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‘मेरी फूल जैसी बेटी को छलनी कर दिया’: 10वीं की छात्रा से गैंगरेप, 500 का नोट देकर कहा- जब-जहाँ बुलाएँ चली आना; एक्शन में बुलडोजर

मध्य प्रदेश के शहडोल से एक नाबालिग लड़की के साथ गैंगरेप का मामला सामने आया है। छात्रा का वीडियो भी बना लिया और उसे धमकाया गया। इस मामले में पुलिस ने पाँच आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया है। छात्रा को आरोपितों ने वीडियो वायरल करने की धमकी भी दी।

जानकारी के अनुसार, 10वीं में पढ़ने वाली एक 15 वर्षीय छात्रा सोमवार (6 मई, 2024) की शाम को अपनी स्कूटी से फिजिक्स और केमिस्ट्री की कोचिंग से लौट रही थी। उसने बताया कि उसे शाम लगभग साढ़े सात बजे उसका एक दोस्त मिल गया जिसके साथ वह घूमने चली गई।

लड़की ने बताया कि वह एक जगह पर खड़ी होकर अपने दोस्त से बात कर रही थी। इतने में ही पाँच लोग वहाँ पर आ गए और लड़की तथा उसके दोस्त से पूछताछ करनी चालू कर दी। उन्होंने दोनों को धमकाना चालू कर दिया। इसके बाद वह लड़की के साथ बदतमीजी करने लगे।

लड़की ने बताया कि काफी देर परेशान करने के बाद पाँचों उसे पास की झाड़ियों में ले गए। यहाँ उसके साथ बारी बारी से रेप किया। उन्होंने उसके दोस्त के साथ भी मारपीट की। इसके बाद उन्होंने लड़की का उसके दोस्त के साथ वीडियो भी बना लिया और धमकाया कि अगर वह किसी को रेप के बारे में बताएगी तो वह यह वीडियो वायरल कर देंगे।

लड़की से गैंगरेप करने वालों ने उसे काफी मारा पीटा। उससे उसके पिता का नम्बर पूछा और उसे धमकाते रहे। उन्होंने नाबालिग से पैसे भी माँगे। दैनिक भास्कर की ग्राउंड रिपोर्ट में बताया गया कि इन आरोपितों ने नाबालिग से रेप और मारपीट के बाद उसे ₹500 दिए और कहा कि जब जहाँ बुलाएँ वहां चली आना।

पीड़िता की माँ ने बताया है कि इस घटना का नाबालिग पर बहुत प्रतिकूल प्रभाव हुआ है। वह सदमे में है और बार बार बेहोश हो जाती है। वह लगातार रोती भी है। माँ ने कहा है कि बलात्कारियों ने उनकी फूल जैसी बेटी को छलनी कर दिया।

लड़की ने अपने घर आकर सारी घटना बताई। इसके बाद लड़की के परिजनों ने शहडोल पुलिस के पास मामला दर्ज करवाया। नाबालिग से रेप करने वाले पाँचों आरोपित घटना को अंजाम देने के बाद फरार हो गए थे। पुलिस ने इनकी तलाश में इनाम भी घोषित किया था।

शहडोल पुलिस ने इस मामले में शाहिल कुरैशी, मोहम्मद शमीम और अफजल अंसारी, एश्वर्या निधि गुप्ता और कैलाश पनिका को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने इन सभी के खिलाफ POCSO समेत कई धाराओं में मामला दर्ज कर लिया है।

पुलिस ने नाबालिग से गैंगरेप के आरोपितों के घरों पर बुलडोजर कार्रवाई भी की है। पुलिस ने बुलडोजर से नाबालिग से रेप के आरोपितों के घर ढहा दिए। पुलिस मामले की आगे जाँच करके अब कार्रवाई कर रही है।

‘कपड़े नहीं, मेरे शरीर पर थी सिर्फ ब्रा… हम मिशनरी पोजिशन में थे’: पोर्न स्टार कहा- ट्रंप के पेंटहाउस में सबकुछ मर्जी से हुआ, ‘सेक्स स्टोरी’ से जज भी स्तब्ध

अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ‘हुश मनी केस’ में गवाही देते हुए पॉर्न स्टार स्टॉर्मी डेनियल्स ने कोर्ट में ऐसी बातें कहीं कि जज को खुद उन्हें बीच में रोकना पड़ा। इस दौरान डेनियल्स ने ट्रंप और उनके बीच बने शारीरिक संबंधों के बारे में खुलकर पूरे कोर्ट को बताया।

डेनियल्स गवाही के दौरान यहाँ तक पहुँच गईं कि उन्होंने ये बताने से भी गुरेज नहीं किया कि ट्रंप ने सेक्स के टाइम कॉन्डोम नहीं पहना था और वो दोनों मिशनरी पोजिशिन में थे। गवाही के समय डेनियल्स ने बताया कि 2006 में जब उनके और ट्रंप के बीच मुलाकात के बाद संबंध बने तब वो सिर्फ 27 की थीं और ट्रंप उनके पिता से भी बड़ी उम्र के थे।

उन्होंने कटघरे में खड़े होकर बताया कि दोनों के बीच सेक्स मनमर्जी से हुआ था और बहुत लाजवाब था। इसके बाद डेनियल्स ने पूरा चित्रण करके समझाया कि उस दिन क्या हुआ था।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, दोनों की मुलाकात साल 2006 में हुई थी। ट्रंप ने एक गोल्फ टूर्नामेंट की मेजबानी के दौरान अपने बॉडीगार्ड से कहकर उन्हें अपने पेंटहाउस में बुलाया था। बॉडीगार्ड ने स्टॉर्मी डेनियल्स से कहा था कि डोनाल्ड ट्रंप उनके साथ डिनर करना चाहते हैं। हालाँकि जब वो उनके पेंटहाउस में पहुँची, तो डोनाल्ड ट्रंप पायजामे में थे। इसका स्टॉर्मी डेनियल्स ने मजाक भी उड़ाया था।

डेनियल्स ने कोर्ट को बताया, “जब मैंने बाहर आने के लिए बाथरूम का दरवाजा खोला, तो मिस्टर ट्रम्प बेडरूम में आ गए थे। वो सिर्फ बरमूडा और टी-शर्ट में थे और बेड पर इंतजार कर रहे थे। मैं इससे चौंक भी गई थी, क्योंकि मैं सिर्फ डिनर के बारे में जानती थी।” स्टॉर्मी कहती हैं कि कोई अगर अंडरवियर उतारकर आपका बिस्तर पर इंतजार कर रहा है, तो जाहिर है कि उसकी मंशा क्या है।

इसके बाद डेनियल्स ने आगे बिस्तर पर दोनों ने क्या किया उसकी डिटेल देनी शुरू की। लेकिन इससे पहले स्टॉर्मी ने ये साफ किया कि उस दिन दोनों के बीच आपसी मर्जी से हुआ था और सब बहुत लाजवाब था। स्टॉर्मी ने बताया, “उस दिन मेरे शरीर पर कपड़े या जूते नहीं था। मुझे लगता है कि मैंने तब ब्रा पहनी थी और हम मिशनरी पोजिशन (सेक्स की एक पोजिशन जिसमें एक व्यक्ति दूसरे व्यक्ति के ऊपर होता है) में थे। उन्होंने कॉन्डोम भी नहीं पहना था।”

आगे स्टॉर्मी ने ट्रंप को दबंग भी करार दिया और कहा कि वो जब वो जा रही थी तो ट्रंप ने उन्हें हनीबंच कहा और जल्द मिलने का वादा किया।

इस दौरान ट्रम्प ने डेनियल्स की गवाही को बड़े ही ध्यान से सुना। जज जुआन मर्चेन ने बचाव पक्ष की बार-बार आपत्तियों के बाद डेनियल्स को “सिर्फ़ सवालों के जवाब देने” का आदेश दिया, जिनमें से कई को उन्होंने सही ठहराया। हालाँकि इस दौरान कोर्ट ने कहा कि बारीक-जानकारियों की कोई जरूरत नहीं है, जैसे कि कमरे में टाइल का रंग कैसा था।

बता दें कि डेनियल्स का असली नाम स्टेफ़नी क्लिफ़ोर्ड है। ट्रंप पर मामला इसलिए चल रहा है क्योंकि 2016 में चुनावों के वक्त उन्होंने डेनियल्स को करीबन 1.30 लाख डॉलर देकर इन संबंधों का खुलासा न करने के लिए चुप रहने को कहा था। ये पैसे ‘लीगल फीस’ के तौर पर खाते में दिखाए गए थे, जबकि ये पैसे उन्होंने स्टॉर्मी को मुँह बंद रखने के लिए अपने वकील के मार्फत ये पैसे दिए थे। अब ये केस इसलिए चल रहा है कि अगर डेनियल्स को पैसे मुँह बंद रखने के लिए दिए गए थे, तो ट्रंप के खिलाफ कार्रवाई होगी।

घर से कॉलेज के लिए निकली हिंदू लड़की, फरियाद ने ट्रेन के आगे फेंक दिया: दो हिस्सों में कटा शरीर, पीड़ित माँ पर भी चाकू से किया हमला

उत्तर प्रदेश के बरेली में एक मुस्लिम युवक ने एक हिन्दू लड़की को ट्रेन के आगे फेंक दिया, जिससे कटकर उसकी मौत हो गई। यह आरोप लड़की के परिजनों ने मुस्लिम युवक पर लगाया है। इस विषय में मामला दर्ज कर लिया गया है और आरोपित गिरफ्तार है।

जानकारी के अनुसार, बरेली के फतेहगंज पूर्वी की रहने वाली एक हिन्दू लड़की बुधवार (8 मई, 2024) को अपने घर से कॉलेज के लिए निकली थी। छात्र अपने कॉलेज में इम्प्रूवमेंट फॉर्म भरने जा रही थी। छात्रा की माँ ने अपनी शिकायत में बताया है कि उनकी बेटी को पास का ही रहने वाला फ़रियाद इसी दौरान रास्ते से ही अपनी बाइक पर बिठा ले गया।

फरियाद ने हिन्दू लड़की को कॉलेज छोड़ने को लेकर अपनी बाइक पर बिठाया था। हालाँकि, वह बाद में उसे कॉलेज ना ले जाकर पास कस्बे कटरा की तरफ ले गया। फरियाद जब हिन्दू बालिका को अपने साथ लेकर जा रहा था तो इसी दौरान उसके भाई ने देख लिया।

लड़की के भाई ने अपने घर पर इस विषय में सूचना दी। यह सूचना पाकर लड़की के परिजन उसको ढूंढते हुए पहुँचे। उन्होंने घटनास्थल पर पहुँच कर देखा कि फरियाद उनकी लड़की को ट्रेन लाइन की तरफ खींच कर ले जा रहा है। इस बीच उसे समझाने की भी कोशिश की गई। हालाँकि, वह नहीं माना।

लड़की के परिजनों ने आरोप लगाया है कि इसके बाद फरियाद ने लड़की को सामने से आ रही ट्रेन के आगे धक्का दे दिया। इससे लड़की की घटनास्थल पर ही मौत हो गई। यह घटना बहगुल नदी पर बने हुए पुल पर हुई। लड़की का शव नदी में जा गिरा।

इस बीच स्थानीय पुलिस को भी इस मामले में सूचना दी गई जिसने घटनास्थल से फरियाद को पकड़ लिया। मृतका के परिजनों ने आरोप लगाया है कि फरियाद ने उनके ऊपर भी हमला किया, लड़की की माँ पर धारदार चाकू से वार किया। छात्रा के शव का पोस्टमार्टम करवा दिया गया है और उसके अंतिम संस्कार की तैयारी हो रही है। फरियाद को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है और इस विषय में FIR भी दर्ज हो गई है। पुलिस मामले की जाँच कर रही है।

हिंदुओं को ’15 मिनट’ की धमकी देने वाले ’15 सेकेंड’ की दहाड़ से बौखलाए, माधवी लता के लिए हैदराबाद आईं नवनीत राणा, कहा- पता नहीं चलेगा ओवैसी कहाँ गए

हैदराबाद की BJP प्रत्याशी माधवी लता के समर्थन में 8 मई 2024 को महाराष्ट्र के अमरावती की सांसद नवनीत राणा ने जनसभा को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने हिंदुओं को ’15 मिनट’ की धमकी दिए जाने का ऐसा जवाब दिया कि AIMIM बौखला उठी। जिस पार्टी के नेता अकबरुद्दीन ओवैसी ने कभी कहा था कि ’15 मिनट के लिए पुलिस हटा दो’, उस पार्टी के नेता अब नैतिकता की बात करने लग गए हैं।

नवनीत राणा ने कहा, “एक छोटा भाई है, एक बड़ा भाई है…छोटा (अकबरुद्दीन ओवैसी) बोलता है कि पुलिस को 15 मिनट हटा दो तो हम दिखाएंगे की क्या कर सकता है। छोटे को मेरा कहना है कि तेरे को 15 मिनट लगेंगे और हमको सिर्फ 15 सेकेंड लगेंगे। 15 सेकेंड पुलिस को हटाया तो छोटे और बड़े (असदुद्दीन ओवैसी) को पता नहीं लगेगा कि कहाँ से आया और कहाँ से गया। सिर्फ 15 सेकेंड लगेंगे।”

राणा के इस बयान की वीडियो क्लिप जगह-जगह वायरल है। AIMIM के लोग इस बयान से काफी आहत कहे जा रहे हैं। वह इस बयान को लेकर राणा के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की माँग कर रहे हैं। इस मामले में पार्टी प्रवक्ता वारिस पठान ने कहा राणा का यह बयान आयोग के नियमों का उल्लंघन करता है क्योंकि इससे दो समुदायों के बीच तनाव हो सकता है।

आजतक की रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने कहा, अगर नवनीत जैसा भाषण वारिस पठान देते तो वो जेल की सलाखों के पीछे होते। अकबरुद्दीन ओवैसी ने 15 मिनट पुलिस हटा दो वाले बयान के बाद खुद सरेंडर किया था। वो 40-42 दिन जेल में रहे थे। दस साल उन्होंने अदालत में लड़ाई लड़ी और बरी हुए। चुनाव आयोग नवनीत राणा पर कब कार्रवाई करेगी और कब उन्हें जेल भेजेगी। आए दिन मुसलमानों के विरोध में बयान दिए जाते हैं लेकिन कोई कार्रवाई नहीं होती।

बता दें कि साल 13 में अकबरुद्दीन ओवैसी ने ’15 मिनट हटा लो पुलिस को’ वाला विवादित बयान दिया था। अपने भड़काऊ बयान में उन्होंने कहा था, “अगर 15 मिनट के लिए पुलिस हटा दी जाए तो हम (मुसलमान) 100 करोड़ (हिंदुओं) को खत्म कर देंगे।” इस भड़काऊ बयान को सुनने के बाद उनपर आईपीसी की धारा 120 बी और 153ए व अन्य धाराओं के तहत लंबा केस चला था। 2022 में उन्हें इस मामले में जाकर बरी किया गया था। बाद में उन्होंने जेल से निकलकर अपने ऊपर भड़काऊ बयानबाजी करने वाले आरोपों को खारिज करने की कोशिश की थी।

लड़की से बात करने पर वामपंथी गुंडों ने सिद्धार्थन को नंगा घुमाया, बेल्ट-तार से पीटा, मरने को किया मजबूर: केरल के छात्र की आत्महत्या मामले में CBI रिपोर्ट से खुलासा

केरल के एक मेडिकल कॉलेज में एक छात्र की प्रताड़ना के बाद आत्महत्या के मामले में CBI जाँच से नए खुलासे हुए हैं। CBI ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि सिद्धार्थन को उसके साथी छात्रों ने कई दिनों तक प्रताड़ित किया, नंगा घुमाया, मारा पीटा और खाने-पीने भी नहीं दिया। इसके बाद उसने आत्महत्या कर ली।

CBI ने इस संबंध में एर्नाकुलम के एक कोर्ट में 25 अप्रैल को अपनी जाँच रिपोर्ट पेश की है। इसमें बताया गया है कि वायनाड के एक मेडिकल कॉलेज में पढ़ने वाला सिद्धार्थन 15 फरवरी, 2024 को अपने घर जाने के लिए मेडिकल कॉलेज से बाहर स्टेशन के लिए निकल चुका था। इसके बाद उसे हॉस्टल में रहने वाले कुछ छात्रों ने फोन करके वापस आने पर मजबूर किया।

रिपोर्ट में बताया गया कि यह छात्र सिद्धार्थन से बदला लेना चाह रहे थे। इन्होने सिद्धार्थन पर एक लड़की से बदतमीजी का आरोप लगाया था। जब सिद्धार्थन यहाँ वापस आ गया तो उसे हॉस्टल के पीछे एक सूनसान पहाड़ी पर ले जाया गया और मारापीटा गया। यहाँ उसके साथ बर्बरता हुई। यहाँ उसके साथ दानिश, आदित्यन वी, सऊद और अल्ताफ ने ज्यादती की।

इसके बाद काशिनाथन नाम के एक सीनियर ने सिद्धार्थन को हॉस्टल बुलाया। यहाँ उसे एक कमरे में बंद कर दिया गया। इसके बाद कई छात्रों ने यहाँ उसे मारना पीटना चालू किया, उसे बेल्ट से मारा गया। उस पर मुक्के और लातें बरसाई गईं और यहाँ तक कि उसे तार से पीटा गया।

सिद्धार्थन को इसके बाद हॉस्टल के कॉरिडोर में ले जाया गया। उसे इस प्रताड़ना के दौरान नंगा भी किया गया और छात्रों के समूह के सामने बेईज्जत किया गया। उसे कुछ खाने-पीने को भी नहीं दिया गया। इसके बाद उसे हॉस्टल के ही एक कमरे में छोड़ दिया गया। यह प्रताड़ना का दौर 16 से 17 फरवरी तक चला।

इसके बाद 18 फरवरी को सिद्धार्थन का शव एक बाथरूम में लटका हुआ मिला। इस मामले में CBI ने कुल 19 छात्रों को आरोपी बनाया है। पहले इस मामले की जाँच राज्य पुलिस ही कर रही थी लेकिन फिर परिजनों की माँग पर इसे CBI को सौंप दिया गया था। सिद्धार्थन के पिता ने आरोप लगाया था कि उनके बेटे की हत्या की गई है और इस मामले में कम्युनिस्ट छात्र संगठन SFI के कुछ नेता भी शामिल हैं जिन पर राज्य सरकार कार्रवाई करने से बच रही थी।

CBI ने सिद्धार्थन की मौत का कारण पता करने के लिए उसके पोस्टमार्टम की रिपोर्ट दिल्ली के AIIMS भेजी हैं जहाँ डॉक्टरों का एक पैनल इस मामले पर अपनी राय देगा। CBI ने सिद्धार्थन मामले में आत्महत्या के लिए प्रेरित करने, किसी को बंधक बना कर रखने, षड्यंत्र रचने और धमकाने समेत कई धाराओं में मामला दर्ज किया है।

गौरतलब है कि 18 फरवरी को केरल के वायनाड में एक मेडिकल कॉलेज के छात्र जे एस सिद्धार्थन की लाश मिली थी। बताया गया था कि सिद्धार्थन ने आत्महत्या की है। जब इस मामले की जाँच हुई थी तो पता चला था कि सिद्धार्थन को लगातार तीन दिन तक प्रताड़ित किया गया था जिससे आहत होकर उसने आत्महत्या कर ली थी।

‘पाकिस्तान का नारा लगाने वालों का वही हाल करेंगे, जैसा महाराजा सुहेल देव ने सालार मसूद गाजी का किया था’: बहराइच में गरजे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भारत में रहकर पाकिस्तान की गाने वालों के खिलाफ कड़ी टिप्पणी की है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा है कि जो भिखारी पाकिस्तान का नारा लगाते हैं, वो वहीं चलाए जाएँ और भारत पर बोझ न बनें। बहराइच में जनसभा को संबोधित करते हुए सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा कि ‘जो लोग पाकिस्तान का नारा लगाते हैं, उनका वही हाल कर देंगे, जो महाराजा सुहेल देव ने सैयद सालार मसूद गाजी का किया था।’ बता दें कि बहराइच में इस्लामी आक्रांत महमदू गजनवी के भांजे सालार मसूद की कब्र है, उसे महाराजा सुहेव देव ने बहराइच में ही मार गिराया था।

बहराइच में जनसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पाकिस्तान समर्थकों पर भड़क गए। उन्होंने भरे मंच से कहा कि भारत में रहने वाले बहुत सारे ऐसे लोग हैं, जिनका दिल पाकिस्तान के लिए धड़कता है। ये लोग रहते और खाते भारत में हैं, लेकिन इनकी वफादारी सीमा पार पाकिस्तान के साथ है। ऐसे लोगों से हमें सावधान रहना चाहिए।

न्यूज 18 की रिपोर्ट के मुताबिक, देश विरोधी नारे लगाए जाने पर मंगलवार (7 मई 2024) को उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने साफ कहा कि “भारत में बड़ी तादाद ऐसे लोगों की है… जिनका दिल पाकिस्तान के लिए धड़कता है… ये लोग रहते हैं भारत में… खाते हैं भारत में.. लेकिन इनकी वफादारी सीमा पार पाकिस्तान के साथ है। ऐसे लोगों से हमें सावधान रहना चाहिए।”

मुख्यमंत्री ने कहा, “जो भिखारी पाकिस्तान का नारा लगाते हैं, वो वहीं चले जाएँ… और भारत पर बोझ ना बनें।” उन्होंने कहा, “जो लोग पाकिस्तान का नारा लगाते हैं, उनका वो हाल कर देंगे जो महाराजा सुहेल देव ने सैयद सालार मसूद गाजी का किया था।”

इस दौरान उन्होंने महाराणा प्रताप की मूर्ति का अपमान करने पर समाजवादी पार्टी को निशाने पर लिया। सीएम योगी ने कहा, “अकबर-औरंगजेब की औलादें ये समझ लें कि ये नया भारत है। समाजवादी पार्टी के गुंडे मूर्ति के ऊपर चढ़ते हैं। महाराणा प्रताप के भाले को तोड़ने का प्रयास करते हैं। मूर्ति अपवित्र करते हैं। नया भारत राष्ट्रनायकों का अपमान बर्दास्त नहीं करता है।” सीएम योगी ने समाजवादी पार्टी को रामद्रोही और कॉन्ग्रेस को आतंकवादियों की समर्थक पार्टी बताया।

गुजरात के प्रेरणा पीठ निष्कलंकी मंदिर पर मुस्लिम भीड़ का हमला: VHP ने बताया- पूर्व नियोजित हमले में कई देवी-देवताओं की मूर्तियाँ तोड़ी गईं

गुजरात के अहमदाबाद में पिराना स्थित प्रेरणा पीठ निष्कलंकी मंदिर पर मुस्लिम भीड़ ने हमला कर दिया है। हमले का एक वीडियो भी वायरल हो रहा है। इस वीडियो में देखा जा सकता है कि भीड़ में ज्यादातर जालीदार टोपी पहने हुए हैं और वे मंदिर पर डंडों से हमला कर रहे हैं। विश्व हिंदू परिषद (VHP) ने दावा किया कि हमला पूर्व नियोजित था और हिंदू देवी-देवताओं की कई मूर्तियाँ तोड़ी गई हैं।

बता दें कि इस जगह को लेकर सालों से विवाद चलता आ रहा है। मुस्लिम पक्ष का दावा है कि इस मंदिर की जगह दरगाह की है, जबकि हिंदू पक्ष इसे मंदिर होने की बता करता आ रहा है। इस बात को लेकर अफवाह उड़ी थी कि यहाँ से कुछ कब्रें हटा दी गई हैं। यह अफवाह फैलते ही स्थानीय मुस्लिमों की भीड़ वहाँ जमा हो गई।

कुछ ही देर में एक बड़ी भीड़ जमा हो गई और मंदिर में घुस कर तोड़फोड़ करने लगी। भीड़ के हाथों में लकड़ी और लोहे के डंडे भी दिखे। हमले का एक वीडियो विश्व हिंदू परिषद की गुजरात इकाई ने अपने आधिकारिक इंस्टाग्राम अकाउंट पर पोस्ट किया है। इस में हिंदू संगठन ने दावा किया है कि यह हमला पूर्व नियोजित था।

हिंदू संगठन VHP ने आगे दावा किया है कि हमले में मंदिर के अंदर स्थापित देवी-देवताओं की कई मूर्तियाँ तोड़ दी गई हैं। ऑपइंडिया ने इस संबंध में विश्व हिंदू परिषद से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो सका।

घटना की सूचना मिलते ही अहमदाबाद ग्रामीण जिला थाना पुलिस और एसओजी, एलसीबी सहित पुलिस का काफिला भी तुरंत पिराना पहुँच गया। उन्होंने स्थिति पर तुरंत काबू पा लिया। अब इस मामले में आगे की जाँच शुरू कर दी गई है।

बता दें कि इस मामले को लेकर कोर्ट में केस चल रहा है। साल 2022 में इमामशाह दरगाह के ट्रस्ट की ओर से हाई कोर्ट में हलफनामा दाखिल किया गया था। उसमें कहा गया था कि असल में मूल धार्मिक स्थल हिंदुओं का है और संस्था ‘सतपंथियों’ की है।

इमामशाह बावा रोजा ट्रस्ट ने हलफनामा दाखिल कर कहा था कि पिराना स्थित इस जगह पर 600 साल पुरानी मस्जिदें, दरगाह और मंदिर हैं। ट्रस्ट का कहना था कि यह कहना सही नहीं होगा कि यह स्थान मूल रूप से एक मुस्लिम संस्था है और एक हिंदू धार्मिक स्थल है। यह भी कहा गया है कि ट्रस्ट के ट्रस्टियों में हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदाय के लोग शामिल हैं।

ट्रस्ट का यह दावा 1939 में निचली अदालत द्वारा अनुमोदित एक योजना के आधार पर किया गया है, जिसमें कहा गया है कि पिराना मंदिर हिंदू सतपंथियों की एक संस्था है। इसके अलावा कहा गया है कि सैयद ट्रस्टियों की ओर से धार्मिक स्थल को वक्फ संपत्ति घोषित करने की माँग की गई थी।

साउथ में PM मोदी का जलवा: रोड शो में उमड़ी भारी भड़ी, रथ पर सवार प्रधानमंत्री का झलक पाने के लिए बेताब दिखे लोग; साथ में चंद्रबाबू नायडू और पवन कल्याण भी

लोकसभा चुनाव 2024 और आँध्र प्रदेश विधानसभा चुनाव को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आंध्र प्रदेश के विजयवाड़ा में रोड शो किया। इस रोड शो में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू और जनसेना पार्टी के मुखिया पवन कल्याण भी रथ पर मौजूद रहे। आंध्र प्रदेश में चंद्रबाबू नायडू की तेलुगू देशम पार्टी और अभिनेता पवन कल्याण की पार्टी जनसेना एनडीए गठबंधन का हिस्सा हैं। आंध्र प्रदेश में 13 मई को लोकसभा चुनाव के साथ ही विधानसभा चुनाव के लिए भी वोटिंग होगी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई में ये रोड शो 1 घंटे से अधिक समय तक चला। पीएम मोदी के रोड शो की शुरुआत विजयवाड़ा के इंदिरा गांधी म्यूनिसिपल स्टेडियम से हुई और बेंच सर्कल तक लगभग तीन किमी की दूरी तक चली। आंध्र प्रदेश में एनडीए का मुकाबला तीन पक्षीय है। यहाँ राज्य की सत्ताधारी पार्टी वाईएसआर कॉन्ग्रेस पार्टी और कॉन्ग्रेस पार्टी के साथ एनडीए का त्रिकोणीय मुकाबला हो रहा है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस रोडशो के बारे में एक्स पर भी लिखा। पीएम मोदी ने लिखा, “विजयवाड़ा में चंद्रबाबू नायडू और पवन कल्याण के साथ यादगार रोडशो। पिछले कुछ समय से पूरे आंध्र प्रदेश की यात्रा के दौरान मुझे ये समझ आया है कि राज्य के लोग एनडीए की पूर्ण बहुमत की सरकार के लिए मतदान करने जा रहे हैं। महिलाओं और युवाओं का बढ़ता समर्थन पूरे राज्य में एनडीए की स्वीकार्यता को दिखाता है।”

पीएम मोदी ने आगे लिखा, “आंध्र प्रदेश में बीजेपी और तेलुगू देशम पार्टी ने पहले भी साथ में काम किया है। हमारा एक मजबूत गठजोड़ है, जो आंध्र प्रदेश के उज्जवल भविष्य के लिए काम करेगा। जनसेना प्रमुख पवन कल्याण जी का साथ हमारे गठबंधन को और भी मजबूती दे रहा है। प्रदेश के लोग ये देख पा रहे हैं कि हमारा गठबंधन ही राज्य की आकाँक्षाओं को पूर्ण करने में सक्षम है।”

तेलंगाना की रैली में पीएम मोदी ने कॉन्ग्रेस पर किया जोरदार हमला

इससे पहले, लोकसभा चुनाव 2024 के प्रचार के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बुधवार (8 मई 2024) को तेलंगाना के करीमनगर पहुँचे। इस एक जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कॉन्ग्रेस, राहुल गाँधी और गाँधी परिवार पर जमकर निशाना साधा। प्रधानमंत्री ने कहा कि कॉन्ग्रेस ने अपनी पार्टी के नेता एवं देश के पूर्व प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हाराव के पार्थिव शरीर का भी अपमान किया। पीएम मोदी ने गाँधी परिवार पर आरोप लगाया कि कॉन्ग्रेस में ‘फैमिली फर्स्ट’ की नीति है। उन्होंने कहा, “फैमिली फर्स्ट की वजह से कॉन्ग्रेस ने पीवी नरसिम्हाराव जी का भी अपमान किया। उनके निधन के बाद उनके पार्थिव शरीर का भी अपमान किया। कॉन्ग्रेस दफ्तर में एंट्री तक नहीं दी। ये बीजेपी-एनडीए सरकार है, जिसने पीवी नरसिम्हाराव जी को भारत रत्न से सम्मानित किया।”

सैम पित्रोदा के बयान पर कॉन्ग्रेस को दिखाया आईना

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार (8 मई 2024) को तेलंगाना में करीमनगर के बाद वारंगल में जनसभा को संबोधित किया। इस दौरान भी उन्होंने कॉन्ग्रेस और राहुल गाँधी पर जमकर निशाना साधा। पीएम मोदी ने कहा, “मैं सोच रहा था कि (राष्ट्रपति) द्रौपदी जी, जिनकी बहुत अच्छी प्रतिष्ठा है, आदिवासी समाज की बहुत प्रतिष्ठित बेटी हैं। उनको हम राष्ट्रपति बना रहे हैं तो कॉन्ग्रेस उनको हराने के लिए इतनी मेहनत क्यों कर रही है? कॉन्ग्रेस आदिवासियों को नाराज क्यों कर रही है? मैं सोचता रहता था, लेकिन मुझे समझ में नहीं आ रहा था।”

राहुल गाँधी पर हमला बोलते हुए उन्होंने कहा, “मुझे लगता था कि ठीक है कि ये शहजादे का दिमाग ऐसा है तो शायद द्रौपदी जी का विरोध कर रहा है। उनको चुनाव में हराने के लिए निकल पड़ा है, लेकिन मुझे आज पता कि ये कॉन्ग्रेस पार्टी, जो एक आदिवासी बेटी है, उसको हराने के लिए क्यों मैदान में उतरी थी। आज मुझे पता कि अमेरिका में ये शहजादे के अंकल रहते हैं।”

प्रधानमंत्री ने कहा, “ये शहजादे के अंकल उनके फिलॉसफर एंड गाइड है। जैसे आजकल क्रिकेट में थर्ड अंपायर होता है ना कि कोई कंफ्यूजन हो तो थर्ड अंपायर को पूछते हैं। वैसे ही ये शहजादे कोई कंफ्यूजन होता है तो उनसे सलाह लेते हैं। ये शहजादे के फिलॉसफर एंड गाइड अंकल ने बड़ा रहस्य खोला है। उसने कहा है कि जिनकी चमड़ी का रंग काला होता है, ये सब अफ्रीका के हैं।”

‘अढ़ाई दिन का झोपड़ा असली मालिकों को सौंपा जाए’: जैन संतों उस मंदिर का किया दौरा, जिसे मुस्लिम आक्रांता कुतुबद्दीन ऐबक ने तोड़कर बना दिया मस्जिद

मंगलवार (7 मई) की सुबह, मुनि सुनील सागर के नेतृत्व में जैन समुदाय ने राजस्थान के अजमेर जिले में 12वीं सदी की मस्जिद अढ़ाई दिन का झोंपड़ा तक नंगे पैर मार्च किया। उन्होंने कहा कि एएसआई द्वारा संरक्षित इस जगह पर पूजा-अर्चना करना सदियों से उनका रिवाज रहा है। इस दौरान उन्हें रोकने की कोशिश की गई।

एएसआई ने संपत्ति को संरक्षित स्मारक घोषित किया है। स्थानीय लोगों ने उन्हें रोकने की कोशिश ये कहते हुए की, कि जैन मुनि बिना कपड़े पहने मस्जिद में प्रवेश नहीं कर सकते। भिक्षुओं ने तर्क दिया कि ऐसे ही रहना और अढ़ाई दिन का झोपड़ा में जाना उनका अधिकार है। जैन संतों के साथ विश्व हिंदू परिषद के कार्यकर्ता भी शामिल थे। उन्होंने कहा कि 12वीं शताब्दी में मस्जिद में बदलने होने से पहले यह स्थान कभी एक संस्कृत विद्यालय था।

जैन संतों और उनके अनुयायियों ने अपनी यात्रा के दौरान मस्जिद के केंद्रीय क्षेत्र में प्रवेश नहीं किया। मुनि सुनील सागर ने स्थल पर पत्थर के मंच पर दस मिनट तक प्रवचन किया। उन्होंने कहा “भवन उसके असली मालिकों के नियंत्रण में होनी चाहिए। अगर यहाँ पूजा-अर्चना करना हमारी परंपरा रही है तो ऐसा करना भी चाहिए। इसे सर्वोच्च पद के अधिकार की मंशा की ओर नहीं ले जाना चाहिए। हमें सावधान रहना चाहिए। जब हम तथ्यों को स्वीकार किए बिना दूसरे की संपत्ति पर अपना अधिकार जताते हैं, तो यह शत्रुता को बढ़ावा देता है। हमें सद्भाव के लिए प्रयास करना चाहिए और आगे बढ़ना चाहिए।”

टाइम्स ऑफ इंडिया से बात करते हुए मुनि सुनील सागर ने कहा, “आज मैंने अढ़ाई दिन का झोपड़ा का दौरा किया और पाया कि यह महज एक झोपड़ी (झोपड़ा) नहीं बल्कि एक महल है। मैंने रामायण और महाभारत के कई प्रतीक देखे। मुझे हिंदू आस्था की टूटी हुई मूर्तियाँ भी मिलीं, फिर भी ये विडंबना है कि इसे मस्जिद कहा जाता है। उन्होंने कहा, “हमें संपत्ति पर उचित स्वामित्व को स्वीकार करना चाहिए। हमें भी पूजा करने का अधिकार है और ऐसे अधिकारों पर किसी का एकाधिकार नहीं है। इतिहास विकसित होता है और परिस्थितियाँ भी। धर्म हमें दया, प्रेम और अहिंसा सिखाता है।”

अढ़ाई दिन का झोपड़ा का इतिहास

मूल रूप से एक शानदार संस्कृत कॉलेज (सरस्वती कंठाभरण महाविद्यालय) जिसमें ज्ञान और बुद्धि की हिंदू देवी माता सरस्वती को समर्पित एक मंदिर है, इस इमारत का निर्माण महाराजा विग्रहराज चतुर्थ द्वारा करवाया गया था। वह शाकंभरी चाहमान या चौहान वंश के राजा थे। कई दस्तावेज़ों के अनुसार, मूल इमारत चौकोर आकार की थी। इसके प्रत्येक कोने पर एक टावर था। भवन के पश्चिमी तरफ माता सरस्वती का मंदिर था। 19वीं शताब्दी में वहाँ सिक्का भी मिला था, जो 1153 ई. की थी। विशेषज्ञों का मानना ​​है कि सिक्के के आधार पर यह अनुमान लगाया जा सकता है कि मूल इमारत का निर्माण 1153 के आसपास हुआ था।

हालाँकि, कुछ स्थानीय जैन किंवदंतियाँ बताती हैं कि इमारत का निर्माण 660 ईस्वी में सेठ विरमदेव काला द्वारा करवाया गया था। इसका निर्माण एक जैन तीर्थस्थल के रूप में किया गया था और पंच कल्याणक मनाया जाता था। उल्लेखनीय है कि इस स्थल पर उस समय के जैन और हिंदू दोनों वास्तुकला के तत्व मौजूद हैं। अढ़ाई दिन का झोपड़ा के इतिहास पर ऑपइंडिया की रिपोर्ट यहाँ पढ़ सकते हैं।

‘संपत्तियों पर कब्जा करना और उसे अपनी संपत्ति घोषित करना वक्फ बोर्ड का स्वभाव’: श्रीकृष्ण जन्मभूमि मामले में बोला हिंदू पक्ष- 1968 का समझौता अमान्य

उत्तर प्रदेश के मथुरा स्थित श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह विवाद में हिंदू पक्ष ने मंगलवार (7 मई 2024) को इलाहाबाद हाई कोर्ट में तर्क दिया। हिंदू पक्ष ने बताया कि वक्फ बोर्ड की किसी भी संपत्ति पर अतिक्रमण करने और उसे अपनी संपत्ति घोषित करने की सामान्य प्रथा है। हिंदू पक्ष की अधिवक्ता रीना एन सिंह ने अदालत से वक्फ बोर्ड को इस तरह की प्रथा चलाने की अनुमति नहीं देने का आग्रह किया।

हिंदू पक्ष ने यह दलील तब दी, जब इलाहाबाद हाई कोर्ट मथुरा के श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर से सटे शाही ईदगाह मस्जिद को हटाने की माँग वाली मुकदमे को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई कर रहा था। यह चुनौती मुस्लिम पक्ष ने दी है। न्यायमूर्ति मयंक जैन श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह ढाँचा विवाद से संबंधित 18 मुकदमों की समेकित पोषणीयता को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई कर रहे थे।

हिंदू पक्ष की वकील रीना सिंह ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय को सूचित किया कि मुस्लिम पक्ष ने दावा किया है कि दोनों पक्षों के बीच 1968 के समझौते ने संपत्ति को वक्फ संपत्ति में बदल दिया है। रीना सिंह ने कहा कि इस संपत्ति के मालिक भगवान हैं, जो उस समझौते में एक पक्ष के रूप में नहीं थे। इसलिए यह समझौता अमान्य हो गया।

अधिवक्ता रीना सिंह ने आगे कहा कि वक्फ अधिनियम और पूजा स्थल अधिनियम के प्रावधान इस मामले में प्रासंगिक नहीं थे। इससे पहले 2 मई की सुनवाई में उन्होंने तर्क दिया था कि श्रीकृष्ण जन्मभूमि संरक्षित स्मारक और राष्ट्रीय महत्व का स्मारक, दोनों है। इस तरह, यह प्राचीन स्मारक और पुरातात्विक स्थल और अवशेष अधिनियम 1958 के अधीन होगा, ना कि पूजा स्थल अधिनियम के।

उन्होंने आगे कहा कि पूजा स्थल अधिनियम के साथ-साथ वक्फ अधिनियम के प्रावधान इस मामले में लागू नहीं होते हैं। रीना सिंह ने इस मामले में दर्जन भर से अधिक तथ्य रखे। उन्होंने दलील दी कि ASI की जाँच में पुरातात्विक खनन के दौरान ईदगाह के अंदर स्थित कुएँ से श्रीकृष्ण के मूल गर्भगृह के मंदिर की आठ फुट की चौखट मिल चुकी है। उस चौखट के आगे के भाग पर नक्काशी की हुई है।

उन्होंने आगे कहा कि इस चौखट के पीछे के भाग में ब्राह्मी लिपि में अंकित है कि यह भगवान वासुदेव का महास्थान है। यह चौखट मथुरा के सरकारी म्यूजियम में रखी हुई है। उन्होंने कहा कि खनन में राधा-कृष्ण की मूर्तियों के अवशेष भी मिले हैं। उन्होंने भारत सरकार के अंतर्गत आने वाले डिपार्मेंट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी के अंतर्गत ‘इंस्टीट्यूट ऑफ साइंटिफिक रिसर्च ऑफ वेदाज’ के रिकॉर्ड को भी रखा।

इसके आधार पर रीना सिंह ने भगवान श्रीकृष्ण के जन्म और महाभारत के तमाम घटनाओं के वास्तविक समय का जिक्र करते हुए अपने तथ्यों को रखा। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण और महाभारत काल के दौरान मस्जिद का कहीं कोई जिक्र ही नहीं था। इसके अलावा, उन्होंने देश के पूर्व राष्ट्रपति और भारत रत्न अब्दुल कलाम की पुस्तक ‘इग्नाइटेड माइंड्स’ का भी जिक्र किया।

इस किताब का हवाला देते हुए रीना सिंह ने कहा कि इसके पाँचवें अध्याय में साफ तौर पर इस बात का जिक्र किया गया है कि भारत का मूल धर्म सनातन संस्कृति और वह इस्लाम से अत्यधिक पुराना है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 15 मई 2024 को होगी। हिंदू पक्ष की दलीलें पूरी होने के बाद मुस्लिम पक्ष अपनी दलीलें पेश करेगा। मुस्लिम पक्ष की ओर से अधिवक्ता तस्नीम अहमदी पेश हुए।

बताते चलें कि मथुरा में यह विवाद 13.37 एकड़ जमीन के मालिकाना हक को लेकर है। श्रीकृष्ण जन्मभूमि के पास 10.90 एकड़ जमीन है, जबकि शाही ईदगाह ढाँचा के पास 2.50 एकड़ जमीन है। ये पूरी ज़मीन हिंदू पक्ष की है। लंबे समय से चल रहे संघर्ष ने विवादित ढाँचे के निरीक्षण की अनुमति देने के इलाहाबाद उच्च न्यायालय के फैसले के साथ एक बड़ा मोड़ ले लिया है।