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प्रीति बनी तीन तलाक पीड़िता रुबीना, प्रमोद कश्यप संग किया विवाह: वृंदावन की महिला ने बरेली में की घर वापसी

बरेली में रुबीना सैय्यद ने सनातन में घर वापसी कर ली है। उन्होंने सनातन में वापसी कर अपना नाम प्रीति रखा है। साथ ही उन्होंने अपने प्रेमी प्रमोद कश्यप के साथ पूर्ण विधि-विधान से विवाह कर लिया है। रुबीना वृंदावन की रहने वाली हैं। उनका पहले निकाह हुआ था, जिसने उनके 2 बच्चे हैं, लेकिन उनके शौहर ने 6 महीने पहले तीन-तलाक देकर घर से निकाल दिया था। इसके बाद वो प्रमोद के संपर्क में आईं और अब प्रीति बन चुकी हैं। प्रीति का कहना है कि मुस्लिम होने की वजह से उन्हें प्रताड़ना झेलनी पड़ी और तीन तलाक का दंश भी, क्योंकि इस्लाम में महिलाओं की कोई इज्जत नहीं है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, गुरुवार (15 मई 2024) को बरेली के अगस्त्य मुनि आश्रम में सनातन अपनाने वाली प्रीति का पुराना नाम रुबीना था। वो मथुरा के वृंदावन की रहने वाली हैं। उनका शौहर उनका उत्पीड़न करता था और 6 माह पहले तीन तलाक देकर उन्हें घर से निकाल दिया था। उनके 3 और 6 साल के दो बेटे हैं, लेकिन शौहर ने उन्हें अपने पास रख लिया। इसके बाद वो बदायूँ के रहने वाले प्रमोद कश्यप के संपर्क में आईं। दोनों में प्रेम हुआ, तो मिलने का रास्ता भी निकला। इसके बाद बरेली में आचार्य के के शंकधार ने उनका गोमूत्र-गंगाजल से शुद्धिकरण कराया और फिर प्रीति और प्रमोद सात जन्मों के बंधन में बंध गए। खास बात ये है कि प्रीति अपने पति प्रमोद से 8 साल बड़ी हैं, लेकिन अब दोनों सातों जन्म साथ निभाने की सौगंध ले चुके हैं।

प्रीति ने बताया कि उन्हें शुरू से हिंदू धर्म में आस्था थी। उन्हें हिंदू धर्म अच्छा लगता है। उन्होंने करीब 15 दिन पहले ही अपना घर छोड़ दिया। अब वह अपने पति के साथ रहेगी। दोनों एक-दूसरे को बहुत प्यार करते हैं। प्रीति ने कहा कि इस्लाम धर्म में महिलाओं का कोई सम्मान नहीं करता है। तीन तलाक और हलाला जैसी कुप्रथाएँ प्रचलित हैं। मैंने स्वेच्छा से घर वापसी कर हिंदू रीति रिवाज से सनातन धर्म स्वीकार कर लिया है। प्रीति ने बताया कि पहले बच्चों की याद आती थी, लेकिन अब धीरे-धीरे वो उनके बिना जीना सीख गई हैं।

बता दें कि पिछले 2 दिनों में घर वापसी का ये तीसरा मामला है। इससे पहले, उत्तर प्रदेश के बरेली और मुरादाबाद जिलों में 2 मुस्लिम लड़कियों ने घर वापसी की है। इन दोनों ने इस्लाम छोड़ कर हिन्दू धर्म अपनाया और हिन्दू युवकों से विवाह किया है। बरेली में जहाँ रामपुर की फरहाना पल्ल्वी बन चुकी हैं तो वहीं मुरादाबाद की नरगिस अभी मानसी नाम से जानी जाएँगी। दोनों लड़कियों ने हिन्दू धर्म में अपनी पहले से आस्था बताते हुए खुद को अब तीन तलाक और हलाला के डर से आज़ाद बताया है।

अभिषेक मनु सिंघवी को राज्यसभा भेजना चाहते हैं केजरीवाल, स्वाति मालीवाल से माँगा है इस्तीफा: रिपोर्ट में दावा, विभव कुमार को NCW ने बुलाया

राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) ने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल के पूर्व निजी सचिव बिभव कुमार को तलब किया है। आयोग ने उन्हें शुक्रवार (17 मई, 2024) को इस मामले में पेश होने को कहा गया है। उन्हें AAP की राज्यसभा सांसद और दिल्ली महिला आयोग की पूर्व अध्यक्ष स्वाति मालीवाल से बदसलूकी के मामले में तलब किया गया है।

स्वाति मालीवाल से दिल्ली CM आवास में हुई बदसलूकी मामले में अब दैनिक भास्कर ने एक रिपोर्ट में बताया है कि वह घटना वाले दिन अपनी राज्यसभा सीट को लेकर बात करने गईं थी। भास्कर की रिपोर्ट दावों के अनुसार, स्वाति मालीवाल से AAP ने सांसद पद से इस्तीफ़ा देने को कहा है। वह इस इस्तीफे को लेकर दिल्ली CM अरविन्द केजरीवाल से बात करने गईं थी।

स्वाति सिंघवी bhaskar
दैनिक भास्कर की खबर का वह हिस्सा, जहाँ स्वाति की जगह सिंघवी को राज्यसभा भेजे जाने की बात कही गई है।

इसी रिपोर्ट में कहा गया है कि स्वाति मालीवाल के बदले अब AAP वकील और कॉन्ग्रेस के पूर्व राज्यसभा सांसद अभिषेक मनु सिंघवी को राज्यसभा भेजना चाहती है। इसीलिए स्वाति से सीट खाली करने को कहा गया है। स्वाति को यह सन्देश कुछ पार्टी कार्यकर्ताओं के जरिए भिजवाया गया था। उन्हें पार्टी में बड़ा पद दिए जाने की बात भी कही गई थी।

स्वाति की जगह जिन वकील अभिषेक मनु सिंघवी को AAP से राज्यसभा भेजे जाने की बात कही जा रही है, वह पूर्व में कॉन्ग्रेस से राज्यसभा सांसद रह चुके हैं। वह हाल ही में हिमाचल प्रदेश से कॉन्ग्रेस से राज्यसभा का चुनाव विधायकों की बगावत के चलते हार गए थे। अभिषेक मनु सिंघवी ही दिल्ली शराब घोटाला मामले में CM केजरीवाल की पैरवी कर रहे हैं। उनकी ही पैरवी से सुप्रीम कोर्ट ने CM केजरीवाल को 1 जून तक के लिए चुनाव प्रचार करने की अंतरिम जमानत दी है।

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट से पहले भी डेली पायनियर की एक रिपोर्ट में ऐसा ही दावा किया गया था। डेली पायनियर में सौम्या शुक्ला की एक रिपोर्ट के अनुसार, स्वाति मालीवाल से उनके राज्यसभा सांसद के पद से इस्तीफ़ा देने को पार्टी ने कह़ा है। हालाँकि, उस रिपोर्ट में उनकी जगह सिंघवी को भेजे जाने की बात नहीं कही गई थी।

इसके अलावा यह बात भी कही जा रही है कि स्वाति मालीवाल, CM केजरीवाल की गिरफ्तारी के समय अमेरिका में थी और इस मामले में अधिक सक्रिय नहीं रहीं थीं। कहा जा रहा इसको लेकर पार्टी का एक धड़ा उसने नाराज है, इसलिए भी उनके सांसद पद पर खतरा मंडरा रहा है।

गौरतलब है कि सोमवार (13 मई, 2024) को सुबह AAP राज्यसभा सांसद स्वाति मालीवाल ने पुलिस को फ़ोन करके बताया कि उनके साथ CM आवास में मारपीट हुई। बताया गया कि उन्होंने CM केजरीवाल के निजी सचिव बिभव कुमार पर मारपीट के आरोप लगाए लेकिन थाने में रिपोर्ट नहीं दर्ज करवाई। इस मामले में दिल्ली पुलिस के अफसर उनके घर भी पहुँचे।

AAP की तरफ से इस मामले को लेकर राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की और यह बात मानी कि बिभव कुमार ने मालीवाल के साथ बदसलूकी की है। उन्होंने यह भी कहा कि यह मामला CM केजरीवाल के संज्ञान में है और इस पर कार्रवाई होगी।

स्वाति मालीवाल से हुई बदसलूकी की वजह पर कयासों के बीच इसकी सच्चाई इस घटनाक्रम से जुड़े किरदार ही बता सकते हैं। पहला किरदार पीड़ित यानी स्वाति मालीवाल हैं, जिन्होंने घटना के बाद से चुप्पी साध रखी है। दूसरा किरदार आरोपित बिभव कुमार है, जो अरविन्द केजरीवाल के साथ घूम रहा है। तीसरे किरदार CM केजरीवाल खुद हैं, जिन्होंने इससे जुड़े सवालों के कोई जवाब नहीं दिए और जिनके साथ लखनऊ में बिभव कुमार को देखा गया।

‘दोनों मोदी-योगी बनकर आए हैं, शाबाश… बहुत अच्छे’: बच्चों को PM मोदी ने मंच से दिया लाड़-प्यार, अखिलेश-राहुल गाँधी की जोड़ी को बताया खतरनाक

लोकसभा चुनाव 2024 को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुरुवार (16 मई 2024) को आजमगढ़, जौनपुर, भदोही और प्रतापगढ़ में चुनावी जनसभा करने वाले हैं। उन्होंने आजमगढ़ और जौनपुर में विशाल जनसभा को संबोधित किया है। इस दौरान उनके साथ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी साथ रहे। जौनपुर की जनसभा में पीएम और सीएम के वेश में आए दो बच्चे आकर्षण का केंद्र रहे।

मंच से भाषण देने के दौरान रैली में आए दो बच्चों को देखकर प्रधानमंत्री मोदी बेहद खुश हुए। इनमें से एक बच्चा पीएम मोदी का वेश बनाया था, जबकि दूसरा बच्चा सीएम योगी का वेश बनाया था। दोनों बच्चों को देखकर पीएम मोदी ने कहा, “ये क्या बढ़िया मोदी-योगी बना लाए हो भाई। ये मोदी तो इतना सुंदर लग रहा है।”

बच्चों और उसके अभिभावक को प्रोत्साहित करते हुए पीएम मोदी ने आगे कहा, “क्या बढ़िया मेकअप किया है भाई। हाथ भी बढ़िया हिला रहे हो। दोनों मोदी-योगी बनकर आ गए। शाबाश… शाबाश… बहुत बढ़िया किया आपने। देखिए सब अखबार वालों की नजर मेरे से हट गई और आप पर आ गई। बढ़िया है। वाह..। ये मोदी को तो हाथ हिलाना भी आ गया है।”

लोगों को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि ये पूरा क्षेत्र हेल्थ और एजुकेशन का मजबूत हब बन रहा है। उन्होंने कहा कि ‘मोदी-योगी’ आने वाले पाँच सालों में पूर्वांचल की तस्वीर और तकदीर दोनों बदलने वाले हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि मतगणना के दिन 4 जून 2024 को जौनपुर में इतनी इमरती (एक प्रकार की मिठाई) बँटेगी कि सारे रिकॉर्ड टूट जाएँगे।

पीएम ने मोदी ने इस दौरान राहुल गाँधी और अखिलेश यादव पर भी जमकर हमला किया। पीएम मोदी ने कहा कि इन शहजादों का खेल खतरनाक है। ये लोग दक्षिण भारत में सनातन को गालियाँ दिलवाने का काम करते हैं। उन्होंने कहा कि पहले लोग विकास की बातें करते थे तो कभी दिल्ली की चर्चा होती थी तो कभी मुंबई की, लेकिन आज देश और दुनिया काशी की भी चर्चा करती है और अयोध्या की भी।

वहीं, आजमगढ़ में पीएम मोदी ने कहा कि देश में कोई माई का लाल पैदा नहीं हुआ जो CAA हटा दे। कॉन्ग्रेस और समाजवादी पार्टी पर हमला करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि दोनों दल भले ही अलग दल हैं, लेकिन उनकी दुकान एक ही है। उन्होंने कहा कि ये दोनों दल झूठ, तुष्टिकरण, परिवारवाद और भ्रष्टाचार के सामान बेचते हैं।

जापान, सिंगापुर, ऑस्ट्रेलिया… सब पीछे, एशिया-प्रशांत में सबसे अधिक डाटा सेंटर क्षमता अब भारत के पास: जानिए क्या होता है डाटा सेंटर, कितना महत्वपूर्ण है ये

जमीन से जुड़े निवेश को लेकर काम करने वाली एक कंपनी CBRE ने एक हालिया रिपोर्ट में कहा है कि भारत एशिया-प्रशांत क्षेत्र में सबसे अधिक डाटा सेंटर क्षमता वाला देश है। रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत के पास जनवरी-मार्च 2024 की तिमाही में 950 मेगावॉट की डाटा सेंटर क्षमता है, जो कि सक्रिय है। भारत ने इस मामले में जापान, कोरिया, ऑस्ट्रेलिया, और सिंगापुर जैसे देशों को पीछे छोड़ दिया है।

इस रिपोर्ट के अनुसार, आगे भी भारत के नेतृत्व के बने रहने की आशा है क्योंकि 2024 से 2026 के बीच भारत 850 मेगावॉट की क्षमता बढ़ाएगा। यह आसपास के किसी भी देश से अधिक है। रिपोर्ट बताती है कि भारत के पास 2023 के 2023 के अंत तक सक्रिय और निष्क्रिय डाटा सेंटर क्षमता कुल 1030 मेगावॉट थी। इसके 2024 के अंत तक 1370 मेगावॉट तक बढ़ने की उम्मीद है, जो कि इस वर्ष में 30% की बढ़ोतरी है।

रिपोर्ट में कहा गया, “भारत डाटा सेंटर सेक्टर, अपने आकर्षक निवेश के रिटर्न के कारण निवेशकों के लिए एक बढ़िया सेक्टर बन कर उभरा है। इस सेक्टर की सफलता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि 2018-2023 के बीच इसमें स्थानीय और विदेशी निवेशकों ने 40 बिलियन डॉलर (लगभग ₹3.3 लाख करोड़) निवेश करने के वादे किए हैं।

क्या होते हैं डाटा सेंटर?

हम और आप इंटरनेट पर जो भी देखते हैं, वह हमारे फोन या मोबाइल में सेव नहीं होता है। इसके उलट जब भी हम इन्टरनेट पर कोई गूगल सर्च या अन्य तरीक से इसकी खोज करते हैं तो यह हमारे सामने आ जाता है। ऐसे में जो भी हम देखते हैं, इसे कहीं ना कहीं स्टोर करने की जरूरत पड़ती है। डाटा सेंटर यही काम करते हैं। इनमें इंटरनेट का डाटा संग्रहित किया जाता है। जब भी कोई यूजर इसकी माँग करता है तो इस डाटा सेंटर से वह डाटा उस तक इंटरनेट के माध्यम पहुँचा दिया जाता है। यह काम कुछ माइक्रोसेकंड्स में होता है।

लगातार बढ़ते इंटरनेट के उपयोग के कारण डाटा सेंटर की माँग में तेजी देखी गई है। यह एक नए व्यापारिक क्षेत्र के रूप में उभर रहा है। देश में बड़े बड़े दता सेंटर बनाए जा रहे हैं। सुरक्षा दृष्टि से भी यह जरूरी है कि भारत का इंटरनेट डाटा, भारत में ही रहे। डाटा सेंटर की आवश्यकता भी लगातार बढ़ रही है। दरअसल, इसके कारण कई आईटी कम्पनियों को अपने खुद के संसाधन इस काम में नहीं लगाने पड़ते और वह बाकी चीजों पर ध्यान लगा सकती हैं।

भारत में लगातार बढ़ रहा दायरा

भारत में बीते कुछ वर्षों में इंटरनेट का उपयोग तेजी से बढ़ा है। इस कारण से डाटा सेंटर की जरूरत भी बढ़ी है। इस क्षेत्र में अब विदेशी निवेशक भी पैसा लगा रहे हैं, वह भारतीय निवेशकों के साथ मिलकर इस क्षेत्र में निवेश कर रहे हैं। इस क्षेत्र में लाभ भी काफी अधिक है। 2018 से 2023 के बीच भारत को इस संबंध में ₹3.5 लाख करोड़ के निवेश के वादे मिले, यह इस क्षेत्र की मजबूती को दिखाता है।

उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु जैसे राज्य में इस क्षेत्र में सबसे अधिक निवेश आए हैं। इस क्षेत्र में निवेश करने वाली बड़ी विदेशी कम्पनियों की नजर भी अब भारत पर पड़ी है। वह भारत में नए मॉडल के तहत डाटा सेंटर बना रही हैं। आने वाले समय में भारत के इस क्षेत्र में और आगे बढ़ने की उम्मीद है क्योंकि नई IT सेवाओं को बड़े स्तर पर डाटा सेंटर की आवश्यकता होती है।

चारधाम यात्रा के दौरान मंदिर परिसर के 200 मीटर के दायरे में मोबाइल फोन के इस्तेमाल पर पाबंदी, बिना रजिस्ट्रेशन के श्रद्धालु नहीं कर पाएँगे दर्शन

देवभूमि उत्तराखंड में चार धाम यात्रा पर लाखों श्रद्धालु पहुँच रहे हैं। हर दिन श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या की वजह से प्रशासन ने भी व्यवस्था बनाए रखने में पूरी ताकत झोंक दी है। इस बीच, उत्तराखंड सरकार ने चार धाम के 200 मीटर के दायरे में मोबाइल फोन का इस्तेमाल प्रतिबंधित कर दिया है, क्योंकि इससे यात्रियों के लिए बनाई गई व्यवस्था में दिक्कत हो रही थी। उत्तराखंड सरकार की मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने इस बारे में बयान भी जारी किया है। इसके साथ ही उन्होंने सभी श्रद्धालुओं से रजिस्ट्रेशन कराने के बाद ही चार धाम यात्रा पर आने की सलाह दी है, ऐसा न करने पर उन श्रद्धालुओं को रास्ते से ही लौटा दिया जाएगा।

उत्तराखंड सरकार के आदेश के मुताबिक, अब केदारनाथ, बद्रीनाथ, यमुनोत्री और गंगोत्री धाम के 200 मीटर के दायरे में मोबाइल फोन के उपयोग पर प्रतिबंध लग गया है। मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने इस संबंध में दिशा -निर्देश जारी करते हुए कहा कि नियमों का पालन नहीं करने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

उत्तराखंड की मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने कहा कि भारी संख्या में श्रद्धालु चारधाम यात्रा के लिए आ रहे हैं। इस दौरान कई लोग ऐसे भी पहुँच रहे जो आस्था नहीं बल्कि केवल घूमने के लिए आ रहे हैं और उनकी कुछ हरकतों की वजह से लोगों की आस्था को ठेस पहुँच रही है। कहा कि इस बात का विशेष ध्यान देने की जरूरत है कि यहाँ आस्था को कोई ठेस न पहुँचाए। धार्मिक भावनाएँ आहत नहीं होनी चाहिए। इसीलिए मोबाइल फोन पर बैन लगाने जैसा कदम उठाया गया है।

फेक न्यूज फैलाने पर होगी कार्रवाई

सचिवालय में बुधवार (15 मई 2024) को हुई बैठक में मुख्य सचिव ने चारधाम यात्रा पर ष्प्रचार करने वाले तथा यात्रा के सम्बन्ध में फेक न्यूज या वीडियो बनाने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई के निर्देश दिए। उन्होंने मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि यात्रा के प्रत्येक पड़ाव पर यात्रियों के लिए भोजन, पानी, शौचालय आदि की अच्छी व्यवस्था की गई है। कहीं भी कोई भगदड़ अब तक नहीं मची है। अगर कोई ऐसी अफवाह फैलाता है तो इसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

बिना रजिस्ट्रेशन नहीं कर पाएँगे दर्शन

इस दौरान मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने कहा कि तीर्थयात्रियों के लिए सारी व्यवस्था की गई है। हम सभी प्रदेशों के मुख्य सचिव को पत्र भेज रहे हैं कि कोई श्रद्धालु अपंजीकृत वाहन में या अपंजीकृत तरीके से न आएँ। बहुत सख्त जाँच की जा रही है। उन्होंने कहा कि अगर बिना रजिस्ट्रेशन के कोई गाड़ी दिखती है या यात्री बिना रजिस्ट्रेशन के उत्तराखंड में पहुँचते हैं, तो जाँच में पकड़े जाते ही उन्हें तुरंत लौटा दिया जाएगा। रजिस्ट्रेशन की व्यवस्था ही इसीलिए की गई है, ताकि श्रद्धालुओं की संख्या के हिसाब से सरकार व्यवस्था बनाए।

यह एक सामान्य तस्वीर नहीं, AAP की उस सोच का नग्न प्रदर्शन है जो देश की हर बेटी के लिए है खतरा

दिल्ली मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के घर पर स्वाति मालीवाल के साथ हुई बदसलूकी का मामला अभी मीडिया में ठंडा भी नहीं हुआ कि सीएम केजरीवाल अपने उस सेक्रेट्री बिभव कुमार के साथ पब्लिक में नजर आ गए जिस पर स्वाति को पीटने का इल्जाम लगा है। अचंभित करने वाली बात तो ये है कि केजरीवाल और बिभव के बीच में AAP नेता संजय सिंह भी दिखाई दे रहे हैं जिन्होंने पार्टी फोरम से आकर ऐलान किया था कि उनकी पार्टी स्वाति मालीवाल के साथ है और आरोपित के खिलाफ कार्रवाई होगी।

अचानक खींची गई तस्वीर में बिभव को संजय सिंह के ठीक पीछे देखा जा सकता है। वहीं केजरीवाल को गुलदस्ता लेकर मुस्कुराते हुए। तस्वीर देखकर लगता है कि मानो पार्टी में सब कुछ ठीक है और बिभव के साथ केजरीवाल का दिखना सामान्य बात है। लेकिन हकीकत ऐसी नहीं है। न पार्टी में कुछ ठीक है और न ही इस तस्वीर में। यह तस्वीर AAP की उस सोच का नग्न प्रदर्शन है जो देश की हर बेटी के लिए है खतरा, जिससे तमाम सवाल खड़े होते हैं।

केजरीवाल की जो फोटो आप देख रहे वो तस्वीर मात्र नहीं है। ये फोटो उस महिला सांसद के जख्मों पर नमक रगड़ने जैसा है जिसके साथ सीएम आवास में मारपीट हुई है और वो उसके बाद से मीडिया में आ भी नहीं पा रहीं। खुद स्वाति मालीवाल की माता ने कल कहा कि उनकी बेटी अभी बात करने की स्थिति में नहीं है।

सोचिए उनके साथ ऐसा क्या हुआ होगा उस दिन, जो हजारों लोगों के लिए आवाज उठाने वाली महिला से खुद के लिए नहीं बोला जा रहा। वो चारदीवारी में हैं और मीडिया के सामने आने से परहेज कर रही हैं। उनकी इस चुप्पी ने जहाँ तमाम सवाल खड़े किए हुए हैं। वहीं सीएम की यह फोटो देख लोग कह रहे हैं कि ये कितनी बड़ी बेशर्मी की बात हैं कि जिस पीए पर इतना गंभीर इल्जाम हैं उसे लेकर केजरीवाल साथ घूम रहे हैं। उसके साथ फोटो में आ रहे हैं और सवाल पूछे जाने पर भी इस मुद्दे पर कुछ नहीं बोल रहे। उलटा जो इस मामले को छोटा और मामूली दिखा रहा है उसे शांत रहकर समर्थन कर रहे हैं।

जी हाँ, लखनऊ में अखिलेश यादव के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस के वक्त जब उनसे इस बारे में पूछा गया तो वो एकदम चुप हो गए, वहीं अखिलेश यादव ने जब इसे छोटा मुद्दा बताकर दिखाने का प्रयास किया, तब भी वो कुछ नहीं बोले। उनके इस रवैये से सोशल मीडिया पर यूजर्स काफी नाराज हैं। भाजपा के नेता उनसे सवाल कर रहे हैं कि एक महिला के साथ बदसलूकी मामले पर ये कौन सा रवैया है जो अरविंद केजरीवाल सार्वजनिक तौर पर दिखाने का प्रयास कर रहे हैं। इससे तो यही साफ होता है कि हमला उनके इशारे पर हुआ है।

सबका एक ही कहना है कि अगर केजरीवाल मानते हैं कि कुछ गलत नहीं हुआ तो इस पर अरविंद केजरीवाल को अपना पक्ष रखना चाहिए, इस पर सफाई देनी चाहिए और अगर ऐसा नहीं है कि तो उन्हें बताना चाहिए कि क्या मजबूरी है जो वो बिभव पर कार्रवाई करने से डर रहे हैं। 72 घंटे मामले को बीत चुके हैं लेकिन एफआईआर तक नहीं हुई जबकि संजय सिंह ने खुद कहा था कि पार्टी कार्रवाई करेगी।

घटना के बाद बिभव पर एक्शन लेना तो दूर केजरीवाल और संजय सिंह उसे लेकर साथ में घूम रहे हैं। उनकी ऐसी तस्वीर देख सोशल मीडिया पर लोग ये अंदाजा लगा रहे हैं कि कहीं बिभव पर कोई ऐसे राज तो नहीं जिसका केजरीवाल को डर है अगर बाहर आ गया तो वो नए विवाद में फँस जाएँगे या फिर ऐसा तो नहीं इस मारपीट मामले में खुद केजरीवाल भी शामिल हों, जिसके कारण महिला सांसद चुप हों और मारपीट करने वाला बिभव आजाद।

कारण जो भी, लेकिन जब तक स्वाति मालीवाल मीडिया में आकर इस मुद्दे पर कुछ नहीं बोलतीं, सच्चाई नहीं पता चल पाएगी और अरविंद केजरीवाल की ऐसी तस्वीरों पर लगातार सवाल उठेगा। उनसे पूछा जाएगा कि जब वो अपनी पार्टी की महिला सांसद को न्याय नहीं दिलवा पा रहे तो फिर राजधानी की लाखों लड़कियाँ उनपर कैसे भरोसा करें। आज आम आदमी पार्टी का ये रवैया और केजरीवाल का इस मुद्दे पर मौन हर लड़की के लिए एक खतरे की घंटी है। उन्हें सोचना तो पड़ेगा कि उन्होंने किस पर विश्वास किया है और समय आने पर इसके बदले उन्हें क्या मिलेगा।

रेप पर पिता ने कहा- लड़के हैं गलती हो जाती है, स्वाति मालीवाल से बदसलूकी बेटे के लिए ‘छोटी बात’: मुलायम से अखिलेश यादव तक महिलाओं पर नहीं बदली सपा की सोच

लोकसभा चुनाव 2024 के सात में से चार चरण के मतदान हो चुके हैं। इस बीच जेल से अंतरिम जमानत पर बाहर आए दिल्ली के मुख्यमंत्री एवं आम आदमी पार्टी (AAP) के प्रमुख अरविंद केजरीवाल ने समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव के साथ मीडिया को संबोधित किया। इस दौरान पत्रकारों ने स्वाति मालीवाल के साथ मारपीट को लेकर सवाल पूछे।

लखनऊ में आयोजित इस प्रेस वार्ता में स्वाति मालीवाल से जुड़े पत्रकारों के सवाल पर मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल चुप रहे। उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया, लेकिन अखिलेश यादव बीच में कूद पड़े और बेतुका जवाब दे दिया। अखिलेश ने कहा, “अरे उससे ज्यादा जरूरी और चीजें भी हैं। भाजपाई किसी के सगे नहीं हैं। भाजपाई झूठे मुकदमे लगाने वाला गैंग है।”

बता दें कि AAP की राज्यसभा सांसद और दिल्ली महिला आयोग की पूर्व अध्यक्ष स्वाति मालीवाल ने 13 मई 2024 मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल के घर पर पुलिस बुलाई थी। स्वाति मालीवाल ने केजरीवाल के निजी सचिव विभव कुमार पर मारपीट का आरोप लगाया था। उन्होंने कहा है कि मुख्यमंत्री केजरीवाल के कहने पर विभव कुमार ने सीएम आवास के भीतर उनके साथ मारपीट की।

हालाँकि, AAP सांसद संजय सिंह ने माना था कि स्वाति मालीवाल के साथ बदसलुकी करने वाले के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी, लेकिन कार्रवाई की बात तो दूर जब मुख्यमंत्री केजरीवाल लखनऊ पहुँचे, उस दौरान भी बिभव कुमार उनके साथ थे। इसकी तस्वीरें भी सोशल मीडिया में आई हैं। इसको लेकर AAP और अरविंद केजरीवाल पर सवाल उठ रहे हैं।

अब प्रेस कॉन्फ्रेंस में अखिलेश यादव ने अरविंद केजरीवाल का खुलकर बचाव किया। अखिलेश यादव के लिए एक महिला के साथ सीएम आवास में मारपीट साधारण बात लग रही है। उसमें भी वह महिला राज्यसभा सांसद और पूर्व दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष है। अखिलेश यादव के लिए यह साधारण मुद्दा है। इससे समाजवादी पार्टी की महिला विरोधी सोच भी सामने आ गई है।

अखिलेश यादव के दिवंगत पिता और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने एक ऐसा ही विवादित बयान दिया था। साल 2014 में उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद की एक रैली में मुलायम सिंह ने कहा था कि रेप के लिए फाँसी देना गलत है। उन्होंने बलात्कारियों का बचाव करने के लिए यहाँ तक कह दिया था कि लड़कों से गलतियाँ हो जाती हैं।

मुलायम सिंह यादव ने उसी रैली में कहा था, “लड़कियाँ पहले दोस्ती करती हैं। लड़के-लड़की में मतभेद हो जाता है। मतभेद होने के बाद लड़कियाँ उसे रेप का नाम दे देती हैं। लड़कों से ग‌लतियाँ हो जाती हैं। क्या रेप केस में फाँसी दी जाएगी?” इसी तरह प्रदेश में रेप की एक घटना पर समाजवादी पार्टी के एक नेता तो ये भी कह दिया था कि इतने बड़े प्रदेश में रेप और हत्या की घटनाएँ तो होंगी ही।

साल 2010 में महिला आरक्षण विधेयक के विरोध में टिप्पणी करते हुए मुलायम सिंह यादव ने कहा था, “वर्तमान स्वरूप में महिला आरक्षण विधेयक पास हुआ तो संसद में उद्योगपतियों और अधिकारियों की ऐसी-ऐसी लड़कियाँ आ जाएँगी जिन्हें देखकर लड़के पीछे से सीटी बजाएँगे।”

सपा नेता अबु आजमी ने कहा था कि फैशन और कम कपड़े पहनने से ही बलात्कार जैसी घटनाएँ होती हैं। पेट्रोल और आग को एक साथ रखेंगे तो वह जलेगा ही। उन्होंने बगैर सिर ढके और स्कर्ट पहनकर निकलने वाली महिलाओं के खिलाफ कानून बनाने की भी माँग की थी। 2013 में उन्होंने कहा था कि औरतें सोने की तरह कीमती होती हैं, अगर उन्हें खुला छोड़ा तो उन्हें लूट लिया जाएगा।

आजम खान भी पीछे नहीं रहे। लोकसभा के भीतर रामपुर से सपा के तत्कालीन सांसद आजम खान ने सदन की अध्यक्षता कर रहीं रमा देवी से कह दिया था, “आप मुझे इतनी अच्छी लगती हैं कि मेरा मन करता है कि आपकी आँखों में आँखें डाले रहूॅं।” आजम खान ने लोकसभा चुनाव के दौरान इशारों-इशारों में प्रतिद्वंद्वी महिला उम्मीदवार की अंडरवियर का कलर तक बता दिया था।

इसी तरह अखिलेश यादव के चाचा राम गोपाल यादव ने तो बॉलीवुड की हीरोइनों को मुंबई के बार डांसर्स से भी ज्यादा अश्लील बता दिया था। इसी तरह सपा नेता शिवचरण प्रजापति ने कह दिया था कि बलात्कार के लिए महिलाएँ ज्यादा जिम्मेदार होती हैं। इस तरह सपा में महिलाओं के खिलाफ बयान देने वालों की लंबी फेहरिस्त है और अखिलेश यादव भी पार्टी की विचारधारा के तहत ही ये बयान दिया है।

AAP विधायक अमानतुल्लाह खान के घर पहुँची योगी की पुलिस, बाप-बेटे दोनों हैं ‘फरार’: पेट्रोल पम्प पर की थी मारपीट, सहयोगी इकरार हो चुका है गिरफ्तार

उत्तर प्रदेश पुलिस की एक टीम आम आदमी पार्टी (AAP) के विधायक अमानतुल्लाह खान की तलाश में उनके आवास पर पहुँची है। यूपी पुलिस को विधायक खान और उनके बेटे अनस खान की तलाश है। अनस खान ने हाल ही में एक पेट्रोल पम्प पर मारपीट की थी, इस मामले में यूपी पुलिस उसे तलाश रही है।

जानकारी के अनुसार, गुरुवार (16 मई, 2024) को उत्तर प्रदेश पुलिस की एक टीम अमानतुल्लाह खान के आवास पर पहुँची। यहाँ अमानतुल्लाह खान और उनका बेटा अनस खान को लेकर यूपी पुलिस ने तलाश की। दोनों ही घर पर नहीं मिले। विधायक पिता-पुत्र के खिलाफ गैर जमानती वारंट भी जारी किया जा चुका है।

अमानतुल्लाह खान और उनके बेटे अनस खान का फोन घटना के बाद बंद आ रहा है और वह गायब हैं। यूपी पुलिस ने उनके घर के बाहर नोटिस चस्पा कर दिया है। अमानतुल्लाह खान और उनके बेटे अनस खान के खिलाफ यह मामला पेट्रोल पम्प पर मारपीट के बाद दर्ज किया गया था।

यूपी पुलिस दोनो की तलाश में पहले भी उनके आवास पर दबिश दे चुकी है। 11 मई, 2024 को भी यूपी पुलिस इस मामले में नोटिस लेकर पहुँची थी। यहाँ तब भी अमानतुल्लाह खान और अनस नहीं मिले थे। पुलिस ने इस दिन भी नोटिस चस्पा किया था।

इस मामले में अमानतुल्लाह खान के एक करीबी इकरार अहमद को यूपी पुलिस ने सोमवार (13 मई, 2024) को गिरफ्तार किया था। बताया गया था कि इकरार अहमद अमानतुल्लाह खान का मैनेजर है और शाहीन बाग़ का रहने वाला है। जिस वक्त खान के बेटे अनस ने नोएडा के पेट्रोल पम्प पर मारपीट की, वह वहीं मौजूद था।

गौरतलब है कि 7 मई, 2024 को नोएडा के सेक्टर-95 स्थित विधायक का बेटा अनस पेट्रोल पंप पर अपनी कार लेकर पहुँचा था, जहाँ वहाँ उसने लाइन में आगे लगी गाड़ी को आगे बढ़ा कर अपनी गाड़ी में पहले तेल भरने की ज़िद की। सेल्समैन ने नियम का उल्लंघन करने से नकार दिया। इस दौरान अनस और कार में बैठे उसके साथियों ने मारपीट शुरू कर दी।

इसके बाद खुद विधायक अमानतुल्लाह खान वहाँ पहुँचे और उन्होंने पेट्रोल पंप के मैनेजर को धमकाया। दोनों ही घटनाओं का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। यूपी पुलिस ने इस मामले में FIR दर्ज करके अनस खान की तलाश चालू कर दी थी। इससे पहले अलीगढ़ में भी अनस खान मारपीट कर चुका है।

16 मई… 10 साल पहले इसी दिन देश ने नरेंद्र मोदी को चुना था अपना नायक, रखी थी मजबूत भारत की नींव; अब हैट्रिक के लिए 4 जून का इंतजार

लोकसभा चुनाव 2024 के 4 चरणों के लिए मतदान हो चुका है। 1 जून, 2024 को देश लोकसभा के अंतिम चरण के लिए मतदान करेगा और इसी के साथ 543 सीटों पर प्रत्याशियों की किस्मत EVM बक्से में बंद हो जाएगी। 1 जून के बाद देश को 4 जून की प्रतीक्षा होगी। यही वह तारीख होगी जो बताएगी कि देश की राजनीती का ऊँट किस करवट बैठा है। पीएम मोदी और भाजपा सरकार लोकप्रियता की बयार में एक बार फिर विपक्ष बहा है कुछ बदलाव के संकेत हैं।

2014: सिंहासन खाली करो कि जनता आती है

राजनीति में तारीखों का बड़ा महत्व होता है, और इन्हीं तारीखों में अगर 10 साल पीछे चलें तो आज ही के दिन यानि 16 मई, 2014 को 16वीं लोकसभा के चुनावी नतीजे आए थे। दस साल पहले 16 मई, 2014 को सुबह 11 बजे ही ये साफ हो गया था कि सत्ता का पांसा पलट गया है। सत्‍ता एक परिवार के हाथों से छिनने जा रही रही है। देश का प्रधानमंत्री किसी राजनीतिक परिवार की दयादृष्टि से नहीं बल्कि जनता की मर्जी से चुना हुआ एक साधारण पृष्ठभूमि का व्यक्ति बनने वाला है।

2014 की बड़ी जीत के बाद पीएम मोदी (चित्र साभार: NDTV)
2014 की बड़ी जीत के बाद पीएम मोदी (चित्र साभार: NDTV)

16 मई, 2014 को जब 16वें लोकसभा चुनाव के परिणाम जब दोपहर तक घोषित हुए तो भाजपा को ऐतिहासिक विजय का ताज जनता ने पहना दिया था। बीजेपी पहली बार अपने दम पर बहुमत का स्‍पष्‍ट आँकड़ा पार करते हुए 282 सीटों तक पहुँच चुकी थी। अटल युग में भी बीजेपी सत्‍ता के शीर्ष तक पहुँची थी लेकिन अपने दम पर 200 का आँकड़ा भी पर नहीं कर पाई थी।

2004 के बाद से 10 साल तक सत्‍ता से बाहर रहने वाली बीजेपी ने 2013 में घोटालों और भ्रष्टाचार से त्रस्त जनता के बीच गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री के दावेदार के रूप में पेश किया था। उनके करिश्माई व्यक्तित्व ने जनता में ‘मोदी लहर’ चला दी। मोदी ने खुद के लिए गुजरात के वडोदरा के साथ वाराणसी को चुनाव क्षेत्र के रूप में चुना और जनता ने ना सिर्फ उन्हें, बल्कि NDA को भारी बहुमत से जिताकर उनका प्रधानमंत्री बनना तय कर दिया।

काशी से गूँजे नाद ‘घर-घर मोदी, हर-हर मोदी’ ने देश में मोदी लहर कायम रखा, परिणाम स्वरुप नरेंद्र मोदी के नेतृत्‍व में भाजपा न केवल अपने दम पर बहुमत पाने में कामयाब रही बल्कि तीन दशकों में स्‍पष्‍ट जनादेश हासिल करने वाली पहली पार्टी बनी।

2014 के लोकसभा चुनाव की एक और ख़ास बात रही कि लगभग 50 साल तक शासन पर काबिज और एक दशक से लगातार सत्‍ता पर काबिज कॉन्ग्रेस 2014 में सिमटकर महज 44 सीटों की पार्टी बन गई। यहाँ तक कि कॉन्ग्रेस की इतनी भी हैसियत नहीं रही कि उसे नेता-प्रतिपक्ष का पद हासिल हो सके। ऐसी शर्मनाक हार के बारे में शायद ही कभी कॉन्ग्रेस ने सोचा होगा।

2019: जनता ने बोला- शो मस्ट गो ऑन

भाजपा ने भी जनता से मिले इस बहुमत का बखूबी इस्तेमाल किया और अगले पाँच सालों में मूलभूत परिवर्तन देश की स्थिति में लाई। पहली बार देश ने देखा कि करोड़ों बैंक खाते कुछ महीने में ही खोले जा सकते हैं, करोड़ों घर कुछ साल में ही बन सकते हैं और करोड़ों घरों तक बिना किसी देरी के गैस सिलेंडर पहुँच सकता है।

282 के इस आँकड़े ने भाजपा को वह ताकत दी कि वह दशकों से लटके GST जैसे बिल को पास करवा पाई। जनता ने पहली बार देखा कि इस देश में करोड़ों लाभार्थियों तक बिना किसी भ्रष्टाचार के दिल्ली से पैसा पहुँच सकता है। भाजपा ने इस इस दौरान उस दौरान उस ढाँचे की नीँव रखी जिसमें आगे अनुच्छेद 370, राम मंदिर और CAA जैसे मुद्दों को लेकर इमारत तैयार होनी थी। भाजपा ने इन पाँच साल का इस्तेमाल देश को मजबूत करने में किया ही, साथ ही वह इस दौरान ऐसी चुनाव जिताऊ मशीन बन गई, जिसके आगे विपक्ष धराशायी हो गया।

2019 की जीत में अमित शाह की संगठन कौशल और पीएम मोदी की लोकप्रियता काम आई थी (चित्र साभार: Economic Times)

2019 के लोकसभा चुनावों के परिणाम इन सभी बातों पर मुहर लगाते हैं कि भाजपा का पहला कार्यकाल अभूतपूर्व बदलाव वाला रहा। इसकी पुष्टि 23 मई, 2024 को 17वीं लोकसभा परिणामों ने कर दी। पहली बार भारतीय लोकतंत्र में कॉन्ग्रेस के अलावा किसी पार्टी ने 300 का आँकड़ा पार किया। भाजपा को 303 सीट मिलीं। हर चुनाव को पीएम मोदी की लोकप्रियता का लिटमस टेस्ट बता देने वाले वामपंथी और लिबरल गैंग के मुँह पर भी इन परिणामों ने ताले जड़ दिए।

जहाँ भाजपा को 2019 में एक बार फिर बड़ा बहुमत मिला तो वहीं कॉन्ग्रेस समेत पूरे विपक्ष की हालत में कोई खास बदलाव नहीं हुआ। कॉन्ग्रेस ने पाँच सालों में मात्र 8 सीटों की बढ़त हासिल की। वह 2014 में जहाँ 44 पर रही थी, वहीं 2019 में 52 पर पहुँची। लेकिन 2014 से भी बड़ा झटका 2019 में कॉन्ग्रेस को लगा जब उसके बड़े नेता राहुल गाँधी को अमेठी में भाजपा नेता स्मृति ईरानी के हाथों हार झेलनी पड़ी।

4 जून, 2024: इशारे तीसरे कार्यकाल के

2014 और 2019 में बड़ी जीत हासिल करने के बाद 2024 में भाजपा ने लक्ष्य रखा कि वह इस बार 370 का आँकड़ा लोकसभा में पार करेगी। इस बार के लोकसभा चुनाव में भाजपा 10 साल शासन के पूरे कर रही है। लेकिन ध्यान देने वाली बात है कि जैसा माहौल 2013-14 में कॉन्ग्रेस के 10 वर्षों के शासन के बाद बना था, वह इस बार नहीं दिखता। ना ही कोई भ्रष्टाचार के मामले भाजपा सरकार के सामने टिके हैं, ना ही देश में जनलोकपाल बिल जैसा कोई आन्दोलन खड़ा हुआ है।

यहाँ तक कि जनता भी भाजपा से संतुष्ट है और राजनीतिक पंडितों की भाषा में जिसे ‘फटीग फैक्टर’ यानी जी ऊब जाना कहते हैं, वह भी इस सरकार के खिलाफ नहीं दिखता। 24, अकबर रोड में श्रद्धा रखने वाले कुछ इक्का-दुक्का पत्रकारों और राजनीतिक विश्लेषकों को छोड़ दिया जाए तो अधिकांश का अनुमान है कि भाजपा और नरेन्द्र मोदी एक बड़ी जीत के साथ फिर से दिल्ली में वापसी कर रहे हैं।

2024 लोकसभा चुनावों में अपने नामांकन के दौरान पीएम मोदी (चित्र साभार: Narendra Modi/X)

भाजपा अपनी जीत को लेकर कितनी आश्वस्त है, इसकी बानगी हाल ही में बंगाल में दिया गया अमित शाह का एक बयान है। अमित शाह ने बंगाल में आयोजित एक जनसभा में कहा,”देश में 380 सीटों पर चुनाव हो गया है, इन 380 सीटों में से पीएम मोदी 270 सीट पाकर बहुमत का आँकड़ा पार कर चुके हैं। आगे की लड़ाई 400 पार करने की है।”

कुल मिलाकर यह साफ़ दिखता है कि इस बार के लोकसभा चुनावों में भी भाजपा ने अपना प्रभाव कायम रखा है। विपक्ष के सभी वार खाली जा रहे हैं। फिर भी अंतिम परिणाम क्या होगा इसका पता 4 जून, 2024 को देश जानेगा।

पहला हक मुस्लिमों का, देश का 15% बजट मुस्लिमों के लिए, पीड़ित हिंदुओं को जेल… दावा ‘मोहब्बत की दुकान’ खोलने का, चला रही थी ‘मुल्लों के लिए दुकान’

कॉन्ग्रेस का मुस्लिम समुदाय के प्रति प्रेम जगजाहिर है। समय-समय पर ऐसे वाकये निकलकर आते रहे हैं जिनसे समझ आता है कि इस पार्टी का उद्देश्य इस देश में एक केवल एक समुदाय के लोगों का विकास करना था। हिंदू इनके लिए कुछ नहीं थे। आज भले ही कॉन्ग्रेस पार्टी लंबी-लंबी न्याय यात्रा करके ‘मोहब्बत की दुकान’ खोले रखने का दावा करती हो लेकिन इतिहास बताता है कि उन्होंने सत्ता में आकर सिर्फ मुस्लिमों पर अपना प्यार लुटाया है।

देश के बजट का 15% हिस्सा मुस्लिमों के नाम

इस दिशा में हाल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी कॉन्ग्रेस की एक पोल खोली है। पीएम मोदी ने बताया है कि मनमोहन सिंह की सरकार पूरे देश के बजट का 15 % मुस्लिमों को देना चाहती थी लेकिन ऐसा नहीं कर पाई क्योंकि विपक्ष में बैठी भाजपा ने उनका विरोध किया। पीएम ने ये बात इसलिए बताई ताकि लोग कॉन्ग्रेस की मंशा के खिलाफ सजग हो सकें।

किसी भी देश की सरकार का काम वहाँ के हर वर्ग के विकास का होता है न कि ऐसा कोई बजट बनाने का जिससे एक समुदाय फलता-फूलता रहे और अन्य वर्ग संसाधनों के लिए लललाते रहें…. कॉन्ग्रेस ने फिर भी ऐसा करने की सोची और हैरानी इस बात की है कि ऐसी हरकतें करने के बाद कॉन्ग्रेस आज मोदी सरकार पर हिंदू-मुस्लिम करने का आरोप लगाती है। सोचिए जिन लोगों के दिमाग में देश के बजट का एक पूरा हिस्सा एक समुदाय को देने की बात आए उनके भीतर उस समुदाय के प्रति कितना प्रेम होगा।

मुस्लिमों का संपत्ति पर पहला अधिकार

वैसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का खुलासा इतना भी हैरान करने वाला नहीं है। पिछले दिन ही पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की वीडियो वायरल हुई थी। उस वीडियो में मनमोहन सिंह कहते नजर आ रहे थे कि देश के संसाधनों पर पहला हक अल्पसंख्यकों का होना चाहिए। 2006 में दिए गए पूर्व पीएम के इस बयान की क्लिप वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर खूब हंगामा हुआ। कॉन्ग्रेसी और वामपंथी कहने लगे कि मनमोहन सिंह के बयान को तोड़-मरोड़ के पेश किया जा रहा है वो राष्ट्रीय विकास परिषद में अल्पसंख्यकों को केंद्र में रखकर जनता को संबोधित कर रहे थे। लेकिन हकीकत तो यह है कि पूर्व प्रधानमंत्री ने अपने बयान में ‘विशेष तौर पर मुस्लिम’ शब्द का इस्तेमाल किया था।

मनमोहन सिंह के शब्द थे– अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजातियों के लिए योजनाओं को नए सिरे से तैयार करने की जरूरत है। हमें ये सुनिश्चित करने के लिए नई योजनाएँ बनानी होंगी कि अल्पसंख्यकों, विशेष रूप से मुस्लिमों को विकास में समान भागीदारी मिले। संसाधनों पर पहला हक उन्हीं का होना चाहिए।

अब इस बयान में कहाँ दिख रहा है कि पूर्व पीएम ने मुस्लिम शब्द नहीं बोला… उलटा जैसा कॉन्ग्रेस दिखाने की कोशिश कर रही थी कि बयान अल्पसंख्यकों के हित के लिए था, इससे तो साफ पता चलता है कि कॉन्ग्रेस अल्पसंख्यकों की लिस्ट में मुस्लिमों को टॉप पर मानती है, जबकि ये बात किसी से छिपी नहीं है कि मुस्लिम देश की सबसे बड़ी दूसरी आबादी हैं। अगर उन्हें जनसंख्या आँकड़े देख कम समझा जा सकता है तो फिर जैन, पारसी, बौद्ध, सिख या दलित इस प्राथमिकता में क्यों नहीं हैं।

असल बात ये है कि कॉन्ग्रेस ने सत्ता में आने के लिए हमेशा से एक हथकंडा आजमाया था जिसमें हिंदुओं के प्रति घृणा फैलाना और मुस्लिम को रिझाने का काम होता था। सरकार जब-जब बनती तो ये काम और तेजी से होता। कभी किसी योजना के बहाने तो कभी किसी वक्तव्य में। आपने ऊपर जो दो उदाहरण समझें उससे तो आपको सिर्फ ये पता चल रहा होगा कि कॉन्ग्रेस का झुकाव मुस्लिमों के प्रति कितना था। लेकिन, कॉन्ग्रेस का एक कदम ऐसा भी है जिसे यदि आप जान लेंगे तो आपको पता चलेगा कि कॉन्ग्रेस का प्रेम जहाँ मुस्लिमों के लिए अथाह था तो वहीं उनका इरादा हिंदुओं को एकदम लिस्ट में एकदम नीचे करने का था। इतना नीचे कि कॉन्ग्रेस समझती थी कि देश में हो रहे सांप्रदायिक अपराधों में बिन जाँच के सिर्फ हिंदू दोषी माना जाना चाहिए कोई मुस्लिम नहीं। अपनी इस सोच को देश में लागू करने के लिए वह एक कानून लाने की भी फिराक में थे।

कॉन्ग्रेस लाती हिंदू विरोधी कानून

जी हाँ, ये अचंभित होने वाली बात नहीं है। अगर विपक्ष ने विरोध न किया होता तो शायद आज कॉन्ग्रेस पूरे देश में इस कानून को लागू कर चुकी होती। ये बात है 2011 की। उस समय पूर्व कॉन्ग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी राष्ट्रीय सलाहकार समिति की मुखिया होती थीं और सरकार की कमान पर्दे के पीछे से चलाती थीं। उसी दौरान यूपीए सरकार एक बिल लाई थी। इसका नाम- सांप्रदायिक एवं लक्षित हिंसा रोकथाम (न्याय एवं क्षतिपूर्ति) विधेयक था। इसका पहला मकसद था कि देश से हिंदूवादी संगठनों का प्रभाव खत्म हो सके और अल्पसंख्यक वोटर हमेशा उनके प्रति इमानदार रहें।

इस बिल को बनाने में एक से बढ़कर एक हिंदू विरोधी लोग शामिल थे। जैसे हर्ष मंदर, जॉन दयाल, तीस्ता सीतलवाड़, सैयद शहाबुद्दीन, नियाज फारूकी, शबनम हाशमी आदि-आदि। इन सब लोगों ने मिलकर हिंदूविरोधी बिल तैयार किया था। इसमें साफ दावा था कि एक समूह के लिए सुरक्षा की सुरक्षा के लिए इसे लाया जा रहा था। अब जिस तरह से कॉन्ग्रेस का मुस्लिम प्रेम है उसे देख पता चलता है कि बिल में किस समूह की बात की जा रही होगी।

अगर ये बिल देश में कानून का रूप ले लेता तो आप समझ सकते हैं कि देश में हो रहे दंगों में सिर्फ हिंदू ही जेल में जाते… अल्पसंख्यकों से घृणा के आरोप में हिंदुओं को तरह-तरह से प्रताड़ित करने का काम चलता रहता… सामान्य झगड़े में इस कानून का प्रयोग करके हिंदुओं को निशाना बनाया जाता…। कॉन्ग्रेस इस बिल के दुष्परिणाम अच्छे से जानती थी मगर फिर भी उन्होंने ऐसा कदम उठाने की हिम्मत की, वो भी किसके लिए सिर्फ मुस्लिमों के लिए? तब, अरुण जेटली से लेकर गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी तक ने इसके खिलाफ आवाज उठाई थी। नीतीश कुमार और ओडिशा से नवीन पटनायक इसके विरोध में आए थे। तब जाकर, कहीं कॉन्ग्रेस इसे लागू करने में असफल हुई।

कॉन्ग्रेस सत्ता में आती तो क्या होता हिंदुओं का हाल

आज देश में नरेंद्र मोदी सरकार है तो कॉन्ग्रेस कहती है कि वो हिंदू-मुस्लिम कर रहे हैं, जबकि ये बात सब जानते हैं कि मोदी सरकार सबका साथ-सबके विकास वाले दृष्टिकोण से देश को आगे बढ़ाने पर लगी है। अगर ऐसा नहीं होता तो देश में तीन तलाक नहीं खत्म होता, जो कि मुस्लिम महिलाओं के लिए कोढ़ जैसा था। मगर, कॉन्ग्रेस काल में ऐसा नहीं था। एक बार कल्पना करके देखिए कि देश का नागरिक होने के नाते आपको कैसे लगेगा कि देश के लिए आए बजट में से कटौती करके किसी और समुदाय को दे दिया जाए, या फिर देश की संपत्ति पर आपके अधिकार से पहले किसी और समुदाय का पहला अधिकार बताया जाए और जब आप ऐसी चीजों का विरोध करें तो कहा जाए कि आप एक समुदाय से घृणा करते हैं इसलिए आप अपराधी हैं…. ये सारी कल्पनाएँ सच हो जाती अगर 2014 में एक बार फिर से यूपीए सरकार आती। कोई आपसे आपके धर्म, आस्था को पूछने नहीं आता, न मंदिरों के पुनरुद्धार पर कोई काम होता। अगर कुछ होता तो सिर्फ ये कि हिंदुओं की आने वाली पीढ़ियाँ इस बात को समझ लेती कि उनकी महत्ता इस ‘समूह’ के आगे कुछ नहीं।