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अपनी उम्र के बराबर भी रैली नहीं कर पाए हैं राहुल गाँधी, 73 के मोदी 60 दिन में कर चुके हैं 119 रैली-16 रोड शो… यूँ ही हैट्रिक की दहलीज पर नहीं खड़ी है BJP

देश में लोकसभा चुनाव समापन की और हैं। सात में से चार चरणों पर मतदान हो चुका है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सत्ता में लौटने के लिए लगातार मेहनत कर रहे हैं। जनसभाओं से लेकर रोडशो और पार्टी कार्यक्रमों से लेकर मीडिया से बातचीत तक पीएम मोदी सुबह से शाम तक इस बात को पक्का करने में जुटे हैं कि उनकी पार्टी की सत्ता बरकरार रहे। पीएम मोदी के सामने विपक्ष है, जिसने इस बार खुद को INDI गठबंधन का नाम दिया है।

इस गठबंधन की सबसे बड़ी पार्टी कॉन्ग्रेस के नेता राहुल गाँधी इस चुनाव में उतनी मेहनत नहीं कर रहे जितना कोई पार्टी सत्ता में आने के लिए करती है। राहुल गाँधी को लगातार प्रधानमंत्री मोदी के सामने खड़ा किया जाता है, उनकी पीएम से तुलना की जाती है। लेकिन अगर लोकसभा चुनाव 2024 को ही देख लिया जाए, तो साफ़ हो जाता है कि जहाँ पीएम मोदी लगातार मेहनत कर रहे हैं, वहीं राहुल गाँधी इससे बचते आए हैं। वह ना ही उस स्तर का चुनाव अभियान चला रहे हैं और ना ही मीडिया के बीच दिख रहे हैं।

देश की दो सबसे बड़ी पार्टियों की आज जो राजनीतिक स्थिति है, वह क्यों है, अगर हमें इसे समझना हो, तो हमें वर्तमान आम चुनावों में दोनों नेताओं द्वारा की गई मेहनत पर नजर डालनी होगी। इससे साफ़ हो जाएगा कि देश के ग्रैंड ओल्ड पार्टी कॉन्ग्रेस, विपक्ष तक का तमगा हासिल करने में सफल क्यों नहीं हो रही और 1980 में बनी भाजपा 2 सीटों से बढ़कर केंद्र में लगातार 10 वर्ष सत्ता और देश के 18 राज्यों में सत्ता में क्यों है।

पीएम मोदी: 100 से ज्यादा रैली, रोड शो और पार्टी सम्बन्धित बैठकें

2024 के लोकसभा चुनावों की घोषणा देश के चुनाव आयोग ने 16 मार्च, 2024 को की थी। वैसे तो प्रधानमंत्री हमेशा ही राजनीति को गंभीर मान कर पार्टी को बढ़ाने में जुटे रहते हैं लेकिन चुनावों से एक दिन पहले ही उन्होंने धुआंधार चुनाव अभियान चालू कर दिया था, जो कि अब तक जारी है। 15 मार्च, 2024 से लेकर 14 मई, 2024 तक देखा जाए तो पीएम मोदी अब तक 119 जनसभाओं को संबोधित कर चुके हैं। उन्होंने एक-एक दिन में 4-5 जनसभाओं को संबोधित किया है और पार्टी के लिए वोट माँगे हैं।

प्रधानमंत्री मोदी की यह जनसभाएँ जम्मू कश्मीर के उधमपुर से लेकर देश के अंतिम छोर कन्याकुमारी तक में हुई हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने इस दौरान अपनी पार्टी भाजपा समेत गठबंधन के दलों के लिए भी वोट माँगे हैं। इन जनसभाओं के दौरान पीएम मोदी ने अपनी सरकार की उपलब्धियों को बताने के अलावा कॉन्ग्रेस और विपक्षी दलों की नीतियों और इरादों के प्रति आगाह किया है। पीएम मोदी की इन जनसभाओं में भारी भीड़ भी देखने को मिली है। पीएम मोदी का विशेष फोकस इस बार दक्षिण भारत पर भी रहा है।

जनसभाओं के अलावा पीएम मोदी ने 15 मार्च के बाद 16 शहरों में रोड शो किए हैं। लोकसभा प्रत्याशियों के साथ किए गए इन रोड शो में उन्होंने जनता से भाजपा को वोट देने की अपील की है। इन रोड शो में भी भारी भीड़ उमड़ी है। जनता ने इस दौरान पीएम मोदी पर फूल बरसाए हैं। इसके अलावा पीएम मोदी ने 9 पार्टी सम्बन्धित कार्यक्रमों में भी हिस्सा लिया है। इस दौरान दौरान उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ चुनावी रणनीति पर बात की है और पार्टी का मेनिफेस्टो सामने रखा है।

मीडिया को 30 से अधिक इंटरव्यू, छोटे से लेकर बड़े अखबार तक बातचीत

देश का विपक्ष और विशेष कर लिबरल वामपंथी यह आरोप लगाते रहे हैं कि 2014 में सत्ता में आने के बाद से पीएम मोदी मीडिया से दूरी रखते आए हैं। ऐसा कोई आरोप वह राहुल गाँधी पर नहीं लगाते जबकि कॉन्ग्रेस पार्टी के कई बड़े नेताओं ने इसी आधार पर पार्टी छोड़ी कि उसने उनके नेता बातचीत नहीं करते। पीएम मोदी ने 2024 लोकसभा चुनावों में भी मीडिया से काफी बातचीत की है। उन्होंने राष्ट्रीय से लेकर क्षेत्रीय और यहाँ तक कि स्थानीय अखबारों, समाचार चैनल को इंटरव्यू दिए हैं।

पीएम मोदी ने देश की बड़ी समाचार एजेंसी ANI से लेकर गुजरात के स्थानीय समाचार पत्र ‘संदेश’ तक से बातचीत की है। यही नहीं पीएम मोदी ने इस दौरान देश की विविधता का ध्यान रखते हुए अपने पहले इंटरव्यू को तमिल चैनल थांती टीवी को दिया था। पीएम मोदी अब तक कुल 35 इंटरव्यू दे चुके हैं।

पीएम मोदी देश के उत्तर पूर्व, बांग्ला, मलयालम, अंग्रेजी और अधिकांश बड़े प्रकाशनों से बातचीत कर चुके हैं। इनमें उन्होंने कई मुद्दों पर अपनी बात खुल कर रखी है। पीएम मोदी ने हाल ही में पटना रोड शो के दौरान मीडिया से फिर बातचीत की थी जहाँ उनसे कई प्रश्न पूछे गए। चूंकि देश का लिबरल गैंग राहुल गाँधी को पीएम मोदी से राहुल गाँधी की तुलना करता है, इसलिए दोनों की चुनावी मेहनत की भी तुलना होनी चाहिए।

राहुल गाँधी: 50 से भी कम जनसभाएँ, 1 रोड शो, मीडिया पर सन्नाटा

राहुल गाँधी ने लोकसभा चुनाव की घोषणा के दौरान भारत जोड़ो न्याय यात्रा निकाल रहे थे। उनकी यात्रा का समापन 17 मार्च, 2024 को मुम्बई में हुआ था। तब उन्होंने यहाँ एक रैली की थी। 17 मार्च, 2024 के बाद से 14 मई, 2024 तक राहुल गाँधी ने पूरे देश में केवल 48 रैली की हैं। उन्होंने इस दौरान लंबा समय अपने ही लोकसभा क्षेत्र वायनाड में गुजारा है।

राहुल गाँधी ने अपनी पार्टी के किसी प्रत्याशी के लिए रोड शो नहीं किया है। उन्होंने इस पूरे चुनाव अभियान के दौरान केवल 1 रोड शो किया है, जो कि वायनाड में था, जहाँ से वह खुद प्रत्याशी हैं। रायबरेली में भी उनके चुनाव प्रचार का जिम्मा बहन प्रियंका गाँधी ने उठाया हुआ है। उन्होंने चुनाव अभियान के दौरान पार्टी के कार्यकर्ताओं के लिए विशेष रूप से आयोजित किसी भी कार्यक्रम में हिस्सा नहीं लिया है। इस दौरान वह मीडिया से भी दूर रहे हैं।

राहुल गाँधी लगातार आरोप लगाते हैं कि प्रधानमंत्री मोदी मीडिया से दूरी रखते हैं। इस नैरेटिव को कॉन्ग्रेस ने खूब खाद -पानी दिया है। जबकि सच्चाई इससे कोसों दूर है। राहुल गाँधी ने वर्तमान लोकसभा चुनावों की घोषणा के बाद से किसी भी राष्ट्रीय मीडिया संस्थान से बातचीत नहीं की है। उन्होंने ना ही किसी टीवी चैनल को इंटरव्यू दिया है। यहाँ तक कि उनके लिए दिन रात राशन-पानी लेकर जुटे रहने वाले यूट्यूबर पत्रकारों को भी उन्होंने इंटरव्यू देने लायक नहीं समझा है।

गंभीर राजनेता नहीं राहुल गाँधी

राहुल गाँधी का चुनावों के समय भी मेहनत से बचना दिखाता है कि वह गंभीर राजनेता नहीं हैं। वह राजनीति को पार्ट टाइम का काम समझते हैं। इसके उलट प्रधानमंत्री चुनाव ना होने के समय भी लगातार देश के अलग अलग हिस्सों में जाते हैं। पार्टी को मजबूत करने के कामों में हिस्सा लेते हैं। यह भी देखा गया है कि राहुल गाँधी तमाम महत्वपूर्ण मौकों पर विदेश चले जाते हैं, वह संसद में भी अहम् मुद्दों पर बहस के लिए उपलब्ध नहीं रहते।

राहुल गाँधी की संसद में 51% उपस्थित रही है जो कि देश के औसत 79% से कम है। उनकी संसद की प्रमुख बहसों में भागीदारी मात्र 8 की रही है जबकि इसका भी देश का औसत 46.7 है। विपक्ष का काम जनता के हित से जुड़े सवाल सरकार से पूछना होता है। संसद इसके लिए सबसे अच्छा माध्यम होती है। राहुल गाँधी ने एक सांसद के तौर पर मात्र 99 प्रश्न पूछे हैं, यह भी राष्ट्रीय औसत 210 से कहीं कम है।

विदेश दौरे करने, मीडिया से भागने और संसद में उपलब्ध ना रहने के बाद भी राहुल गाँधी आरोप लगाते हैं कि उनको मीडिया पीएम मोदी से कम जगह देता है। जबकि कोई भी सामान्य पाठक समझ सकता है कि यदि प्रधानमंत्री मोदी एक दिन में पाँच-पाँच रैली संबोधित करते हैं और राहुल गाँधी इस दौरान विदेश का दौरा करते हैं तो स्वाभाविक रूप पीएम को अधिक सुर्ख़ियों में जगह मिलेगी। मीडिया इसी सिद्धांत पर काम करता है, ऐसे में उनका यह आरोप भी झूठ साबित होता है।

फेक वीडियो मामले में मनीष कश्यप कोर्ट से बरी, सबूत पेश नहीं कर पाई पुलिस: बोले यूट्यूबर- पहली बार किसी के खिलाफ 4 मामलों में चला था स्पीडी ट्रायल

मशहूर यूट्यूबर मनीष कश्यप को फेक वीडियो मामले में बड़ी राहत मिली है। उन्हें आर्थिक अपराध शाखा द्वारा दर्ज 4 केस में बाइज्जत रिहा कर दिया गया। मनीष कश्यप के साथ ही प्रशांत कुमार को भी राहत मिली है। ये केस तमिल नाडु फेक वीडियो से जुड़ा था।

इस केस के बारे में मनीष कश्यप ने खुद जानकारी दी है। मनीष कश्यप ने एक्स पर लिखा है, “तामिलनाडु प्रकरण में आर्थिक अपराध इकाई बिहार ने मेरे ऊपर चार केस किया था और उन चारों केस में मैं बाइज़्जत बरी हो गया।। कमाल की बात यह है कि पहली बार बिहार में किसी एक व्यक्ति के चार केस स्पीड ट्रायल में डाले गए और उन चारों केसों में वो व्यक्ति बाइज़्जत बरी हो गया।। मुझे अब किसी से बदला नहीं लेना है बल्कि बदलाव करना है ताकि अगली बार कोई बेवजह झूठे केस में फँसकर जेल ना जाए।”

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पटना सिविल कोर्ट ने सबूतों के अभाव में मनीष कश्यप समेत अन्य दो लोगों को फर्जी वीडियो मामले में बरी कर दिया है। बताया जा रहा है कि इस केस में 9 लोगों के बयान भी दर्ज किए गए थे, लेकिन पटना सिविल कोर्ट ने मनीष को दोषी नहीं पाया।

बता दें कि मनीष कश्यप पर फर्जी वीडियो को लेकर बिहार पुलिस की आर्थिक अपराध इकाई ने मामला दर्ज किया था। वो कथित वायरल वीडियो तमिलनाडु में बिहार के मजदूरों के साथ मारपीट का था, जो फर्जी पाया गया था। इसी वीडियो को बनाने के बाद मनीष कश्यप बुरी तरह से फँस गए थे। वीडियो के वायरल होने के बाद तमिलनाडु पुलिस ने इसे भ्रामक बताते हुए उनके खिलाफ मामला दर्ज किया था, साथ ही बिहार में भी आर्थिक अपराध शाखा ने केस दर्ज किए थे।

इस मामले में जब पुलिस की ओर से दबिश दी गई तो मनीष कश्यप अंडरग्राउंड हो गए थे। हालाँकि, जब बेतिया पुलिस ने मनीष कश्यप के घर कुर्की शुरू की तो उन्होंने स्थानीय थाने में सरेंडर कर दिया था। नौ महीनों तक जेल में रहे मनीष कश्यप इसके बाद ईओयू ने केस को अपने कब्जे में लेते हुए मनीष कश्यप से पूछताछ की और उन्हें जेल भेज दिया था। इसके बाद तमिलनाडु पुलिस की टीम पटना पहुंची और 30 मार्च 2023 को ट्रांजिट रिमांड पर मनीष को अपने साथ ले गई। इस मामले में करीब नौ महीनों तक मनीष कश्यप जेल में रहे।

साध्वी को दिखाए पोर्न, कर्नल को किया नंगा, मेजर को दी बेटी से रेप की धमकी… क्या हिंदू होना गुनाह?

हिंदू बहुसंख्यक देश में जो हिंदूविरोधी माहौल आज आपको देखने को मिलता है वो एक रात का या कुछ सालों का काम नहीं है। दशकों से कॉन्ग्रेस की सरकार ने इसकी परिपाटी तैयार की है। कॉन्ग्रेस ही वो पार्टी है जिनके सत्ता में रहने के दौरान ‘हिंदू आतंकवाद’ शब्द अस्तित्व में आया और उन्होंने इसे सही साबित करने के लिए निर्दोषों पर अत्याचार की हदें पार कर दीं।

आपको अगर इस बात को और गहराई से समझना है तो साल 2008 में हुआ मालेगाँव ब्लास्ट के बारे में जानना होगा। इस केस को पढ़कर आपको पता चलेगा कि कैसे कॉन्ग्रेस की प्राथमिकताओं में मुस्लिमों को खुश रखना हमेशा सबसे टॉप पर था, वहीं हिंदू उनके लिए कुछ भी नहीं थे।

बात साल 29 सितंबर 2008 की है। मुंबई के मालेगाँव में ब्लास्ट हुआ था। धमाके में 6 लोगों की मौत हुई थी और 100 से ज्यादा लोग घायल हुए थे। तब, केंद्र में यूपीए की मनमोहन सरकार थी। चूँकि ये घटना एक मस्जिद के पास घटी थी इसलिए कॉन्ग्रेस ने इसे खूब भुनाया और जन्म दिया ‘हिंदू आतंकवाद’ की थ्योरी को। उन्होंने जगह-जगह इस शब्द का प्रयोग शुरू किया। सवाल उठे, तो अपनी थ्योरी सही साबित करने के लिए वह ऐसे लोगों को पकड़कर प्रताड़नाएँ देने पर आमादा हो गए, जिनसे उनकी थ्योरी को बल मिले। हालाँकि बाद में उनकी इस कुत्सित प्रयास की पोल दुनिया के आगे खुद उनके ही काल के ब्यूरोक्रेट आरवीएस मणि ने खोली थी

आरवीएस मणि एक पूर्व नौकरशाह हैं जिन्होंने कॉन्ग्रेस के दौर में गृह मंत्रालय में एक अंडर-सेक्रेटरी के रूप में काम किया था। अपनी पुस्तक ‘हिंदू टेरर’ में, मणि ने संपूर्ण मिलीभगत का वर्णन किया हुआ है। उन्होंने बताया है कि किन-किन खिलाड़ियों ने ‘भगवा आतंक’ की कहानी गढ़ने के लिए मिलीभगत की और कैसे, कई वरिष्ठ कॉन्ग्रेसी नेता से लेकर कई अन्य लोग इस साजिश में शामिल थे।

वहीं, कोर्ट में भी गवाहों ने यह जानकारी दी थी उनके ऊपर हिंदू नेताओं को फँसाने के लिए कहा गया था। ये जानकारी चौंकाने वाली थी। लेकिन जब तक ये सच सामने आया तब तक कॉन्ग्रेस के तुष्टिकरण का शिकार ‘निर्दोष’ हो चुके थे। इनमें एक देश की सेना के कर्नल पुरोहित थे, मेजर रमेश उपाध्याय थे और भगवाधारी साध्वी प्रज्ञा थीं। तीनों का इस्तेमाल कॉन्ग्रेस ने ये फैलाने के लिए किया कि उनकी हिंदू आतंकवाद की थ्योरी एकदम सही है।

आज के समय में जहाँ सेना और संत-समाज से जुड़े लोगों को सम्मान देने का काम होता है, उनके लिए पाकिस्तान तक से देश की ठन जाती है, उसी वर्ग को कॉन्ग्रेस की यूपीए सरकार में कथिततौर पर राज्य (महाराष्ट्र) एटीएस ने असहनीय पीड़ा दी थी। इन्हें शारीरिक, सामाजिक और मानसिक रूप से ऐसी ठेस पहुँचाई थी कि अगर आज इनकी कहानी सुन ली जाए तो आत्मा सिहर जाएगी। जैसे,

  • साध्वी प्रज्ञा की बात करें तो वह कई बार इस मामले में अपना दर्द साझा करके भावुक हो चुकी हैं। वह वो दर्दनाक समय को नहीं भुला पातीं जब जेल के भीतर उन्हें तरह-तरह से प्रताड़ित करने का काम हुआ था। उनके अनुसार, इस केस में हिरासत में लिए जाने के बाद पुरुष कैदियों के साथ रखकर पोर्न वीडियो दिखाए जाते थे और भद्दे सवाल होते थे।

    इसके अलावा कथिततौर पर 4-5 पुलिसकर्मी लगाकर उन्हें मारा जाता था। उनकी पिटाई चमड़े की बेल्ट से होती थी। उनको बिन किसी सबूत के भगवा आतंकी कहा जाता था। उनपर इतने अत्याचार होते थे कि उनकी हालत खुद के पाँव पर चलने लायक नहीं बची थी। उनकी रीढ़ की हड्डी में समस्या आ गई थी और उन्हें वेंटिलेटर पर जाना पड़ा था। इसके अलावा साध्वी प्रज्ञा ने ये भी बताया था कि इन्हीं सबके कारण उन्हें कैंसर और न्यूरो की बीमारी हो गई थी और उनके शरीर में पस पड़ गया था।
  • वहीं मेजर रमेश उपाध्याय ने भी अपने बारे में बताया था कि मालेगाँव ब्लास्ट में कॉन्ग्रेस की यूपीए सरकार ने उनको फँसाया था। हिरासत में लिए जाने के बाद एटीएस उनके साथ बर्बरता करती थी। उन्हें धमकी दी जाती थी कि पत्नी को नंगा घुमाया जाएगा, बेटी का रेप किया जाएगा, बेटे का जबड़ा तोड़ दिया जाएगा। इसके अलावा उनके मकान मालिक तक को उनके खिलाफ भड़काया गया- आतंकी को क्यों रख रहे हों। जिसके कारण उनके परिवार के सिर से छत छिन गई। उनकी शादीशुदा बेटियों के घरों पर दबिश दी गई । हर वो हालात पैदा कर दिए गए कि वो कैसे भी वो जुर्म कबूलें जो उन्होंने किया ही नहीं। प्रशासन उन्हें इस कदर इस मामले में दोषी बनाना चाहता था कि मेजर का नार्को टेस्ट भी कराया। हालाँकि जब उसमें उन्हें क्लीनचिट मिल गई तो ये बर्दाश्त नहीं हुआ और रिपोर्ट को दबा दिया गया।
  • इसी तरह प्रताड़ना की कहानी भारतीय सेना के लेफ्टिनेंट कर्नल श्रीकांत प्रसाद पुरोहित की है। रिपोर्ट्स के अनुसार, मालेगाँव ब्लास्ट केस में राज्य (महाराष्ट्र) एटीएस ने कथिततौर पर कर्नल पुरोहित को फँसाने के बहुत प्रयास किए। ये जानते हुए कि जिस समय ये ब्लास्ट हुआ था, उस वक्त वो अपने मिशन पर थे उन्हें हिरासत में लिया गया और देशद्रोही घोषित करने की कोशिश हुई। बाद में उनपर दबाव बनाया गया कि वो पूछताछ में आरएसएस और वीएचपी नेताओं का जबरन नाम लें ताकि हिंदू आतंकवाद की थ्योरी सही साबित हो सके। जब उन्होंने ऐसा नहीं किया तो उनका पैर तोड़ा गया, उन्हें अवैध रूप से हिरासत में रखा, उन्हें नंगा करके मारा गया, उनके प्राइवेट पार्ट पर हमला किया गया, उन्हें बाल से नोचा और खींचा गया।

… और ये सब इन तीनों के साथ क्यों हुआ… क्योंकि ये तीनों कॉन्ग्रेस की भगवा आतंकवाद की थ्योरी को सही साबित करने के लिए उचित चेहरे थे। 2008 में जहाँ एक तरफ मुस्लिमों को रैलियों के दौरान ये बताकर खुश किया जा रहा था कि मालेगाँव ब्लास्ट को इस्लामी आतंकियों ने अंजाम नहीं दिया है बल्कि हिंदू आतंकवादियों ने दिया है। वहीं दूसरी तरफ, हिंदू नेताओं को पूरे मामले में फँसाने की साजिश चल रही थी।

खुद गवाहों ने इस बात को स्वीकारा था कि उन पर योगी आदित्यनाथ समेत अन्य हिंदू नेताओं का नाम लेने का दबाव था। इसके अलावा जो प्रताड़नाएँ मेजर और कर्नल को दी गई थीं उसका मकसद भी यही था कि ये अपने बयानों में हिंदू नेताओं का नाम ले… लेकिन ये सब होता कैसे? कुछ दिन यूपीए शासन में ये नैरेटिव गढ़ा-बढ़ा। मगर फिर हकीकत सामने आने लगी। केस एनआईए के पास गया, चार्जशीट दाखिल हुई, गवाहों की पेशी हुई और हकीकत खुलती गई। ये भी सामने आया कि ये पूरा नैरेटिव सिर्फ जनता का ध्यान CWG घोटाले से हटाने के लिए किया था। इसी बीच ब्यूरोक्रेट आरवीएस मणि की किताब जनता के बीच आई, जिनसे कॉन्ग्रेस के हिंदूविरोधी चेहरे को शीशे जैसा साफ कर दिया।

मथुरा-काशी के लिए चाहिए 400 पार सीटें: दिल्ली में बोले असम के CM, कहा- बनेंगे भव्य मंदिर, PoK में भी दिखने लगा है तिरंगा

असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने बड़ा दावा किया है। हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा कि लोकसभा में एनडीए के 400 पार सीटों के लक्ष्य को प्राप्त करने का मतलब है कि अयोध्या के बाद अब काशी और मथुरा में भव्य मंदिरों का निर्माण किया जाएगा। हिमंता बिस्वा सरमा पूर्वी दिल्ली लोकसभा सीट पर बीजेपी प्रत्याशी हर्ष मल्होत्रा के लिए लक्ष्मी नगर में चुनावी रैली को संबोधित कर रहे थे, जब उन्होंने ये बातें कही।

हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा कि लोकसभा चुनाव में जब भाजपा 400 के पार जाएगी तो मथुरा में कृष्ण जन्मभूमि पर भव्य मंदिर बनेगा और काशी में ज्ञानवापी मस्जिद की जगह पर बाबा विश्‍वनाथ का भव्य मंदिर बनेगा। उन्होंने कहा कि मुगलों ने जो-जो कारनामे किए थे, उसमें से अभी बहुत कुछ साफ करना बाकी है। असम के मुख्यमंत्री ने कहा कि भाजपा ने अयोध्या में भव्य राम मंदिर बनाने का अपना वादा पूरा कर दिया है, इसलिए इस बार जीत भी बड़ी होनी चाहिए।

इसके साथ ही उन्होंने कहा है कि पीओक में भी भारत का झंडा दिख रहा है, जबकि कॉन्ग्रेस के शासन में अपने जम्मू-कश्मीर में भी पाकिस्तानी झंडा दिखता था। हिमंता ने कहा कि संसद में पहले कश्मीर की चर्चा नहीं होती थी, लेकिन अब पीओके में भी लोग भारत का झंडा थामे दिख रहे हैं।

दिल्ली के विकास को लेकर आम आदमी पार्टी को घेरा

हिमंता बिस्वा सरमा ने दिल्ली में विकास को लेकर आम आदमी पार्टी को घेरा। हिमंता ने कहा, “पहले दिल्ली आने पर लालकिला और कुतुबमीनार देखने के लिए बोला जाता था और अब मोहल्ला क्लीनिक देखने के लिए कहा जाता है, लेकिन आज जब मोहल्ला क्लीनिक देखने गया तो आश्चर्य हुआ कि अगर दिल्ली की पहचान मोहल्ला क्लीनिक है तो फिर देश का सम्मान कहाँ है? असम में हर जिले में मेडिकल कॉलेज बन रहा है और दिल्ली में जब भाजपा की सरकार आएगी तो मोहल्ला क्लीनिक की बजाय यहां सुपर स्पेशलिस्ट हॉस्पिटल और मेडिकल कॉलेज बनाएँगे।

कॉन्ग्रेस की गोद में बैठ गए केजरीवाल

लक्ष्मी नगर में जनसभा के बाद हिमंता ने मीडिया से भी बातचीत की। उन्होंने कहा, “कभी कॉन्ग्रेस के साथ हाथ नहीं मिलाने की बात कहने वाले केजरीवाल अब कॉन्ग्रेस की गोद मे जाकर बैठ गए हैं और कॉन्ग्रेस के साथ इलू-इलू कर रहे हैं।” केजरीवाल पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि परिवारवाद का विरोध करने वाले अरविंद केजरीवाल अब अपनी पत्‍नी को आगे बढ़ाने में लगे हुए हैं। केजरीवाल खुद आलीशान बँगले में रहते हैं। उन्होंने कहा कि केजरीवाल जो भी बोलते हैं, ठीक उसके उल्टा करते हैं और अब वह मानसिक संतुलन खो चुके हैं और जब तक वह ठीक होंगे तब तक दोबारा जेल जाने का समय हो जाएगा।

स्वाति मालीवाल को क्यों पीटा गया? उपराष्ट्रपति से कार्रवाई की माँग

इस दौरान हिमंता बिस्वा सरमा ने राज्यसभा सांसद स्वाति मालीवाल के साथ हुई मार-पीट के लिए केजरीवाल को घेरा। उन्होंने कहा कि राज्यसभा के सभापति एवं उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ जी को स्वतः संज्ञान लेकर दिल्ली के सीएम के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि सुनीता केजरीवाल को भी यह बताना चाहिए कि स्वाति मालीवाल की पिटाई क्यों की गई

‘आप जो कलावा पहनते हैं, वह स्क्रीन पर नहीं दिखना चाहिए’: देश में चल रहा था UPA का शासन, जानिए पत्रकारों को कैसे हड़काते थे दूरदर्शन के अफसर

देश में UPA शासनकाल के दौरान सरकारी चैनल डीडी न्यूज पर पत्रकारों को कलावा पहन कर आने से रोका जाता था। इसके लिए एक बड़े पत्रकार अशोक श्रीवास्तव को विशेष रूप से निर्देश दिया गया था। दूरदर्शन पर राम के उन भजनों को दिखाने से रोका जाता था जिनमें अयोध्या को राम जन्मभूमि बताया गया हो। इसके अलावा कॉन्ग्रेस राज में प्रधानमंत्री पद के प्रत्याशी नरेन्द्र मोदी का इंटरव्यू भी काट छाँट कर चलाया गया था।

डीडी न्यूज के पत्रकार और एंकर अशोक श्रीवास्तव ने कलावा पहनने से रोकने की बात का खुलासा किया है। अशोक श्रीवास्तव ने बताया, “जब UPA की सरकार थी, तब मुझे एक दिन आला अफसरों ने बुलाया। मैं अपनी पहचान के तौर पर कलावा बाँध कर रखता हूँ, UPA सरकार के दौरान कहा गया कि आप जो कलावा पहनते हैं, वह स्क्रीन पर नहीं दिखना चाहिए।” अशोक श्रीवास्तव ने बताया कि यह घटना 2006 के आसपास की होगी।

अशोक श्रीवास्तव के इस खुलासे से पहले भी कॉन्ग्रेस राज के दौरान दूरदर्शन को हिन्दू प्रतीकों को ना दिखाने का आरोप भी लग चुका है। इस बारे में लोक गायिका मालिनी अवस्थी ने एक समाचार शो में खुलासा किया था। उन्होंने बताया था कि उन्हें 2005 में दूरदर्शन पर एक धार्मिक भजन गाने से रोक दिया गया था क्योंकि इसमें कहा गया था कि भगवान राम का जन्म अयोध्या में हुआ था।

उन्होंने इसको लेकर बताया था, ”एक समय था जब मुझे सार्वजनिक प्रसारक दूरदर्शन के लिए गाने के लिए नियुक्त किया गया था। मैंने उन्हें भगवान राम के जन्म पर एक भजन गाने की पेशकश की थी। शुरू में, वे इसके लिए सहमत हुए लेकिन जब मैंने गाना शुरू किया, तो इसमें एक श्लोक शामिल था जिसमें अयोध्या में भगवान राम के जन्म का उल्लेख था। अचानक, वे आए और मुझसे कहा कि यह ऑन एयर नहीं हो सकता और मुझसे दूसरा भजन गाने के लिए कहा।”

कॉन्ग्रेस पर दूरदर्शन को अपने राजनीतिक एजेंडे से चलाने का भी आरोप है। 2014 में प्रधानमंत्री प्रत्याशी नरेन्द्र मोदी के एक इंटरव्यू को दूरदर्शन पर काट छाँट कर चलाया गया था। उस समय पूरे 56 मिनट का इंटरव्यू महज 28 मिनट में, बिना किसी को जानकारी दिए प्रसारित किया गया था। इंटरव्यू से जो हिस्सा काटा गया वहाँ मोदी ने प्रियंका गाँधी और अहमद पटेल पर अपनी सॉफ्ट बातों को रखा था। लेकिन मोदी का यह कॉर्नर दिखाना शायद सिरकार कें नेतृत्व में दूरदर्शन को नामंजूर था।

कॉन्ग्रेस ने 2004 में सत्ता में आते ही बड़ी सँख्या में पत्रकारों को नौकरी से निकाला था। दूरदर्शन से निकाले जाने वालों में पत्रकार दीपक चौरसिया भी थे। चौरिसया ने हाल ही में एक शो में इस बात का में खुलासा किया था। उन्होंने यह बात कॉन्ग्रेस के ओबीसी आरक्षण को लेकर की जाने वाली राजनीति को लेकर कही थी।

उन्होंने बताया, “आरक्षण पर कॉन्ग्रेस पार्टी ने जितना फेक नैरेटिव फैलाया है, ऐसा कभी नहीं हुआ। मैं सच बोलूँ तो आधे लोगों को पता नहीं होगा। मैंने राहुल गाँधी का एक वीडियो देखा, जिसमें वो OBC पत्रकार ढूँढ रहे हैं। मैं हूँ न, मैं सामने बैठा हूँ। 2004 में राहुल गाँधी और उनकी पार्टी ने मुझे दूरदर्शन से निकाल कर बाहर कर दिया था। मैं DD का हेड था। मैं ओबीसी पत्रकार था, तब उनको नहीं दिखाई दिया।”

UK में 66 साल की भारतीय मूल की महिला अनिता मुखी की चाकुओं से गोद कर हत्या, मौके पर ही हो गई मौत : 22 साल का जलाल गिरफ्तार

इंग्लैंड की राजधानी लंदन में चाकूबाजी की एक और वारदात हुई है। उत्तर-पश्चिम लंदन में एक बस स्टॉप पर इंतजार कर रही 66 वर्षीय भारतीय मूल की महिला अनिता मुखी की हत्या कर दी गई। इस वारदात को एडग्वेयर इलाके में 9 मई 2024 को अंजाम दिया गया था। पुलिस ने इस मामले में 22 साल के जलाल डेबेला को गिरफ्तार किया है और उस पर फर्स्ट डिग्री मर्डर की धाराओं में केस दर्ज किया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अनिता मुखी इंग्लैंड के राष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवा (एनएचएस) में पार्ट टाइमर के तौर पर मेडिकल सेक्रेटरी के पद पर काम करती थी। वो बर्न्ट ओक ब्रॉडवे बस स्टॉप पर थी, जब 22 साल के जलाल डेबेला ने उनकी हत्या की। इस वारदात से जुड़ी रिपोर्ट्स में बताया गया है कि डेबेला ने पहले उनके साथ बहस की और फिर उनका गला दबा कर मारने की कोशिश की, लेकिन जब वो असफल रहा, तो उसने चाकू निकाल लिया और उनके सीने-पेट में कई वार किए। अनिता मुखी को मारने के बाद डेबेला मौके से फरार हो गया था। मौके पर पहुँचे चिकित्साकर्मियों ने अनिता मुखी की जान बचाने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने दम तोड़ दिया।

अनिता मुखी की हत्या के बाद जलाल को पुलिस ने थोड़ी दूर से गिरफ्तार कर लिया था। लंदन पुलिस ने बताया है कि जलाल को शनिवार (11 मई 2024) को लंदन के ओल्ड बेली कोर्ट में पेश किया गया, जहाँ से उसे हिरासत में भेज दिया गया। उसे मंगलवार (14 मई 2024) को दोबारा कोर्ट में पेश किया गया और हत्या की धारा के साथ ही घातक हथियार की धाराएँ लगाई गई, जिसके बाद उसे जेल भेज दिया गया। अब इस मामले में अगली सुनवाई अगस्त में होगी, जिसमें उस पर आरोप तय किए जाएँगे।

लंदन और यूके में चाकूबाजों का कहर, हजारों मामले

बता दें कि कुछ समय पहले पीए न्यूज एजेंसी ने यूके और लंदन में चाकू बाजी के आँकड़े जारी किए थे, जो चौंकाने वाले थे। साल 2023 में अकेले लंदन मेट्रोपॉलिटर पुलिस ने 14,577 चाकूबाजी के मामले दर्ज किए। साल 2022 में ये आंकड़े 12,119 तक थे, वहीं कोरोना काल से पहले साल मार्च 2020 तक 14,680 मामले दर्ज हुए थे। पूरे देश की बात करें तो इंग्लैंड और वेल्स में साल 2023 में चाकू से जुड़े अपराधों की संख्या 49,489 रही, जिसमें अकेले लंदन में 29% मामले दर्ज किए गए।

मंदिर में भंडारा खाने गई थी 4 साल की दिव्यांग हिन्दू बच्ची, समीर ने बनाया हवस का शिकार: रेप के बाद खेत में अधमरा छोड़ा, कुकर्म में दूसरी बार गिरफ्तार

उत्तर प्रदेश के गंगोह जिले में एक नाबालिग हिन्दू बच्ची से रेप का मामला सामने आया है। बच्ची की उम्र 4 साल है जिसका साजिद के बेटे समीर ने गन्ने के खेत में ले जाकर दुष्कर्म किया। आरोपित ने पीड़िता को अधमरी हालत में छोड़ा था। बच्ची गाँव में एक मंदिर के भंडारे में प्रसाद खाने गई थी। पीड़िता दिव्यांग है जो बोल नहीं पाती। साजिद को गिरफ्तार करके जेल भेज दिया गया है। घटना रविवार (12 मई 2024) शाम की है। साजिद पर पहले भी नाबालिग बच्चे से कुकर्म की FIR दर्ज है। वह 3 महीने पहले ही जमानत पर छूट कर जेल से बाहर आया था।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, घटना सहारनपुर जिले के थानाक्षेत्र गंगोह की है। यहाँ रविवार को एक गाँव के मंदिर में भंडारा चल रहा था। गाँव के तमाम लोग मंदिर में प्रसाद खाने पहुँचे थे। इन्हीं लोगों में एक 4 साल की हिन्दू बच्ची भी थी। साजिद ने भंडारे से बच्ची का अपहरण किया और उसे गन्ने के खेत में ले गया। खेत में समीर ने बच्चे से रेप किया। बच्ची की तबियत काफी बिगड़ गई, जिससे वो अचेत हो गई। पीड़िता को मरा समझ कर समीर वहाँ से भाग निकला।

इस बीच बच्ची को आसपास न पाकर परिजनों ने उसकी खोजबीन शुरू की। तलाशी के दौरान बच्ची गंभीर अवस्था में खेत में मिली। आनन-फानन में पीड़िता को अस्पताल में भर्ती करवाया गया। मामला अलग-अलग समुदाय का होने की वजह से गाँव में पुलिस के तमाम सीनियर अधिकारी पहुँच गए। कुछ ही देर में समीर को खोज निकाला गया। पूछताछ में समीर ने अपना गुनाह कबूल कर लिया। पुलिस ने 13 मई (सोमवार) को समीर को गिरफ्तार कर के जेल भेज दिया। उस पर IPC की धारा 363 और 376 के साथ पॉक्सो एक्ट के तहत कार्रवाई की गई है। पीड़िता की काउंसिलिंग और इलाज जारी है।

दिव्यांग है पीड़िता, पिता कर रहे थे साधुओं की सेवा

जिस बच्ची को समीर ने अपनी हवस का शिकार बनाया है वो दिव्यांग है। पीड़िता के पिता के मुताबिक वह बोल नहीं पाती। घटना के समय बच्ची के पिता मंदिर में मौजूद साधुओं को भोजन बाँट रहे थे। जब साजिद पीड़िता को अपने साथ अपहरण करके ले जा रहा था तब रास्ते में कुछ लोगों ने उसे टोंका भी था। इस पर उसने जवाब दिया था कि बच्ची को नींद आ रही है और वो सुलाने के लिए उसके घर छोड़ने जा रहा। चश्मदीदों ने समीर के इस झूठ पर यकीन कर लिया था।

पहले भी नाबालिग बच्चे से कर चुका है कुकर्म

जब सहारनपुर पुलिस ने आरोपित समीर का इतिहास खंगाला तो उस पर पहले से ही एक नाबालिग बच्चे से कुकर्म का केस दर्ज पाया गया। यह कुकर्म उसने 15 दिसंबर 2021 को अपने ही गाँव के एक 5 वर्षीय बच्चे से किया था। तब वह नाबालिग बच्चे को बहला-फुसला कर खंडहर में ले गया था, जहाँ उसने बच्चे से कुकर्म किया। बच्चे की चीखें सुन कर आसपास के लोग जमा हुए थे। खुद को घिरता देख कर तब समीर बच्चे के सिर पर ईंट मार कर भाग निकला था। नाबालिग को अगले दिन होश आया था।

तौबा करके जीता था ग्रामीणों का भरोसा

नाबालिग से कुकर्म के आरोपित समीर को तब पुलिस ने IPC की धारा 323, 377 और 506 के अलावा पॉक्सो एक्ट में जेल भेजा था। ऑपइंडिया के पास शिकायत कॉपी मौजूद है। लगभग 2 साल जेल में रहकर समीर 3 महीने पहले ही जमानत पर बाहर आया था। बताया जा रहा है कि जेल से निकलने के बाद समीर ने तौबा किया था और ग्रामीणों को भविष्य में ठीक से रहने का भरोसा दिया था। कुछ दिन वह गाँव में शराफत का चोला ओढ़ कर भी रहा था। हालाँकि महज 3 महीने के अंदर ही समीर ने एक बार फिर से अपना विकृत रूप दिखा दिया।

PM मोदी ने नहीं ब्लर की CM योगी की तस्वीर, कॉन्ग्रेस की ‘मंथरा मौसी’ ने फैलाया था झूठ: जानें कैसे खुला प्रोपगेंडे का सच

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार (14 मई 2024) को काशी विश्वनाथ मंदिर में पूजा अर्चना की। इस पूजा के दौरान उनके साथ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी मौजूद रहे। पूजा की कुछ क्लिप समाचार एजेंसी एएनआई ने अपने हैंडल पर शेयर की, बाद में कई मीडिया चैनलों ने इस क्लिप को अपने चैनल पर चलाया।

अब संभवत: कॉपी राइट से बचने के लिए इन्हीं मीडिया चैनलों में से एक चैनल ने एएनआई के लोगो को ब्लर करके पीएम मोदी की फोटो दिखाने का प्रयास किया। ये संयोग कहिए कि जिस जगह लोगो ब्लर किया गया वहाँ कुछ देर के लिए सीएम योगी का चेहरा भी ब्लर हो गया। मंशा शायद चैनल की गलत नहीं थी, लेकिन कॉन्ग्रेस की प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने इसे देखते ही इसका कुछ हिस्सा काटा और उसे एक्स पर साझा करके पीएम मोदी पर निशाना साधा।

मंगलवार (14 मई) को कॉन्ग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने अपने X हैंडल पर 6 सेकेंड के इस वीडियो को शेयर किया है। इस वीडियो में PM मोदी काशी विश्वनाथ परिसर में माथे पर टीका लगवाते दिख रहे हैं। पीछे चौखट के पास भगवा वस्त्र में सीएम योगी बैठे दिख रहे हैं जिन्हें सुप्रिया श्रीनेत ने महंत बतया है। 6 सेकेंड के इस वीडियो में पीछे सीएम योगी का चेहरा ब्लर नजर आ रहा है। यह क्लिप ‘हिंदी खबर’ नाम के न्यूज़ चैनल की है। कैप्शन के तौर पर सुप्रिया ने लिखा, “एक महंत को चौखट पर बिठा कर उनका चेहरा भी ब्लर कर दिया गया। फ़ोटोजीवी की आत्ममुग्धता का कोई अंत नहीं।”

हिंदी खबर ने खोली सुप्रिया के झूठ की पोल

सुप्रिया श्रीनेत द्वारा शेयर किए गए इस वीडियो की असलियत हिंदी खबर ने अपने आधिकारिक X हैंडल से बताई है। चैनल ने सुप्रिया को कॉन्ग्रेस की कंफ्यूज़्ड मंथरा मौसी कह कर सम्बोधित किया है। चैनल ने सुप्रिया श्रीनेत को फेक न्यूज़ फैलाते हुए मानसिक बीमार बताया और काशी विश्वनाथ से उनके जल्द स्वस्थ होने की कामना की है। चैनल ने अपने ट्वीट के साथ कई स्क्रीनशॉट भी लगाए हैं जिसमें पीछे बैठे CM योगी आदित्यनाथ का चेहरा साफ दिख रहा है।

हिंदी खबर ने आगे लिखा, “संदर्भित क्लिप ANI न्यूज़ एजेन्सी के काफी बड़े आकार के Logo के साथ थी। ‘हिन्दी ख़बर’ डिजिटल में कार्यरत एक ट्रेनी पत्रकार के द्वारा उस Logo को ब्लर किया गया था, ना कि योगी जी के चेहरे को (हालाँकि ऐसा करने की ज़रूरत नहीं थी) कुल 4 मिनट 40 सेकेन्ड्स अवधि वाली इस क्लिप में कई बार, बारंबार योगी जी को मोदी जी के साथ पूजा-अर्चना करते दिखाया भी गया लेकिन आपने शुरूआत की सिर्फ 5 सेकेन्ड की क्लिप काट कर X पर चढ़ा दी और तुष्टिकरण की परिपाटी को कायम रखते हुए, अपनी विषैली राजनीतिक तृष्णा की तुष्टि कर ली। खैर… ‘हिन्दी ख़बर’ चैनल का मुफ्त में प्रचार-प्रसार करने के लिए धन्यवाद मंथरा मौसी। जय जय सियाराम।”

उद्धव ठाकरे वाली शिवसेना की रैली में लहराया इस्लामी झंडा: BJP नेता ने कहा- ये तो दाऊद का स्मारक भी बनवा देंगे; लोग बोले- बाला साहेब की पार्टी का क्या कर दिया

महाराष्ट्र के मुंबई का बता कर एक वीडियो मंगलवार (14 मई 2024) से सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वीडियो में दावा किया जा रहा है कि शिवसेना (उद्धव ग्रुप) के सदस्यों ने चेम्बूर इलाके की एक रैली में इस्लामी झंडा फहराया था। हरे रंग के इस झंडे में चाँद-तारे देखे जा सकते हैं। भीड़ में नमाज़ी टोपी पहने कुछ मुस्लिम युवक भी दिख रहे हैं। नेटिजन्स के अलावा भाजपा नेता नीतेश राणे ने शिवसेना उद्धव गुट की आलोचना की है।

महाराष्ट्र भाजपा के नेता नितेश राणे ने 1:26 मिनट के इस वीडियो को अपने X हैंडल पर शेयर किया है। वीडियो चेम्बूर इलाके के एक ओवरब्रिज के नीचे बनाया गया है। इस वीडियो में एक भीड़ आतिशबाजी कर रही है जिसकी वजह से सड़क पर ट्रैफिक जाम होने की स्थिति बन गई है। आसपास नमाजी टोपी पहने कुछ लोग दिख रहे हैं। इसी भीड़ के बीच में कुछ लोगों द्वारा चाँद-तारा छपा एक हरे रंग का बड़ा सा इस्लामी झंडा लहराया जा रहा है। झंडे को क्रेन पर लटकाया गया है। इसके नीचे एक माला भी झूल रही है।

भाजपा नेता नितेश राणे ने इस वीडियो को शेयर करते हुए उद्धव ठाकरे की निंदा की है। उन्होंने मराठी भाषा में कैप्शन में लिखा, “यूबीटी की रैली में लहराया पाकिस्तान का झंडा! अब आगे क्या? पीएफआई, सिमी और अल कायदा के लोग मातोश्री (उद्धव ठाकरे आवास) में बिरयानी खाएँगे ? जल्द ही मुंबई में दाऊद का स्मारक भी बनाया जाएगा। और वह (उद्धव) दावा करते हैं कि वो बाला साहेब ठाकरे के ‘असली बेटे’ हैं”।

नितेश राणे के अलावा कई अन्य यूजर में भी इस वीडियो को अलग-अलग तर्क देकर शेयर किया है। उमा माहेश्वरी श्रीधर ने लिखा, “हताशा देखो। उद्धव और संजय राऊत ने शिवसेना को क्या बना दिया।” उमा ने लोगों से उचित जवाब देने की उम्मीद जताई है।

मेघ अपडेट नाम के हैंडल ने भी यह वीडियो शेयर किया है। X प्लेटफॉर्म पर इस हैंडल ने कैप्शन में लिखा कि बाला साहेब ठाकरे ने इस दिन की कल्पना भी नहीं की रही होगी। हैंडल ने इस हरकत को शिवसेना का पतन बताया है।

@eternalroute नाम के X हैंडल कर्वज्ञ ने प्रशासन से वीडियो में दिख रहे लोगों पर कार्रवाई की माँग की है। भीड़ में शामिल लोगों पर अराजकता फैलाने का आरोप लगाते हुए कहा है कि इस हरकत से साम्पद्रायिक सौहार्द बिगड़ सकता है।

इन सभी के अलावा कई अन्य यूजर्स ने अपने-अपने शब्दों में उद्धव ठाकरे और उनके शिवसेना गुट की आलोचना की है।

चित्र- विभिन्न X प्लेटफॉर्म पर आए कमेंट

यहाँ ये ध्यान रखना होगा कि कुछ नेटिजन्स ने झंडे को पाकिस्तानी बताया है जो कि सही नहीं है। रैली में लहराया गया झंडा इस्लामी है। पाकिस्तानी और इस इस्लामी झंडे में सफेद पट्टी का एक मामूली सा फर्क है।

भाजपा से हाथ नहीं मिलाएँगे उद्धव

गौरतलब है कि इसी सप्ताह उद्धव ठाकरे ने ऐलान किया है कि वो भविष्य में नरेंद्र मोदी और भाजपा से कभी हाथ नहीं मिलाएँगे। भाजपा को विश्वासघाती बताते हुए उद्धव ने दावा किया है कि लोकसभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी हारेगी। उद्धव ने नरेंद्र मोदी और अमित शाह पर महाराष्ट्र के प्रति द्वेष भाव रखने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र के लिए आने वाली परियोजनाओं को दूसरे प्रदेशों में ट्रांसफर कर दिया जाता है।

बकौल उद्धव इन चुनावों के बाद मोदी की तानाशाही वाला राज खत्म हो जाएगा। उन्होंने गारंटी देते हुए यह भी कहा कि INDI गठबंधन देश में नई सरकार बनाएगा जिस से महाराष्ट्र को पुराना गौरव हासिल होगा। बताते चलें कि 48 लोकसभा सीटों वाले महाराष्ट्र में अंतिम चरण का चुनाव 20 मई को है। इसमें मुंबई, कल्याण, पालघर और ठाणे आदि इलाकों में वोट डाले जाएँगे।

स्वाति मालीवाल की जान को खतरा… CM के घर हमला साजिश के तहत हुआ: पूर्व पति नवीन जयहिंद का दावा, AAP सांसद संजय सिंह को कहा- बंद करो एक्टिंग

स्वाति मालीवाल पर हुए हमले को लेकर AAP सांसद संजय सिंह ने जो प्रतिक्रिया दी है उसे स्वाति के पू्र्व पति नवीन जिंदर ने एक्टिंग करार दिया है। उन्होंने अपने पोस्ट में दावा किया है कि स्वाति पर जो हमला हुआ उसके बारे में संजय सिंह को जानकारी दी थी। उन्होंने ये भी दावा किया कि स्वाति की जान को खतरा है।

अपने हैंडल पर उन्होंने वीडियो शेयर करते हुए कहा, “क्यों एक्टिंग कर रहा सांसद संजय सिंह, तुम्हें पता है ना सारी घटना का, तुम्हें पता था पहले ही क्या होना है। हमला साज़िश से हुआ है। स्वाति की जान को ख़तरा है, तुम्हें पता है ना। अब तुम उसको डरा धमका के चुप करा रहे हो तुम्हें पता है। आत्मा बची हुई है या वो भी बेच खाइ शर्म करो सांसद।”

नवीन जयहिंद वीडियो में जहाँ सांसद संजय सिंह को एक्टिंग बंद करने को कहते हैं। वहीं स्वाति मालीवाल से कहते हैं कि उन्हें अपनी लड़ाई लड़नी चाहिए। उन्होंने लाखों महिलाओं की आवाज उठाई है। अब उन्हें खुद के लिए भी आवाज उठानी चाहिए।

बता दें कि नवीन जयहिंद की यह वीडियो संजय सिंह की उस प्रतिक्रिया पर आई है जहाँ उन्होंने कहा था कि स्वाति के साथ हुई घटना पर AAP उनके साथ है और आरोपित पर कार्रवाई होगी। उन्होंने इस घटना को बेहद निंदनीय घटना बताते हुए कहा कि सुबह अरविंद केजरीवाल के आवास पर स्वाति मालीवाल मिलने के लिए पहुँची थीं और ड्राइंग रूम में इंतज़ार कर रही थीं, इस बीच विभव कुमार वहाँ पर पहुँचे और उन्होंने स्वाति मालीवाल के साथ बहुत बदतमीजी की, अभद्रता की।

संजय सिंह ने वीडियो में बताया कि इसके बाद स्वाति मालीवाल ने 112 नंबर पर फोन कॉल कर के पुलिस को इस पूरे मामले की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि इस घटना की जितनी निंदा की जाए कम है। संजय सिंह का ये भी कहना है कि AAP संयोजक अरविंद केजरीवाल ने इस घटना को संज्ञान में लिया है और सख्त कार्रवाई का निर्देश दिया है। संजय सिंह ने स्वाति मालीवाल को देश-समाज के लिए बड़ा कार्य करने वाली महिला बताते हुए कहा कि वो पार्टी की वरिष्ठ नेताओं में से एक हैं, हम सब उनके साथ हैं।