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2029 के बाद भी नरेंद्र मोदी ही रहेंगे प्रधानमंत्री, अरविंद केजरीवाल को अमित शाह का जवाब: अंतरिम जमानत पर बोले- काफी लोगों को लगता है उन्हें स्पेशल ट्रीटमेंट मिला है

गृहमंत्री अमित शाह ने कहा है कि नरेन्द्र मोदी 2029 तक देश के प्रधानमंत्री रहेंगे। उन्होंने कहा है कि मोदी 2029 के बाद भी देश का नेतृत्व करते रहेंगे। उन्होंने AAP मुखिया और दिल्ली के CM अरविन्द केजरीवाल को दी गई जमानत पर कहा है कि इसे कुछ लोग विशेष ट्रीटमेंट मान रहे हैं।

गृह मंत्री अमित शाह ने ANI को दिए हुए एक इंटरव्यू में कहा, “प्रधानमंत्री मोदी 2029 तक अपने पद पर बने रहेंगे, और अरविन्द केजरीवाल के लिए मेरे पास एक बुरी खबर है। 2029 के बाद भी पीएम मोदी हमारा नेतृत्व करते रहेंगे।”

गृह मंत्री अमित शाह ने यह जवाब अरविन्द केजरीवाल के हालिया बयान पर दिया है। दिल्ली शराब घोटाला मामले में अंतरिम जमानत पर जेल से बाहर आने के बाद अरविन्द केजरीवाल ने कहा था कि 2025 में पीएम मोदी 75 साल हो जाएँगे तो क्या वह रिटायर हो जाएँगे।

इसके लिए उन्होंने कुछ और भाजपा नेताओं का हवाला दिया था जिनके विषय में कहा जाता है कि उन्हें 75 वर्ष की आयु के कारण भाजपा ने सक्रिय राजनीति में नहीं रखा। केजरीवाल ने दिल्ली में आयोजित एक जनसभा में यह भी कहा था कि जल्द ही उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को किनारे लगा दिया जाएगा और अमित शाह प्रधानमंत्री बनेंगे।

भाजपा ने इसको लेकर केजरीवाल पर तीखा हमला बोला था। अमित शाह ने स्वयं स्पष्ट किया था कि पीएम मोदी 75 वर्ष की आयु के बाद भी अपने पद पर बने रहेंगे। उन्होंने ANI को दिए इंटरव्यू में यह बात दोहराई है। उन्होंने केजरीवाल की जमानत को लेकर भी बात की।

अमित शाह ने कहा, “सुप्रीम कोर्ट न्याय की व्याख्या का अधिकार है। मैं मानता हूँ यह सामान्य प्रकार का न्यायिक निर्णय नहीं है। काफी लोग मानते हैं कि केजरीवाल को स्पेशल ट्रीटमेंट दिया गया है।” उन्होंने कहा कि केजरीवाल अभी दूसरे मामले में फँसे हुए हैं, उनको इस मामले से निकलने दीजिए। अमित शाह का इशारा स्वाति मालीवाल के साथ दिल्ली CM आवास में हुई बदसलूकी से था।

शाहीन बाग़ हारा, पीड़ित शरणार्थी जीते… पड़ोसी इस्लामी मुल्कों से आए अल्पसंख्यकों को मिलने लगी भारतीय नागरिकता, CAA के खिलाफ दिल्ली में हुआ था हिन्दू विरोधी दंगा

केंद्र सरकार ने 14 शरणार्थियों को CAA (नागरिकता संशोधन कानून) के तहत नागरिकता दी है। बता दें कि दिसंबर 2019 में पाकिस्तान, अफ़ग़निस्तान और बांग्लादेश के पीड़ित अल्पसंख्यक शरणार्थियों को भारत की नागरिकता देने के लिए ये कानून लाया गया था, जिसका इस्लामी तत्वों ने खासा विरोध किया था। दिल्ली में दंगे तक किए गए। 9 बार CAA के नियमों को अधिसूचित करने के लिए केंद्र सरकार ने समाय बढ़ाया, अंततः मार्च 2024 में इसे लागू कर दिया गया।

अब बुधवार (15 मई, 2024) को अमित शाह के प्रभार वाले केंद्रीय गृह मंत्रालय ने 14 पीड़ित विदेशी अल्पसंख्यक श्रद्धालुओं को भारत की नागरिकता से नवाजा है। इस कानून के संसद में पास होने के साढ़े 4 साल बाद पहली बार इसके तहत किसी को नागरिकता मिली है। केंद्रीय गृह सचिव अजय कुमार भल्ला ने लाभार्थियों को प्रमाण-पत्र दिया। बता दें कि इसके लिए वेबसाइट बना कर एप्लिकेशन फॉर्म जारी किए गए थे। जिला स्तरीय समिति को इसके लिए आवेदन देना होता है।

वहीं राज्य स्तरीय समिति इन आवेदनों की जाँच करने के बाद नागरिकता दिए जाने की सिफारिश करती है। पिछले 2 महीनों से कई हिन्दू, सिख, जैन, बौद्ध, पारसी और ईसाई समुदाय के शरणार्थियों की तरफ से CAA के तहत नागरिकता के लिए आवेदन आए थे। ऐसे शरणार्थी इसके तहत नागरिकता के पात्र हैं, जो 31 दिसंबर, 2014 तक भारत में आ गए थे। तीनों इस्लामी मुल्कों में प्रताड़ना के कारण इन अल्पसंख्यकों को भाग कर भारत में शरण लेनी पड़ी थी।

जिला स्तरीय समिति (DLC) के सीनियर सुपरिटेंडेंट ने इन शरणार्थियों को नागरिकता की शपथ दिलाई। आवेदनों की प्रोसेसिंग ऑनलाइन माध्यमों से की जाती है। वहीं दिल्ली की राज्य स्तरीय एम्पॉवर्ड कमिटी (EC) के मुखिया डायरेक्टर (सेंसस ऑपरेशन) हैं। CAA के विरोध में दिल्ली के शाहीन बाग़ में खातूनों ने धरना दिया था और एक तरह से राजधानी को कई हफ़्तों तक बंधक बना कर रखा था। इसके खिलाफ झूब झूठ भी फैलाया गया था।

फरजाना बनी पल्लवी, नरगिस हुई मानसी: बरेली- मुरादाबाद में मुस्लिम युवतियों ने की घर वापसी, हिंदू युवकों से विवाह के बाद बोलीं- अब तीन तलाक-हलाला से हैं आजाद

उत्तर प्रदेश के बरेली और मुरादाबाद जिलों में 2 मुस्लिम लड़कियों ने घर वापसी की है। इन दोनों ने इस्लाम छोड़ कर हिन्दू धर्म अपनाया और हिन्दू युवकों से विवाह किया है। बरेली में जहाँ रामपुर की फरहाना पल्ल्वी बन चुकी हैं तो वहीं मुरादाबाद की नरगिस अभी मानसी नाम से जानी जाएँगी। दोनों लड़कियों ने हिन्दू धर्म में अपनी पहले से आस्था बताते हुए खुद को अब तीन तलाक और हलाला के डर से आज़ाद बताया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पहला मामला बरेली के शाही इलाके का है। मंगलवार (14 मई 2024) को को यहाँ के अगत्स्य मुनि आश्रम में रामपुर की फरहाना अपने प्रेमी धर्मवीर के साथ पहुँची। फरहाना ने बताया कि वो अपने परिवार के साथ चंडीगढ़ में रहती थीं। यहीं पर बरेली के धर्मवीर भी अपने परिजनों के साथ रह कर काम करते थे। 5 वर्ष पहले दोनों में जान-पहचान हुई थी जो बाद में प्यार में बदल गई। आखिरकार दोनों ने शादी का फैसला किया। फरहाना के परिजन इस रिश्ते के खिलाफ थे।

आखिरकार फरहाना सभी जरूरी कागजात लेकर अपने प्रेमी धर्मवीर के साथ अगत्स्य मुनि आश्रम में पंडित के के शंखधर के पास पहुँची। खुद को बालिग़ बताते हुए यहाँ उन्होंने घर वापसी और धर्मवीर से विवाह की इच्छा जताई। अगत्स्य मुनि आश्रम में फरहाना का शुद्धिकरण हुआ। यहाँ से उन्होंने सनातन धर्म स्वीकार किया और पल्ल्वी नाम रख लिया। वैदिक विधि-विधान से पल्लवी बनी फरहाना का धर्मवीर से विवाह हुआ। हिन्दू धर्म में अपनी पहले से आस्था बताते हुए फरहाना ने खुद को बेहद खुश और तीन तलाक व हलाला के डर से मुक्त बताया।

मुरादाबाद में नरगिस बनीं मानसी

घर वापसी का दूसरा मामला उत्तर प्रदेश के ही मुरादाबाद जिले से आया है। रिपोर्ट्स के अनुसार यहाँ सोमवार (13 मई 2024) को आर्य समाज मंदिर में नरगिस अपने प्रेमी सुनील के साथ पहुँची। खुद को बालिग़ बताते हुए नरगिस ने सुनील से विवाह करने की इच्छा जताई। दोनों एक ही गाँव के निवासी हैं और साथ-साथ खेतों पर काम करने जाया करते थे। दोनों का एक-दूसरे के घर भी आना-जाना था। कुछ दिनों में ही सुनील और नरगिस में प्यार हो गया। दोनों ने शादी की इच्छा जताई तो नरगिस के घर वालों ने इसका विरोध किया।

आखिरकार नरगिस ने सुनील से आर्य समाज मंदिर में शादी करने का फैसला किया। सोमवार को दोनों ने वैदिक विधि-विधान से शादी कर ली। इस अवसर पर खुद को बेहद खुश बताते हुए नरगिस ने अब तीन तलाक व हलाला से मुक्ति पाने की बात कही। अपने प्रेमी सुनील को 7 जन्मों के साथी के तौर पर पाकर नरगिस ने बताया कि बचपन से ही उनका झुकाव हिन्दू धर्म की तरफ था। नरगिस के घर वालों ने सुनील के खिलाफ थाने में FIR दर्ज करवा रखी है। इस FIR में सुनील पर नरगिस को बहला-फुसला कर भगा ले जाने का आरोप लगाया गया है। जल्द ही पुलिस के आगे नरगिस का बयान दर्ज हो सकता है। इधर सुनील के परिजन नरगिस का बहू के तौर पर अपने घर में आने की प्रतीक्षा कर रहे हैं।

उम्मीदवारों में से सबसे बेहतरीन को चुनना ही है लोकतंत्र, NOTA के इस्तेमाल से बदतर की भी लग सकती है लॉटरी: जानिए क्या कहता है Available Best का तर्क

देश में नई सरकार के लिए आम चुनाव हो रहे हैं। 4 जून को परिणाम आ जाएँगे। वहीं, चुनाव आयोग एवं तमाम स्वयंसेवी संगठन मतदान के प्रतिशत को बढ़ाने के लिए लोगों में जागरूकता बढ़ा रहे हैं। उनके काफी प्रयासों के बावजूद चार चरणों का मतदान होने के बाद मतदान का प्रतिशत काफी कम है। लोग इसे राजनीतिक दलों के नफा और नुकसान के रूप में देख रहे हैं, परंतु इससे सबसे अधिक नुकसान आम जनता का है ऐसा कहा जा सकता है, क्योंकि आम जनता के लिए ही वह प्रतिनिधि चुना जाता है जिसके चुनाव में वह शामिल नहीं होती है। चाहे नोटा दबाकर, चाहे मतदान का बहिष्कार कर।

आगे की बात करने से पहले महाभारत की एक घटना का उल्लेख करना अति आवश्यक है, ताकि तथ्यों को आसानी से समझा जा सके। युद्ध के ठीक पहले युदवंशी क्षत्रियों की एक सभा हुई। उसमें यह तय किया जाना था कि कौरवों या पांडवों में से किसका साथ दिया जाए। लोग अपने-अपने हिसाब से तर्क दे रहे थे। कोई कौरवों को बुरा बता रहा था तो कोई यह कह रहा था कि पांडवों की तरफ से भी तमाम गलत कार्य किए गए हैं। पांडवों ने अपनी पत्नी को दांव पर लगाया जो पूरी तरह से अधर्म था।

तब भगवान श्रीकृष्ण ने स्पष्ट रूप से कहा कि निश्चित रूप से गलतियाँ दोनों तरफ से हुई हैं, लेकिन हमें उसका चुनाव करना है जो कम गलत है। निश्चित रूप से पांडव कम गलत थे और श्रीकृष्ण ने उनका चुनाव किया। इसे ही अंग्रेजी में ‘अवेलेबल बेस्ट’ कहा जाता है। बस इसी सिद्धांत का पालन लोकतंत्र में मतदाताओं को प्रत्याशियों के चयन में भी करना चाहिए, जैसा भगवान श्रीकृष्ण ने महाभारत के ठीक पहले किया था।

यहाँ इस बात का विशेष रूप से उल्लेख करना आवश्यक है कि मतदान में भाग ना लेना या भाग लेने के बावजूद नोटा का बटन दबाना, दोनों स्पष्ट रूप से एक ही चीज हैं। ऐसा इसलिए कहा जा सकता है, क्योंकि दोनों ही प्रक्रिया में मतदाता उम्मीदवार होने के बावजूद उसकी चयन प्रक्रिया में शामिल नहीं होता है, जो कि एक स्वस्थ लोकतांत्रिक देश के लिए पूरी तरह से अनुचित कहा जा सकता है।

इसके पीछे कभी-कभी तर्क दिया जाता है कि समस्त उम्मीदवारों में से कोई भी उचित प्रतीत नहीं होता है। इसलिए मतदान में शामिल ना होना या नोटा का बटन दबाना ही उचित है, परंतु हमें यह भी विचार करना होगा कि क्या कोई ऐसा व्यक्ति हो सकता है जो पूरी तरह से उचित प्रतीत हो। निश्चित रूप से हर व्यक्ति में कुछ ना कुछ कमियाँ होती हैं। हर राजनीतिक दल में कुछ ना कुछ कमियाँ होती हैं या फिर बुराइयाँ होती हैं।

इस वाक्य को दृष्टिगत रखते हुए मतदान केंद्र पर जाकर उस व्यक्ति का चुनाव करना चाहिए, जो व्यक्ति समस्त उम्मीदवारों में से कम बुरा हो। दूसरे रूप में यह भी कहा जा सकता है कि उपलब्ध उम्मीदवारों में से जो सबसे अच्छा हो उसका चुनाव किया जाए। हालाँकि, जब हम मतदान में भाग नहीं लेते हैं या नोटा का प्रयोग करते हैं तो कभी-कभी ऐसे व्यक्ति का चुनाव करने से हम वंचित रह जाते हैं, जो इनमें सबसे अच्छा था और जो वास्तव में बुरा होता है वह चुनाव जीत जाता है और हमें उसे 5 वर्षों तक झेलना पड़ता है।

जब हम नोटा का प्रयोग करते हैं तो सर्वोत्तम की चाहत में उत्तम को भी किनारे कर देते हैं और उसका फायदा कई बार उस उम्मीदवार को मिल जाता है जो सबसे अधिक बुरा है, जबकि हमारे पास जो सर्वोत्तम उपलब्ध हो हमें उसको चुनना चाहिए था। निश्चित रूप से यह कहने में कोई संकोच नहीं है कि किसी भी प्रजातांत्रिक देश में 100 फ़ीसदी ईमानदार और सत्यनिष्ठा से युक्त प्रत्याशी मिलेंगे, यह बहुत मुश्किल है। हालाँकि, नोटा का प्रयोग करने से किसी ऐसे उम्मीदवार की हार हो सकती है, जो उनमें सबसे बेहतर हो।

इस प्रकार से नोटा को दिए गए वोट अगर उस हारे हुए उम्मीदवार को चले जाते तो वह उम्मीदवार जीत सकता था। अगर सिर्फ नोटा को चले गए मतों की वजह से किसी बुरे उम्मीदवार की जीत हो जाती है तो फिर नोटा के दबाने का कोई मतलब नहीं रह जाता है। इसी को दूसरे रूप में यदि कहा जाए तो नोटा का चुनाव सबसे खराब प्रत्याशी को चुनने के बराबर है। यह लोकतांत्रिक देश में मतदान के दौरान एक मतदाता के द्वारा उठाया गया आत्मघाती कदम कहा जा सकता है।

इस कारण से जहाँ तक मेरा मानना है, मतदान में भाग लेना चाहिए और नोटा का प्रयोग ना करके उस प्रत्याशी को मतदान अवश्य करना चाहिए जो समस्त प्रत्याशियों में से सबसे अच्छा हो। नोटा का प्रयोग करने या मतदान न करने वाले मतदाताओं को इस बात का भान अवश्य होना चाहिए कि उनके इस क्रियाकलाप का मतदान पर कोई प्रभाव नहीं पड़ने वाला नहीं है, क्योंकि मतदान का कम से कम प्रतिशत होने के बावजूद भी प्रत्याशी का चयन किया जाएगा और विजयी प्रत्याशी सांसद या विधायक बनकर सदन की शोभा बढ़ाएगा।

इसलिए बेहतर यही है कि प्रत्याशी के चयन में अपनी भागीदारी को बढ़ाया जाए, जिसके लिए लगातार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, स्वयंसेवी संस्थाएँ और चुनाव आयोग काम कर रहे हैं। यह किसी भी राजनीतिक दल के लिए नुकसान या फायदे का विषय नहीं है। यहाँ इस तथ्य का उल्लेख करना अति आवश्यक है कि भारत के लोकतंत्र में सर्वप्रथम नोटा का प्रयोग सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद साल 2013 के विधानसभा चुनाव में किया गया था।

शीर्ष अदालत के अनुसार, अगर कोई मतदाता किसी भी उम्मीदवार को अपना मत देना नहीं चाहता है तो वह गुप्त रूप से नोटा का बटन दबा सकता है। इस आदेश के बाद चुनाव आयोग ने मतदाताओं को नोटा का विकल्प दिया, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने ही अगस्त 2018 में अपने दिए गए फैसले में राज्यसभा चुनाव में नोटा का प्रयोग करने की अनुमति देने से मना कर दिया। ऐसे में यह सवाल उठना भी लाजमी है कि अगर एक चुनाव में नोटा प्रासंगिक है तो दूसरे चुनाव में नोटा अप्रासंगिक कैसे हो सकता है।

यहाँ पर यह भी प्रश्न उठता है कि क्या राज्यसभा के चुनाव में सभी उम्मीदवार बेहतर होते हैं। अगर नोटा सही विकल्प ही है तो फिर इसे प्रत्येक चुनाव में क्यों नहीं इस्तेमाल किया जा सकता या फिर यह मान लिया जाए कि राज्यसभा चुनाव में समस्त उम्मीदवारों में से कोई बुरा हो ही नहीं सकता। यह एक चर्चा का विषय है। हालाँकि, यह तथ्य निर्विवाद है कि मतदाताओं को उम्मीदवारों की चयन प्रक्रिया में पूरी ईमानदारी से शामिल होना चाहिए।

चीनी सामान पर टैक्स लगाने पर ट्रम्प को मूर्ख बताते थे बायडेन, अब खुद किया वही काम: चीन के इलेक्ट्रिक वाहनों पर लगाया 100% टैक्स

अमेरिका के राष्ट्रपति जो बायडेन ने चीन से आने वाले कई सामानों पर ऊँचे स्तर के टैरिफ (टैक्स) लगा दिए हैं। बायडेन ने चीन पर आरोप लगाया है कि वह व्यापार के नियमों का उल्लंघन कर रहा है और बताया है कि उनका यह कदम अमेरिकी बाजार को सुरक्षित करेगा। जो बायडेन पहले तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की चीन के सामान पर टैरिफ बढ़ाने की नीति को लेकर आलोचना किया करते थे। अब उन्होंने स्वयं यह कदम उठाया है।

जो बायडेन ने एक्स (पहले ट्विट्टर) पर लिखा, “मैंने अब चीन में बनी वस्तुओं पर कई प्रकार के टैरिफ लगा दिए हैं। स्टील और एल्यूमीनियम पर 25%, सेमीकंडक्टर पर 50%,इलेक्ट्रिक वाहनों पर 100% और सोलर पैनलों पर 50% का टैरिफ लगाया है। चीन इन उद्योगों में अपना दबदबा बनाने के लिए जुटा हुआ है। मैं यह चाहता हूँ कि कि अमेरिका इस मामले में विश्व का नेतृत्व करे।”

बायडेन ने इस मामले को लेकर कहा ”चीन में बने इलेक्ट्रिक वाहनों पर 100% टैरिफ, और लोग इसकी तारीफ कर रहे हैं। क्योंकि हम चीन को अपने बाज़ार में माल की बाढ़ नहीं लाने देंगे। जिससे अमेरिकी वाहन बनाने वाली कम्पनियों के लिए प्रतिस्पर्धा करना मुश्किल हो जाएगा।”

उन्होंने आगे कहा, “हम चीन की इलेक्ट्रिक वाहन बैटरियों पर 25% टैरिफ और उन बैटरियों को बनाने वाले महत्वपूर्ण खनिजों पर 25% टैरिफ भी लागू कर रहे हैं। हम चीनी सोलर पैनलों पर टैरिफ 25 से 50% तक बढ़ाने जा रहे हैं।”

अमेरिकी राष्ट्रपति बायडेन ने इस मामले में चीन की सरकार पर भी आरोप जड़े। उन्होंने कहा कि चीनी सरकार स्टील और एल्यूमीनियम, सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रिक वाहन, सोलर पैनल और स्वास्थ्य उपकरण कीकंपनियों में पैसा लगाती है। चीनी कंपनियों पर सारे सामानों का जरूरत से ज्यादा उत्पादन करने और फिर अपने प्रतिद्वंदियों को बाजार से बाहर करने के लिए इस सामान को बेहद कम कीमत पर बेंचने का आरोप है।

चीनी सामान पर ऊँचे टैरिफ लगाने के मामले में व्हाइट हाउस ने बताया, “चीन की टेक्नोलॉजी ट्रांसफर, पेटेंट की सुरक्षा और आविष्कार को लेकर अनुचित व्यापार नीतियों ने अमेरिका को नुकसान पहुँचाया है।” व्हाइट हाउस ने आरोप लगाया कि चीन विश्व भर में जान बूझ कर कम दाम की चीजों का निर्यात कर रहा है।

बायडेन ने अपनाई ट्रम्प की नीति, पहले करते थे आलोचना

चीन से आने वाले सामान पर ऊँची दरों का टैरिफ लगाने को लेकर पहले स्वयं बायडेन ही पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की आलोचना करते थे। तब उनका कहना था कि इससे अमेरिका के लोगों को नुकसान होगा क्योंकि उन्हें चीन से आने वाला’ समान महँगा खरीदना पड़ेगा।

उन्होंने 2019 में ट्रम्प की आलोचना करते हुए एक्स पर लिखा था, “ट्रम्प को कुछ नहीं मालूम। उनको लगता है कि उनके लगाए टैरिफ़ चीन पर भारी पड़ रहे हैं। कोई भी अर्थशास्त्र का पहले साल का छात्र आपको बता सकता है कि अमेरिकी लोग इन टैरिफ को झेल रहे हैं। सामान्य कैशियर तक देखते हैं कि क्या हो रहा है, वह तक ट्रम्प की तुलना में अर्थशास्त्र के बारे में अधिक जानते हैं।” यहाँ तक कि 2020 में अपने चुनाव अभियान के दौरान बायडेन वादा किया था कि वह सत्ता में आने पर यह टैरिफ हटा देंगे।

स्वाति मालीवाल के साथ बदसलूकी में अरविंद केजरीवाल पर भी हो FIR: नवीन जयहिंद, कहा- पीटने वाले का हाथ तोड़ देते, आदेश देने वाले की खींच लेते जुबान

आम आदमी पार्टी की राज्यसभा सांसद स्वाति मालीवाल के साथ मुख्यमंत्री केजरीवाल के घर हुई मारपीट मामले में उनके पूर्व पति नवीन जयहिंद का एक और बयान आया है। उन्होंने स्वाति के मारपीट केस में सीएम के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की माँग की है। इसके अलावा अपनी पूर्व पत्नी को झाँसी की रानी, मर्दानी और किसी से न डरने वाली बताया है।

समाचार एजेंसी एएनआई से बात करते हुए नवीन जयहिंद ने कहा कि दिल्ली में जिसे सीएम हाउस कहा जाता है, वो असल में गटर हाउस है। ये घटना बहुत खतरनाक घटना है। पूरा स्कैंडल हैं। इसमें तो अरविंद केजरीवाल के ऊपर भी एफआईआर होनी चाहिए। जिसने भी ये किया है उसकी इतनी औकात नहीं है ये काम करने की।

नवीन ने इस वीडियो में भी कहा, “स्वाति की जान को खतरा है, वरना कोई इस तरह पुलिस को फोन नहीं करेगा, थाने से वापस नहीं आएगा। अभी भी उसकी आवाज दबाई जा रही, उसे चुप कराया जा रहा है।” वह कहते हैं- “ये सिर्फ मेरी पूर्व पत्नी का मामला नहीं है। ये मामला लाखों महिलाओं का है। अगर सिर्फ पूर्व पत्नी का मामला होता तो अब तक जो हाथ स्वाति पर उठे हैं वो टूट चुके होते और जिसने आदेश दिया है अपनी जुबान से… उसकी जुबान भी निकाल लिए होते। ये मामला मेरा व्यक्तिगत नहीं है।”

आगे वीडियो में नवीन जयहिंद ने दिल्ली पुलिस से, देश के गृहमंत्री से इस मामले में एक्शन लेने को कहा है। उन्होंने कहा कि उन्हें समझ नहीं आ रहा है कि इस मामले में दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष क्यों चुप हैं। ये बहुत बड़ा मामला है।

वो कहते हैं- “कल को ऐसा न हो कि स्वाति का एक्सीडेंट हो गया, स्वाति ने कुछ और कर लिया। ये बहुत गहरा केस है। वो सांसद है। मुझे लगता है पूरे मामले पर कार्रवाई होनी चाहिए और स्वाति को बाहर निकलकर आना चाहिए। वो झाँसी की रानी है, वो मर्दानी है, वो डर नहीं सकती है। अब उसके ऊपर कौन सा प्रेशर डाला गया है ये नहीं पता।”

वह कहते हैं- “मैं नहीं मान सकता कि जिसने लाखों महिलाओं की आवाज को उठाया हो वो चुप रहे।” अपने बयान में नवीन ने उन लोगों को भी घेरा तो एक समय में तो महिला सम्मान आदि की बातें करते हैं दूसरी तरफ उन्हीं के घर में मारपीट होती है। वह दोहराते हैं- वो जगह गटर हाउस है, वहाँ बहुत गंदगी है। स्वाति इस मामले में आगे आए ताकि लाखों महिलाओं को संदेश जाए।

उन्होंने दिल्ली पुलिस से भी इस मामले में स्वत: संज्ञान लेने को कहा है। वो सवाल उठाते हैं कि इतनी बड़ी घटना पर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही है।

इस वीडियो में नवीन ने बताया कि उनकी घटना के बाद स्वाति से कोई बात नहीं हुई है। दोनों का तलाक 2020 में हुआ था और तब से वो दोनों अलग हैं। इस मामले में वो इसलिए बोल रहे हैं क्योंकि ये एक महिला का मामला है, जिनके साथ सीएम हाउस में बदसलूकी हुई है।

उन्होंने कहा कोई सामान्य व्यक्ति के घर ऐसा होता तो उसको पुलिस उठा लेती, तो फिर सीएम पर क्यों नहीं, जाँच पड़ताल तो हो। उन्होंने कहा कि वो सामान्य रूप से इस बात को कह रहे हैं कि अगर इस मामले में उनसे किसी ने भी मदद माँगी तो वो मदद को पूरी तरह से तैयार हैं। उनके हिसाब से बहुत बड़ी घटना है।

नवीन ने आखिर में ये भी कहा कि वो आम आदमी पार्टी वालों को 2008 से जानते हैं। वो दावा करते हैं कि उनसे ज्यादा इस पार्टी के बारे शायद ही कोई जानता हो। वो कहते हैं कि अभी ये मामला उनके लिए व्यक्तिगत नहीं है, लेकिन अगर व्यक्तिगत बना तो फिर वो अपने हिसाब से इसे देखेंगे। उन्होंने आप सांसद संजय सिंह को केजरीवाल का तोता बताया। साथ ही आरोप लगाया कि पूरे मामले में लीपापोती की जा रही है। जयहिंद के अनुसार, “संजय सिंह को पहले ही इस घटना के बारे में पता था कि ऐसा होगा, उसे ये भी पता है क्या-क्या हुआ है। बाकी सारी चीजें वो सिर्फ एक्टिंग कर रहा है।”

‘दिल्ली की तरह पंजाब में भी हुआ शराब घोटाला’: कॉन्ग्रेस के पूर्व CM ने INDI गठबंधन के साथी अरविंद केजरीवाल पर बोला हमला, कहा – उन पर विश्वास करें कैसे?

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल घोटालेबाज हैं। ये हम नहीं कह रहे, या सिर्फ भाजपा का ऐसा बयान नहीं हैं। बल्कि, कॉन्ग्रेस पार्टी ऐसा कह रही है। वही कॉन्ग्रेस पार्टी, जो I.N.D.I. गठबंधन में AAP (आम आदमी पार्टी) के साथ शामिल है। लेकिन, पंजाब में दोनों अलग-अलग लड़ रहे हैं। ठीक वैसे ही, जैसे केरल में कॉन्ग्रेस और वामदल लड़ रहे, पश्चिम बंगाल और कॉन्ग्रेस और TMC लड़ रहे। अरविंद केजरीवाल हाल ही में चुनाव प्रचार खत्म होने तक जमानत पर छूटे हैं।

पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने कहा, “अरविंद केजरीवाल शराब के बहुत बड़े घोटाले में नामजद हैं। मात्र 15 दिनों के लिए वो जेल से बाहर आए हैं। ऐसे व्यक्ति पर कैसे विश्वास किया जा सकता है? जैसे दिल्ली में बहुत बड़ा शराब घोटाला हुआ, वैसे ही पंजाब में भी हुआ है। पंजाब वाले मामले में कोई कार्रवाई नहीं हुई है। दिल्ली में तो नई शराब नीति वापस भी ले ली गई, पंजाब में तो ऐसा नहीं हुआ। ऐसे शख्स का विरोध होना चाहिए।”

उन्होंने आरोप लगाया कि पंजाब को लूटा जा रहा है, पंजाब पर 80,000 करोड़ रुपए का कर्ज लाद दिया गया है और अरविंद केजरीवाल पंजाब के सरकारी विमान का इस्तेमाल कर रहे हैं। चरणजीत सिंह चन्नी पंजाब के जालंधर से लोकसभा चुनाव लड़ रहे हैं। बता दें कि दिल्ली में तो AAP-कॉन्ग्रेस का गठबंधन है, लेकिन पंजाब में नहीं। AAP के संयोजक अरविंद केजरीवाल गुरुवार (16 मई, 2024) को लुधियाना के जोधन में अपने प्रत्याशी अशोक पराशर पप्पी के समर्थन में रोडशो करेंगे।

उससे पहले दिल्ली CM का अमृतसर स्थित स्वर्ण मंदिर और दुर्गियाना मंदिर में दर्शन करेंगे। लुधियाना से कॉन्ग्रेस के रवनीत सिंह बिट्टू सांसद हैं। अरविंद केजरीवाल के बाहर निकलने से पंजाब में कॉन्ग्रेस तनाव में आ गई है। इसका कारण ये है कि AAP ने ही राज्य की सत्ता से कॉन्ग्रेस को बेदखल कर जीत दर्ज की और भगवंत मान मुख्यमंत्री बने। दिल्ली के शराब घोटाले में पूर्व उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया भी जेल में हैं। वहीं राज्यसभा सांसद संजय सिंह जमानत पर बाहर निकले हैं।

हाल ही में चरणजीत सिंह चन्नी ने जम्मू कश्मीर के पुँछ में भारतीय वायुसेना के जवानों पर हुए हमले को ‘भाजपा का चुनावी स्टंट’ बताया था। उन्होंने कहा था कि ये स्टंटबाजी हो रही है, हमले नहीं हो रहे। चन्नी ने पुलवामा में 40 CRPF जवानों के बल्दियन पर विवादित बयान देते हुए कहा था कि पिछली बार भी चुनाव आया तो ऐसे स्टंट खेले गए और बीजेपी को जिताने का काम किया गया। उन्होंने कहा था कि पहले से तैयारी करके हमले करवाए जाते हैं, यह भाजपा को जिताने का स्टंट होता है और इसमें कोई सच्चाई नहीं होती।

कंगाल पाकिस्तान की जनता आटे के लिए लड़-मर रही, नेता-फौजी दुबई में खरीद रहे अरबों का विला : काले धन को ‘इन्वेस्ट’ करने का ठिकाना बना UAE

पाकिस्तान में लोग आटे के लिए मार काट करने के लिए तैयार हैं। देश के अलग-अलग हिस्सों में प्रदर्शन हो रहे हैं। पीओके में जनता सड़कों पर उतर कर इंस्पेक्टर को पीट कर मार चुकी है। इसी बीच 14 मई 2024 को ‘दुबई अनलॉक’ नाम की फाइल सामने आई है, जिसे इंटरनेशनल खोजी पत्रकारों ने जारी की है। इस फाइल में यूएई में प्रॉपर्टी में निवेश करने वालों के बारे में जानकारी है, जिसमें बताया गया है कि एक तरफ पाकिस्तान की जनता खाने-पीने के सामान के लिए मारामारी कर रही है, तो दूसरी ओर पाकिस्तान के भ्रष्ट नेता, ब्यूरोक्रेट्स और आर्मी के बड़े अफसर अरबों की काली कमाई से यूएई के अंदर हजारों प्रॉपर्टी खरीद रहे हैं।

दुबई अनलॉक के लिए सेंटर फॉर एडवांस्ड डिफेंस स्टडीज (C4ADS) और संगठित अपराध और भ्रष्टाचार रिपोर्टिंग प्रोजेक्ट (OCCRP) ने काम किया है, जिसने बताया है कि दुबई के अंदर लक्जरी प्रॉपर्टीज में किन लोगों ने निवेश किया है। अकेले पाकिस्तानियों ने यूएई में 11 अरब अमेरिकी डॉलर की संपत्तियाँ खरीदी है। एक तरफ पाकिस्तान की जनता भूख से बेहार है, तो दूसरी तरफ पाकिस्तान के भ्रष्ट सैन्य अधिकारी और अमीर नेता लोग यूएई में प्रॉपर्टीज बना रहे हैं।

इस जाँच के दौरान पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी के बच्चों, नवाज शरीफ के बेटे हुसैन नवाज शरीफ, गृहमंत्री मोहसिन नकवी की बीवी, शरजील मेमन और उसके परिवार, सीनेटर फैसले वावदा, फराह गोगी, शेर अफजल मारवत जैसे नेशनल और स्टेट असेंबली के मेंबर्स के पास यूएई में संपत्तियों की जानकारी सामने आई है। इस सूची में पूर्व तानाशाह परवेज मुशर्रफ, पूर्व प्रधानमंत्री शौकत अजीज, कई रिटायर्ड आर्मी जनरल, पुलिस चीफ, राजदूत और वैज्ञानिक तक के पास यूएई में संपत्ति है।

खास बात ये है कि मौजूदा राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी को साल 2014 में एक संपत्ति गिफ्ट के तौर पर मिली थी। साल 2018 में उन्होंने कागजों पर इसे दिखाया भी था, लेकिन बाद में उन्होंने इसे गिफ्ट में किसी और को दे दिया। ऐसा ही एक नाम अब्दुल गनी माजिद का है, जो एक बिजनेस टाइकून है और जरदारी के साथ फर्जी अकाउंट मामले में सह-अभियुक्त भी हैं। बाद में पता चला कि 319 मिलियन पाकिस्तानी रुपए का ये पेंटहाउस साल 2014 में उन्होंने जरदारी को दे दिया था और जरदारी ने बाद में इसे अपनी बेटी को दे दिया।

एक और पाकिस्तानी नेता मोहनिस नकवी ने दुनिया के अरेबियन रेंचेज में 5 वेडरूम का विला अपनी बीवी के नाम से खरीदा था। लेकिन अपने चुनावी हलफनामे में उसकी जानकारी नहीं दी। ये विला साल 2017 में 329 मिलियन पाकिस्तानी रुपए में खरीदा गया था औऱ अप्रैल 2023 में इसे 344 मिलियन पाकिस्तानी रुपए में बेच भी दिया गया। इस रिपोर्ट में अल्ताफ खनानी नेटवर्क की संपत्तियों के बारे में भी जानकारी दी गई है। वो मनी लॉन्ड्रिंग का कारोबार करता है। अमेरिका ने मनी लॉन्ड्रिंग पर बैन लगाया हुआ है, लेकिन खनानी के परिवार के सदस्यों की कई संपत्तियाँ मनी लॉन्ड्रिंग के पैसों से ही दुबई में खरीदी गई हैं। इस परिवार के 3 लोगों पर अमेरिका बैन लगा चुका है। इसी तरह से हामिद मुख्तार नाम का डॉक्टर भी दुबई में प्रॉपर्टियों का मालिक है, जिसपर अमेरिका ने बैन लगा रखा है। उस पर मानव तस्करी नेटवर्क चलाने का आरोप है।

यूएई में भारतीयों के पास ज्यादा संपत्ति, लेकिन भारतीय अधिकतर बिजनेसमैन हैं, तो पाकिस्तानियों में अपराधी और सरकारी कर्मचारियों के साथ ही नेताओं-आर्मी अफसरों का गठजोड़ है।

इस रिपोर्ट में जोर देकर कहा गया है कि पाकिस्तान के अमीर वर्ग ने काफी सारा धन दुबई भेजा हुआ है, जिससे पाकिस्तान में आर्थिक असमानता बढ़ी है। डाटा से पता चला है कि दुबई में संपत्तियाँ खरीदने में भारतीय दुनिया के किसी भी देश से सबसे आगे हैं। दुबई में भारतीयों के नाम 35 हजार से ज्यादा संपत्तियाँ हैं, जिनकी कीमत 17 बिलियन अमेरिकी डॉलर है। हालाँकि इस लिस्ट में शामिल सभी भारतीयों के नाम असली हैं और मालिक भी असली हैं। लेकिन पाकिस्तान के जिन लोगों ने यूएई में संपत्तियाँ खरीदी हैं, वो नेता हैं, सेना से जुड़े हैं या आपराधिक कार्यों में लिप्त हैं, यानी कि सारा पैसा काला धन है।

वैसे, यूएई में संपत्ति रखने वाले भारतीयों में नीरव मोदी जैसे व्यक्ति का भी नाम है, जो अभी लंदन की जेल में बंद है। उसके पास 13,41,900 अमेरिकी डॉलर की कीमत वाले तीन ऑफिस हैं, जो गोल्ड टॉवर में हैं। वहीं, खालिस्तानी आतंकी जममीत हकीमजादा के पास गार्डन होम्स फ्रोंड में 81.75 लाख अमेरिकी डॉलर से ज्यादा कीमत का विला है। चंदन की तस्करी करने वाले शाहुल हमीद दाऊद के नाम पर भी यूएई में प्रॉपर्टी है।

गरीबी, अराजकता और घोर अन्याय

दुबई फाइल्स में पाकिस्तानी नागरिकों द्वारा यूएई में भारी निवेश पाकिस्तान की खस्ताहाल व्यवस्था को दिखाता है। एक तरफ नेताओं, सैन्य अधिकारियों ने पाकिस्तान के धन को यूएई में भेजकर अपने लिए संपत्तियाँ इकट्ठी कर शाही जिंदगी जी रहे हैं, तो दूसरी ओर पाकिस्तान की आम जनता गरीबी, भोजन की कमी और भयंकर महँगाई की मार झेल रही है। बलूचिस्तान से लेकर पीओके में हो रहे विरोध प्रदर्शन दिखाते हैं, कि कैसे पाकिस्तान अपने नागरिकों की जरूरतों को पूरा कर पाने में विफल साबित हो रहा है। देश चलाने के लिए हुक्मरान दुनिया के दूसरे देशों में भीख माँग रहे हैं और कर्ज माँग रहे हैं, तो पाकिस्तान के गिने चुने लोग अरबों की दौलत विदेशों में इन्वेस्ट करके ऐश कर रहे हैं।

चाबहार पर प्रतिबंधों की धमकी दे रहा था अमेरिका, जयशंकर ने धो डाला: ईरानी बंदरगाह भारत के हाथ में आने के बाद बदला था स्टैंड

भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने ईरान के चाबहार बंदरगाह के भारत द्वारा विकास पर अमेरिका के प्रतिबंधों की धमकी को लेकर जवाब दिया है। विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा है कि ईरान का यह बंदरगाह सबके हित में है और हम यह बात उन तक पहुँचाएंगे और समझाएँगे।

विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा, “मैंने इस विषय में कुछ बयान देखे थे। साल में यह बात लोगों तक पहुँचाने और समझाने की जरूरत है कि यह बंदरगाह सबके हित में है। लोगों को इसे एकदम आशंकित होकर नहीं देखना चाहिए।” विदेश मंत्री जयशंकर ने इसको लेकर पुराने अमेरिकी निर्णयों का हवाला भी दिया।

उन्होंने कहा, “उन्होंने पूर्व में भी ऐसा (प्रतिबंध लगाना) नहीं किया है। अगर आप अमेरिका का पुराना रवैया इस मामले में देखें, तो अमेरिका भी चाबहार के विकास को सराहता रहा है।” इससे पहले विदेश मंत्री जयशंकर ने बताया कि भारत का चाबहार से लंबा जुड़ाव रहा है।

विदेश मंत्री जयशंकर का बयान अमेरिकी विदेश मंत्रालय की टिप्पणी के बाद आया है। अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने भारत के चाबहार बंदरगाह विकसित करने को लेकर कहा था कि कोई भी देश या कम्पनी जो कि ईरान के साथ व्यापारिक सौदे कर रहा है, उसे इस बात की जानकारी होनी चाहिए कि उन पर प्रतिबन्ध लग सकते हैं।

अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने कहा था कि उसे चाबहार बंदरगाह को लेकर ईरान और भारत के बीच समझौते की रिपोर्ट को देखा है। अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने कहा था कि वह भारतीय विदेश मंत्रालय का चाबहार समेत ईरान से रिश्तों को लेकर पक्ष देखेंगे। अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने कहा कि उसके द्वारा ईरान पर लगाए गए प्रतिबन्ध जारी रहेंगे।

गौरतलब है कि भारत और ईरान ने सोमवार (13 मई, 2024) को ईरान के चाबहार बंदरगाह को विकसित करने और प्रबंध करने को लेकर समझौता किया था। भारत एक सरकारी कम्पनी के जरिए ईरान के इस बंदरगाह को अगले 10 वर्षों तक चलाएगा। भारत इस बंदरगाह में पहले ही 85 मिलियन डॉलर (लगभग ₹709 करोड़) के निवेश करने की घोषणा कर चुका है।

हालिया समझौते में भारत ने कहा है कि वह इस बंदरगाह के विकास के लिए 120 मिलियन डॉलर (लगभग ₹1000 करोड़) का निवेश करेगा। भारत ने इसके लिए सस्ता कर्ज देने की घोषणा भी की है। यह बंदरगाह पाकिस्तान को दरकिनार कर भारत को अफगानिस्तान और मध्य एशिया से जोड़ता है।

इस समझौते को लेकर अमेरिका की प्रतिबंधों की धमकी नई बात है। 2021 से पहले जब अमेरिका के हित अफगानिस्तान से जुड़े हुए थे, तब वह इस बंदरगाह के विकास का समर्थन करता था। अमेरिका ने इसको लेकर भारत को प्रतिबंधों से छूट दी थी।

अमेरिका ने इस बंदरगाह से जुड़ी रेलवे लाइन को भी प्रतिबंधों से छूट देने की बात कही थी। ईरान पर यह अमेरिकी प्रतिबंध उसके परमाणु बम बनाने को लेकर लगाए गए हैं। अमेरिका, ईरान पर आरोप लगाता रहा है कि वह परमाणु बम बना रहा है और इसको लेकर प्रतिबन्ध लगाए हैं।

2021 में अमेरिका अफगानिस्तान से बाहर निकल गया था। अब उसके अफगानिस्तान में हित नहीं है। ऐसे में वह चाबहार पर अपनी भाषा में परिवर्तन कर रहा है। हालाँकि, अभी अमेरिका ने इस बात को लेकर कोई घोषणा नहीं की है कि भारत पर चाबहार के लिए प्रतिबन्ध लगाएगा या नहीं।

भारत, चीन के बढ़ते प्रभाव के कारण अमेरिका का महत्वपूर्ण सहयोगी है और अमेरिका पूर्व में भी भारत को कई बार ऐसी ही छूट दे चुका है। अमेरिका ने अपने NATO सहयोगी तुर्की पर रूस से S-400 मिसाइल सिस्टम खरीदने के लिए CAATSA प्रतिबन्ध जड़ दिए थे जबकि भारत को इससे छूट दे दी थी।

ऐसा ही अमेरिका ने भारत के रूस से कच्चा तेल खरीदने को लेकर किया था। ऐसे में चाबहार को लेकर अमेरिका, भारत पर कदम उठाएगा, इसकी संभावनाएँ कम है।

जिस प्रदर्शन में लगे ‘भारत की बर्बादी’ के नारे उसे गर्लफ्रेंड ने बताया ‘कविता पाठ’, सुनते रहे समदीश भाटिया: बॉयफ्रेंड की करतूत को कोर्ट बता चुका है ‘आतंकवाद’

दिल्ली दंगा के मामले में JNU का छात्र नेता रहा उमर खालिद फ़िलहाल जेल में है। वहीं उसकी गर्लफ्रेंड बनोज्योत्स्ना लाहिरी ने समदीश भाटिया को लगभग एक घंटे का इंटरव्यू दिया है। उन्होंने कहा कि 2016 में उनका Ph.D पूरा हुआ था। उन्होंने कहा कि उस दौरान मौत की सज़ा के खिलाफ एक प्रदर्शन किया गया, जिसमें ‘कश्मीर में मानवाधिकार उल्लंघन’ की बात की गई। बकौल बनोज्योत्स्ना लाहिरी, ये JNU बस एक सामान्य दिन था, जहाँ हर छात्र किसी न किसी रूप में राजनीति करता है।

उन्होंने इस इंटरव्यू में आगे कहा कि अचानक से ‘Zee News’ का कैमरा उन्हें दिखा, फिर उनलोगों ने सोचा कि आज ये मीडिया वाले क्यों आ गए हैं क्योंकि JNU में तो रोज ऐसे-ऐसे कार्यक्रम होते हैं। बनोज्योत्स्ना लाहिरी ने कहा कि माइक घुसा-घुसा कर देश विरोधी नारे लगने की बात की गई, कल को पूरी मीडिया और पूरी दुनिया इसकी बात करने लगी। उन्होंने कहा कि तब देश के गृह मंत्री रहे राजनाथ सिंह ने कड़ी कार्रवाई की बात की, फिर राजद्रोह की FIR दर्ज की गई।

बनोज्योत्स्ना लाहिरी का कहना है कि ये सब सुन कर उनलोगों को कॉमेडी लग रही थी, क्योंकि सेडिशन का चार्ज तब लगता है जब कोई भड़काऊ बयान दे और हिंसा हो लेकिन कोई हिंसा तो हुई ही नहीं थी। क्या बनोज्योत्स्ना लाहिरी ये कहना चाहती हैं कि पुलिस-प्रशासन को हिंसा होने तक इंतज़ार करना चाहिए? अगर कोई भारत विरोधी बयान दे तो हिंसा होने का इंतज़ार करना चाहिए, वरना वो व्यक्ति निर्दोष माना जाएगा और उस पर कोई कार्रवाई न हो?

असल में 2016 में 9 फरवरी को इनलोगों ने जो प्रदर्शन किया था, उसके बैनर की शुरुआत ही ब्राह्मणों को गाली देकर की गई थी। उसमें स्पष्ट लिखा था कि ये विरोध प्रदर्शन ‘अफजल गुरु और मकबूल भट्ट की न्यायिक हत्या’ के विरोध में है। ये प्रदर्शन सरकार नहीं, सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ था। अफजल गुरु कौन था? 2002 में संसद भवन पर आतंकी हमले का मास्टरमाइंड। मकबूल भट्ट कौन था? पाकिस्तान की शह पर जम्मू कश्मीर में कई आतंकी हमलों को अंजाम देने वाला। लेकिन, बनोज्योत्स्ना लाहिरी कहती हैं कि वो तो ‘कविता पाठ’ था।

JNU में ‘कल्चरल इवनिंग’ के नाम पर इन दोनों के समर्थन में प्रदर्शन हुआ था, जिसे बनोज्योत्स्ना लाहिरी आज ‘सामान्य सा प्रदर्शन’ बता रही हैं। इस कार्यक्रम में ‘कश्मीर की आज़ादी तक जंग रहेगी’ के नारे लगे और उमर खाली की गर्लफ्रेंड के लिए ये ‘जस्ट अनदर डे’ था। क्या कश्मीर गुलाम है? जम्मू कश्मीर भारत का अखंड हिस्सा है और इसके एक भाग पर पाकिस्तान का जबरन कब्ज़ा है और वहाँ पाकिस्तान के खिलाफ जम कर विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं।

क्या भारत ने कश्मीर को गुलाम बना रखा है? अगर नहीं, तो ये आज़ादी के नारे क्यों? ‘तुम कितने अफजल मारोगे, हर घर से अफजल निकलेगा’ और ‘भारत की बर्बादी तक जंग रहेगी’ के नारे भी लगे थे। जिस देश में आप रहते हैं और जिस देश के वासियों के टैक्स के पैसे से पढ़ते हैं, उसी देश को बर्बाद करने की साजिश सेडिशन नहीं तो और क्या है? बनोज्योत्स्ना लाहिरी के लिए इस पर कार्रवाई ‘कॉमेडी’ है। हर घर से आतंकी निकलने की बात करना क्या है? इसकी अनुमति क्यों दी जाए?

बड़ी बात ये है कि समदीश भाटिया ने इस दौरान बनोज्योत्स्ना लाहिरी को रोकने की कोई कोशिश नहीं की। समदीश भाटिया ने दक्षिणपंथियों को रिझाने के लिए एकाध वीडियो बनाए और फिर अब वो उमर खालिद के एजेंडे को आगे बढ़ा रहे हैं। इसी तरह एक वीडियो में उन्होंने कहा था, “मैं भाजपा थोड़े हूँ जो चोरी करूँगा।” क्या भाजपा कार्यकर्ता होना चोर होना है? ऐसे यूट्यूबरों को कमाई के अलावा कुछ नहीं सुझता। उन्हें इसके लिए देश विरोधी एजेंडा भी चलाना हो तो वो चलाएँगे।

उमर खालिद पर आरोप है कि उसने दिल्ली दंगों की साजिश रचने में भूमिका निभाई। CAA विरोध के नाम पर हुए विरोध प्रदर्शन को हिंसा में परिवर्तित करने में इसका हाथ था। दिल्ली उच्च न्यायालय के जस्टिस रजनीश भटनागर ने उसकी जमानत अर्जी ख़ारिज करते हुए लिखा था कि उमर खालिद ने जो किया वो ‘आतंकवाद’ है। उस पर UAPA के तहत कार्रवाई की जा रही है। उसके भाषणों पर जजों ने आपत्ति जताते हुए कहा था कि इससे बड़ी ‘खूनी क्रांति’ आ सकती थी।