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चारधाम यात्रा के दौरान मंदिर परिसर के 200 मीटर के दायरे में मोबाइल फोन के इस्तेमाल पर पाबंदी, बिना रजिस्ट्रेशन के श्रद्धालु नहीं कर पाएँगे दर्शन

देवभूमि उत्तराखंड में चार धाम यात्रा पर लाखों श्रद्धालु पहुँच रहे हैं। हर दिन श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या की वजह से प्रशासन ने भी व्यवस्था बनाए रखने में पूरी ताकत झोंक दी है। इस बीच, उत्तराखंड सरकार ने चार धाम के 200 मीटर के दायरे में मोबाइल फोन का इस्तेमाल प्रतिबंधित कर दिया है, क्योंकि इससे यात्रियों के लिए बनाई गई व्यवस्था में दिक्कत हो रही थी। उत्तराखंड सरकार की मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने इस बारे में बयान भी जारी किया है। इसके साथ ही उन्होंने सभी श्रद्धालुओं से रजिस्ट्रेशन कराने के बाद ही चार धाम यात्रा पर आने की सलाह दी है, ऐसा न करने पर उन श्रद्धालुओं को रास्ते से ही लौटा दिया जाएगा।

उत्तराखंड सरकार के आदेश के मुताबिक, अब केदारनाथ, बद्रीनाथ, यमुनोत्री और गंगोत्री धाम के 200 मीटर के दायरे में मोबाइल फोन के उपयोग पर प्रतिबंध लग गया है। मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने इस संबंध में दिशा -निर्देश जारी करते हुए कहा कि नियमों का पालन नहीं करने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

उत्तराखंड की मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने कहा कि भारी संख्या में श्रद्धालु चारधाम यात्रा के लिए आ रहे हैं। इस दौरान कई लोग ऐसे भी पहुँच रहे जो आस्था नहीं बल्कि केवल घूमने के लिए आ रहे हैं और उनकी कुछ हरकतों की वजह से लोगों की आस्था को ठेस पहुँच रही है। कहा कि इस बात का विशेष ध्यान देने की जरूरत है कि यहाँ आस्था को कोई ठेस न पहुँचाए। धार्मिक भावनाएँ आहत नहीं होनी चाहिए। इसीलिए मोबाइल फोन पर बैन लगाने जैसा कदम उठाया गया है।

फेक न्यूज फैलाने पर होगी कार्रवाई

सचिवालय में बुधवार (15 मई 2024) को हुई बैठक में मुख्य सचिव ने चारधाम यात्रा पर ष्प्रचार करने वाले तथा यात्रा के सम्बन्ध में फेक न्यूज या वीडियो बनाने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई के निर्देश दिए। उन्होंने मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि यात्रा के प्रत्येक पड़ाव पर यात्रियों के लिए भोजन, पानी, शौचालय आदि की अच्छी व्यवस्था की गई है। कहीं भी कोई भगदड़ अब तक नहीं मची है। अगर कोई ऐसी अफवाह फैलाता है तो इसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

बिना रजिस्ट्रेशन नहीं कर पाएँगे दर्शन

इस दौरान मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने कहा कि तीर्थयात्रियों के लिए सारी व्यवस्था की गई है। हम सभी प्रदेशों के मुख्य सचिव को पत्र भेज रहे हैं कि कोई श्रद्धालु अपंजीकृत वाहन में या अपंजीकृत तरीके से न आएँ। बहुत सख्त जाँच की जा रही है। उन्होंने कहा कि अगर बिना रजिस्ट्रेशन के कोई गाड़ी दिखती है या यात्री बिना रजिस्ट्रेशन के उत्तराखंड में पहुँचते हैं, तो जाँच में पकड़े जाते ही उन्हें तुरंत लौटा दिया जाएगा। रजिस्ट्रेशन की व्यवस्था ही इसीलिए की गई है, ताकि श्रद्धालुओं की संख्या के हिसाब से सरकार व्यवस्था बनाए।

यह एक सामान्य तस्वीर नहीं, AAP की उस सोच का नग्न प्रदर्शन है जो देश की हर बेटी के लिए है खतरा

दिल्ली मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के घर पर स्वाति मालीवाल के साथ हुई बदसलूकी का मामला अभी मीडिया में ठंडा भी नहीं हुआ कि सीएम केजरीवाल अपने उस सेक्रेट्री बिभव कुमार के साथ पब्लिक में नजर आ गए जिस पर स्वाति को पीटने का इल्जाम लगा है। अचंभित करने वाली बात तो ये है कि केजरीवाल और बिभव के बीच में AAP नेता संजय सिंह भी दिखाई दे रहे हैं जिन्होंने पार्टी फोरम से आकर ऐलान किया था कि उनकी पार्टी स्वाति मालीवाल के साथ है और आरोपित के खिलाफ कार्रवाई होगी।

अचानक खींची गई तस्वीर में बिभव को संजय सिंह के ठीक पीछे देखा जा सकता है। वहीं केजरीवाल को गुलदस्ता लेकर मुस्कुराते हुए। तस्वीर देखकर लगता है कि मानो पार्टी में सब कुछ ठीक है और बिभव के साथ केजरीवाल का दिखना सामान्य बात है। लेकिन हकीकत ऐसी नहीं है। न पार्टी में कुछ ठीक है और न ही इस तस्वीर में। यह तस्वीर AAP की उस सोच का नग्न प्रदर्शन है जो देश की हर बेटी के लिए है खतरा, जिससे तमाम सवाल खड़े होते हैं।

केजरीवाल की जो फोटो आप देख रहे वो तस्वीर मात्र नहीं है। ये फोटो उस महिला सांसद के जख्मों पर नमक रगड़ने जैसा है जिसके साथ सीएम आवास में मारपीट हुई है और वो उसके बाद से मीडिया में आ भी नहीं पा रहीं। खुद स्वाति मालीवाल की माता ने कल कहा कि उनकी बेटी अभी बात करने की स्थिति में नहीं है।

सोचिए उनके साथ ऐसा क्या हुआ होगा उस दिन, जो हजारों लोगों के लिए आवाज उठाने वाली महिला से खुद के लिए नहीं बोला जा रहा। वो चारदीवारी में हैं और मीडिया के सामने आने से परहेज कर रही हैं। उनकी इस चुप्पी ने जहाँ तमाम सवाल खड़े किए हुए हैं। वहीं सीएम की यह फोटो देख लोग कह रहे हैं कि ये कितनी बड़ी बेशर्मी की बात हैं कि जिस पीए पर इतना गंभीर इल्जाम हैं उसे लेकर केजरीवाल साथ घूम रहे हैं। उसके साथ फोटो में आ रहे हैं और सवाल पूछे जाने पर भी इस मुद्दे पर कुछ नहीं बोल रहे। उलटा जो इस मामले को छोटा और मामूली दिखा रहा है उसे शांत रहकर समर्थन कर रहे हैं।

जी हाँ, लखनऊ में अखिलेश यादव के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस के वक्त जब उनसे इस बारे में पूछा गया तो वो एकदम चुप हो गए, वहीं अखिलेश यादव ने जब इसे छोटा मुद्दा बताकर दिखाने का प्रयास किया, तब भी वो कुछ नहीं बोले। उनके इस रवैये से सोशल मीडिया पर यूजर्स काफी नाराज हैं। भाजपा के नेता उनसे सवाल कर रहे हैं कि एक महिला के साथ बदसलूकी मामले पर ये कौन सा रवैया है जो अरविंद केजरीवाल सार्वजनिक तौर पर दिखाने का प्रयास कर रहे हैं। इससे तो यही साफ होता है कि हमला उनके इशारे पर हुआ है।

सबका एक ही कहना है कि अगर केजरीवाल मानते हैं कि कुछ गलत नहीं हुआ तो इस पर अरविंद केजरीवाल को अपना पक्ष रखना चाहिए, इस पर सफाई देनी चाहिए और अगर ऐसा नहीं है कि तो उन्हें बताना चाहिए कि क्या मजबूरी है जो वो बिभव पर कार्रवाई करने से डर रहे हैं। 72 घंटे मामले को बीत चुके हैं लेकिन एफआईआर तक नहीं हुई जबकि संजय सिंह ने खुद कहा था कि पार्टी कार्रवाई करेगी।

घटना के बाद बिभव पर एक्शन लेना तो दूर केजरीवाल और संजय सिंह उसे लेकर साथ में घूम रहे हैं। उनकी ऐसी तस्वीर देख सोशल मीडिया पर लोग ये अंदाजा लगा रहे हैं कि कहीं बिभव पर कोई ऐसे राज तो नहीं जिसका केजरीवाल को डर है अगर बाहर आ गया तो वो नए विवाद में फँस जाएँगे या फिर ऐसा तो नहीं इस मारपीट मामले में खुद केजरीवाल भी शामिल हों, जिसके कारण महिला सांसद चुप हों और मारपीट करने वाला बिभव आजाद।

कारण जो भी, लेकिन जब तक स्वाति मालीवाल मीडिया में आकर इस मुद्दे पर कुछ नहीं बोलतीं, सच्चाई नहीं पता चल पाएगी और अरविंद केजरीवाल की ऐसी तस्वीरों पर लगातार सवाल उठेगा। उनसे पूछा जाएगा कि जब वो अपनी पार्टी की महिला सांसद को न्याय नहीं दिलवा पा रहे तो फिर राजधानी की लाखों लड़कियाँ उनपर कैसे भरोसा करें। आज आम आदमी पार्टी का ये रवैया और केजरीवाल का इस मुद्दे पर मौन हर लड़की के लिए एक खतरे की घंटी है। उन्हें सोचना तो पड़ेगा कि उन्होंने किस पर विश्वास किया है और समय आने पर इसके बदले उन्हें क्या मिलेगा।

रेप पर पिता ने कहा- लड़के हैं गलती हो जाती है, स्वाति मालीवाल से बदसलूकी बेटे के लिए ‘छोटी बात’: मुलायम से अखिलेश यादव तक महिलाओं पर नहीं बदली सपा की सोच

लोकसभा चुनाव 2024 के सात में से चार चरण के मतदान हो चुके हैं। इस बीच जेल से अंतरिम जमानत पर बाहर आए दिल्ली के मुख्यमंत्री एवं आम आदमी पार्टी (AAP) के प्रमुख अरविंद केजरीवाल ने समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव के साथ मीडिया को संबोधित किया। इस दौरान पत्रकारों ने स्वाति मालीवाल के साथ मारपीट को लेकर सवाल पूछे।

लखनऊ में आयोजित इस प्रेस वार्ता में स्वाति मालीवाल से जुड़े पत्रकारों के सवाल पर मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल चुप रहे। उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया, लेकिन अखिलेश यादव बीच में कूद पड़े और बेतुका जवाब दे दिया। अखिलेश ने कहा, “अरे उससे ज्यादा जरूरी और चीजें भी हैं। भाजपाई किसी के सगे नहीं हैं। भाजपाई झूठे मुकदमे लगाने वाला गैंग है।”

बता दें कि AAP की राज्यसभा सांसद और दिल्ली महिला आयोग की पूर्व अध्यक्ष स्वाति मालीवाल ने 13 मई 2024 मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल के घर पर पुलिस बुलाई थी। स्वाति मालीवाल ने केजरीवाल के निजी सचिव विभव कुमार पर मारपीट का आरोप लगाया था। उन्होंने कहा है कि मुख्यमंत्री केजरीवाल के कहने पर विभव कुमार ने सीएम आवास के भीतर उनके साथ मारपीट की।

हालाँकि, AAP सांसद संजय सिंह ने माना था कि स्वाति मालीवाल के साथ बदसलुकी करने वाले के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी, लेकिन कार्रवाई की बात तो दूर जब मुख्यमंत्री केजरीवाल लखनऊ पहुँचे, उस दौरान भी बिभव कुमार उनके साथ थे। इसकी तस्वीरें भी सोशल मीडिया में आई हैं। इसको लेकर AAP और अरविंद केजरीवाल पर सवाल उठ रहे हैं।

अब प्रेस कॉन्फ्रेंस में अखिलेश यादव ने अरविंद केजरीवाल का खुलकर बचाव किया। अखिलेश यादव के लिए एक महिला के साथ सीएम आवास में मारपीट साधारण बात लग रही है। उसमें भी वह महिला राज्यसभा सांसद और पूर्व दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष है। अखिलेश यादव के लिए यह साधारण मुद्दा है। इससे समाजवादी पार्टी की महिला विरोधी सोच भी सामने आ गई है।

अखिलेश यादव के दिवंगत पिता और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने एक ऐसा ही विवादित बयान दिया था। साल 2014 में उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद की एक रैली में मुलायम सिंह ने कहा था कि रेप के लिए फाँसी देना गलत है। उन्होंने बलात्कारियों का बचाव करने के लिए यहाँ तक कह दिया था कि लड़कों से गलतियाँ हो जाती हैं।

मुलायम सिंह यादव ने उसी रैली में कहा था, “लड़कियाँ पहले दोस्ती करती हैं। लड़के-लड़की में मतभेद हो जाता है। मतभेद होने के बाद लड़कियाँ उसे रेप का नाम दे देती हैं। लड़कों से ग‌लतियाँ हो जाती हैं। क्या रेप केस में फाँसी दी जाएगी?” इसी तरह प्रदेश में रेप की एक घटना पर समाजवादी पार्टी के एक नेता तो ये भी कह दिया था कि इतने बड़े प्रदेश में रेप और हत्या की घटनाएँ तो होंगी ही।

साल 2010 में महिला आरक्षण विधेयक के विरोध में टिप्पणी करते हुए मुलायम सिंह यादव ने कहा था, “वर्तमान स्वरूप में महिला आरक्षण विधेयक पास हुआ तो संसद में उद्योगपतियों और अधिकारियों की ऐसी-ऐसी लड़कियाँ आ जाएँगी जिन्हें देखकर लड़के पीछे से सीटी बजाएँगे।”

सपा नेता अबु आजमी ने कहा था कि फैशन और कम कपड़े पहनने से ही बलात्कार जैसी घटनाएँ होती हैं। पेट्रोल और आग को एक साथ रखेंगे तो वह जलेगा ही। उन्होंने बगैर सिर ढके और स्कर्ट पहनकर निकलने वाली महिलाओं के खिलाफ कानून बनाने की भी माँग की थी। 2013 में उन्होंने कहा था कि औरतें सोने की तरह कीमती होती हैं, अगर उन्हें खुला छोड़ा तो उन्हें लूट लिया जाएगा।

आजम खान भी पीछे नहीं रहे। लोकसभा के भीतर रामपुर से सपा के तत्कालीन सांसद आजम खान ने सदन की अध्यक्षता कर रहीं रमा देवी से कह दिया था, “आप मुझे इतनी अच्छी लगती हैं कि मेरा मन करता है कि आपकी आँखों में आँखें डाले रहूॅं।” आजम खान ने लोकसभा चुनाव के दौरान इशारों-इशारों में प्रतिद्वंद्वी महिला उम्मीदवार की अंडरवियर का कलर तक बता दिया था।

इसी तरह अखिलेश यादव के चाचा राम गोपाल यादव ने तो बॉलीवुड की हीरोइनों को मुंबई के बार डांसर्स से भी ज्यादा अश्लील बता दिया था। इसी तरह सपा नेता शिवचरण प्रजापति ने कह दिया था कि बलात्कार के लिए महिलाएँ ज्यादा जिम्मेदार होती हैं। इस तरह सपा में महिलाओं के खिलाफ बयान देने वालों की लंबी फेहरिस्त है और अखिलेश यादव भी पार्टी की विचारधारा के तहत ही ये बयान दिया है।

AAP विधायक अमानतुल्लाह खान के घर पहुँची योगी की पुलिस, बाप-बेटे दोनों हैं ‘फरार’: पेट्रोल पम्प पर की थी मारपीट, सहयोगी इकरार हो चुका है गिरफ्तार

उत्तर प्रदेश पुलिस की एक टीम आम आदमी पार्टी (AAP) के विधायक अमानतुल्लाह खान की तलाश में उनके आवास पर पहुँची है। यूपी पुलिस को विधायक खान और उनके बेटे अनस खान की तलाश है। अनस खान ने हाल ही में एक पेट्रोल पम्प पर मारपीट की थी, इस मामले में यूपी पुलिस उसे तलाश रही है।

जानकारी के अनुसार, गुरुवार (16 मई, 2024) को उत्तर प्रदेश पुलिस की एक टीम अमानतुल्लाह खान के आवास पर पहुँची। यहाँ अमानतुल्लाह खान और उनका बेटा अनस खान को लेकर यूपी पुलिस ने तलाश की। दोनों ही घर पर नहीं मिले। विधायक पिता-पुत्र के खिलाफ गैर जमानती वारंट भी जारी किया जा चुका है।

अमानतुल्लाह खान और उनके बेटे अनस खान का फोन घटना के बाद बंद आ रहा है और वह गायब हैं। यूपी पुलिस ने उनके घर के बाहर नोटिस चस्पा कर दिया है। अमानतुल्लाह खान और उनके बेटे अनस खान के खिलाफ यह मामला पेट्रोल पम्प पर मारपीट के बाद दर्ज किया गया था।

यूपी पुलिस दोनो की तलाश में पहले भी उनके आवास पर दबिश दे चुकी है। 11 मई, 2024 को भी यूपी पुलिस इस मामले में नोटिस लेकर पहुँची थी। यहाँ तब भी अमानतुल्लाह खान और अनस नहीं मिले थे। पुलिस ने इस दिन भी नोटिस चस्पा किया था।

इस मामले में अमानतुल्लाह खान के एक करीबी इकरार अहमद को यूपी पुलिस ने सोमवार (13 मई, 2024) को गिरफ्तार किया था। बताया गया था कि इकरार अहमद अमानतुल्लाह खान का मैनेजर है और शाहीन बाग़ का रहने वाला है। जिस वक्त खान के बेटे अनस ने नोएडा के पेट्रोल पम्प पर मारपीट की, वह वहीं मौजूद था।

गौरतलब है कि 7 मई, 2024 को नोएडा के सेक्टर-95 स्थित विधायक का बेटा अनस पेट्रोल पंप पर अपनी कार लेकर पहुँचा था, जहाँ वहाँ उसने लाइन में आगे लगी गाड़ी को आगे बढ़ा कर अपनी गाड़ी में पहले तेल भरने की ज़िद की। सेल्समैन ने नियम का उल्लंघन करने से नकार दिया। इस दौरान अनस और कार में बैठे उसके साथियों ने मारपीट शुरू कर दी।

इसके बाद खुद विधायक अमानतुल्लाह खान वहाँ पहुँचे और उन्होंने पेट्रोल पंप के मैनेजर को धमकाया। दोनों ही घटनाओं का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। यूपी पुलिस ने इस मामले में FIR दर्ज करके अनस खान की तलाश चालू कर दी थी। इससे पहले अलीगढ़ में भी अनस खान मारपीट कर चुका है।

16 मई… 10 साल पहले इसी दिन देश ने नरेंद्र मोदी को चुना था अपना नायक, रखी थी मजबूत भारत की नींव; अब हैट्रिक के लिए 4 जून का इंतजार

लोकसभा चुनाव 2024 के 4 चरणों के लिए मतदान हो चुका है। 1 जून, 2024 को देश लोकसभा के अंतिम चरण के लिए मतदान करेगा और इसी के साथ 543 सीटों पर प्रत्याशियों की किस्मत EVM बक्से में बंद हो जाएगी। 1 जून के बाद देश को 4 जून की प्रतीक्षा होगी। यही वह तारीख होगी जो बताएगी कि देश की राजनीती का ऊँट किस करवट बैठा है। पीएम मोदी और भाजपा सरकार लोकप्रियता की बयार में एक बार फिर विपक्ष बहा है कुछ बदलाव के संकेत हैं।

2014: सिंहासन खाली करो कि जनता आती है

राजनीति में तारीखों का बड़ा महत्व होता है, और इन्हीं तारीखों में अगर 10 साल पीछे चलें तो आज ही के दिन यानि 16 मई, 2014 को 16वीं लोकसभा के चुनावी नतीजे आए थे। दस साल पहले 16 मई, 2014 को सुबह 11 बजे ही ये साफ हो गया था कि सत्ता का पांसा पलट गया है। सत्‍ता एक परिवार के हाथों से छिनने जा रही रही है। देश का प्रधानमंत्री किसी राजनीतिक परिवार की दयादृष्टि से नहीं बल्कि जनता की मर्जी से चुना हुआ एक साधारण पृष्ठभूमि का व्यक्ति बनने वाला है।

2014 की बड़ी जीत के बाद पीएम मोदी (चित्र साभार: NDTV)
2014 की बड़ी जीत के बाद पीएम मोदी (चित्र साभार: NDTV)

16 मई, 2014 को जब 16वें लोकसभा चुनाव के परिणाम जब दोपहर तक घोषित हुए तो भाजपा को ऐतिहासिक विजय का ताज जनता ने पहना दिया था। बीजेपी पहली बार अपने दम पर बहुमत का स्‍पष्‍ट आँकड़ा पार करते हुए 282 सीटों तक पहुँच चुकी थी। अटल युग में भी बीजेपी सत्‍ता के शीर्ष तक पहुँची थी लेकिन अपने दम पर 200 का आँकड़ा भी पर नहीं कर पाई थी।

2004 के बाद से 10 साल तक सत्‍ता से बाहर रहने वाली बीजेपी ने 2013 में घोटालों और भ्रष्टाचार से त्रस्त जनता के बीच गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री के दावेदार के रूप में पेश किया था। उनके करिश्माई व्यक्तित्व ने जनता में ‘मोदी लहर’ चला दी। मोदी ने खुद के लिए गुजरात के वडोदरा के साथ वाराणसी को चुनाव क्षेत्र के रूप में चुना और जनता ने ना सिर्फ उन्हें, बल्कि NDA को भारी बहुमत से जिताकर उनका प्रधानमंत्री बनना तय कर दिया।

काशी से गूँजे नाद ‘घर-घर मोदी, हर-हर मोदी’ ने देश में मोदी लहर कायम रखा, परिणाम स्वरुप नरेंद्र मोदी के नेतृत्‍व में भाजपा न केवल अपने दम पर बहुमत पाने में कामयाब रही बल्कि तीन दशकों में स्‍पष्‍ट जनादेश हासिल करने वाली पहली पार्टी बनी।

2014 के लोकसभा चुनाव की एक और ख़ास बात रही कि लगभग 50 साल तक शासन पर काबिज और एक दशक से लगातार सत्‍ता पर काबिज कॉन्ग्रेस 2014 में सिमटकर महज 44 सीटों की पार्टी बन गई। यहाँ तक कि कॉन्ग्रेस की इतनी भी हैसियत नहीं रही कि उसे नेता-प्रतिपक्ष का पद हासिल हो सके। ऐसी शर्मनाक हार के बारे में शायद ही कभी कॉन्ग्रेस ने सोचा होगा।

2019: जनता ने बोला- शो मस्ट गो ऑन

भाजपा ने भी जनता से मिले इस बहुमत का बखूबी इस्तेमाल किया और अगले पाँच सालों में मूलभूत परिवर्तन देश की स्थिति में लाई। पहली बार देश ने देखा कि करोड़ों बैंक खाते कुछ महीने में ही खोले जा सकते हैं, करोड़ों घर कुछ साल में ही बन सकते हैं और करोड़ों घरों तक बिना किसी देरी के गैस सिलेंडर पहुँच सकता है।

282 के इस आँकड़े ने भाजपा को वह ताकत दी कि वह दशकों से लटके GST जैसे बिल को पास करवा पाई। जनता ने पहली बार देखा कि इस देश में करोड़ों लाभार्थियों तक बिना किसी भ्रष्टाचार के दिल्ली से पैसा पहुँच सकता है। भाजपा ने इस इस दौरान उस दौरान उस ढाँचे की नीँव रखी जिसमें आगे अनुच्छेद 370, राम मंदिर और CAA जैसे मुद्दों को लेकर इमारत तैयार होनी थी। भाजपा ने इन पाँच साल का इस्तेमाल देश को मजबूत करने में किया ही, साथ ही वह इस दौरान ऐसी चुनाव जिताऊ मशीन बन गई, जिसके आगे विपक्ष धराशायी हो गया।

2019 की जीत में अमित शाह की संगठन कौशल और पीएम मोदी की लोकप्रियता काम आई थी (चित्र साभार: Economic Times)

2019 के लोकसभा चुनावों के परिणाम इन सभी बातों पर मुहर लगाते हैं कि भाजपा का पहला कार्यकाल अभूतपूर्व बदलाव वाला रहा। इसकी पुष्टि 23 मई, 2024 को 17वीं लोकसभा परिणामों ने कर दी। पहली बार भारतीय लोकतंत्र में कॉन्ग्रेस के अलावा किसी पार्टी ने 300 का आँकड़ा पार किया। भाजपा को 303 सीट मिलीं। हर चुनाव को पीएम मोदी की लोकप्रियता का लिटमस टेस्ट बता देने वाले वामपंथी और लिबरल गैंग के मुँह पर भी इन परिणामों ने ताले जड़ दिए।

जहाँ भाजपा को 2019 में एक बार फिर बड़ा बहुमत मिला तो वहीं कॉन्ग्रेस समेत पूरे विपक्ष की हालत में कोई खास बदलाव नहीं हुआ। कॉन्ग्रेस ने पाँच सालों में मात्र 8 सीटों की बढ़त हासिल की। वह 2014 में जहाँ 44 पर रही थी, वहीं 2019 में 52 पर पहुँची। लेकिन 2014 से भी बड़ा झटका 2019 में कॉन्ग्रेस को लगा जब उसके बड़े नेता राहुल गाँधी को अमेठी में भाजपा नेता स्मृति ईरानी के हाथों हार झेलनी पड़ी।

4 जून, 2024: इशारे तीसरे कार्यकाल के

2014 और 2019 में बड़ी जीत हासिल करने के बाद 2024 में भाजपा ने लक्ष्य रखा कि वह इस बार 370 का आँकड़ा लोकसभा में पार करेगी। इस बार के लोकसभा चुनाव में भाजपा 10 साल शासन के पूरे कर रही है। लेकिन ध्यान देने वाली बात है कि जैसा माहौल 2013-14 में कॉन्ग्रेस के 10 वर्षों के शासन के बाद बना था, वह इस बार नहीं दिखता। ना ही कोई भ्रष्टाचार के मामले भाजपा सरकार के सामने टिके हैं, ना ही देश में जनलोकपाल बिल जैसा कोई आन्दोलन खड़ा हुआ है।

यहाँ तक कि जनता भी भाजपा से संतुष्ट है और राजनीतिक पंडितों की भाषा में जिसे ‘फटीग फैक्टर’ यानी जी ऊब जाना कहते हैं, वह भी इस सरकार के खिलाफ नहीं दिखता। 24, अकबर रोड में श्रद्धा रखने वाले कुछ इक्का-दुक्का पत्रकारों और राजनीतिक विश्लेषकों को छोड़ दिया जाए तो अधिकांश का अनुमान है कि भाजपा और नरेन्द्र मोदी एक बड़ी जीत के साथ फिर से दिल्ली में वापसी कर रहे हैं।

2024 लोकसभा चुनावों में अपने नामांकन के दौरान पीएम मोदी (चित्र साभार: Narendra Modi/X)

भाजपा अपनी जीत को लेकर कितनी आश्वस्त है, इसकी बानगी हाल ही में बंगाल में दिया गया अमित शाह का एक बयान है। अमित शाह ने बंगाल में आयोजित एक जनसभा में कहा,”देश में 380 सीटों पर चुनाव हो गया है, इन 380 सीटों में से पीएम मोदी 270 सीट पाकर बहुमत का आँकड़ा पार कर चुके हैं। आगे की लड़ाई 400 पार करने की है।”

कुल मिलाकर यह साफ़ दिखता है कि इस बार के लोकसभा चुनावों में भी भाजपा ने अपना प्रभाव कायम रखा है। विपक्ष के सभी वार खाली जा रहे हैं। फिर भी अंतिम परिणाम क्या होगा इसका पता 4 जून, 2024 को देश जानेगा।

पहला हक मुस्लिमों का, देश का 15% बजट मुस्लिमों के लिए, पीड़ित हिंदुओं को जेल… दावा ‘मोहब्बत की दुकान’ खोलने का, चला रही थी ‘मुल्लों के लिए दुकान’

कॉन्ग्रेस का मुस्लिम समुदाय के प्रति प्रेम जगजाहिर है। समय-समय पर ऐसे वाकये निकलकर आते रहे हैं जिनसे समझ आता है कि इस पार्टी का उद्देश्य इस देश में एक केवल एक समुदाय के लोगों का विकास करना था। हिंदू इनके लिए कुछ नहीं थे। आज भले ही कॉन्ग्रेस पार्टी लंबी-लंबी न्याय यात्रा करके ‘मोहब्बत की दुकान’ खोले रखने का दावा करती हो लेकिन इतिहास बताता है कि उन्होंने सत्ता में आकर सिर्फ मुस्लिमों पर अपना प्यार लुटाया है।

देश के बजट का 15% हिस्सा मुस्लिमों के नाम

इस दिशा में हाल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी कॉन्ग्रेस की एक पोल खोली है। पीएम मोदी ने बताया है कि मनमोहन सिंह की सरकार पूरे देश के बजट का 15 % मुस्लिमों को देना चाहती थी लेकिन ऐसा नहीं कर पाई क्योंकि विपक्ष में बैठी भाजपा ने उनका विरोध किया। पीएम ने ये बात इसलिए बताई ताकि लोग कॉन्ग्रेस की मंशा के खिलाफ सजग हो सकें।

किसी भी देश की सरकार का काम वहाँ के हर वर्ग के विकास का होता है न कि ऐसा कोई बजट बनाने का जिससे एक समुदाय फलता-फूलता रहे और अन्य वर्ग संसाधनों के लिए लललाते रहें…. कॉन्ग्रेस ने फिर भी ऐसा करने की सोची और हैरानी इस बात की है कि ऐसी हरकतें करने के बाद कॉन्ग्रेस आज मोदी सरकार पर हिंदू-मुस्लिम करने का आरोप लगाती है। सोचिए जिन लोगों के दिमाग में देश के बजट का एक पूरा हिस्सा एक समुदाय को देने की बात आए उनके भीतर उस समुदाय के प्रति कितना प्रेम होगा।

मुस्लिमों का संपत्ति पर पहला अधिकार

वैसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का खुलासा इतना भी हैरान करने वाला नहीं है। पिछले दिन ही पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की वीडियो वायरल हुई थी। उस वीडियो में मनमोहन सिंह कहते नजर आ रहे थे कि देश के संसाधनों पर पहला हक अल्पसंख्यकों का होना चाहिए। 2006 में दिए गए पूर्व पीएम के इस बयान की क्लिप वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर खूब हंगामा हुआ। कॉन्ग्रेसी और वामपंथी कहने लगे कि मनमोहन सिंह के बयान को तोड़-मरोड़ के पेश किया जा रहा है वो राष्ट्रीय विकास परिषद में अल्पसंख्यकों को केंद्र में रखकर जनता को संबोधित कर रहे थे। लेकिन हकीकत तो यह है कि पूर्व प्रधानमंत्री ने अपने बयान में ‘विशेष तौर पर मुस्लिम’ शब्द का इस्तेमाल किया था।

मनमोहन सिंह के शब्द थे– अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजातियों के लिए योजनाओं को नए सिरे से तैयार करने की जरूरत है। हमें ये सुनिश्चित करने के लिए नई योजनाएँ बनानी होंगी कि अल्पसंख्यकों, विशेष रूप से मुस्लिमों को विकास में समान भागीदारी मिले। संसाधनों पर पहला हक उन्हीं का होना चाहिए।

अब इस बयान में कहाँ दिख रहा है कि पूर्व पीएम ने मुस्लिम शब्द नहीं बोला… उलटा जैसा कॉन्ग्रेस दिखाने की कोशिश कर रही थी कि बयान अल्पसंख्यकों के हित के लिए था, इससे तो साफ पता चलता है कि कॉन्ग्रेस अल्पसंख्यकों की लिस्ट में मुस्लिमों को टॉप पर मानती है, जबकि ये बात किसी से छिपी नहीं है कि मुस्लिम देश की सबसे बड़ी दूसरी आबादी हैं। अगर उन्हें जनसंख्या आँकड़े देख कम समझा जा सकता है तो फिर जैन, पारसी, बौद्ध, सिख या दलित इस प्राथमिकता में क्यों नहीं हैं।

असल बात ये है कि कॉन्ग्रेस ने सत्ता में आने के लिए हमेशा से एक हथकंडा आजमाया था जिसमें हिंदुओं के प्रति घृणा फैलाना और मुस्लिम को रिझाने का काम होता था। सरकार जब-जब बनती तो ये काम और तेजी से होता। कभी किसी योजना के बहाने तो कभी किसी वक्तव्य में। आपने ऊपर जो दो उदाहरण समझें उससे तो आपको सिर्फ ये पता चल रहा होगा कि कॉन्ग्रेस का झुकाव मुस्लिमों के प्रति कितना था। लेकिन, कॉन्ग्रेस का एक कदम ऐसा भी है जिसे यदि आप जान लेंगे तो आपको पता चलेगा कि कॉन्ग्रेस का प्रेम जहाँ मुस्लिमों के लिए अथाह था तो वहीं उनका इरादा हिंदुओं को एकदम लिस्ट में एकदम नीचे करने का था। इतना नीचे कि कॉन्ग्रेस समझती थी कि देश में हो रहे सांप्रदायिक अपराधों में बिन जाँच के सिर्फ हिंदू दोषी माना जाना चाहिए कोई मुस्लिम नहीं। अपनी इस सोच को देश में लागू करने के लिए वह एक कानून लाने की भी फिराक में थे।

कॉन्ग्रेस लाती हिंदू विरोधी कानून

जी हाँ, ये अचंभित होने वाली बात नहीं है। अगर विपक्ष ने विरोध न किया होता तो शायद आज कॉन्ग्रेस पूरे देश में इस कानून को लागू कर चुकी होती। ये बात है 2011 की। उस समय पूर्व कॉन्ग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी राष्ट्रीय सलाहकार समिति की मुखिया होती थीं और सरकार की कमान पर्दे के पीछे से चलाती थीं। उसी दौरान यूपीए सरकार एक बिल लाई थी। इसका नाम- सांप्रदायिक एवं लक्षित हिंसा रोकथाम (न्याय एवं क्षतिपूर्ति) विधेयक था। इसका पहला मकसद था कि देश से हिंदूवादी संगठनों का प्रभाव खत्म हो सके और अल्पसंख्यक वोटर हमेशा उनके प्रति इमानदार रहें।

इस बिल को बनाने में एक से बढ़कर एक हिंदू विरोधी लोग शामिल थे। जैसे हर्ष मंदर, जॉन दयाल, तीस्ता सीतलवाड़, सैयद शहाबुद्दीन, नियाज फारूकी, शबनम हाशमी आदि-आदि। इन सब लोगों ने मिलकर हिंदूविरोधी बिल तैयार किया था। इसमें साफ दावा था कि एक समूह के लिए सुरक्षा की सुरक्षा के लिए इसे लाया जा रहा था। अब जिस तरह से कॉन्ग्रेस का मुस्लिम प्रेम है उसे देख पता चलता है कि बिल में किस समूह की बात की जा रही होगी।

अगर ये बिल देश में कानून का रूप ले लेता तो आप समझ सकते हैं कि देश में हो रहे दंगों में सिर्फ हिंदू ही जेल में जाते… अल्पसंख्यकों से घृणा के आरोप में हिंदुओं को तरह-तरह से प्रताड़ित करने का काम चलता रहता… सामान्य झगड़े में इस कानून का प्रयोग करके हिंदुओं को निशाना बनाया जाता…। कॉन्ग्रेस इस बिल के दुष्परिणाम अच्छे से जानती थी मगर फिर भी उन्होंने ऐसा कदम उठाने की हिम्मत की, वो भी किसके लिए सिर्फ मुस्लिमों के लिए? तब, अरुण जेटली से लेकर गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी तक ने इसके खिलाफ आवाज उठाई थी। नीतीश कुमार और ओडिशा से नवीन पटनायक इसके विरोध में आए थे। तब जाकर, कहीं कॉन्ग्रेस इसे लागू करने में असफल हुई।

कॉन्ग्रेस सत्ता में आती तो क्या होता हिंदुओं का हाल

आज देश में नरेंद्र मोदी सरकार है तो कॉन्ग्रेस कहती है कि वो हिंदू-मुस्लिम कर रहे हैं, जबकि ये बात सब जानते हैं कि मोदी सरकार सबका साथ-सबके विकास वाले दृष्टिकोण से देश को आगे बढ़ाने पर लगी है। अगर ऐसा नहीं होता तो देश में तीन तलाक नहीं खत्म होता, जो कि मुस्लिम महिलाओं के लिए कोढ़ जैसा था। मगर, कॉन्ग्रेस काल में ऐसा नहीं था। एक बार कल्पना करके देखिए कि देश का नागरिक होने के नाते आपको कैसे लगेगा कि देश के लिए आए बजट में से कटौती करके किसी और समुदाय को दे दिया जाए, या फिर देश की संपत्ति पर आपके अधिकार से पहले किसी और समुदाय का पहला अधिकार बताया जाए और जब आप ऐसी चीजों का विरोध करें तो कहा जाए कि आप एक समुदाय से घृणा करते हैं इसलिए आप अपराधी हैं…. ये सारी कल्पनाएँ सच हो जाती अगर 2014 में एक बार फिर से यूपीए सरकार आती। कोई आपसे आपके धर्म, आस्था को पूछने नहीं आता, न मंदिरों के पुनरुद्धार पर कोई काम होता। अगर कुछ होता तो सिर्फ ये कि हिंदुओं की आने वाली पीढ़ियाँ इस बात को समझ लेती कि उनकी महत्ता इस ‘समूह’ के आगे कुछ नहीं।

हिंदू पुजारी को मार डाला क्योंकि बेटे ने किया था BJP का समर्थन: पीड़ित पत्नी का दावा- BSP समर्थकों ने पीट-पीटकर की हत्या, SC/ST एक्ट में किए फर्जी केस

उत्तर प्रदेश के कुशीनगर में एक हिन्दू पुजारी, राधेश्याम पाठक की पीट-पीट कर नृशंस हत्या कर दी गई। पुजारी की हत्या एक राजनीतिक बहस के बाद हुई। पुजारी को इसलिए मार दिया गया क्योंकि उसके बेटे ने भाजपा को वोट देने की बात कह दी थी। उसे बसपा समर्थकों ने मार दिया। मृतक के परिवार ने आरोप लगाया है कि उन पर SC/ST एक्ट के तहत झूठे मामले भी लगाए गए।

इस मामले में पत्रकार और नियोपोलिटिको के फाउंडर शुभम शर्मा ने राधेश्याम पाठक के गाँव जाकर मृतक के परिजनों से बात की। शुभम शर्मा ने परिवार से बात करके बताया कि राधेश्याम पाठक को कैसे मात्र भाजपा को समर्थन के कारण मार दिया गया।

राधेश्याम की पत्नी ने बताया, “मेरे पति को भाजपा का समर्थन करने के मार दिया गया। बसपा समर्थक यहाँ आए और मेरे पति पर हमला कर दिया। उन्होंने मेरे पति पर धारदार हथियारों और लाठी डंडो से हमला किया। चेहरे पर भी वार किया।”

उनकी पत्नी ने कथित तौर पर बताया कि उनके ऊपर SC/ST एक्ट के तहत 8-10 फर्जी मामले भी हत्यारों द्वारा लगा दिए गए। राधेश्याम तिवारी की पत्नी ने उनके लिए न्याय की माँग की है, और कहा है कि हत्यारोपियों पर बुलडोजर कार्रवाई होनी चाहिए।

बसपा समर्थकों के हमले में मारे गए राधेश्याम पाठक की बेटी ने बताया कि उनके पिता को मारने वालों ने उस पर भी हमला किया। उसने बताया, “उनके हमले में मेरे पिता गंभीर रूप से घायल हो गये। उन्होंने मेरे पिता की गर्दन से लेकर आंखों, पीठ, कलाई, हाथ और पैरों पर लोहे की रॉड और धारदार हथियारों से हमला किया था। जब मैंने बीच-बचाव करने की कोशिश की तो उन्होंने मुझ पर हमला कर दिया।”

क्या था पूरा मामला

उत्तर प्रदेश के कुशीनगर के नेबुआ नौरंगिया थाना क्षेत्र के एक गाँव बाघापुरना में एक राजनीतिक बहस के ज्यादा तीव्र हो जाने के बाद राधेश्याम पाठक नाम के एक बुजुर्ग व्यक्ति की बेरहमी से हत्या कर दी गई। रिपोर्ट्स के अनुसार, इस हत्या का आरोप शंभू चौधरी और उसके तीन साथियों पर है। शम्भू चौधरी और उसके साथियों ने पाठक की जान बचाने दौड़े मृतक के परिजनों के साथ भी बेरहमी से मारपीट भी की। पुलिस ने इस मामले में कुल 4 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज कर जाँच शुरू कर दी है। यह घटना शुक्रवार (10 मई, 2024) की है।

बताया गया कि शुक्रवार को बाघापुरना गाँव में एक मंदिर के पास कुछ लोग पेड़ की छाँव में बैठे थे। इस दौरान वहाँ लोकसभा चुनाव पर चर्चा हो रही थी। मृतक के परिजनों के अनुसार, इस दौरान शंभू चौधरी और उनके साथ मौजूद लोगों ने बहुजन समाज पार्टी को वोट देने की बात कही। वहाँ मौजूद अमित पाठक ने भारतीय जनता पार्टी को वोट देने की वकालत की।

इसके बाद दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस हो गई। आरोप है कि भाजपा को वोट देने की बात कहते ही शंभू चौधरी भड़क गया और बोला,” मैं जिसे कहूँगा, वोट देना पड़ेगा।” विवाद बढ़ने पर कुछ लोगों ने मामला शांत करवा दिया और दोंन पक्षों को घर भेज दिया।

आरोप है कि उसी रात शंभू चौधरी अपने कुछ साथियों के साथ अमित पाठक के घर पहुँचा। यहाँ शम्भू और उसके साथियों ने पहले पाठक परिवार के साथ गाली-गलौज की और फिर पूरे परिवार को बेरहमी से पीटना शुरू कर दिया। उन्होंने ने अमित के 55 वर्षीय पिता राधेश्याम पाठक की हत्या कर दी और उनकी 21 वर्षीय बहन रितु पर भी हमला किया।

‘निकाह कर वरना मुँह पर फेंक दूँगा तेजाब, तेरे भाइयों को रेप में फँसाऊँगा’: मस्जिद के पास वसीम ने की लड़की से जबरदस्ती, कासिम-कामिल समेत 5 पर FIR

उत्तर प्रदेश के अमरोहा जिले में एक लड़की ने अपने साथ छेड़खानी और जबरन निकाह का दबाव बनाए जाने पर शिकायत दर्ज करवाई है। आरोपित का नाम वसीम है जो लड़की के अश्लील वीडियो अपने पास होने का दावा करके उसे वायरल करने की धमकी दे रहा है। पीड़िता को तेज़ाब से जलाने और उसके भाई पर रेप का झूठा केस लगाने जैसी बातें करके भी धमकाया गया है। घटना बुधवार (8 मई 2024) की है। मंगलवार (14 मई 2024) को पुलिस ने वसीम सहित कुल 5 आरोपितों पर FIR दर्ज कर के जाँच और अन्य जरूरी कार्रवाई शुरू कर दी है।

यह मामला अमरोहा जिले के कोतवाली नगर का है। यहाँ रहने वाली एक लड़की ने मंगलवार को पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई। शिकायत में पीड़िता ने बताया कि उसके मोहल्ले में रहने वाले वसीम, कासिम, दिलनवाज, कामिल और मुन्ने उस पर गलत नजर रखते हैं। वसीम पीड़िता से आते-जाते छेड़खानी करता है और जबरन निकाह का दबाव बनाता है। बकौल पीड़िता जब वो इंकार करती है तो उसे कहा जाता है कि अश्लील वीडियो उनके पास हैं, अगर बात नहीं सुनी तो वो वायरल कर दिए जाएँगे।

पीड़िता ने आरोपितों की इस हरकत के बारे में अपने भाइयों को बताया। लड़की के भाइयों ने विरोध किया तो वसीम ने उनको अपनी दिव्यांग बहन से रेप का झूठा आरोप लगा कर जेल भिजवाने की धमकी दी। इस धमकी से पीड़िता के भाई डर गए। घटना के बाद वसीम के हौसले और बढ़ गए। वह फोन करके पीड़िता को गंदी-गंदी गालियाँ देने लगा। इस दौरान उसने निकाह न करने पर लड़की के चेहरे पर तेजाब फेंकने और जान से मार डालने जैसी धमकियाँ भी दीं। बकौल पीड़िता आरोपित झगड़ालू किस्म के लोग हैं।

शिकायत में पीड़िता ने आगे 8 मई की घटना का जिक्र किया। इस दिन पीड़िता अपनी भाभी के साथ बाजार से घर लौट रही थी। शाम लगभग 7 बजे जब वह मस्जिद के पीछे वाली गली में पहुँची तो रास्ते में वसीम, कासिम, दिलनवाज, कामिल और मुन्ने ने गली में पीड़िता को रोक लिया। इन सभी ने पीड़िता से कहा, “आज तुझे कहीं मुँह दिखाने लायक नहीं छोड़ेंगे”। आरोप है कि पाँचों आरोपित पीड़िता को उठा कर अपने साथ ले जाने लगे। लड़की डर से चीखने लगी तो आसपास के लोग जमा हो गए।

लोगों को आता देख आरोपितों ने पीड़िता को छोड़ा। बकौल पीड़िता अगर लोग न जुटते तो उस दिन अनहोनी हो जाती और उसकी जिंदगी बर्बाद हो जाती। लड़की का आरोप है कि वसीम ने उसकी तस्वीरों को सोशल मीडिया के तमाम प्लेटफॉर्म पर वायरल करके उसे बदनाम कर दिया है। डर से पीड़िता काफी दिन चुप बैठी रही। आखिरकार 14 मई को हिम्मत करके उसने पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई। शिकायत में पीड़िता ने आरोपित द्वारा वायरल किए गए तमाम फोटो अटैच किए हैं।

शिकायत के अंत में पीड़िता ने आरोपितों पर कड़ी कार्रवाई की माँग की है। पुलिस ने इस शिकायत पर वसीम, कामिल, कासिम, मुन्ने और दिलनवाज पर FIR दर्ज कर लिया है। दिलनवाज इलाके में रोहित के नाम से भी जाना जाता है। इन सभी पर IPC की धारा 294, 354, 504 और 506 के साथ IT एक्ट के सेक्शन 67 के तहत कार्रवाई की गई है। पुलिस ने जाँच और अन्य जरूरी कार्रवाई शुरू कर दी है। आरोपित और पीड़िता एक ही समुदाय से हैं। ऑपइंडिया के पास शिकायत कॉपी मौजूद है।

‘परमारथ के कारने, साधुन धरा शरीर’: पूरी जिंदगी देश की रक्षा की, देहांत के बाद 3 जवानों को जीवन दे गए रिटायर्ड सूबेदार अर्जुन सिंह

कबीरदास का एक प्रसिद्ध दोहा है ‘परमारथ के कारने, साधुन धरा शरीर’। इसका अर्थ ये है कि सज्जन लोग इस संसार में दूसरों के काम आने के लिए ही आते हैं। इस दोहे को पूरी तरह से चरितार्थ भारतीय सेना के एक पूर्व जवान ने किया है, जिनका नाम अर्जुन सिंह संगोत्रा है। अपना पूरा जीवन राष्ट्र की सेवा में समर्पित करने वाले इस जवान ने देहांत के बाद भी भारतीय सेना के 3 सैनिकों को जीवन दे गए।

अब अर्जुन सिंह संगोत्रा के अंगों से गंभीर रूप से बीमार 3 सैनिक स्वस्थ होकर इस देश की सेवा करेंगे। हम अर्जुन सिंह संगोत्रा नाम के जिस जवान की बात कर रहे हैं, वो मूल रूप से हिमाचल प्रदेश के पालमपुर क्षेत्र के निवासी थे। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अर्जुन सिंह ने सेना में बतौर सूबेदार रिटायरमेंट लिया था।

लगभग 70 वर्षीय अर्जुन सिंह ने 30 वर्षों तक भारतीय सेना की जम्मू-कश्मीर रायफल्स बटालियन में रह कर देश की रक्षा और सेवा की थी। मंगलवार (14 मई 2024) को उनका ब्रेन हेमरेज हुआ। इस आघात की वजह से अर्जुन सिंह कोमा में चले गए। भरसक इलाज के बाद भी डॉक्टरों ने उन्हें ब्रेन डेड घोषित कर दिया।

अर्जुन सिंह के देहांत के बाद उनके परिजनों ने उनका अंगदान करने का फैसला किया। परिजनों ने उनका लीवर, किडनी और कॉर्निया (आँख का हिस्सा) दान करने की इच्छा जताई। सहमति बन जाने पर हरियाणा के चंडीमंदिर क्षेत्र में मौजूद भारतीय सेना के पश्चिमी कमांड के अस्पताल में विशेषज्ञों की एक टीम पहुँची।

इस टीम के डॉक्टरों ने बेहद सधे ढंग से अर्जुन सिंह द्वारा दान किए गए अंगों को निकाला। इन अंगों को ग्रीन कॉरिडोर बनाकर महज एक घंटे के अंदर दिल्ली स्थित सैन्य छावनी पहुँचाया गया। दिल्ली कैंट इलाके में सेना के अस्पताल (अनुसंधान और रेफरल) में इसे रिसीव किया गया। यहाँ पर गंभीर रूप से बीमार तीन सैनिक अपना इलाज करवा रहे थे।

इन सैनिकों को अर्जुन सिंह द्वारा दान किए गए अंगो को ट्रांसप्लांट किया गया। यह मेडिकल प्रकिया विशेषज्ञ डॉक्टरों की देखरेख में पूरी रात चली और आखिरकार यह प्रक्रिया सफल रही। अंगदान जैसा सराहनीय कार्य करने के लिए वेस्टर्न कमांड अस्पताल के सैन्य अधिकारियों ने दिवंगत सूबेदार अर्जुन सिंह संगोत्रा के परिजनों को सम्मानित किया।

‘वो अभी बात करने की स्थिति में नहीं, सही समय पर बोलेगी’: स्वाति मालीवाल का हाल उनकी माँ ने मीडिया को बताया, CM केजरीवाल के घर में हुई थी बदसलूकी

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के घर ‘शीशमहल’ में DCW (दिल्ली महिला आयोग) की अध्यक्ष और AAP (आम आदमी पार्टी) की राज्यसभा सांसद स्वाति मालीवाल की पिटाई हुई, जिसका आरोप लगा खुद दिल्ली CM के PA (निजी सचिव) रहे विभव कुमार पर। ये तीनों ही ‘इंडिया अगेंस्ट करप्शन (IAC)’ के दिनों से ही साथी रहे हैं। अब AAP के एक अन्य राज्यसभा सांसद संजय सिंह को DCW की सदस्य वंदना सिंह के साथ स्वाति मालीवाल के घर भेजा गया ताकि वो ‘मांडवली’ कर सकें।

अब ‘रिपब्लिक वर्ल्ड’ ने स्वाति मालीवाल की माँ से बात की है, जिन्होंने कहा है कि उनकी बेटी फ़िलहाल बात करने की स्थिति में नहीं है। स्वाति मालीवाल ने इस घटना के बाद एक ट्वीट तक नहीं किया है, जबकि वो सोशल मीडिया पर खासी सक्रिय रहती थीं। दिल्ली पुलिस ने भी उनसे संपर्क करने के प्रयास तेज़ कर दिए हैं। अब तक उनसे संपर्क करने के प्रयास 2 बार किए गए हैं। ACP रैंक के एक अधिकारी को उनके घर भी भेजा गया था। हालाँकि, अपने दोनों पंजीकृत आवासों पर वो नहीं मिलीं।

क्या स्वाति मालीवाल को धमकाया जा रहा है? – इस सवाल के जवाब में उनकी माँ ने कहा कि वो लोग अभी बात करने की स्थिति में नहीं हैं। जब उनसे पूछा गया कि कौन लोग हो सकते हैं जो उनकी बेटी को धमकी दे रहे हैं, तो स्वाति मालीवाल की माँ ने कहा, “ये उसकी लड़ाई है और वो तभी बोलेगी जब सही समय होगा।” स्वाति मालीवाल की माँ ने अपने स्वास्थ्य और अपनी बेटियों की स्थिति पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि वो ठीक नहीं हैं और उनकी बेटी बात करने की स्थिति में नहीं है।

स्वाति मालीवाल की माँ ने इस दौरान मीडिया को भी धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि कठिन समय में मीडिया ने उनके परिवार का समर्थन किया, जिसके लिए वो कृतज्ञ हैं। वहीं भाजपा की शाजिया इल्मी ने अरविंद केजरीवाल से इस घटना के पीछे का सच बताने के लिए कहा गया। स्वाति मालीवाल के पूर्व पति नवीन जयहिंद ने भी इस मामले में कार्रवाई की माँग की है। उन्होंने कहा है कि संजय सिंह अगर स्वाति मालीवाल को सच में छोटी बहन मानते हैं तो उन्हें अभिनय छोड़ कर कार्रवाई करवानी चाहिए।