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पाकिस्तान के कब्जे वाला कश्मीर हमारा, इसे हम लेकर रहेंगे: बंगाल में बोले अमित शाह, कहा- POK पर बात करने से डरते हैं ममता बनर्जी और राहुल गाँधी

पश्चिम बंगाल के हुगली में गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि पहले कश्मीर में आजादी के नारे लगते थे और अब PoK में आजादी के नारे लगते हैं। अमित शाह ने कहा कि पहले कश्मीर में पत्थरबाजी होती थी, अब पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में पत्थरबाजी होती है। उन्होंने कहा कि 2.11 करोड़ टूरिस्टों ने कश्मीर जाकर एक नया रिकॉर्ड बनाया और PoK में आटे के भाव ने रिकॉर्ड बनाया।

इस जनसभा में गृहमंत्री ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी वाली पार्टी तृणमूल कॉन्ग्रेस और राहुल गाँधी पर जमकर निशाना साधा। POK में जारी हिंसक विरोध प्रदर्शनों का जिक्र करते हुए अमित शाह ने कहा कि पाकिस्तान के कब्जे वाला कश्मीर भारत का हिस्सा है और भारत इसे लेकर रहेगा।

पश्चिम बंगाल के श्रीरामपुर में एक रैली को संबोधित करते हुए अमित शाह ने कहा कि साल 2019 में अनुच्छेद 370 के हटने के बाद कश्मीर में शांति लौट आई है। वहीं, पाकिस्तान के कब्जे वाला कश्मीर अब विरोध प्रदर्शनों और आजादी के नारों से गूंज रहा है। बता दें कि POK में महंगाई को लेकर हिंसक प्रदर्शन हो रहे हैं।

उन्होंने कहा कि ये मणिशंकर अय्यर, ये फारुख अब्दुल्ला देश को डराने का काम करते हैं कि पाकिस्तान के पास एटम बम है और PoK की बात मत करो, क्योंकि पाकिस्तान के पास परमाणु बम है। अमित शाह ने कहा, “राहुल बाबा आपको डरना है तो डरिए, ममता दीदी आपको डरना है तो डरिए, PoK भारत का है और इसे हम लेकर रहेंगे।”

मस्जिद में चल रही थी नमाज, भीड़ के साथ आया खालिद और करने लगा सबकी पिटाई: पुलिस ने बताया जमीन का विवाद, FIR दर्ज

उत्तराखंड के हरिद्वार जिले की एक मस्जिद में नमाज़ पढ़ा रहे इमाम और नमाज़ियों पर हमले की खबर है। इस हमले में कई लोग घायल हो गए हैं। हमले का आरोप कारी खालिद नाम के व्यक्ति और उसके साथियों पर लगा है। घटना के पीछे की वजह सम्पत्ति विवाद को बताया गया है। पुलिस ने कारी खालिद पक्ष के कुल 27 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज करके जाँच शुरू कर दी है। दोनों पक्षों के लोगों को मुचलके पर थाने में पाबंद भी किया गया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, हरिद्वार जिले के थानाक्षेत्र रुड़की में घटना सोमवार (13 मई 2024) को घटी। सोमवार को यहाँ समीर अली शेख ने पुलिस में तहरीर दी है। तहरीर में समीर ने खुद को दरगाह खादिम गुलाब शाह पीर का खादिम बताया है। उन्होंने लिखा है कि गुलाबनगर इलाके में दरगाह के पास एक मस्जिद भी बनी हुई है। इस मस्जिद पर कारी खालिद अपना हक जताता आ रहा है जबकि समीर अली इसे अपनी जागीर मानता है। इस जमीनी विवाद के चलते दोनों पक्षों में अक्सर तनातनी बनी रहती थी। दोनों ने अदालत में भी अपना-अपना दावा ठोंक रखा है।

सोमवार की रात में समीर अली इस मस्जिद में कुछ अन्य नमाज़ियों के साथ नमाज़ अदा कर रहा था। नमाज़ पढ़ रहे लोगों में इजहार, जमीर अहमद और महताब, आदि शामिल हैं। इसी दौरान कारी खालिद अपने दर्जनों साथियों सहित वहाँ आ धमका। उसके साथ मौजूद लोगों ने नमाज़ पढ़ रहे लोगों को अपशब्द कहे। कुछ ही देर में इस भीड़ ने नमाज़ियों पर हमला कर दिया। हमले से मस्जिद में भगदड़ का माहौल बन गया। भाग रहे लोगों को दौड़ा-दौड़ा कर पीटा गया जिसमें कई लोग घायल हो गए। शोरगुल सुन कर आसपस के लोग जमा हुए। घटना की जानकारी होते ही पुलिस भी मौके पर पहुँची।

पुलिस को देख कर हमलावर भाग खड़े हुए। घायलों को इलाज के लिए अस्पताल भेजा गया। रुड़की कोतवाली के प्रभारी गोविंद कुमार ने मीडिया से बात करते हुए इस घटना की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि प्राप्त तहरीर के आधार पर कारी खालिद, जमील अहमद, शाहनवाज, अली नवाब, कलीम, जान आलम और सुहेल सहित कुल 27 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की गई है। इन सभी बलवा समेत अन्य धाराओं में कार्रवाई की गई है। दोनों पक्षों के कुछ लोगों को मुचलके पर पाबंद भी किया गया है। पुलिस ने किसी भी प्रकार से माहौल बिगाड़ने वालों को सख्त चेतावनी दी है। मामले की जाँच की जा रही है।

कार में जबरन बैठाकर चाकू की नोक पर रेप, महिला ने AAP के नेता और उसके बेटे-बहू पर भी लगाया आरोप: पार्टी ने बताया मनगढंत

गुजरात के अमरेली जिले में आम आदमी पार्टी (AAP) के नेता कांति सतासिया के बेटे हरेश पर एक लड़की का अपहरण करके चाकू की नोक पर बलात्कार करने का आरोप लगा है। पीड़िता ने शिकायत में 2022 का विधानसभा का चुनाव भी लड़ चुके कांति सतासिया, उनके दूसरे बेटे भाविन और हरेश की बीवी वैशाली पर धमकी देने का आरोप लगाया है। पुलिस ने 11 मई को FIR दर्ज कर ली है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, 35 वर्षीया पीड़िता मूल रूप से बसगरा की रहने वाली है। पुलिस को दी गई शिकायत में पीड़िता ने बताया कि हरेश के साथ उसका 15 वर्षों से अफेयर है। लगभग 25 दिन पहले हरेश सतासिया ने पीड़िता को उसके गाँव से बुलाया। इसके बाद उसने महिला को जबरन अपनी कार में बैठा लिया और रेप किया।

पीड़िता का कहना है कि इसका जब उसने विरोध किया तो उसे चाकू दिखाकर चुप रहने की धमकी दी गई। बकौल पीड़िता, हरेश पहले भी उससे शादी का वादा करके कई बार रेप कर चुका है। शिकायत में महिला ने आगे बताया कि किसी अन्य लड़के से जब उसका ब्याह तय हो रहा था तब हरेश के पिता कांति सतासिया और उसके भाई भाविन ने इसमें व्यवधान डाला।

इन दोनों पर पीड़िता के मंगेतर पर दबाव डालकर सगाई तुड़वा देने का आरोप है। साथ ही हरेश की पत्नी का भी जिक्र शिकायत कॉपी में है। हरेश की बीवी वैशाली पर आरोप है कि उन्होंने कॉल करके पीड़िता को धमकी दी। पुलिस ने हरेश पर रेप और अपहरण के साथ उनके पापा कांति सतासिया, बीवी वैशाली और भाई भाविन पर धमकी देने की FIR दर्ज कर ली है।

अमरेली के पुलिस अधीक्षक हिमकर सिंह ने बताया कि चारों आरोपितों को गिरफ्तार करने के प्रयास जारी हैं। वहीं, आम आदमी पार्टी ने अपने नेता व उनके बेटे पर लगे आरोपों को राजनीति से प्रेरित करार दिया है। AAP ने FIR की टाइमिंग को संदिग्ध बताते हुए इसे विश्वास के लायक नहीं माना है। बताते चलें कि 2022 विधानसभा चुनावों में भाजपा के जेवी काकड़िया ने कांति सतासिया को हराया था।

‘मोदी अद्भुत नेता, वे तीसरी बार भी बनेंगे भारत के PM’: कौन हैं साजिद तरार जिन्होंने कहा पाकिस्तान को भी ‘नमो’ जैसे नेतृत्व की जरूरत

पाकिस्तानी अमेरिकी कारोबारी साजिद तरार ने भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की तारीफ की है। वह इस बात को लेकर एकदम निश्चिंत है कि नरेन्द्र मोदी भारत के तीसरी बार प्रधानमंत्री बनेंगे। उन्होंने पीएम मोदी को एक जन्मजात नेता बताया है और कहा है कि भारत को उनके मजबूत नेतृत्व की आवश्यकता है।

साजिद तरार ने पीएम मोदी को लेकर कहा, “मोदी जी एक अद्भुत नेता है, वह जन्मजात नेता हैं। वह अकेले ऐसे नेता हैं जो कि खराब हालातों में भी पाकिस्तान गए और राजनीतिक साख को दाँव पर लगाया। मैं इन्हीं मोदी जी से आशा करता हूँ कि वह पाकिस्तान के बातचीत और व्यापार शुरू करेंगे। क्योंकि पाकिस्तान में अगर शांति होगी तो यह भारत के लिए भी अच्छा है।”

उन्होंने आगे बताया, “पीएम मोदी की उपलब्धियों की एक लम्बी लिस्ट है। मजबूत भारत के लिए उनका नेतृत्व जरूरी है और यह एकदम स्पष्ट है कि वह तीसरी बार देश के प्रधानमंत्री बनेंगे।” साजिद तरार ने भारत के चुनावों को लेकर भी हैरानी व्यक्त की है।

उन्होंने कहा कि एक पाकिस्तानी के नाते भारत में 97 करोड़ लोगों का वोट डालना उन्हें एकदम चमत्कार लगता है। उन्होंने कहा कि यह भारत सबसे बड़े लोकतंत्र होने को सिद्ध करता है। उन्होंने भारत में बड़े स्तर पर मतदान को अद्भुत बताया है। उन्होंने कहा कि भविष्य में लोग भारत के लोकतंत्र से सीखेंगे। उन्होंने आशा जताई कि पाकिस्तान को भी एक बार नरेन्द्र मोदी जैसा प्रधानमंत्री मिले।

साजिद तरार ने इस दौरान पाकिस्तान के आर्थिक संकट को लेकर भी बात की। उन्होंने कहा, “पाकिस्तान आर्थिक संकट से गुजर रहा है, इसकी वजह से महँगाई बढ़ी हुई है। IMF के पैकेज के कारण बिजली, पेट्रोल महँगा है, बिजली महँगी होने के कारण निर्यात नहीं हो पा रहा। पाक अधिकृत कश्मीर में बिजली महँगी होने की वजह से जुलूस निकले।”

उन्होंने प्रश्न खड़े किए कि हाल ही में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ ने POK के लिए एक पैकेज का ऐलान किया है, इसके लिए पैसे कहाँ से दिए जाएँगे। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान में मूल मुद्दे नहीं हल किए जा रहे। उन्होंने पाकिस्तान में कानून व्यवस्था और आंतकवाद पर भी प्रश्न खड़े किए।

साजिद तरार पाकिस्तानी मूल के अमेरिकी कारोबारी है। वह 1990 के दशक में अमेरिका चले गए थे। साजिद अमेरिका के बाल्टिमोर के बड़े कारोबारी हैं। वह अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के करीबी माने जाते हैं। वह मुस्लिमों के मामलों के लिए ट्रम्प के सलाहकार भी रहे हैं। तरार एक बड़ी निवेश कम्पनी में बड़े पद पर हैं। तरार सोशल मीडिया पर भी अपने विचार खुल कर रखते हैं। वह पाकिस्तान के मुद्दों को लेकर भी मुखर रहते हैं।

केदारनाथ धाम में ढोल-ताशा परंपरा या फिर रीलबाजी?

क्या आज लोग केदारनाथ धाम जाकर कुछ ऐसी हरकतें कर रहे हैं जिससे वहाँ की शांति भंग हो रही है? या फिर ये एक अनावश्यक विवाद है, क्योंकि इन्हीं श्रद्धालुओं से वहाँ के लोगों का व्यापार चलता है? इसमें एक तर्क ये भी है कि हमारे गली-मोहल्ले के मंदिर जो वहाँ हम रौनक लाने का प्रयास क्यों नहीं करते दूर तीर्थाटन करने से पहले? दैनिक न सही तो कम से कम साप्ताहिक रूप से ही वहाँ उपस्थिति क्यों नहीं दर्ज करा पाते? खैर, रील्स वाली बीमारी आजकल भारत के कई तीर्थस्थलों पर देखने को मिल रही है।

अगर आपने ऋषि-मुनियों के जीवन के बारे में पढ़ा होगा तो अक्सर देखा होगा कि वो वन में तपस्या करते थे। यही कारण है कि नैमिषारण्य से लेकर दण्डकारण्य तक उस काल में आध्यात्मिक स्थलों के रूप में उभरे। ऋषि-मुनियों ने वहीं प्रकृति के बीच अपने आश्रम स्थापित किए। वो पेड़-पौधों एवं वन्यजीवों की देखभाल भी करते थे। इन आश्रमों में मृग चरते रहते थे, ऐसा प्रसंग कई बार रामायण या महाभारत में आया है। कइयों ने तपस्या के लिए और भी दुर्गम स्थल चुने।

इनमें हिमालय उनका सबसे पसंदीदा क्षेत्र हुआ करता था। स्पष्ट है कि तब हिमालयी क्षेत्र में आज की तरह पक्की सड़कें नहीं रही होंगी, रोपवे नहीं बने होंगे और चढ़ाई में सहूलियत देने वाले उपकरण नहीं रहे होंगे, वहाँ की तस्वीरें-वीडियो देख कर वहाँ जाने की योजनाएँ नहीं बनती होंगी। कभी आपने सोचा है कि हमारे ऋषि-मुनियों ने आखिर इन दुर्गम स्थलों को ही अपना ठिकाना क्यों बनाया? वो गाँव-नगर में रह कर भी तो साधना कर सकते थे। इसका आसान सा जवाब है – शांति।

हिमालयी या जंगली क्षेत्रों में क्यों रहते थे ऋषि-मुनि?

जी हाँ, शांति। ये ऋषि-मुनि लोगों की बसावट से दूर इसीलिए रहते थे, ताकि उनकी साधना में कम से कम व्यवधान पड़े। अब जो व्यवधान डालने के लिए जंगलों तक में पहुँच गए, वो राक्षस कहलाए। केदारनाथ धाम भारत के प्राचीन आध्यात्मिक स्थलों में से एक है। 2023 में 12 लाख लोगों ने उत्तराखंड के रूद्रप्रयाग जिले में स्थित इस मंदिर में आकर महादेव का दर्शन किया। ये 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है। मंदिर सड़क से सीधा नहीं जुड़ा हुआ है, अतः गौरीकुंड से 22 किलोमीटर के ट्रेक के बाद लोग यहाँ आते हैं।

प्राचीन काल में हिमालय को स्वर्ग इसीलिए भी कहा गया, क्योंकि यहाँ के वन्यजीवन और स्थानीय जनजीवन की गतिविधियों में व्यवधान डालने के लिए बाहरी ताकतें नहीं आती थीं। पहाड़ों में विकास कार्य होने चाहिए, मराठा महारानी अहिल्याबाई होल्कर ने केदारनाथ धाम तक में निर्माण कार्य कराए। पर्यटन और तीर्थाटन भी होना चाहिए, लेकिन हुड़दंग, नशा, रीलबाजी और दिखावे के लिए पहाड़ों पर जाने का जो प्रचलन चल पड़ा है उसे बंद करने की आवश्यकता है।

केदारनाथ धाम: द्वादश ज्योतिर्लिंगों में एक, 2013 में आया था महाप्रलय

केदारनाथ धाम रुद्रप्रयाग जिले में स्थित है, जो अलकनंदा एवं मन्दाकिनी नदियों के संगम के लिए विख्यात है। केदार पर्वत पर स्थित इस ज्योतिर्लिंग को केदारेश्वर भी कहा जाता है। यहाँ कण-कण में भगवान शिव बसे हुए हैं, तभी इस पर्वत श्रृंखला को भी रूद्रपर्वत कहा जाता है। इसे सुमेरु और पंच पर्वत भी कहा गया है, क्योंकि इसमें 5 चोटियाँ हैं – रूद्र हिमालय, विष्णुपुरी, ब्रह्मपुरी, उद्गारीकंठ, और स्वर्ग रोहिणी। इसी का एक हिस्सा गंधमादन पर्वत भी है, जहाँ से युधिष्ठिर ने स्वर्ग में प्रवेश किया था।

उन्होंने कहा भी था कि कठिन तपस्या के बाद ही यहाँ तक पहुँचा जा सकता है। जब कोई मेहनत कर के कहीं पहुँचता है तो उसे लक्ष्य की महत्ता का भान होता है, आज की जो पीढ़ी आसानी से वहाँ मोबाइल फोन लेकर पहुँच रही है उसके लिए ये एक खेल से बढ़ कर कुछ नहीं। स्कन्द पुराण में खुद ब्रह्मा जी कहते हैं कि महान दुर्गम पर्वत हिमाद्रि सभी जंतुओं के लिए नहीं है, इस पर महेश्वर का शासन है। विनती किए जाने पर महादेव ने डिवॉन, गंधर्वों, पक्षियों, नागों एवं विद्याधरों की क्रीड़ा के लिए अलग-अलग स्थान निश्चित किए।

खुद भगवान शिव हिमालय को सभी आश्रमों का निवास स्थान बताते हुए कहते हैं कि वो यहाँ पर लिंग के रूप में स्थित हैं। पांडव भी महाभारत युद्ध के बाद मन की शांति के लिए यहाँ आए थे। केदारनाथ ही वो जगह है, जहाँ जगद्गुरु शंकराचार्य शिव में विलीन हुए थे, यहाँ उन्होंने देह-त्याग किया था। सर्दी के मौसम में मंदिर बंद रहता है, इसीलिए नियमित पूजा उखीमठ में जारी रहती है। कुल मिला कर यूँ समझिए कि केदारनाथ धाम हिन्दू, खासकर शैव मत में एक उच्च स्थान रखता है।

केदारनाथ धाम भक्ति व अध्यात्म का स्थल, रील बनाने की जगह नहीं

पिछले कुछ वर्षों से केदारनाथ धाम, खासकर पूरे पहाड़ी क्षेत्र पर एक नया ट्रेंड देखने को मिल रहा है। लोग भगवान के दर्शन, भजन-कीर्तन, ध्यान या योग के लिए नहीं, बल्कि इंस्टाग्राम रील बनाने के लिए यहाँ पहुँच रहे हैं। आपको लड़के-लड़कियाँ पहाड़ों पर लॉन्ग ड्राइव करते और बियर पीते हुए मिल जाएँगे। ये पवित्र स्थल सेक्स और नशा का अड्डा नहीं हैं, न बनाए जाने चाहिए। ये नाच-गान के लिए भी नहीं है, यहाँ की शांति भंग करने का अधिकार किसी को भी नहीं है।

अब देखिए, केदारनाथ धाम में रील वाला ड्रामा इतना बढ़ गया कि वहाँ के स्थानीय पुजारियों को हस्तक्षेप करना पड़ा। भड़कते हुए पुजारी इस वीडियो में कह रहे हैं कि कुछ लोगों ने और प्रशासन ने तमाशा बना रखा है, गाजा-बाजा नहीं बजना चाहिए। वो कह रहे हैं कि सिर्फ ढोल बजेगा, भगवान के दर्शन के लिए यहाँ लोगों को आना चाहिए। उनका पूरा ज़ोर है कि क्षेत्र को शांत रखा जाना चाहिए, ये सब करना है तो लोग न आएँ। असल में इंदौर के 44 लड़के और 18 लड़कियों का एक समूह वहाँ 30 ढोल और 10 ताशे लेकर पहुँचा था, वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाने के लिए।

अगर हम कहीं भी घूमने जा रहे हैं, अपने बगल के गाँव में भी – तो सबसे पहले चीज हमें ये देखनी चाहिए कि उन्हें क्या पसंद है और क्या नहीं और उसी अनुरूप व्यवहार करना चाहिए। अगर आप किसी के घर में बतौर मेहमान जाते हैं तो वहाँ अपनी नहीं चलाते। हाँ, ये देश का हर कोना हर एक देशवासी का है, लेकिन देश की विविधता का सम्मान करना भी हम देशवासियों का ही काम है। अयोध्या, मथुरा, काशी, केदारनाथ या फिर उज्जैन महाकाल मंदिर रील बनाने के स्थल नहीं हैं।

इस मामले में आप दक्षिण भारत को देख लीजिए, जहाँ हर मंदिर के कुछ नियम-कानून हैं और आपको उसका अनुसरण करना पड़ता है। तमाम मंदिरों के अपने ड्रेस कोड भी हैं, प्रधानमंत्री या उनके सुरक्षाकर्मी भी जाते हैं तो उन्हें इसका पालन करना पड़ता है। अगर कहीं कुछ पाबंदियाँ नहीं लगाई गई हैं, तब हमारे जिम्मेदारी और बढ़ जाती है कि हम वहाँ की मर्यादा को बनाए रखें। उत्तराखंड की पुलिस भी चेतावनी जारी कर चुकी है कि धाम की मर्यादा बनाए रखने के लिए धूम्रपान न करें, हुड़दंग न करें।

केदारनाथ धाम में रीलबाजी: क्या कहते हैं पुजारी

हमने इस पूरे मामले को समझने के लिए वहाँ के पुजारी आचार्य संतोष जी महाराज से बात की। उनका आरोप है कि सरकार का ध्यान अब तीर्थ से पर्यटन की तरफ केंद्रित हो गया है। उनका कहना है कि पूजा परंपरा में बदलाव आ गया है, जो गलत है। उन्होंने कहा कि यहाँ की परंपरा है गर्भगृह में जाकर दर्शन करना, जैसा उज्जैन महाकाल मंदिर में भी है। वहाँ पूजा होती है, माता को घी लगाई जाती है, गणेश जी की प्रथम पूजा का नियम है।

उनका कहना है, “गणेश जी की पूजा के नियम की अनदेखी हो रही है। अब VIP दर्शन कराए जा रहे हैं। सीधे गर्भगृह में 2100 रुपए शुल्क लेकर प्रवेश कराया जाता है, जिससे ऐसे में धर्म दर्शन में रास्ते में जो गणेश जी की पूजा होती है, वो नहीं हो पा रही है। धर्म और आस्था बिक रही है, परंपराएँ कहाँ रह गई हैं? ‘विशेष पूजा’ में भी गणेश जी की पूजा छोड़ कर आगे की पूजा की जाती है। मेरी सलाह है कि श्रद्धालु कितनी भी संख्या में आएँ, यहाँ की परंपराओं पर ध्यान देना बहुत ज़रूरी है।”

उन्होंने कहा कि हमें ये देखे जाने की ज़रूरत है कि एक घंटे में हम कितने श्रद्धालुओं को दर्शन करा सकते हैं और दिन भर में हमारे पास दर्शन के लिए कितने घंटे हैं, इस हिसाब से नियम बनाया जाना चाहिए और इसमें न सिर्फ मंदिर समिति बल्कि तीर्थ पुरोहितों को भी सहयोग करना चाहिए। संतोष जी महाराज ने कहा कि यहाँ मशीनें चल रही हैं, प्रकृति के साथ छेड़छाड़ हो रही है। उन्होंने कहा कि विकास कार्य के नाम खुलेआम खनन हो रहा है। उन्होंने कहा कि आज योजनाएँ नहीं बल्कि प्रकृति ज़रूरी है।

संतोष जी महाराज ने कहा कि कई तीर्थस्थलों पर कम खर्च और कम समय में लोग पहुँच सकते हैं, लेकिन वो केदारनाथ धाम आ रहे हैं क्योंकि यहाँ वो खुद को प्रकृति के करीब पाते हैं। उन्होंने सवाल किया कि अगर ये प्रकृति ही हम बचा नहीं पाएँगे तो आएगा कौन? उन्होंने कहा कि कमाई की जगह प्रकृति को बचाने पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि मंदिर समिति ने जगह-जगह विज्ञापन दे रखा है कि 2100 रुपए में दर्शन करा देंगे, जबकि आम लोग 4-4 घंटे लाइन में खड़े रहते हैं। उन्होंने मंदिर समिति पर करोड़ों रुपए के सोने में भी गड़बड़ी के आरोप लगाए।

केदारनाथ धाम में अव्यवस्था? मंदिर समिति ने अपनी सफाई में क्या कहा

वहीं केदारनाथ मंदिर समिति के अध्यक्ष अजयेन्द्र अजय इन आरोपों से ताल्लुक नहीं रखते। उन्होंने कहा कि मंदिर में लॉकर रूम की व्यवस्था नहीं है, इस कारण मंदिर समिति श्रद्धालुओं के मोबाइल फोन, कैमरा या अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण को नहीं जमा करा पाती हैं। उन्होंने कहा कि बाकी मंदिरों के मुकाबले केदारनाथ मंदिर के पास जगह की भी कमी है। उन्होंने कहा कि श्रद्धालुओं से लगातार मंदिर की मर्यादा बना रखने की अपील मंदिर समिति करता रहता है।

उन्होंने कहा कि श्रद्धालुओं से लगातार अपील की जाती है कि परंपराओं का पालन किया जाए और किसी की भी धार्मिक भावनाएँ आहत न की जाएँ। हालाँकि, उन्होंने ये भी कहा कि मंदिर समिति का अधिकार क्षेत्र सिर्फ पूजा-प्रबंधन तक सीमित है, बाकी चीजें पुलिस-प्रशासन की जिम्मेदारी है। VIP दर्शन के आरोपों को नकारते हुए उन्होंने कहा कि यहाँ ऐसी कोई व्यवस्था है ही नहीं, प्रोटोकॉल से आने वाले VIPs से देश के सभी मंदिरों में शुल्क लिया जाता है।

केदारनाथ मंदिर समिति के अध्यक्ष अजयेन्द्र अजय ने कहा कि किसी-किसी मंदिर में सामान्य दर्शनार्थियों से भी शुल्क लिया जाता है, लेकिन केदारनाथ धाम में ऐसा कुछ भी नहीं है। सोने में गड़बड़ी के आरोपों पर उन्होंने कहा कि अनाधिकारिक कुछ भी नहीं होता बल्कि सब कुछ रिकॉर्ड पर होता है। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार की कॉर्पोरेट बॉडी है, हम ऑटोनोमस हैं लेकिन कई चीजों में सरकार से अनुमति लेनी पड़ती है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार समिति के एग्जीक्यूटिव ऑफिसर और फाइनेंस ऑफिसर नियुक्त करती है।

क्या श्रद्धालुओं से अनावश्यक रूप से वसूले जाते हैं पैसे?

हमने केदारनाथ धाम जाने वाले कुछ श्रद्धालुओं से भी बातचीत की, जिनका कहना है कि सब इंस्टाग्राम रील्स बनाने या फिर नशा करने के लिए ही केदारनाथ धाम नहीं आते हैं, ऐसे में सभी को इस रूप में देखना ठीक नहीं है। एक पक्ष ये भी है कि केदारनाथ धाम में ढोल-ताशे वाले जिस दल को रोका गया, वो देश के कई मंदिरों में घूम कर ऐसा कर चुके हैं और वो काफी भक्तिभाव से ये सब करते हैं। उस पक्ष का ये भी कहना है कि वो पारंपरिक वेशभूषा में रहते हैं और मर्यादा का किसी प्रकार से भी उल्लंघन नहीं करते।

एक श्रद्धालु ने कहा कि अगर ढोल-ताशे की आवाज़ से दिक्कत है तो फिर सुबह से शाम तक केदारनाथ धाम के ऊपर जो हेलीकॉप्टर मँडराते रहते हैं, उससे पर्यावरण को दिक्कत क्यों नहीं होती? उन्होंने एक और विषय पर आवाज़ उठाई, वो है अनावश्यक वसूली का। कुछ श्रद्धालुओं की शिकायत है कि होटल रूम से लेकर अन्य सभी सेवाओं के लिए कई गुना ज़्यादा रुपए वसूले जाते हैं और इस पर कोई आवाज़ नहीं उठाता। उनका कहना है कि कभी-कभी 10 गुना ज्यादा शुल्क लिया जाता है।

हालाँकि, ये समस्या खासकर पहाड़ की नहीं है बल्कि देश के अधिकतर तीर्थ एवं पर्यटन स्थलों पर ट्रांसपोर्ट और स्टे में बाहर से आने वालों को अधिक शुल्क चुकाना पड़ता है। पूरी बात का लब्बोलुआब ये है कि हमें धार्मिक स्थलों पर वहाँ की मर्यादा का पालन करते हुए भक्ति और अध्यात्म में रमना चाहिए, शांति के साथ। अब ढोल-ताशा बजाने से रोकने को लेकर अलग-अलग राय हो सकते हैं, वो भक्तिभाव से कर रहे थे या फिर सोशल मीडिया के लिए – उनके मन की बात विशुद्ध रूप से तो बाबा केदार को ही पता होगी।

जिसने मृत पिता के लिए कहा- करते थे मेरा यौन शोषण, वो CM हाउस में खुद के साथ बदसलूकी पर चुप क्यों: कई सवाल, कब देंगे मालीवाल-केजरीवाल जवाब

दिल्ली महिला आयोग की पूर्व अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद स्वाति मालीवाल के साथ मुख्यमंत्री केजरीवाल आवास पर हुई मारपीट वाला विवाद बढ़ता जा रहा है। सोमवार (13 मई 2024) को पुलिस के पास उनके नाम से एक कॉल आई कि उनके साथ मारपीट हुई है। इसके बाद खुद स्वाति मालीवाल भी पुलिस थाने तक पहुँचीं, लेकिन शिकायत करातीं इससे पहले उन्हें एक कॉल आ गई और वो तुरंत बाहर चली गईं। उसके बाद वो लौट कर नहीं आई। पूरी खबर पर संदेह किया जाता इससे पहले ही AAP सांसद संजय सिंह प्रेस कॉन्फ्रेंस के सामने आए और बोले कि AAP स्वाति के साथ है। वहीं स्वाति मालीवाल के पूर्व पति ने इस संबंध में वीडियो बनाकर पूरे हमले को साजिश करार दिया और अपनी पूर्व पत्नी की जान को खतरा तक बताया…।

इस पूरे घटनाक्रम को देखते हुए ये तो स्पष्ट लग रहा है कि स्वाति मालीवाल के साथ मुख्यमंत्री केजरीवाल के आवास पर बदसलूकी हुई, लेकिन सवाल ये है कि इस मामले में अभी स्वाति खुद क्यों चुप हैं। उन्होंने अभी तक अपने ऊपर हुई घटना के बारे में किसी को क्यों कुछ नहीं बताया।

स्वाति मालीवाल राज्यसभा सांसद बनने से पहले सालों तक दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष रही थीं। इस दौरान उन्होंने महिलाओं के साथ छेड़छाड़, बदसलूकी और मारपीट के कई मुद्दे उठाए। जरूरत पड़ने पर हड़ताल की, नोटिस जारी किए, सड़क पर बैठ गईं। उन्होंने अन्य राज्यों में भी अपना हस्तक्षेप किया जो उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं आता…मगर बात जब खुद के लिए इंसाफ माँगने की आई तो न तो वो मीडिया के सामने बयान देने आईं और न हीं उन्होंने कोई वीडियो बनाया, न ही कोई पोस्ट किया। उनके पूर्व पति तक ने अपनी वीडियो में कहा है कि स्वाति को इसमें बोलना चाहिए। वो क्यों चुप है ये नहीं पता चल पा रहा है।

सोशल मीडिया पर लग रहे अनुमान

इस मामले को देखते हुए राजनैतिक विरोधी ये तक कहने लगे कि स्वाति पर जो सीएम आवास पर हमला हुआ वो बिना सीएम की जानकारी में हुए नहीं हो सकता है… इसलिए अगर सच में ऐसा है तो स्वाति को इस मामले में बोलना चाहिए, ताकि सच्चाई सामने आ सके। इसके अलावा कुछ लोग अंदाजा लगा रहे हैं कि केजरीवाल राज्यसभा सांसद का पद अपने वकील को देना चाहते हैं, जिसने उनका कोर्ट में केस लड़ा, इसलिए हो सकता है स्वाति से पद छोड़ने को कहा गया हो और न सुनवाई पर ये घटना घटी। कुछ का मानना है कि मीडिया में आने के लिए स्वाति मालीवाल ने सिर्फ और सिर्फ ड्रामा किया है। उनपर कोई हमला नहीं हुआ है और कुछ का कहना है कि हो सकता है कि इस पूरी घटना के पीछे कोई निजी मामला हो जिसके बारे में स्वाति मीडिया में न कहना चाहती हों इसलिए उन्होंने ऐसा किया है।

भाजपा की महिला नेता ने उठाया सवाल

भाजपा की महिला नेता शाजिया इल्मी ने भी इस मुद्दे को उठाया है। उन्होंने सीएम केजरीवाल से इस मामले में सच्चाई बताने को कहा है। उन्होंने कहा है कि इस संबंध में पिछले 48 घंटे से सवाल किए जा रहे हैं, फिर भी केजरीवाल चुप क्यों हैं? वो बताएँ कि उन्होंने बिभव पर क्या एक्शन लिया है? क्या बिभव ने केजरीवाल की ओर से स्वाति को पीटा जो वो एक्शन लेने से कतरा रहे हैं? उन्हें धमकी दी गई है? क्यों कोई एफआईआर अब तक नहीं हुई है? क्या इस घटना के लिए केजरीवाल को जिम्मेदार नहीं ठहराया जाना चाहिए।

स्वाति मालीवाल की चुप्पी से उठते हैं सवाल

बता दें कि सीएम आवास पर बदसलूकी मामले में अरविंद केजरीवाल के सेक्रेट्री भिभव कुमार के खिलाफ पूर्व दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष कब बोलेंगीं ये तो नहीं पता लेकिन उनकी चुप्पी के कारण, आप के रवैये के चलते कुछ सवाल सोशल मीडिया पर उठने लगे हैं। जैसे ये पूछा जाना तो लाजिमी है कि एक नंबर से जब कॉलें आईं और स्वाति थाने भी पहुँची तो उन्होंने एक कॉल आने पर केस क्यों नहीं कराया… ऐसा तो नहीं वो कॉल उन्हें धमकाने या चुप कराने के लिए किसी ने की हो। वरना उनसे जुड़ी खबरें बताती हैं कि उन्होंने सक्रिय होकर महिलाओं के मुद्दों को उठाया है।

अगर हम उनका ट्विटर हैंडल देखेंगे तो भी यही पता चलता है कि उन्होंने इस घटना के बारे में अब तक सोशल मीडिया पर एक शब्द नहीं लिखा है। ऐसे में ये भी कहा जा रहा है कि स्वाति हैं कहाँ पर? क्या वो इस हाल में हैं कि अपने सोशल मीडिया को एक्सेस कर सकें? अगर ऐसा है तो क्यों अभी तक उन्होंने इस पूरे विवाद में कोई शिकायत नहीं की।

एक सवाल ये भी कि आम आदमी पार्टी ने इस खबर के मीडिया में आने के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस करके कहा कि वो आरोपित पर कार्रवाई करेंगे। कहीं ऐसा तो नहीं ये इस डर से किया गया ताकि सीएम केजरीवाल का नाम मीडिया में न उछले क्योंकि वो अभी जेल से बाहर आएँ हैं। लोग कह रहे हैं कि अगर इस मामले में सीएम का कोई हाथ नहीं है तो उन्हें भी इस संबंध में अपना पक्ष साफ कर देना चाहिए।

ये भी पूछा जा रहा है कि जब स्वाति पर हमला हुआ होगा, तो वो चीखी-चिल्लाई भी होंगी… ऐसे में क्या कोई उनके आसपास नहीं आया। क्या न केजरीवाल वहाँ मौजूद थे और न ही सुनीता केजरीवाल वहाँ मौजूद थीं… अगर दोनों वहीं थे तो उन्होंने उस मामले को वहीं क्यों नहीं सुलझाया और एक महिला के खिलाफ कार्रवाई होता देख एक्शन क्यों नहीं लिया।

सबड़े बड़ी बात और सबसे बड़ा सवाल इस घटना के बाद ये है कि जिस तरह से स्वाति मालीवाल के पूर्व पति नवीन जयहिंद की वीडियो सामने आई है और उन्होंने वीडियो में गंभीर इल्जाम लगाए हैं उसे देखते हुए पूछा जा सकता है कि आखिर नवीन कौन सी साजिश के बारे में बात कर रहे थे। उन्हें क्यों लगता है कि स्वाति की जान को खतरा है। उन्होंने क्यों ये बोला कि संजय सिंह पहले से जानते थे कि ये अटैक होगा, उन्होंने आप सांसद को फटकारते हुए क्यों एक्टिंग बंद करने को कहा। ऐसा क्या है जो नवीन जयहिंद समझ रहे हैं लेकिन मीडिया तक वो बात नहीं खुल पा रही। ऐसे तमाम सवाल हैं जो स्वाति की चुप्पी से उमड़ रहे हैं लेकिन जवाब कहीं से कहीं तक नहीं मिल रहा है। याद रहे स्वाति वही महिला हैं जिन्होंने 2023 में अपने पिता के खिलाफ भी बयान दे दिया था। उन्होंने साफ बताया था कि उनके पिता उनका यौन शोषण करते थे, उन्हें चोटी पकड़ पकड़कर मारते थे।

जिस रामचरितमानस का भारत के ही हिन्दू विरोधियों ने किया अपमान, उसे UNESCO ने अपनी सूची में दिया स्थान: जानिए और किन ग्रंथों को मिली जगह

भारत की सांस्कृतिक एवं ऐतिहासिक विरासत को यूनेस्को की ‘मेमोरी ऑफ द वर्ल्ड एशिया-पैसिफिक रीजनल रजिस्टर’ में जगह मिली है। भारत के राम चरित मानस, पंचतंत्र और सहृदयलोक-लोकन को इस खास रजिस्टर में शामिल किया गया है। रामचरितमानस’, ‘पंचतंत्र’ और ‘सहृदयलोक-लोकन’ ने भारत के सामाजिक, धार्मिक एवं जीवन दर्शन पर गहरा असर डाला है और भारतीय साहित्य और संस्कृति को गहराई से प्रभावित किया है, देश के नैतिक ताने-बाने और कलात्मक अभिव्यक्तियों को आकार दिया है।

इन साहित्यिक कृतियों ने समय और स्थान से परे जाकर भारत के भीतर और बाहर दोनों जगह पाठकों और कलाकारों पर एक अमिट छाप छोड़ी है। उल्लेखनीय है कि ‘सहृदयालोक-लोकन’, ‘पंचतंत्र’ और ‘रामचरितमानस’ की रचना क्रमशः पं. आचार्य आनंदवर्धन, विष्णु शर्मा और गोस्वामी तुलसीदास ने की थी।

रामचरितमानस : भगवान राम के जीवन चरित- रामचरितमानस को तुलसीदास ने 16वीं शताब्दी में हिंदी भाषा की अवधी बोली में लिखा था। यह रामायण से भिन्न है जिसे ऋषि वाल्मीकि ने संस्कृत भाषा में लिखा था। रामचरितमानस चौपाई रूप में लिखा गया ग्रंथ है। रामकथा को देश दुनिया में प्रसारित करने में रामचरितमानस को सबसे अहम माना जाता है। आज भी रामचरितमानस का पाठ सामूहिक रूप से किया जाता है।

पंचतंत्र की कथाएँ: पंचतंत्र दुनिया की दंतकथाओं के सबसे पुराने संग्रहों में से एक है जो संस्कृत में लिखा गया था। विष्णु शर्मा जो महिलारोप्य के राजा अमर शक्ति के दरबारी विद्वान थे, उन्हें पंचतंत्र का श्रेय दिया जाता है। इसकी रचना संभवतः 300 ईसा पूर्व के आसपास हुई थी। इसका अनुवाद 550 ईसा पूर्व में पहलवी (ईरानी भाषा) में किया गया था।

‘सहृदयालोक-लोकन: ‘सहृदयालोक-लोकन’ की रचना आचार्य आनंदवर्धन ने संस्कृत में की थी। आचार्य आनंदवर्धन,10वीं शताब्दी के उत्तरार्ध और 11वीं शताब्दी के पूर्वार्द्ध के दौरान कश्मीर में रहते थे।

इंदिरा गाँधी राष्ट्रीय कला केंद्र (आईजीएनसीए) ने मेमोरी ऑफ द वर्ल्ड कमेटी फॉर एशिया एंड द पैसिफिक (एमओडब्ल्यूसीएपी) की 10वीं बैठक के दौरान एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उलानबटार में हुई इस सभा में, सदस्य देशों के 38 प्रतिनिधि, 40 पर्यवेक्षकों और नामांकित व्यक्तियों के साथ एकत्र हुए। तीन भारतीय नामांकनों की वकालत करते हुए, आईजीएनसीए ने ‘यूनेस्को की मेमोरी ऑफ द वर्ल्ड एशिया-पैसिफिक रीजनल रजिस्टर’ में उनका स्थान सुनिश्चित किया।

आईजीएनसीए में कला निधि प्रभाग के डीन (प्रशासन) और विभाग प्रमुख प्रोफेसर रमेश चंद्र गौड़ ने भारत से इन तीन प्रविष्टियों- राम चरित मानस, पंचतंत्र और सहृदयालोक-लोकन को सफलतापूर्वक प्रस्तुत किया। प्रो. गौर ने उलानबटार सम्मेलन में नामाँकनों का प्रभावी ढंग से समर्थन किया। यह उपलब्धि भारत की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने और बढ़ावा देने के लिए आईजीएनसीए के समर्पण को प्रदर्शित करती है, साथ ही वैश्विक सांस्कृतिक संरक्षण और भारत की साहित्यिक विरासत की उन्नति के प्रति अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि करती है।

बता दें कि यूनेस्को की मेमोरी ऑफ द वर्ल्ड एशिया-पैसिफिक रीजनल रजिस्टर के बारे में 2008 में ही सहमति बना ली गई थी, लेकिन पहली बार इसके लिए नामाँकन जमा किए गए। गहन विचार-विमर्श से गुजरने और रजिस्टर उपसमिति (आरएससी) से सिफारिशें प्राप्त करने और बाद में सदस्य देशों के प्रतिनिधियों द्वारा मतदान के बाद, सभी तीन नामांकनों को शामिल किया गया, जिससे 2008 में रजिस्टर की स्थापना से पहले की महत्वपूर्ण भारतीय प्रविष्टियों को चिह्नित किया गया

डीडी न्यूज के पत्रकार ने कॉन्ग्रेस की हिन्दू घृणा का किया खुलासा, तुरंत बचाने कूद पड़ा जुबैर: फैक्टचेक में साबित हुआ झूठा, बहस से पहले ही भाग चुका

स्वघोषित फैक्ट चेकर और ऑल्टन्यूज का फाउंडर मोहम्मद जुबैर लगातार खुद का ही स्तर गिराता जा रहा है। कॉन्ग्रेस-वामपंथी विचारधारा का समर्थन ना करने वालों के फैक्ट चेक करने के चक्कर में जुबैर ने एक बार और खुद को झूठा और मूर्ख सिद्ध कर दिया है। इस बार उसने डीडी न्यूज के पत्रकार अशोक श्रीवास्तव के एक खुलासे का फैक्टचेक करने का दावा किया।

मंगलवार (14 मई, 2024) को डीडी न्यूज के वरिष्ठ पत्रकार अशोक श्रीवास्तव ने बताया कि कॉन्ग्रेस के राज में हिन्दू प्रतीकों से किस तरह की घृणा थी। एक वीडियो में उन्होंने बताया, “जब UPA की सरकार थी, तब मुझे एक दिन आला अफसरों ने बुलाया। मैं अपनी पहचान के तौर पर कलावा बाँध कर रखता हूँ, UPA सरकार के दौरान कहा गया कि आप जो कलावा पहनते हैं, वह स्क्रीन पर नहीं दिखना चाहिए।” अशोक श्रीवास्तव ने बताया कि यह घटना 2006 के आसपास की है।

अशोक श्रीवास्तव की यह बताते हुए क्लिप आनंद रंगनाथ ने एक्स (ट्विटर) पर शेयर की। उन्होंने जैसे ही यह क्लिप डाली, जुबैर तुरंत कॉन्ग्रेस को बचाने के लिए उस पर कूद गया और इसे फैक्ट चेक करने का प्रयास किया। उसने अशोक श्रीवास्तव की बात पर प्रश्न चिन्ह खड़े करने के लिए उनकी एक पुरानी वीडियो निकाली, इसमें श्रीवास्तव कलावा पहने हुए दिखते हैं।

जुबैर द्वारा शेयर की गई यह तस्वीर 2013 की है। इसमें अशोक श्रीवास्तव एक कार्यक्रम को डीडी न्यूज पर होस्ट कर रहे हैं और उन्होंने कलावा पहना हुआ है। यह दिखा कर जुबैर ने यह सिद्ध करना चाहा कि कॉन्ग्रेस के राज में डीडी न्यूज पर कलावा दिखाने को लेकर अशोक श्रीवास्तव से कुछ नहीं कहा गया था और वह झूठ बोल रहे हैं। जुबैर ने लिखा, “यदि आप झूठ बोलते हैं तो ऐसा झूठ बोलें कि आप आसानी से पकड़े ना जाएँ।”

इस फैक्ट चेक से अशोक श्रीवास्तव की बात तो झूठी नहीं सिद्ध हुई परन्तु जुबैर की कॉन्ग्रेस वंदना और मूर्खता जरूर सामने आ गई। जुबैर ने दावा किया कि अशोक श्रीवास्तव झूठ बोल रहे हैं क्योकि 2013 में भी उन्होंने कलावा पहना हुआ था। दरअसल, अशोक श्रीवास्तव ने अपने वीडियो में कहीं भी यह नहीं कहा कि उन्होंने कलावा पहनना डीडी न्यूज के अधिकारियों के कहने के बाद छोड़ दिया था। उन्होंने सिर्फ यह बताया कि उसने कलावा स्क्रीन पर ना दिखाने को कहा गया था।

दूसरी बात यह है कि जुबैर ने जो तस्वीर शेयर की, वह 2013 की है। इसके उलट कॉन्ग्रेस सरकार के इस मौखिक आदेश की बात अशोक श्रीवास्तव ने 2006 के आसपास की बताई है। ऐसे में जुबैर किसी बात को झूठ तो नहीं साबित कर सका, लेकिन खुद को जरूर मूर्ख साबित कर गया।

जुबैर के इस असफल फैक्ट चेक के बाद अशोक श्रीवास्तव ने उसकी कलई खोल दी। पहले उन्होंने जुबैर को उनके साथ डिबेट के लिए चुनौती दी, लेकिन फिर उन्होंने बताया कि उसके पिछले रिकॉर्ड को देखते हुए, जुबैर उनसे डिबेट नहीं करेगा।

अशोक श्रीवास्तव ने बताया कि कैसे उन्होंने 2021 में गाजियाबाद के लोनी की घटना के बारे में झूठी खबर फैलाने के बाद जुबैर को अपने कार्यक्रम ‘दो टूक’ पर बहस के लिए किया था। श्रीवास्तव ने बताया कि उस समय जुबैर ने कोई जवाब नहीं दिया था।

श्रीवास्तव ने 2021 में जुबैर को भेजे गए व्हाट्सएप मैसेज का एक स्क्रीनशॉट भी अपलोड किया, जिसमें उन्हें डिबेट के लिए बुलाया गया था। यह डिबेट जुबैर के उस ट्वीट के बारे में थी, जिसमें उसने दावा किया था कि गाजियाबाद के लोनी में एक बूढ़े मुस्लिम व्यक्ति को जय श्री राम नहीं बोलने पर पीटा गया था।

जुबैर ने इस मामले को लेकर धार्मिक तनाव फ़ैलाने की कोशिश की थी और इसमें उसका सहयोग लिबरल वामपंथी गैंग ने भी दिया था। हालाँकि, यह मामला निजी दुश्मनी का था और उत्तर प्रदेश पुलिस ने इस मामले में FIR भी दर्ज की थी।

जिस सरकारी लॉ कॉलेज की लाइब्रेरी में थीं हिंदू विरोधी किताबें, उसके प्रिंसिपल इनामुर्रहमान पर दर्ज FIR सुप्रीम कोर्ट ने रद्द की: जानिए क्या-क्या थे आरोप

सु्प्रीम कोर्ट ने मंगलवार (14 मई 2024) को इंदौर के न्यू गवर्नमेंट लॉ कॉलेज के प्रिंसिपल प्रोफेसर इनामुर्रहमान के खिलाफ दर्ज FIR को रद्द कर दिया। यह FIR कॉलेज की लाइब्रेरी में मिलीं कथित हिंदूफोबिक, भारत विरोधी और लव जिहाद को बढ़ावा देने वाली किताबों से संबंधित था। बता दें कि इनामुर्रहमान इस महीने के आखिर में रिटायर होने वाले हैं।

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने कहा कि FIR में लगाए गए आरोप बेतुके हैं, क्योंकि जिन किताबों की बात हो रही है वे सुप्रीम कोर्ट की लाइब्रेरी में भी मिल सकती हैं। अदालत ने इस बात पर अफसोस जताया कि सरकार आरोपित प्रोफेसर इनामुर्रहमान को प्रताड़ित करने के लिए इतना उत्सुक क्यों है।

सुनवाई के दौरान अपीलकर्ता के वकील ने बताया कि प्रोफेसर जल्द ही सेवानिवृत्त होने वाले थे। वहीं, मध्य प्रदेश सरकार के वकील ने अंतरिम राहत का विरोध किया और कहा कि उच्च न्यायालय के समक्ष सीआरपीसी की धारा 482 की कार्यवाई में तेजी लाई जा सकती है, क्योंकि आरोप गंभीर हैं।

हालाँकि, शीर्ष न्यायालय ने आदेश में कहा, “एकल न्यायाधीश (हाई कोर्ट के) 482 के तहत अपने अधिकार क्षेत्र का प्रयोग करने में विफल रहे हैं। छुट्टी दे दी गई है। एफआईआर एक बेतुकेपन के अलावा और कुछ नहीं है। इसलिए हम अपील की अनुमति देते हैं और एफआईआर को रद्द कर देते हैं।” बता दें कि दिसंबर 2022 में सुप्रीम कोर्ट ने प्रोफेसर की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी थी।

दरअसल, शीर्ष अदालत मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के उस आदेश को चुनौती देने वाली इनामुर्रहमान की अपील पर सुनवाई कर रही थी, जिसने एफआईआर पर अंतरिम रोक लगाने से इनकार कर दिया था। इसके साथ ही हाई कोर्ट ने मामले को रद्द करने के लिए प्रोफेसर द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई दस सप्ताह के लिए स्थगित कर दी थी।

दरअसल, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) से जुड़े कॉलेज के छात्रों की शिकायत पर रहमान के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की विभिन्न धाराओं के तहत समुदायों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देने और अन्य अपराधों के लिए FIR दर्ज की गई थी। आरोपों के कारण फैकल्टी का निलंबन, प्रोफेसर इनामुर्रहमान का इस्तीफा और पुलिस केस दर्ज किया गया।

क्या है मामला?

महाविद्यालय के ABVP अध्यक्ष दीपेंद्र सिंह ठाकुर ने 1 दिसंबर 2022 को महाविद्यालय के प्राचार्य इनामुर्रहमान को अमीक खोखर, मिर्जा मोजीज बेग, फिरोज अहमद मीर, सुहैल अहमद वानी, मिलिंद कुमार गौतम और पूर्णिमा बिसे के खिलाफ शिकायत सौंपी थी। इसमें प्रोफेसर्स पर मजहबी कट्टरता फैलाने, लव जिहाद को बढ़ावा देने और देश एवं सेना विरोधी दुष्प्रचार को बढ़ावा के आरोप लगाए गए थे।

एबीवीपी का आरोप था कि छात्रों के अलग-अलग मैसेजिंग ग्रुप बनाए गए हैं, जिनका इस्तेमाल नफरत फैलाने वाले संदेशों को आगे बढ़ाने के लिए किया जाता है। उनका यह भी आरोप था कि शिक्षक कॉलेज के नए छात्र-छात्राओं के बीच मजहबी कट्टरता को बढ़ावा देते हैं। उनके मन में भारत की सरकार तथा सेना को लेकर नकारात्मक विचार डालते हैं।

शिकायत में यह आरोप भी लगाया गया था कि हर शुक्रवार को कॉलेज के प्राचार्य, मुस्लिम शिक्षक और मुस्लिम छात्र-छात्राएँ मस्जिद में नमाज पढ़ने जाते हैं। इस वक्त कक्षाएँ नहीं लगती हैं। परिसर में मांस खाने का आरोप भी लगाया गया था। शिकायत के अनुसार, कुछ शिक्षक इंटरनल मार्क्स का हवाला देकर छात्राओं को बाहर चलने और अकेले में कैफे में मिलने के लिए दबाव डालते थे। 

प्रोफेसर ने हिंदू लड़कियों पर रखते हैं गंदी नजर

कॉलेज की एक छात्रा ने बताया था, “हमारे एक प्रोफेसर हैं अमीक सर, वो लड़कियों को अपने साथ मूवीज, पब, डिस्को और कैफे ले जाते हैं। सर उन्हें लेट नाइट मैसेज करते हैं, लव ईमोजी भेजते हैं। उनका बिहेवियर लड़कियों को आकर्षित करने वाला रहता है। यहाँ पर सबसे ज्यादा लव जिहाद को बढ़ावा मिल रहा है। हमारी क्लास में भी ऐसे बच्चे हैं जो इसे बढ़ावा दे रहे हैं।”

छात्रा ने बताया था कि कॉलेज के ही एक मिर्जा सर हैं, जो सरकार की नई शिक्षा नीति का विरोध कर रहे हैं। छात्रा का कहना है कि वे छात्रों को इसके विरोध के लिए उकसाते हैं और उनसे कागज पर इसके विरोध में हस्ताक्षर ले रहे हैं।

एक अन्य छात्रा ने कहा था, “कॉलेज की कई स्टूडेंट ऐसी हैं, जो सर के साथ कैफे, पब और मूवी देखने बाहर जाती हैं। सोशल मीडिया पर स्टोरी भी अपलोड की गई हैं। टीचर पढ़ाने की जगह लड़कियों को क्लब और पब लेकर जाते हैं। इंटरनल मार्क्स का हवाला देकर छात्राओं पर दबाव डाला जाता है।”

हिंदू लड़कियों को किया जाता है टारगेट

दैनिक भास्कर को नाम नहीं छापने की शर्त पर कॉलेज की छात्राओं से बातचीत की थी। छात्राओं ने बताया कि क्लास में मुस्लिम लड़के हिंदू लड़कियों को टारगेट करते हैं। फर्स्ट और सेकंड सेमेस्टर में हिंदू लड़कियों को लव जिहाद में फँसाने का काम होता है और इसमें मुस्लिम लड़कियाँ मददगार बनती हैं।

लड़कियों ने बताया था कि मुस्लिम लड़कियाँ नई आईं इन हिंदू लड़कियों को मुस्लिम लड़कों से परिचय करवाती हैं। बाद में दोनों के बीच फोन नंबर आदान-प्रदान होता है और बातचीत होने लगती है। बाहर से पढ़ने के लिए इंदौर आई हिंदू लड़कियाँ इनका सॉफ्ट टारगेट होती हैं।

हॉस्टल में रहने वाली एक लड़की ने बताया था कि उसे एक लड़के ने परेशान करके रखा है। लड़के का कहना था कि उससे या सर से कमिटेड होना पड़ेगा। अपना धर्म बदल लो और निकाह कर लो। कॉलेज की छात्राओं ने बताया कि जिन लड़कियों से मुस्लिम लड़कों की दोस्ती हो जाती है, वे उन्हें बाहर घुमाने ले जाते हैं।

लड़कियों का कहना था कि अगर कोई छात्रा इसकी शिकायत कॉलेज प्रशासन से करती है तो उसे परेशान किया जाता है। यहाँ तक कि कॉलेज के इंटरनल परीक्षा में कम नंबर दिए जाते हैं। इससे डर कर लड़कियाँ चुप रहती हैं। वहीं, हिंदू टीचर भी नौकरी के चक्कर में आवाज नहीं उठाते हैं।

कॉलेज छात्र संघ के अध्यक्ष अभाविप के दीपेन्द्र सिंह ठाकुर ने कहा था कि इतिहास में जब मुगलों के बारे में पढ़ाने की बात आती है तो वे उनका महिमामंडन करते हैं। बढ़ा-चढ़ाकर पेश करते हैं। वहीं, हिन्दू राजाओं के बारे में बात करते समय उनकी उपलब्धियों की चर्चा भी नहीं करते हैं।

वहीं, ABVP के प्रांत मंत्री घनश्याम सिंह चौहान का कहना था कि परिसर में धार्मिक कट्टरता फैलाने को लेकर प्राचार्य को पहले मौखिक शिकायत दी गई थी, लेकिन उन्होंने कोई एक्शन नहीं लिया। छात्राओं पर पब और कैफे जाने के लिए शिक्षकों द्वारा दबाव बनाया जाता है। खुद छात्राओं ने प्राचार्य को इसकी जानकारी दी थी।

लाइब्रेरी में हिंदू विरोधी किताबें

कॉलेज के छात्रों का यह भी आरोप था कि लाइब्रेरी में ऐसी किताबें रखी गई हैं, जिनमें हिंदुओं के खिलाफ आपत्तिजनक बातें लिखी हुई हैं। किताब में लिखा है- हिंदू मुख्य आतंकवादी हैं। इसके साथ ही जम्मू-कश्मीर में धारा-370 को सही बताते हुए विश्व हिंदू परिषद और RSS को लेकर विवादास्पद बातें लिखी गई हैं।

छात्रों का कहना था कि डॉक्टर फरहत खान के नाम से लिखी गई इन किताबों को लाइब्रेरी में किसके कहने पर रखा गया, इसकी जाँच होनी चाहिए। इसके साथ ही छात्रों ने लेखिका, प्राचार्य, प्रोफेसर डॉ. मिर्जा मोईज, प्रो. सुहैल अहमद वानी और प्रो. अमीक खोखर के खिलाफ भँवरकुआ थाने में शिकायत दी थी और सबूत के तौर पर किताबों को भी पेश किया था।

इतना ही नहीं, इस लॉ कॉलेज में हिंदू लड़कियों को भी टारगेट कर लव जिहाद में फँसाने की बात कही गई थी। छात्रों ने कॉलेज परिसर में अनुशासनहीनता और धार्मिक कट्टरता फैलाने को लेकर प्रिंसिपल डॉ. इनामुर्रहमान से शिकायत की थी। मामला बढ़ने के बाद कॉलेज के 6 प्रोफेसरों को 5 दिन के लिए छुट्टी पर भेज दिया गया था और मामले की जाँच के लिए एक समिति गठित की गई थी।

क्या लिखा है किताब में

फरहत खान द्वारा लिखित ‘सामूहिक हिंसा एवं दाण्डिक न्याय पद्धति’ में कई सारी कट्टरता वाली बातें लिखी गई हैं। उसमें लिखा गया है, “पाकिस्तान, बांग्लादेश, अफगानिस्तान, बर्मा में सांप्रदायिकता का संघर्ष नहीं है। शासन तो वहाँ भी सैकड़ों वर्ष अंग्रेजों का रहा था और अमेरिका का हस्तक्षेप आज भी इनकी सत्ता पर रहता है। आज सारे हिंदू संगठन एक स्वर से मुसलमानों के कश्मीर में धारा 370 लगाकर विशेष सुविधाएँ देने का विरोध यह कहकर करते हैं कि कश्मीर में उग्रवाद धारा 370 के कारण ही पनप रहा है।”

किताब में आगे लिखा है, “यदि इनसे पूछा जाए कि पंजाब में उग्रवाद क्यों है, बिहार, उत्तर प्रदेश, असम में जहाँ हिंदू उग्रवाद है, वहाँ भी धारा 370 नहीं लगी है। हिंदू कहते हैं कि समान नागरिक संहिता की बात कहकर हम मुसलमानों के कानून में सुधार करना चाहते हैं, जो नारी के विरुद्ध है। यदि उनसे पूछा जाए कि आप अपने व्यक्तिगत कानून को और भी शास्त्रों के कानून को क्यों लागू करना चाहते हैं, जो शूद्र स्त्री और गैर हिंदुओं के विरुद्ध है। पहले हिंदुओं को अपने सिविल कोड में सुधार की बात करनी चाहिए।”

किताब में और आगे लिखा है, “उपरोक्त संक्षिप्त विवरण में हमने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और उसकी परिवार की संस्थाओं के क्रियाकलाप पर प्रकाश डाला। हिंदुओं के जितने भी सामाजिक, राजनीतिक और धार्मिक संगठन बने हैं। उनका एक मात्र उद्देश्य देश के मुसलमानों का विनाश करना है और शूद्रों को दास बनाना है। हिंदू पद पादशाही कायम करना है और हिंदू राजतंत्र का शासन वापस लाकर ब्राह्मण को पृथ्वी का देवता बनाकर पूज्य बनाना है।”

फरहत ने अपनी किताब में विश्व हिंदू परिषद को टारगेट करते हुए लिखा है, “विश्व हिंदू परिषद जैसे संगठन हिंदू बहुमत का राज्य स्थापित करना चाहते हैं। दूसरे समुदायों को शक्तिहीन बनाकर गुलाम बनाना चाहते हैं। पंजाब में सिखों के खिलाफ शिवसेना जैसे त्रिशूलधारी नए संगठनों ने मोर्चा बना लिया है। अपनी सांप्रदायिक गतिविधियों को मंदिरों और अन्य धार्मिक स्थलों से संचालित करने लगे हैं। शिवसेना हिंदू राष्ट्र का नारा दे रही है, जो पूरे सिख समाज के विरुद्ध हैं।”

झूठे प्रोपेगेेंडा को बढ़ाते हुए इसमें आगे कहा गया है, “अब शिवसेना के नौजवान सिखों के घरों में डकैती और अनजानी घटनाएँ कर रहे हैं। यहाँ तक कि निर्दोष सिखों की हत्याएँ भी कर रहे हैं। हिंदू शिव सेना के लोगों ने बैंक में डकैतियाँ भी डाली हैं। पंजाब में जो कुछ हो रहा है, पंजाबी और उर्दू अखबार ही सही लिखते हैं और हिंदी अखबार झूठ। पंजाब का सच आज यह है कि मुख्य आंतकवादी हिंदू हैं और सिख प्रतिक्रिया में आतंकवादी बन रहा है।”

छात्रों का कहना है कि इन किताबों को पढ़ने के लिए उन पर दबाव बनाया जाता है। अगर परीक्षा में उन किताबों का रेफरेंस देकर उत्तर नहीं लिखा जाता है तो नंबर काट लिए जाते हैं और उन्हें पास नहीं होने दिया जाता है। छात्रों का आरोप है कि कॉलेज के तार कई राष्ट्र विरोधी संगठनों से जोड़कर षड्यंत्रकारी छात्रों का ब्रेनवॉश किया जा रहा है। संगठनों में आगे की ट्रेनिंग लेने के लिए भी यहाँ के छात्रों को उकसाया जा रहा है।

गिरफ्तारी का लिखित आधार नहीं, छोड़ दीजिए: सुप्रीम कोर्ट से ‘टेक्निकल ग्राउंड’ पर NewsClick वाले प्रबीर पुरकायस्थ को राहत, चीन से पैसा लेकर करता था भारत विरोधी दुष्प्रचार

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार (15 मई 2024) को वामपंथी प्रोपेगेंडा वेबसाइट न्यूज़क्लिक के संस्थापक एवं प्रधान संपादक प्रबीर पुरकायस्थ को बड़ी राहत है। हालाँकि, यह राहत तात्कालिक ही है। शीर्ष अदालत ने दिल्ली पुलिस द्वारा गिरफ्तारी और गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम 1967 (UAPA) के तहत एक मामले में उनकी रिमांड को अवैध घोषित कर दिया।

सुप्रीम कोर्ट का मानना है कि न्यूज़क्लिक के संस्थापक प्रबीर पुरकायस्थ की गिरफ़्तारी और उसके बाद रिमांड अवैध थी। सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि रिमांड से पहले उन्हें या उनके वकील को गिरफ्तारी के आधार नहीं बताए गए थे। इतना ही नहीं, पुरकायस्थ के वकील को रिमांड आवेदन की कॉपी भी नहीं दी गई थी।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि 4 अक्टूबर 2023 को रिमांड आदेश पारित करने से पहले प्रबीर पुरकायस्थ या उनके वकील को रिमांड आवेदन की कॉपी भी नहीं की गई थी। इसका मतलब यह था कि गिरफ्तारी का आधार उन्हें लिखित रूप में नहीं दिया गया था। दिल्ली पुलिस की जिम्मेदारी थी कि गिरफ्तारी के आधार को लिखित रूप में दे।

न्यायालय ने कहा कि 4 अक्टूबर, 2023 को रिमांड आदेश पारित करना से पहले इसकी कॉपी अपीलकर्ता को नहीं दी गई। नतीजतन, अपीलकर्ता इस अदालत द्वारा पंकज बंसल के मामले में दिए गए फैसले को लागू करके हिरासत से रिहाई के निर्देश का हकदार है। इसके बाद कोर्ट ने पुरकायस्थ को रिहाई का आदेश दे दिया।

हालाँकि, अदालत ने आदेश दिया कि रिहाई ट्रायल कोर्ट की संतुष्टि के अनुसार जमानत और बांड प्रस्तुत करने के अधीन होगी, क्योंकि आरोप पत्र दायर किया गया है। सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति बीआर गवई और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की खंडपीठ ने 30 अप्रैल 2024 को बहस पूरी करने के बाद फैसला सुनाया।

बता दें कि प्रबीर पुरकायस्थ चीन से धन लेकर राष्ट्र विरोधी दुष्प्रचार करने के आरोप में गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत 3 अक्टूबर 2023 से हिरासत में थे। कोर्ट में पुरकायस्थ की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल पेश हुए। वहीं, दिल्ली पुलिस की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू पेश हुए।

प्रबीर पुरकायस्थ ने अपनी गिरफ्तारी की वैधता को चुनौती देते हुए अदालत का दरवाजा खटखटाया था। उन्होंने दलील दी कि पंकज बंसल मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुसार गिरफ्तारी के आधार उन्हें लिखित रूप में नहीं दिए गए थे। दिल्ली पुलिस ने तर्क दिया कि गिरफ्तारी का आधार रिमांड आवेदन में शामिल थे।