लोकसभा चुनाव के छठे चरण के मतदान के बीच विपक्ष लगातार झूठे आरोप लगाकर अपनी फजीहत करवा रहा है। इस बार ये काम तृणमूल कॉन्ग्रेस पार्टी ने किया है, जिन्हें जवाब भारतीय निर्वाचन आयोग ने खुद दिया। ईसी ने टीएमसी के ट्वीट पर जवाब देकर बताया है कि कैसे उनके द्वारा दी गई जानकारी अधूरी और गलत है।
Smt. @MamataOfficial has repeatedly flagged how @BJP4India was trying to rig votes by tampering with EVMs.
And today, in Bankura's Raghunathpur, 5 EVMs were found with BJP tags on them.@ECISVEEP should immediately look into it and take corrective action! pic.twitter.com/aJwIotHAbX
— All India Trinamool Congress (@AITCofficial) May 25, 2024
छठे चरण के मतदान के बीच ऑल इंडिया तृणमूल कॉन्ग्रेस ने आरोप लगाया कि बांकुरा के रघुनाथपुर में 5 ईवीएम मिली है जिनके ऊपर भाजपा का टैग लगा है। ट्वीट में चुनाव आयोग से तुरंत एक्शन लेने को कहा गया था। इसके साथ फोटो में दिखाई दे रहे कागज को भी लाल गोला किया गया था ताकि पता चल सके किस चीज को भाजपा का टैग कहा जा रहा है।
(2/1) While commissioning, common address tags were signed by the Candidates and their agents present. And since only BJP Candidate's representative was present during that time in the commissioning hall, his signature was taken during commissioning of that EVM and VVPAT. pic.twitter.com/54p78J2jUe
अब चुनाव आयोग ने इसी ट्वीट का जवाब देते हुए टीएमसी के दावे की सच्चाई बताई। ईसी ने कहा, “कमीशनिंग के दौरान, उम्मीदवारों और उनके एजेंटों द्वारा मौजूद कॉमन एड्रेस टैग पर हस्ताक्षर करवाए गए थे। चूँकि उस समय केवल भाजपा उम्मीदवार का प्रतिनिधि ही मौजूद था, इसलिए ईवीएम और वीवीपैट को चालू करने के लिए उनके हस्ताक्षर लिए गए।”
(2/2) However, signature of all the agents present in PS No 56,58, 60, 61,62 was obtained during Poll. All the ECI norms were duly followed during commissioning was done entirely under CCTV coverage and was duly videographed.
ईसी ने यह भी कहा, “मतदान केंद्र 56, 58, 60, 61 और 62 पर मौजूद सभी एजेंटों के हस्ताक्षर मतदान के दौरान प्राप्त किए गए थे। सभी ईसीआई मानदंडों का पालन किया गया, मतदान पूरी तरह से सीसीटीवी कवरेज के तहत किया गया था, और इसकी विधिवत वीडियोग्राफी की गई थी।”
कुल मिलाकर टीएमसी के आरोपों को झुठलाते हुए ईसी ने ये साफ किया है कि कैसे टीएमसी इस मामले में आधी-अधूरी जानकारी के साथ झूठ फैला रही है जबकि हकीकत तो यह है कि वो हस्ताक्षर कमीशनिंग के दौरान कराए गए थे। अगर उस जगह पर अन्य प्रत्याशियों का एजेंट होता तो उस पार्टी के साइन भी उस पर दिखाई पड़ते।
आम आदमी पार्टी की राज्यसभा सांसद स्वाति मालीवाल की पिटाई मामले में गिरफ्तार विभव कुमार ने जमानत माँगी है। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के निजी सहायक विभव कुमार ने निचली अदालत में जमानत याचिका दाखिल की है। इस बीच, दिल्ली पुलिस विभव कुमार को लेकर अरविंद केजरीवाल के घर पहुँची और स्वाति मालीवाल की पिटाई का सीन रिक्रिएट किया। इससे पहले दिल्ली पुलिस स्वाति मालीवाल को ले जाकर भी सीन रिक्रिएट कर चुकी है।
कोर्ट में दाखिल की जमानत याचिका
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, विभव कुमार ने कोर्ट में जमानत याचिका दाखिल की है। फिलहाल उन्हें 4 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया था। विभव कुमार को कोर्ट ने पहले 5 दिन की हिरासत में भेजा था, इस दौरान दिल्ली पुलिस उन्हें मुंबई भी लेकर गई थी, जहाँ कथित तौर पर विभव कुमार ने अपना फोन फॉर्मेट किया था। इसके बाद दिल्ली पुलिस ने 24 मई 2024 को विभव को कोर्ट में पेश किया और कोर्ट से उनकी हिरासत अवधि बढ़ाने की अपील की, जिसके बाद कोर्ट ने उनकी हिरासत को 4 दिनों के लिए बढ़ा दिया था।
इसके बाद विभव कुमार ने आज यानी 25 मई 2024 को निचली अदालत में जमानत याचिका दायर की है। उन्होंने कोर्ट से जमानत की गुहार लगाई है। इस मामले में कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी कर दिल्ली पुलिस से जवाब माँगा है।
वहीं, इस बीच दिल्ली पुलिस की टीम विभव कुमार लेकर दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के घर पहुँची और सीन को री-क्रिएट किया। विभव कुमार को दिल्ली पुलिस तीन जगहों पर लेकर गई थी। पुलिस के मुताबिक, विभव कुमार ने 17 मई को अपना फोन फॉर्मेट किया था और कहा था कि उनका फोन खराब हो गया है। हालाँकि दिल्ली पुलिस उन्हें मुंबई लेकर भी गई, जिसके बाद माना जा रहा है कि दिल्ली पुलिस उनके फोन के डेटा को रिकवर करने में जुटी है।
बता दें कि विभव कुमार को 18 मई को दिल्ली पुलिस ने गिरफ्तार किया था। वो 17 मई को मुंबई से लौटे थे, जबकि स्वाति मालीवाल की पिटाई 13 मई 2024 को दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के घर में हुई थी। इसके तीन दिनों बाद स्वाति मालीवाल ने विभव कुमार के खिलाफ लिखित शिकायत दी थी, जब दिल्ली पुलिस की टीम ने स्वाति मालीवाल के घर पर उनके साथ 4 घंटे तक बातचीत की थी। स्वाति मालीवाल ने अपने बयान में बताया है कि विभव कुमार ने काफी बेरहमी से उन्हें पीटा था।
इसके बाद सिविल लाइंस पुलिस स्टेशन में स्वाति मालीवाल के बयान पर एफआईआर दर्ज की गई थी। इसमें एफआईआर में भारतीय दंड की धारा 308 (गैर इरादतन हत्या का प्रयास), धारा 341 (गलत तरीके से रोकना), धारा 354 (बी) (महिला पर हमला या आपराधिक बल का उपयोग) के तहत आरोप शामिल हैं। कोड. इसके अतिरिक्त, भारतीय दंड संहिता की धारा 506 (आपराधिक धमकी) और धारा 509 (शब्द, इशारा, या किसी महिला की गरिमा का अपमान करने का इरादा) के तहत आरोप शामिल किए गए हैं।
लोकसभा चुनाव के छठे चरण के लिए हो रहे मतदान के दौरान पश्चिम बंगाल से हिंसा की खबर है। यहाँ के झाड़ग्राम जिले में भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं पर हमला किया गया है। शनिवार (25 मई 2024) को हुए इस हमले में भाजपा प्रत्याशी प्रणत टुडू और उनके कुछ समर्थकों को चोटें आईं हैं। हमलावर भीड़ ने पत्थरबाजी की है। भाजपा प्रत्याशी के सुरक्षाकर्मी भी घायल हुए हैं। बीजेपी ने इस हमले का आरोप सत्तारूढ़ तृणमूल कॉन्ग्रेस पर लगाया है। शिकायत में यह भी बताया गया है कि TMC के सदस्यों ने वोटरों को भी धमकाने की कोशिश की है।
मतदान के दौरान झाड़ग्राम के भाजपा प्रत्याशी शनिवार की दोपहर को वोटिंग के दौरान विभिन्न पोलिंग बूथों का भ्रमण कर रहे थे। तभी गरबेता इलाके में उनके काफिले पर पत्थरबाजी की गई। इस पत्थरबाजी का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वायरल वीडियो में भाजपा प्रत्याशी को पत्थरबाजी से निकलने की कोशिश करते देखा जा सकता है। उनके साथ चल रहे पैरामिलिट्री के जवान हमलावर भीड़ को दूर रखने की कोशिश कर रहे हैं। सुरक्षा बल जैसे-तैसे प्रणत टुडू को हमलावर भीड़ से बचा कर निकाल पाए। हमलावर भीड़ में महिलाएँ भी शामिल थीं। उनके हाथों में लाठी-डंडे दिख रहे थे।
Jhargram BJP Candidate Dr. @pranattudu_bjp has come under massive stone pelting by goons at Jhargram. Currently even Central Forces are having to retreat to save their life. ECI was repeatedly alerted about this going to be a violent phase yet they never took appropriate measures… pic.twitter.com/ay8pRnUXZ6
— ???????? भारतीय ?? (Modi Ka Parivar) (@NarendraVictory) May 25, 2024
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इस हमले में भाजपा प्रत्याशी प्रणत टुडू के साथ उनके कुछ समर्थक और सुरक्षाकर्मी भी घायल हुए हैं। एक वाहन में भी तोड़फोड़ की गई है जो भारतीय जनता पार्टी के समर्थक की बताई जा रही है। हमलावरों ने मीडियाकर्मियों को भी निशाना। बनाया भाजपा ने इस हमले का आरोप तृणमूल कॉन्ग्रेस के सदस्यों पर लगाया है। बीजेपी ने चुनाव आयोग से इसकी शिकायत करते हुए मामले में कार्रवाई की माँग की है। उन्होंने TMC सदस्यों पर वोटरों को धमकाने के भी आरोप लगाए हैं।
वहीं तृणमूल कॉन्ग्रेस ने भाजपा द्वारा लगाए गए आरोपों का खंडन किया है। TMC ने अपने बयान में आरोप लगाया कि भाजपा प्रत्याशी प्रणत टुडू के साथ चल रहे एक सुरक्षाकर्मी ने मतदान केंद्र की लाइन में खड़ी एक महिला के साथ अभद्रता की जिसकी वजह से भीड़ भड़क गई। फिलहाल हालात काबू करने के लिए इलाके में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। बताते चलें कि झाड़ग्राम लोकसभा सीट पर भाजपा प्रत्याशी प्रणव टुडू की त्रिकोणीय लड़ाई तृणमूल कॉन्ग्रेस के कालीपदा सोरेन व कम्युनिस्ट पार्टी के सोनमणि टुडू से है।
पश्चिम बंगाल में ओबीसी कोटे में ममता बनर्जी की सरकार मुस्लिमों के 77 समूहों को आरक्षण का लाभ दे रही थी। साल 2011 में सरकार बनने के 6 माह के भीतर ही ममता सरकार ने ये आरक्षण देना शुरू कर दिया था। कलकत्ता हाई कोर्ट ने इस रिजर्वेशन को खत्म कर दिया है, साथ ही 2011 से अब तक जारी 5 लाख से अधिक ओबीसी प्रमाण पत्रों को भी रद्द कर दिया है। वहीं, राजस्थान में 14 मुस्लिम जातियों को ओबीसी कोटे के तहत आरक्षण मिलता है, जो इन्हें 1997 से 2013 के बीच दिया गया था, लेकिन पश्चिम बंगाल हाई कोर्ट के फैसले से सबक लेकर राजस्थान सरकार अब ओबीसी कोटे में मुस्लिम आरक्षण की समीक्षा करेगी।
राजस्थान सरकार के सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री अविनाथ गहलोत ने कहा है कि तुष्टिकरण की राजनीति के चलते कॉन्ग्रेस की सरकारों ने राजस्थान में मुस्लिमों को भी आरक्षण दिया था। कॉन्ग्रेस की सरकारों ने धार्मिक आधार पर आरक्षण 1997 से 2013 के बीच दिए, जिसमें से 14 मुस्लिम जातियों को ओबीसी कोटे में आरक्षण दे दिया गया। अब लोकसभा चुनाव 2024 के खत्म होने के बाद राजस्थान सरकार राज्य में ओबीसी आरक्षण के तहत आने वाली सभी जातियों की समीक्षा करेगी। अविनाथ गहलोत ने कहा कि हम धार्मिक आधार पर आरक्षण के खिलाफ हैं, क्योंकि ये संवैधानिक रूप से गलत है।
खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी ये बात कह चुके हैं कि वो धार्मिक आधार पर आरक्षण को लागू नहीं होने देंगे। राजस्थान सरकार के इस ऐलान के बाद ये बहस तेज हो गई है कि क्या धार्मिक आधार पर आरक्षण के दिन अब खत्म हुए?
बात सिर्फ पश्चिम बंगाल और राजस्थान की नहीं है, बल्कि देश के उन तमाम राज्यों की है, जहाँ ओबीसी आरक्षण में मुस्लिम समूहों को घुसाकर जरूरत मंद समूहों का हक मारा गया। कॉन्ग्रेस के राज में कर्नाटक में भी यही हो रहा है। पीएम मोदी भी कह चुके हैं कि कॉन्ग्रेस अपने कर्नाटक फॉर्मूले को पूरे देश में लागू करना चाहती है, लेकिन वो ऐसा होने नहीं देंगे। कर्नाटक के साथ ही केरल में भी ओबीसी समूहों में मुस्लिमों की भारी भागीदारी है और वो आरक्षण का लाभ ले रहे हैं।
बता दें कि संवैधानिक रूप से अधिकतर राज्यों में 27 प्रतिशत आरक्षण ओबीसी जातियों को मिलता रहा है। इंदिरा साहनी कमीशन के आधार पर ये इसे निश्चित किया गया है। कई राज्यों में आरक्षण की इस सीमा को तोड़ने का प्रयास किया गया, तो सुप्रीम कोर्ट ने उन राज्यों की सरकारों को झटका देते हुए उनकी मनमानी पर रोक लगा दी थी। मध्य प्रदेश से लेकर महाराष्ट्र तक ये हो चुका है, लेकिन तमिलनाडु जैसे राज्य, जिसकी कुल आबादी में बड़ा हिस्सा ओबीसी वर्ग का है, उसने इस लिमिट को पार किया है।
हालाँकि उन राज्यों में कोई विरोध न होने और सुप्रीम कोर्ट तक कोई याचिका न पहुँचने की वजह से ये अभी भी जारी है। लेकिन जिन राज्यों में सरकारों का विरोध हुआ और मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुँचा, वहाँ ओबीसी आरक्षण की सीमा साल 1992 के इंदिरा साहनी कमीशन के आधार पर 27 प्रतिशत ही कर दिया गया। कुछ राज्यों में अपवाद जरूर है, खासकर पंजाब जैसे राज्य में, क्योंकि पंजाब में एसटी आरक्षण नहीं है। पंजाब में एसटी कैटिगिरी के लोग भी नहीं हैं। ऐसे में यहाँ एससी आरक्षण का ज्यादा है। हालाँकि धार्मिक आधार पर सीधे आरक्षण का मामला कहीं नहीं है, ऐसे में मुस्लिम तुष्टिकरण की आड़ में कई राज्यों में मुस्लिमों को आरक्षण का लाभ ओबीसी कोटे के तहत दिया जाता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा का विरोध इसी आधार पर है।
चूँकि देश की आजादी के समय ही ये साफ हो गया था कि धार्मिक आधार पर देश में आरक्षण नहीं होगा। इसके लिए संवैधानिक व्यवस्था भी की गई थी, लेकिन वोट बैंक की चाहत में राजनीतिक पार्टियों ने संवैधानिक मर्यादाओं को परे रखते हुए मुस्लिमों को आरक्षण देना शुरू कर दिया, वो भी ओबीसी कोटे के तहत। ऐसे में पश्चिम बंगाल की सरकार को कलकत्ता हाई कोर्ट से जो झटका लगा है, वो ऐतिहासिक हो सकता है। कलकत्ता हाई कोर्ट के फैसले को आधार बनाकर कई अन्य राज्य भी खासकर बीजेपी शाषित राज्य ओबीसी कोटे में शामिल जातियों की समीक्षा कर सकते हैं।
राजस्थान में ऐसा ही काम होने वाला है, जो भूल सुधार का जरिया बन सकता है। देर-सबेर अन्य राज्य भी ये कदम उठाएँगे। हालाँकि कॉन्ग्रेस या इंडी गठबंधन द्वारा शासित राज्य ऐसा कदम उठाए, इस पर तो संदेह है ही, लेकिन कलकत्ता हाई कोर्ट के फैसले के आधार पर यदि अदालतों में ओबीसी आरक्षण को चुनौती देना शुरू कर दिया जाए, तो वो दिन दूर नहीं, जब पूरा देश तुष्टिकरण की राजनीति को पीछे छोड़ते हुए धार्मिक आधार पर आरक्षण के दायरे से बाहर निकल आए। ये भूल सुधार की तरह भी होगा, साथ ही असली जरूरत मंदों को उनकी हिस्सेदारी देने की तरह भी।
उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में दलित उत्पीड़न का मामला सामने आया है। यहाँ मुस्लिम समुदाय के 4 आरोपितों पर अनुसूचित जाति की एक नाबालिग लड़की से अपहरण और रेप के प्रयास का आरोप लगा है। अपहरण तमंचे की नोक पर किया गया। पीड़िता को छुड़ाने गए उसके परिजनों को जातिसूचक गालियाँ दी गईं और जान से मार डालने की धमकी दी गई। घटना सोमवार (20 मई 2024) की है। पुलिस ने 2 आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया है। फरार आरोपितों की तलाश की जा रही है। मामले की जाँच चल रही है।
यह घटना बरेली के थानाक्षेत्र देवरनियां की है। बुधवार (22 मई 2024) को यहाँ पीड़िता के पिता ने थाने में तहरीर दर्ज करवाई है। तहरीर में उन्होंने बताया कि 20 मई को उनके घर पर कार्यक्रम था। इसी रात उनकी 16 वर्षीया बेटी लगभग 11:30 पर अपने चाचा के घर जा रही थी, तभी रास्ते में पीड़िता को राशिद मिला। उसने नाबालिग को तमंचा दिखाया और मुँह दबा कर अपने साथ बाग में ले गया। यहाँ उसने पीड़िता के गुप्तांगों को दबाया और सलवार खोल कर बलात्कार करने का प्रयास किया। आरोप है कि राशिद ने कॉल करके अशफाक और इशहाक के बेटे नन्ने को भी बुला लिया था।
ये सभी अपहृता पीड़िता को कहीं दूसरी जगह ले जाने का प्रयास कर रहे थे। शिकायत में आगे बताया गया है कि घटनास्थल पर राशिद का अब्बा नन्हे भी पहुँच गया। वह पीड़िता को जल्द से जल्द कहीं दूर ले जाने के लिए कहने लगा। इस बीच पीड़िता को काफी देर तक अपने घर पर न पाकर परिजनों और कार्यक्रम में आए रिश्तेदारों ने उसकी खोजबीन शुरू कर दी। कुछ लोग तलाश करते हुए जंगल की तरफ गए। आरोपित पीड़िता को कहीं और ले जाने में सफल हो पाते इस से पहले लड़की के परिजन वहाँ पहुँच गए।
पीड़िता के परिजनों को देख कर आरोपित आग बबूला हो गया। उन्होंने गंदी-गंदी गालियाँ देते हुए कहा, “च$टों, तुम्हारी औकात ही क्या है। अगर कार्रवाई की तो तुम्हें जान से मार देंगे।” पीड़ितों ने डायल 112 की मदद ली और नाबालिग को जैसे-तैसे छुड़ाया। पुलिस को बुलाता देख कर आरोपित घटनास्थल से फरार हो गए। जाते-जाते उन्होंने पीड़िता के पिता को तमंचा दिखाया और कहा, “अगर तूने कहीं मुँह खोला तो तुझे जान से मार देंगे।” शिकायतकर्ता ने खुद को डरा बताते हुए आरोपितों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की माँग की है।
पुलिस ने इस तहरीर पर IPC की धारा 363, 354 (ख), 504 और 506 के साथ पॉक्सो व SC/ST एक्ट के तहत FIR दर्ज कर ली है। इस केस में राशिद, अशफाक, नन्हे व नन्ने को नामजद किया गया है। शुक्रवार (24 मई 2024) को गश्त करते पुलिस बल को आरोपितों के एक जगह होने की सूचना मिली। दबिश दे कर राशिद और उसके अब्बा नन्हे को गिरफ्तार कर लिया। दोनों को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है। फरार चल रहे अन्य आरोपितों की तलाश की जा रही है। ऑपइंडिया के पास FIR कॉपी मौजूद है।
गुजरात के जामनगर से ग्रूमिंग जिहाद का मामला सामने आया है। यहाँ एक मुस्लिम युवक पर सिख महिला को शादी का झाँसा देकर निकाह करने और उसे गर्भवती करके छोड़ देने का आरोप लगा है। मारपीट और धर्मांतरण का दबाव झेलने वाली महिला का कई बार गर्भपात भी करवाया गया। आरोपित का नाम हुसैन बलूच है। हुसैन के साथ उसके अन्य परिजन और रिश्तेदार भी इस घटना में शामिल बताए गए हैं। पीड़िता मूलतः पंजाब की रहने वाली है। मामले की शिकायत गुरुवार (9 मई 2024) को की गई है। कुल 6 आरोपितों को नामजद करके पुलिस मामले की जाँच कर रही है।
यह घटना कच्छ के अंजार थानाक्षेत्र की है। यहाँ 9 मई को मूल रूप से पंजाब के होशियारपुर की रहने वाली सिख समुदाय की पीड़िता ने शिकायत दर्ज करवाई है। शिकायत में पीड़िता ने बताया कि वह शादीशुदा और 10 साल के एक बच्चे की माँ है। पति से अनबन की वजह से वह अकेली रहती है। महिला का भाई मकान बनाने और खरीदने-बेचने का काम करता है। पीड़िता इन मकानों से किराया आदि वसूलने का काम करती थी। जून 2021 में समीर नाम का मुस्लिम युवक अपनी बीवी के साथ महिला के भाई के घर में किराए पर रहने के लिए आया।
आरोप है कि परिचित होने के बाद समीर और उसकी बीवी अक्सर पीड़िता से किसी मुस्लिम युवक से निकाह करने के लिए कहने लगे। सितंबर 2021 में समीर का रिश्तेदार हुसैन बलूच उनके घर आया। हुसैन मूलतः गुजरात के ही जामनगर का रहने वाला बताया जा रहा है। समीर ने सिख महिला को हुसैन से मिलने के लिए बुलाया। आरोप है कि मुलाक़ात के बाद हुसैन ने पीड़िता से निकाह का प्रस्ताव रखा। अलग-अलग मजहब होने की वजह से इस प्रपोजल को महिला ने ठुकरा दिया।
कुछ दिनों बाद हुसैन बलूच पीड़िता को फोन करने लगा। इस बातचीत के दौरान उसने महिला को अपने प्यार के जाल में फँसाने के लिए बहुत कोशिश की। हुसैन ने कई बार अपनी तस्वीरें भी पीड़िता को भेजीं। इसके बावजूद महिला ने हुसैन को इस रिश्ते के लिए मना कर दिया। मना करने के बावजूद हुसैन ने पीड़िता को कॉल करना बंद नहीं किया। नवम्बर 2021 में हुसैन के कई बार बुलाने पर पीड़िता उसके घर गई। हुसैन ने पीड़िता को अपने परिवार से मिलाने का बहाना कर के बुलाया था। हालाँकि उसने महिला को 2 दिनों तक अपने घर में रोका और उसके साथ रेप किया।
बेटे को सिखाने लगा नमाज़ पढ़ना
दो दिनों के बाद महिला अपने घर पहुँची। उसने अपने परिवार में हुसैन से शादी की बात चलाई। पीड़िता के परिवार ने हुसैन के मुस्लिम होने की वजह से इंकार कर दिया। घर का विरोध देखते हुए पीड़िता अपने 10 वर्षीय बेटे को लेकर हुसैन के घर जामनगर पहुँच गई। यहाँ हुसैन ने खुद को मुस्लिम और पीड़िता को सिख बताते हुए शादी में अड़चन का बहाना बताया। उसने निकाह के लिए महिला के आगे इस्लाम कबूल करने की शर्त रखी। महिला का दावा है कि उसने धर्मांतरण से इंकार कर दिया तो हुसैन ने उसके साथ झगड़ा शुरू कर दिया।
वह महिला के बेटे को इस्लामी तौर-तरीके सिखाने लगा। उसे नमाज़ पढ़ने के लिए कहने लगा। जब पीड़िता के बेटे इससे इंकार किया तो उसकी पिटाई की गई। कुछ समय बाद हुसैन के अब्बा अकबर भी अपने बेटे के साथ रहने पहुँच गए। अकबर भी पीड़िता से छेड़खानी करने लगा। बाप-बेटे द्वारा मिल रही शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना से परेशान हो कर पीड़िता जामनगर में ही अलग कमरा लेकर रहने लगी। यहाँ भी आकर हुसैन उसे इस्लाम कबूल करने का दबाव देता रहा।
गर्भवती हुई तो करवा दिया एबॉर्शन
शिकायत में महिला ने बताया है कि वो पहली बार गर्भवती हुई तो हुसैन ने उसे गर्भपात की दवा खिला दी। आरोपों के मुताबिक पीड़िता का 2 बार एबॉर्शन करवाया गया। अक्टूबर 2022 में पीड़िता एक बार और प्रेग्नेंट हुई। इस बार हुसैन अपने भाई फ़िरोज़ और भाभी के साथ पीड़िता को अस्पताल ले। गया यहाँ उसने महिला का एबॉर्शन कराना चाहा तो पीड़िता ने मना कर दिया और घर लौट आई। पीड़िता द्वारा गर्भपात न करवाने पर हुसैन ने उसे बेरहमी से पीटा। आखिरकार परेशान होकर महिला मार्च 2023 में अपने भाई के घर लौट गई। पुलिस में शिकायत होने के डर से हुसैन भी पीछे-पीछे आया और पीड़िता को मना कर चुप करवाया।
निकाह से मुकरा हुसैन
जुलाई 2023 में पीड़िता ने एक बच्चे को जन्म दिया। उसने हुसैन को निकाह के लिए कहा। हुसैन ने पीड़िता द्वारा गर्भपात न करवाने से खुद को नाराज बताया और निकाह से इंकार कर दिया। जब हुसैन के अन्य परिजनों से इस करतूत की शिकायत हुई तो उन्होंने भी कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया। आख़िरकार 9 मई 2024 को पीड़िता ने पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई। पीड़िता ने अपनी प्रताड़ना को बताते हुए एक वीडियो भी जारी किया है। वीडियो में उसने आरोपितों पर खुद को जान से मार डालने की धमकी देने के साथ 9 से 10 लाख रुपए हड़प लेने का भी आरोप लगाया है।
घटना गुजरात के #कच्छ से…#लव_Gहाद में तीन वर्ष तक हुआ हिंदू बेटी का शोषण- आरोपी #मोहम्मद_हुसैन मूल जामनगर निवासी। जामनगर में 3 वर्ष तक बंदी बना कर शारीरिक और मानसिक शोषण करता था मोहम्मद हुसैन और उसका परिवार। हुसैन और उसका परिवार बहुत मारता तथा डरा धमका कर रखता था, मोहम्मद हुसैन… pic.twitter.com/esNmC54QAR
पीड़िता ने वीडियो में यह भी कहा है कि हुसैन बलूच ने उनकी तरह कई अन्य हिन्दू लड़कियों को भी अपने झाँसे में लेकर बहका रखा है। रुपए लिए गए हैं। इसके अलावा उन्होंने यह भी आरोप लगाया है कि हुसैन ने अन्य हिंदू लड़कियों को भी बहका रखा है। पुलिस ने इस शिकायत पर हुसैन के साथ समीर, समीर की बीवी, हुसैन के भाई फ़िरोज़ और भाभी, हुसैन के अब्बा अकबर को नामजद किया है। इन सभी पर IPC की धारा 376(2)(एन), 328, 354, 323 और 114 और किशोर न्याय अधिनियम की धारा 83 के तहत कार्रवाई की गई है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक मामले का संज्ञान गुजरात के गृहराज्य मंत्री हर्ष सांघवी ने भी मामले का संज्ञान लिया है। उन्होंने इस केस को क्राइम ब्रांच (LCB) को ट्रांसफर कर दिया है। फिलहाल पुलिस मामले की जाँच और अन्य कानूनी कार्रवाई कर रही है। ऑपइंडिया के पास FIR कॉपी मौजूद है।
पुणे के पोर्श कार एक्सीडेंट मामले में पुलिस ने नाबालिग आरोपित लड़के के दादा को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि लड़के के दादा एक्सीडेंट के बाद अपने पोते को बचाने के लिए ड्राइवर को फँसाना चाहते थे। उन्होंने ड्राइवर को बुलाकर उसे धमकाया भी था। अब इसी संबंध में ड्राइवर ने एफआईआर करवाई है।
पुणे पुलिस के मुताबिक, ड्राइवर गंगाधर की शिकायत पर नाबालिग आरोपित के पिता विशाल अग्रवाल और दादा सुरेंद्र अग्रवाल के खिलाफ आईपीसी की धारा 342, 365, 368, 506 और 34 के तहत एफआईआर दर्ज की गई है।
sections | Pune car accident case | Complainant & driver of the accused minor, Gangadhar being taken from Pune Crime Branch officer.
On the complaint of driver Gangadhar, an FIR has been registered against minor accused Vishal Agarwal & father Surendra Agrawal under sections… pic.twitter.com/uQHbx3cpCC
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ड्राइवर द्वारा पुलिस को दी गई शिकायत में कहा गया है कि एक्सीडेंट के बाद लड़के के दादा सुरेंद्र अग्रवाल ने उन्हें फोन किया था। इसके बाद वो ड्राइवर पर चिल्लाए और जबरन अपनी बीएमडब्लू में बिठाकर बंगले तक ले गए। उन्होंने वहाँ मोबाइल छीनकर सारा इल्जाम ड्राइवर से अपने ऊपर लेने को कहा। वह बोले- “अगर इस बारे में किसी को बताया तो याद रखना…।”
"If You Talk…": What Porsche Teen's Grandfather Told Driver After Crash – whole family is criminal and police were subservient to them just for the sake money …. https://t.co/7DbAKHM3CW
पुणे पुलिस आयुक्त अमितेश कुमार ने मीडिया को बताया कि ड्राइवर से लड़के के दादा ने कहा था कि अगर वह सारा इल्जाम अपने सिर पर लेगा तो उसे बहुत सारे पैसे दिए जाएँगे। पुलिस ने बताया कि ड्राइवर से पूछताछ के बाद ड्राइवर अपने घर जाना चाहता था लेकिन जब पूछताछ खत्म हुई तो वो उसे अपने घर ले गए और उसे बंधक बना लिया।
उल्लेखनीय है कि किशोर के दादा इससे पहले शिवसेना पार्षद (एकनाथ शिंदे गुट के) पर हमले के सिलसिले में हत्या के प्रयास के मामले में आरोपित रहे हैं। इसके अलावा परिवार के भी संबंध अंडरवर्ल्ड से सामने आए हैं। पुलिस ने आरोपित के दादा की गिरफ्तारी से पहले इस मामले में लड़के के पिता को गिरफ्तार किया था। वहीं आरोपित को सुधार गृह भेजा गया है।
Pune car accident case | Cyber Cell of Pune Police has registered an FIR against a reel creator and one other who had made a purported video where he was talking about the release of the accused. The video later went viral on social media. Case registered at Cyber Cell of Pune…
इसके अलावा इस मामले में एक्शन करते हुए येरवडा पुलिस स्टेशन के दो अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया क्योंकि मामले में उनका समग्र आचरण अनुचित था। इसी तरह साइबर सेल ने एक रील क्रिएटर के खिलाफ भी केस दर्ज करके एक्शन लिया है। उसमें एक वीडियो बनाई थी जिसमें आरोपित को छोड़ने की बात कही गई थी। बाद में वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुई और फिर केस दर्ज हुआ।
लोकसभा चुनाव 2024 में छठें चरण का मतदान जारी है। छठें चरण के मतदान में सबसे आगे पश्चिम बंगाल है, लेकिन पश्चिम बंगाल से ही हिंसा की खबर भी आ रही है। पश्चिम बंगाल में एक राजनीतिक कार्यकर्ता की हत्या के बाद हंगामा हुआ है। वहीं, मतदान के क्रम में पश्चिम बंगाल के बाद यूपी और झारखंड है। जबकि देश की राजधानी दिल्ली में अपेक्षाकृत कम मतदान हुआ है। दोपहर 1 बजे तक के आँकड़े सामने आ चुके हैं।
राजनीतिक हिंसा के बीच पश्चिम बंगाल में सर्वाधिक मतदान
ईटी की रिपोर्ट के मुताबिक, दोपहर 1 बजे तक कुल 39.13% मतदान दर्ज किया गया है। पश्चिम बंगाल में 1 बजे तक सर्वाधिक 54.80 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया है, तो झारखंड में 42.54 प्रतिशत। उत्तर प्रदेश 37.23 प्रतिशत मतदान के साथ तीसरे नंबर पर है, तो बिहार में 36.48 प्रतिशत, हरियाणा में 36.48 प्रतिशत, जम्मू एवं कश्मीर में 35.22 प्रतिशत मतदान हो चुका है। वहीं, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली 34.37 प्रतिशत और ओडिशा 35.69 प्रतिशत मतदान के साथ सबसे फिसड्डी साबित हो रहे हैं।
बता दें कि लोकसभा चुनाव के छठे चरण में कुल 889 कैंडिडेट्स मैदान में हैं, जिनमें 797 पुरुष और 92 महिला उम्मीदवार हैं। इस चरण में तीन केंद्रीय मंत्री, तीन पूर्व मुख्यमंत्रियों के साथ ही कई हैवीवेट कैंडिडेट हुंकार भर रहे हैं।
मोदी सरकार के 3 केंद्रीय मंत्रियों धर्मेंद्र प्रधान, कृष्ण पाल सिंह गुर्जर और राव इंद्रजीत सिंह की किस्मत का फैसला शाम तक ईवीएम में कैद हो जाएगा, तो 3 पूर्व मुख्यमंत्रियों महबूबा मुफ्ती, मनोहर लाल खट्टर और जगदंबिका पाल की किस्मत का फैसला भी जनता कर ही रही है। इसके अलावा हैवीवेट कैंडिडेट्स में मेनका गाँधी, नवीन जिंदल, मनोज तिवारी, बाँसुरी स्वराज, संबित पात्रा, राज बब्बर, निरहुआ जैसे नाम हैं।
मिदनापुर में राजनीतिक हिंसा
पश्चिम बंगाल के मिदनापुर में राजनीतिक हिंसा के दो मामले सामने आए। पहला मामला पूर्वी मिदनापुर के महिषादल का है, जहाँ शुक्रवार की रात एक टीएमसी कार्यकर्ता की जान चली गई, वो पार्टी का पदाधिकारी भी था। तो दूसरा मामला बक्चा इलाके का है, जहाँ टीएमसी और बीजेपी कार्यकर्ताओं में जबरदस्त झड़प हो गई है। इसमें अनंत बिजली नामक एक टीएमसी कार्यकर्ता गंभीर रूप से घायल हो गया है। उसे मैना स्वास्थ्य केंद्र लाया गया, वहाँ से उसे तामलुक जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया।
गौरतलब है कि लोकसभा चुनाव 2024 के छठें चरण में राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली की 7 सीटों के साथ ही उत्तर प्रदेश की 14, हरियाणा की सभी 10, बिहार और पश्चिम बंगाल की आठ-आठ, ओडिशा की छह, झारखंड की चार और जम्मू-कश्मीर की एक सीट पर मतदान हो रहा है। इसके अलावा ओडिशा की 42 विधानसभा सीट पर भी मतदान हो रहा है।
छत्तीसगढ़ के बेमेतरा जिले में एक बारूद फैक्ट्री में ब्लास्ट की सूचना मिल रही है। इस ब्लास्ट में 10-12 लोगों के हताहत होने की जानकारी मिल रही है। जिस फैक्ट्री में ब्लास्ट हुआ, वो छत्तीसगढ़ में बारूद कब सबसे बड़ी फैक्ट्री है। बारूद फैक्ट्री में ब्लास्ट में कई लोग घायल भी हुए हैं जो मालवे में दबे हो सकते हैं।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, ये ब्लास्ट जिस फैक्ट्री में हुआ, वो बेमेतरा जिले के बेरला ब्लॉक के बोरसी में है। जिस समय ये धमाका हुआ, फैक्ट्री में काफी संख्या में लोग मौजूद थे। इस ब्लास्ट में घायल हुए लोगों को रायपुर के मेकाहारा अस्पताल रेफर किया गया है। इसके अलावा आसपास के अस्पताल में भी कई लोगों को भर्ती कराया गया है।
ब्लास्ट की सूचना मिलते ही जिला प्रशासन की टीम भी घटनास्थल पर पहुँच गई और फायर ब्रिगेड के साथ एंबुलेंस की टीमें भी पहुँची। इसके बाद बड़े पैमाने पर राहत और बचाव कार्य शुरू कराया गया। ब्लास्ट कैसे हुआ अभी इसके कारणें का पता नहीं चल पाया है।
बेमेतरा कलेक्टर रणबीर शर्मा ने बताया कि जैसे ही एसडीआरएफ की टीम आएगी मलवा हटाने का कार्य तुरंत शुरू कर दिया जाएगा। घटना की मुख्य वजह क्या थी इसे लेकर कलेक्टर ने कहा कि यह बताना बिल्कुल भी मुश्किल होगा की किन कारणों से यह घटना घटी है। क्योंकि यह बारूद फैक्ट्री थी, केमिकल्स भी यहाँ थे। उन्होंने कहा कि मैं फैक्ट्री के संचालकों से बात कर रहा हूँ, कितनी मजदूरों की वर्तमान में संख्या थी, इन सब की जानकारी लेकर अपडेट किया जाएगा।
बता दें कि बेमेतरा में बारूद की कई फैक्ट्रियाँ हैं। फैक्ट्री में तमाम रसायनिक पदार्थ रखे रहते हैं। ऐसे में किस रसायन की वजह से ब्लास्ट हुआ, वो पता लगाना मुश्किल हो सकता है। वहीं, धमाके के समय फैक्ट्री में 800 से अधिक मजदूरों की मौजूदगी बताई जा रही है, ऐसे में हताहतों की संख्या बढ़ भी सकती है।
लोकसभा चुनाव 2024 धीरे-धीरे ढलान पर है। छठें चरण के मतदान के बाद अब आखिरी चरण का मतदान 1 जून को होगा। इस आखिरी चरण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकसभा सीट वाराणसी में भी वोटिंग होगी। इस बीच, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने डीडी न्यूज से विशेष बातचीत की। इस दौरान पीएम मोदी ने कहा कि मैं उम्मीद करता हूँ कि विपक्ष से कुछ मेहनती लोग चुनकर संसद में पहुँचें, ताकि वो सरकार की सही तरीके से डाटा के साथ, मेहनत के साथ आलोचना करें। इससे देश का विकास होगा। पीएम मोदी ने कहा कि मेरे लिए मेरे देश की 140 करोड़ जनता साकार ईश्वर का रूप है। इस दौरान पीएम मोदी ने कलकत्ता हाई कोर्ट द्वारा ओबीसी आरक्षण से जुड़े फैसले को देख की आँखों को खोलने वाला बताया।
लोकसभा चुनाव 2024 में 350 से ज्यादा रैलियों, जनसभाओं, रोड-शो में हिस्सा ले चुके प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पूरे चुनाव में सबसे ज्यादा व्यस्त रहे। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में चुनाव सबसे बड़ा उत्सव होता है। सरकार और राजनीति दलों को जनता प्रति उत्तरदायी होना चाहिए। चुनाव के समय सरकार और राजनीतिक दलों को अपने विजन, अपनी योजनाओं को देश के सामने रखना चाहिए। एक ही महीनें में 4-4 बातें बोलकर जनता को गुमराह करना सही नहीं है। पीएम मोदी ने कहा, “मैं चुनावों को जनता जनार्दन के दर्शन का अभियान मानता हूँ। मेरे लिए ईश्वर के 2 रूप हैं, साकार और निराकार। साकार रूप मेरे देश के 140 करोड़ देशवासी हैं। मेरे लिए चुनाव ईश्वर आराधना जैसा होता है। जनता जनार्दन के दर्शन, उनके मनोभावओं को समझने का प्रयास करना। ये प्रक्रिया मेरी निरंतर चलती है, चुनाव के समय ज्यादा हो जाता है।”
अब विकास की बात होने लगी, ये सबसे बड़ा संतोष
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि मैंने खूब चुनाव लड़े हैं और लड़वाए हैं। पहले जाति-बिरादरी जैसी चीजें चुनाव के समय होती थी, लेकिन गुजरात से मेरा अनुभव है कि मैंने सभी दलों को मजबूर कर दिया था कि यहाँ विकास की बात होगी। मेरे लिए खुशी की बात है कि जनता विकास की बात करने लगी है। लोगों की अपेक्षाएँ बढ़ी हैं।” पीएम मोदी ने कहा कि पहले जनता चाहती थी कि बाढ़ के समय सड़क पर मिट्टी पड़ जाए, इतनी ही चाहत होती थी, लेकिन अब 4 लेन सड़क माँगते हैं। ये बदलाव है।”
अखबार पढ़कर राय नहीं बनाया
इस बातचीत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि मेरे पास सूचना के पास बहुत साधन हैं। मैं अखबार पढ़कर राय नहीं बनाता। मेरे यहाँ सिर्फ मुझे जो अच्छा लगे, ये परंपरा नहीं है। फिल्टर नहीं किया जाता। ऐसे में मेरे पास सभी प्रतिक्रियाएँ सही तरीके से आती हैं। गुजरात के समय को याद करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि जब सीएजी की रिपोर्ट आती है। पॉजिटिव रिपोर्ट आती है, तो रिपोर्ट अलमारी में चली जाती है, कोई चर्चा नहीं करता। लेकिन मैं गुजरात में मुख्यमंत्री रहते हुए सीएजी रिपोर्ट में मिली कमियों को दूर करने का निर्देश देता था। आलोचनाओं को सुनने वाला व्यक्ति हूँ। पीएम मोदी ने कहा कि पाँच साल के कार्यकाल में 3 साल के बाद शिकायत ही नहीं रह जाती थी। विपक्ष के पास बोलने को कुछ बचता नहीं था, क्योंकि उनकी समस्याओं को भी मैं एडजस्ट करता था। उनकी समस्याओं को सुनकर दूर करता था।
सरकार की सही आलोचना जरूरी
प्रदानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी आलोचनाओं पर कहा, “आलोचना के लिए मेहनत करनी होती है। मैंने दावा किया कि 4 करोड़ घर बने, इसकी आलोचना करने के लिए मेहनत करनी पड़ती है, जो विपक्ष नहीं करता है। अच्छी सरकार चलाने के लिए आलोचन जरूरी है, लेकिन अब लोग मेहनत ही नहीं करते। अगर मेरे दावे 4 करोड़ घर की आलोचना करनी है, तो विपक्ष को इसकी अच्छे से जाँच करनी चाहिए। सबको घर मिला कि नहीं मिला। किसी को पैसे तो नहीं देने पड़े। क्या प्रोसेस हुआ, क्या समस्याएँ आई। अगर विपक्ष ऐसी आलोचना करता है, तो ये अच्छा रहेगा। जो कमियाँ दिखेंगी, उन्हें दूर किया जाए, लेकिन विपक्ष ऐसी मेहनत ही नहीं करता। मैं चाहता हूँ कि विपक्ष की तरफ से सदन में ऐसे लोग चुनकर आएँ, जो मेहनती हों। आलोचना में भी देश का भला हो।”
गठबंधन की सरकारों पर बोले पीएम मोदी
पीएम मोदी ने कहा कि गठबंधन की सरकारों के रंग रूप अलग-अलग रहे हैं। अटल जी की भी सरकार गठबंधन की थी, लेकिन सबकी जिम्मेदारियाँ तय थी। मनमोहन सिंह जी की भी सरकार थी, लेकिन उसमें एक सुपर पीएम भी था। हर मिनिस्ट्री खुद को अलग सरकार मानती थी। ये सुपर पीएम वाला कॉन्सेप्ट आने से स्थितियाँ बिगड़ गई। इस बार भी इंडी गठबंधन पाँच साल पाँच पीएम को लेकर तैयारी कर रही है। पहले भी ऐसा कर चुके हैं ये लोग, बिखरी व्यवस्था वाली। अब भी ऐसा ही कॉन्सेप्ट ला रहे हैं। ये सोच होगी, तो देश कैसे चलेगा।
अब मजबूत सरकार चाहती है देश की जनता
पीएम मोदी ने कहा कि भारत की जनता ने 30 साल बाद जब 2014 में जब नई सरकार चुनी, तो पुरानी सरकार के प्रति गुस्सा भी था, मेरे पास गुजरात का ट्रैक रिकॉर्ड भी था। बीजेपी ने स्पष्ट रूप से कहा था कि हम मोदी जी के नेतृत्व में सरकार बनाएँगे। जनता के पास साफ नजरिया था, इसलिए उसने हमें चुना। साल 2019 में उन्होंने पिछले 5 साल का ट्रैक रिकॉर्ड देखा। ऐसे में जनता ने देखा कि स्थिर सरकार देश के लिए अच्छी रहती है। ऐसे में देश की जनता स्थिर और मजबूत सरकार दे रही है।
कलकत्ता हाई कोर्ट का फैसला देश की आँख खोलने वाला
मुस्लिम आरक्षण पर सवाल पूछने पर पीएम मोदी ने कहा, “लोग कहते हैं कि नरेंद्र मोदी मुस्लिमों के आरक्षण के विरोधी हैं। जबकि हकीकत ये है कि हमारा संविधान यही कहता है। बाबा साहेब आंबेडकर से लेकर तमाम बुद्धिजीवियों ने यही बात कही। मैं भी यही कहता हूँ। मैं धर्म को आधार बनाकर आरक्षण देने का विरोध इसलिए करता हूँ, क्योंकि संविधान ने सबको बराबर माना है। ऐसे में मैं किसी खास धर्म का हूँ और मुझे आरक्षण मिलना चाहिए, ऐसा कोई कहे तो ये नहीं होगा।”
कलकत्ता हाई कोर्ट के फैसले पर पीएम मोदी ने कहा कि ये फैसला देश की आँख खोलने वाला है कि आप कैसे ओबीसी के अधिकारों को छीन रहे हैं। वैसे, दिल्ली के शाही परिवार ने जवाहरलाल नेहरू के समय से ओबीसी को स्वीकार ही नहीं किया। वीपी सिंह की सरकार तक यही किया। ये लोग ओबीसी से नफरत करते रहे। ये लोग ओबीसी के दुश्मन रहे ही हैं। लेकिन ओबीसी आ गया। ऐसे में इन्होंने कर्नाटक मॉडल बनाया। ओबीसी के हक पर लूट किया। उसमें मुस्लिमों को घुसाया। यही काम ममता बनर्जी ने किया, लेकिन कोर्ट ने पकड़ लिया और रोक लगा दी।