राजधानी दिल्ली में आपका मोबाइल फोन खो जाए तो उसके मिलने की उम्मीद सबसे कम है। दिल्ली में 1% से भी कम फोन वापस उनके यूजर्स को मिलते हैं। दिल्ली के अलावा मिजोरम, ओडिशा पंजाब और त्रिपुरा जैसे राज्यों में भी फोन खोने पर वापस मिलने की काफी कम संभावना काफी होती है।
यह आँकड़ा भारत सरकार के संचार सारथी पोर्टल से आया है। संचार सारथी पोर्टल के अनुसार, दिल्ली में खोए हुए 5.45 लाख फोन में से मात्र 4,893 फोन ही बरामद हुए। यानी दिल्ली में खोए हुए फोन में से केवल 0.90% फोन ही बरामद हुए। दिल्ली वह, राज्य भी है जहाँ देश में सबसे अधिक मोबाइल गायब होते हैं। दिल्ली के अलावा मिज़ोरम में फोन वापस मिलने की दर 1.75, ओडिशा में 4.91 और पंजाब में फोन वापस मिलने की दर मात्र 5.02% है।
दिल्ली के बाद कर्नाटक में सबसे अधिक मोबाइल गायब होते हैं। हालाँकि, कर्नाटक में मोबाइल के वापस मिलने की दर थोड़ी अच्छी है। कर्नाटक में 2.35 लाख खोए हुए मोबाइल में से 38,067 मोबाइल वापस मिल सके। मोबाइल खोने के मामले में देश का सबसे अधिक जनसंख्या वाला राज्य उत्तर प्रदेश पाँचवे नम्बर पर है, जहाँ 62,178 मोबाइल चोरी होने की घटनाएँ हुईं।
पंजाब में 41,176 खोए हुए मोबाइल फोन में से मात्र 2066 फोन बरामद हुए जबकि उत्तर प्रदेश में यह आँकड़ा 62,178 में से 5871 का रहा। इसी तरह तमिलनाडु में 35,539 में से मात्र 3490 मोबाइल फोन ही बरामद हो सके।
कैसे बरामद करें खोया फोन
यदि आपका मोबाइल फोन खो गया है, तो इसे IMEI नंबर और केंद्रीय दूरसंचार मंत्रालय की CEIR योजना के तहत पता लगाया जा सकता है और बाद में वापस किया जा सकता है। गौरतलब है कि हर मोबाइल फोन फिंगरप्रिंट की तरह एक IMEI नंबर होता है। फोन में भले ही सिम कार्ड बदल दिया गया हो, फिर भी IMEI के जरिए उसका पता लगाया जा सकता है। आप पुलिस स्टेशन में FIR कराने के बाद पोर्टल sancharsathi.gov.in के माध्यम से IMEI नंबर को ब्लॉक करने का अनुरोध कर सकते हैं।
एक बार यह पूरा हो जाने के बाद, सिम कार्ड के बावजूद फोन का उपयोग किसी भी नेटवर्क पर नहीं किया जा सकता है। पुलिस नेटवर्क को शामिल करके और लोकेशन ट्रैक करके आपके फोन को ट्रैक कर सकती है। CEIR इसी में काम आता है।
दिलचस्प बात ये है कि भारत के बाजार में मिलने वाले सस्ते और बिना ब्रांड वाले चीनी फोन में 16 अंकों वाले IMEI नंबर नहीं होते, जिससे ऐसे मोबाइल फोन को ट्रैक करना और वापस पाना असंभव हो जाता है। यह बात साफ़ नहीं है कि है कि क्या दिल्ली में खोए और चोरी हुए फोन की खराब रिकवरी दर दिल्ली के निवासियों द्वारा ऐसे चीनी फोन के बड़े पैमाने पर उपयोग के कारण है।
उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले में पीरी-मुरीदी करने वाले नजाकत अली उर्फ नाजू की हत्या में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। उसकी हत्या के आरोप में एक नाबालिग को गिरफ्तार किया गया है। मदरसे में पढ़ने वाले इस नाबालिग का नजाकत ने कई बार रेप किया था। इससे आजिज आकर नाबालिग ने सोमवार (20 मई 2024) को उसकी हत्या कर दी।
यह मामला मुजफ्फरनगर के शाहपुर थाना क्षेत्र का है। झाड़-फूँक का काम करने वाला 45 वर्षीय नजाकत अली लूट, हत्या और गोकशी जैसे 6 मामलों में नामजद था। वह कई बार जेल भी जा चुका है। 20 मई को उसके भाई सदाकत ने पुलिस में सूचना दी कि नजाकत की किसी अज्ञात व्यक्ति ने हत्या कर दी है। मृतक के घर के बाहर ताला लगा हुआ था। अंदर नजाकत की लाश पड़ी हुई थी। हत्या धारदार हथियार से की गई थी। पुलिस ने केस दर्ज कर जाँच शुरू की।
पहले पुलिस ने नजाकत के पुराने आपराधिक इतिहास से उसकी पड़ताल शुरू की तो सफलता नहीं मिली। मुखबिरों से पुलिस को पता चला कि हत्या के दिन नजाकत के घर में एक नाबालिग लड़का गया था। पुलिस ने 15 साल के उस किशोर को खोज निकाला। किशोर नजाकत के घर के पास ही एक मदरसे में पढ़ता था। शुक्रवार (24 मई 2024) को उसे थाने बुलाया। पूछताछ में किशोर ने नजाकत की हत्या करना स्वीकार कर लिया।
किशोर ने बताया कि 4 माह पहले जब वो मदरसे में पढ़ने गया था, तब नजाकत ने उसे अपने घर बुलाया था। घर में कोई और नहीं था। उसकी बीवी अपने 2 बेटों के साथ मायके गई थी। नजाकत अली ने किशोर को डरा-धमकाकर कुकर्म किया। इस दौरान उसने अश्लील वीडियो भी बना डाली थी। यही वीडियो वायरल करने की धमकी दे कर नजाकत ने मदरसे के छात्र से कई बार कुकर्म किया। इस वजह से छात्र काफी परेशान रहने लगा था।
सोमवार (20 मई) को दोपहर 2:30 पर नजाकत ने एक बार फिर से किशोर को अपने घर बुलाया। यहाँ वो किशोर से कुकर्म का प्रयास करने लगा। छात्र ने विरोध किया तो उसकी पिटाई की गई। इसी दौरान छात्र की नजर नजाकत के घर में रखे बाँके (हँसियानुमा धारदार हथियार) पर पड़ी। उसने बाँके को उठा कर नजाकत वार शुरू कर दिए। हमला नजाकत की गर्दन पर किया गया जिस से उसकी मौके पर ही मौत हो गई। आरोपित बाल अपचारी ने अपने अश्लील वीडियो को डिलीट करने के लिए बाँके से ही नजाकत के मोबाइल के टुकड़े-टुकड़े कर डाले।
हत्या करने और सबूत मिटाने के बाद नाबालिग ने अपने हाथ-पैर धोए। बाद में वह सीढ़ियों के रास्ते नजाकत के छत पर गया जहाँ से वो दूसरों के छतों से होता भाग निकला। नजाकत का मोबाइल भी टुकड़ों में तोड़ कर फेंक दिया गया। पुलिस ने बाल अपचारी को गिरफ्तार कर लिया है हत्या में प्रयोग किया गया बाँका बरामद कर लिया गया है। मामले में जाँच और अन्य कानूनी कार्रवाई जारी है। आरोपित पर IPC 302 के तहत कार्रवाई की गई है।
मीडिया संस्थान ‘The Lallantop’ और इसके संस्थापक सौरभ द्विवेदी को अक्सर भाजपा के विरोध में भ्रम फैलाने के लिए जाना जाता रहा है। अपनी ग्राउंड रिपोर्टिंग के दौरान भी ‘दी लल्लनटॉप’ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पक्ष में कुछ भी सुनना पसंद नहीं करता। अब भाजपा की निलंबित प्रवक्ता नूपुर शर्मा को लेकर मीडिया संस्थान ने झूठ फैलाया है। लल्लनटॉप अक्सर सेक्स से जुड़ी बातें कर के भी ट्रैफिक जुटाता रहा है। YouTube पर इसके 2.96 करोड़ सब्सक्राइबर्स हैं।
नूपुर शर्मा को लेकर सौरभ द्विवेदी का झूठ
यूट्यूब चैनल द लल्लनटॉप पर नेता नगरी नाम के शो में एक दर्शक ने नुपूर शर्मा को लेकर द्विवेदी से प्रश्न पूछा। पंकज शर्मा ने एक शख्स ने प्रश्न उठाया कि लल्लनटॉप पर नुपूर शर्मा को बुलाकर उनसे बातचीत क्यों नहीं की गई। इसका द्विवेदी ने जवाब दिया कि उन्होंने नुपूर शर्मा की टिप्पणियों और उससे उपजे विवाद को लेकर उन्हें अपने चैनल पर आकर चीजें साफ करने के लिए आने का मौक़ा दिया था। सौरभ द्विवेदी ने बताया कि नुपूर शर्मा ने इस पर इनकार कर दिया था। द्विवेदी ने यह भी दावा किया कि उनकी टीम ने फिर से नुपूर शर्मा तक पहुँचने की कोशिश की है ताकि वह अपना पक्ष रख सकें।
ऑपइंडिया से बातचीत में नुपूर शर्मा ने माना है कि 31 मई, 2022 की प्रेस वार्ता में उनकी सौरभ द्विवेदी से से भेंट हुइ थी। कई अन्य पत्रकारों से भी वे मिली थीं जो उस कार्यक्रम में मौजूद थे। लेकिन सौरभ द्विवेदी ने उन्हें कोई प्रस्ताव दिया था ऐसा उन्हें स्मरण नहीं है। सौरभ के दावे को लेकर इसलिए भी संदेह होता है क्योंकि 31 मई को मीडिया से नुपूर के बात करने पर कोई प्रतिबंध नहीं था। उन्होंने मीडिया को बाइट दिया था। 31 मई को ही करीब एक घंटे का साक्षात्कार ऑपइंडिया को दिया था।
नुपूर शर्मा ने ऑपइंडिया को बताया कि अप्रैल 2023 में एक IAS के यहाँ आयोजित पार्टी में सौरभ द्विवेदी और उनकी पत्नी को देख वे हैरान रह गईं थी। उन्होंने ही सौरभ और उनकी पत्नी से मिलने की पहल की थी। इस दौरान नुपूर ने जुबैर के कारण उनकी जिंदगी पर आए खतरों को लेकर बात की थी लेकिन सौरभ द्विवेदी ने इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। उन्हें यह भी याद नहीं कि उन्हें लल्लनटॉप पर आकर अपना पक्ष रखने का कोई प्रस्ताव मिला था, जैसा कि सौरभ द्विवेदी दावा कर रहे हैं।
कोरोना वायरस को लेकर भी लल्लनटॉप ने बेचा ‘सेक्स’
सबसे पहले बात करते हैं हाशमी दवाखाना की। हिटलर के लिंग की सटीक नाप बताकर चर्चा में आए दी लल्लनटॉप आजकल किलोमीटर के हिसाब से (लोकोक्ति) यूट्यूब पर वीडियो बनाते हुए देखा गया था, इनमें से एक सबसे ज्यादा जोशीला वीडियो, जिसने घर पर बंद बैठे युवाओं का ध्यान आकर्षित किया, वो था – “सेक्स पावर बढ़ाने जैसी चाहत से आया कोरोना वायरस”। इस वीडियो की गहराई में जाने की जरूरत तो नहीं है लेकिन इस वीडियो को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस वायरस के खिलाफ वैक्सीन तैयार करने में जुटे हुए वैज्ञानिकों को तो दे ही देना चाहिए था।
अगर यह सम्भव ना हो तो इस विडियो की यूट्यूब लिंक कम से कम से कम नॉर्थ कोरिया को तो दे ही देनी चाहिए थी, क्योंकि जो लोग हिटलर की मौत के इतने वर्षों बाद भी उसके गुप्तांग पर Ph.D कर सकते हैं, वो कोरोना के लिए कोई एंटीडॉट भी जरूर तैयार कर ही देते। यही नहीं, दी लल्लनटॉप अपनी ऑडियंस का ख़ास ध्यान रखते हुए उनके मतलब का फैक्ट चेक करते हुए यह भी साबित करते हुए देखा गया था कि सरसों के तेल से कोरोना वायरस से बचाव नहीं हो पाता है। यह वो ऑडियंस है जो दैनिक सस्ते इन्टरनेट की पूरी डेढ़ जीबी या तो टिकटॉक, या फिर दी लल्लनटॉप के चरणों में ही समर्पित करती रही है।
ब्रा, पैंटी, योनि, सेक्स, लिंग, वीर्य… लल्लनटॉप में और क्या?
गोपालगंज में एक बच्चे की मौत के बाद उसके पिता ने दावा किया कि मस्जिद में उसकी बलि दी गई है। हालाँकि, बाद में वो अपने बयान से पलट गया। इसके बाद किए गए कथित फैक्ट-चेक में ऑपइंडिया को प्रोपेगंडा और फर्जी खबरों का पोर्टल बिना सबूत के बता दिया। लल्लनटॉप ने इसी तरह हास्य-व्यंग्य पोर्टल द्वारा बनाई गई एक रिपोर्ट का फैक्ट चेक किया था। इसके बाद पत्रकारिता के इस आखिरी मसीहा ने एक बार सारी जनता के सामने केंद्र सरकार की NPR-NRC नीतियों पर अपने पत्रकारिता के गुरु राजदीप सरदेसाई के साथ बैठकर खुलेआम झूठे आँकड़े पेश किए थे।
साथ ही पकड़े जाने पर बेहद बेशर्मी से यूट्यूब से वीडियो को ना हटाकर चुपके से इसके विवरण में इस ‘भूल’ के बारे में लिख दिया। MEME और फेकिंग न्यूज़ का फैक्ट चेक करना तो दी लल्लनटॉप के मूल्यों का पहला सबक है ही। शूटिंग कर रहे कुछ कलाकारों को मुस्लिम पर हो रहा अत्याचार बताकर दी लल्लनटॉप और उनकी टीम ने जमकर सेक्युलर साहित्य लिखा था।एक साल पुरानी खबर, जिसे पुलिस की जाँच में महीनों पहले फर्जी बता दिया गया था, को ठीक होली के ही दिन दोबारा इसलिए प्रकाशित किया गया ताकि होली को वीर्य का त्योहार साबित कर कुछ सस्ती लोकप्रियता का जुगाड़ किया जा सके।
बजट के दौरान भी लल्लनटॉप ने छपी कामोत्तेजना वाली खबरें
महिलाओं के विषयों पर अन्य से अधिक चिंतित दी लल्लनटॉप जहाँ होली पर इस वजह से चिंतित होता है कि कहीं यह वीर्य का त्योहार तो नहीं, वही दी लल्लनटॉप बजट के दौरान इस बात को लेकर परेशान था कि आखिर प्रियंका चोपड़ा की ड्रेस खिसकती क्यों नहीं? प्रियंका चोपड़ा अपने पति निक जोनास के साथ 62वें ग्रैमी अवार्ड्स में एक ऐसी ड्रेस पहनकर गईं, जिसने दी लल्लनटॉप को परेशान कर दिया। इसके बाद उसने इस पर एक पूरी की पूरी रिपोर्ट छाप दी।
सौरभ द्विवेदी, उनके पिता और कंडोम
ऐसे ही इंडिया टुडे मीडिया समूह की छत्र-छाया में डिजीटल प्लेटफॉर्म पर नाम कमाने वाले ‘दी लल्लनटॉप’ के संपादक सौरभ द्विवेदी की एक छोटी सी चूक से उनकी निष्पक्ष पत्रकारिता वाले मुखौटे की कल बखिया उधड़ गई थी। दरअसल, सोशल मीडिया पर कल सौरभ द्विवेदी को भाजपा समर्थकों को नीचा दिखाने के लिए ड्यूरेक्स कंडोम के विज्ञापन के साथ आपत्तिजनक टिप्पणी शेयर करते पकड़ा गया। स्क्रीनशॉट में देख सकते हैं कि सौरभ द्विवेदी के ट्वीट में ड्यूरेक्स कंडोम के विज्ञापन के साथ एडिटिंग करके लिखा है- ” ये उन लोगों के लिए है जो अब भी भाजपा को समर्थन दे रहे हैं। कृपया इसका इस्तेमाल करें। हम आप जैसे और लोग इस दुनिया में नहीं चाहते।”
इसे शेयर करते हुए वह अपने फॉलोवर्स से पूछते हैं ” HASHTAG चलाना चाहिए कि नहीं मित्रों।” सौरभ ने अपना ट्वीट डिलीट कर दिया। लेकिन, उनके ट्वीट का स्क्रीनशॉट ट्विटर पर इस बीच तेजी से वायरल होने लगा और लोग जोर-शोर से दी लल्लनटॉप के संपादक सौरभ द्विवेदी को उसकी पत्रकारिता और विचारधारा के लिए सवालों के घेरे में घेरने लगे। गौरतलब है कि आज भाजपा के प्रति लोगों में सरेआम जहर फैलाने का करने वाले सौरभ द्विवेदी के पिता (रविकांत द्विवेदी) खुद भाजपा के टिकट पर विधायकी का चुनाव लड़कर दो बार हार चुके हैं।
बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना ने कहा है कि उनके देश के हिस्सों को तोड़ कर ईसाई मुल्क बनाए जाने की साजिश हो रही है। उन्होंने कहा कि म्यांमार और बांग्लादेश के कुछ हिस्से मिला कर गोरे लोगों वाला एक देश यहाँ एक ईसाई मुल्क बनाना चाहता है।
प्रधानमंत्री शेख हसीना ने एक कायर्क्रम में यह खुलासे किए हैं। यह कार्यक्रम बांग्लादेश के आम चुनावों के बाद 14 पार्टियों की एक बैठक को लेकर रखा गया था। इसकी शुरुआत पीएम शेख हसीना के भाषण से हुई। पीएम हसीना सत्ताधारी अवामी लीग की अध्यक्ष भी हैं।
पीएम शेख हसीना ने कहा कि म्यांमार और बांग्लादेश के हिस्से काट कर एक ईसाई मुल्क बनाए जाने की साजिश है, जो कि पूर्वी तिमोर की तर्ज पर बनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि इसे बांग्लादेश के चट्टोगाम और म्यांमार के सीमाई इलाके लेकर बनाया जाएगा, इसी के साथ बंगाल की खाड़ी में एक सैन्य ठिकाना बनाए जाने की भी योजना है।
शेख हसीना ने आरोप लगाया कि यह सब गोरी चमड़ी वाले देश के लोग करना चाहते हैं। उन्होंने बताया कि उन्हें यह प्रस्ताव मिला था कि यदि वह इस देश को बंगाल की खाड़ी में अपना सैन्य अड्डा बनाए जाने की अनुमति दे दें तो उनका दोबारा चुन कर आना काफी आसान कर दिया जाएगा। हालाँकि, उन्होंने देश का नाम नहीं लिया।
पीएम शेख हसीना ने कहा कि वह अपने देश के हिस्सों को बेच कर सत्ता में नहीं आना चाहती थीं। उन्होंने लोगों को चेताया कि अभी आगे और भी समस्याएँ बांग्लादेश के लिए खड़ी की जाएँगी, लेकिन उनसे घबराने की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने नया ईसाई मुल्क बनाने के बारे में कहा कि साजिश करने वालों की नजरें बंगाल की खाड़ी पर हैं।
शेख हसीना ने अपने बयान में नए मुल्क बनाने की कोशिश करने वाले देश का नाम नहीं लिया लेकिन अंदाजा लगाया जा रहा है कि उनका इशारा अमेरिका की तरफ था। इससे पहले भी वह आरोप लगा चुकी हैं कि अमेरिका उनकी सरकार का तख्तापलट करके इस्लामी कट्टरपंथियों को सत्ता में बिठाना चाहता है।
अमेरिका बांग्लादेश के चुनावों पर भी लगातार प्रश्न उठाता आया है, उसने बांग्लादेश के कई अधिकारियों पर अमेरिका में घुसने पर रोक लगाई थी। वहीं शेख हसीना ने पूर्वी तिमोर का उदाहरण दिया जो कि एक ईसाई मुल्क है और 2002 में ही बना है।
तिमोर द्वीप के एक हिस्से में बसे इस देश को पुर्तगाल ने 1974 में छोड़ दिया था, इसके बाद इस पर इंडोनेशिया का कब्जा हो गया। हालाँकि, यहाँ कई समूह पैदा हो गए जिन्होंने तिमोर के एक हिस्से को आजाद करवा लिया। तिमोर में 99% जनता ईसाई है।
अरविंद केजरीवाल के ‘शीशमहल’ में उनके PA द्वारा DCW (दिल्ली महिला आयोग) की पूर्व अध्यक्ष स्वाति मालीवाल के साथ मारपीट मामले की सुनवाई सोमवार (27 मई, 2024) को दिल्ली के तीस हजारी कोर्ट में हुई। वरिष्ठ अधिवक्ता N हरिहरन ने विभव कुमार का प्रतिनिधित्व करते हुए उसकी तरफ से जमानत याचिका दायर की। उन्होंने कहा कि IPC की धारा-308 के तहत मामला दर्ज किया गया है, जिसका अर्थ है कि सेशन कोर्ट में इसकी सुनवाई हो सकती है।
उन्होंने बताया कि AAP की राज्यसभा सांसद स्वाति मालीवाल दिल्ली के CM आवास पहुँची थीं और उन्होंने अरविंद केजरीवाल के PA को बुलाया। उनका कहना है कि विभव कुमार उस समय वहाँ मौजूद नहीं थे, ऐसे में स्वाति मालीवाल मुख्यमंत्री के निवास स्थान की तरफ बढ़ निकलीं। N हरिहरन ने पूछा कि मुख्यमंत्री आवास में कोई इस तरह से घुस सकता है? उन्होंने इसे जबरन घुसना बताते हुए कहा कि इस संबंध में रिपोर्ट दायर की जा चुकी है। उन्होंने दलील दी कि न तो उनके पास कोई अपॉइंटमेंट था, न ही उनके आने की पूर्व-सूचना मिली थी।
अधिवक्ता N हरिहरन के मुताबिक, स्वाति मालीवाल को जब सुरक्षा गार्ड्स ने रोका तो उन्होंने उनसे कहा कि क्या वो एक सांसद को इंतजार कराएँगे? डिफेंस काउंसल के अनुसार, इसके बाद वो वेटिंग रूम में बैठ गईं और सुरक्षाकर्मियों से विभव कुमार से बात करने के लिए कहा। उन्होंने FIR में लिखी बातों को झूठा बताते हुए कहा कि इसे तुरंत नहीं दर्ज कराया गया, 3 दिन बाद फाइल किया गया। उन्होंने कहा कि CM आवास में ऐसी घटना नहीं हो सकती, वहाँ उस समय कई लोग मौजूद थे।
साथ ही उन्होंने ये भी दलील दी कि उस क्षेत्र में कई अस्पताल होने के बावजूद स्वाति मालीवाल को मेडिकल टेस्ट के लिए AIIMS ले जाया गया। उन्होंने कहा कि कोई गंभीर जख्म नहीं है, ऐसे में इसे हत्या का प्रयास नहीं माना जा सकता। उन्होंने दावा किया कि जो जख्म हैं, वो खुद से किए गए भी हो सकते हैं। उन्होंने स्वाति मालीवाल के कपड़े फाड़े जाने की बात को भी झूठ बताया। इस दौरान AAP की राज्यसभा सांसद रो पड़ीं। वकील ने कहा कि FIR में दर्ज सारी चीजें बाद में सोची गई हैं।
उनका कहना था कि वो अपने मुवक्किल को निर्दोष साबित करने के लिए नहीं कह रहे, बल्कि सिर्फ जमानत माँग रहे हैं। उन्होंने कहा कि CCTV फुटेज पुलिस के पास मौजूद है, ऐसे में इससे छेड़छाड़ की बात सही नहीं है। उन्होंने ये दलील भी दी कि विभव कुमार शुरू से जाँच में सहयोग कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि स्वाति मालीवाल की ‘कहानी’ के हिसाब से सब कुछ तय किया गया है, ताकि जमानत से रोका जा सके। उन्होंने कहा कि विभव कुमार 18 मई से कस्टडी में हैं।
उनके विरोध में सीनियर पब्लिक प्रॉसिक्यूटर अतुल श्रीवास्तव ने जिरह की और कहा कि हत्या के प्रयास के लिए इरादा मालूम होना ज़रूरी नहीं है, इसके बारे में पता चलना ही काफी है। उन्होंने पूछा कि पीड़िता को पीटा जाना, घसीटा जाना और टेबल के बीच में उनका सिर का टकराना, क्या ये हत्या की कोशिश नहीं है? उन्होंने कहा कि स्वाति मालीवाल को अरविंद केजरीवाल ‘लेडी सिंघम’ कहते थे, आरोपित को पद से हटाया जा चुका है।
उन्होंने दलील दी कि विभव कुमार ने ये नहीं बताया कि वो PA के पद पर नहीं है और अरविंद केजरीवाल से उनकी बैठक नहीं करा सकता, ऐसे में उनके इरादे ठीक नहीं थे। उन्होंने कहा कि पहले कभी भी स्वाति मालीवाल को अरविंद केजरीवाल से मिलने के लिए पहले कभी अपॉइंटमेंट नहीं लेना पड़ा। उन्होंने कहा कि जब वेटिंग रूम में स्वाति मालीवाल को बिठाया गया था, फिर उनके जबरदस्ती वहाँ घुसने की बात सही कैसे हो सकती है? अचानक वहाँ विभव कुमार आ गया और पूछने लगा कि उन्हें वहाँ किसने बिठाया?
APP के अनुसार, वहाँ मौजूद सभी लोग विभव कुमार को रिपोर्ट कर रहे थे, इसका मतलब है कि वो सबूतों के साथ छेड़छाड़ कर सकता है और वो प्रभावशाली है। उन्होंने कहा कि CR पार्क के पास पीड़िता रहती हैं, इसीलिए वो AIIMS में मेडिकल के लिए गईं। उन्होंने कहा कि यौन अपराधों को दर्ज कराने में पूरे देश की महिलाएँ हिचकती हैं, ऐसे में पहली बार थाने जाने के बावजूद स्वाति मालीवाल ने घटना का पूरा विवरण नहीं दिया, बल्कि पुलिस अधिकारी उनके घर गए तो उन्होंने सब कुछ बताया।
उन्होंने कहा कि CCTV के साथ कुछ तकनीकी समस्या हो सकती है, साथ ही बताया कि फॉर्मेट करने के बाद iPhone पुलिस को दिया गया। आरोपित ने मुंबई जाकर फोन फॉर्मेट किया। उन्होंने जमानत याचिका का विरोध करते हुए आरोपित की और अधिक कस्टडी की ज़रूरत जताई। उन्होंने कहा कि पीड़िता आरोपित को बदनाम नहीं कर रही थी, आरोपित को घटनास्थल के पास पाया गया। वहीं स्वाति मालीवाल की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता माधव खुराना ने जिरह की।
उन्होंने दलील दी कि पीड़िता को नोटिस दिए बिना जमानत याचिका पर सुनवाई नहीं हो सकती। उन्होंने बताया कि 3-4 दिन बाद भी जख्म थे, इसका मतलब है कि वो गहरे थे। उन्होंने बताया कि 17 मई को ईमेल के जरिए पीड़िता ने शिकायत भेज दी थी। पुलिस से पूछताछ में आरोपित ने गुमराह किया। उन्होंने याद दिलाया कि विभव कुमार पहले भी सरकारी कर्मचारी से मारपीट कर चुका है। साथ ही पूछा कि अगर वो निर्दोष है तो उसने फोन को फॉर्मेट क्यों किया, CCTV फुटेज से छेड़छाड़ क्यों की गई?
#WATCH | AAP MP Swati Maliwal leaves from Delhi's Tis Hazari court after attending Bibhav Kumar's bail hearing
उन्होंने ध्यान दिलाया कि कैसे स्वाति मालीवाल को हत्या और बलात्कार की धमकियाँ मिल रही हैं। इस दौरान स्वाति मालीवाल ने भी बताया कि कैसे AAP ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर के उन्हें भाजपा का एजेंट बताया। उन्होंने कहा कि AAP के पास एक बड़ी मशीनरी है, उसे काम पर लगा दिया गया है। उन्होंने कहा कि अगर विभव कुमार बाहर आता है तो उनके परिवार को खतरा है। उन्होंने कहा कि विभव कुमार कोई साधारण व्यक्ति नहीं है, उसे वही शक्ति और सुविधा हासिल है जो एक मंत्री को होती है। कोर्ट ने दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया।
दिल्ली के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के मुखिया अरविन्द केजरीवाल ने सुप्रीम कोर्ट में अंतरिम जमानत की अवधि बढ़ाने के लिए याचिका लगाई है। उन्होंने अपनी जमानत को 8 जून, 2024 तक बढ़ाने की माँग सुप्रीम कोर्ट से की है। उन्होंने इसके लिए अपने स्वास्थ्य का हवाला दिया है।
CM केजरीवाल ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई है कि 1 जून, 2024 को खत्म हो रही उनकी चुनाव प्रचार के लिए दी गई जमानत को एक सप्ताह के लिए बढ़ा दिया जाए। उन्होंने कहा है कि उन्हें इस एक सप्ताह में कुछ मेडिकल चेकअप करवाने हैं, जिसके लिए उन्हें यह बढ़ी हुई जमानत चाहिए।
मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने अपनी अंतरिम जमानत के लिए 7 दिन का Extension मांगा है।
जब वे ED की न्यायिक हिरासत में थे, तब उनका वजन 7 किलो कम हो गया था। वजन का अचानक कम होना डॉक्टरों के लिए चिंता का विषय है।
AAP नेता और दिल्ली सरकार में मंत्री आतिशी ने इस विषय में बताया है कि केजरीवाल के शरीर में कीटोन का स्तर अधिक पाया गया है और जेल में 7 किलो वजन घटा है। आतिशी ने बताया कि उनका वजन भी अचानक कम हुआ है, ऐसे में डॉक्टरों ने इससे किडनी को नुकसान और कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा बताया है।
आतिशी ने बताया है कि डॉक्टरों ने उन्हें गंभीर मेडिकल चेकअप करवाने की सलाह दी है, उन्हने पूरे शरीर का PET स्कैन करवाने को कहा गया है। इसी कारण से अरविन्द केजरीवाल को एक सप्ताह की अतिरिक्त जमानत चाहिए।
गौरलतब है कि सुप्रीम कोर्ट ने 10 मई, 2024 को अरविन्द केजरीवाल को 1 जून तक लोकसभा चुनाव में प्रचार करने के लिए अंतरिम जमानत दी थी। उन्हें 2 जून को कोर्ट के सामने आत्मसमर्पण करना था। उन्हें मार्च, 2024 में दिल्ली शराब घोटाला मामले में गिरफ्तार किया गया था । अब उन्होंने स्वास्थ्य आधार पर फिर से जमानत बढ़ाने की माँग की है।
इससे पहले भी वह जेल में स्वास्थ्य को लेकर कई दावे कर चुके हैं। आम आदमी पार्टी ने दावा किया था कि तिहाड़ जेल में ले जाए जाने के बाद CM केजरीवाल का वजन 4.5 किलोग्राम कम हो हुआ था। हालाँकि, इस दावे को तिहाड़ प्रशासन ने नकारते हुए बताया था कि वह जेल में 65 किलोग्राम के आए थे और उतने ही बने रहे थे।
CM केजरीवाल को गिरफ्तार करने के बाद प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने कोर्ट को बताया था कि वह अपना स्वास्थ्य बिगाड़ने के लिए आम और मिठाई खा रहे थे। ऐसा वह जेल के भीतर पाना स्वास्थ्य बिगाड़ने के लिए कर रहे थे ताकि उन्हें स्वास्थ्य आधार पर जमानत मिल सके।
पुणे के ससून अस्पताल के दो डॉक्टरों ने दो लोगों को करोड़ों की पोर्शे से कुचलने वाले नाबालिग का ब्लड सैंपल बदल दिया था। उन्होंने नाबालिग का सैंपल कूड़े में फेंक उसकी जगह दूसरे आदमी के खून की जाँच पर नाबालिग रईसजादे का नाम डाल दिया था। इसकी वजह से शुरुआती रिपोर्ट में उसके नशे की बात नहीं खुली थी। अब पुलिस ने इन दोनों डॉक्टरों को गिरफ्तार कर लिया है।
इस मामले में पुणे के पुलिस कमिश्नर अमितेश कुमार ने मीडिया को बताया, “यह पता चला है कि जो ससून अस्पताल में सैंपल लिया गया था, जिस पर वहाँ के डॉक्टरों ने आरोपित का नाम लिख कर और सील करके जाँच के लिए फॉरेंसिक को भेजा था। वह असल में नाबालिग आरोपित का नहीं था।”
#WATCH | Pune car accident case | Pune Police Commissioner Amitesh Kumar says "Sections 120 (B), 467 Forgery and 201, 213, 214 Destruction of evidence have been added in this matter. We received the forensic report yesterday and it has been revealed that the sample collected at… pic.twitter.com/UdurvDuVyu
कमिश्नर अमितेश कुमार ने बताया कि औंध अस्पताल में लिया गया ब्लड सैंपल नाबालिग का ही था और उसका DNA, उसके पिता से भी मिल गया है। ऐसे में औंध वाला ब्लड सैंपल सही निकला है जबकि ससून अस्पताल का सैंपल दूसरा था और नाबालिग का नहीं था। उन्होंने बताया कि दोनों सैंपल में अलग-अलग नतीजे आने के बाद इस मामले की जाँच की गई।
उन्होंने बताया कि जब नाबालिग का सैंपल भेजने वाले डॉक्टरों से पूछताछ की गई तो पता चला कि उन्होंने असली ब्लड सैंपल कूड़े कूड़ेदान में फेंक दिया था। इसकी जगह पर दूसरे व्यक्ति का ब्लड सैंपल लेकर उस पर नाबालिग का नाम लिख दिया गया था।
कमिश्नर अमितेश कुमार ने बताया नाबालिग का ब्लड सैंपल बदलने का काम ससून अस्पताल के फॉरेंसिक विभाग के मुखिया अजय तावरे के कहने पर किया गया था। उन्होंने बताया कि अजात तावरे और ब्लड सैंपल बदलने वाले डॉक्टर श्रीहरी हल्नोर को गिरफ्तार कर लिया गया।
उन्होंने यह भी जानकारी दी कि इन दोनों पर आपराधिक षड्यंत्र रचने, सबूतों से छेड़छाड़ और धोखाधड़ी समेत कई धाराओं में मामला दर्ज किया है। मामले की आगे जाँच के लिए ससून अस्पताल के CCTV खंगाले जा रहे हैं और दोनों डॉक्टरों को कोर्ट में पेश किया जाएगा।
ससून अस्पताल में भेजे गए नाबालिग रईसजादे के ब्लड सैंपल में अल्कोहल नहीं मिला था, जिसके बाद पुलिस को इस मामले में शक हुआ था। उसने दूसरा सैंपल लेकर जाँच करवाई तब पूरा खुलासा हुआ। पुलिस का कहना है कि नाबालिग के खून में अल्कोहल का मिलना या नहीं मिलना उनके केस को प्रभावित नहीं करेगा।
गौरतलब है कि हादसे को अंजाम देने से पहले रईसजादे की एक बार में बैठ कर शराब पीते हुए CCTV वीडियो भी सामने आई थी। इसमें वह दोस्तों के बैठ कर पी रहा था। वह एक अन्य बार में भी गया था। इन दोनों बार को पुलिस ने सील कर दिया था।
गौरलतब है कि 19 मई, 2024 की रात को पुणे के कल्याणीनगर इलाके में एक बिल्डर बाप के रईसजादे ने अपनी करोड़ों की पोर्शे से दो लोगों को रौंद दिया था। वह दोनों सॉफ्टवेयर इंजीनियर थे और उनकी इस हादसे में मौत हो गई थी। इसके बाद नाबालिग को 15 घंटे में ही जमानत मिल गई थी। उसे जमानत के लिए एक 300 शब्द का निबन्ध लिखने को कहा गया था। बाद में इस मामले के उठने के बाद उसकी जमानत खारिज हो गई थी।
लल्लनटॉप के संपादक सौरभ द्विवेदी ने हाल ही में एक शो में दावा किया है कि उन्होंने पूर्व भाजपा नेता नुपूर शर्मा को उनके बयान पर सफाई देने का मौका अपने चैनल पर दिया था। नुपूर शर्मा ने सौरभ द्विवेदी की इस बात को झूठ बताया है। उन्होंने कहा है कि उन्हें ऐसा कोई मौका नहीं दिया गया।
यूट्यूब चैनल द लल्लनटॉप पर नेता नगरी नाम के शो में एक दर्शक ने नुपूर शर्मा को लेकर द्विवेदी से प्रश्न पूछा। पंकज शर्मा ने एक शख्स ने प्रश्न उठाया कि लल्लनटॉप पर नुपूर शर्मा को बुलाकर उनसे बातचीत क्यों नहीं की गई।
इसका द्विवेदी ने जवाब दिया कि उन्होंने नुपूर शर्मा की टिप्पणियों और उससे उपजे विवाद को लेकर उन्हें अपने चैनल पर आकर चीजें साफ करने के लिए आने का मौक़ा दिया था। सौरभ ने इस मामले में अपनी बात नीचे लगे वीडियो में 2 घंटे 11 मिनट से 2 घंटे 19 मिनट के रखी।
द्विवेदी ने दावा किया कि उन्होंने एक बार भाजपा के एक कार्यक्रम और एक बार एक IAS के घर आयोजित निजी कार्यक्रम में नुपूर शर्मा को अपने चैनल पर आकर इस पूरे मुद्दे को रखने का मौका दिया था। सौरभ द्विवेदी ने बताया कि नुपूर शर्मा ने इस पर इनकार कर दिया था। द्विवेदी ने यह भी दावा किया कि उनकी टीम ने फिर से नुपूर शर्मा तक पहुँचने की कोशिश की है ताकि वह अपना पक्ष रख सकें। यह पूरा प्रकरण आनंद रंगनाथन के इस मुद्दे को उठाने के बाद चालू हुआ था।
सौरभ द्विवेदी का दावा नंबर 1 और नुपूर शर्मा का पक्ष
टाइम्स नाउ पर डिबेट के दौरान नुपूर शर्मा ने ज्ञानवापी में मिले शिवलिंग का अपमान करने पर तस्लीम रहमानी को जवाब दिया था। सौरभ द्विवेदी का दावा है कि इसके बाद वे बीजेपी के एक कार्यक्रम में नुपूर से मिले और लल्लनटॉप पर आकर उनसे अपना पक्ष रखने को कहा।
इस दावे की पुष्टि के लिए ऑपइंडिया ने नुपूर शर्मा से बात की। द्विवेदी बीजेपी के जिस कार्यक्रम की बात कर रहे हैं वह मोदी सरकार के आठ साल पूरे होने पर पार्टी की ओर से आयोजित प्रेस वार्ता थी। यह प्रेस वार्ता 31 मई 2022 को हुई थी। मोहम्मद जुबैर द्वारा नुपूर को टारगेट करने के लिए कांटछांट कर वीडियो ट्वीट करने के करीब एक सप्ताह बाद। जुबैर के इसी ट्वीट के बाद नुपूर को दुनिया भर से हत्या और बलात्कार की धमकी मिली थी।
ऑपइंडिया से बातचीत में नुपूर शर्मा ने माना है कि 31 मई की प्रेस वार्ता में उनकी सौरभ द्विवेदी से से भेंट हुइ थी। कई अन्य पत्रकारों से भी वे मिली थीं जो उस कार्यक्रम में मौजूद थे। लेकिन सौरभ द्विवेदी ने उन्हें कोई प्रस्ताव दिया था ऐसा उन्हें स्मरण नहीं है।
सौरभ के दावे को लेकर इसलिए भी संदेह होता है क्योंकि 31 मई को मीडिया से नुपूर के बात करने पर कोई प्रतिबंध नहीं था। उन्होंने मीडिया को बाइट दिया था। 31 मई को ही करीब एक घंटे का साक्षात्कार ऑपइंडिया को दिया था। ऐसे में कोई तुक समझ नहीं आता कि सौरभ द्विवेदी प्रस्ताव दें और नुपूर इनकार कर दें।
थोड़ी देर के लिए यह मान भी लें कि सौरभ ने प्रस्ताव दिया था तो भी वह एक ऐसा कार्यक्रम था जिसमें ढेर सारे पत्रकार मौजूद थे। ऐसी मेल मुलाकात के दौरान अनौपचारिक बातचीतों को औपचारिक न्योता नहीं माना जाता है। यदि सौरभ द्विवेदी वास्तव में नुपूर को अपना पक्ष रखने के लिए लल्लनटॉप का प्लेटफॉर्म मुहैया कराना चाहते थे तो उन्हें औपचारिक तरीके से उनसे संपर्क करना चाहिए था। उनसे बातचीत करनी चाहिए। लेकिन उन्होंने ऐसा कभी किया ही नहीं।
सौरभ द्विवेदी का दावा नंबर 2 और नुपूर शर्मा का पक्ष
सौरभ द्विवेदी ने एक आईएएस अधिकारी की पार्टी में नुपूर शर्मा से मुलाकात और दोबारा प्रस्ताव देने की बात कही है। यह पार्टी अप्रैल 2023 की है। यह एक निजी पार्टी थी और इसके आयोजक IAS दंपती नुपूर शर्मा के पारिवारिक दोस्त हैं।
नुपूर शर्मा ने ऑपइंडिया को बताया कि इस पार्टी में सौरभ द्विवेदी और उनकी पत्नी को देख वे हैरान रह गईं थी। उन्होंने ही सौरभ और उनकी पत्नी से मिलने की पहल की थी। इस दौरान नुपूर ने जुबैर के कारण उनकी जिंदगी पर आए खतरों को लेकर बात की थी लेकिन सौरभ द्विवेदी ने इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।
उन्हें यह भी याद नहीं कि उन्हें लल्लनटॉप पर आकर अपना पक्ष रखने का कोई प्रस्ताव मिला था, जैसा कि सौरभ द्विवेदी दावा कर रहे हैं। फिर से थोड़ी देर के लिए मान लेते हैं कि सौरभ द्विवेदी ने नुपूर को लल्लनटॉप पर आने का प्रस्ताव दिया था। लेकिन वह एक निजी पार्टी थी और संवाद की पहल भी नुपूर की ओर से हुई थी।
ऐसे में द्विवेदी का यह दावा सफेद झूठ है कि उन्होंने पहल कर नुपूर को प्रस्ताव दिया था। जाहिर है कि सौरभ द्विवेदी की नुपूर का पक्ष जानने में कोई दिलचस्पी ही नहीं थी। यदि ऐसा होता तो वे सीधे नुपूर से संपर्क करते जैसा अमूमन पत्रकार करते हैं।
सौरभ द्विवेदी का दावा नंबर 3 और नुपूर शर्मा का पक्ष
यह दावा सरासर झूठ है। नुपुर शर्मा ने ऑपइंडिया को बातचीत में बताया है कि पिछले महीने आनद रंगनाथन की वीडियो वायरल होने के बाद, सौरभ द्विवेदी या उनकी लल्लनटॉप टीम में से किसी ने भी उनसे संपर्क नहीं साधा है।
गौरतलब है कि एक माह पहले डॉ आनंद रंगनाथन आरजे रौनक के पॉडकास्ट में गए थे। यहाँ उन्होंने नुपूर शर्मा के मामले में द लल्लनटॉप के रवैये पर प्रश्न उठाए थे। डॉ रंगनाथन ने प्रश्न उठाया था कि सौरभ द्विवेदी और लल्लनटॉप ने दृष्टि कोचिंग के मुखिया डॉ विकास दिव्यकीर्ति को हाथों हाथ अपने प्लेटफार्म पर बुलाकर अपना पक्ष रखने का मौका दिया था जब डॉ दिव्यकीर्ति की रामायण का अपमान करने के कारण आलोचना हो रही थी। लेकिन लल्लनटॉप ने यही नुपूर शर्मा के मामले में नहीं किया।
डॉ रंगनाथन ने कहा कि लल्लनटॉप को विकास दिव्यकीर्ति के दावों का फैक्ट चेक करने में कोई खतरा नहीं नजर आया था क्योंकि उन्हें हिन्दू समुदाय से कोई धमकियाँ नहीं मिलती। हालाँकि, वह नुपूर शर्मा की बातों का फैक्ट चेक करने में डरे हुए थे क्योंकि अगर वह कह देते कि नुपूर शर्मा की बातें इस्लामिक सिद्धांतों के अनुसार सही हैं तो उन्हें कट्टरपंथियों से धमकियाँ मिलती।
डॉ रंगनाथन ने सौरभ द्विवेदी के झूठों पर भी जवाब दिया है। उन्होंने कहा, “वाह, नुपूर शर्मा से माफ़ी माँगने के बजाय द लल्लनटॉप के कायर यह दावा कर रहे हैं कि उन्होंने फैक्ट चेक इसलिए नहीं किया क्योंकि वह उनके प्लेटफॉर्म पर नहीं आईं। उनके प्लेटफॉर्म पर प्रधानमंत्री मोदी भी नहीं आते, तो क्या वह लोग उनका फैक्ट चेक नहीं करते?”
झूठ से परे – लल्लनटॉप के सौरभ द्विवेदी की धूर्तता
स्पष्ट है कि सौरभ द्विवेदी ने अपनी कायरता को सही ठहराने के लिए उसके ऊपर झूठ की चादर डाल दी है। उन्होंने नुपूर शर्मा से उनका पक्ष जानने के लिए पिछले 2 साल में एक बार भी व्यक्तिगत रूप से संपर्क नहीं किया। उन्होंने गाहे-बगाहे होने वाली बातचीत को साक्षात्कार के लिए अनुरोध का ढोंग रचा। यही कारण है कि नुपूर शर्मा को यह वाकया याद भी नहीं है।
सौरभ द्विवेदी की पत्रकारिता को देखेंगे तो पाएँगे कि यह झूठ से भी दो कदम आगे जाती है, धूर्तता की सीमा तक। सौरभ द्विवेदी और लल्लनटॉप को किसी खबर के फैक्ट चेक के लिए उससे संबंधित लोगों को अपने शो में बुलाने की जरूरत नहीं। उदाहरण देखिए। क्या लल्लनटॉप ने पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को अपने शो में बुलाया था? अगर नहीं तो, “भारत के संसाधनों पर मुसलमानों का पहला अधिकार” वाली खबर का फैक्ट चेक कैसे किया?
लल्लनटॉप ने कई ऐसे ‘फैक्ट-चेक’ भी किए हैं, जहाँ वे पीएम मोदी या बीजेपी द्वारा कई बयानों और भाषणों में कही गई बातों के बारे में सच्चाई पेश करने का दावा करते हैं। क्या इन सब फैक्ट चेक के लिए सौरभ द्विवेदी के शो में पीएम मोदी आए?
आखिर सौरभ द्विवेदी इस बात पर क्यों जोर दे रहे हैं कि नुपूर शर्मा को उनके बयान के दावों की फैक्ट चेक के लिए उनके शो में आना चाहिए? नुपूर शर्मा ने जो कहा, वह इस्लामी किताबों के अनुसार तथ्यात्मक रूप से सही है या नहीं, इस पर चर्चा करते हुए इसका फैक्ट चेक किया जा सकता है। क्यों नहीं किया? लल्लनटॉप के शो में हदीस को क्यों नहीं खोल कर पढ़ा गया? क्यों नहीं मोहम्मद जुबैर जैसे इस्लामी ट्रोल्स का फैक्ट चेक किया, जिसने दावा किया था कि नुपूर शर्मा ने ‘इस्लाम का अपमान’ किया? सौरभ द्विवेदी बिना नुपूर शर्मा के एक शो क्यों नहीं कर सके, यह दिखाते हुए कि नुपूर शर्मा का बयान झूठ नहीं था, बल्कि जाकिर नाइक ने भी वही बात कही थी?
यह वीडियो कुछ और नहीं बल्कि सौरभ द्विवेदी की कायरता का प्रतीक है। कट्टर ढंग से फैल चुके वैश्विक इस्लामी तंत्र के डर से सौरभ द्विवेदी एक पीड़ित महिला के पक्ष में खड़ा होने से डर गया।
गौरलतब है कि भाजपा प्रवक्ता की हैसियत से नुपूर शर्मा ने एक टीवी चैनल पर बहस में हिस्सा लिया था। यह बहस ज्ञानवापी परिसर में शिवलिंग मिलने को लेकर रखी गई थी। इसमें एक मुस्लिम वक्ता के शिवलिंग के विषय में अभद्र भाषा बोलने पर नुपूर शर्मा ने पैगम्बर मुहम्मद को लेकर एक टिप्पणी की थी। इसके बाद उनके खिलाफ देश भर में इस्लामी कट्टरपंथियों ने प्रदर्शन किए थे। उनको ‘सर तन से जुदा’ की धमकियाँ दी गई थीं। भाजपा ने उन्हें निलम्बित कर दिया था।
नुपूर शर्मा ने इस विवाद के बाद उनको मिली धमकियों और उनके जीवन में आई कठिनाइयों पर ऑपइंडिया की एडिटर इन चीफ नुपुर जे शर्मा से बात की थी। उन्होंने इस दौरान बताया था कि ऑल्टन्यूज के फाउंडर और प्रोपेगेंडा फैलाने वाले मुहम्मद जुबैर उनके जीवन पर आए खतरे के लिए जिम्मेदार है।
उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले के कोसीकलां में एक बाजार का नाम एक मुस्लिम दुकानदार ने बदल दिया। उसने अपने यहाँ से दिए जाने वाले समान के झोले और प्रचार सामग्री पर पंजाबी बाजार का नाम बदल कर इस्लामिक बाजार कर दिया। दुकानदार को गिरफ्तार करके जेल भेज दिया गया है।
जानकारी के अनुसार, मथुरा के कोसीकलां में पंजाबी बाजार में वाहिद कुरैशी नाम के एक शख्स की कपड़ों की दुकान है। उसकी यह दुकान ‘ट्रेंड नेवर एंड्स’ नाम से है। वाहिद कुरैशी ने अपनी दुकान पर दिए जाने वाले सामान के झोले पर ‘इस्लामिक बाजार’ नाम से पता छपवाया।
उसकी दुकान से सामान खरीदने वाले एक शख्स ने जब झोले पर यह बदला हुआ पता देखा तो उसने सोशल मीडिया पर इस संबंध में पोस्ट डाली। इसके बाद पंजाबी बाजार के लोग आक्रोशित हो गए। उन्होंने विरोध प्रदर्शन चालू किया। इसके बाद मौके पर पुलिस पहुँची।
दुकानदार वाहिद कुरैशी को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। उसकी दुकान पर छापा मारा और उसकी दुकान से 25 किलो सामान के झोले बरामद किए। वाहिद कुरैशी को इसके बाद पुलिस गिरफ्तार करके कोर्ट में पेश करने ले गई। यहाँ उसे SDM ने जमानत देने से इनकार कर दिया। इसके बाद उसे जेल भेज दिया गया।
उसे 14 दिन के लिए जेल भेजा गया है। कोसीकलां नगर पालिका परिषद ने भी दुकानदार को नोटिस जारी किया है। एक रिपोर्ट में बताया गया है कि वाहिद की दुकान के बगल में ही मस्जिद है। यहाँ पहले पंजाबी समुदाय ने दुकानें किराए पर ली हुई थीं। लेकिन बीते कुछ वर्षों में मुस्लिमों की दुकानें यहाँ पर बढ़ी हैं। इसके बाद ही यह घटना सामने आई है।
यह भी बताया गया कि दुकानदार ने इस्लामिक बाजार लिखे झोले का फोटो अपने व्हाट्सएप पर लगा रखा है, उसने इस पूरे मामले पर हंगामा होने के बाद यह फोटो नहीं हटाई। स्थानीय दुकानदारों ने इस मामले की केन्द्रीय एजेंसी से जाँच करवाने की माँग की है।
आईपीएल 2024 का फाइनल मुकाबला कोलकाता नाइट राइडर्स ने जीत लिया। कोलकाता ने आईपीएल 2024 के फाइनल मैच में सनराइजर्स हैदराबाद को आठ विकेट से हराया। इस मैच में हैदराबाद ने 114 रनों का लक्ष्य दिया था, जिसे कोलकाता ने आसानी से 10.3 ओवर में 2 विकेट गँवाकर हासिल कर लिया।
बता दें कि तीसरी बार KKR ने इस ट्रॉफी को जीता है। इससे पहले उन्होंने 2014 सीजन में पंजाब किग्स को हराकर ये खिताब जीता था। उससे पहले उन्होंने ये खिताब 2012 में जीता था।
आईपीएल का खिताब केकेआर को मिलने के बाद टीम के फैंस की खुशी का ठिकाना नहीं है। सोशल मीडिया पर जश्न का माहौल देखा जा सकता है। लोग गौतम गंभीर की मेंटरशिप की तारीफ कर रहे हैं। वहीं श्रेयर अय्यर की कैपटेंसी को भी सराह रहे हैं।
फाइनल मैच में जीत के लिए वेंकटेश अय्यर और गुरबाज अहमद की अर्धशतकीय साझेदारी ने खासी भूमिका निभाई। दोनों खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन किया। दूसरी तरफ पैट कमिंस की टीम को पार्टी की जीत पर एक पल को भी हावी नहीं होने दिया। लोग इस जीत को वर्ल्ड कप का बदला भी बता रहे हैं।
बता दें कि फाइनल मैच में टॉस सनराइजर्स हैदराबाद के कप्तान पैट कमिंस ने जीता था। लेकिन कोलकाता ने गेंदबाजी में अच्छा प्रदर्शन करते हुए सनराइजर्स को सिर्फ 20 ओवर में 113 रन ही बनाने दिए और पूरी टीम को ऑल आउट कर दिया। सनराइजर्स हैदराबाद में सबसे ज्यादा रन पैट कमिंस ने ही बनाए-24। वही केकेआर की ओर से रसन ने तीन विकेट लिए और हर्षित राणा-मिचेल स्टार्क को 2-2 विकेट मिले।