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‘पाकिस्तान में हिंदू बच्चियों को किडनैप कर जबरन कबूल कराया जाता है इस्लाम, डर में कटता है जीवन’: CAA के तहत नागरिकता पाने वालों ने सुनाई आपबीती, कहा- PM मोदी ने दी नई जिंदगी

भारत सरकार ने नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के तहत एक साथ 350 लोगों को भारत की नागरिकता दे दी है। इनमें से 14 लोगों को गृह मंत्रालय ने बुलाकर नागरिकता के पत्र सौंपे, तो बाकियों को सारे कागजात ऑनलाइन उपलब्ध कराए गए। भारत की नागरिकता पाए लोगों में अधिकाँश लोग पाकिस्तान से आए हिंदू अल्पसंख्यक हैं, जो अपनी जान बचाकर पाकिस्तान से भागे थे। इन्हीं 350 लोगों में से एक भावना भी हैं, जो पाकिस्तान से भाग कर आई थीं। वो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह को धन्यवाद देती हैं और कहती हैं कि उनकी वजह से उन लोगों को नई जिंदगी मिली।

दिल्ली के आदर्श नगर में रह रहीं भावना ने कहा, “वहाँ हमें बहुत मुश्किलें झेलनी पड़ती हैं। लड़कियाँ पढ़ नहीं सकतीं और घरों से बाहर निकलना मुश्किल होता है। मुस्लिम हिंदू लड़कियों को किडनैप कर लेते हैं और उन्हें जबरन इस्लाम कबूल करवाया जाता है। लड़कियों को इतना खौफ रहता है कि वे घरों से बाहर नहीं निकलतीं। मैं काफी छोटी थी, तब से ही यहाँ हूँ। मुझे तो पाकिस्तान के अपने घर के अलावा ज्यादा कुछ याद नहीं है। इसकी वजह यह थी कि घर से बाहर ही नहीं निकलते थे। अब भी हमारे तमाम रिश्तेदार वहाँ हैं, जो भारत आना चाहते हैं। लेकिन उन्हें वीजा पाने में मुश्किल हो रही है।”पाकिस्तान से उत्पीड़न का शिकार होकर आए हिंदू परिवार की बेटी ने कहा कि हम अपने देश में लौटकर खुश हैं।

भावना ने कहा कि पीएम नरेंद्र मोदी ने हम लोगों की मदद की। हम पीएम मोदी और अमित शाह को धन्यवाद देते हैं। भावना कहा, ‘मैं एक टीचर बनना चाहती हूं और यहाँ की महिलाओं को पढ़ाना चाहती हूँ।’

दिल्ली के मजनूँ का टीला में रहने वाली मीरा को भी भारत की नागरिकता मिल गई है। सीएए के माध्यम से नागरिकता मिलने के बाद मीरा ने कहा, “हमने 3-4 साल पहले नागरिकता के लिए आवेदन किया था। हमें आए हुए 8-9 साल हो गए थे जब यह घोषणा की गई थी कि हमें नागरिकता मिलेगी। हमने अपनी पोती का नाम भी ‘नागरिकता’ रखा है। कल जब हमें नागरिकता मिली तो हमने भगवान कृष्ण को मिठाइयाँ अर्पित कीं और विशेष भोजन तैयार किया।”

दिल्ली में रहने वाले शीतल दास 5 अक्टूबर 2013 को पाकिस्तान छोड़कर दिल्ली पहुँचे थे। तब से वो यहीं पर हैं। शीतल दास ने कहा, “हमने पिछले महीने ही नागरिकता के लिए अप्लाई किया था और 15 मई को हमें नागरिकता मिल गई। अब हम सामान्य जीवन जी सकेंगे। काम कर सकेंगे और बच्चों को पढ़ा लिखा सकेंगे। अब हमारे बच्चों का भविष्य भी सुधर जाएगा।”

यशोधरा नाम की महिला ने कहा, “हम 2013 में आए, लेकिन हमारे पास पानी और बिजली की सुविधा तक नहीं थी। हमनें नागरिकता के लिए काफी कोशिश की, लेकिन अब जाकर मिली है। हमारा तो जो हुआ, वो हुआ, हमारे बच्चों का भविष्य संवर जाएगा। हम बहुत खुश हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी को बहुत शुक्रिया, अब हमारे बच्चे भी पढ़ लिख पाएँगे और अपना भविष्य संवार पाएँगे। हम पाकिस्तानी कहे जाते थे, लेकिन अब हमें कोई पाकिस्तानी नहीं कहेगा। अब हम हिंदुस्तानी हो गए हैं।”

अमृता नाम की बच्ची ने कहा, “हम 2013 में पाकिस्तान से आए थे। न बिजली की सुविधा थी और न ही स्कूल की। अब दोनों सुविधाएँ मिलेंगी। मैं बड़ी होकर डॉक्टर बनना चाहती हूँ।”

गौरतलब है कि भारत सरकार ने नागरिकता संसोधन विधेयक को 2019 में ही पारित कर दिया था और इस साल मार्च से इसे कानून के तौर पर लागू कर दिया। सीएए के तहत पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से धार्मिक उत्पीड़न का शिकार होकर आए अल्पसंख्यकों को नागरिकता दी जानी है। इन अल्पसंख्यकों में हिंदू, ईसाई, सिख, पारसी, जैन और बौद्ध धर्म के लोग हैं। सरकार ने इस साल मार्च में इस कानून को लागू करते समय इसके प्रावधानों के बारे में भी बताया था।

चुनाव देख ‘इच्छाधारी आंदोलनजीवी’ ने बदला चोला, ‘राजनीतिक विश्लेषक’ बन BJP को बताया बहुमत से दूर: 2019 में योगेंद्र यादव का सारा गुणा-भाग रहा था फेल

देश में लोकसभा चुनावों का माहौल है। हर चुनाव की तरह खुद को राजनीतिक पंडित और चुनावी विशेषज्ञ बताने वाले पेशेवर प्रदर्शनकारी योगेन्द्र यादव अपने अनुमानों के साथ वापस आ गए हैं। जिस तरह कोई भी उनके रवैये से इस बात का अंदाजा लगा सकता है, उन्होंने इस चुनाव में भाजपा के नेतृत्व वाले NDA के बहुमत ना पाने की एक भविष्यवाणी कर दी है।

योगेन्द्र यादव ने इसके लिए अपने यूट्यूब चैनल पर एक वीडियो डाला है। योगेन्द्र यादव का दावा है कि मीडिया वर्तमान में फैक्ट दबा रही है। उनका कहना है कि भाजपा को 2024 लोकसभा चुनावों में बहुमत नहीं मिलेगा। योगेन्द्र यादव ने कह़ा, “35 साल से चुनाव देखने के अपने अनुभव के आधार पर बता रहा हूँ कि भाजपा बहुमत नहीं ला रही। भाजपा 272 से बहुत नीचे है। भाजपा सहयोगियों के साथ NDA भी बहुमत के आँकड़े से नीचे हो सकता है।”

इसके बाद योगेन्द्र यादव ने अपने हिसाब एक गणित बताना चालू किया। योगेन्द्र यादव ने बताया कि कर्नाटक में भाजपा को इस बार कम से कम 10 सीटों का नुकसान होगा। महाराष्ट्र में भी 20 सीट के नुकसान का आकलन योगेन्द्र यादव ने भाजपा के लिए बताया। इसके बाद उन्होंने गुजरात और राजस्थान में भी 10 सीट भाजपा के लिए बताया। हरियाणा, पंजाब, चंडीगढ़ और हिमाचल प्रदेश तथा दिल्ली में भाजपा को 10 सीट का नुकसान होगा।”

योगेन्द्र यादव ने इसके बाद और भी कई राज्यों की गणित समझाई। योगेन्द्र यादव ने दावा किया कि मध्य प्रदेश, छतीसगढ़ और झारखंड में भी भाजपा को 10 सीटों का नुकसान होगा। उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में भी भाजपा को 15 सीटों का नुकसान होने का दावा किया। इसके बाद उन्होंने कई राज्यों का ब्यौरा दिया। आखिर में गुणा भाग करके योगेन्द्र यादव ने समझाया कि भाजपा इस बार कम से कम 75 सीट हारेगी और NDA 100 सीट हारेगा।

इसी हवा हवाई गणित के आधार पर योगेन्द्र यादव ने कहा कि भाजपा को 233 जबकि उनके सहयोगियों को 35 सीट मिलेगी। ऐसे में अंत में उन्होंने अपनी बात सिद्ध की कि भाजपा और NDA 272 के आँकड़े से नीचे रह जाएँगे।

योगेन्द्र यादव ने यह पूरी गणित समझा दी लेकिन इसका स्रोत क्या है यह नहीं बताया। उनका कहना था कि मैं कहता हूँ तो मान ही लो। क्या पता सच ही हो जाए। साल के चार महीने प्रदर्शनों के लिए देने वाले योगेन्द्र यादव की इस गणित में ना किसी सर्वे का हवाला था और ना ही और कोई विश्वसनीय स्रोत। हालाँकि, यह कोई नई बात नहीं है कि योगेन्द्र यादव ऐसे बेसिरपैर के सर्वे देते हों, इसे पहले 2019 के लोकसभा चुनाव में भी वह मुँह की खा चुके हैं।

2019 में भी फेल हो चुके योगेन्द्र यादव

भाजपा के लिए सीटों के नुकसान की बात यादव 2019 लोकसभा चुनावों में भी कर चुके हैं। तब यादव ने विशेष प्रकार की गणित बैठा कर बताया था कि भाजपा 100 सीट हारने वाली है। उनका दावा था कि पीएम मोदी की लोकप्रियता घट रही है। उन्होंने यह भी बताया था कि यह एकदम स्पष्ट बात है। उन्होंने दावा किया था कि 2004 के चुनाव की तरह ही भाजपा 2019 में हार जाएगी। इसके लिए उन्होंने बताया था कि 2004 में भी भाजपा सत्ता में अच्छी लहर के बावजूद नहीं लौट सकी थी, और यह फिर होगा।

योगेन्द्र यादव ने तब एक लेख में बताया था कि भले ही पीएम मोदी की रेटिंग ज्यादा हो लेकिन वह हार सकते हैं। इसके बाद 303 सीट जब भाजपा ने 2019 में जीत ली तो योगेन्द्र यादव खीज गए। उन्होंने एक बातचीत में वोटरों का गला पकड़ कर उन्हें मूर्ख कहने की बात कही थी।

एक बातचीत में योगेन्द्र यादव ने कहा था, ” अपने निर्वाचन क्षेत्र गुरुग्राम में मैंने लोगों से यह सुनिश्चित करने के लिए एक विशेष अपील की थी कि भाजपा को किसी भी कीमत पर हराया जाए। मैंने कहा था कि यह प्रधानमंत्री हमारे देश के इतिहास में अब तक का सबसे बड़ा झूठाप्रधान मंत्री है। मतदाताओं ने मेरी एक भी बात नहीं सुनी। मैं दुखी हूँ, मैं गुस्सा हूँ और मैं निराश हूँ। मैं उनका कॉलर पकड़कर कहना चाहता हूँ, बेवकूफों।”

गुजरात चुनाव में भी गलत हुआ अनुमान

2017 के गुजरात विधानसभा चुनाव में भी योगेन्द्र यादव ने ऐसा ही अनुमान लगाया था। भाजपा का गढ़ कहे जाने वाले गुजरात को लेकर यादव का अनुमान था कि यहाँ भाजपा हार जाएगी। योगेन्द्र यादव ने दावा किया था कि चुनावी विशेषज्ञ असल सच्चाई जनता को नहीं बता रहे। उनका दावा था कि 2017 गुजरात विधानसभा चुनाव में कॉन्ग्रेस को 113 सीट मिलेगी और वह सरकार बनाएगी। हालाँकि, नतीजों में भाजपा को 99 और कॉन्ग्रेस को 77 सीट मिली।

इसके बाद योगेन्द्र यादव ने माफ़ी माँग ली। योगेन्द्र यादव ने अपनी माफ़ी में लिखा था, “मैं माफ़ी माँगता हूँ, मेरा चुनाव अनुमान गलत था, पहले अनुमान से 3% वोट खिसक गया। मैंने कोई मन की बात नहीं कही थी ना कोई प्रचार किया था। मैंने डेटा, जमीनी रिपोर्ट और जनमत सर्वेक्षणों पर भरोसा किया था। फिर भी मैं गलत था। EVM को दोष देना मूर्खता होगी। गलती स्वीकार करने और सीखने की जरूरत है।”

योगेन्द्र यादव को भी भाजपा और पीएम मोदी करके मजा आता है। लेकिन सबसे अधिक हास्यास्पद बात यह है कि भाजपा जैसी जिताऊ चुनावी मशीन पर प्रश्न खड़े करने वाले योगेन्द्र यादव 2014 में गुरुग्राम से AAP से चुनाव लड़े थे। इसमें उनकी जमानत तक जब्त हो गई थी। इसके एक वर्ष बाद उन्हें पार्टी से भी निकाल फेंका गया था। इसके बाद वह फिर से फर्जी अनुमान लगाने के धंधे में उतर गए।

चाहे वह CAA प्रदर्शन हो, किसानों का विरोध प्रदर्शन हो या कॉन्ग्रेस नेता राहुल गांधी की विवादास्पद भारत जोड़ो यात्रा में शामिल होना हो, योगेन्द्र यादव हर उस काम में शामिल हैं, जो पीएम मोदी को सत्ता से हटाने के लिए हो रहा है। हालाँकि, उनके अब तक के प्रयासों से हार के अलावा उन्हें कुछ नहीं मिला है यही आगे होने की संभावना है।

‘घर आए TMC के गुंडे, हाथ-पैर बाँधकर ले गए’: बोली संदेशखाली की पीड़िता- गुनहगारों के पक्ष में गवाही देने का डाल रहे दबाव, BJP ने शेयर किया वीडियो

पश्चिम बंगाल के संदेशखाली में डर और हिंसा का माहौल है। टीएमसी के ताकतवर नेता शाहजहाँ शेख और उसके गुंडों के अत्याचारों की नित नई कहानियाँ सामने आ रही हैं, जिन्होंने लोगों को हिलाकर रख दिया है। इस पूरे मामले में अब टीएमसी के गुंडे फिर से सक्रिय हो गए हैं और शेख शाहजहाँ और उसके गुर्गों के अत्याचारों को बयाँ करने वाली महिलाओं, पीड़ितों को पीट रहे हैं, धमका रहे हैं, ताकि शाहजहाँ शेख के खिलाफ कोई गवाही न दे और वो छूट जाए।

गुरुवार (16 मई 2024) को पश्चिम बंगाल बीजेपी ने एक नया वीडियो क्लिप जारी किया है, जिसमें संदेशखाली में पीड़ितों को चुप कराने की टीएमसी के गुंडों और कार्यकर्ताओं की जबरदस्ती के बारे में पीड़ित ने बताया है। बीजेपी ने दावा किया है कि वीडियो में दिख रही महिला का नाम अन्वेषा मंडल है, जो संदेशखाली में हिंदू महिलाओं के यौन उत्पीड़न के खिलाफ बोलने वालों में सबसे आगे रही हैं। 1.01 मिनट के वीडियो में अन्वेषा मंडल ने बताया है कि कैसे टीएमसी के गुंडों ने उनका अपहरण किया और उन्हें जान से मारने की कोशिश की।

वीडियो में अन्वेषा मंडल ने कहा, “टीएमसी के धमकी दी है कि अगर वो संदेशखाली के अपराधियों को बचाने के लिए उनके पक्ष में गवाही नहीं देंगी, तो उन्हें जान से मार दिया जाएगा।” अन्वेषा मंडल ने कहा कि उन पर प्रेशर डाला जा रहा है कि उन्हें कोर्ट में टीएमसी के नेताओं के खिलाफ लगे आरोपों के खिलाफ बयान देना है। उन्हें कोर्ट में बताना है कि टीएमसी के नेताओं शेख शाहजहाँ और उसके आदमियों खासकर दिलीप मलिक पर लगे आरोप झूठ हैं। ऐसा करने से मना करने पर उन्हें जान से मारने की कोशिश की गई।

अन्वेषा मंडल ने कहा, “मैंने अपने नाम की आवाज सुनी और ये देखने के लिए बाहर आई कि मुझे कौन बला रहा है। तभी टीएमसी के गुंडों ने हमला कर दिया और मेरा मुँह बाँध दिया और मुझे अपने साथ ले गए।” मंडल ने बताया कि टीएमसी के बदमाशों ने उनका हाथ-पैर बाँध दिया और तालाब में फेंक दिया। टीएमसी के गुंडों ने कहा कि अगर उनकी बात नहीं मानी गई, तो वो उन्हें जान से मार देंगे। वो वहीं पर पड़ी रही। जब गुंडे उन्हें ले जा रहे थे, तभी उनकी बेटी चिल्लाने लगी। इसके बाद पड़ोसियों ने उन्हें ढूँढना शुरू किया, लेकिन टीएमसी के गुंडों ने उन्हें तालाब में फेंक दिया और फरार हो गए।

पश्चिम बंगाल बीजेपी ने इस क्लिप को शेयर करते हुए लिखा, “संदेशखाली में टीएमसी के अत्याचारों के खिलाफ आवाज उठाने वाली अन्वेषा मंडल अपहरण की कोशिश से बाल-बाल बच गई। प्रियंका टिबरेवाल की संदेशखाली यात्रा से टीएमसी के लोग बौखला गए हैं, जिसके बाद टीएमसी एक्सपोज हो गई। दिलीप मलिक के नेतृत्व में टीएमसी के गुंडों ने अन्वेषा को मार कर उनकी आवाज को दबा देने की कोशिश की। टीएमसी के गुंडों की इस जबरदस्ती की नीति से पता चलता है कि टीएमसी की सरकार लोगों का उत्पीड़न कर रही है। संदेशखाली न्याय की माँग कर रहा है। टीएमसी के आतंक का राज खत्म होना चाहिए।”

इसी क्लिप को बीजेपी नेता और वकील प्रियंका टिबरेवाल ने भी शेयर किया। उन्होंने संदेशखाली में पीड़ितों से मुलाकात की थी। उन्होंने लिखा, “आज (15 मई 2024) मैं संदेशखाली गई थी, जहाँ टीएमसी के गुंडे लोगों को धमका रहे हैं कि वो शेख शाहजहाँ को निर्दोष साबित करें। इसमें से एक महिला अन्वेषा मंडल भी थी, जिन्होंने मुझे दिलीप मलिक के अत्याचारों के बारे में बताया, जिसके कुछ दिन पहले एक महिला को अगवा कर लिया था। उनकी शिकायत के बाद आज शाम (15 मई 2024) को टीएमसी के गुंडों ने उन्हें अगवा कर लिया और उनके हाथ-पाँव बाँधकर तालाब के किनारे फेंक दिया, ताकि उनकी जान चली जाए। हमने उन्हें पुलिस स्टेशन तक पहुँचाया।”

बता दें कि बीजेपी नेता और वकील प्रियंका टिबरेवाल ने 15 मई 2024 को संदेशखाली का दौरा किया था। अन्वेषा मलिक ने टीएमसी नेता दिलीप मलिक द्वारा हिंदू महिलाओं के यौन उत्पीड़न के बारे में पूरी जानकारी दी थी। बीजेपी नेता प्रियंका उनके साथ शिकायत दर्ज कराने पुलिस स्टेशन भी गई थी। इसी शिकायत के बाद टीएमसे गुंडों ने उन्हें उनके घर से अगवा कर लिया और दिलीप मलिक के साथ ही अत्याचारी टीएमसी नेताओं के पक्ष में गवाही देने के लिए धमकाया।

बता दें कि संदेशखाली विवाद पिछले कुछ महीनों के दौरान एक राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का रूप ले चुका है। एक तरफ बीजेपी ने पीड़ितों के कई पक्ष में सबूत सामने आए हैं, तो दूसरी तरफ टीएमसी लगातार संदेशखाली के पीड़ितों को गलत ठहराने की कोशिश कर रही है। टीएमसी दावा कर रही है कि संदेशखाली मामले को बीजेपी ने सिर्फ पश्चिम बंगाल को बदनाम करने के लिए उठाया है और वो लोकसभा चुनाव में इसका फायदा उठाने की कोशिश कर रही है।

कहीं फटा बम, कहीं भेड़-बकरियों की तरह ठूँसे बच्चे, कहीं यौन शोषण कर रहा मौलवी… ये कौन सा ‘दीनी तालीम’ दे रहे मदरसे, कौन करेगा इसकी सफाई

बिहार के छपरा के मोतिराजपुर गाँव में स्थित एक मदरसे में बम ब्लास्ट हो गया। छानबीन हुई तो पता चला कि एक छात्र मदरसे के पीछे मिले बम को गेंद समझकर मदरसे में उठा लाया और फिर खेलने लगा। मौलाना ने देखा तो उसे बाहर फेंकना चाहा लेकिन तब तक बम फट गया था। घटना में मौलाना और छात्र दोनों गंभीर रूप से घायल है।

पुलिस मामले की छानबीन कर रही है। पता लगाया जा रहा है कि आखिर ये बम आए कहाँ से? शुरुआती जाँच में तो इसे पटाखे फैक्ट्री का बम बता दिया गया लेकिन इससे बात खत्म नहीं होती। समाचारों में मदरसों को लेकर जो खबरें आना शुरू हुई हैं वो सवाल खड़ा करती हैं कि आखिर दीनी तालीम के नाम पर मदरसों में चल क्या रहा है। कहीं से यौन उत्पीड़न की खबरें आती हैं, कहीं से शारीरिक शोषण, क्रूरता की तो कहीं से कट्टरपंथ के पाठ की।

ज्यादा दिन नहीं बीते राजस्थान के अजमेर में 5 छात्रों ने इमाम को डंडे से पीट-पीटकर और रस्सी से गला घोंटकर मार डाला था। जब मामला खुला तो चौंकाने वाली बात सामने आई। छात्रों ने बताया कि इमाम के यौन उत्पीड़न से तंग आकर ये हत्या उन लोगों ने ही की। ये छात्र उस इमाम से इतने परेशान थे कि इन्होंने बकायदा साजिश रचकर उसको जान से खत्म किया। इसी तरह असम के सलमारा जिले में एक मदरसे के अंदर नाबालिग लड़के से यौन उत्पीड़न की घटना 9 मई को खुली थी। आरोपित मदरसे का मौलाना अखिरुल इस्लाम ही था। इस मौलाना ने बच्चे की मारपीट करके हालत ऐसी कर दी थी कि वो क्लास में जाने से डरता था।

पाकिस्तान से लेकर बांग्लादेश तक से मदरसों पर आती हैं खबर

ये 2-3 मामले वो हाल के मामले हैं जो पिछले एक हफ्ते में आए… महीनों का आँकड़ा देखें या फिर सालों की बात करें तो मदरसों में हो रहे कुकर्म की खबरों की गिनती आपको हमेशा बढ़ती हुई ही मिलेगी। मामले जिले, राज्य या किसी प्रदेश तक सीमित नहीं हैं। इस्लामी मुल्कों में भी मदरसों के यही हाल हैं।

कहीं से वीडियो आती है कि छोटे बच्चों को निर्ममता से पीटा जा रहा है, कहीं पता चलता कि क्लास के बीच में छात्राओं के साथ छेड़खानी होती है। किसी को मार्क्स देने के नाम पर परेशान किया जाता है तो किसी के मुँह में जबरन कपड़े ठूँस कर उसके साथ रेप होता है। अफ्रीका से तो एक बार ऐसी खबर भी आई थी कि वहाँ मदरसों में पढ़ने वालों से गरीब बच्चों से मौलवी भीख मँगवाने लगे थे

इसी तरह पाकिस्तान की बात करें तो वहाँ भी मदरसों में बच्चों का यौन शोषण होता है, लेकिन उसके साथ वहाँ उन्हें ऐसी तालीम मिलती है कि वो आतंकी संगठन में शामिल होने से कोई गुरेज नहीं करते। पाकिस्तान का दारुल उलूम हक़्क़ानिया ऐसा ही एक मदरसा है जिससे पढ़कर निकले लोग तालिबान जैसे संगठनों में शामिल होकर कट्टरपंथ के रास्ते पर चल पड़ते करने लगते हैं। बांग्लादेश में भी मदरसों की ऐसी कई कहानियाँ हैं।

मीडिया में मौजूद कुछ खबरें तो यहाँ तक बताती हैं कि पाकिस्तान अपने आतंक का एजेंडा भारत में मदरसों के जरिए पूरा करने में लगा है…। हम इन खबरों को एक बार झुठलाने की अगर सोचें भी तो पिछले सालों में ऐसे तमाम उदाहरण सामने आ गए हैं जो बताते हैं आतंकी अपने टेरर मॉड्यूल को मदरसे के बहाने ही जमीन पर उतारना चाहते हैं।

असम में टेरर मॉड्यूल का भंडाफोड़

साल 2022 में असम में जो टेरर मॉड्यूल का भंडाफोड़ हुआ था वो याद करें तो पता चलता है कि कट्टरपंथियों की कितनी गहरी साजिश चल रही है। असम पुलिस ने उस समय कई आतंकियों को गिरफ्तार किया था और जिन मदरसों से इसके संबंध मिले थे उनपर हिमंता सरकार ने बुलडोजर चलवा दिया था। उन्होंने साफ-साफ ऐलान किया था कि अगर उन्हें पता चला कि किसी मदरसे में अवैध गतिविधियाँ चल रही हैं, देश विरोधी तालीम दी जा रही हैं तो तुरंत वो मदरसे को गिरवा देंगे। इसके बाद असम में 1281 के करीब मदरसे बंद हुए थे। सरकार ने फैसला लिया था कि प्रदेश में दीनी तालीम की जगह आधुनिक शिक्षा दी जाएगी जिससे बच्चे भविष्य में कुछ अच्छा कर सकें।

यूपी में एक्शन

इसके अलावा उत्तर प्रदेश की योगी सरकार भी लगातार कट्टरपंथ से लड़ने में प्रयासरत है, लेकिन उनके लिए ये काम इतना आसान नहीं है। मदरसों को फलने-फूलने के लिए खाद-पानी यूपी की पहले की सरकारों ने ही दिया। जब योगी सरकार आई तो अवैध रूप से चल रहे मदरसों पर शिकंजा कसना शुरू हुआ। योगी सरकार ने जाँच करवाई तो पता चला कि हजारों की संख्या में न केवल अवैध मदरसे चलाए जा रहे हैं बल्कि सीमाओं पर अचानक इनकी गिनती बढ़ी है। सरकार के पास जब इनकी रिपोर्ट पहुँची तो वह इस पर सख्त हुए। करीब 16000 मदरसों पर एक्शन लिया गया। इसके बाद एक खबर यह भी आई कि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भी याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य मदरसा बोर्ड एक्ट को असंवैधानिक घोषित कर दिया है। हालाँकि बाद में जब ये मामला सुप्रीम कोर्ट में पहुँचा तो वहाँ उच्च न्यायालय के फैसले पर रोक लगा दी गई…।

दीनी तालीम के नाम पर बच्चे भेजे जा रहे मदरसों में

बता दें कि जिस तरह की तस्वीर पिछले कुछ समय में मदरसों की उभरकर आई है उससे यही पता चलता है कि ये आने वाले समय में कितना भयावह रूप ले सकते हैं। केवल राष्ट्रीय सुरक्षा की दृष्टि से ही नहीं सामाजिक दृष्टि से भी सवाल उठता है कि आखिर ऐसे संस्थानों का काज क्या होता है।

क्या मजहब के नाम पर बच्चों को दुनिया से पीछे कर देना मौलानाओं का काम है? या फिर उन्हें यौन उत्पीड़न का शिकार बनाकर उन्हें भीतर से तोड़ने का बीड़ा उन्होंने उठाया है? मदरसों में बम फटना या रेप होना या आतंकियों को पनाह मिलना कोई सामान्य घटना नहीं हैं… लेकिन इन सबकों लेकर अलग-अलग जगह के मदरसे बदनाम हुए हैं।

इनकी खबरें पढ़ने के बावजूद मजहब की बातें करने वाले कुछ कट्टरपंथी विचारधारा वाले अपने बच्चों को आधुनिक शिक्षा देने की बजाय मदरसों में जाने को मजबूर करते हैं और जब वो जाने से मना करते हैं तो उनके साथ मारपीट होती है।

कुछ दिन पहले एनसीपीआर अध्यक्ष ने भी मदरसों में जमा होती भीड़ की तस्वीर को दुनिया के आगे उजागर किया था। उन्होंने अपने ट्वीट में बताया था कि कैसे गरीब बच्चों को ला लाकर मदरसों में भरा जा रहा है। जहाँ न बुनियादी सुविधाएँ उन्हें मिलती हैं और न वो अच्छे से जीवन व्यतीत कर पाते हैं।

दादा क्यों हो रहे अधीर, न नौ मन तेल होगा न ‘दीदी’ नाचेगी: फिर काहे का अविश्वास, काहे का बाहर से समर्थन

एक कहावत है- ना नौ मन तेल होगा और ना राधा नाचेगी। यह कहावत पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री एवं सत्ताधारी पार्टी तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) की सुप्रीमो ममता बनर्जी के फैसले पर सटीक बैठती है। ममता बनर्जी ने कहा कि उनकी पार्टी केंद्र में सरकार बनाने के लिए विपक्षी इंडी (INDI) गुट को बाहर से समर्थन देगी।

इसके पहले ममता बनर्जी ने कुछ अलग हटकर बयान दिया था। उस दौरान उन्होंने कहा था, “पश्चिम बंगाल में कोई INDI गठबंधन नहीं है। मैंने विपक्षी INDI गठबंधन के गठन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। यहाँ तक कि गठबंधन का नाम भी मेरे द्वारा दिया गया था, लेकिन यहाँ पश्चिम बंगाल में सीपीआई (एम) और कॉन्ग्रेस भाजपा के लिए काम कर रहे हैं।”

इस बयान के कुछ ही सप्ताह बाद ममता बनर्जी का हृदय परिवर्तन हो गया और अब वह INDI गठबंधन की सरकार बनने की स्थिति में बाहर से समर्थन देने की बात करने लगी हैं। ममता बनर्जी को लगने लगा है कि INDI गठबंधन केंद्र में बना सकती है। हालाँकि, INDI गठबंधन के प्रमुख घटक कॉन्ग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी ने ममता बनर्जी की इस उम्मीद पर पानी फेर दिया है।

अधीर रंजन चौधरी ने कहा, “मैं उन पर भरोसा नहीं करता। वह गठबंधन तोड़ने वाली महिला हैं। अगर बीजेपी का पलड़ा भारी रहा तो उस तरफ भी जा सकती हैं। वह हिंदुस्तान से कॉन्ग्रेस खत्म करने की बात कर रही थीं। कह रही थीं कि 40 सीटें भी नहीं मिलेंगी। कॉन्ग्रेस खत्म हो चुकी है। अब दुहाई दे रही हैं, इसका मतलब कि INDI गठबंधन सत्ता में आ रही है। ये अभी से लाइन लगाना शुरू कर दीं।”

ममता बनर्जी दोनों तरफ ही संभावनाएँ तलाश रही हैं। उन्हें लग रहा है कि INDI गठबंधन शायद सत्ता में आ जाए तो उनके लिए सत्ता के दरवाजे खुले रखें। हालाँकि, अभी तक हुए मतदान में जो आँकड़े सामने आ रहे हैं, उसमें भाजपा को स्पष्ट बहुमत मिलता दिख रहा है। सिर्फ बहुमत ही नहीं ये आँकड़े 350 के पार जाती हुई भी दिखाई दे रही है। भाजपा अपनी जीत को लेकर पूरी तरह आश्वस्त है।

गृहमंत्री अमित शाह ने भी कहा है कि अब तक हुए चार चरण के मतदान में भाजपा को बहुमत मिल चुका है। अब सिर्फ 400 के आँकड़े की लड़ाई है। अमित शाह ने कहा, “चार चरणों तक 380 सीटों पर चुनाव पूरा हो चुका है। मैं बता रहा हूँ कि 380 सीटों में 270 सीटें लेकर पीएम मोदी बहुमत प्राप्त कर चुके हैं। आगे की लड़ाई 400 पार करने की है।”

इतना ही नहीं, संदेशखाली और अवैध बांग्लादेशी घुसपैठियों का मुद्दा पूरे देश का मुद्दा बन चुका है। इन मुद्दों पर भाजपा ने बंगाल में भी बढ़त बना ली है। ममता बनर्जी के कभी सलाहकार रहे चुनाव रणनीतिकार प्रशांत किशोर भी स्पष्ट कर चुके हैं कि इस बार भाजपा बंगाल में चौंकाएगी। उन्होंने कहा था कि भाजपा बंगाल की नंबर वन पार्टी बन सकती है।

बता दें कि पश्चिम बंगाल में लोकसभा की कुल 42 सीटें हैं। साल 2019 के लोकसभा चुनाव में 42 सीटों में से तृणमूल कॉन्ग्रेस को 22 सीटें मिली थीं। वहीं, भाजपा को 18 सीटें मिली थीं। कॉन्ग्रेस को महज दो सीटों पर संतोष करना पड़ा था। अब अमित शाह ने भी बंगाल की रैली में लोगों से कम से कम 30 सीटों की माँग की है। अगर भाजपा 25 के आँकड़े को पार कर जाए तो आश्चर्य नहीं होगा।

बंगाल में भाजपा को लाभ मिलने का सीधा नुकसान ममता बनर्जी को होगा। अगर भाजपा के दावे को हटा दें तो ममता बनर्जी के नाराज वोटरों का लाभ कॉन्ग्रेस या वामदलों को मिल सकता है। इस समय TMC के 22 सांसद हैं। अगर भाजपा या कॉन्ग्रेस को फायदा मिलता है तो TMC 10 सीटों तक भी सिमट सकती है। ऐसी स्थिति में ममता बनर्जी का राष्ट्रीय राजनीति में हैसियत बेहद कम रह जाएगी।

इसका दूसरा पक्ष INDI गठबंधन को लेकर है। INDI गठबंधन को विशेष फायदा भी मिलने की गुंजाइश नहीं है पीएम मोदी और भाजपा के विरोध में भले सारे दल एक साथ आ गए हों, लेकिन उनकी विचारधारा कहीं से भी आपस में नहीं मिल रही है। अंदर-अंदर एक दूसरे की टाँग खींचने की कवायद अभी भी जारी है।

आम आदमी पार्टी और कॉन्ग्रेस के बीच का ही उदाहरण लें तो दिल्ली में दोनों दल साथ लड़ रहे हैं, लेकिन पंजाब में दोनों पक्ष एक दूसरे का विरोधी है। ऐसी ही स्थिति कमोबेश कॉन्ग्रेस और समाजवादी पार्टी के भीतर गुटबाजी को लेकर भी है। लोकसभा चुनाव की प्रक्रिया जारी है, लेकिन INDI गठबंधन के दलों में आपसी तालमेल का घनघोर अभाव दिख रहा है।

ममता बनर्जी को भले लग रहो हो कि INDI गठबंधन सत्ता में आ सकता है, लेकिन राहुल गाँधी भी इतने आश्वस्त नहीं हैं। राहुल गाँधी इस बार खुद दो जगहों से चुनाव लड़ रहे हैं। अमेठी से हारने के बाद वे केरल के वायनाड से साल 2019 में सांसद बने। इस बार वे वायनाड के साथ-साथ यूपी के रायबरेली से नामांकन भरा है। इस बार वायनाड से भी उनकी हालत पतली बताई जा रही है।

कुल मिलाकर देश में जो माहौल है, वह पीएम मोदी की लोकप्रियता, भाजपा का विकास और देश का दुनिया में बढ़ता कद महत्वपूर्ण कारक बनकर उभरा है। जनता में भी भाजपा को लेकर भारी उत्साह है। इस उत्साह को देखकर ही भाजपा अपनी भारी जीत को लेकर आश्वस्त है। बाकी राजनीति में खेल कब और कैसे बिगड़ जाए कहा नहीं जा सकता है। ममता बनर्जी को अपनी महत्वाकांक्षा की हकीकत देखने के लिए अब ज्यादा इंतजार करने की जरूरत नहीं है।

‘मैं दाढ़ी रखता हूँ, जरा तो ख्याल करती’: मोबाइल पर फकीर के बेटे से बात करती थी 18 साल की सहनुमा, अब्बा शाहिद ने ही रेत दिया गला

उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में झूठी शान की खातिर शाहिद नाम के व्यक्ति ने अपनी 18 साल की बेटी की गला रेतकर हत्या कर दी। वो हत्या के बाद फरार हो गया था, लेकिन पुलिस आने के बाद वापस अपने घर पहुँचा और आराम से पुलिस वालों के सामने सरेंडर कर दिया। शाहिद ने पुलिस वालों के सामने अपनी बेटी की हत्या की बात स्वीकार की है। शाहिद की पुलिस वालों से बातचीत सोशल मीडिया पर भी वायरल हो रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, नई मंडी कोतवाली इलाके के कूकड़ा गाँव के रहने वाले शाहिद ने अपनी बेटी सहनुमा (18) की हत्या कर दी। सहनुमा का शव फर्श पर पड़ा देख परिजनों के होश उड़ गए। सहनुमा की बेरहमी से हत्या की गई थी। पुलिस ने छानबीन के बाद शव पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया।

पुलिस मौके पर पहुँचकर पूछताछ कर ही रही थी, तभी शाहिद अपने घर पहुँचा और पुलिस वालों के सामने बेटी की हत्या की बात कबूलते हुए आत्मसमर्पण कर दिया। लोगों के बीच खड़े आरोपित शाहिद ने कहा कि किसी का कोई कसूर नहीं है, मैने हत्या की है। बेटी को बार-बार इज्जत की दुहाई दे रहा था। मैं दाढ़ी रखता हूँ, जरा तो ख्याल करती। तीन दिन से बेटी लगातार मोबाइल पर बात कर रही थी।

शाहिद ने बताया कि वो पल्लेदारी का काम करता है। उसकी बेटी सहनुमा इस्सेपुर गाँव के फकीर के लड़के से बेटी बात करती थी। बेटी को उससे बात करने से मना किया गया था, लेकिन वो नहीं मानी। ऐसे में उसने उसकी हत्या कर दी।

मौके पर नई मंडी कोतवाली प्रभारी निरीक्षक बबलू कुमार अपनी टीम के साथ पहुँचे। उन्होंने मौका-मुआयना करते हुए जाँच पड़ताल की और शव को कब्जे लकर पंचनामा भरते हुए पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया। आरोपित शाहिद के 7 बच्चे थे, जिसमें 4 बेटे और 3 बेटियाँ थी। अब 6 बच्चे बचे हैं। एसपी सिटी सत्यनारायण प्रजापत ने कहा कि मृतका की माँ ने बताया है कि प्रेम प्रसंग चल रहा था। पुलिस तथ्य जुटा रही है, इसी के आधार पर कार्रवाई की जाएगी।

विपक्ष की छाती पर मूँग दलती रहेगी मोदी-योगी की जोड़ी, केजरीवाल ने चली थी जो चाल उसे PM ने किया फुस्स: पूर्वांचल से किया वादा, संदेश पूरे देश को

दिल्ली के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने गुरुवार (16 मई 2024) को एक बार फिर दावा किया कि अगर भाजपा फिर से सरकार में लौटी तो उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ को हटा दिया जाएगा। उन्होंने दावा किया कि केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के प्रधानमंत्री बनने की राह में अब केवल योगी आदित्यनाथ ही काँटा बचे हैं। हालाँकि, समय-समय पर पीएम मोदी द्वारा परोक्ष रूप से इसका खंडन किया गया है।

अरविंद केजरीवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस बार चुनाव में अमित शाह को पीएम बनाने के लिए लोगों से वोट माँग रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि पीएम मोदी अगले वर्ष 17 सितंबर को जैसे ही 75 वर्ष के हो जाएँगे, वे प्रधानमंत्री पद छोड़कर अमित शाह को पीएम बना देंगे। चुनाव जीतने के बाद दो से तीन महीने में योगी आदित्यनाथ को हटा दिया जाएगा। 

समाजवादी पार्टी के प्रदेश मुख्यालय में अखिलेश यादव के साथ प्रेस वार्ता करते हुए अरविंद केजरीवाल ने कहा कि अमित शाह को पीएम बनाने के लिए नरेंद्र मोदी पिछले डेढ़-दो वर्षों से लगे हुए हैं। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी ने शिवराज सिंह चौहान, वसुन्धरा राजे सिंधिया, देवेंद्र फडणवीस, रमन सिंह और मनोहर लाल खट्टर को पहले ही हटा दिया है। अब योगी उनकी राह में आखरी कांटा बचे हैं।

सीएम केजरीवाल ने यह भी कहा कि योगी आदित्यनाथ को हटाए जाने के मामले में भाजपा के किसी भी नेता ने पिछले चार दिनों में कोई भी जवाब नहीं दिया है। इससे साफ है कि चुनाव बाद भाजपा योगी आदित्यनाथ को मुख्यमंत्री पद से हटा देगी। उन्होंने कहा कि इससे साफ होता है कि वो जो कह रहे हैं वो सही है। यह पहला मौका है जब केजरीवाल अपना विजन बताने के बजाय सत्ताधारी दल के अंदरूनी मामले को लेकर राजनीति कर रहे हैं।

ये दूसरा मौका है, जब अरविंद केजरीवाल इस तरह का दावा कर रहे हैं। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट से अंतरिम जमानत पर बाहर आने के बाद उन्होंने जो पहला प्रेस कॉन्फ्रेंस किया था, उसमें भी उन्होंने यही दावा किया था। केजरीवाल ने यह दावा सोशल मीडिया यूजर से लेकर किया है। पिछले लगभग छह महीने से विपक्षी दलों से सहानुभूति रखने वाले X हैंडल यही दावा करते आ रहे हैं। यही दावा अब केजरीवाल ने भी करना शुरू कर दिया है।

इससे पहले गृहमंत्री अमित शाह ने साफ कर दिया था कि प्रधानमंत्री मोदी अपना कार्यकाल पूरा करेंगे और 2029 के बाद भी वे पार्टी का नेतृत्व करते रहेंगे। पीएम मोदी 75 वर्ष की आयु के बाद भी अपने पद पर बने रहेंगे। यानी स्पष्ट शब्दों में अमित शाह ने बता दिया था कि उनका प्रधानमंत्री बनने का अभी कोई इरादा नहीं है। वहीं, भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने भी साफ कर दिया था कि 75 साल के बाद रिटायरमेंट वाली बात पार्टी के संविधान में नहीं है।

ये सच है कि योगी आदित्यनाथ की लोकप्रियता सिर्फ उत्तर प्रदेश में ही नहीं, बल्कि पूरे देश में है। ना सिर्फ उनका हिंदूवादी स्वरूप लोगों को पसंद आता है, बल्कि स्पष्टवादिता और काम करने का अंदाज भी लोग खूब पसंद करते हैं। पीएम मोदी और सीएम योगी की लोकप्रियता और अमित शाह के चुनाव प्रबंधन के कारण भाजपा आज इस मुकाम पर है। यही कारण है कि देश के लोग सीएम योगी से भावनात्मक रूप से जुड़े हुए हैं।

सीएम योगी के साथ लोगों के इसी भावनात्मक जुड़ाव को ध्यान रखकर अरविंद केजरीवाल माइंडगेम खेल रहे हैं और जनता को ब्लैकमेल कर रहे हैं। जनता भी जानती है और भारतीय जनता पार्टी भी जानती है कि उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य को संभालना आसान नहीं है। सीएम योगी ने पिछले दो कार्यकाल से ना सिर्फ यूपी में कानून-व्यवस्था की स्थिति को मजबूत किया है, बल्कि लोगों के दिलों में अपनी जगह भी बनाई है।

अरविंद केजरीवाल अब अपनी पार्टी के विजन के बारे में बताने की जगह देश के दो सबसे लोकप्रिय नेताओं के बीच मतभेद को लेकर जनता में भ्रम पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं, ताकि जनता भाजपा से दूर हो जाए और विपक्षी दलों के साथ खड़ी हो जाए। हालाँकि, इसकी संभावना कम ही नजर आ रही है। दूसरी बात, सीएम केजरीवाल दावा कर रहे हैं कि उनके इस दावे पर भाजपा या उसके किसी बड़े नेता की ओर से कोई जवाब नहीं आया है।

अरविंद केजरीवाल का यह दावा भी गलत है। प्रधानमंत्री मोदी ने इस बात का खंडन परोक्ष रूप से किया है। जौनपुर की रैली में प्रधानमंत्री मोदी ने गुरुवार (16 मई) को साफ कर दिया कि अरविंद केजरीवाल और विपक्ष योगी आदित्यनाथ को लेकर जिस तरह का भ्रम फैला रहा है, वह सही नहीं है। पीएम मोदी ने कहा, “आने वाले पाँच सालों में मोदी-योगी पूर्वांचल की तस्वीर और तकदीर दोनों बदलने वाले हैं।”

अपने इस बयान से पीएम मोदी ने साफ कर दिया कि अगले पाँच साल तक योगी आदित्यनाथ मुख्यमंत्री बने रहेंगे। इससे पहले भी प्रधानमंत्री मोदी ने योगी आदित्यनाथ की तारीफ करके साफ संदेश दिया था कि विपक्ष के दावे झूठे हैं। इतना ही नहीं, भाजपा के स्टार प्रचारकों की लिस्ट में योगी आदित्यनाथ का होना भी उनके कद की ओर इशारा करता है।

पीएम मोदी ने सीएम योगी की जमकर तारीफ की थी। इसको लेकर आजतक के साथ बातचीत में पीएम मोदी ने कहा था, “मेरा सौभाग्य है कि मुझे हर राज्य में ऐसी टीम मिली है- चाहे विपक्ष में हो या सरकार में, चाहे मुख्यमंत्री हो या मंत्री, हर कोई सिद्धांतों और मूल्यों के साथ जी-जान से जुटे रहते हैं। मेरे लिए गर्व की बात है कि मेरे पास ऐसे सैकड़ों होनहार लोग हैं।”

अलीगढ़ की एक रैली में पीएम मोदी ने कहा, “मैं उन लोगों की आँखें खोलना चाहता हूँ, जो लोग योगी जी की पहचान सिर्फ बुलडोजर से करते हैं, मैं उनकी आँखें खोलना चाहता हूँ। योगी आदित्यनाथ का ‘एक जिला, एक उत्पाद’ मिशन देश में नया सम्मान पैदा कर रहा है।” उन्होंने आगे कहा था, “काशी के सांसद होने के नाते योगी जी हमारे भी माननीय मुख्यमंत्री हैं। इस पर मैं गर्व अनुभव करता हूँ।”

उन्होंने आगे कहा था, “एक समय में उत्तर प्रदेश में हमारी बहन-बेटियाँ घर घर से बाहर नहीं निकल पाती थीं। योगी जी की सर्वार्थ सरकार में अपराधियों की हिम्मत नहीं है कि वो नागरिकों का अमन-चैन बिगाड़े। आजादी के बाद यूपी में जितना औद्योगिक विकास नहीं हुआ, उससे अधिक अकेले योगी जी के कालखंड में हुआ। यूपी को विकास की नई ऊँचाइयों पर योगी जी की सरकार लेकर गई है।”

प्रधानमंत्री मोदी के ये बयान अरविंद केजरीवाल और विपक्षी दलों के सवालों का जवाब है। हालाँकि, अरविंद केजरीवाल इस चर्चा तक नहीं करते। वे सिर्फ और सिर्फ योगी जी की लोकप्रियता के आधार पर अपनी राजनीतिक रोटी सेंक रहे हैं। जो कोई भी पीएम मोदी के इन बयानों को सुना होगा, उन्हें पता होगा कि पीएम मोदी और भाजपा के लिए योगी आदित्यनाथ कितना जरूरी हैं।

भव्य राम मंदिर का काम हुआ पूर्ण, अब माता जानकी का बनाएँगे भव्य मंदिर: जानकी नवमी पर सीतामढ़ी की धरती से अमित शाह ने किया वादा

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बिहार के सीतामढ़ी में चुनावी रैली को संबोधित किया और बीजेपी उम्मीदवार के लिए वोट माँगे। गृहमंत्री ने विपक्ष के इंडी गठबंधन पर निशाना साधते हुए सीतामढ़ी के लोगों से कहा कि हम बीजेपी वाले वोट बैंक से नहीं डरते। पीएम मोदी ने अयोध्या में रामलला का मंदिर बना दिया है। अब जो काम बाकी है वह है माँ सीता की जन्मभूमि पर एक महान स्मारक, मंदिर बनाने का। उन्होंने कहा कि सीता माता के जीवन के अनुरूप स्मारक केवल नरेन्द्र मोदी जी और बीजेपी ही बना सकती है।

गृहमंत्नी ने जनसभा में कॉन्ग्रेस और आरजेडी पर जोरदार हमला बोला। उन्होंने कहा, “जिन्होंने खुद को राम मंदिर से दूर रखा, वे माता सीता का स्मारक नहीं बना सकते। अगर कोई माँ सीता के जीवन के त्याग समर्पण और आदर्श के अनुरूप कोई स्मारक बना सकता है, तो वह नरेंद्र मोदी और बीजेपी बना सकती है। मैं आज आप लोगों को विश्वास दिलाता कि न केवल भारत, न केवल बिहार, न केवल पूर्वांचल, मिथिलाँन्चल बल्कि सीतामढ़ी पूरी दुनिया के आकर्षण का केंद्र बने सीता माता का ऐसा भव्य मंदिर बनाने का काम करेंगे।”

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा, “मोदी जी ने अयोध्या में रामलला का भव्य मंदिर बनाने का काम पूरा किया। अब माँ सीता की जन्मभूमि पर महान स्मारक बनाने का काम बाकी है। जिन लोगों ने अपने-आप को रामलला के मंदिर से दूर रखा, वो ये स्मारक नहीं बना सकते। सीता माता के जीवन के अनुरूप स्मारक केवल नरेन्द्र मोदी जी और भाजपा बना सकते हैं।”

उन्होंने कहा कि बाबर के काल में राम मंदिर को तोड़ा गया था। सीतामढ़ी वासियों आप मुझे बताओ राम मंदिर बनना चाहिए था या नहीं बनना चाहिए था? कॉन्ग्रेस आरजेडी कई वर्षों तक राम मंदिर के मुद्दे पर रोड़े अटकाते रहे। मोदीजी को दूसरी बार पीएम बनाया गया, और केवल पाँच साल में राम जन्मभूमि केस जीता गया, भूमि पूजन किया गया और 22 जनवरी को मंदिर की ‘प्राण प्रतिष्ठा’ भी की गई।

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने कहा, जिस कॉन्ग्रेस पार्टी ने हमेशा पिछड़ों और अति पिछड़ों का विरोध किया, आज लालू यादव सत्ता की राजनीति के लिए, अपने बेटे को मुख्यमंत्री बनाने के लिए उसी कॉन्ग्रेस पार्टी की गोद में जाकर बैठ गए हैं। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मधुबनी में जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि मैं लालू यादव से सवाल पूछना चाहता हूँ कि आप बिहार में 15 साल मुख्यमंत्री और केंद्र में 10 साल मंत्री के पद पर रहे।

बता दें कि सीतामढ़ी में माता सीता का भव्य मंदिर बनाया जा रहा है। बिहार सरकार माता सीता के प्राकट्य स्थल पर स्मारक बना रही है। इसके लिए बिहार सरकार 50 एकड़ जमीन अधिग्रहीत कर रही है। इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए नए मंदिर के लिए प्रयासरत कामेश्वर चौपाल ने बताया था कि, “माता सीता के लिए सीतामढ़ी का वही महत्व है जो भगवान राम के लिए अयोध्या का है। यह हिन्दुओं के लिए पवित्र है। विश्व भर से लोग अयोध्या के राम मंदिर में दर्शन करने आएँगे और माता सीता की जन्मभूमि भी देखना चाहेँगे। हम चाहते हैं कि सीतामढ़ी में माता सीता का उसी तरह का एक भव्य का निर्माण किया जाए।” चौपाल ने बताया कि अभी जो मंदिर सीतामढ़ी में है, वह 100 वर्ष पूर्व बनाया गया था और उसकी स्थिति अब अच्छी नहीं है।

‘औरतें काम पर जा रहीं, इसलिए बढ़ रहा तलाक’: क्रिकेटर से मौलवी बने सईद अनवर का Video वायरल, कभी कहा था क्रिकेट वर्ल्ड कप लोगों को मुस्लिम बनाने का जरिया

पूर्व क्रिकेटर और अब मौलाना बने सईद अनवर ने कहा है कि जब से ऑस्ट्रेलिया में औरतों ने काम पर जाना चालू किया है, तब से हालात खराब हो गए हैं। उन्होंने पाकिस्तान में बढ़ते तलाक का ठीकरा महिलाओं के काम करने पर फोड़ा है। सईद अनवर का यह वीडियो अब सोशल मीडिया पर वायरल है।

इस वीडियो में सईद अनवर कहते हैं, “मैं पूरी दुनिया घूम कर आ रहा हूँ। युवा रो रहे हैं, घरवाले जलील हो रहे हैं, मियाँ-बीवी में लड़ाइयाँ हो रही हैं। इतना हालात खराब हो गए हैं कि उन्होंने महिलाओं को कमाई पर लगा दिया है। मुझे ऑस्ट्रेलिया की एक मेयर ने कहा कि इतना डिप्रेशन क्यों है। न्यूजीलैंड के कप्तान केन विलियम्सन ने मुझसे पूछा कि हमारे हालात कैसे सही हों।”

आगे सईद अनवर ने कहा, “मुझे ऑस्ट्रेलिया के मेयर ने बताया कि जबसे हमें औरतों को कमाई पर लगाया तबसे हमारा सब बर्बाद हो गया, हमारे इतने हालात खराब हो गए कि औरतें भी कमाई कर रही हैं। पाकिस्तान में जबसे औरतें कमाई करने लगी हैं तब से तलाक के मामले 30% बढ़ गए हैं।”

सईद अनवर ने इस वीडियो में दावा किया कि यूरोप में महिलाओं को इसलिए काम करना पड़ रहा है क्योंकि उनके हालात खराब हैं। असल में इस्लामी देशों को छोड़ कर सब जगह महिलाओं की कामकाज में भागीदारी बढ़ रही है, ऐसे सईद अनवर अपनी इस्लामी कट्टरपंथी सोच बता रहे हैं।

इससे पहले भी सईद अनवर इस्लाम के प्रचार के लिए कई विवादित बयान दे चुके हैं। उन्होंने बताया था कि क्रिकेटर हाशिम अमला एक हिन्दू परिवार का इस्लाम में धर्मांतरण करवा चुके हैं। उन्होंने वर्ल्ड कप को धर्मांतरण का एक जरिया बताया था।

उन्होंने कहा, “विश्व कप में कई लोग इस्लाम कबूल कर रहे हैं। अल्लाह ने वर्ल्ड कप को मोहरा बना रखा है। हाशिम अमला एक शानदार क्रिकेटर हैं। उसने कितने लोगों को कलाम पढ़ाया। एक पूरा हिन्दू खानदान मुस्लिम बन गया। मोहम्मद यूसुफ कई लोगों का जरिया बना। आप में अल्लाह ने बहुत टैलेंट दिया है। जो करना है करो, कारोबार करो, हुकूमत करो। अल्लाह को साथ ले लो और नबी का काम अपना काम बना लो।”

बंगाल की इंच-इंच जमीन मुस्लिमों की… स्वतंत्र भारत में सुरसा की तरह बढ़ रहा ‘मजहबी जमींदार’: इस्लामी मुल्कों में वक्फ बोर्ड का नामलेवा नहीं, यहाँ बढ़ती ही जा रही प्रॉपर्टी

पिछले दिनों सोशल मीडिया पर एक बंगाली मौलाना की वीडिया वायरल हुई थी। इस वीडियो में मौलाना दावा करता दिखाई दे रहा था कि बंगाल में इंच-इंच जमीन मुस्लिमों की है। वीडियो में सुनाई पड़ रहा था कि मौलाना कहता है- कलकत्ता हाईकोर्ट-मुस्लिमों की जमीन पर है, मुख्यमंत्री कार्यालय मुस्लिमों की जमीन पर है, कोलकाता एयरपोर्ट मुस्लिमों की जमीन पर है और ईडन गार्डन स्टेडियम तक मुस्लिमों की जमीन पर है।

मौलाना की इस छोटी सी वीडियो में कितनी सच्चाई है ये तो नहीं पता, लेकिन ये हकीकत जरूर है कि देश में वक्फ बोर्ड मजहबी जमींदार बनकर उभरा हुआ है। इन्होंने अपने हिस्से इतनी जमीन दिखाई हुई है कि सिर्फ देश में रेल और सेना के लोग ही इनके ऊपर आते हैं। आप खबरें उठाकर देख लीजिए आपको कभी वक्फ वाले मंदिर की संपत्ति पर अपना कब्जा बताते हुए मिलेंगे तो कभी कहेंगे पूरा का पूरा गाँव वक्फ की जमीन पर बसा है।

इनकी कोई सीमा नहीं है कि ये कहाँ तक वक्फ जमीन का दावा कर दें। वैसे असल में वक्फ की जमीन का कॉन्सेप्ट ये था कि जो कोई मुस्लिम व्यक्ति अपनी संपत्ति को अल्लाह के नाम पर दान करना चाहेगा वो वक्फ के हिस्से आ जाएगी। अब इसी क्रम में ये वक्फ बोर्ड वाले अल्लाह के नाम पर इकट्ठा कितनी जमीन पर अपना दावा ठोंक दें इसकी कोई सीमा है ही नहीं।

30 साल पहले वक्फ ने किया था कब्जा, फ्रॉड उजागर

हालिया खबर आज सामने आई है जिसमें बताया गया है कि कैसे दशकों पहले सहारनपुर की नगर निगम की तीन हेक्टेयर जमीन पर वक्फ द्वारा फर्जीवाड़ा किया गया था। इस खुलासे के बाद कमिश्नर ने डीएम को पत्र लिखकर 1994 के आदेश को निरस्त कर भूमि को पहले की तरह अभिलेखित करने के आदेश जारी किए। ये आदेश पूरी पड़ताल के बाद दिए गए। बताया जा रहा है कि उक्त भूमि 1874 से नगर पालिका परिषद की थी लेकिन वर्ष 1994 में सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड के सचिनव ने इस जमीन को वक्फ की जमीन में दर्ज करने के आदेश दे दिए थे। इसके बाद अन्य अधिकारियों ने इसका अनुपालन किया। साथ ही पूर्व में जिस पालिका के पास ये जमीन थी उन्हें अपना पक्ष रखने का कोई मौका भी नहीं मिला। इस तरह 3 हेक्टेयर की सरकारी जमीन को वक्फ अपने नाम कर गया। अब जब इस मामले में जाँच हुई है तो मंडलायुक्त ने जिलाधिकारी को निर्देश दिए कि ये जमीन वक्फ की नहीं है इसे सहारनपुर नगर निगम के नाम पूर्व की भाँति अभिलेखों में दर्ज करवाया जाए।

ये सिर्फ कोई हालिया खबर नहीं है। 2022 में खबर आई थी कि वक्फ बोर्ड ने तमिलनाडु में हिंदुओं के गाँव पर कब्जा किया है जिसमें 1500 पुराना मंदिर भी बना हुआ। इसके अलावा हाल में जामा मस्जिद के पास बने सरकारी पार्कों को लेकर भी शिकायत आई थी कि उसे मस्जिद अपने काम में लेने लगा है, कोशिश करने पर भी वो उस जगह को नहीं छोड़ते। इससे पूर्व 2021 में बाराबंकी के कतुरीकला में वक्फ के फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ था जहाँ पता चला था कि जमीनें धोखाधड़ी से वक्फ के नाम की गई हैं।

क्या है वक्फ बोर्ड और एक्ट

गौरतलब है कि वक्फ की धोखेधड़ियों की खबरें आने से मीडिया में सवाल अक्सर उठता ही रहता है कि इस तरह कैसे कोई बोर्ड आम लोगों की संपत्ति पर कब्जा कर लेता है और अगर कर लेता है, या उसे अपने अंतर्गत दर्ज करा लेता है तो क्यों वो वापस नहीं हो सकती? इसके अलावा सवाल ये भी उठते हैं कि आखिर लोकतांत्रिक देश में ऐसा बोर्ड क्यों बनाया गया कि एक मजहब के नाम पर प्रॉपर्टी इकट्ठा की जाए… तो इन सारे सवालों का जवाब नेहरू काल से मिलता है।

दरअसल, भारत में ‘वक्फ एक्ट’ की शुरुआत 1954 में नेहरू सरकार में हुई थी। इसके बाद 1964 में सेंट्रल वक्फ काउंसिल ऑफ इंडिया बना दिया गया। इसका काम केंद्रीय निकाय वक्फ अधिनियम, 1954 की धारा 9 (1) के प्रावधानों के तहत स्थापित विभिन्न राज्य वक्फ बोर्डों के तहत काम की देखरेख करने का था। साल 1995 में एक्ट में कुछ संशोधन हुए और इसे और मजबूती मिली। इन संशोधनों के बाद प्रत्येक राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों में वक्फ बोर्डों के गठन की अनुमति दी गई, जिसमें कुछ ऐसे बदलाव भी हुए जिनपर अक्सर विवाद होता रहता है।

बता दें कि आज के समय में देश में एक सेंट्रल वक्फ काउंसिल और 32 स्टेट बोर्ड है। हर राज्य के अलग-अलग वक्फ बोर्ड होते हैं। इस बोर्ड का काम हर जकात में मिली संपत्ति की देखरेख करना होता है। वक्फ जकात में आई सारी संपत्ति को अल्लाह की संपत्ति मानता है और इससे जुड़ ेहर कानूनी काम खुद संभालता है। चाहे इसे खरीदना हो या लीज पर देना। इसके अलावा एक बार अगर कोई संपत्ति इस बोर्ड के अधीन आ जाती है तो व्यक्ति उसे वापस नहीं ले सकती चाहे वो पहले उसी की क्यों न रही हो। वहीं वक्फ उसका जैसे चाहे वैसे इस्तेमाल कर सकता है।

वक्फ बोर्ड के खिलाफ खड़े वकील अश्विनी उपाध्याय

हाल में इस पर सुप्रीम कोर्ट के वकील अश्विनी उपाध्याय ने भी ट्वीट किया था। उन्होंने मौलाना वाली वीडियो पर प्रतिक्रिया देते हुए वक्त के मामले को उठाया था। साथ ही राहुल गाँधी के परिवार पर निशाना साधा था। अपने ट्वीट में उन्होंने कहा था, “परनाना ( जवाहरलाल नेहरू) ने वक्फ एक्ट बनाया दादी (इंदिरा गाँधी) ने वक्फ एक्ट को मजबूत किया पिता (राजीव गाँधी) ने वक्फ एक्ट को और मजबूत किया 1995 में पुराना कानून वापस और नया कानून 2013 में वक्फ बोर्ड को असीमित शक्ति दिया कॉन्ग्रेस ने भारत को बर्बाद करने के लिए 50 घटिया कानून बनाए हैं।”

उन्होंने तो इस वक्फ बोर्ड को असंवैधानिक करार देने के लिए याचिका भी डाली थी लेकिन उसे कोर्ट ने यह कहकर खारिज कर दिया कि याचिकाकर्ता व्यक्तिगत रूप से प्रभावित नहीं हुए। इस मामले में अश्विनी उपाध्याय साफ कहा था, “वक्फ के नाम से भारतीय संविधान में एक शब्द नहीं है। सरकार ने 1995 में वक्फ एक्ट बनाया और इसे मुस्लिमों का नाम कर दिया…।  वक्फ बोर्ड को असीमित शक्तियाँ दे दी गईं। उन्हें ये अधिकार दे दिया गया है कि उनके सब धार्मिक संपत्तियों से जुड़े मामले ट्रिब्यूनल कोर्ट में जाएँगे। वो सवाल करते हैं कि देश में इतनी ट्रिब्यूनल कोर्ट नहीं है ऐसे में अगर वक्फ जाकर किसी की संपत्ति पर दावा ठोंकता है तो लोगों को दर-दर भटकना पड़ता है तब सुनवाई होती है जबकि बाकी धर्मों के मामले आराम से सिविल कोर्ट में सुन लिए जाते हैं।” 

वक्फ बन रहा तीसरा सबसे बड़ा जमींदार

यहाँ आपको जानकर शायद हैरानी होगी कि वक्फ का कॉन्सेप्ट इस्लामी देशों तक में नहीं है। फिर वो चाहे तुर्की, लिबिया, सीरिया या इराक हो। लेकिन भारत में मुस्लिम तुष्टिकरण के चलते आज हालात ऐसे हैं कि इन्हें देश में तीसरा सबसे बड़ा जमींदार बताया जा रहा है। इनके पास अकूत संपत्ति है। अल्पसंख्यक मंत्रालय के अनुसार वक्फ बोर्ड के पास पूरे देश भर में 8,65,646 संपत्तियाँ पंजीकृत हैं। इनमें से 80 हजार से ज्यादा संपत्ति वक्फ के पास केवल बंगाल में हैं। इसके बाद पंजाब में वक्फ बोर्ड के पास 70,994, तमिलनाडु में 65,945 और कर्नाटक में 61,195 संपत्तियाँ हैं। देश के अन्य राज्यों में भी इस संस्थान के पास बड़ी संख्या में संपत्तियाँ हैं।