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मौलवी अबु बक्र के 2 और साथी गिरफ्तार, एक के पास नेपाल की भी नागरिकता: पाकिस्तानी नंबर का भी इस्तेमाल, टारगेट थे नुपूर शर्मा-राजा सिंह जैसे हिंदुवादी नेता

हिंदू नेताओं की हत्या की साजिश रचने के मामले में गुजरात के सूरत से पकड़े गए मौलवी सोहेल अबू बक्र तिमोल से पूछताछ में कई खुलासे हुए हैं। उसके दो साथी पकड़े गए हैं। इनमें से एक शहनाज है उसके पास भारत और नेपाल, दोनों की नागरिकता थी। उसके पास 17 मोबाइल नम्बर, 42 ईमेल आईडी थीं। उसके पास पाकिस्तानी नम्बर भी था।

सूरत के पुलिस कमिश्नर अनुपम सिंह गहलोत ने इस मामले की जाँच को लेकर बताया, “हमने मई के पहले सप्ताह में मौलवी सोहेल को पकड़ा था। इस मामले में जब जाँच हुई तो देश के अलग-अलग राज्यों में चलने वाला इनका मॉड्यूल सामने आया। सोहेल के पास से दो वोटर आईडी मिली हैं,दोनों के EPIC नम्बर भी अलग हैं, इसके पास से जन्म प्रमाण पत्र भी दो अलग-अलग जगह के मिले। एक जन्म प्रमाण पत्र सूरत का और एक महाराष्ट्र के नवापुरा का मिला है।”

उन्होंने आगे इस पूछताछ से हासिल हुई जानकारी को लेकर बताया, “इस पूरी जाँच में शहनाज नाम का एक व्यक्ति मुजफ्फरपुर से पकड़ा गया है, वह नेपाल के नम्बर का इस्तेमाल करता था। उसने एक नम्बर के आधार पर 17 वर्चुअल नम्बर बना रखे थे, वह इन नम्बरों का उपयोग करके लोगों को धमकाता था। इसके पास 42 ईमेल आईडी भी थीं, इसके जरिए वह गैंग चलाता था। उसके पास नेपाल और भारत, दोनों देशों की नागरिकता थी।”

इस मामले में पता चला है कि शहनाज नेपाल में भी रहता था। शहनाज का कहीं कहीं नाम मोहम्मद अली भी बताया गया है। पुलिस कमिश्नर गहलोत ने बताया है कि इस मामले में रजा नाम का एक युवक भी पकड़ा गया है। वह महाराष्ट्र के नांदेड का रहने वाला है। उसने पकड़े जाने से पहले ही अपना मोबाइल तोड़ दिया था, हम उसके मोबाइल से फॉरेंसिक लैब के पास भेजा गया है और उससे डाटा रिकवर करने का प्रयास हो रहा है।

उन्होंने बताया है कि यह व्यक्ति पाकिस्तानी नम्बर उपयोग करता था, यह उसे इसके पाक्सितानी हैंडलर डागर ने मुहैया करवाया था। उन्होंने बताया कि रजा कई पाकिस्तानियों का अनुसरण करता था जो कि भारत के खिलाफ जहर उगलते हैं। इन दोनों ने नुपुर शर्मा, बजरंग दल के कार्यकर्ता सुरेश राजपूत, ब्लॉगर शबनम शेख और शिव सेना नेता अमित अरोड़ा को धमकियाँ दी थीं।

गौरतलब है कि गुजरात पुलिस ने शनिवार (4 मई 2024) को सूरत से एक मौलवी को गिरफ्तार किया था। मौलवी का नाम सोहेल अबू बक्र तिमोल बताया गया था। इस 27 वर्षीय मौलवी पर भाजपा की पूर्व प्रवक्ता नूपुर शर्मा, हैदराबाद के गोशमहल से भाजपा विधायक टी राजा सिंह, सुदर्शन न्यूज़ के प्रधान सम्पादक सुरेश चव्हाणके और सोशल मीडिया पर सक्रिय हिंदू नेता उपदेश राणा की हत्या की साजिश रचने का आरोप है। पुलिस ने इससे पूछताछ करने के बाद यह सारी जानकारी निकाली है।

सोहेल के बारे में बताया गया था कि महाराष्ट्र के नंदुरबार का रहने वाला है। फिलहाल वह सूरत के एक मदरसे में हाफिज है और करजा-अम्बोली गाँव में मुस्लिम छात्रों को ट्यूशन के माध्यम से मज़हबी तालीम देता था। इन सभी के अलावा अबू बक्र सूरत के डायमंड नगर की एक धागा फैक्ट्री में मैनेजर के तौर पर भी ड्यूटी करता था। पुलिस ने मौलवी की जाँच की तो पाया कि वह पिछले डेढ़ साल से पाकिस्तान और नेपाल के हैंडलरों के सम्पर्क में था।

विभव कुमार की तलाश में जुटी दिल्ली पुलिस, स्वाति मालीवाल बोलीं- मैं कहती रही छोड़ दो, लेकिन वह मारता और गाली देता रहा: देर रात महिला MP का मेडिकल

दिल्ली मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के पर्सनल सेक्रेट्री के खिलाफ स्वाति मालीवाल ने प्राथमिकी दर्ज करवा दी है। उन्होंने घटना के 81 घंटे बाद 2.5 पेज की शिकायत पुलिस को दी। अपनी शिकायत में उन्होंने बताया कि विभव ने उनके चेहरे, पेट और छाती पर 5-6 बार मारा।

मालीवाल ने अपनी शिकायत में बताया, “मैं सीएम आवास के ड्रॉइंग रूम तक गई और वहाँ इंतजार कर रही थी, तभी उनका पर्सनल स्टाफ आया और गालियाँ देने लगा। बिना किसी उकसावे के थप्पड़ मारा। मैंने शोर मचाया और कहा कि मुझे छोड़ दो,जाने दो। लेकिन वह मारता रहा।”

स्वाति मालीवाल के अनुसार पर्सनल स्टाफ उन्हें गालियाँ देता रहा, धमकियाँ देता रहा और ‘देख लेंगे, निपटा देंगे’ जैसे शब्द भी कहे। इसके बाद उसने पहले चेहरे पर मारा, फिर पेट पर मारा। मालीवाल के मुताबिक इसी के बाद वो भाग कर बाहर आईं और पुलिस को फोन किया।

उनकी इस शिकायत के बाद स्पेशल सेल की टीम ने सुरक्षा व्यवस्था सहित कई मसलों पर स्वाति मालीवाल से बात की। स्पेशल सेल के एडिशनल कमिश्नर प्रमोद कुशवाहा खुद मालीवाल के घर उनके बयान दर्ज करने के लिए पहुँचे। पुलिस करीब 4 घंटे उनके आवास पर रही।

सारी बात सुनने समझने के बाद पुलिस ने स्वाति मालीवाल के बयान के आधार पर विभव कुमार के खिलाफ आईपीसी की धारा 354, 506स 509, 323 और अन्य धाराओं के तहत एफआईआर की, फिर उन्हें मेडिकल के लिए एम्स लेकर आया गया। वहाँ उनका चेक अप हुआ। रात में 3 बजे जब वो घर लौटीं तो एक वीडियो सामने आई इसमें वह अपने घर में लड़खड़ाते हुए घुसती दिखीं।

FIR रजिस्टर करने के बाद नॉर्थ डिस्ट्रिक की पुलिस टीम और क्राइम ब्रांच की पूरी 10 टीमें पूरे केस की जाँच में जुटी हुई है। इस क्रम में एक टीम विभव से पूछताछ के लिए उनके घर पहुँची। हालाँकि वह वहाँ नहीं मिले। उन्हें 16 मई को केजरीवाल के साथ लखनऊ एयरपोर्ट पर देखा गया था। वहीं राष्ट्रीय महिला महिला आयोग ने इस मामले पर स्वत: संज्ञान लेते हुए विभव कुमार से आज सुबह 11 बजे पेश होने को कहा है।

स्वाति मालीवाल ने पुलिस अपनी शिकायत देने के बाद एक्स पर भी पोस्ट लिखा। उन्होंने कहा, “मेरे साथ जो हुआ वो बहुत बुरा था। मेरे साथ हुई घटना पर मैंने पुलिस को अपना स्टेटमेंट दिया है। मुझे आशा है कि उचित कार्रवाई होगी। पिछले दिन मेरे लिए बहुत कठिन रहे हैं। जिन लोगों ने प्रार्थना की उनका धन्यवाद करती हूँ। जिन लोगों ने चरित्र हनन करने की कोशिश की, ये बोला कि दूसरी पार्टी के इशारे पर कर रही है, भगवान उन्हें भी खुश रखे। देश में अहम चुनाव चल रहा है, स्वाति मालीवाल ज़रूरी नहीं है, देश के मुद्दे ज़रूरी हैं। BJP वालों से ख़ास गुज़ारिश है इस घटना पे राजनीति न करें।”

बता दें कि स्वाति मालीवाल के साथ 13 मई को यह घटना घटी थी। उस दिन दो कॉल पुलिस के पास उनके नाम से आई थी जिसमें उन्होंने मारपीट की जानकारी दी थी। इसके बाद वो थाने भी गईं लेकिन बिन शिकायत दिए लौट आईं और फिर मीडिया में कुछ नहीं कहा। उनकी चुप्पी से तमाम सवाल उठ रहे थे। हालाँकि अब उन्होंने जब अपनी शिकायत पुलिस को दे दी है तो पुलिस ने विभव के खिलाफ केज को दर्ज कर लिया है। वहीं दूसरी ओर स्वाति मालीवाल के आवास की सुरक्षा बढ़ा दी गई है।

CAA के तहत मिलने लगी नागरिकता तो नाराज हुई कॉन्ग्रेस की सहयोगी IUML, जाएगी सुप्रीम कोर्ट: ‘नई जिंदगी’ देने पर पाकिस्तानी हिंदुओं ने PM मोदी का जताया आभार

जिस कानून के तहत भारतीय नागरिकता मिलने पर पाकिस्तानी हिन्दुओं ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का नई जिन्दगी देने के लिए आभार जताया है, वह कॉन्ग्रेस की सहयोगी इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग को रास नहीं आ रहा। CAA के तहत नागरिकता देने को मुस्लिम लीग ने चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन बताया है और सुप्रीम कोर्ट जाने की बात कही है। CAA पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान में प्रताड़ित किए गए हिन्दुओं को नागरिकता देने का प्रावधान करता है। मुस्लिम लीग शुरू से ही इसके विरोध करती आई है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मुस्लिम लीग ने दिल्ली के कुछ वरिष्ठ वकीलों के साथ इस मुद्दे को लेकर बातचीत चालू कर दी है। मुस्लिम लीग इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में चुनाव आचार संहिता के उल्लंघन की याचिका लगाएगी। मुस्लिम लीग के अनुसार, पाकिस्तान से आए प्रताड़ित हिन्दुओं को नागरिकता देना वोटरों को लुभाना है।

इस मामले में मुस्लिम लीग के राष्ट्रीय महासचिव पी के कुंहलीकुट्टी ने कहा, “केंद्र सरकार ने चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन किया है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से कहा था कि इस कानून को तुरंत ही प्रभाव में नहीं लाया जाएगा। उन्होंने कोर्ट को गुमराह करके नागरिकता दी है। यह वोटरों को लुभाने के लिए किया गया है।”

मुस्लिम लीग के केरल के महासचिव PMA सलाम ने बताया, “हमने CAA के खिलाफ अपनी लड़ाई को आगे ले जाने के लिए वकीलों से बातचीत चालू की है। पार्टी इस मामले में चुनाव आयोग और सुप्रीम कोर्ट, दोनों के पास जाएगी।”

गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने बुधवार (15 मई, 2024) को 300 से अधिक लोगों को नागरिकता दी है। इनमें से 14 लोगों को गृह मंत्रालय बुलाकर उनके नागरिकता प्रमाण पत्र दिए गए। इनमें से अधिकांश हिन्दू हैं, जो कि पाकिस्तान में प्रताड़ना से भाग कर भारत आए थे। CAA कानून के तहत यह 2014 से पहले आए थे, इसलिए इन्हें नागरिकता दे दी गई।

नागरिकता पाने वाले हिन्दुओं ने बताया कि पाकिस्तान में उन्हें लगातार यातनापूर्ण और दोयम दर्जे का जीवन जीना पड़ता था। एक महिला ने बताया, “वहाँ हमें बहुत मुश्किलें झेलनी पड़ती हैं। लड़कियाँ पढ़ नहीं सकतीं और घरों से बाहर निकलना मुश्किल होता है। मुस्लिम हिंदू लड़कियों को किडनैप कर लेते हैं और उन्हें जबरन इस्लाम कबूल करवाया जाता है।”

इन नागिरकता पाए लोगों के विरुद्ध अब मुस्लिम लीग कोर्ट का रास्ता अपनाएगी। मुस्लिम लीग इससे पहले मार्च 2024 में CAA लागू किए जाने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुँची थी। सुप्रीम कोर्ट में मुस्लिम लीग ने इस कानून को लागू किए जाने पर रोक लगाने की माँग की थी। हालाँकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस कानून पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था।

गौरतलब है कि भारत सरकार ने सोमवार (11 मार्च, 2024) को CAA (नागरिकता संशोधन कानून) को देश भर में लागू करते हुए इसके नियमों की अधिसूचना जारी कर दी थी। इस कानून के तहत पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान में प्रताड़ित हुए अल्पसंख्यकों (हिन्दू, सिख, जैन, ईसाई, बौद्ध एवं पारसी) को भारत की स्थायी नागरिकता मिलेगी, जो 31 दिसंबर, 2014 तक विस्थापित होकर भारत आ गए थे।

CAA का विरोध करने वाली मुस्लिम लीग का कनेक्शन भारत का विभाजन करवाने वाले मोहम्मद अली जिन्ना से है। केरल और तमिलनाडु की राजनीति में IUML की मजबूत पकड़ है। इसे केरल में राज्यस्तरीय पार्टी का भी दर्जा प्राप्त है। केरल में वह कॉन्ग्रेस की सहयोगी पार्टी भी है। केरल में केरल विधानसभा में IUML के 15 विधायक और 4 लोकसभा सांसद हैं।

स्वाति मालीवाल ने दर्ज कराई FIR: मुख्यमंत्री आवास में अरविंद केजरीवाल के सामने ही उनके PA बिभव कुमार ने मुँह, पेट और छाती पर मारा

आम आदमी पार्टी की राज्यसभा सांसद स्वाति मालीवाल ने बीते दिनों मुख्यमंत्री आवास में अपने साथ हुई बदसलूकी और कथित मारपीट के मामले में आखिरकार लिखित शिकायत दे दी है। गुरुवार (16 मई 2024) को दिल्ली पुलिस की एक टीम स्वाति मालीवाल के आवास पहुँची थी और करीब चार घंटे वहीं रही। इस दौरान दो सदस्यीय टीम ने मध्य दिल्ली स्थित उनके आवास पर उनका बयान दर्ज किया। इस बीच, पता चल रहा है कि अरविंद केजरीवाल की मौजूदगी में उनके पीए बिभव कुमार ने स्वाति मालीवाल की जमकर पिटाई की। न सिर्फ थप्पड़ मारे, बल्कि छाती, पेट में भी मारा।

केजरीवाल की मौजूदगी में बिभव ने स्वाति को पीटा

टाइम्स नॉउ की रिपोर्ट के मुताबिक, बिभव कुमार ने स्वाति मालीवाल को 5-6 थप्पड़ मारे। बिभव कुमार ने अरविंद केजरीवाल की मौजूदगी में स्वाति मालीवाल की पिटाई की। बिभव ने स्वाति की छाती, पेट और शरीर के निचले हिस्सों पर भी चोट पहुँचाया। इस रिपोर्ट के मुताबिक, अरविंद केजरीवाल उस समय अपने घर में ही मौजूद थे और उनकी मौजूदगी में बिभव कुमार ने स्वाति मालीवाल को पीटा। इस मामले में स्वाति मालीवाल के बयान के आधार पर दिल्ली पुलिस एफआईआर दर्ज करने की कार्रवाई कर रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, एक अधिकारी ने इस बारे में जानकारी देते हुए बताया कि मालीवाल ने सोमवार को मुख्यमंत्री आवास पर हुई घटना के बारे में पुलिस को बताया। पुलिस टीम अपर पुलिस आयुक्त पी.एस. कुशवाहा के नेतृत्व में दोपहर करीब 1 बजकर 50 मिनट पर राज्यसभा सदस्य के आवास पर गई थी। उनके साथ महिला पुलिस अधिकारी भी थीं। यह टीम करीब चार घंटे से अधिक समय तक उनके घर पर मौजूद रही।

स्वाति मालीवाल ने इस मामले पर ट्वीट भी किया। उन्होंने एक्स पर लिखा, “मेरे साथ जो हुआ वो बहुत बुरा था। मेरे साथ हुई घटना पर मैंने पुलिस को अपना स्टेटमेंट दिया है। मुझे आशा है कि उचित कार्रवाई होगी। पिछले दिन मेरे लिए बहुत कठिन रहे हैं। जिन लोगों ने प्रार्थना की उनका धन्यवाद करती हूँ। जिन लोगों ने कैरेक्टर असासिनेशन करने की कोशिश की, ये बोला की दूसरी पार्टी के इशारे पर कर रही है, भगवान उन्हें भी खुश रखे। देश में अहम चुनाव चल रहा है, स्वाति मालीवाल ज़रूरी नहीं है, देश के मुद्दे ज़रूरी हैं। बीजेपी वालों से ख़ास गुज़ारिश है इस घटना पे राजनीति न करें।”

दिल्ली बीजेपी महिला मोर्चा की अध्यक्ष ऋचा पांडे मिश्रा ने कहा, “मैं स्वाति मालीवाल को धन्यवाद देती हूँ कि उन्होंने शिकायत दर्ज की और अपनी चुप्पी तोड़ी। जिस तरह के सदमे से वह गुजर रही होंगी, उसे देखते हुए उन्हें काफी मेहनत करनी पड़ी होगी…मेरी टीम और मैं उनसे मिलने और उनका समर्थन करने आए था। हम राजनीति से ऊपर उठ कर ये सब देख रहे हैं। हम जानते हैं कि वह हमारी राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी रही हैं और एक अलग विचारधारा से जुड़ी हैं, लेकिन यहाँ यह महिलाओं की समानता के बारे में था। मैं चाहती हूँ कि अरविंद केजरीवाल की जमानत रद्द की जाए और आरोपी विभव कुमार को जेल भेजा जाए…”

बता दें कि स्वाति मालीवाल ने सोमवार (13 मई 2024) को सीएम आवास में अपने साथ दुर्व्यवहार और कथित मारपीट होने का आरोप लगाया था। इस मामले में उन्होंने पहले सीएम हाउस से ही पुलिस को फोन लगाया था, फिर इसके बाद वे सिविल लाइन्स थाने पहुँच गई थीं। उनका आरोप था कि केजरीवाल के निजी स्टाफ के एक सदस्य बिभव कुमार ने उनके साथ बदसलूकी की है। हालाँकि उस वक्त वे पुलिस को लिखित शिकायत दिए बिना ही लौट आई थीं। हालाँकि अब दिल्ली पुलिस स्वाति मालीवाल के घर पहुँची थी। इस मामले स्वाति मालीवाल ने पुलिस को दी गई स्टेटमेंट का जिक्र करते हुए कार्रवाई की उम्मीद जताई है। इस दौरान स्वाति ने देश में चल रहे लोकसभा चुनावों का हवाला देते हुए कहा कि स्वाति मालीवाल जरूरी नहीं है बल्कि देश में मुद्दे जरूरी हैं।

‘भ्रष्टाचारियों से जब्त जमीनों को नीलाम करके गरीबों को लौटा रहे हैं’: PM मोदी बोले- ‘कॉन्ग्रेस के लिए लोकतंत्र का मतलब उनकी सत्ता है’

लोकसभा चुनाव 2024 के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आजतक से खास बातचीत की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस इंटरव्यू में देश की अर्थव्यवस्था से लेकर महिलाओं की स्थिति, वैश्विक व्यवस्था से लेकर तमाम अहम मुद्दों पर बातचीत की। पीएम मोदी ने ईडी की कार्रवाई पर भी अपनी बात रखी, साथ ही बताया कि हम तीसरी सरकार के अगले 100 दिनों के एजेंडे पर नहीं, बल्कि सवा सौ दिनों के एजेंडे पर काम कर रहे हैं। पीएम मोदी ने यूक्रेन से लेकर गाजा, ईरान से लेकर रूस तक की बात की।

काली कमाई गरीबों को लौटाने पर बोले पीएम मोदी

इस इंटरव्यू के दौरान पूछा गया कि ईडी द्वारा जब्त पैसों को आपने जनता के बीच पहुँचाने के लिए कहा था, ये कैसे संभव हो पाएगा। इस पर जवाब देते हुए पीएम मोदी ने कहा कि आपने बहुत मार्मिक चीज पूछी है। मैं मानता हूँ कि दो प्रकार के भ्रष्टाचार हैं। एक जो बड़े बड़े कारोबार में करते हैं, जिनमें लेने वाला भी कुछ बताता नहीं, देने वाला भी नहीं बताता, ये मुसीबत है। मगर, ज्यादातर निर्दोष लोग हैं। जैसे बंगाल में, शिक्षकों की भर्ती में पैसे गए। तो पता है भाई कि इस आदमी को नौकरी मिली, उसके पास सर्टिफिकेट वगैरह कुछ नहीं हैं, और उस बेचारे ने यहां से कर्ज लिया, उसने जमीन गिरवी रखी, घर गिरवी रखा यानी ट्रेल है।

अभी हमने काफी पैसे जब्त किए हैं। हमने सवा लाख करोड़ की संपत्ति जब्त की है। अब जैसे केरल में था कॉम्यूनिस्ट पार्टी एक ऐसा रैकेट चलाती है। ये बड़े इमानदारी का ठेका लेकर घूम रहे हैं। कॉपरेटिव में गरीबों के पैसे हैं। ज्यादातर नौकरी पेशा वालों के पैसे और आदमी फिक्स डिपॉजिट में पैसे देता है, रखता है कि बेटी बड़ी होगी तो शादी के लिए काम आएँगे। बेटा बड़ा होगा तो एक कमरा बड़ा होगा। इन लोगों ने पैसों को अपने निजी बिजनेस पार्टनरशिप के लिए बाँट दी है और हजारों करोड़ का घपला किया है उन्होंने। केरल फाइल को लेकर तो आप डरते हैं, लेकिन इसमें काम कर सकते हैं। अब उसमें ट्रेल है कि पैसा इसने रखा और इसका डूबा। अब हमने प्रॉपर्टी जब्त की है। मैं चाहता हैं, मैं उस प्रॉपर्टी से कैश है कैश से और जो संपति उसको ऑक्शन करके वह वो पैसे मैं कैसे लौटा सकता हूँ।

अब तक मैं 17 हजार करोड़ रुपये लौटा चुका हूँ, जिसका ट्रेल मिला है। अब लालू जी ने, जब रेलवे मिनिस्टर थे… साहब गरीब लोगों को जॉब देने के बहाने जमीन लिखवा ली है और इसका ट्रेल मिला है। अब वह बेचारा डर के मारे एफिडेविट देने तैयार नहीं है। लेकिन, देखिए ट्रेल मिल रहा है कि इसकी जमीन गई, इस तारीख को गई और इस तारीख को नौकरी मिली। अब हमने जब्त किया है, तो हम उसका ऑक्शन करके उस गरीब को जमीन वापस करने के लिए सोच रहे हैं। मैं दिमाग काफी लगा रहा हूँ इसमें क्योंकि कि यह मेरे मन से हो रहा है कि यह गरीबों का पैसा है। इन लोगों ने अपने पद का दुरुपयोग करके लूटा है, इनको वापस मिलना चाहिए। अभी मैं लीगल टीम की मदद ले रहा हूँ। मैंने जुडिशरी के लोगों से कहा कि कुछ रास्ता बताओ। रुपए पड़े रहने से मुझे क्या मतलब है।

वैसे हम जो न्याय संहिता नई लाए हैं, उसमें कुछ सुविधाएं हम लाए हैं, और वो कानून ऐसा बना… मेरे यहाँ भावनगर में, जब मैं मुख्यमंत्री था तो वो जो काला गुड़ होता है न, वो पकड़ा गया बहुत बड़ी मात्रा में। मतलब काला गुड़ गैरकानूनी शराब बनाने के उपयोग होगा। अब पुलिस थाने में रखा है, बारिश आई तो भीग गया, तो मच्चर मक्खी, इतना ढेर हो गया कि उस रास्ते से गुजरना मुश्किल हो गया। अब कानून यह कहता है इसको आप आप डिस्पोज नहीं कर सकते। तब से मेरे मन में था कि कानून बदलना चाहिए। यह जो नई न्याय संहिता आई है, उसमें सारे सॉल्यूशन लाए गए हैं।

कॉन्ग्रेस मेरा प्रधानमंत्री होना स्वीकार नहीं कर पा रही

पीएम मोदी ने कहा, ‘मेरी कोशिश रही है कि लोग कुछ करें, लेकिन दुर्भाग्य है कि कॉन्ग्रेस के इस परिवार के लिए लोकतंत्र का मतलब उसका सत्ता में होना है। आज भी वह स्वीकार करने को तैयार नहीं हैं कि दस साल पहले 2014 में देश ने कोई दूसरी सरकार चुनी है, कोई दूसरा प्रधानमंत्री है जिसे देश ने बनाया है, वो मन से स्वीकार नहीं कर पा रहे हैं।’

ईडी की कार्रवाई पर पीएम मोदी ने क्या कहा?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, ‘पूछना चाहिए कि दस साल तक ईडी को इतनी पगार दी, उतना काम किया या नहीं? 2004 से 2014 तक काम क्यों नहीं किया गया? रेलवे का टिकट चेकर है तो टिकट चेक नहीं करेगा तो रखने की क्या जरूरत है? उन्होंने आगे कहा, ‘2004 से 2014 तक, व्यवस्था तो यही थी। कानून वही था। मैंने कानून नहीं बदला है। मैंने ईडी भी नहीं बनाई है। उन्होंने कोई काम किया नहीं। सिर्फ 34-35 लाख रुपया जब्त किया। दस साल तो हम विपक्ष में थे। किसने रोका था? मेरी सरकार ने 2,200 करोड़ रुपये पकड़े हैं। नोटों के ढेर आपके टीवी वालों ने दिखाए हैं। उस ईडी को आप कैसे बदनाम कर सकते हैं?’ पीएम मोदी ने कहा सांसद के घर से मिले हैं पैसे, इससे कैसे इनकार किया जा सकता है। उन्होंने कहा, ‘ईडी अगर पकड़ लेती है तो उसकी तारीफ भी नहीं और उसको गुनहगार भी बना दो, क्योंकि वो राजनेता के यहाँ से पकड़ा गया है।’ उन्होंने कहा कि उनकी लड़ाई भ्रष्टाचार के खिलाफ है और इसे खत्म होना चाहिए, क्योंकि ये देश का बहुत विनाश कर रहा है।

संस्थाओं के दुरुपयोग के आरोपों पर क्या बोले?

विपक्ष की ओर से लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करने के आरोपों के सवाल पर जवाब देते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, ‘प्रणब मुखर्जी की किताब में देखा होगा कि मेरे साथ उन्होंने जो काम किया, वो कितना डेमोक्रेटिक तरीके में काम किया। राष्ट्रपति पद की कितनी प्रतिष्ठा उन्होंने बढ़ाई।’ उन्होंने आगे कहा, ‘सुप्रीम कोर्ट की बात करें तो हम पर तो आरोप ये है कि लोग कहते हैं कि सरकार की तो सुप्रीम कोर्ट में कुछ चलती ही नहीं है। हमारी क्षमताओं पर सवाल उठाए जा रहे हैं। इसका मतलब ये है कि पहले कुछ लोग थे जो न्यायपालिका को मैनेज करते थे और वो संस्था ठीक थी? मैं मानता हूं मुझे क्यों मैनेज करना चाहिए? कानून, कानून का काम करेगा।’

परिवार वाद पर बोले पीएम मोदी

पीएम नरेंद्र मोदी ने परिवार वाद पर भी अपनी बात रखी। पीएम मोदी ने कहा कि ‘जैसे मैं कहता हूं कि परिवारवादी पार्टी तो मुझसे सवाल पूछे जाते हैं कि राजनाथ जी का बेटा भी है, दोनों में फर्क है। मैं जो परिवारवादी पार्टी कहता हूँ, तो इसका मतलब है कि पार्टी ऑफ द फैमिली, बाय द फैमिली, फॉर द फैमिली। किसी परिवार के दस लोग अगर पब्लिक लाइफ में आते हैं तो इसे मैं बुरा नहीं मानता हूँ। चार लोग अगर बढ़-चढ़कर आगे जाते हैं तो बुरा नहीं मानता हूँ। वो पार्टी नहीं चलाते हैं, निर्णय पार्टी करती है।”

यूसीसी पर बोले पीएम मोदी

पीएम मोदी से पूछा गया कि यूनिफॉर्म सिविल कोड के बारे में एक दूसरा नेरेटिव है। अब लोग कहते हैं कि यह वन नेशन-वन ड्रेस हो जाएगी, वन नेशन-वन फूड हो जाएगा, वन नेशन-वन लैंग्वेज हो जाएगा और उसके आगे यह कि अब वन नेशन-वन लीडर हो जाएगा और हम उसी तरफ बढ़ रहे हैं। इसपर आपका क्या कहना है? प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जवाब देते हुए कहा, ‘जो लोग ऐसा बोलते हैं उनसे काउंटर सवाल किया जाना चाहिए कि आप यह नेरेटिव लाए कहाँ से। उन्होंने यूसीसी पढ़ा है? यूसीसी होता क्या है? इस देश के पास उदाहरण है, गोवा में यूसीसी है। आप मुझे बताइए कि गोवा के लोग एक ही प्रकार के कपड़े पहनते हैं क्या? क्या गोवा के लोग एक ही प्रकार का खाना खाते हैं? क्या मजाक बनाकर रखा है यूनिफॉर्म सिविल कोड का। इसका तो कोई लेना देना ही नहीं।’

श्रीनगर में वोटिंग इन चुनावों में मेरे लिए सबसे संतोष का पल

पीएम मोदी ने कहा कि, ‘इस पूरे चुनाव में मेरे लिए संतोष के पल है श्रीनगर की वोटिंग। इसने इस बात पर ठप्पा लगा दिया कि मेरी नीतियाँ सही हैं कि मैं कोई डिस्क्रिमिनेशन नहीं करता हूँ। मेरी सरकार धर्म के आधार पर भेदभाव नहीं करती है। जहाँ तक राज्य के दर्जे की बात है, हमने पार्लियामेंट में प्रॉमिस किया हुआ है और हम उस पर कमिटेड हैं। पीएम मोदी ने कहा कि पहले हमको गालियाँ पड़ती थीं कि आपने इंटरनेट बंद कर दिया, चारों तरफ पूरे इंडिया में, हम जाते थे मीटिंग में तो आप लोग मिलते थे तो कहते थे कि इंटरनेट बैन हो गया। यह कौन सा लोकतंत्र है? गालियाँ खाई हैं, लेकिन मैंने कश्मीर का भला किया है। मैं दूर का देख सकता था, आप 24 घंटे चैनल के लिए देखते थे, मैं देश के लिए देखता था। इसलिए मैं इंटरनेट की गालियाँ खाने के बाद भी इंटरनेट बंद करके भी नौजवानों को गलत रास्ते से बचाने में सफल हुआ।

पीएम मोदी ने आगे कहा, “दूसरा मेरा संतोष है, दस साल का समय लगा लीजिए। 2004 से 2014 तक कितनी माताओं ने अपने बच्चे खोए? 2014 से 2024 तक कितनी माताओं के लाल बच गए। जीवन में इससे बड़ा संतोष क्या होता है। इसलिए राज्य भी हमारा कमिटमेंट है। हम सफलता के लिए जो भी रास्ता अख्तियार करना है, वो करेंगे।” पीएम ने कहा ‘मेरा कुछ दिन पहले कश्मीर में कार्यक्रम था। शायद 40 साल के बाद इतनी बड़ी रैली हुई थी। मेरी इच्छा है कि चुनाव फेस्टिवल होना चाहिए। मैं देख रहा था कि श्रीनगर में फेस्टिवल का मूड है। लोग चाय पिला रहे थे, लोग गाने गा रहे थे। मेरे लिए बड़ा खुशी का दिन था।’

रील बनाने का नशा, पार्टी का शौक और प्रेमी के लिए खरीदी गाड़ी: कर्ज में डूबी किरायेदार लड़की ने मकान मालकिन का घोंट दिया गला, लूट ली सोने की चेन

कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में 24 साल डेटा एंट्री ऑपरेटर और रील बनाने की व्यसन से ग्रस्त मोनिका एचएम नाम की एक लड़की को केंगेरी पुलिस ने गिरफ्तार किया है। मोनिका ने 10 मई 2024 को 36 वर्षीय अपनी मकान मालकिन दिव्या की संपत्ति चुराने के लिए उसकी गला घोंटकर हत्या कर दी थी। घटना के वक्त मृतका दिव्या और उसका 2 साल का बच्चा ही घर पर थे। मोनिका चिक्कबल्लापुरा जिले के चिंतामणि की की रहने वाली है।

रिपोर्ट के अनुसार, मोनिका ने लक्जरी वस्तुओं और पार्टियों पर खूब खर्च किया। इसके कारण उस पर 8 लाख रुपए का कर्ज हो गया। वह अपने प्रेमी को एक सामान ढोने वाला वाहन खरीदकर दी थी। उसने अपने मकान मालकिन दिव्या के गले में सोने का चेन देखा था और उसे हड़पना चाहती थी। इसके लिए दिव्या की हत्या की साजिश रची और फिर सोने की चेन ले ली।

मोनिका पिछले दो से तीन महीने से कोनसांद्रा स्थित दिव्या के घर के एक हिस्से में किराए पर रह रही थी। वह एक निजी कंपनी में काम करती थी। कुछ समय पहले ही उसने यह नौकरी छोड़ दी थी। वहीं, उसका प्रेमी एक पेशेवर ड्राइवर है। वह अक्सर मोनिका के पास आता-जाता रहता है। उसने अपने प्रेमी को मकान मालिक से अपना पति बता रखा था।

मृतका की 39 वर्षीय पति गुरुमूर्ति केंगेरी के शिवनपाल्या में एक सैलून चलाते हैं। जिस वक्त दिव्या की हत्या हुई, उस समय वे काम पर गए हुए थे। दिव्या और उसका दो साल का बच्चा घर पर थे। हत्या के बाद मोनिका दिव्या की छत्तीस ग्राम सोने की चेन लेकर चली गई और इलाके के एक साहूकार के पास उसे गिरवी रख दिया। इस घर को गुरुमूर्ति ने चार महीने ही पहले बनवाया था।

घटना की जानकारी मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुँची और मोनिका से भी पूछताछ की। हालाँकि, उसने कई कहानियाँ सुनाकर पुलिस को गुमराह करने की कोशिश की। शंका होने के बाद पुलिस ने उसे हिरासत में लेकर कड़ाई से पूछताछ की तो वह टूट गई और आखिरकार अपना अपराध स्वीकार कर लिया।

पुलिस के अनुसार, मोनिका सोशल मीडिया पर सक्रिय थी और खूब रील बनाती थी। वह हर समय घूमती रहती थी और पार्टी करती रहती थी। उसने अपने बॉयफ्रेंड के लिए एक गाड़ी भी खरीदी थी। गुरुमूर्ति अपने परिवार के साथ मकान में पहले तले पर रहते थे। वहीं, मोनिका ग्राउंड फ्लोर पर रहती थी। जिस समय दिव्या की हत्या की गई, उस समय वह किचन में खाना बना रही थी। उसी दौरान मोनिका पीछे से आकर कपड़े में इस्तेमाल होने वाले नाड़े को गले में डाल कर कस दिया।

‘पाकिस्तान में हिंदू बच्चियों को किडनैप कर जबरन कबूल कराया जाता है इस्लाम, डर में कटता है जीवन’: CAA के तहत नागरिकता पाने वालों ने सुनाई आपबीती, कहा- PM मोदी ने दी नई जिंदगी

भारत सरकार ने नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के तहत एक साथ 350 लोगों को भारत की नागरिकता दे दी है। इनमें से 14 लोगों को गृह मंत्रालय ने बुलाकर नागरिकता के पत्र सौंपे, तो बाकियों को सारे कागजात ऑनलाइन उपलब्ध कराए गए। भारत की नागरिकता पाए लोगों में अधिकाँश लोग पाकिस्तान से आए हिंदू अल्पसंख्यक हैं, जो अपनी जान बचाकर पाकिस्तान से भागे थे। इन्हीं 350 लोगों में से एक भावना भी हैं, जो पाकिस्तान से भाग कर आई थीं। वो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह को धन्यवाद देती हैं और कहती हैं कि उनकी वजह से उन लोगों को नई जिंदगी मिली।

दिल्ली के आदर्श नगर में रह रहीं भावना ने कहा, “वहाँ हमें बहुत मुश्किलें झेलनी पड़ती हैं। लड़कियाँ पढ़ नहीं सकतीं और घरों से बाहर निकलना मुश्किल होता है। मुस्लिम हिंदू लड़कियों को किडनैप कर लेते हैं और उन्हें जबरन इस्लाम कबूल करवाया जाता है। लड़कियों को इतना खौफ रहता है कि वे घरों से बाहर नहीं निकलतीं। मैं काफी छोटी थी, तब से ही यहाँ हूँ। मुझे तो पाकिस्तान के अपने घर के अलावा ज्यादा कुछ याद नहीं है। इसकी वजह यह थी कि घर से बाहर ही नहीं निकलते थे। अब भी हमारे तमाम रिश्तेदार वहाँ हैं, जो भारत आना चाहते हैं। लेकिन उन्हें वीजा पाने में मुश्किल हो रही है।”पाकिस्तान से उत्पीड़न का शिकार होकर आए हिंदू परिवार की बेटी ने कहा कि हम अपने देश में लौटकर खुश हैं।

भावना ने कहा कि पीएम नरेंद्र मोदी ने हम लोगों की मदद की। हम पीएम मोदी और अमित शाह को धन्यवाद देते हैं। भावना कहा, ‘मैं एक टीचर बनना चाहती हूं और यहाँ की महिलाओं को पढ़ाना चाहती हूँ।’

दिल्ली के मजनूँ का टीला में रहने वाली मीरा को भी भारत की नागरिकता मिल गई है। सीएए के माध्यम से नागरिकता मिलने के बाद मीरा ने कहा, “हमने 3-4 साल पहले नागरिकता के लिए आवेदन किया था। हमें आए हुए 8-9 साल हो गए थे जब यह घोषणा की गई थी कि हमें नागरिकता मिलेगी। हमने अपनी पोती का नाम भी ‘नागरिकता’ रखा है। कल जब हमें नागरिकता मिली तो हमने भगवान कृष्ण को मिठाइयाँ अर्पित कीं और विशेष भोजन तैयार किया।”

दिल्ली में रहने वाले शीतल दास 5 अक्टूबर 2013 को पाकिस्तान छोड़कर दिल्ली पहुँचे थे। तब से वो यहीं पर हैं। शीतल दास ने कहा, “हमने पिछले महीने ही नागरिकता के लिए अप्लाई किया था और 15 मई को हमें नागरिकता मिल गई। अब हम सामान्य जीवन जी सकेंगे। काम कर सकेंगे और बच्चों को पढ़ा लिखा सकेंगे। अब हमारे बच्चों का भविष्य भी सुधर जाएगा।”

यशोधरा नाम की महिला ने कहा, “हम 2013 में आए, लेकिन हमारे पास पानी और बिजली की सुविधा तक नहीं थी। हमनें नागरिकता के लिए काफी कोशिश की, लेकिन अब जाकर मिली है। हमारा तो जो हुआ, वो हुआ, हमारे बच्चों का भविष्य संवर जाएगा। हम बहुत खुश हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी को बहुत शुक्रिया, अब हमारे बच्चे भी पढ़ लिख पाएँगे और अपना भविष्य संवार पाएँगे। हम पाकिस्तानी कहे जाते थे, लेकिन अब हमें कोई पाकिस्तानी नहीं कहेगा। अब हम हिंदुस्तानी हो गए हैं।”

अमृता नाम की बच्ची ने कहा, “हम 2013 में पाकिस्तान से आए थे। न बिजली की सुविधा थी और न ही स्कूल की। अब दोनों सुविधाएँ मिलेंगी। मैं बड़ी होकर डॉक्टर बनना चाहती हूँ।”

गौरतलब है कि भारत सरकार ने नागरिकता संसोधन विधेयक को 2019 में ही पारित कर दिया था और इस साल मार्च से इसे कानून के तौर पर लागू कर दिया। सीएए के तहत पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से धार्मिक उत्पीड़न का शिकार होकर आए अल्पसंख्यकों को नागरिकता दी जानी है। इन अल्पसंख्यकों में हिंदू, ईसाई, सिख, पारसी, जैन और बौद्ध धर्म के लोग हैं। सरकार ने इस साल मार्च में इस कानून को लागू करते समय इसके प्रावधानों के बारे में भी बताया था।

चुनाव देख ‘इच्छाधारी आंदोलनजीवी’ ने बदला चोला, ‘राजनीतिक विश्लेषक’ बन BJP को बताया बहुमत से दूर: 2019 में योगेंद्र यादव का सारा गुणा-भाग रहा था फेल

देश में लोकसभा चुनावों का माहौल है। हर चुनाव की तरह खुद को राजनीतिक पंडित और चुनावी विशेषज्ञ बताने वाले पेशेवर प्रदर्शनकारी योगेन्द्र यादव अपने अनुमानों के साथ वापस आ गए हैं। जिस तरह कोई भी उनके रवैये से इस बात का अंदाजा लगा सकता है, उन्होंने इस चुनाव में भाजपा के नेतृत्व वाले NDA के बहुमत ना पाने की एक भविष्यवाणी कर दी है।

योगेन्द्र यादव ने इसके लिए अपने यूट्यूब चैनल पर एक वीडियो डाला है। योगेन्द्र यादव का दावा है कि मीडिया वर्तमान में फैक्ट दबा रही है। उनका कहना है कि भाजपा को 2024 लोकसभा चुनावों में बहुमत नहीं मिलेगा। योगेन्द्र यादव ने कह़ा, “35 साल से चुनाव देखने के अपने अनुभव के आधार पर बता रहा हूँ कि भाजपा बहुमत नहीं ला रही। भाजपा 272 से बहुत नीचे है। भाजपा सहयोगियों के साथ NDA भी बहुमत के आँकड़े से नीचे हो सकता है।”

इसके बाद योगेन्द्र यादव ने अपने हिसाब एक गणित बताना चालू किया। योगेन्द्र यादव ने बताया कि कर्नाटक में भाजपा को इस बार कम से कम 10 सीटों का नुकसान होगा। महाराष्ट्र में भी 20 सीट के नुकसान का आकलन योगेन्द्र यादव ने भाजपा के लिए बताया। इसके बाद उन्होंने गुजरात और राजस्थान में भी 10 सीट भाजपा के लिए बताया। हरियाणा, पंजाब, चंडीगढ़ और हिमाचल प्रदेश तथा दिल्ली में भाजपा को 10 सीट का नुकसान होगा।”

योगेन्द्र यादव ने इसके बाद और भी कई राज्यों की गणित समझाई। योगेन्द्र यादव ने दावा किया कि मध्य प्रदेश, छतीसगढ़ और झारखंड में भी भाजपा को 10 सीटों का नुकसान होगा। उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में भी भाजपा को 15 सीटों का नुकसान होने का दावा किया। इसके बाद उन्होंने कई राज्यों का ब्यौरा दिया। आखिर में गुणा भाग करके योगेन्द्र यादव ने समझाया कि भाजपा इस बार कम से कम 75 सीट हारेगी और NDA 100 सीट हारेगा।

इसी हवा हवाई गणित के आधार पर योगेन्द्र यादव ने कहा कि भाजपा को 233 जबकि उनके सहयोगियों को 35 सीट मिलेगी। ऐसे में अंत में उन्होंने अपनी बात सिद्ध की कि भाजपा और NDA 272 के आँकड़े से नीचे रह जाएँगे।

योगेन्द्र यादव ने यह पूरी गणित समझा दी लेकिन इसका स्रोत क्या है यह नहीं बताया। उनका कहना था कि मैं कहता हूँ तो मान ही लो। क्या पता सच ही हो जाए। साल के चार महीने प्रदर्शनों के लिए देने वाले योगेन्द्र यादव की इस गणित में ना किसी सर्वे का हवाला था और ना ही और कोई विश्वसनीय स्रोत। हालाँकि, यह कोई नई बात नहीं है कि योगेन्द्र यादव ऐसे बेसिरपैर के सर्वे देते हों, इसे पहले 2019 के लोकसभा चुनाव में भी वह मुँह की खा चुके हैं।

2019 में भी फेल हो चुके योगेन्द्र यादव

भाजपा के लिए सीटों के नुकसान की बात यादव 2019 लोकसभा चुनावों में भी कर चुके हैं। तब यादव ने विशेष प्रकार की गणित बैठा कर बताया था कि भाजपा 100 सीट हारने वाली है। उनका दावा था कि पीएम मोदी की लोकप्रियता घट रही है। उन्होंने यह भी बताया था कि यह एकदम स्पष्ट बात है। उन्होंने दावा किया था कि 2004 के चुनाव की तरह ही भाजपा 2019 में हार जाएगी। इसके लिए उन्होंने बताया था कि 2004 में भी भाजपा सत्ता में अच्छी लहर के बावजूद नहीं लौट सकी थी, और यह फिर होगा।

योगेन्द्र यादव ने तब एक लेख में बताया था कि भले ही पीएम मोदी की रेटिंग ज्यादा हो लेकिन वह हार सकते हैं। इसके बाद 303 सीट जब भाजपा ने 2019 में जीत ली तो योगेन्द्र यादव खीज गए। उन्होंने एक बातचीत में वोटरों का गला पकड़ कर उन्हें मूर्ख कहने की बात कही थी।

एक बातचीत में योगेन्द्र यादव ने कहा था, ” अपने निर्वाचन क्षेत्र गुरुग्राम में मैंने लोगों से यह सुनिश्चित करने के लिए एक विशेष अपील की थी कि भाजपा को किसी भी कीमत पर हराया जाए। मैंने कहा था कि यह प्रधानमंत्री हमारे देश के इतिहास में अब तक का सबसे बड़ा झूठाप्रधान मंत्री है। मतदाताओं ने मेरी एक भी बात नहीं सुनी। मैं दुखी हूँ, मैं गुस्सा हूँ और मैं निराश हूँ। मैं उनका कॉलर पकड़कर कहना चाहता हूँ, बेवकूफों।”

गुजरात चुनाव में भी गलत हुआ अनुमान

2017 के गुजरात विधानसभा चुनाव में भी योगेन्द्र यादव ने ऐसा ही अनुमान लगाया था। भाजपा का गढ़ कहे जाने वाले गुजरात को लेकर यादव का अनुमान था कि यहाँ भाजपा हार जाएगी। योगेन्द्र यादव ने दावा किया था कि चुनावी विशेषज्ञ असल सच्चाई जनता को नहीं बता रहे। उनका दावा था कि 2017 गुजरात विधानसभा चुनाव में कॉन्ग्रेस को 113 सीट मिलेगी और वह सरकार बनाएगी। हालाँकि, नतीजों में भाजपा को 99 और कॉन्ग्रेस को 77 सीट मिली।

इसके बाद योगेन्द्र यादव ने माफ़ी माँग ली। योगेन्द्र यादव ने अपनी माफ़ी में लिखा था, “मैं माफ़ी माँगता हूँ, मेरा चुनाव अनुमान गलत था, पहले अनुमान से 3% वोट खिसक गया। मैंने कोई मन की बात नहीं कही थी ना कोई प्रचार किया था। मैंने डेटा, जमीनी रिपोर्ट और जनमत सर्वेक्षणों पर भरोसा किया था। फिर भी मैं गलत था। EVM को दोष देना मूर्खता होगी। गलती स्वीकार करने और सीखने की जरूरत है।”

योगेन्द्र यादव को भी भाजपा और पीएम मोदी करके मजा आता है। लेकिन सबसे अधिक हास्यास्पद बात यह है कि भाजपा जैसी जिताऊ चुनावी मशीन पर प्रश्न खड़े करने वाले योगेन्द्र यादव 2014 में गुरुग्राम से AAP से चुनाव लड़े थे। इसमें उनकी जमानत तक जब्त हो गई थी। इसके एक वर्ष बाद उन्हें पार्टी से भी निकाल फेंका गया था। इसके बाद वह फिर से फर्जी अनुमान लगाने के धंधे में उतर गए।

चाहे वह CAA प्रदर्शन हो, किसानों का विरोध प्रदर्शन हो या कॉन्ग्रेस नेता राहुल गांधी की विवादास्पद भारत जोड़ो यात्रा में शामिल होना हो, योगेन्द्र यादव हर उस काम में शामिल हैं, जो पीएम मोदी को सत्ता से हटाने के लिए हो रहा है। हालाँकि, उनके अब तक के प्रयासों से हार के अलावा उन्हें कुछ नहीं मिला है यही आगे होने की संभावना है।

‘घर आए TMC के गुंडे, हाथ-पैर बाँधकर ले गए’: बोली संदेशखाली की पीड़िता- गुनहगारों के पक्ष में गवाही देने का डाल रहे दबाव, BJP ने शेयर किया वीडियो

पश्चिम बंगाल के संदेशखाली में डर और हिंसा का माहौल है। टीएमसी के ताकतवर नेता शाहजहाँ शेख और उसके गुंडों के अत्याचारों की नित नई कहानियाँ सामने आ रही हैं, जिन्होंने लोगों को हिलाकर रख दिया है। इस पूरे मामले में अब टीएमसी के गुंडे फिर से सक्रिय हो गए हैं और शेख शाहजहाँ और उसके गुर्गों के अत्याचारों को बयाँ करने वाली महिलाओं, पीड़ितों को पीट रहे हैं, धमका रहे हैं, ताकि शाहजहाँ शेख के खिलाफ कोई गवाही न दे और वो छूट जाए।

गुरुवार (16 मई 2024) को पश्चिम बंगाल बीजेपी ने एक नया वीडियो क्लिप जारी किया है, जिसमें संदेशखाली में पीड़ितों को चुप कराने की टीएमसी के गुंडों और कार्यकर्ताओं की जबरदस्ती के बारे में पीड़ित ने बताया है। बीजेपी ने दावा किया है कि वीडियो में दिख रही महिला का नाम अन्वेषा मंडल है, जो संदेशखाली में हिंदू महिलाओं के यौन उत्पीड़न के खिलाफ बोलने वालों में सबसे आगे रही हैं। 1.01 मिनट के वीडियो में अन्वेषा मंडल ने बताया है कि कैसे टीएमसी के गुंडों ने उनका अपहरण किया और उन्हें जान से मारने की कोशिश की।

वीडियो में अन्वेषा मंडल ने कहा, “टीएमसी के धमकी दी है कि अगर वो संदेशखाली के अपराधियों को बचाने के लिए उनके पक्ष में गवाही नहीं देंगी, तो उन्हें जान से मार दिया जाएगा।” अन्वेषा मंडल ने कहा कि उन पर प्रेशर डाला जा रहा है कि उन्हें कोर्ट में टीएमसी के नेताओं के खिलाफ लगे आरोपों के खिलाफ बयान देना है। उन्हें कोर्ट में बताना है कि टीएमसी के नेताओं शेख शाहजहाँ और उसके आदमियों खासकर दिलीप मलिक पर लगे आरोप झूठ हैं। ऐसा करने से मना करने पर उन्हें जान से मारने की कोशिश की गई।

अन्वेषा मंडल ने कहा, “मैंने अपने नाम की आवाज सुनी और ये देखने के लिए बाहर आई कि मुझे कौन बला रहा है। तभी टीएमसी के गुंडों ने हमला कर दिया और मेरा मुँह बाँध दिया और मुझे अपने साथ ले गए।” मंडल ने बताया कि टीएमसी के बदमाशों ने उनका हाथ-पैर बाँध दिया और तालाब में फेंक दिया। टीएमसी के गुंडों ने कहा कि अगर उनकी बात नहीं मानी गई, तो वो उन्हें जान से मार देंगे। वो वहीं पर पड़ी रही। जब गुंडे उन्हें ले जा रहे थे, तभी उनकी बेटी चिल्लाने लगी। इसके बाद पड़ोसियों ने उन्हें ढूँढना शुरू किया, लेकिन टीएमसी के गुंडों ने उन्हें तालाब में फेंक दिया और फरार हो गए।

पश्चिम बंगाल बीजेपी ने इस क्लिप को शेयर करते हुए लिखा, “संदेशखाली में टीएमसी के अत्याचारों के खिलाफ आवाज उठाने वाली अन्वेषा मंडल अपहरण की कोशिश से बाल-बाल बच गई। प्रियंका टिबरेवाल की संदेशखाली यात्रा से टीएमसी के लोग बौखला गए हैं, जिसके बाद टीएमसी एक्सपोज हो गई। दिलीप मलिक के नेतृत्व में टीएमसी के गुंडों ने अन्वेषा को मार कर उनकी आवाज को दबा देने की कोशिश की। टीएमसी के गुंडों की इस जबरदस्ती की नीति से पता चलता है कि टीएमसी की सरकार लोगों का उत्पीड़न कर रही है। संदेशखाली न्याय की माँग कर रहा है। टीएमसी के आतंक का राज खत्म होना चाहिए।”

इसी क्लिप को बीजेपी नेता और वकील प्रियंका टिबरेवाल ने भी शेयर किया। उन्होंने संदेशखाली में पीड़ितों से मुलाकात की थी। उन्होंने लिखा, “आज (15 मई 2024) मैं संदेशखाली गई थी, जहाँ टीएमसी के गुंडे लोगों को धमका रहे हैं कि वो शेख शाहजहाँ को निर्दोष साबित करें। इसमें से एक महिला अन्वेषा मंडल भी थी, जिन्होंने मुझे दिलीप मलिक के अत्याचारों के बारे में बताया, जिसके कुछ दिन पहले एक महिला को अगवा कर लिया था। उनकी शिकायत के बाद आज शाम (15 मई 2024) को टीएमसी के गुंडों ने उन्हें अगवा कर लिया और उनके हाथ-पाँव बाँधकर तालाब के किनारे फेंक दिया, ताकि उनकी जान चली जाए। हमने उन्हें पुलिस स्टेशन तक पहुँचाया।”

बता दें कि बीजेपी नेता और वकील प्रियंका टिबरेवाल ने 15 मई 2024 को संदेशखाली का दौरा किया था। अन्वेषा मलिक ने टीएमसी नेता दिलीप मलिक द्वारा हिंदू महिलाओं के यौन उत्पीड़न के बारे में पूरी जानकारी दी थी। बीजेपी नेता प्रियंका उनके साथ शिकायत दर्ज कराने पुलिस स्टेशन भी गई थी। इसी शिकायत के बाद टीएमसे गुंडों ने उन्हें उनके घर से अगवा कर लिया और दिलीप मलिक के साथ ही अत्याचारी टीएमसी नेताओं के पक्ष में गवाही देने के लिए धमकाया।

बता दें कि संदेशखाली विवाद पिछले कुछ महीनों के दौरान एक राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का रूप ले चुका है। एक तरफ बीजेपी ने पीड़ितों के कई पक्ष में सबूत सामने आए हैं, तो दूसरी तरफ टीएमसी लगातार संदेशखाली के पीड़ितों को गलत ठहराने की कोशिश कर रही है। टीएमसी दावा कर रही है कि संदेशखाली मामले को बीजेपी ने सिर्फ पश्चिम बंगाल को बदनाम करने के लिए उठाया है और वो लोकसभा चुनाव में इसका फायदा उठाने की कोशिश कर रही है।

कहीं फटा बम, कहीं भेड़-बकरियों की तरह ठूँसे बच्चे, कहीं यौन शोषण कर रहा मौलवी… ये कौन सा ‘दीनी तालीम’ दे रहे मदरसे, कौन करेगा इसकी सफाई

बिहार के छपरा के मोतिराजपुर गाँव में स्थित एक मदरसे में बम ब्लास्ट हो गया। छानबीन हुई तो पता चला कि एक छात्र मदरसे के पीछे मिले बम को गेंद समझकर मदरसे में उठा लाया और फिर खेलने लगा। मौलाना ने देखा तो उसे बाहर फेंकना चाहा लेकिन तब तक बम फट गया था। घटना में मौलाना और छात्र दोनों गंभीर रूप से घायल है।

पुलिस मामले की छानबीन कर रही है। पता लगाया जा रहा है कि आखिर ये बम आए कहाँ से? शुरुआती जाँच में तो इसे पटाखे फैक्ट्री का बम बता दिया गया लेकिन इससे बात खत्म नहीं होती। समाचारों में मदरसों को लेकर जो खबरें आना शुरू हुई हैं वो सवाल खड़ा करती हैं कि आखिर दीनी तालीम के नाम पर मदरसों में चल क्या रहा है। कहीं से यौन उत्पीड़न की खबरें आती हैं, कहीं से शारीरिक शोषण, क्रूरता की तो कहीं से कट्टरपंथ के पाठ की।

ज्यादा दिन नहीं बीते राजस्थान के अजमेर में 5 छात्रों ने इमाम को डंडे से पीट-पीटकर और रस्सी से गला घोंटकर मार डाला था। जब मामला खुला तो चौंकाने वाली बात सामने आई। छात्रों ने बताया कि इमाम के यौन उत्पीड़न से तंग आकर ये हत्या उन लोगों ने ही की। ये छात्र उस इमाम से इतने परेशान थे कि इन्होंने बकायदा साजिश रचकर उसको जान से खत्म किया। इसी तरह असम के सलमारा जिले में एक मदरसे के अंदर नाबालिग लड़के से यौन उत्पीड़न की घटना 9 मई को खुली थी। आरोपित मदरसे का मौलाना अखिरुल इस्लाम ही था। इस मौलाना ने बच्चे की मारपीट करके हालत ऐसी कर दी थी कि वो क्लास में जाने से डरता था।

पाकिस्तान से लेकर बांग्लादेश तक से मदरसों पर आती हैं खबर

ये 2-3 मामले वो हाल के मामले हैं जो पिछले एक हफ्ते में आए… महीनों का आँकड़ा देखें या फिर सालों की बात करें तो मदरसों में हो रहे कुकर्म की खबरों की गिनती आपको हमेशा बढ़ती हुई ही मिलेगी। मामले जिले, राज्य या किसी प्रदेश तक सीमित नहीं हैं। इस्लामी मुल्कों में भी मदरसों के यही हाल हैं।

कहीं से वीडियो आती है कि छोटे बच्चों को निर्ममता से पीटा जा रहा है, कहीं पता चलता कि क्लास के बीच में छात्राओं के साथ छेड़खानी होती है। किसी को मार्क्स देने के नाम पर परेशान किया जाता है तो किसी के मुँह में जबरन कपड़े ठूँस कर उसके साथ रेप होता है। अफ्रीका से तो एक बार ऐसी खबर भी आई थी कि वहाँ मदरसों में पढ़ने वालों से गरीब बच्चों से मौलवी भीख मँगवाने लगे थे।

इसी तरह पाकिस्तान की बात करें तो वहाँ भी मदरसों में बच्चों का यौन शोषण होता है, लेकिन उसके साथ वहाँ उन्हें ऐसी तालीम मिलती है कि वो आतंकी संगठन में शामिल होने से कोई गुरेज नहीं करते। पाकिस्तान का दारुल उलूम हक़्क़ानिया ऐसा ही एक मदरसा है जिससे पढ़कर निकले लोग तालिबान जैसे संगठनों में शामिल होकर कट्टरपंथ के रास्ते पर चल पड़ते करने लगते हैं। बांग्लादेश में भी मदरसों की ऐसी कई कहानियाँ हैं।

मीडिया में मौजूद कुछ खबरें तो यहाँ तक बताती हैं कि पाकिस्तान अपने आतंक का एजेंडा भारत में मदरसों के जरिए पूरा करने में लगा है…। हम इन खबरों को एक बार झुठलाने की अगर सोचें भी तो पिछले सालों में ऐसे तमाम उदाहरण सामने आ गए हैं जो बताते हैं आतंकी अपने टेरर मॉड्यूल को मदरसे के बहाने ही जमीन पर उतारना चाहते हैं।

असम में टेरर मॉड्यूल का भंडाफोड़

साल 2022 में असम में जो टेरर मॉड्यूल का भंडाफोड़ हुआ था वो याद करें तो पता चलता है कि कट्टरपंथियों की कितनी गहरी साजिश चल रही है। असम पुलिस ने उस समय कई आतंकियों को गिरफ्तार किया था और जिन मदरसों से इसके संबंध मिले थे उनपर हिमंता सरकार ने बुलडोजर चलवा दिया था। उन्होंने साफ-साफ ऐलान किया था कि अगर उन्हें पता चला कि किसी मदरसे में अवैध गतिविधियाँ चल रही हैं, देश विरोधी तालीम दी जा रही हैं तो तुरंत वो मदरसे को गिरवा देंगे। इसके बाद असम में 1281 के करीब मदरसे बंद हुए थे। सरकार ने फैसला लिया था कि प्रदेश में दीनी तालीम की जगह आधुनिक शिक्षा दी जाएगी जिससे बच्चे भविष्य में कुछ अच्छा कर सकें।

यूपी में एक्शन

इसके अलावा उत्तर प्रदेश की योगी सरकार भी लगातार कट्टरपंथ से लड़ने में प्रयासरत है, लेकिन उनके लिए ये काम इतना आसान नहीं है। मदरसों को फलने-फूलने के लिए खाद-पानी यूपी की पहले की सरकारों ने ही दिया। जब योगी सरकार आई तो अवैध रूप से चल रहे मदरसों पर शिकंजा कसना शुरू हुआ। योगी सरकार ने जाँच करवाई तो पता चला कि हजारों की संख्या में न केवल अवैध मदरसे चलाए जा रहे हैं बल्कि सीमाओं पर अचानक इनकी गिनती बढ़ी है। सरकार के पास जब इनकी रिपोर्ट पहुँची तो वह इस पर सख्त हुए। करीब 16000 मदरसों पर एक्शन लिया गया। इसके बाद एक खबर यह भी आई कि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भी याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य मदरसा बोर्ड एक्ट को असंवैधानिक घोषित कर दिया है। हालाँकि बाद में जब ये मामला सुप्रीम कोर्ट में पहुँचा तो वहाँ उच्च न्यायालय के फैसले पर रोक लगा दी गई…।

दीनी तालीम के नाम पर बच्चे भेजे जा रहे मदरसों में

बता दें कि जिस तरह की तस्वीर पिछले कुछ समय में मदरसों की उभरकर आई है उससे यही पता चलता है कि ये आने वाले समय में कितना भयावह रूप ले सकते हैं। केवल राष्ट्रीय सुरक्षा की दृष्टि से ही नहीं सामाजिक दृष्टि से भी सवाल उठता है कि आखिर ऐसे संस्थानों का काज क्या होता है।

क्या मजहब के नाम पर बच्चों को दुनिया से पीछे कर देना मौलानाओं का काम है? या फिर उन्हें यौन उत्पीड़न का शिकार बनाकर उन्हें भीतर से तोड़ने का बीड़ा उन्होंने उठाया है? मदरसों में बम फटना या रेप होना या आतंकियों को पनाह मिलना कोई सामान्य घटना नहीं हैं… लेकिन इन सबकों लेकर अलग-अलग जगह के मदरसे बदनाम हुए हैं।

इनकी खबरें पढ़ने के बावजूद मजहब की बातें करने वाले कुछ कट्टरपंथी विचारधारा वाले अपने बच्चों को आधुनिक शिक्षा देने की बजाय मदरसों में जाने को मजबूर करते हैं और जब वो जाने से मना करते हैं तो उनके साथ मारपीट होती है।

कुछ दिन पहले एनसीपीआर अध्यक्ष ने भी मदरसों में जमा होती भीड़ की तस्वीर को दुनिया के आगे उजागर किया था। उन्होंने अपने ट्वीट में बताया था कि कैसे गरीब बच्चों को ला लाकर मदरसों में भरा जा रहा है। जहाँ न बुनियादी सुविधाएँ उन्हें मिलती हैं और न वो अच्छे से जीवन व्यतीत कर पाते हैं।