर लालू यादव और सीताराम येचुरी भी मौजूद थे। इस रैली में चंदन यादव की सक्रियता के वीडियो भी उसके सोशल मीडिया हैंडल पर मौजूद हैं। ऐसे में अपने नेताओं की गुंडागर्दी के लिए जानी जाने वाली राजद एक बार फिर फजीहत का शिकार हो सकती है। बता दें कि हर्ष राज ने दहशरा 2023 के मौके पर डांडिया नाइट का आयोजन किया था। उस दौरान एक विवाद हुआ था, जिस रंजिश में उसकी हत्या कर दी गई।

मानहानि केस में AAP मंत्री आतिशी को दिल्ली कोर्ट ने भेजा नोटिस, 29 जून से पहले देना होगा जवाब: केजरीवाल बोले- तानाशाही से देश बचाना जरूरी

भारतीय जनता पार्टी के एक नेता की ओर से दायर मानहानि मामले में दिल्ली सरकार की मंत्री आतिशी को राउज एवेन्यू कोर्ट ने नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने आतिशी से कहा है कि वो 29 जून से पहले कोर्ट में हाजिर हों। इस समन को देख AAP मंत्री ने कहा है कि उन्होंने तो पहले ही कहा था कि उनकी गिरफ्तारी के लिए प्लानिंग की जा रही है। वहीं दिल्ली सीएम ने भी आतिशी के खिलाफ समन जारी देख कहा है कि अब आतिशी को गिरफ्तार करने की कोशिश हो रही है।

बता दें कि ये मानहानि केस दिल्ली भाजपा के मीडिया प्रमुख प्रवीण शंकर कपूर ने उस बयान के खिलाफ किया है जिसमें आतिशी ने आरोप लगाया था कि भाजपा आम के विधायकों को पैसों का लालच दे रही है। कपूर ने ये मामला 30 अप्रैल को दायर करवाया था। इसमें कहा था आतिशी के बयान से उनकी पार्टी की छवि खराब होती है।

अपनी शिकायत में उन्होंने केजरीवाल के उस पोस्ट का भी जिक्र किया था जिसमें आप सुप्रीमो ने दावा किया था भाजपा आप के विधायकों को कॉन्टैक्ट करके 25 करोड़ के ऑफर दे रही है। वहीं आतिशी ने भी कहा था कि भाजपा ने उन्हें किसी बहुत करीबी के जरिए संपर्क किया। उस करीबी ने उनसे कहा था कि अगर राजनैतिक करियर बचाना है तो फिर भाजपा को ज्वाइन कर लो। वरना ईडी एक महीने में गिरफ्तार कर लेगी।

इसी बयान के बाद उनके खिलाफ केस दर्ज हुआ। अब अरविंद केजरीवाल का इस मामले पर कहना है- “मैंने पहले कहा था कि वे अगली बार आतिशी को गिरफ्तार करेंगे। वे अब ऐसा करने इसी की तैयारी में है। पूरी तरह से तानाशाही है। पूरी तरह से तुच्छ और झूठे मामलों में, वे AAP के सभी नेताओं को एक-एक करके गिरफ्तार कर रहे हैं। अगर मोदी जी सत्ता में वापस आते हैं तो हर एक विपक्षी नेता को गिरफ्तार किया जाएगा। AAP महत्वपूर्ण नहीं है। हमारे प्यारे देश को तानाशाही से बचाना महत्वपूर्ण है।

2014 – प्रतापगढ़, 2019 – केदारनाथ, 2024 – कन्याकुमारी… जिस शिला पर विवेकानंद ने की थी साधना वहीं ध्यान धरेंगे PM नरेंद्र मोदी, मतगणना से पहले पहुँचेंगे तमिलनाडु

8 राज्यों की 57 सीटों पर शनिवार (2 जून, 2024) को 7वें व अंतिम चरण का मतदान होने के साथ ही लोकसभा चुनाव 2024 के लिए पोलिंग का समापन हो जाएगा। परिणाम 4 जून को आने हैं, ऐसे में बिच में 2 दिन का समय है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, जो 200 से भी अधिक रैली और रोडशो करने के अलावा 80 से अधिक मीडिया संस्थानों को इंटरव्यू भी दे चुके हैं, इस छोटी सी अवधि का भी सकारात्मक इस्तेमाल करेंगे। वो ये 2 दिन तमिलनाडु के कन्याकुमारी में गुजारेंगे।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस दौरान उस शिला पर ध्यान लगाएँगे, जहाँ कभी स्वामी विवेकानंद ने ध्यान लगाया था। वो सातवें चरण के लिए प्रचार-प्रसार का शोर थमने के साथ थी 30 मई को ही कन्याकुमारी पहुँच जाएँगे। याद दिला दें कि राम मंदिर प्राण-प्रतिष्ठा समारोह से पहले भी उन्होंने तमिलनाडु में भगवान श्रीराम से जुड़े मंदिरों में दर्शन किया था। पीएम मोदी सुदूर दक्षिण भारत में ध्यान लगा कर राष्ट्रीय एकता का भी परिचय देंगे, ये संदेश देंगे कि भारत एक है और यहाँ की संस्कृति एक है।

विवेकानंद शिला पर ध्यान धरने के साथ ही पीएम नरेंद्र मोदी ‘विवेकानंद रॉक मेमोरियल’ का भी दौरा करेंगे। वहाँ स्थित ‘ध्यान मंडपम’ में वो 30 मई की शाम से लेकर 1 जून की शाम तक रहेंगे। कन्याकुमारी में ही विवेकानंद के भीतर ‘भारत माता’ के विचार को जन्म दिया था। जो स्थान गौतम बुद्ध के जीवन में सारनाथ का है, वही विवेकानंद के जीवन में इस स्थल का। देशाटन के दौरान वो यहाँ पहुँचे थे और सागर की लहरों के बीच लगातार 3 दिनों तक ध्यान लगाया था।

अगर पौराणिक इतिहास की बात करें तो मान्यता है कि यहीं पर माता पार्वती ने अपने पति भगवान शिव का इंतज़ार करते हुए एक पाँव पर साधना किया था। ये भारत के सबसे दक्षिणी छोर है, जहाँ हिन्द महासागर, बंगाल की खाड़ी और अरब सागर का मिलन होता है, जहाँ भारत की पूर्वी और पश्चिमी तटों का मिलन होता है। पीएम नरेंद्र मोदी इसी तरह 2019 के लोकसभा चुनाव का मतदान खत्म होने के बाद केदारनाथ पहुँचे थे और वहाँ गुफा में ध्यान लगाया था, वहीं 2014 में वो छत्रपति शिवाजी महाराज के प्रतापगढ़ किला पहुँचे थे जहाँ मराठों ने बीजापुर सल्तनत को पटकनी दी थी।

पंजाब में Zee मीडिया के सभी चैनल ‘बैन’! मीडिया संस्थान ने बताया प्रेस की आज़ादी पर हमला, नेताओं ने याद किया आपातकाल

पंजाब में ‘Zee News’ के सभी चैनलों को प्रतिबंधित कर दिया गया है। चैनल ने खुद इसकी जानकारी दी है। चैनल ने कहा कि Zee मीडिया के सभी चैनलों को पंजाब में बंद कर दिया गया है, वहाँ लोग अपने घर में Zee के चैनल नहीं देख पा रहे हैं। मीडिया संस्थान ने इसे प्रेस की आज़ादी पर हमला करार देते हुए कहा है कि उसे पंजाब में ब्लैकआउट कर दिया गया है। पंजाब में AAP (आम आदमी पार्टी) की सरकार है और भगवंत मान राज्य के मुख्यमंत्री हैं।

मीडिया संस्थान का कहना है कि कई लोगों की शिकायतें आ रही हैं कि वो अपने घर में Zee मीडिया के चैनल नहीं देख पा रहे हैं। Zee के रिपोर्टर मनोज जोशी ने कहा कि सरकार में कोई भी इस संबंध में कोई जवाब नहीं दे रहा है और कहा जा रहा है कि उनके पास कोई जानकारी नहीं है। उन्होंने इसे अभिव्यक्ति की आज़ादी पर हमला बताते हुए कहा कि संविधान प्रदत्त अधिकार को रोका गया है। उन्होंने याद दिलाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी AAP सरकार के इस रवैए पर सवाल उठाया था।

वहीं एक अन्य रिपोर्टर रवि त्रिपाठी ने दावा किया कि इसी पंजाब में जब इससे पहले अकाली दल की सरकार थी तब भी Zee मीडिया को बैन किया गया था, पार्टी का बुरा हश्र हुआ। उन्होंने इस दौरान आपातकाल को भी याद किया, जब कई अख़बार बंद किए गए और संपादकों को जेल में डाला गया। भाजपा नेता मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा कि अरविंद केजरीवाल और भगवंत मान लोकतंत्र की बात करते हैं, लेकिन उनके खिलाफ कोई सच दिखाता है तो वो उसे दबाते हैं।

वहीं जदयू के प्रवक्ता KC त्यागी ने इसकी निंदा करते हुए कहा कि AAP का जन्म मीडिया की फेवरिट संस्था के रूप में हुआ था, रामलीला मैदान में संघर्ष के दौरान मीडिया उन्हें खूब कवर करता था। उन्होंने इसे लोकतंत्र पर खतरा बताते हुए याद किया कि वो खुद आपातकाल के भुक्तभोगी रहे हैं। वहीं भाजपा प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि ये AAP की असलियत को दिखाता है। वहीं भाजपा नेता तरुण चुघ ने कहा कि AAP में इंदिरा गाँधी की आत्मा घुस गई है।

हिंदुओं का अपमान, हमास का समर्थन, अश्लील शब्द का प्रयोग: सोमैया ट्रस्ट के प्रमुख ने अभिभावकों को लिखा पत्र, बताया- क्यों प्रिंसिपल पद से हटाई गईं परवीन शेख

मुंबई के सोमैया स्कूल में हमास समर्थक परवीन शेख को प्रिंसिपल के पद से हटाए जाने के बाद अब स्कूल के ट्रस्ट हेड समीर सोमैया ने छात्रों के अभिभावकों के नाम पत्र लिखा है। इस पत्र में समीर सोमैया ने उन कारणों का जिक्र किया है जिसके वजह से स्कूल प्रिंसिपल को हटाया गया।

इस पत्र में उन्होंने कुछ मुख्य बिंदुओं पर बात की है। जैसे उन्होंने बताया स्कूल की हेड के तौर पर परवीन शेख को सोशल मीडिया पर अनुचित व्यवहार नहीं करना चाहिए था। न ही किसी देश के बारे में कुछ गलत लिखना चाहिए था और न ही आतंकी संगठन हमास का समर्थन करना चाहिए था।

पत्र में उन्होंने आश्वासन दिया कि स्कूल हमेशा से सिद्धांतों पर चलकर आगे बढ़ता रहा है और आगे भी वो यही करेंगे। वो अपनी परंपरा को कायम रखते हुए भारत और दुनिया के लिए महाना नागरिकों का निर्माण करेंगें।

अपने पत्र में उन्होंने लिखा,

प्रिय दोस्तों,

पिछले माह हम बहुत चर्चा में थे। हमें ऐसी चुनौतियों का सामना करना पड़ा जिसने- ज्ञान, समावेशिता और सेवा जैसे हमारे प्रिय सिद्धांतों को चुनौती दी। पूर्व प्रिंसिपल की गतिविधियाँ हमारे सिद्धांतों के विरुद्ध थी। उन्होंने जो किया वो पूरी तरह प्रशासनिक मामला था, जिसे राजनीतिक रंग दिया गया।

एक स्कूल की हेड की ओर से बिलकुल स्वीकार्य नहीं है कि वो किसी बात में चार शब्दों वाला अश्लील शब्द लिखेंं।

ये बिलकुल उचित नहीं है कि स्कूल की हेड कोई ऐसा कार्टून ट्वीट करें जिससे एक पूरे समुदाय का धार्मिक आधार पर, भाषाई आधार पर, राष्ट्रीयता के आधार पर या किसी और मायने में अपमान हो।

स्कूल के हेड के लिए ये भी उचित नहीं है कि वो ऐसे ट्वीट करें जिससे अन्य देशों का अपमान हों।

किसी स्कूल के प्रमुख के लिए किसी भी व्यक्ति के बारे में अपमानजनक और अपमानजनक भाषा में वर्णन करना ठीक नहीं है, देश में उच्च पदों पर आसीन लोगों के बारे में तो बिल्कुल भी नहीं।

किसी स्कूल के प्रमुख द्वारा उन संस्थानों के ट्वीट को लाइक करना ठीक नहीं है, जिन्हें कई लोग हिंसा का समर्थन करने वाला मानते हैं।

यह व्यवहार और भी चिंताजनक तब है जब हेड सोशल मीडिया अकॉउंट का इस्तेमाल स्कूल के बारे में और उसकी उपलब्धियों के बारे में बोलने के लिए करते हों। इस मामले में किसी व्यक्ति की व्यक्तिगत राय को उस संगठन (स्कूल) से मिला देने या कथित रूप से उसे एक सा दिखाने से संबंधित है।

किसी संस्थान के हेड के तौर पर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर अपने ऐसे रवैया का बचाव करना भी उचित नहीं है। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता अकेले नहीं मिलती, इसके साथ जिम्मेदारियाँ भी आती हैं उस समुदाय के प्रति जिनमें हम रहते हैं और जिस संगठन को हम सेवा देते हैं।

स्कूल के प्रमुखों का 3 साल तक के बच्चों के दिमाग पर गहरा असर होता है। ऐसे में इन मामलों में अधिक संवेदनशील रहना जरूरी होता है।

स्कूल प्रशासन का अधिकार है कि वो अपने कर्मचारी से सवाल पूछे जो कि उनके स्टेकहोल्डर्स द्वारा उठाया गया हो और उस पर स्कूल और बच्चों के हित में जरूरी एक्शन लें।

हम शिक्षा की सेवा में 1942 से हैं। सोमैया स्कूल की ख्याति अपनी विरासत, अपने नेतृत्व, अपने शिक्षकों और कर्मचारियों की वजह से फली-फूली है। हम लगातार ऐसे माहौल का निर्माण करेंगें जो हमारी परंपरा को कायम रखे और भारत व दुनिया के लिए महान नागरिकों का निर्माण करें।

-समीर सोमैया

बता दें कि ऑपइंडिया ने सोमैया स्कूल की प्रिंसिपल के विचारों को लेकर एक विस्तृत रिपोर्ट पेश की थी। इसमें परवीन शेख के हमास के प्रति झुकाव को गौर करवाया गया था। साथ ही दिखाया गया था कि कैसे वो जाकिर नाइक की फैन हैं और दिल्ली हिंदू विरोधी दंगों के साजिशकर्ता उमर खालिद की समर्थक भी हैं। लेख में परवीन शेख के पोस्ट, पोस्टों पर किए गए लाइक, पीएम मोदी को लेकर कहे गए उनके बयानों को हाइलाइट किया गया था। रिपोर्ट के पब्लिक डोमेन में पहुँचने के बाद कई लोगों ने इस तरह की स्कूल प्रिंसिपल के विरुद्ध आवाज उठाई और आखिर में प्रिंसिपल को उसके पद से हटा दिया गया था।

हॉस्टल में मिलने आया हिंदू दोस्त तो छात्र को स्कूल ने निकाला, पीड़ित मनव्वर बोला- गैर मुस्लिमों से दोस्ती पर वार्डन ने काफी कुछ सुनाया: UP के मुजफ्फरनगर की घटना

मुजफ्फरनगर में एक मुस्लिम छात्र ने आरोप लगाया है कि उसके हिन्दू दोस्त होने के कारण उसे स्कूल से निकाल दिया गया। मुस्लिम छात्र ने आरोप लगाया कि हिन्दू दोस्त होने के कारण उसको काफी बुरी तरह डांटा गया। छात्र ने स्कूल पर चोरी का इल्जाम लगाने का आरोप भी लगाया है।

जानकारी के अनुसार, मुजफ्फरनगर के फुलत में स्थित विजन इंटरनेशनल एकेडमी में पढ़ने वाले मनव्वर को हिन्दू लड़के से मिलने के बाद स्कूल से निकाला गया। इस स्कूल में मनव्वर हॉस्टल में रहता है, यहाँ उसका दोस्त संदीप हाल ही में मिलने आया था। यहाँ संदीप से पूछताछ के बाद गार्ड ने प्रवेश दे दिया था। उसका यह दोस्त हॉस्टल में 10 मिनट रुका था और हाल चाल पूछ कर वापस चला गया था। इसके बाद जब चला गया तो बखेड़ा खड़ा हो गया।

स्कूल प्रबन्धन ने इस मामले की जाँच करवाई और मनव्वर के दोस्तों से पूछताछ भी की। यह जानने पर कि मनव्वर से मिलने आने वाले का नाम संदीप है, उसे काफी फटकारा गया और स्कूल से निकाल दिया गया। छात्र ने आरोप लगाया है कि उसे स्कूल के वार्डन ने गैर मुस्लिमों से दोस्ती रखने के कारण काफी कुछ सुनाया। छात्र ने कहा कि स्कूल प्रबन्धन ने उस पर ₹10,000 की चोरी का भी आरोप लगा दिया।

इसके बाद मनव्वर ने इस सबंध में वीडियो बनाया और स्कूल पर यह सभी आरोप जड़े। स्कूल ने कहा कि मनव्वर हॉस्टल के भीतर अनाधिकृत व्यक्तियों को बुलाता था, इसीलिए उस पर यह कार्रवाई की गई। स्कूल ने कहा कि वह बार बार कहने पर भी नहीं मान रहा था और झूठ बोल कर दूसरे व्यक्ति को हॉस्टल में प्रवेश दिलवाया, इसीलिए कार्रवाई की गई। पुलिस ने इस मामले में कहा है कि उसे अभी तक कोई शिकायत नहीं मिली है, यदि उसे शिकायत मिलेगी तो वह इस मामले में जरूर कार्रवाई करेंगे।

उस सिस्टम का इलाज कौन करेगा जो एक हादसे के बाद दूसरे की प्रतीक्षा करता है, राजकोट से दिल्ली तक सोया रहा सिस्टम और जलकर राख हुई 34 जिंदगी

देश के 2 अलग-अलग इलाकों में लोग बिलख रहे हैं, कारण – उनके कई अपने 2 हादसों में चले गए। दिल्ली की एक महिला कहती हैं कि उन्हें सबसे अधिक अफ़सोस इस बात का है कि वो वहाँ पर क्यों नहीं थी, हो सकता था कि वो अपनी जान पर खेल कर अपने नवजात बेटे को बचा पाती। वहीं राजकोट में अपने बेटे को खोने वाला पिता कहता है कि उसे कोई आर्थिक सहायता नहीं चाहिए, बस दोषियों को सज़ा मिले। उनका कहना है कि अगर एक भी व्यक्ति जमानत पर बाहर आया तो वो उसे मार डालेंगे।

दिल्ली की एक माँ और गुजरात के एक पिता के आक्रोश का आखिर कारण क्या है? कारण है – आग लगना। लेकिन, असली कारण ये भी नहीं है। वास्तविक कारण है बड़े लोगों द्वारा नियमों की अनदेखी और प्रशासन द्वारा उनका साथ देना। जो लोग अस्पताल, मॉल या गेमिंग सेंटर जैसी चीजें चलाते हैं, जाहिर है वो छोटे-मोटे लोग तो होंगे नहीं। अतः, व्यवस्था के साथ उनका तालमेल नियमों के पालन के लिए नहीं बल्कि अनदेखी के लिए होता है।

व्यवस्था को ठेंगा दिखाना भारत में एक शौक

भारत में व्यवस्था को ठेंगा दिखाना एक शौक बन चुका है, ये एक आदत सी हो गई है, ये आम जनजीवन का हिस्सा बन गया है। अब सड़क पर पान खाकर थूकने से किसी की मौत नहीं होती है, लेकिन अगर आपने अपनी इमारत में अग्निशमन नियमावली का पालन नहीं किया है तो इससे कई लोगों की जान जा सकती है। अगर ये इमारत अस्पताल या शैक्षिक संस्थान है, तो सैकड़ों जान खतरे में है। इसीलिए, व्यवस्था को ठेंगा दिखाने के भी अलग-अलग स्तर हैं – किसी में नुकसान कम होता है, किसी में बहुत अधिक।

हाल के दिनों में दिल्ली और राजकोट में 2 ऐसी घटनाएँ हुईं, जिसके बाद आग लगने की समस्या पर फिर से चर्चा शुरू हो गई है। एक घटना दिल्ली के शिशु अस्पताल में हुई तो दूसरी घटना राजकोट के एक गेमिंग जोन की। दिल्ली के कृष्णा नगर और मुखर्जी नगर में भी आग लगने की घटनाएँ सामने आईं। हाल ही में उत्तराखंड के सैकड़ों हेक्टेयर जंगल आग लगने के कारण नष्ट हो गए। मई 2019 में सूरत में एक कोचिंग इंस्टिट्यूट में आग लगने के कारण 22 जानें चली गई थीं।

इसी तरह दिल्ली के बेबी केयर सेंटर और राजकोट के कोचिंग इंस्टिट्यूट में आग लगने के कारण 34 मौतें हुई हैं। अब फिर से चर्चा छिड़ गई है कि कैसे इन हादसों से बचा जा सकता है, इन सबके लिए जो नियमावली है उसका पालन क्यों नहीं किया जाता है। नियमावली का पालन ठीक से हो रहा है या नहीं, इसके लिए जिम्मेदार संस्थाएँ क्यों ढीली पड़ गई हैं? दिल्ली के जिस अस्पताल में ये घटना हुई है, वहाँ पहले फ्लोर पर सिलिंडर रिफिलिंग का काम चल रहा था। बताइए, इतने संवेदनशील जगह पर ये सब?

वहीं राजकोट में बिजली के शॉर्ट सर्किट के कारण ये घटना हुई। ये एक 3 मंजिला इंडोर गेमिंग फैसिलिटी था, जिसमें स्टील के शेड बने हुए थे। ये 50 मीटर चौड़ा और इसकी लंबाई 60 मीटर थी। इसमें 27 लोगों की मौत हो गई। नियम के विरुद्ध एंट्री और एग्जिट के लिए एक ही दरवाजा था। इस घटना में 27 लोगों की मौत हो गई। ऐसा नहीं है कि भारत में इन चीजों के लिए कोई नियम-कानून नहीं है, बहुत है। जैसे, BIS (न्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड्स) ने पूरी की पूरी NBC (नेशनल बिल्डिंग कोड) प्रकाशित कर रखी है।

नियम-कानून सब प्रकाशित, फिर भी होती है अनदेखी

इसे 1970 में प्रकाशित किया गया था और 2017 में इसमें सुधार किया गया। इमारतों के निर्माण, प्रबंधन और फायर सेफ्टी प्रोटोकॉल्स के दिशानिर्देश इसमें रहते हैं। हालाँकि, अग्निशमन के नियम-कानूनों का जिम्मा राज्य सरकारों के अंतर्गत आता है और इसे नगरपालिका के अधिकार क्षेत्र में छोड़ दिया जाता है। अवसान एवं शहरी मामलों के केंद्रीय मंत्रालय ने 2016 में ‘मॉडल बिल्डिंग Bylaws’ भी जारी किए। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) ने भी अस्पतालों जैसी इमारतों के लिए दिशानिर्देश जारी कर रखे हैं।

जैसे, सुरक्षा के लिए खुली जगह हो, हादसे की स्थिति में सबके सुरक्षित निकलने की प्रक्रिया तय हो, इसके लिए सीढियाँ हों और ड्रिल भी आयोजित किए जाएँ। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन संस्थान (NIDM) द्वारा किए गए एक अध्ययन से पता चलता है कि प्लानिंग की कमी और नियमों का ठीक से पालन न किए जाने के कारण ऐसे हादसे होते हैं। खासकर ऐसी बस्तियाँ जहाँ इमारतें आपस में सटी हुई हों और घनत्व बहुत अधिक हो, वहाँ खतरा ज़्यादा रहता है। झुग्गी-झोपड़ियों को भी बिना अग्निशमन नियमों ने अनौपचारिक रूप से बसाया जाता है।

कोई भी नियम-कानून ये गारंटी नहीं दे सकता कि आग नहीं लगेगी उनका पालन करने से, लेकिन इतना तो तय है कि इससे नुकसान कम से कम होगा। आवासीय सोसाइटी, शैक्षिक संस्थानों या अस्पतालों को ‘फायर जोन 1’ में रखा जाता है, ताकि औद्योगिक संरचनाओं से इनके टकराव को रोका जा सके। मकान के निर्माण में ऐसी चीजों का इस्तेमाल होना चाहिए, जिनसे आग लगने का खतरा न हो। बिजली के तारों और केबलों को सील करने के लिए भी ऐसे पदार्थ के इस्तेमाल की चेतावनी दी गई है, जिनसे आग न लगे।

अगर हम राष्ट्रीय क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के आँकड़ों की बात करें तो पिछले 2 साल में देश भर में आग लगने की 3375 घटनाएँ हुई हैं। अकेले 2019 में कर्मशियल इमारतों में आग के कारण 330 जानें गईं। वहीं आवासीय इमारतों में आग के कारण 6329 लोगों की मौत हुई। 2016-20 के बीच प्रतिदिन औसतन 35 मौतें आग लगने की घटनाओं के कारण हुई। 2016 में 16,900 और 2020 में 9110 मौतें आग लगने के कारण हुईं।

इनमें से 30% घटनाएँ सामान्यतः गुजरात और महाराष्ट्र में होती हैं। इसका सबसे बड़ा कारण है कि हमने पहले हुई ऐसी घटनाओं से कुछ सीखा नहीं। जून 1997 में दिल्ली के ग्रीन पार्क स्थित ‘उपहार सिनेमा’ में आग लगने के कारण 59 मौतें हुई थीं, वहीं 2004 में तमिलनाडु के तंजावुर स्थित कुंभकोणम में एक स्कूल में आग लगने से 94 बच्चे मर गए थे। 2014-18 के बीच की बात करें तो इस अवधि में देश में आग लगने की 83,872 घटनाएँ हुई हैं।

राजकोट वाली घटना में गेमिंग फैसिलिटी चलाने वाले के पास कर्मचारियों की ही कमी थी। संरचना के निर्माण में भी नियमों का पालन नहीं किया गया। टायर और लकड़ी का इस्तेमाल किया गया, जिस कारण आग तेज़ी से फैली। साथ ही स्थानीय प्रशासन ऐसे मामलों में न कोई कार्रवाई करता है, न नियमों का पालन सुनिश्चित करता है। इस कारण ऐसी घटनाएँ बार-बार होती हैं। लाइसेंस और परमिट को रिन्यू करने के दौरान ठीक से जाँच तक नहीं की जाती।

व्यवस्था पर हँसता गेमिंग सेंटर का संचालक

राजकोट मामले में 3 गिरफ्तारियाँ हुई हैं, लेकिन इसकी संभावना बहुत कम है कि जो इसके लिए जिम्मेदार हैं उन्हें सज़ा मिल पाएगी। ये लोग जाँच में भी सहयोग नहीं कर रहे हैं। उनका कहना है कि सारे दस्तावेज आग में जल गए हैं। आरोपित युवराज हरि सिंह सोलंकी तो हँसते हुए कोर्ट में ये कहते भी सुना गया कि ऐसी घटनाएँ होती रहती हैं। जबकि अदालत में सुनवाई के दौरान वो खुद को दुःखी दिखा रहा था। वो ‘Raceway Enterprises’ चलाता है, जिसके अंतर्गत ‘TRP गेम जोन’ चलाया जा रहा था।

वो सिर्फ इस घटना पर नहीं, बल्कि पूरी की पूरी व्यवस्था पर हँस रहा था। उसे पता है कि कोई उसका कुछ नहीं बिगाड़ पाएगा, क्योंकि इन चीजों के लिए अधिक सज़ा का प्रावधान भी नहीं है और जमानत पर वो बाहर आ ही जाएगा। कलक्टर, DCP और SP से लेकर नगर निगम के कमिश्नर तक इस गेमिंग जोन में मौजूदगी दर्ज कराते रहे हैं। अधिकारियों से नज़दीकी का यही रसूख था कि नियमों का उल्लंघन होता रहा। आग लगने समय वहाँ जनरेटर के लिए डीजल और कार रेसिंग के लिए पेट्रोल हजारों लिटर की मात्रा में जमा था।

गेमिंग जोन में आने-जाने के लिएमात्र 6-7 फ़ीट का ही रास्ता था। उधर दिल्ली वाले मामले में पुलिस ने अस्पताल के संचालक डॉक्टर नवीन खिची को गिरफ्तार कर लिया है, उसके एक नहीं बल्कि कई बेबी केयर सेंटर चलते हैं। एक जगह ऐसी व्यवस्था है कि उसके बाकी संस्थानों की तो सोच ही लीजिए। ये भी पता चला है कि उसके अस्पताल में डॉक्टर ही योग्य नहीं थे। फायर डिपार्टमेंट से उसके पास NOC नहीं था, अवैध रूप से ऑक्सीजन सिलिंडर भरे जा रहे थे।

टीम इंडिया का हेड कोच बनना चाहते हैं नरेंद्र मोदी और अमित शाह, BCCI को मिले 3000 आवेदन: तेंदुलकर-धोनी ने भी किया अप्लाई, जानिए क्या है माजरा

भारतीय पुरुष क्रिकेट टीम के हेड कोच के पद के लिए 3,000 से अधिक आवेदन प्राप्त हुए हैं। हेड कोच के लिए अधिकांश आवेदन फर्जी आए हैं। BCCI को अब इन्हें छाँटने में समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। इनमें से कई आवेदन फर्जी नामों से भी किए गए हैं।

रिपोर्टस के अनुसार, भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) को भारतीय पुरुष क्रिकेट टीम के लिए 3000 से अधिक आवेदन 13 मई, 2024 के बाद से मिले हैं। BCCI ने 13 मई, 2024 को सोशल मीडिया के माध्यम से नए हेड कोच के लिए आवेदन माँगे थे। यह आवेदन गूगल फॉर्म्स के जरिए दिए जाने थे।

इस गूगल फॉर्म के जरिए 27 मई, 2024 तक आवेदन दिया जाना था। BCCI को दिए जाने वाले आवेदन में कई जानकारियाँ भरनी थी लेकिन इसे कोई भी भर सकता था। ऐसे में इस लिंक का इस्तेमाल करते हुए अधिकांश फर्जी आवेदन भरे गए। इनको भरने वाले कोई पूर्व क्रिकेटर या अनुभवी कोच नहीं बल्कि सामान्य इंटरनेट यूजर थे।

कई लोगों ने फर्जी नामों से फर्जी आवेदन किए। लोगों ने हरभजन सिंह, महेंद्र सिंह धोनी और वीरेंदर सहवाग नाम जैसे पूर्व क्रिकेटरों के नाम से फर्जी फॉर्म भर दिए। यहाँ तक कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के नाम से भी आवेदन कर दिया।

इन फर्जी आवेदनों की बाढ़ के बीच BCCI को अब सही दावेदारों को तलाशना मुश्किल हो रहा है। अभी यह जानकारी सामने नहीं आई है कि किसी अनुभवी दावेदार ने इस प्रक्रिया के जरिए आवेदन किया है या नहीं। इससे पहले 2022 में भी BCCI को 5000 आवेदनों में से सही आवेदन तलाशने पड़े थे और उसे काफी मुश्किलें आई थी।

अगले कोच का कार्यकाल वर्तमान में अमेरिका में आयोजित हो रहे T20 विश्व कप के बाद चालू होगा और 2027 तक रहेगा। 2027 में 50 ओवर वाला विश्वकप भी होना है। इस बीच चर्चा है कि पूर्व क्रिकेटर गौतम गंभीर का नाम हेड कोच के लिए लाया जा सकता है लेकिन इस पर अभी कोई पुष्टि नहीं हुई है।

‘शराब घोटाले के सरगना हैं अरविंद केजरीवाल, मनी लॉन्ड्रिंग में गिरफ्तार विनोद चौहान से डायरेक्ट बातचीत के सबूत’: ED ने कोर्ट को बताई स्कैम में दिल्ली के CM की भूमिका

दिल्ली के शराब घोटाला मामले में अरविंद केजरीवाल बुरी तरह फँसते नजर आ रहे हैं। प्रवर्तन निदेशालय ने मंगलवार (28 मई 2024) को दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में आरोप पत्र दाखिल करते हुए कहा है कि अरविंद केजरीवाल आबकारी नीति मामले में हुई मनी लॉन्ड्रिंग केस से जुड़े हैं और इस केस में ‘मुख्य साजिशकर्ता’ और ‘सरगना’ भी हैं।इस आरोप पत्र के दाखिल होने के बाद और दलीलें सुनने के बाद विशेष न्यायाधीश कावेरी बावेजा की कोर्ट ने इस मसले पर अपना फैसला 4 जून तक सुरक्षित रख लिया है।

दिल्ली सीएम के मनी लॉन्ड्रिंग केस में गिरफ्तार आरोपित वकील विनोद चौहान से भी डायरेक्ट बातचीत के सबूत ईडी को मिले हैं। विनोद चौहान वही शख्स है जिसे लेकर ईडी ने कहा था कि वो इस केस में गैर-कानूनी तरीके से कमाए गए रुपयों को हैंडल कर रहा था। उस पर गोवा चुनावों के वक्त AAP को हवाला के जरिए रकम पहुँचाने के भी आरोप हैं। इसके अलावा उसके पास से 1.06 करोड़ रुपए जब्त किए गए थे।

बता दें केजरीवाल फिलहाल जेल से बेल पर बाहर हैं। ऐसे में ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग केस में केजरीवाल की संलिप्ता की बात कोर्ट को चार्जशीट दाखिल कर बताई हैं। इसके साथ ही ईडी ने कहा है कि आरोपित (अरविंद केजरीवाल) के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए इसमें पर्याप्त सबूत हैं। ईडी ने आरोपपत्र में आम आदमी पार्टी को भी आरोपित बनाया है।

वहीं, ईडी की ओर से पेश वकील जोहेब हुसैन ने अदालत को बताया कि यह ऐसा मामला है जिसमें धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) की धारा 70(1) और 70(2) दोनों को लागू किया जाना है। उन्होंने कहा, “दिल्ली आबकारी घोटाले, जिसमें आप नेता और अन्य लोग शामिल हैं, उसके मुख्य साजिशकर्ता और सरगना केजरीवाल हैं।” उन्होंने कहा कि इस मामले में रिश्वत की माँग की गई थी, और अपराध करने में मुख्य रूप से केजरीवाल शामिल थे।

ईडी ने इस दौरान शराब घोटाले के आरोपित विजय नायर की भी बात की। ईडी के वकील ने कहा है कि आरोपित विजय नायर मुख्यमंत्री आवास के पास वाले बंगले में रह रहे थे और विजय नायर सीधे केजरीवाल को रिपोर्ट कर रहे थे और वह हमेशा मुख्यमंत्री आवास पर होते थे।

दिल्ली शराब घोटाले में बेटी K कविता की जमानत के लिए ‘डील’ करना चाहते थे KCR, विधायक सौदेबाजी केस से डालना चाहते थे दबाव: पूर्व DCP का खुलासा

तेलंगाना फोन टैपिंग केस में आरोपित पूर्व DCP (टास्क फ़ोर्स) के कबूलनामे की रिपोर्ट से एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। इस रिपोर्ट में बताया गया है कि तेलंगाना के पूर्व मुख्यमंत्री K चंद्रशेखर राव मोइनाबाद फार्महाउस विधायक सौदेबाजी मामले का इस्तेमाल भाजपा पर समझौते का दबाव बनाने के लिए करना चाहते थे। रिपोर्ट में बताया गया है कि KCR (जिन्हें पेडन्ना भी कहा जाता है) अपनी बेटी MLC के कविता को दिल्ली शराब घोटाला मामले से राहत दिलाने के लिए इस मामले का इस्तेमाल करना चाहते थे।

राव के कबूलनामे में बताया गया है कि तत्कालीन मुख्यमंत्री KCR ने विधायकों को तोड़ने की साजिश के बारे में जानकारी होने पर इसके तकनीकी सर्विलांस के आदेश दिए थे। इसके बाद भाजपा नेता बी एल संतोष को गिरफ्तार करने का विफल प्रयास किया गया।

हालाँकि, KCR के इरादों पर तब पानी फिर गया जब इस मामले की जाँच तेलंगाना हाई कोर्ट ने सीबीआई को सौंप दी। राव ने अपने कबूलनामे में बताया है कि KCR अपनी योजना के विफल होने के बाद काफी गुस्सा थे। राव ने कहा है कि वह इससे अधिक नहीं बता सकते क्योंकि KCR के उनके ऊपर कई सारे अहसान हैं।

राव ने बताया ”पेडअन्ना उम्मीदों के मुताबिक ‘काम’ पूरा नहीं होने से नाराज थे। मैं ज्यादा जानकारी का खुलासा नहीं करूँगा क्योंकि मैं पेडअन्ना का बहुत एहसानमंद हूँ जिन्होंने मुझे दो बार नियुक्त किया और 2020 में मुझे रिटायर होने के बाद सिटी टास्क फोर्स में तैनात किया।”

राव ने खुलासा किया कि अक्टूबर 2023 में, स्पेशल इंटेलिजेंस ब्यूरो के मुखिया टी प्रभाकर राव को तत्कालीन तंदूर विधानसभा क्षेत्र से विधायक पायलट रोहित रेड्डी ने बताया था कि भाजपा में प्रभावशाली होने का दावा करने कुछ लोग उन पर BRS छोड़ने के बाद से भाजपा में शामिल करवाने का दबाव डाल रहे थे।

पूर्व DCP राव ने आगे खुलासा किया कि SIB के पूर्व डिप्टी SP डी प्रणीत राव ने KCR के कहने पर कई व्यक्तियों और विधायकों के फोन इंटरसेप्ट किए और एक ऑडियो क्लिप भी दी। तत्कालीन मुख्यमंत्री KCR ने पुलिस को इस मामले में जाल बिछाने को कहा और निर्देश दिया कि रोहित उनके साथ सहयोग करें। उन्होंने कथित तौर पर तीन और विधायकों को इस मामले में शामिल होने के लिए कहा।

इसके बाद, तंदूर विधायक रोहित रेड्डी ने तीन लोगों-रामचंद्र भारती, नंद कुमार और सिम्हयाजी स्वामी को मोइनाबाद में स्थित एक फार्महाउस में आने के लिए मनाया। इन्हीं तीनों लोगों को 4 BRS विधायकों को भाजपा में शामिल करने की कोशिश के आरोप में गिरफ्तार किया गया था।

राव के कबूलनामे में कहा गया है कि साइबराबाद पुलिस अधिकारियों की क्षमता ‘अक्षमता’ के कारण एक प्रमुख व्यक्ति पुलिस हिरासत से भाग गया। राव ने बताया, ”बाद में, एक SIT का गठन किया गया और KCR इस मामले को और मजबूत बनाने के लिए भाजपा नेता बी एल संतोष को गिरफ्तार करना चाहते थे। जिससे भाजपा एक समझौते पर सहमत हो जाए, और इसका इस्तेमाल उनकी बेटी कविता के खिलाफ ED के मामले से छुटकारा पाने के लिए किया जा सके।”

राव ने बताया कि भागे हुए व्यक्ति को पकड़ने के लिए कि SP-रैंक की अधिकारी रेमा राजेश्वरी के नेतृत्व में एक पुलिस टीम ने केरल भी गई लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली। दिसंबर 2022 में, तेलंगाना हाई कोर्ट ने इस आरोपित की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी और मामले को CBI को दे दिया। 6 फरवरी को, तेलंगाना हाई कोर्ट ने इस फैसले को चुनौती देने वाली 6 याचिकाओं को भी खारिज कर दिया।

इस साल अप्रैल की शुरुआत में यह बताया गया था कि 3 पूर्व SIB अधिकारियों ने पूछताछ के दौरान राजनीतिक हस्तियों की जासूसी करने, अलग अलग पार्टियों की नकदी जब्त करने और 30 नवंबर 2023 को हुए विधानसभा चुनाव से पहले सरकारी गाड़ियों में नकदी को लाने ले जाने की बात कबूल की थी। तेलंगाना फोन टैपिंग मामले को यहाँ पढ़ा जा सकता है। पूर्व सीएम KCR की बेटी के कविता दिल्ली शराब घोटाला मामले के आरोपितों में से एक हैं। उन्हें इस साल मार्च में ED ने गिरफ्तार किया था।