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कौन है ‘हिटमैन’, स्वाति मालीवाल को क्यों करना चाहता है बदनाम? CM केजरीवाल के घर जिस दिन हुई मारपीट उसका पहला Video आया सामने, दिल्ली पुलिस लेगी संज्ञान

एक वीडियो सोशल मीडिया में वायरल हो रहा है। कुछ मीडिया संस्थानों ने भी इसे जारी किया है। कहा जा रहा है कि यह वीडियो 13 मई, 2024 का है जिस दिन दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल के आवास में AAP महिला सांसद स्वाति मालीवाल बिभव कुमार पर है।

IANS द्वारा जारी किए गए इस वीडियो में कुछ सुरक्षाकर्मी दिखते हैं और एक महिला की आवाज सुनाई पड़ती है। इस वीडियो में सुरक्षाकर्मी उसे बाहर चलने को कहते हैं। महिला 112 पर फ़ोन करने की बात भी कहती है। महिला उन पर इस बात के लिए जोर डालती है कि पुलिस को अंदर आने दिया जाए। सुरक्षाकर्मी उसे बताते हैं कि पुलिस उस परिसर के भीतर नहीं आएगी।

महिला इन सुरक्षाकर्मियों को उनकी नौकरी खाने की बात करती है। इस दौरान सुरक्षाकर्मी लगातार उससे बाहर चलने को कहते हैं। महिला इस दौरान बाहर ना जाने पर अड़ जाती है। एक सुरक्षाकर्मी कहता इस दौरान कहता है कि आप पढ़े लिखे लोग हैं आपके साथ ऐसा नहीं होगा। वीडियो कुल 52 सेकंड का है। वीडियो में एक महिला किसी को गंजा भी कहती है।

बताया जा रहा है कि वीडियो में बात कर रही महिला स्वाति मालीवाल हैं और यह वीडियो उनके साथ CM आवास पर हुई मारपीट की घटना के बाद का है। एक अन्य वीडियो भी टाइम्स नाउ ने जारी किया है जिसमें मारपीट के बाद स्वाति मालीवाल के सोफे पर बैठने की बात कही जा रही है। मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया है कि दिल्ली पुलिस इन वीडियो का संज्ञान लेगी।

स्वाति मालीवाल ने इन वीडियो के ऊपर एक ट्वीट करके जवाब दिया है। उन्होंने लिखा है, “हर बार की तरह इस बार भी इस राजनीतिक हिटमैन ने ख़ुद को बचाने की कोशिशें शुरू कर दी हैं। अपने लोगों से ट्वीट्स करवा के, आधी बिना संदर्भ की वीडियो चलाके इसे लगता है ये इस अपराध को अंजाम देके ख़ुद को बचा लेगा।”

आगे उन्होंने लिखा, “कोई किसी को पीटते हुए वीडियो बनाता है भला? घर के अंदर की और कमरे की CCTV फ़ुटेज की जाँच होते ही सत्य सबके सामने होगा। जिस हद तक गिर सकता है गिर जा, भगवान सब देख रहा है। एक ना एक दिन सब की सच्चाई दुनिया के सामने आएगी।”

स्वाति मालीवाल ने इस मामले में दिल्ली पुलिस को एक FIR भी दर्ज करवाई है। इस FIR में उन्होंने कहा है कि 13 मई, 2024 को वह CM केजरीवाल से मिलने के लिए उनके घर में प्रतीक्षा कर रहीं थी। इसी दौरान उनके पूर्व निजी सचिव बिभव कुमार वहाँ आए और उनके साथ मारपीट चालू कर दी।

स्वाति मालीवाल ने बताया कि उन्हें 7-8 थप्पड़ मारे गए, उनकी शर्ट खोल दी गई, उनको सोफे से खींचा गया और जमीन पर गिराकर लातों से मारा गया। उनका मेडिकल भी करवाया गया है। स्वाति मालीवाल की FIR के आधार पर दिल्ली पुलिस बिभव कुमार की तलाश कर रही है।

PM मोदी ने रमजान में गाजा पर बंद करवाई थी बमबारी, विशेष दूत भेजा था इजरायल: इंटरव्यू में किया खुलासा, कहा- यहाँ मुझे मुस्लिमों को लेकर घेरते हैं

तुष्टिकरण की राजनीति करने वाले विपक्षी दल हमेशा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को मुस्लिम विरोधी दिखाने की कोशिश करते हैं। हालाँकि, इससे अलग पीएम मोदी मुस्लिमों की बेहतरी के लिए लगातार कदम उठाते रहे हैं। इस बीच पीएम मोदी ने खुलासा किया है कि उन्होंने गाजा में कार्रवाई के दौरान अपने ‘विशेष दूत’ को इजरायल भेजा था, ताकि रमजान में संघर्ष विराम लागू किया जा सके।

इंडिया टुडे/आजतक को दिए इंटरव्‍यू में पीएम मोदी ने कहा, “अभी रमजान का महीना था। तब अपने विशेष दूत को इजरायल भेजा। इजरायल के पीएम और राष्‍ट्रपति सबसे मिलना था। मैंने कहा कि इन्‍हें समझाइए कि कम से कम रमजान में गाजा में बम न गिराएँ और उन्‍होंने इसका पालन करने का भरपूर प्रयास किया।”

पीएम मोदी ने आगे कहा, “मित्र भारत के अनुरोध को इजरायली पीएम बेंजामिन नेतन्‍याहू मान गए और उन्‍होंने संघर्ष विराम को मंजूरी दे दी। यहाँ तो मुझे आप मुस्लिमों को लेकर घेर लेते हैं, लेकिन मोदी ने गाजा में रमजान के महीने में बम हमले को रुकवाया। हालाँकि, मैं इसकी पब्लिशिटी नहीं करता हूँ।”

पीएम मोदी जिस विशेष दूत की बात कर रहे हैं, वह राष्‍ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोवाल हैं। अजीत डोवाल ने रमजान से ठीक पहले 11 मार्च 2024 को इजरायल की यात्रा की थी। इस दौरान उन्होंने इजरायली पीएम बेंजामिन नेतन्‍याहू से मुलाकात की थी और उनसे क्षेत्रीय विकास पर चर्चा की थी।

इसके साथ ही अजीत डोवाल ने गाजा में मानवीय सहायता की तत्काल जरूरत पर जोर दिया था और इसे पूरा करने के लिए अनुरोध किया था। गाजा में उन दिनों खाद्यान की भारी कमी हो गई थी। इजरायल के पीएम ने सोशल मीडिया एक्‍स पर पोस्‍ट करके कहा भी था कि उन्‍होंने भारतीय राष्‍ट्रीय सुरक्षा सलाहकार से मुलाकात की है।

पीएम मोदी इस दौरान यूएई, कतर, सऊदी अरब, मिस्र और जॉर्डन के नेताओं के साथ भी संपर्क में थे। इजरायल-हमास युद्ध से पहले पीएम मोदी ने रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान भी पुतिन और जेलेंस्‍की से बात की थी और कुछ समय के लिए संघर्ष विराम कराया था। संघर्ष विराम के दौरान भारत ने वहाँ फँसे अपने छात्रों को निकाला था। इसकी दुनिया भर में तारीफ हुई थी।

इंटरव्यू के दौरान पीएम मोदी ने आगे कहा कि विपक्ष की पिछली सरकारें धर्मनिरपेक्ष होने का ढोंग रचती थीं। उन्होंने कहा, “हमारे यहाँ पहले यह फैशन था कि इजरायल जाओ, फिलिस्तीन जाओ और सेक्यूलरिज्म का फैशन करके वापस आ जाओ। मैंने कहा कि मुझे ऐसा कुछ नहीं करना है।”

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आगे कहा, “मैंने निर्णय लिया कि मैं सीधे इजरायल जाऊँगा, सीधे वापस आऊँगा। मुझे ये ढोंग करने की जरूरत नहीं है। और मैं इजरायल गया भी। मैंने कहा कि अगर मैं फिलिस्तीन जाऊँगा तो मेरी वो यात्रा बस फिलिस्तीन की ही यात्रा होगी।”

पीएम मोदी ने कहा, “मजे की बात देखिए। जब मैं फिलिस्तीन गया तो बात आई कि इससे आगे हेलिकॉप्टर से जाना होगा। जॉर्डन के राष्ट्रपति जी को पता चला कि मैं जॉर्डन से होकर फिलिस्तीन जाने वाला हूँ तो वो जॉर्डन के प्रधानमंत्री मोहम्मद साहब के सीधे वारिस हैं, उन्होंने कहा कि मोदीजी आप ऐसे नहीं जा सकते, आप मेरे मेहमान हैं। मेरे ही हेलिकॉप्टर में आप जाएँगे। मेरे घर खाना खाकर जाएँगे।”

अपने अनुभवों को साझा करते हुए उन्होंने आगे कहा, “मैं उनके घर गया। वहाँ खाना खाया। मैं जॉर्डन के हेलिकॉप्टर से फिलिस्तीन जा रहा था तो इजरायल हमें हवा में सुरक्षा दे रहा था। इन तीनों देशों की दुनिया अलग है, लेकिन मोदी के लिए आसमान में सब साथ थे।”

उन्होंने आगे कहा, “मैं मानता हूँ ये सब तब होता है जब आपके इरादे नेक हों। आपके प्रति विश्वास हो। मैं चोरी छिपे या अमेरिका को कुछ बताकर नहीं करता। मुझे उससे कुछ पूछना नहीं होता है। रूस से अगर मेरे देश को सस्ता पेट्रोल चाहिए तो मैं लूँगा। मैं छिपाता नहीं हूँ और अपनी शर्तों पर देश को चलाता हूँ।”

लंदन में समलैंगिक होना अपराध नहीं, इसलिए जाते हैं शाहरुख खान और करण जौहर: महिला सिंगर का दावा, कहा- गे एनकाउंटर में मेरे पूर्व पति भी थे शामिल

बॉलीवुड की दुनिया के किंग खान कहे जाने वाले शाहरुख खान और मशहूर डायरेक्टर करण जौहर को लेकर एक गायिका का चौंकाने वाला दावा सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। ये दावा सुचित्रा नाम की तमिल गायिका ने किया है। वीडियो में वो शाहरुख और करण को गे कहती सुनाई पड़ रही हैं।

सुचित्रा इस वीडियो में बताती हैं कि उनके पूर्व पति समलैंगिक हैं। उन्हीं की बात को आगे करते हुए उन्होंने कहा कि एक बार उनके पूर्व पति कार्तिक कुमार का करण जौहर और शाहरुख खान के साथ गे एनकाउंटर हुआ था।

वायरल वीडियो में सुचित्रा कहती सुनाई पड़ती हैं, “एक बार जब कार्तिक लंदन ट्रिप पर थे, तो उनकी मुलाकात करण जौहर और शाहरुख खान से हुई और वे बार से भरी एक गली में घूमे। वे क्रॉस-ड्रेस्ड (दूसरे जेंडर के कपड़े में) थे। यह कुछ ऐसा है जो करण और शाहरुख अक्सर विदेश जाने पर करते हैं। वे इस तरह के कपड़े पहनकर गे एरिया में जाते हैं। वे उस माहौल में घुलमिल जाते हैं और रात का मजा लेते हैं।”

बता दें कि एक तरफ जहाँ सुचित्रा की वीडियो वायरल होने के बाद लोग करण जौह और शाहरुख खान पर अपनी मिलीजुली प्रतिक्रियाएँ दे रहे हैं तो वहीं इस बीच शाहरुख की साल 2010 की एक वीडियो क्लिप भी वायरल है जिसमें उन्होंने एक पत्रकार के सवाल का तंज भरा जवाब देते हुए कह दिया था- “हाँ हम दोनों साथ सोते है और ज्यादातर समय एक दूसरे से प्यार करते रहते हैं।”

इसके अलावा सुचित्रा की वीडियो को देख उनके एक्स हसबैंड ने भी इस मुद्दे पर कहा है कि अगर वह समलैंगिक होते, तो इसे गर्व से स्वीकार करते। कार्तिक ने कहा, “अगर मैं समलैंगिक हूँ, तो मुझे समलैंगिक होने पर शर्म नहीं आएगी। मुझे किसी भी तरह का यौन संबंध रखने पर बहुत गर्व होगा।”

‘साली तेरी औकात क्या है, नीच औरत, ऐसी जगह गाड़ेंगे पता तक नहीं चलेगा’: पीरियड में थीं स्वाति मालीवाल, फिर भी टांगों के बीच मारता रहा विभव कुमार

AAP की राज्यसभा सांसद स्वाति मालीवाल के साथ दिल्ली CM केजरीवाल के आवास पर हुई मारपीट के मामले में FIR सामने आई है। इसमें स्वाति मालीवाल ने बताया है कि कैसे उनके साथ केजरीवाल के पूर्व निजी सचिव बिभव कुमार ने बर्बरता से मारपीट की। उन्होंने इस FIR में बताया है कि उन्हें बर्बरता से पीटा गया और जान से मार देने तक की धमकी दी गई।

FIR में स्वाति मालीवाल ने बताया कि वह 13 मई, 2024 की सुबह केजरीवाल से मिलने उनके घर पहुँची थीं। यहाँ केजरीवाल से मिलने के लिए उन्हें थोड़ी देर प्रतीक्षा करने को कहा गया था। स्वाति मालीवाल ने बताया कि वह CM केजरीवाल की प्रतीक्षा ड्राइंग रूम में कर रहीं थी तभी वहाँ बिभव कुमार आ गए।

स्वाति मालीवाल ने बताया कि बिभव कुमार ने आते ही उन पर चिल्लाना और गालियाँ देना चालू कर दिया। स्वाति ने कहा कि उन्होंने बिभव से शांत होने की बात कही लेकिन वह नहीं माने। इसके बाद बिभव कुमार ने स्वाति मालीवाल से कहा, “तू कैसे हमारी बात नहीं मानेगी? कैसे नहीं मानेगी? साली तेरी औकात क्या है कि हमको ना करदे। समझती क्या है खुद को नीच औरत। तुझको हम सबक सिखाएँगे।” बिभव कुमार इसके बाद स्वाति मालीवाल पर हमलावर हो गए।

स्वाति मालीवाल ने बताया कि उन्हें बिभव कुमार ने उन्हें एक साथ 7-8 थप्पड़ मारे। जब स्वाति मालीवाल ने इसका विरोध किया और उन्हें पीछे धकेला तो बिभव कुमार उन पर टूट पड़े। बिभव ने मालीवाल को खींचा और उनकी शर्ट ऊपर कर दी। इसके बाद उनकी शर्ट के बटन खुल गए। मालीवाल ने बताया कि खींचे जाने के कारण उनका सर मेज से टकरा गया और वह स्वयं जमीन पर गिर गईं। बिभव कुमार ने इसके बाद उनकी छाती समेत पूरे शरीर पर लातें बरसाईं।

स्वाति मालीवाल ने आरोप लगाया कि जब उनके साथ मारपीट हुई तब उन्हें पीरियड्स आ रहे थे और इसको लेकर उन्होंने बिभव कुमार से छोड़ देने की अपील भी की। हालाँकि, बिभव नहीं माने और स्वाति को पीटते रहे। स्वाति ने बताया कि इस दौरान उनकी मदद के लिए कोई नहीं आया। स्वाति जब किसी तरह अपने आप को छुड़वाने में सक्षम हुईं तो उन्होंने पुलिस को फ़ोन किया। फोन को लेकर भी बिभव कुमार ने उन्हें गालियाँ दी।

बिभव कुमार ने उनसे कहा, “कर ले तुझे जो कुछ करना है। तू हमारा कुछ नहीं बिगाड़ सकती। तेरी हड्डी पसली तुडवा देंगे और ऐसी जगह गाड़ेंगे किसी को पता भी नहीं चलेगा।” इसके बाद बिभव कुमार ने CM आवास के सुरक्षाकर्मियों के जरिए उन्हें बाहर फिंकवा दिया। स्वाति मालीवाल ने बताया कि वह इसके बाद किसी तरह पुलिस थाने पहुँचीं लेकिन मामले को राजनीतिक रंग ना दिया जाए इसलिए उन्होंने उस दिन इस मामले में FIR दर्ज नहीं करवाई।

स्वाति मालीवाल ने FIR में बताया है कि इस मारपीट के कारण वह गंभीर रूप से चोटिल हो गई हैं और उनके शरीर के कई हिस्से दर्द कर रहे हैं। उनसे चला भी नहीं जा रहा है। उन्होंने इस मामले में दिल्ली पुलिस से जाँच करके कार्रवाई की माँग की है। मालीवाल के बयान के आधार पर पुलिस ने बिभव कुमार पर धारा 308, 341, 323, 354बी, 506 और 509 के तहत मामला दर्ज कर लिया है। इससे पहले इस मामले में दिल्ली पुलिस की एक टीम स्वाति मालीवाल के घर भी पहुँची थी।

स्वाति मालीवाल का इस घटना के बाद मेडिकल भी करवाया गया है। दिल्ली पुलिस वर्तमान में बिभव कुमार को तलाश रही है। बिभव को आखिरी बार 16 मई, 2024 को लखनऊ में अरविन्द केजरीवाल के साथ देखा गया था। मामले में CM केजरीवाल की चुप्पी पर भी प्रश्न उठ रहे हैं।

असम में ब्राह्मण छात्र को परीक्षा देने से पहले जनेऊ उतारने को किया मजबूर, कॉलेज प्रशासन का आरोपों से इनकार

असम में बुधवार (15 मई) को होने वाली कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस एग्जामिनेशन (CUET) परीक्षा में बैठने से पहले एक हिंदू छात्र को अपना जनेऊ उतारने के लिए मजबूर किया गया। पीड़ित छात्र की पहचान धृतिराज बशिष्ठ के रूप में हुई है। बशिष्ठ अपनी माँ के साथ परीक्षा केंद्र पर गया था। घटना सामने आने के बाद ब्राह्मण संगठन ने कॉलेज के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की बात कही है।

घटना असम के बजाली जिले के भवानीपुर आंचलिक कॉलेज स्थित एक परीक्षा केंद्र पर हुई। रिपोर्ट्स के मुताबिक, हिंदू छात्र से कहा गया कि अगर वह परीक्षा में बैठना चाहता है तो उसे अपना जनेऊ उतार देना होगा। मामले के बारे में बात करते हुए पीड़िता की माँ ने कहा, “मुझे उच्च अधिकारी को सूचित करने के लिए कॉलेज में घुसने की अनुमति भी नहीं दी गई।”

छात्र की माँ ने आगे बताया कि उनके बेटे बसिष्ठ को भवानीपुर आंचलिक कॉलेज के गेट पर रोका गया और अधिकारियों ने उसके पहचान पत्र की जाँच की। जब पीड़ित को पता चला कि उसने इस शर्ट के नीचे जनेऊ पहना हुआ है तो उसे अंदर घुसने नहीं दिया गया। उसके बाद बशिष्ठ ने अपनी माँ को फोन किया और कहा कि कॉलेज के अधिकारी उसे अपना जनेऊ उतारने के लिए कहा है।

उनकी माँ के अनुसार, कॉलेज प्रशासन ने दावा किया कि उनके जनेऊ में एक धातु की वस्तु पाई गई थी। महिला ने न्यूज लाइव को बताया, “पवित्र धागे के बिना, वह खा नहीं सकता, बोल नहीं सकता या अपनी आस्था का अभ्यास नहीं कर सकता। एक ब्राह्मण के रूप में हमारी पहचान प्राथमिक है।” महिला ने वह जनेऊ भी दिखाया, जिसे उतारने के लिए मजबूर किया गया था।

ब्राह्मण संगठन करेगा कानूनी कार्रवाई, कॉलेज ने आरोपों से किया इनकार

इस घटना की जानकारी मिलने पर अखिल भारत ब्राह्मण मोर्चा ने आंदोलन शुरू किया है और भवानीपुर आंचलिक कॉलेज प्रशासन के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की बात कही है। इस बीच, कॉलेज ने हिंदू लड़के पर जनेऊ उतारने के लिए दबाव डालने की बात से इनकार किया है। कॉलेज के प्रिंसिपल मानस कुमार चक्रवर्ती ने दावा किया कि क़ॉलेज के खिलाफ लगाए जाने वाले आरोप सही नहीं हैं।

मानस कुमार चक्रवर्ती ने कहा कि बशिष्ठ को केवल जनेऊ में बँधी धातु की अंगूठी हटाने के लिए कहा गया था, न कि जनेऊ को पूरी तरह से हटाने के लिए। मानस कुमार चक्रवर्ती ने यह भी दावा किया कि उन्होंने पीड़ित को अपना जनेऊ नहीं हटाने का निर्देश दिया था, लेकिन उसने उनके निर्देश का पालन नहीं किया और पूरा जनेऊ निकाल दिया।

मानस चक्रवर्ती ने कहा, “हम NTA के निर्देशों का पालन कर रहे थे, जिसमें स्पष्ट रूप से कहा गया था कि परीक्षा हॉल के अंदर किसी भी धातु की वस्तु की अनुमति नहीं है। निर्देशों के अनुसार, हमने छात्र से अपने जनेऊ से अंगूठी निकालने को कहा, लेकिन उसने जनेऊ निकालकर अपनी माँ को सौंप दिया।”

केरल का वामपंथी टेरर मॉडल: विजयन सरकार के 6 साल में 431 बम हमले, पर सजा किसी को नहीं, अधिकांश केस बंद क्योंकि CPIM से जुड़े हैं आरोपित

केरल में साल 2016 से सीपीआई-एम की कम्युनिष्ट सरकार है। कम्युनिष्ट जिस केरल मॉडल का हौव्वा खड़ा करते हैं, उस केरल में जून 2016 से अगस्त 2022 तक के मौजूदा आँकड़ों में सीपीआई-एम के राज में 431 बम धमाके हो चुके हैं। खास बात ये है कि वामपंथी सरकार के 6 सालों में 431 मामलों में से किसी एक मामले में भी आतंकियों को कोई सजा नहीं हो पाई।

ऑनलाइन मनोरमा की रिपोर्ट के मुताबिक, केरल पुलिस ने 431 बम धमाकों में से सिर्फ 162 मामलों में चार्जशीट दाखिल की है। यही नहीं, जाँच में सबूतों का हवाला देते हुए 205 मामलों को तो बंद ही कर दिया गया, जबकि 2 अन्य मामलों को सबूत न मिलने का हवाला देकर बंद कर दिया गया। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि केरल पुलिस ने ज्यादातर मामलों की जाँच नहीं की क्योंकि आरोपित सत्ताधारी पार्टी सीपीआई-एम से जुड़े थे।

मनोरमा की रिपोर्ट के मुताबिक, “अधिकाँश मामलों में शीर्ष पुलिस अधिकारियों ने जाँच टीमों पर दबाव डाला कि वो केस में ढंग से जाँच न करें और न ही सबूत प्रस्तुत करें।” आतंकी हमलों के अलावा इस रिपोर्ट में ‘गुंडा हमलों’ की भी जानकारी दी गई है। गुंडा हमलों के 150 मामलों में से 142 में चार्जशीट दाखिल कर दी गई, जिसमें 6 को बरी कर दिया गया जबकि सिर्फ 5 अपराधियों को सजा हुई।

केरल में ‘गुंडा‘ शब्द का इस्तेमाल उन मामलों में किया जाता है, जिसमें कोर्ट ने किसी को दोषी पाया हो या केरल के सक्षम अधिकारी द्वारा केरल असामाजिक गतिनिधियाँ (रोकथाम) अधिनियम-2007 के केस में उन्हें शामिल पाया गया हो। ऐसे ममालों में सिर्फ 10 मामले सामने आए, जिसमें आरोपित बम बनाते पकड़े गए, जिसमें से 5 मामलों में चार्जशीट दाखिल की गई, जबकि 2 मामलों को बंद कर दिया गया।

रिपोर्ट में कहा गया है, “टॉप पुलिस अधिकारियों ने इन मामलों को दबाने में दिलचस्पी दिखाई और जाँच टीमों पर दबाव बनाया कि वो कोर्ट में पुख्ता सबूत न पेश करें।”

इस तरह का एक हालिया मामला सामने आया है, जिसमें केरल की राजधानी तिरुवनंतपुरम में एक एसआई सभी हिस्ट्रीशीटरों तक पहुँचा और उनसे पुलिस स्टेशन में आकर रजिस्टर पर साइन करने का ‘अनुरोध’ किया।

ये पूरा घटनाक्रम लोकसभा चुनावों के बीच सामने आया है, जहाँ सीपीआई-एम केरल में सुशासन का दावा करती है और अपने दावों को सही ठहराने के लिए भ्रामक ‘केरल मॉडल‘ का प्रचार करती है। बता दें कि मौजूदा समय में केरल राज्य गहने फाइनेंसियल क्राइसिस में है, जहाँ इस्लामी कट्टरपंथ के बढ़ते मामलों के बीच, सरकार अपने सबसे बड़े वोट बैंक पर ठोस कार्रवाई से पीछे हट रही है। यही वजह है कि राज्य की हालत और भी खराब होती जा रही है।

चेहरे पर अंदरुनी चोटें, ठीक से चल भी नहीं सकती… स्वाति मालीवाल से कब-किसने-कैसे की मारपीट: अब तक क्या-क्या हुआ, सब कुछ एक साथ

स्वाति मालीवाल के साथ हुई बदसलूकी मामले में प्राथमिकी दर्ज होने के बाद अब दिल्ली पुलिस को मेडिकल रिपोर्ट का इंतजार है। इस बीच सूत्रों के हवाले से मीडिया में दी गई जानकारी में कहा जा रहा है कि राज्यसभा सांसद के चेहरे पर सूजन मिली है। बाकी की डिटेल मेडिकल रिपोर्ट मिलने के बाद आएगी। अब पुलिस विभव कुमार को ढूँढने के लिए अपनी कार्रवाई कर रही है। उन्होंने इस मामले में 10 टीमों को लगाया हुआ है।

बता दें कि स्वाति मालीवाल के साथ उस दिन क्या हुआ इसके सबूत जुटाने के लिए पुलिस मुख्यमंत्री आवास के फुटेज मँगाने वाली है, लेकिन मीडिया में इस केस में पहले दिन से क्या-क्या जानकारी आई है इसके बारे में सिलसिलेवार ढंग से जान लेते हैं।

  • 13 मई 2024 को सुबह 9:10 मिनट पर स्वाति मालीवाल सीएम केजरीवाल के आवास पहुँचीं। मीडिया में कहा गया कि चूँकि केजरीवाल सरकार ने उनसे इस्तीफा माँगा था इसलिए वो वहाँ बात करने गई थीं।
  • इसी दिन 13 मई को करीबन 24 मिनट बाद 9:34 पर स्वाति मालीवाल के नाम से पीसीआर को कॉल गई। उन्होंने बताया कि उनसे साथ सीएम आवास में हिंसा हुई है।
  • 13 मई 2024 को ही स्वाति मालीवाल सिविल लाइंस थाने पहुँची लेकिन एक कॉल आने के बाद बिन शिकायत किए वापस लौट आईं।
  • 13 मई 2024 की शाम तक ये खबर मीडिया में आ गई कि सीएम के आवास पर किसी राज्यसभा सांसद के साथ बदसलूकी हुई है।
  • 14 मई को साफ हो गया है कि वो सांसद स्वाति मालीवाल हैं।
  • शुरू में सोशल मीडिया पर AAP समर्थकों ने फैलाने की कोशिश की कि ये सारी बातें झूठ हैं।

14 मई को ही बात संभालने के लिए आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर डाली।

  • प्रेस कॉन्फ्रेंस में भरोसा दिया गया कि पार्टी स्वाति मालीवाल के साथ है।
  • 14 मई को स्वाति के पूर्व पति की वीडियो सामने आई। इस वीडियो में उन्होंने मालीवाल की जान को खतरा बताया और पूरा हमला एक साजिश कहा।
  • 15 मई 2024 को बीजेपी दिल्ली ने सीएम हाउस के बाहर प्रोटस्ट किया। एक्शन की माँग हुई।
  • 16 मई 2024 को एक्शन तो दूर मुख्यमंत्री केजरीवाल अपने पीए विभव कुमार को लेकर लखनऊ पहुँच गए।
  • 16 मई शाम में तस्वीर सामने आई कि इतना सब होने के बावजूद अरविंद केजरीवाल पीए के साथ घूम रहे हैं। पूरी AAP पार्टी की मंशा और सोच पर सवाल उठे।
  • 16 मई 2024 रात में पता चला कि स्वाति मालीवाल ने इस संबंध में पुलिस को शिकायत दे दी है। पुलिस ने चार घंटे उनकी बात सुनने के बाद इस मामले में एफआईआर दर्ज की।

रात 11 बजे के करीब पुलिस स्वाति मालीवाल को लेकर एम्स पहुँची। उनका मेडिकल चेक अप हुआ।

  • 16-17 मई की रात करीब 3 बजे स्वाति वापस घर आईं और अंदर घुसते समय जो उनकी वीडियो दिखी उसमें उनके पैर लड़खड़ाते देखे गए।
  • 17 मई 2024 को मीडिया में पुलिस सूत्रों के हवाले से कई बातें सामने आईं। एफआईआर को लेकर कहा गया कि स्वाति मालीवाल ने बताया है कि उनके संवेदनशील अंगों पर विभव ने वार किया।
  • पुलिस की करीबन 10 टीमों को इस मामले की हकीकत जानने में लगाया गया।
  • 17 मई 2024 की दोपहर स्वाति मालीवाल अपना बयान दर्ज कराने कोर्ट में पहुँची।

सपा-कॉन्ग्रेस सत्ता में आई तो राम मंदिर पर चला देंगे बुलडोजर, रामलला को फिर से टेंट में भेज देंगे: पीएम मोदी

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा है कि अगर सपा-कॉन्ग्रेस सत्ता में आ गई तो वह रामलला को फिर से टेंट में भेज देंगे। उन्होंने कहा कि यह लोग राम मंदिर पर बुलडोजर चला देंगे। पीएम मोदी ने आरोप लगाया कि सपा कॉन्ग्रेस तुष्टिकरण के पीछे घुटने टेक चुके हैं।

पीएम मोदी ने यह बातें उत्तर प्रदेश के बाराबंकी में एक चुनावी रैली में कही। यहाँ वह बाराबंकी से भाजपा की प्रत्याशी राजरानी रावत और मोहनलालगंज से प्रत्याशी कौशल किशोर के लिए समर्थन जुटाने पहुँचे थे। यहाँ उन्होंने सपा-कॉन्ग्रेस गठबंधन को लेकर लोगों को चेताया।

पीएम मोदी ने कहा, “सपा और कॉन्ग्रेस किसी हद तक जा सकते हैं, इनका ट्रैक रिकॉर्ड ही ऐसा है। इनके लिए देश कुछ नहीं है, इन लोगों के लिए इनका परिवार और पॉवर, यही उनका खेल है। सपा-कॉन्ग्रेस वाले सरकार में आए तो रामलला को फिर से टेंट में भेजेंगे और राम मंदिर पर बुलडोजर चलवा देंगे।”

पीएम मोदी ने इस दौरान कहा कि सपा-कॉन्ग्रेस को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से सीखना चाहिए कि बुलडोजर कहाँ चलाना होता है और कहाँ नहीं चलाना होता। पीएम मोदी ने लोगों से अपील की कि वह सपा-कॉन्ग्रेस गठबंधन को वोट देकर वोट बर्बाद ना करने की अपील की।

पीएम मोदी ने कहा, “पहले रामलला को इन लोगों ने टेंट में पहुँचाया, उसके बाद मंदिर की जगह और कुछ बनाने की बात की। इसके बाद जब मंदिर बन गया तो उसकी प्राण प्रतिष्ठा में नहीं गए। इन्हें राम से कितनी घृणा है।” पीएम मोदी ने कहा कि कॉन्ग्रेस राम मंदिर पर सुप्रीम कोर्ट का निर्णय पलटने की तैयारी कर रही है।

पीएम मोदी ने यहाँ धर्म के आधार पर आरक्षण के मुद्दे को भी उठाया। पीएम मोदी ने कहा,” यूपी में इन लोगों ने धर्म के आधार पर आरक्षण देने की कोशिश की। कर्नाटक में यह कर भी दिया। कर्नाटक को इन लोगों ने अपनी प्रयोगशाला बना रखा है।” पीएम मोदी का भाषण आप यहाँ सुन सकते हैं।

बाराबंकी में पीएम मोदी ने कॉन्ग्रेस के सम्पत्ति के दोबारा बंटवारे के वादे को लेकर भी प्रश्न खड़े किए। पीएम मोदी ने कहा कि लोगों से सम्पत्ति लेकर जो लोग वोट जिहाद करते हैं उनको सम्पत्ति दी जाएगी। पीएम मोदी ने कॉन्ग्रेस-सपा को दलित विरोधी बताया।

पटना के स्कूल में भीड़ ने लगाई आग, गटर में मिला था 4 साल के बच्चे का शव: स्कूल जाने के बाद से था लापता, CCTV फुटेज से भी छेड़छाड़ का दावा

बिहार की राजधानी पटना के एक स्कूल में एक 4 वर्षीय छात्र का शव मिला। यह शव स्कूल के सीवर वाले कमरे से मिला। बच्चा 16 मई, 2024 को स्कूल गया था लेकिन जब देर शाम तक घर नहीं लौटा तो उसकी तलाश चालू की गई। शव मिलने पर भीड़ आक्रोशित हो गई और स्कूल में तोड़फोड़ के साथ आगजनी की।

जानकारी के अनुसार, पटना के टिनी टॉट एकेडमी नाम के एक स्कूल में 4 वर्षीय आयुष कुमार पढ़ता था। वह इसी स्कूल परिसर में ट्यूशन भी पढ़ता था। बताया गया कि आयुष गुरुवार (16 मई, 2024) को सुबह साढ़े छः बजे स्कूल पहुँचा था। वह छुट्टी के बाद भी वापस घर नहीं पहुँचा।

इसके बाद उसके परिजनों ने उसकी तलाश चालू की। परिजनों ने जब इस विषय में स्कूल के प्रधानाध्यापक से बात की तो उन्होंने दावा किया कि बच्चा स्कूल पहुँचा ही नहीं था। परिजनों ने इस मामले में जब बच्चे को स्कूल ले जाने वाले वैन ड्राइवर से बात की तो उसने स्पष्ट किया कि बच्चा स्कूल पहुँचा था।

इसके बाद परिजनों ने स्कूल के सभी CCTV कैमरे की जाँच की। कैमरे में बच्चा 11:49 बजे तक दिखा। परिजनों ने आरोप लगाया कि इसके बाद बच्चा स्कूल में नहीं दिखा और कैमरे से भी छेड़छाड़ की गई। कैमरे ने 10 मिनट की फुटेज गायब बताई गई। परिजनों ने जब बच्चे की तलाश की तो वह सीवर वाले कमरे में सुबह 3 बजे मिला।

स्कूल में छात्र का शव मिलने के बाद भीड़ बेकाबू हो गई और उसने स्कूल में आग लगा दी। गुस्साई भीड़ ने स्कूल में तोड़फोड़ की और प्रधानाध्यापक के चेम्बर को भी आग के हवाले कर दिया। मौके पर पुलिस और प्रशासन भी पहुँचा। बच्चे को शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है। पूरे मामले में प्रधानाध्यापक का असहयोग लोगों को गुस्सा कर गया।

इस मामले में पटना के एसपी चन्द्र प्रकाश दुबे ने बताया, “बच्चे की छुट्टी के 2 घंटे के बाद परिवार को बताया गया। इस बात की जाँच की जाएगी कि बच्चे के साथ क्या किया गया। हमें इस विषय में रात में जानकरी हुई है। हमारी टीम ने यहाँ से सबूत इकट्ठा किए हैं। CCTV की जाँच में पाया गया कि बच्चा एक तरफ जाता है लेकिन लौटता नहीं है। बच्चे का शव जहाँ छुपाया गया था, वहाँ से उसे निकाल कर आगे की कार्रवाई की जा रही है। मामले में FIR दर्ज कर ली गई है।”

पुलिस ने कहा है कि वह इसे हत्या का मामला मान कर जाँच कर रही है। उन्होंने कहा कि शव को छुपाना आपराधिक मंशा को दर्शाता है। पुलिस ने कहा है कि कुछ लोगों को इस मामले में हिरासत में लिया गया है और पूछताछ जारी है।

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‘हम अछूत हैं इसलिए…’: स्विट्जरलैंड से आया एक दलित, 91 दिन राहुल गाँधी के साथ रहा, फिर समझ आया कॉन्ग्रेस को किसी के जीने-मरने से फर्क नहीं पड़ता

कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी की न्याय यात्रा में सामान्य लोगों के साथ कैसा व्यवहार हो रहा था इसकी जानकारी हाल में यात्रा में शामिल नितिन परमार नाम के दलित व्यक्ति ने दी। उन्होंने ऑर्गनाइजर को दिए इंटरव्यू में बताया कि वो कॉन्ग्रेस की न्याय यात्रा में शामिल होने स्विटजरलैंड से आए थे लेकिन 91 दिन यात्रा में साथ रहने के बाद उन्हें समझ आया कि कॉन्ग्रेस को किसी के जीने-मरने से कोई फर्क नहीं पड़ता।

उन्होंने बताया कि इस यात्रा में सामान्य लोगों के साथ भेदभाव होता था। कॉन्ग्रेस नेता से लेकर कार्यकर्ता तक सब तैश में रहते थे। वीआईपी लोगों के लिए फाइव स्टार जैसा प्रबंध होता है। वहीं यात्रा में शामिल हो रहे सामान्य लोगों को पता भी नहीं होता वो कहाँ रहेंगे क्या खाएँगे।

नितिन ने अपना एक अनुभव साझा करते हुए बताया कि जब यात्रा पंजाब पहुँची तो वहाँ मंच पर उन लड़कियों और महिलाओं को डांस करने के लिए बुलाया गया जिन्होंने सेलिब्रिटियों की तरह कपड़े पहने हुए थे। नितिन के अनुसार, उन्हें इस दौरान वहाँ एंट्री तक नहीं मिली थ इसलिए वो ये नहीं कह सकते कि डांस के समय राहुल गाँधी थे या नहीं।

नितिन अपना दुख साझा करते हुए कहते हैं, “हम अछूत हैं, झोपड़ी से आते हैं, इसलिए हमें उन्होंने सिर्फ भीड़ की तरह इस्तेमाल किया। वो हमें निर्देश देते थे- साथ में आओ, रैली में शामिल हो और रैली के बाद वो ऐसा करते थे जैसे हम लोग कौन हैं, कहाँ से आ गए हैं… हमें इन सबकी आदत है।” नितिन परमार ने कहा कि जनता की भावनाओं का ऐसा दुरुपयोग ब्रिटिश काल में होता होगा जहाँ जनता को भीड़ बनाकर इस्तेमाल किया जाता था और भीड़ के बाद उन्हें तितर-बितर कर दिया जाता था।

बता दें कि राहुल गाँधी की भारत जोड़ो न्याय यात्रा 23 अगस्त 2022 को शुरू हुई थी, जो 12 राज्य और दो केंद्र शासित प्रदेशों से होते हुए गुजरी। इसी यात्रा के लिए नितिन परमार स्विट्जरलैंड से अपना बिजनेस और काम छोड़कर आए, लेकिन यहाँ उनके साथ जो हुआ उसने उनकी उम्मीदों को तार-तार कर दिया। परमार बताते हैं कि शुरू में वह यूट्यूबरों की बातें सुन प्रभावित हुए। ध्रुव राठी समेत अन्य यूट्यूबर कहते थे कि कॉन्ग्रेस मोदी शासन के तहत लड़खड़ा जाएगा। ऐसे में वो राहुल गाँधी की ओर आकर्षित हो गए। न्याय यात्रा हुई तो उम्मीदें बढ़ गईं और इसीलिए वह भारत आ गए। लेकिन यहाँ आने के बाद वह ब्यूरोक्टे्स के चक्कर में पँस गए। तेलंगाना और कर्नाटक में कॉर्डिनेटर्स ने उन्हें यात्रा में शामिल होने पर साफ साफ कुछ नहीं बताया। बाद में उन्हें महाराष्ट्र में जाकर इस यात्रा में प्रवेश मिला।

नितिन परमार के अनुसार, यात्रा में शामिल होने के बाद उन्हें दिक्कतों का सामना करना पड़ा। न रहने की व्यवस्था पता चल रही थी न खाने-पीने की। भाषायी अंतर की वजह से कोई उनसे पूछ भी नहीं था। इसके अलावा वॉशरूम की स्थिति भी खराब थी। परमार के अनुसार इस 91 दिन की यात्रा में उनके 2 लाख से ज्यादा रुपए खर्च हुए लेकिन उन्हें इसका गम नहीं है। उनके लिए असली मुद्दा सम्मान का था जो उन्हें इस यात्रा में नहीं हुआ।

उन्होंने यह भी शिकायत की कि राहुल गाँधी कभी आम जनता से नहीं मिलने आते थे। जब उन्होंने खुद मिलने की इच्छा जताई तो उनसे पैसे माँगे गए। हर राज्य में ये दर अलग अलग थी। कहीं 20 हजार रुपए माँगे जा रहे थे, कहीं 10 हजार और कहीं तो 35 हजार रुपए भी। यात्रा के दौरान कैंप में दो खेमे थे। वीआईपी के लिए स्टैंडर्ड व्यवस्था थी, वहीं आमजन को पकाने के लिए भी घटिया तेल दिया जाता था। परमार ने यहाँ तक बताया कि राजस्थान के दौसान गाँव में तो वो एक बार बेहोश तक हो गए थे, उन्हें अस्पताल में भर्ती भी किया गया, मगर जब वो वापस कैंप पहुँचे तो किसी ने उनके स्वास्थ्य के बारे में भी नहीं पूछा।