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जौनपुर के पत्रकार आशुतोष की हत्या में गो तस्कर जमीरुद्दीन मुंबई से गिरफ्तार, पहले से दर्ज हैं 16 मामले: FIR में सपा नेता अबू आजमी के रिश्तेदार नासिर का भी नाम

उत्तर प्रदेश के जौनपुर में सोमवार (13 मई 2024) को पत्रकार आशुतोष श्रीवास्तव की हत्या कर दी गई। इमरानगंज बाजार में बाइकसवार अज्ञात हमलावरों ने सुबह 9:30 बजे उन पर गोलियाँ बरसाईं थीं। मृतक के भाई ने मंगलवार (14 मई) को नासिर जमाल सहित 4 को नामजद व 5 अन्य अज्ञात आरोपितों के खिलाफ तहरीर दी। नासिर जमाल समाजवादी पार्टी के नेता अबू आज़मी का रिश्तेदार है।

पुलिस ने इस तहरीर पर FIR दर्ज करके नामजद आरोपित जमीरुद्दीन कुरैशी को मुंबई से गिरफ्तार कर लिया है। जमीरुद्दीन को जौनपुर लाने की कानूनी कार्रवाई की जा रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, गिरफ्तार हिस्ट्रीशीटर जमीरुद्दीन कुरैशी एक कुख्यात गोतस्कर है। उस पर कुल 16 मामले दर्ज हैं। जमीरुद्दीन शाहगंज थाना क्षेत्र के गाँव सबरहद का निवासी है। पुलिस के अनुसार वह हत्याकांड का मुख्य साजिशकर्ता है।

शाहगंज के डिप्टी एसपी ने बताया कि जमीरुद्दीन कुरैशी को महाराष्ट्र पुलिस के सहयोग से गिरफ्तार किया गया है। उसकी गिरफ्तारी मुंबई के भिवंडी इलाके से हुई है। फ़िलहाल उसे भिवंडी थाने में रखा गया है। जौनपुर से पुलिस टीम जमीरुद्दीन को ट्रांजिट रिमांड पर लेने मुंबई निकल चुकी है। जमीरुद्दीन से पूछताछ के बाद मामले में और खुलासे होने की उम्मीद जताई जा रही है।

जौनपुर पुलिस आशुतोष के अन्य हत्यारों को पकड़ने के लिए दिन-रात एक किए हुए है। पुलिस की कई टीमें देश के अलग-अलग हिस्सों में दबिश दे रही है। वहीं, मृतक पत्रकार की भाभी का बयान सामने आया है। उन्होंने बताया कि लगभग एक हफ्ते पहले आशुतोष को पुलिस ने थाने पर बुलवाया था। तब उन्हें जान का खतरा बताते हुए उनसे अपने घर में रहने के लिए कहा गया था।

दावा किया जा रहा है कि तब पत्रकार आशुतोष श्रीवास्तव की जान लेने के लिए दो शूटरों को सक्रिय बताया गया था। हालाँकि, आशुतोष श्रीवास्तव ने घर में बैठने से मना कर दिया था और वे हर दिन अपने काम पर निकलते रहे। अपनी जान का खतरा जानने के बाद आशुतोष श्रीवास्तव ने पुलिस से सुरक्षा की माँग भी की थी।

घटना के दिन भी आशुतोष सुबह 9 बजे नाश्ता कर के निकले थे और बताया था कि वापस लौटकर वे खाना खाएँगे। उनकी हत्या में नामजद किए गए मुख्य आरोपित का नाम नासिर जमाल है। नासिर जमाल समाजवादी पार्टी के नेता अबू आज़मी का रिश्तेदार है। स्थानीय लोगों का कहना है कि आशुतोष गोतस्करी के खिलाफ लगातार खबरें लिख रहे थे। इससे गोतस्कर नाराज थे।

वाराणसी से कॉमेडियन श्याम रंगीला का पर्चा ख़ारिज, बोले- राजनीति मेरे बस की बात नहीं: गाजीपुर से मुख़्तार अंसारी की भतीजी का भी नॉमिनेशन रद्द

कॉमेडियन श्याम रंगीला का पर्चा वाराणसी से ख़ारिज हो गया है। 10 प्रस्तावक जुटाने में उनके पसीने छूट गए थे, लेकिन अंततः किसी तरह ड्रामे के बाद वो नॉमिनेशन फ़ाइल करने में कामयाब हो गए थे। उधर गाजीपुर से मुख़्तार अंसारी की भतीजी और अफजाल अंसारी की बेटी नुसरत का पर्चा भी ख़ारिज हो गया है। मुख़्तार अंसारी की जेल में ही तबीयत बिगड़ने के कारण मौत हो गई थी। अफजाल अंसारी सांसद रहा है, वहीं मुख़्तार अंसारी मऊ से विधायकी का चुनाव जीतता था।

वाराणसी से कॉमेडियन श्याम रंगीला का पर्चा खारिज

जैसा कि सर्वविदित है, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार तीसरी बार वाराणसी से चुनाव लड़ रहे हैं और उनकी जीत लगभग पक्की मानी जा रही है। नॉमिनेशन से 1 दिन पहले हुए उनके भव्य रोडशो में 5 लाख लोगों की भीड़ जुटी, वहीं नामांकन के दौरान NDA के तमाम बड़े नेता मौजूद रहे। कॉमेडियन श्याम रंगीला ने उनके खिलाफ पर्चा भरा था, लेकिन खामियों के कारण अब उसका नॉमिनेशन रद्द कर दिया गया है। श्याम रंगीला इसके बाद भावुक हो गए और कहा कि वो हँसाने वाले एक कलाकार हैं और फ़िलहाल कुछ कह पाने की स्थिति में नहीं है। उनके पर्चे में कई कमियाँ पाई गईं, उन्होंने शपथपत्र भी नहीं दिया था।

यूके के मीडिया संस्थान ‘The Independent’ ने भी श्याम रंगीला का महिमामंडन किया था। श्याम रंगीला का कहना है कि वाराणसी से पर्चा भरने के पीछे का उसका उद्देश्य ये था कि वो लोगों को बता सके कि लोकतंत्र खतरे में है। उन्होंने कहा कि शायद उन्हें माँ गंगा का आशीर्वाद नहीं मिला। बकौल कॉमेडियन, अब वो सोचते हैं कि मनोरंजन जगत ही उनके लिए बेहतर है और राजनीति उनके बस की बात नहीं। उन्होंने जिला प्रशासन पर नामांकन प्रक्रिया को लेकर भरमाने का भी आरोप लगाया।

दावा – छेड़खानी का आरोपित है श्याम रंगीला, लेकिन पर्चे में छिपाया

उनका पर्चा ख़ारिज होने पर सोशल मीडिया में कई तरह के दावे किए जा रहे हैं। चर्चा है कि एक लड़की से छेड़छाड़ के मामले में उस पर FIR दर्ज हुई थी, जिसकी जानकारी उसने निर्वाचन अधिकारी को पर्चे के साथ नहीं दी। हालाँकि, ऑपइंडिया इस दावे की बिलकुल भी पुष्टि नहीं करता है, ये फ़िलहाल सिर्फ अटकलें हैं।

गाजीपुर से नुसरत अंसारी का नॉमिनेशन भी रद्द

उधर गाजीपुर से 2 बॉस सांसद रहे अफजाल अंसारी की बेटी नुसरत का पर्चा भी ख़ारिज हो गया है। हालाँकि, उनके समाजवादी पार्टी से चुनाव लड़ने की संभावना खत्म हुई है, वो निर्दलीय लड़ सकेंगी। इस तरह अफजाल अंसारी अब वहाँ से I.N.D.I. गठबंधन के प्रत्याशी होंगे। अफजाल अंसारी ने 2 सेट में पर्चा दाखिल किया था, उनकी बेटी ने भी वहाँ से नॉमिनेशन फ़ाइल किया था। वो वहाँ से बतौर डमी कैंडिडेट, यानी सतर्कता के लिए सिर्फ एक सब्स्टीट्यूट के रूप में उतरी थीं।

फ़िलहाल अफजाल अंसारी ही गाजीपुर से सांसद है। एक मामले में सज़ा होने के बाद उसकी सांसदी चली गई थी, लेकिन न्यायपालिका ने उसे राहत दे दी। सपा ने अफजाल अंसारी और नुसरत, दोनों को AB फॉर्म इशू किया था। अफजाल अंसारी की सज़ा बढ़ाने के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट में योगी सरकार ने अपील दाखिल की है, जिस पर सोमवार (20 मई, 2024) को सुनवाई होगी। वहाँ से भाजपा ने पारसनाथ राय को उम्मीदवार बनाया है, मदन मोहन मालवीय सिखड़ी इंटर कॉलेज, शबरी पीजी कॉलेज सिखड़ी और विद्या पब्लिक स्‍कूल के संस्थापक हैं। उनके बेटे आशुतोष BJYM के प्रदेश अध्यक्ष रहे हैं।

झारखंड के मंत्री आलमगीर आलम को ED ने किया गिरफ्तार, PA के नौकर जहाँगीर के घर से मिले थे ₹35 करोड़: पूछताछ के बाद एजेंसी ने की कार्रवाई

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बुधवार (15 मई 2024) को झारखंड सरकार में मंत्री एवं कॉन्ग्रेस नेता आलमगीर आलम को पूछताछ के बाद गिरफ्तार कर लिया। बता दें कि कुछ दिन पहले आलमगीर के सचिव के नौकर के घर से 37 करोड़ रुपए से अधिक नकदी बरामद हुई थी। इसी मामले में ED ने पूछताछ के लिए उन्हें बुलाया था।

बता दें कि आलमगीर आलम से ED ने मंगलवार (14 मई 2024) को भी लगभग 10 घंटे तक पूछताछ की थी। आलमगीर आलम से सुबह 11 बजे से पूछताछ की जा रही थी। ED ने 12 मई को आलमगीर को तलब किया था। उन्हें 14 मई (मंगलवार) को राँची स्थित जोनल कार्यालय में एजेंसी के सामने पेश होने के लिए कहा गया था।

आलमगीर आलम के निजी सचिव संजीव लाल और संजीव लाल के नौकर जहाँगीर आलम की गिरफ्तारी हो चुकी है। जहाँगीर आलम के कब्जे वाले फ्लैट से 32.5 करोड़ रुपए से ज्यादा की नकदी मिली थी। ये फ्लैट राँची में हरमू रोड के सर सैय्यद अपार्टमेंट में स्थित है। इसके अलावा बहुत सारा पैसा संजीव लाल के करीबी ठेकेदारों के ठिकानों से बरामद हुए, पूरी राशि करीब 38 करोड़ रुपए है।

झारखंड के ग्रामीण विकास विभाग में घूसखोरी और वसूली के इस खेल का लिंक जुड़ा है। 13 नवंबर 2019 की एक गिरफ्तारी से, जब एंटी करप्शन ब्यूरो ने ग्रामीण विकास विभाग के चीफ इंजीनियर वीरेंद्र राम के अंदर काम करने वाले जेई सुरेश प्रसाद वर्मी को 10 हजार की रिश्वत लेते दबोचा था। सुरेश वर्मा वीरेंद्र राम के ही मकान में जमशेदपुर में रहता था।

उसके घर पर 2.44 करोड़ कैश मिला था, जिसके बारे में सुरेश ने ही बताया था कि ये पैसे वीरेंद्र राम के हैं, जो उसके रिश्तेदार आलोक रंजन ने रखे थे। इसके बाद इस मामले की जाँच ईडी ने संभाल ली।ईडी की जाँच में पता चला कि ग्रामीण विकास विभाग और ग्रामीण कार्य विभाग में तगड़ा खेल चल रहा है। हर ठेके पर 3.2 प्रतिशत का कमीशन सेट है।

इसमें चीफ इंजीनियर वीरेंद्र राम के पास 0.3 प्रतिशत पैसा ही आता था, बाकी पैसा नेताओं, अधिकारियों और इंजीनियरों के गैंग में बँट जाता था। यहीं से आमलगीर आलम, संजीव लाल समेत अन्य की भूमिका की जाँच शुरू हो गई। आलमगीर आलम के खिलाफ ईडी अप्रैल 2022 से एक अन्य मामले में जाँच कर रही है, वो अवैध खनन से जुड़ा मामला था।

CM हाउस में बदसलूकी के बाद ‘मांडवली’ में जुटी AAP: स्वाति मालीवाल के घर से निकलते दिखे संजय सिंह और वंदना, दिल्ली पुलिस को अब भी कंप्लेन का इंतजार

दिल्ली में मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के आधिकारिक आवास ‘शीशमहल’ में DCW (दिल्ली महिला आयोग) की पूर्व अध्यक्ष और AAP (आम आदमी पार्टी) की राज्यसभा सांसद स्वाति मालीवाल के साथ मारपीट की घटना सामने आई। इसमें CM के निजी सचिव रहे विभव कुमार का नाम आया। वहीं AAP के एक अन्य राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने सफाई देते हुए कहा कि मुख्यमंत्री के संज्ञान में ये मामला आया है और इस पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

स्वाति मालीवाल CM आवास से सिविल लाइंस पुलिस थाने कॉल करने के बाद वहाँ पहुँची थीं और वो रो रही थीं, लेकिन कुछ फोन कॉल्स आने के बाद वो ऑटो लेकर वापस चली गई थीं और उन्होंने लिखित शिकायत नहीं दी। उनके सोशल मीडिया हैंडल पर भी शांति है। अब सामने आया है कि अरविंद केजरीवाल की तरफ से उनसे समझौता के लिए दबाव बनाया जा रहा है। मारपीट के इस मामले में समझौते के लिए AAP ने स्वाति मालीवाल से संपर्क किया है।

असल में बुधवार (15 मई, 2024) को संजय सिंह को स्वाति मालीवाल के घर से बाहर निकलते हुए देखा गया। संजय सिंह शराब घोटाले में जेल से जमानत पर बाहर निकले हैं। इस दौरान उनके साथ वंदना सिंह भी थी, जो DCW की सदस्य हैं और स्वाति मालीवाल की करीबी हैं। ‘टाइम्स नाउ’ के पत्रकार प्रियांक त्रिपाठी स्वाति मालीवाल के घर पहुँचे, जहाँ एक महिला कर्मचारी ने बताया कि वो वहाँ नहीं हैं। वहीं सोसाइटी के गार्ड्स ने बताया कि दिल्ली पुलिस की टीम वहाँ पहुँची थी।

वहीं उधर स्वाति मालीवाल के पूर्व पति नवीन जयहिंद ने भी बयान जारी किया है। उन्होंने कहा कि अगर संजय सिंह सच में स्वाति मालीवाल को छोटी बहन मानते हैं तो कम से कम उन्हें मांडवली करना बंद करना चाहिए और FIR करवानी चाहिए। नवीन जयहिंद ने कहा कि संजय सिंह अभिनय न करें, एक्शन करें। उन्होंने इसे लाखों महिलाओं की बेइज्जती बताते हुए कहा कि ये कोई व्यक्तिगत मामला नहीं है, घटना के दर्जन जो लोग थे उन्हें सामने लाया जाए और स्वाति मालीवाल को डराना-धमकाना बंद कर देना चाहिए।

नवीन जयहिंद ने संजय सिंह से कहा कि वो दिल्ली के पुलिस कमिश्नर से मुलाकात कर के स्वाति मालीवाल को सुरक्षा उपलब्ध करवाएँ। वहीं भाजपा नेता शाजिया इल्मी ने सवाल दागा है कि क्या बिना अरविंद केजरीवाल की जानकारी के ही स्वाति मालीवाल के साथ मारपीट होना संभव है? भाजपा इस मामले में दिल्ली CM की चुप्पी पर हमलावर है। अब तक FIR तक दर्ज नहीं हो पाई है, स्वाति मालीवाल कहाँ है ये भी किसी को नहीं पता चल पा रहा है।

‘ये मिनी पाकिस्तान है, यहाँ हिंदुओं का आना मना है’: जीवनदीप को तुलसी माला पहने देख सज्जाद-शोएब ने साथियों संग किया हमला, बेल के बाद भी दे रहे धमकी

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में 6 मई 2024 को जीवनदीप सिंह नाम के सिख युवक पर अरशद, नफीस, शोएब और राजा खान उर्फ सज्जाद अली ने हमला कर दिया। जीवनदीप के गले में तुलसी की माला देखकर हमलावरों ने उसे हिन्दू समझा और बेरहमी से पीटा और उनकी गाड़ी भी तोड़ दी। जिस इलाके में यह हमला हुआ था, उसे स्थानीय लोग ‘मिनी पाकिस्तान’ कहते हैं। फ़िलहाल सभी आरोपित जमानत पर हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह घटना तालापारा इलाके की है। 30 वर्षीय जीवनदीप बिलासपुर में ट्रेवेल एजेंट के तौर पर काम करते हैं। 6 मई को उनकी बेटी का जन्मदिन था। इस जन्मदिन पर उन्होंने अपने तमाम दोस्तों को भी बुलाया था, जिनमें आरिफ नाम का शख्स भी था। आरिफ बिलासपुर के उस मुस्लिम बहुल तालापार इलाके का रहने वाला है, जिसे स्थानीय लोग ‘मिनी पाकिस्तान’ कहते हैं।

रात को जीवनदीप आरिफ को छोड़ने के लिए उसके घर गया था। वापसी के दौरान जीवनदीप ने अपनी कार स्टार्ट की तो वहाँ खड़े कुछ लोगों ने हेडलाइट की रौशनी आँखों में पड़ने की बात कहकर झगड़ा करने लगे। आरोप है कि सज्जाद अली, साबिर, मोहम्मद फैज़ान और शोएब खान ने जीवनदीप को गंदी-गंदी गालियाँ देनी शुरू कर दी। जीवनदीप ने विरोध किया तो उन्हें कार से बाहर खींच लिया गया।

पीड़ित के गले में तुलसी की माला देखकर हमलावरों ने उन्हें हिन्दू कहकर बुरी तरह पीटने लगे। लात-घूँसों के साथ जीवनदीप पर लाठी-डंडे भी बरसाए गए। उनकी कार भी तोड़ डाली गई। जैसे-तैसे जीवनदीप ने अपनी जान बचाई। इसके बाद थाने में जाकर उन्होंने शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने इस सभी आरोपितों के खिलाफ IPC की धारा 323, 427, 294, 34 और 506 के तहत FIR दर्ज की।

तुम हिन्दू हो, मिनी पाकिस्तान में क्या कर रहे हो

ऑर्गनाइजर की रिपोर्ट के मुताबिक, जीवनदीप सिंह मूलतः दुर्ग जिले के भिलाई शहर के रहने वाले हैं। लगभग 3 साल पहले वो बिलासपुर में परिवार सहित शिफ्ट हुए थे। जीवनदीप सिंह 2 बच्चियों के पिता हैं। उनकी छोटी बेटी महज एक माह की है। आरोप है कि हमलावरों ने उन्हें उनकी इनोवा कार से बाहर निकाला और पूछताछ करने लगे।

इसी दौरान उनमें से एक हमलावर ने जीवनदीप सिंह से कहा, “तुम हिन्दू हो। मिनी पाकिस्तान में क्या कर रहे हो ? यहाँ हिन्दुओं का आना मना है।” इसी सवाल-जवाब के बीच लगभग 10 और लोग वहाँ जमा हो गए। आरोप है कि इन सभी के हाथों में चाकू और तलवार भी थे। उन्होंने आते ही जीवनदीप सिंह पर हमला कर दिया।

जमानत पाते ही उपद्रव और हिंदुओं के कत्ल का उदाहरण

बताया जा रहा है कि गिरफ्तारी के बाद अब सभी चारों आरोपित जमानत पा चुके हैं। आरोप है कि अब सभी आरोपित जीवनदीप को धमकी दे रहे हैं। जीवनदीप सिंह पर केस को वापस लेने का भी दबाव बनाया जा रहा है। जमानत पर छूटते ही सज्जाद अली ने साथियों सहित अपने मोहल्ले और आसपास के इलाकों में फिर से दहशत बनानी शुरू कर दी।

सज्जाद ने तलवार निकाल कर स्थानीय निवासी और भाजपा नेता धनंजय गिरी गोस्वामी को गंदी-गंदी गालियाँ दीं। धनंजय गिरी ने थाने में शिकायत देने में जीवनदीप सिंह की मदद की थी। इसके कारण हमलावर उनसे नाराज हैं। आरोप है कि सज्जाद अली ने शोएब खान, मोहम्मद फैज़ान और साबिर के साथ मिलकर धनंजय को टुकड़ों में काट डालने की धमकी दी।

हमलावरों ने धनंजय गिरी को सनी पांडेय, नवीन महादेवा और ईश्वर बत्रा के उदाहरण दिए। इन सभी हिन्दुओं की अलग-अलग मामलों में मुस्लिम हमलावर हत्या कर चुके हैं। धनंजय को उनके ऑफिस तक जाकर धमकाने वाले चारों आरोपितों में से 2 लोग 25 फरवरी 2022 को हुए नवीन महादेवा की हत्या में मुख्य आरोपित वसीम के साथ शामिल बताए जा रहे हैं।

पुलिस ने 26 वर्षीय सज्जाद अली उर्फ़ राजा को उसके साथियों सहित फिर से आर्म्स एक्ट में गिरफ्तार कर लिया है। सज्जाद को उसी मोहल्ले में पैदल घुमाया गया, जहाँ वो गुंडागर्दी करता था। पुलिस उसको उसके साथियों सहित पैदल ही अदालत तक भी ले गई।

एक मौत और केरल के 2648 मंदिरों में बैन कर दिया गया एक खास फूल, जानिए कितना खतरनाक है यह फूल

केरल में 2648 मंदिरों में अब ओलियंडर के फूलों का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा। केरल में 2 मंदिर न्यासों ने इस बारे में फैसला लिया है, क्योंकि ओलियंडर के फूलों की वजह से एक 24 साल की नर्स की मौत हो गई थी। इसके बाद ओलियंडर के फूलों के इस्तेमाल पर बैन लगा दिया गया है। ओलियंडर के फूलों को करवीर या अरली भी कहते हैं, ये कनेर के नस्ल से जुड़ा है।

केरल के मंदिरों में ओलियंडर पर बैन लगाने का फैसला मंदिर प्रबंधन से जुड़े 2 बोर्ड ने लिया है। केरल में सबसे ज्यादा मंदिरों का प्रबंधन 2 देवास्वोम बोर्ड करते हैं। पहला-त्रावणकोर देवास्वोम बोर्ड और दूसरा मालाबार देवास्वोम बोर्ड। त्रावणकोर देवास्वोम बोर्ड 1248 मंदिरों का प्रबंधन करता है और मालाबार देवास्वोम बोर्ड 1400 मंदिरों का। अब इन मंदिरों में ओरियंडर के फूल नहीं दिखेंगे।

क्या है पूरा मामला?

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, केरल के अलाप्पुझा में 30 अप्रैल को 24 साल की नर्स सूर्या सुरेंद्रन की संदिग्ध मौत हो गई। शुरुआती जाँच में पता लगा कि सुरेंद्रन की मौत ओलियंडर के जहर के चलते हुई। रिपोर्ट के मुताबिक सुरेंद्रन की ब्रिटेन में नौकरी लगी थी। 28 अप्रैल को वह रवाना होने वाली थीं। उसी सुबह उन्होंने फोन पर बात करते हुए गलती से अपने घर में लगे ओलियंडर से कुछ पत्ते तोड़कर चबा लिए।

सुरेंद्र को पता नहीं था कि ये जहरीला है। थोड़ी देर बाद उन्हें सांस लेने में तकलीफ होने लगी और उल्टियां हुईं। उसी दिन वह कोच्चि एयरपोर्ट पर गिर पड़ीं और कुछ दिनों बाद अस्पताल में उनकी मौत हो गई। अस्पताल में इलाज के दौरान डॉक्टरों ने उनसे पूछा कि उन्होंने क्या खाया था? तो बताया कि उन्होंने ओलियंडर की पत्तियां चबा ली थी। बाद में पोस्टमार्टम हुआ तो पता लगा कि सुरेंद्रन की मौत ओलियंडर के जहर के चलते हुई।

नेरियम ओलियंडर, जिसे आमतौर पर ओलियंडर या रोज़बे के नाम से जाना जाता है, दुनिया भर में उष्णकटिबंधीय और उपोष्णकटिबंधीय इलाकों में उगने वाला एक पौधा है। इस पौधे की खास बात यह है कि यह सूखा भी झेल लेता है। सर्वाइव करने के लिए ज्यादा पानी की आवश्यकता नहीं होती है। भारत के तमाम इलाकों में यह पौधा पाया जाता है। केरल में, इस पौधे को अरली और कनाविरम के नाम से जाना जाता है। वहाँ हाईवे और समुद्र तटों के किनारे बड़ी संख्या में इन्हें लगाया जाता है। ओलियंडर की एक दर्जन से ज्यादा किस्में होती हैं और प्रत्येक में अलग-अलग रंग का फूल होता है।

पारंपरिक दवाओं में इस्तेमाल

आयुर्वेदिक फार्माकोपिया ऑफ इंडिया की रिपोर्ट में ओलियंडर के औषधीय गुणों का विस्तृत वर्णन है। इसमें बताया गया गया है कि ओलियंडर की जड़, छाल से तैयार तेल का उपयोग त्वचा रोगों के इलाज के लिए किया जा सकता है। ओलियंडर का जिक्र बृहत्रयी, निघंटस और अन्य आयुर्वेदिक ग्रंथों में भी मिलता है। चरक संहिता में भी इसका जिक्र है। कहा गया है कि ये कुष्ठ रोग सहित गंभीर प्रकृति की पुराने त्वचा रोगों से निपटने में लाभदायक है। ओलियंडर, कनेर के परिवार का पौधा है।

ओलियंडर फ्लॉवर कितना जहरीला?

बता दें कि ओलियंडर के पौधे का इस्तेामल हर्बल मेडिसिन के तौर पर 15वीं शताब्दी से किया जा रहा है। हालाँकि इसका इस्तेमाल बहुत ध्यान रखते हुए किया जाता है क्योंकि यह जहरीला होता है। इसलिए इस बात का ध्यान रखें कि ओलियंडर से दूरी बनाना ही बेहतर है। हालाँकि दक्षिण एशिया के कुछ देशों में इसका इस्तेमाल आत्महत्या करने के लिए किया जाता है।

2029 के बाद भी नरेंद्र मोदी ही रहेंगे प्रधानमंत्री, अरविंद केजरीवाल को अमित शाह का जवाब: अंतरिम जमानत पर बोले- काफी लोगों को लगता है उन्हें स्पेशल ट्रीटमेंट मिला है

गृहमंत्री अमित शाह ने कहा है कि नरेन्द्र मोदी 2029 तक देश के प्रधानमंत्री रहेंगे। उन्होंने कहा है कि मोदी 2029 के बाद भी देश का नेतृत्व करते रहेंगे। उन्होंने AAP मुखिया और दिल्ली के CM अरविन्द केजरीवाल को दी गई जमानत पर कहा है कि इसे कुछ लोग विशेष ट्रीटमेंट मान रहे हैं।

गृह मंत्री अमित शाह ने ANI को दिए हुए एक इंटरव्यू में कहा, “प्रधानमंत्री मोदी 2029 तक अपने पद पर बने रहेंगे, और अरविन्द केजरीवाल के लिए मेरे पास एक बुरी खबर है। 2029 के बाद भी पीएम मोदी हमारा नेतृत्व करते रहेंगे।”

गृह मंत्री अमित शाह ने यह जवाब अरविन्द केजरीवाल के हालिया बयान पर दिया है। दिल्ली शराब घोटाला मामले में अंतरिम जमानत पर जेल से बाहर आने के बाद अरविन्द केजरीवाल ने कहा था कि 2025 में पीएम मोदी 75 साल हो जाएँगे तो क्या वह रिटायर हो जाएँगे।

इसके लिए उन्होंने कुछ और भाजपा नेताओं का हवाला दिया था जिनके विषय में कहा जाता है कि उन्हें 75 वर्ष की आयु के कारण भाजपा ने सक्रिय राजनीति में नहीं रखा। केजरीवाल ने दिल्ली में आयोजित एक जनसभा में यह भी कहा था कि जल्द ही उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को किनारे लगा दिया जाएगा और अमित शाह प्रधानमंत्री बनेंगे।

भाजपा ने इसको लेकर केजरीवाल पर तीखा हमला बोला था। अमित शाह ने स्वयं स्पष्ट किया था कि पीएम मोदी 75 वर्ष की आयु के बाद भी अपने पद पर बने रहेंगे। उन्होंने ANI को दिए इंटरव्यू में यह बात दोहराई है। उन्होंने केजरीवाल की जमानत को लेकर भी बात की।

अमित शाह ने कहा, “सुप्रीम कोर्ट न्याय की व्याख्या का अधिकार है। मैं मानता हूँ यह सामान्य प्रकार का न्यायिक निर्णय नहीं है। काफी लोग मानते हैं कि केजरीवाल को स्पेशल ट्रीटमेंट दिया गया है।” उन्होंने कहा कि केजरीवाल अभी दूसरे मामले में फँसे हुए हैं, उनको इस मामले से निकलने दीजिए। अमित शाह का इशारा स्वाति मालीवाल के साथ दिल्ली CM आवास में हुई बदसलूकी से था।

शाहीन बाग़ हारा, पीड़ित शरणार्थी जीते… पड़ोसी इस्लामी मुल्कों से आए अल्पसंख्यकों को मिलने लगी भारतीय नागरिकता, CAA के खिलाफ दिल्ली में हुआ था हिन्दू विरोधी दंगा

केंद्र सरकार ने 14 शरणार्थियों को CAA (नागरिकता संशोधन कानून) के तहत नागरिकता दी है। बता दें कि दिसंबर 2019 में पाकिस्तान, अफ़ग़निस्तान और बांग्लादेश के पीड़ित अल्पसंख्यक शरणार्थियों को भारत की नागरिकता देने के लिए ये कानून लाया गया था, जिसका इस्लामी तत्वों ने खासा विरोध किया था। दिल्ली में दंगे तक किए गए। 9 बार CAA के नियमों को अधिसूचित करने के लिए केंद्र सरकार ने समाय बढ़ाया, अंततः मार्च 2024 में इसे लागू कर दिया गया।

अब बुधवार (15 मई, 2024) को अमित शाह के प्रभार वाले केंद्रीय गृह मंत्रालय ने 14 पीड़ित विदेशी अल्पसंख्यक श्रद्धालुओं को भारत की नागरिकता से नवाजा है। इस कानून के संसद में पास होने के साढ़े 4 साल बाद पहली बार इसके तहत किसी को नागरिकता मिली है। केंद्रीय गृह सचिव अजय कुमार भल्ला ने लाभार्थियों को प्रमाण-पत्र दिया। बता दें कि इसके लिए वेबसाइट बना कर एप्लिकेशन फॉर्म जारी किए गए थे। जिला स्तरीय समिति को इसके लिए आवेदन देना होता है।

वहीं राज्य स्तरीय समिति इन आवेदनों की जाँच करने के बाद नागरिकता दिए जाने की सिफारिश करती है। पिछले 2 महीनों से कई हिन्दू, सिख, जैन, बौद्ध, पारसी और ईसाई समुदाय के शरणार्थियों की तरफ से CAA के तहत नागरिकता के लिए आवेदन आए थे। ऐसे शरणार्थी इसके तहत नागरिकता के पात्र हैं, जो 31 दिसंबर, 2014 तक भारत में आ गए थे। तीनों इस्लामी मुल्कों में प्रताड़ना के कारण इन अल्पसंख्यकों को भाग कर भारत में शरण लेनी पड़ी थी।

जिला स्तरीय समिति (DLC) के सीनियर सुपरिटेंडेंट ने इन शरणार्थियों को नागरिकता की शपथ दिलाई। आवेदनों की प्रोसेसिंग ऑनलाइन माध्यमों से की जाती है। वहीं दिल्ली की राज्य स्तरीय एम्पॉवर्ड कमिटी (EC) के मुखिया डायरेक्टर (सेंसस ऑपरेशन) हैं। CAA के विरोध में दिल्ली के शाहीन बाग़ में खातूनों ने धरना दिया था और एक तरह से राजधानी को कई हफ़्तों तक बंधक बना कर रखा था। इसके खिलाफ झूब झूठ भी फैलाया गया था।

फरजाना बनी पल्लवी, नरगिस हुई मानसी: बरेली- मुरादाबाद में मुस्लिम युवतियों ने की घर वापसी, हिंदू युवकों से विवाह के बाद बोलीं- अब तीन तलाक-हलाला से हैं आजाद

उत्तर प्रदेश के बरेली और मुरादाबाद जिलों में 2 मुस्लिम लड़कियों ने घर वापसी की है। इन दोनों ने इस्लाम छोड़ कर हिन्दू धर्म अपनाया और हिन्दू युवकों से विवाह किया है। बरेली में जहाँ रामपुर की फरहाना पल्ल्वी बन चुकी हैं तो वहीं मुरादाबाद की नरगिस अभी मानसी नाम से जानी जाएँगी। दोनों लड़कियों ने हिन्दू धर्म में अपनी पहले से आस्था बताते हुए खुद को अब तीन तलाक और हलाला के डर से आज़ाद बताया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पहला मामला बरेली के शाही इलाके का है। मंगलवार (14 मई 2024) को को यहाँ के अगत्स्य मुनि आश्रम में रामपुर की फरहाना अपने प्रेमी धर्मवीर के साथ पहुँची। फरहाना ने बताया कि वो अपने परिवार के साथ चंडीगढ़ में रहती थीं। यहीं पर बरेली के धर्मवीर भी अपने परिजनों के साथ रह कर काम करते थे। 5 वर्ष पहले दोनों में जान-पहचान हुई थी जो बाद में प्यार में बदल गई। आखिरकार दोनों ने शादी का फैसला किया। फरहाना के परिजन इस रिश्ते के खिलाफ थे।

आखिरकार फरहाना सभी जरूरी कागजात लेकर अपने प्रेमी धर्मवीर के साथ अगत्स्य मुनि आश्रम में पंडित के के शंखधर के पास पहुँची। खुद को बालिग़ बताते हुए यहाँ उन्होंने घर वापसी और धर्मवीर से विवाह की इच्छा जताई। अगत्स्य मुनि आश्रम में फरहाना का शुद्धिकरण हुआ। यहाँ से उन्होंने सनातन धर्म स्वीकार किया और पल्ल्वी नाम रख लिया। वैदिक विधि-विधान से पल्लवी बनी फरहाना का धर्मवीर से विवाह हुआ। हिन्दू धर्म में अपनी पहले से आस्था बताते हुए फरहाना ने खुद को बेहद खुश और तीन तलाक व हलाला के डर से मुक्त बताया।

मुरादाबाद में नरगिस बनीं मानसी

घर वापसी का दूसरा मामला उत्तर प्रदेश के ही मुरादाबाद जिले से आया है। रिपोर्ट्स के अनुसार यहाँ सोमवार (13 मई 2024) को आर्य समाज मंदिर में नरगिस अपने प्रेमी सुनील के साथ पहुँची। खुद को बालिग़ बताते हुए नरगिस ने सुनील से विवाह करने की इच्छा जताई। दोनों एक ही गाँव के निवासी हैं और साथ-साथ खेतों पर काम करने जाया करते थे। दोनों का एक-दूसरे के घर भी आना-जाना था। कुछ दिनों में ही सुनील और नरगिस में प्यार हो गया। दोनों ने शादी की इच्छा जताई तो नरगिस के घर वालों ने इसका विरोध किया।

आखिरकार नरगिस ने सुनील से आर्य समाज मंदिर में शादी करने का फैसला किया। सोमवार को दोनों ने वैदिक विधि-विधान से शादी कर ली। इस अवसर पर खुद को बेहद खुश बताते हुए नरगिस ने अब तीन तलाक व हलाला से मुक्ति पाने की बात कही। अपने प्रेमी सुनील को 7 जन्मों के साथी के तौर पर पाकर नरगिस ने बताया कि बचपन से ही उनका झुकाव हिन्दू धर्म की तरफ था। नरगिस के घर वालों ने सुनील के खिलाफ थाने में FIR दर्ज करवा रखी है। इस FIR में सुनील पर नरगिस को बहला-फुसला कर भगा ले जाने का आरोप लगाया गया है। जल्द ही पुलिस के आगे नरगिस का बयान दर्ज हो सकता है। इधर सुनील के परिजन नरगिस का बहू के तौर पर अपने घर में आने की प्रतीक्षा कर रहे हैं।

उम्मीदवारों में से सबसे बेहतरीन को चुनना ही है लोकतंत्र, NOTA के इस्तेमाल से बदतर की भी लग सकती है लॉटरी: जानिए क्या कहता है Available Best का तर्क

देश में नई सरकार के लिए आम चुनाव हो रहे हैं। 4 जून को परिणाम आ जाएँगे। वहीं, चुनाव आयोग एवं तमाम स्वयंसेवी संगठन मतदान के प्रतिशत को बढ़ाने के लिए लोगों में जागरूकता बढ़ा रहे हैं। उनके काफी प्रयासों के बावजूद चार चरणों का मतदान होने के बाद मतदान का प्रतिशत काफी कम है। लोग इसे राजनीतिक दलों के नफा और नुकसान के रूप में देख रहे हैं, परंतु इससे सबसे अधिक नुकसान आम जनता का है ऐसा कहा जा सकता है, क्योंकि आम जनता के लिए ही वह प्रतिनिधि चुना जाता है जिसके चुनाव में वह शामिल नहीं होती है। चाहे नोटा दबाकर, चाहे मतदान का बहिष्कार कर।

आगे की बात करने से पहले महाभारत की एक घटना का उल्लेख करना अति आवश्यक है, ताकि तथ्यों को आसानी से समझा जा सके। युद्ध के ठीक पहले युदवंशी क्षत्रियों की एक सभा हुई। उसमें यह तय किया जाना था कि कौरवों या पांडवों में से किसका साथ दिया जाए। लोग अपने-अपने हिसाब से तर्क दे रहे थे। कोई कौरवों को बुरा बता रहा था तो कोई यह कह रहा था कि पांडवों की तरफ से भी तमाम गलत कार्य किए गए हैं। पांडवों ने अपनी पत्नी को दांव पर लगाया जो पूरी तरह से अधर्म था।

तब भगवान श्रीकृष्ण ने स्पष्ट रूप से कहा कि निश्चित रूप से गलतियाँ दोनों तरफ से हुई हैं, लेकिन हमें उसका चुनाव करना है जो कम गलत है। निश्चित रूप से पांडव कम गलत थे और श्रीकृष्ण ने उनका चुनाव किया। इसे ही अंग्रेजी में ‘अवेलेबल बेस्ट’ कहा जाता है। बस इसी सिद्धांत का पालन लोकतंत्र में मतदाताओं को प्रत्याशियों के चयन में भी करना चाहिए, जैसा भगवान श्रीकृष्ण ने महाभारत के ठीक पहले किया था।

यहाँ इस बात का विशेष रूप से उल्लेख करना आवश्यक है कि मतदान में भाग ना लेना या भाग लेने के बावजूद नोटा का बटन दबाना, दोनों स्पष्ट रूप से एक ही चीज हैं। ऐसा इसलिए कहा जा सकता है, क्योंकि दोनों ही प्रक्रिया में मतदाता उम्मीदवार होने के बावजूद उसकी चयन प्रक्रिया में शामिल नहीं होता है, जो कि एक स्वस्थ लोकतांत्रिक देश के लिए पूरी तरह से अनुचित कहा जा सकता है।

इसके पीछे कभी-कभी तर्क दिया जाता है कि समस्त उम्मीदवारों में से कोई भी उचित प्रतीत नहीं होता है। इसलिए मतदान में शामिल ना होना या नोटा का बटन दबाना ही उचित है, परंतु हमें यह भी विचार करना होगा कि क्या कोई ऐसा व्यक्ति हो सकता है जो पूरी तरह से उचित प्रतीत हो। निश्चित रूप से हर व्यक्ति में कुछ ना कुछ कमियाँ होती हैं। हर राजनीतिक दल में कुछ ना कुछ कमियाँ होती हैं या फिर बुराइयाँ होती हैं।

इस वाक्य को दृष्टिगत रखते हुए मतदान केंद्र पर जाकर उस व्यक्ति का चुनाव करना चाहिए, जो व्यक्ति समस्त उम्मीदवारों में से कम बुरा हो। दूसरे रूप में यह भी कहा जा सकता है कि उपलब्ध उम्मीदवारों में से जो सबसे अच्छा हो उसका चुनाव किया जाए। हालाँकि, जब हम मतदान में भाग नहीं लेते हैं या नोटा का प्रयोग करते हैं तो कभी-कभी ऐसे व्यक्ति का चुनाव करने से हम वंचित रह जाते हैं, जो इनमें सबसे अच्छा था और जो वास्तव में बुरा होता है वह चुनाव जीत जाता है और हमें उसे 5 वर्षों तक झेलना पड़ता है।

जब हम नोटा का प्रयोग करते हैं तो सर्वोत्तम की चाहत में उत्तम को भी किनारे कर देते हैं और उसका फायदा कई बार उस उम्मीदवार को मिल जाता है जो सबसे अधिक बुरा है, जबकि हमारे पास जो सर्वोत्तम उपलब्ध हो हमें उसको चुनना चाहिए था। निश्चित रूप से यह कहने में कोई संकोच नहीं है कि किसी भी प्रजातांत्रिक देश में 100 फ़ीसदी ईमानदार और सत्यनिष्ठा से युक्त प्रत्याशी मिलेंगे, यह बहुत मुश्किल है। हालाँकि, नोटा का प्रयोग करने से किसी ऐसे उम्मीदवार की हार हो सकती है, जो उनमें सबसे बेहतर हो।

इस प्रकार से नोटा को दिए गए वोट अगर उस हारे हुए उम्मीदवार को चले जाते तो वह उम्मीदवार जीत सकता था। अगर सिर्फ नोटा को चले गए मतों की वजह से किसी बुरे उम्मीदवार की जीत हो जाती है तो फिर नोटा के दबाने का कोई मतलब नहीं रह जाता है। इसी को दूसरे रूप में यदि कहा जाए तो नोटा का चुनाव सबसे खराब प्रत्याशी को चुनने के बराबर है। यह लोकतांत्रिक देश में मतदान के दौरान एक मतदाता के द्वारा उठाया गया आत्मघाती कदम कहा जा सकता है।

इस कारण से जहाँ तक मेरा मानना है, मतदान में भाग लेना चाहिए और नोटा का प्रयोग ना करके उस प्रत्याशी को मतदान अवश्य करना चाहिए जो समस्त प्रत्याशियों में से सबसे अच्छा हो। नोटा का प्रयोग करने या मतदान न करने वाले मतदाताओं को इस बात का भान अवश्य होना चाहिए कि उनके इस क्रियाकलाप का मतदान पर कोई प्रभाव नहीं पड़ने वाला नहीं है, क्योंकि मतदान का कम से कम प्रतिशत होने के बावजूद भी प्रत्याशी का चयन किया जाएगा और विजयी प्रत्याशी सांसद या विधायक बनकर सदन की शोभा बढ़ाएगा।

इसलिए बेहतर यही है कि प्रत्याशी के चयन में अपनी भागीदारी को बढ़ाया जाए, जिसके लिए लगातार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, स्वयंसेवी संस्थाएँ और चुनाव आयोग काम कर रहे हैं। यह किसी भी राजनीतिक दल के लिए नुकसान या फायदे का विषय नहीं है। यहाँ इस तथ्य का उल्लेख करना अति आवश्यक है कि भारत के लोकतंत्र में सर्वप्रथम नोटा का प्रयोग सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद साल 2013 के विधानसभा चुनाव में किया गया था।

शीर्ष अदालत के अनुसार, अगर कोई मतदाता किसी भी उम्मीदवार को अपना मत देना नहीं चाहता है तो वह गुप्त रूप से नोटा का बटन दबा सकता है। इस आदेश के बाद चुनाव आयोग ने मतदाताओं को नोटा का विकल्प दिया, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने ही अगस्त 2018 में अपने दिए गए फैसले में राज्यसभा चुनाव में नोटा का प्रयोग करने की अनुमति देने से मना कर दिया। ऐसे में यह सवाल उठना भी लाजमी है कि अगर एक चुनाव में नोटा प्रासंगिक है तो दूसरे चुनाव में नोटा अप्रासंगिक कैसे हो सकता है।

यहाँ पर यह भी प्रश्न उठता है कि क्या राज्यसभा के चुनाव में सभी उम्मीदवार बेहतर होते हैं। अगर नोटा सही विकल्प ही है तो फिर इसे प्रत्येक चुनाव में क्यों नहीं इस्तेमाल किया जा सकता या फिर यह मान लिया जाए कि राज्यसभा चुनाव में समस्त उम्मीदवारों में से कोई बुरा हो ही नहीं सकता। यह एक चर्चा का विषय है। हालाँकि, यह तथ्य निर्विवाद है कि मतदाताओं को उम्मीदवारों की चयन प्रक्रिया में पूरी ईमानदारी से शामिल होना चाहिए।