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पिता सपा के पूर्व MLA, बेटी से रेप करता था सपा कार्यकर्ता आसिफ अली: न्यूड फोटो से ब्लैकमेल कर वसूले ₹3 करोड़, तेजाब हमले की देता था धमकी

उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में सपा के ही एक पूर्व विधायक की बेटी ने आरोप लगाया है कि एक सपा नेता ने उससे बलात्कार करके उसे सालों तक ब्लैकमेल किया और उससे करोड़ों रूपए हड़प लिए। पीड़िता ने इस मामले में मुरादाबाद में FIR दर्ज करवाई है। पीड़िता ने आरोप लगाया है कि सपा नेता उसके अश्लील फोटो के बल पर सालों तक उसे प्रताड़ित करता रहा, जिसमें उसका परिवार भी शामिल था।

जानकारी के अनुसार, मुरादाबाद के सिविल लाइन्स इलाके में रहने वाली एक महिला ने सपा नेता आसिफ अली और उसके परिजनों के खिलाफ बलात्कार और ब्लैकमेलिंग की मंगलवार (7 मई, 2024) को FIR दर्ज करवाई है। पीड़िता ने बताया है कि वह सपा के दो बार के एक विधायक की बेटी है।

पीड़िता ने बताया वह तीन बहनें हैं, उसकी शादी कानपुर में एक बड़े व्यापारी से हुई है। वह अपने पिता की देखभाल करने के लिए कानपुर से मुरादाबाद आती थी। 2019 में अपने पिता के बीमार होने पर वह उनकी देखभाल के लिए मुरादाबाद आई हुई थी। इस दौरान आसिफ भी उनके घर आता-जाता था।

पीड़िता ने बताया कि एक दिन आसिफ ने कोल्डड्रिंक में उसे नशीला पदार्थ मिला कर पिला दी। इसके बाद उसने एक कमरे में ले जाकर पीड़िता के साथ बलात्कार किया और उसके अश्लील फोटो ले लिए। पीड़िता ने बताया कि उसने जब होश आने पर इस संबंध में आसिफ से पूछताछ की तो वह उसे धमकाने लगा और उसकी न्यूड फोटो दिखाई।

आसिफ ने पीड़िता को धमकाया कि अगर वह किसी को इस विषय में बताएगी तो वह उनकी न्यूड फोटो वायरल कर देगा और बदनामी करवा देगा। पीड़िता को उसने इस दौरान हथियार के साथ धमकाया भी। आसिफ ने इसके बाद न्यूड फोटो को हथियार बनाते हुए कई बार पीड़िता के साथ रेप किया।

आसिफ यहीं नहीं रुका बल्कि उसने पीड़िता से फोटो के बल पर वसूली भी चालू कर दी। उसने कई कागजों पर पीड़िता से हस्ताक्षर करवा लिए। इस काम में उसका भाई और भाभी भी शामिल थे। पीड़िता ने बताया कि वह उससे पैसे वसूलता था। पीड़िता से आसिफ ने ₹3 करोड़ की वसूली की। एक फ्लैट भी अपने नाम से खरीदा जिसका भुगतान पीड़िता ने किया।

पीड़िता ने बताया कि उसे अपने पिता कि सम्पत्ति में हिस्सा मिला था। इस हिस्से में एक पेट्रोल पम्प भी शामिल था। आसिफ चाहता था कि पीड़िता पेट्रोल पम्प भी उसके नाम कर दे। पीड़िता के पिता की मौत के बाद उसकी डिमांड लगातार बढती गई। वह पीड़िता को अपने घर ले जाकर रेप करता था और इस दौरान उसकी भाभी बाहर बैठी रहती थीं।

आसिफ ने इसके बाद और वसूली करने के लिए पीड़िता को धमकी दी कि वह उसके चेहरे पर तेज़ाब डाल देगा। पीड़िता ने आसिफ की कारस्तानियों से तंग आकर अपने पति को घटना बताई और मुरादाबाद में मुकदमा दर्ज करवाया। बताया गया कि आसिफ सपा के छात्र संगठन युवजन सभा में बड़े पदों पर भी रहा है। उसकी सपा मुखिया अखिलेश यादव के साथ फोटो है।

पहले दिनभर अडानी-अंबानी को देते रहते थे गाली, चुनावों की घोषणा के बाद नाम भी नहीं ले रहे: PM मोदी ने पूछा- शहजादे बताएँ कितने पैसे मिले

लोकसभा चुनाव 2024 के प्रचार के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बुधवार (8 मई 2024) को तेलंगाना के करीमनगर पहुँचे। इस एक जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कॉन्ग्रेस, राहुल गाँधी और गाँधी परिवार पर जमकर निशाना साधा। प्रधानमंत्री ने कहा कि कॉन्ग्रेस ने अपनी पार्टी के नेता एवं देश के पूर्व प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हाराव के पार्थिव शरीर का भी अपमान किया।

पीएम मोदी ने गाँधी परिवार पर आरोप लगाया कि कॉन्ग्रेस में ‘फैमिली फर्स्ट’ की नीति है। उन्होंने कहा, “फैमिली फर्स्ट की वजह से कॉन्ग्रेस ने पीवी नरसिम्हाराव जी का भी अपमान किया। उनके निधन के बाद उनके पार्थिव शरीर का भी अपमान किया। कॉन्ग्रेस दफ्तर में एंट्री तक नहीं दी। ये बीजेपी-एनडीए सरकार है, जिसने पीवी नरसिम्हाराव जी को भारत रत्न से सम्मानित किया।”

प्रधानमंत्री ने आगे कहा, “मुझे मेरे लिए बहुत सुखद है कि कल ही मुझे उनके पूरे परिवार के साथ मुलाकात करने का, पीवी नरसिम्हाराव जी के बारे में बहुत कुछ सुनने का सौभाग्य मिला। बहुत देर तक उनके परिवार के दो-दो, तीन-तीन पीढ़ी के साथ मैं बैठा। मैं गर्व महसूस कर रहा था कि एक परिवार ने… नरसिम्हाराव जी ने देश के लिए कितना कुछ किया और कॉन्ग्रेस ने उनके साथ कैसा व्यवहार किया।”

राहुल गाँधी पर निशाना साधते हुए पीएम मोदी ने कहा, “कॉन्ग्रेस के शहजादे पिछले पाँच साल से सुबह उठते ही माला जपना शुरू कर देते हैं। जब से उनका राफेल वाला मामला ग्राउंडेड हो गया, तब से उन्होंने एक नई माला जपना शुरू किया। पाँच साल से एक ही माला जपते थे। पाँच उद्योगपति… पाँच उद्योगपति… पाँच उद्योगपति। फिर धीरे-धीरे कहने लगे अंबानी-अडानी… अंबानी-अडानी… अंबानी-अडानी।”

प्रधानमंत्री ने आगे कहा, “लेकिन, जब से चुनाव घोषित हुआ है इन्होंने अंबानी-अडानी को गाली देना बंद कर दिया। अब शहजादे ये घोषित करें कि इस चुनाव में अंबानी-अडानी से उन्होंने कितना माल उठाया है। काले धन के कितने रूपये भर के मारे हैं? क्या टेम्पो भर के नोटें कॉन्ग्रेस के लिए पहुँची हैं? क्या सौदा हुआ है? आपने रातों-रात अंबानी-अडानी को गाली देना बंद कर दिया।”

पीएम मोदी ने राहुल गाँधी से पूछा, “जरूर दाल में कुछ काला है। पाँच साल तक अंबानी-अडानी को गाली दी और रातों-रात अब बंद हो गई। मतलब कोई ना कोई चोरी का माल टेम्पो भर-भर के आपने पाया है। इसका जवाब आपको देश को देना पड़ेगा।” बता दें कि राहुल गाँधी प्रधानमंत्री मोदी पर उद्योगपति मुकेश अंबानी और गौतम अडानी को फायदा पहुँचाने का आरोप लगाते रहे हैं।

चीनी की तरह दिखते हैं पूर्वोत्तर के लोग, दक्षिण वाले अफ्रीकी जैसे: कॉन्ग्रेस नेता सैम पित्रोदा ने खड़ा किया नया विवाद, असम के CM बोले- मैं भारतीय जैसा दिखता हूँ

इंडियन ओवरसीज कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष सैम पित्रोदा ने ‘द स्टेट्समैन’ से बात करते हुए हाल में भारतीयों की अखंडता और विविधता पर एक शर्मनाक टिप्पणी की। उन्होंने भारत की विविधता पर बात करते हुए दक्षिण के लोगों की तुलना अफ्रीकियों से कर डाली और उत्तर पूर्व भारत में रहने वाले लोगों की तुलना चीनियों से। उनके इस बयान के वायरल होने के बाद अब कॉन्ग्रेस की आलोचना हो रही है। असम सीएम ने भी इस बयान को सुनने के बाद कॉन्ग्रेस नेता को जवाब दिया है।

सैम पित्रोदा ने द स्टेट्समैन से बातचीत के दौरान भारत के लोगों के विचारों पर बात करते हुए ये टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि एक गुट है जो भारत में संस्कृति, सभ्यता, भगवान राम, हनुमान सबकी बातें करता है और दूसरा गुट वो है जो कहता है कि उनके पूर्वजों ने इस देश की आजादी के लिए काम किया है।

सैम पित्रोदा एक ओर तो कहते हैं कि वो हर विचार का सम्मान करते हैं। इसके बाद वो कहते हैं, “पाकिस्तान ने मजहब के आधार पर मुल्क बनाया आज उनकी हालत देख लीजिए क्या है… हम भारत जैसे विविधतापूर्ण देश को एक साथ रख सकते हैं, जहाँ पूर्व के लोग चीनी जैसे दिखते हैं, पश्चिम के लोग अरब जैसे दिखते हैं, उत्तर के लोग शायद गोरे जैसे दिखते हैं और दक्षिण के लोग अफ्रीका जैसे दिखते हैं।”

सैम पित्रोदा की यह टिप्पणी अब सोशल मीडिया पर वायरल है। उनकी इस टिप्पणी पर असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने भी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा, “सैम भाई, मैं नॉर्थ ईस्ट से हूँ और भारतीय जैसा दिखता हूँ। हम एक विविधतापूर्ण देश में रहते हैं। हम अलग दिख सकते हैं लेकिन हम सभी एक हैं। हमारे देश के बारे में थोड़ा तो समझ लो।”

वहीं, इस कमेंट को सुनने के बाद लोग सैम पित्रोदा के साथ-साथ नस्लवादी, जातिवादी और सांप्रदायिक कट्टरपंथी कहा जा रहा है। इसके अलावा ये भी कहा जा रहा है कि कॉन्ग्रेस का काम सिर्फ भारतीयों की पहचान मिटाने का है। उन्हें भारतीयों की पहचान भारतीयों के रूप में नहीं कर रहे। उलटा उनके रंग रूप को दूसरों से जोड़ रहे हैं।

हरियाणा का क्या है गणित, क्या 3 निर्दलीय MLA की समर्थन वापसी से खतरे में आ गई है सरकार: जानिए सब कुछ

हरियाणा के तीन निर्दलीय विधायकों ने मंगलवार (7 मई, 2024) को राज्य की नायब सिंह सैनी वाली भाजपा सरकार से समर्थन वापस लेने की घोषणा की है। इन विधायकों ने आगे कॉन्ग्रेस को समर्थन देने का ऐलान किया है। इन विधायकों ने कॉन्ग्रेस नेता भूपिंदर सिंह हुड्डा के साथ एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की।

हरियाणा की भाजपा सरकार से चरखी दादरी से विधायक सोमवीर सांगवान, पुंडरी से विधायक रणधीर गोलन एवं नीलोखेड़ी से विधायक धर्मपाल गोंदर ने समर्थन वापस लिया है। इन तीनों विधायकों के समर्थन वापस लेने पर कॉन्ग्रेस ने एक्स (ट्विटर) पर लिखा, “पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा और अध्यक्ष श्री उदयभान की मौजूदगी में तीन निर्दलीय विधायकों ने दिया कांग्रेस को समर्थन। लोकसभा चुनाव के परिणाम आने से पहले ही हरियाणा में रुझान आने शुरू हो गए हैं। जन विरोधी मोदी और खट्टर सरकार को जल्द हरियाणा की जनता सबक सिखाने वाली है।”

इसके बाद कई जगह यह खबर उड़ाई गई कि हरियाणा की भाजपा सरकार अल्पमत में है। भाजपा ने इस मामले पर वस्तुस्थिति बताई है। हरियाणा भाजपा के प्रवक्ता जवाहर यादव ने कहा, “भारतीय जनता पार्टी की सरकार पर कोई भी खतरा नहीं है। तीन निर्दलीय विधायकों ने कहा है कि उन्होंने सरकार से समर्थन वापस लिया है, उनके जाने के बाद भी भाजपा की नायब सिंह सैनी सरकार के पास बहुमत है। बहुमत परीक्षण का एक ही स्थान विधानसभा होता है, यह कॉन्ग्रेस और भूपिंदर सिंह हुड्डा द्वारा भ्रम फैलाया जा रहा है।”

भाजपा प्रवक्ता ने बताया, “मार्च में ही मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने विश्वास मत हासिल किया था। 6 महीने के भीतर ऐसा मामला दुबारा आना मुश्किल बात होती है, लेकिन जब भी विधानसभा के भीतर ऐसी बात आएगी तो हम प्रचंड बहुमत सिद्ध कर देंगे, यह लोकसभा चुनावों के लिए राजनीतिक बयानबाजी हो रही है।”

हरियाणा विधानसभा में कुल 90 सीटें हैं और बहुमत के लिए यहाँ 46 सीटों की आवश्यकता होती है। वर्तमान में भाजपा सरकार के पास अपने 40 विधायक हैं जबकि उसे 1 निर्दलीय और हरियाणा लोकहित पार्टी के एक और विधायक का समर्थन हासिल है। मार्च 2024 तक हरियाणा सरकार को जननायक जनता पार्टी का भी समर्थन हासिल था, JJP के पास राज्य में 10 सीटें हैं। दूसरी तरफ कॉन्ग्रेस के पास राज्य 30 सीटें हैं और उसे 4 निर्दलीयों का समर्थन हासिल हो गया है।

हरियाणा विधानसभा में दो सीटें खाली भी हैं जो कि पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर और रणजीत चौटाला के इस्तीफे के बाद खाली हुई हैं। ऐसे में स्पष्ट गणित में तो भाजपा के पास बहुमत नहीं है लेकिन अभी उसकी सरकार को राज्य में खतरा नहीं है। दरअसल, हरियाणा की नायब सिंह सैनी सरकार ने मार्च, 2024 में ही बहुमत हासिल किया था। नियमानुसार, एक बार किसी सरकार के बहुमत सिद्ध करने के बाद अगले 6 महीने तक उसके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव नहीं लाया जा सकता।

जहाँ सितम्बर माह तक अविश्वास प्रस्ताव नहीं लाया जा सकता वहीं अक्टूबर तक राज्य में चुनाव भी होने हैं। इसी दौरान राज्य की विधानसभा का कार्यकाल खत्म हो रहा है। ऐसे में विपक्ष की सरकार गिराने की मंशा पूरी होना असम्भव सा लग रहा है। भाजपा ने भी इसको लेकर स्पष्ट किया है कि उनके पास संख्याबल मौजूद है और सरकार को कोई खतरा नहीं है।

निक्कर पहन बेड पर कर रहे थे इंतजार, कंडोम भी नहीं किया यूज: कोर्ट में पोर्न स्टार ने सुनाई डोनाल्ड ट्रंप संग सेक्स की दास्तान, जज बोले- इतने डिटेल में भी नहीं जाना है

अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ‘हुश मनी केस’ में पॉर्न स्टार स्टॉर्मी डेनियल्स की कोर्ट में गवाही चल रही है। न्यूयॉर्क कोर्ट में गवाही देने के लिए पेश हुई स्टॉर्मी डेनियल्स ने डोनाल्ड ट्रंप के साथ मुलाकात और अपने संबंधों पर खुलकर बात रखी। स्टॉर्मी डेनियल्स ने कुछ ऐसे खुलासे कर दिए, जिसके बाद जज को भी कहना पड़ा कि ‘अब बस करिए, इतनी गहराई में जाने की जरूरत नहीं।’ इस दौरान कोर्ट में डोनाल्ड ट्रंप भी मौजूद रहे।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, दोनों की मुलाकात साल 2006 में हुई थी। ट्रंप ने एक गोल्फ टूर्नामेंट की मेजबानी के दौरान अपने बॉडीगार्ड से कहकर उन्हें अपने पेंटहाउस में बुलाया था। बॉडीगार्ड ने स्टॉर्मी डेनियल्स से कहा था कि डोनाल्ड ट्रंप उनके साथ डिनर करना चाहते हैं। हालाँकि जब वो उनके पेंटहाउस में पहुँची, तो डोनाल्ड ट्रंप पायजामे में थे। इसका स्टॉर्मी डेनियल्स ने मजाक भी उड़ाया था।

जज जुआन मर्चेन की कोर्ट में चल रही गवाही अभी जारी रहेगी। इस गवाही के दौरान स्टॉर्मी डेनियल्स ने याद किया कि ट्रम्प से उनकी मुलाकात 2006 में तब हुई थी, जब ट्रम्प ने गोल्फ़ टूर्नामेंट में उसके साथ डिनर करने का आग्रह किया था। जब वह पेंटहाउस एलिवेटर से पहुँची, तो ट्रम्प ने रेशम या साटन के पजामे में उसका स्वागत किया।

इस दौरान डोनाल्ड ट्रंप ने उनसे पॉर्न इंडस्ट्री के बारे में भी पूछा था, साथ ही यौन रोगों को लेकर भी सवाल पूछा था। जिसके जवाब में डेनियल्स ने अदालत को बताया, “मैंने कहा कि हर 30 दिन में हमारा टेस्ट किया जाता है।” इस दौरान डेनियल्स ने कहा कि उन्होंने डोनाल्ड ट्रंप की पत्नी मेलानिया के बारे में भी पूछा था और उन्हें खूबसूरत बताया था, जिसके बाद डोनाल्ड ट्रंप ने उसकी चिंता न करने के लिए कहा, क्योंकि दोनों एक बेडरूम में नहीं सोते। इस दौरान डोनाल्ड ट्रंप ने स्टॉर्मी की तुलना अपनी बेटी से भी की थी और कहा था, ‘मैं उनकी बेटी की याद दिलाती हूं क्योंकि वह स्मार्ट और गोरी है।’

एडल्ट स्टार स्टॉर्मी डेनियल्स ने न्यूयॉर्क कोर्ट को बताया, “जब मैंने बाहर आने के लिए बाथरूम का दरवाजा खोला, तो मिस्टर ट्रम्प बेडरूम में आ गए थे। वो सिर्फ बरमूडा और टी-शर्ट में थे और बेड पर इंतजार कर रहे थे। मैं इससे चौंक भी गई थी, क्योंकि मैं सिर्फ डिनर के बारे में जानती थी।” स्टॉर्मी ने ट्रंप को दबंग भी करार दिया। यही नहीं, स्टॉर्मी ने बताया कि संबंध बनाने के दौरान डोनाल्ड ट्रंप ने कंडोम का भी इस्तेमाल नहीं किया। और जब वो जा रही थी तो ट्रंप ने उन्हें हनीबंच कहा और जल्द मिलने का वादा किया।

इस दौरान ट्रम्प ने डेनियल्स की गवाही को बड़े ही ध्यान से सुना। जज जुआन मर्चेन ने बचाव पक्ष की बार-बार आपत्तियों के बाद डेनियल्स को “सिर्फ़ सवालों के जवाब देने” का आदेश दिया, जिनमें से कई को उन्होंने सही ठहराया। हालाँकि इस दौरान कोर्ट ने कहा कि बारीक-जानकारियों की कोई जरूरत नहीं है, जैसे कि कमरे में टाइल का रंग कैसा था।

बता दें कि डेनियल्स का असली नाम स्टेफ़नी क्लिफ़ोर्ड है। ये मामला डोनाल्ड ट्रंप से जुड़े 1.30 लाख डॉलर से जुड़े हैं, तो स्टॉर्मी को दिए गए थे। ये पैसे ‘लीगल फीस’ के तौर पर खाते में दिखाए गए, जबकि ये पैसे उन्होंने स्टॉर्मी को मुँह बंद रखने के लिए अपने वकील के मार्फत ये पैसे दिए थे। क्या ये पैसे मुँह बंद करने के लिए दिए गए थे..? अगर हाँ, तो फिर ये मामला क्रिमिनल केस बन जाएगा। यही इस केस का मुख्य पहलू है।

कॉन्ग्रेस नेता ने सोमैया ट्रस्ट को धमकाया, कहा- पार्टी के सत्ता में आने पर भुगतोगे अंजाम: हमास समर्थक प्रिंसिपल परवीन शेख को हटाने से भड़का

कॉन्ग्रेस के एक नेता ने सोमैया स्कूल को चलाने वाले सोमैया ट्रस्ट को अंजाम भुगतने की धमकी दी है। सोमैया ट्रस्ट को यह धमकी इस्लामी आतंकी संगठन हमास का समर्थन करने वाली प्रिंसिपल परवीन शेख को हटाने के कारण दी गई है। परवीन शेख को ऑपइंडिया के खुलासे के बाद प्रिंसिपल के पद से हटा दिया गया था। परवीन शेख इस्लामी आतंकी संगठन हमास के साथ ही हिन्दुओं के खिलाफ जहर उगलने वाले इस्लामी मौलाना जाकिर नाइक और 2020 के दिल्ली हिन्दू विरोधी दंगों को खुला समर्थन दे रही थी।

कॉन्ग्रेस नेता मैथ्यू एंटनी ने एक्स (ट्विटर) पर लिखा, “अक्टूबर 2024 में महाराष्ट्र में महा विकास अघाड़ी (विपक्षी गठबंधन) के सत्ता में आने के बाद सोमैया स्कूल को इसका अंजाम भुगतना होगा। मैंने प्रिंसिपल परवीन शेख से बात की है और सोमैया ट्रस्ट से अनुरोध किया है कि वह किसी का पक्ष लेने वाले राजनीतिक जाल से दूर रहें और पक्षपात ना करें। ऐसा लगता है कि उन लोगों ने कट्टरपंथियों और उनकी धमकियों का पक्ष लिया है।”

कॉन्ग्रेस नेता ने सोमैया ट्रस्ट को धमकाया
कॉन्ग्रेस नेता ने सोमैया ट्रस्ट को धमकाया

इससे पहले सोमैया ट्रस्ट ने मंगलवार (7 मई, 2024) को परवीन शेख को हटा दिया। इस संबंध में एक बयान जारी किया गया। इस बयान में सोमैया ट्रस्ट ने कहा, “हमारी नजर में ये मामला आया कि सोमैया स्कूल में लीडरशिप रोल में कार्यरत परवीन शेख की सोशल मीडिया पर क्रियाकलापों को हमारे ध्यान में लाया गया था।”

बयान में आगे कहा गया, “हम अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का मजबूती से समर्थन करते हैं, लेकिन उसमें दूसरों के लिए जिम्मेदारी और इज्जत भी होनी जरूरी है। ऐसे में परवीन शेख के क्रियाकलापों की हमने जाँच की और इस नतीजे पर पहुँचे हैं कि हम उन्हें तुरंत प्रभाव से पद से हटा रहे हैं और अपने सभी संबंधों को खत्म कर रहे हैं।”

ऑपइंडिया की रिपोर्ट का असर

बता दें कि ऑपइंडिया ने अप्रैल 2024 में परवीन शेख के कारनामों को दुनिया के सामने रखा था। हमने अपनी रिपोर्ट में बताया था कि किस तरह से हजारों बच्चों के भविष्य को बनाने की जिम्मेदार महिला परवीन शेख सोशल मीडिया पर न सिर्फ हमास समर्थक, बल्कि एंटी हिंदू पोस्ट को भी लाइक करती है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तुलना कुत्ते से करती है।

ऑपइंडिया की रिपोर्ट के बाद सोमैया स्कूल ने 25 अक्टूबर 2024 को कहा था कि वो परवीन शेख के कारनामों की जाँच के बाद उचित कदम उठाएगा। सोमैया ट्रस्ट ने ऑपइंडिया की रिपोर्ट के जवाब में कहा था कि हमें परवीन शेख के इस पहलू के बारे में पता नहीं था, ये पूरी तरह से अस्वीकार्य है। सोमैया ट्रस्ट ने कहा कि परवीन शेख के बारे में सामने आई जानकारियाँ चिंता पैदा करने वाली हैं, और वो इस मामले को देख रहे हैं। सोमैया ट्रस्ट ने लिखा, “आज हमारे संज्ञान में लाए जाने तक हम इस मामले से अनजान थे। हम ऐसी भावनाओं (परवीन शेख की) से सहमत नहीं हैं। यह निश्चित रूप से चिंताजनक है। हम मामले की जाँच कर रहे हैं।”

गौरतलब है कि सोमैया ट्रस्ट द्वारा संचालित सोमैया स्कूल मुंबई के घाटकोपर-ईस्ट इलाके में आने वाले विद्या विहार में स्थित है। परवीन शेख 12 साल से स्कूल से जुड़ी हुई थी, जिनमें से 7 साल वो बतौर प्रिंसिपल काम कर चुकी थी। लेकिन अब उसके खिलाफ कार्रवाई हुई है और उसे पद से हटा दिया गया है।

हालाँकि इस मामले में लेफ्ट और लिबरल मीडिया ने परवीन शेख का भरसक बचाव करने की कोशिश की थी। वामपंथी इकोसिस्टम ने परवीन शेख के इंटरव्यू छापे और उसे अपनी कट्टरपंथी विचारधारा का बचाव करने का खूब मौका दिया, लेकिन लेफ्ट-लिबरल इकोसिस्टम की ये कोशिशें उसके काम नहीं आई और अब सोमैया ट्रस्ट ने परवीन शेख को पद से चलता कर दिया है।

‘विरासत टैक्स’ से बड़े कारोबार होंगे चौपट, गरीबों को भी नुकसान: अमेरिकी अर्थशास्त्री ने बताया भारत को बर्बाद कर देगा राहुल गाँधी का आइडिया

कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी और इंडियन ओवरसीज कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष सैम पित्रोदा ने पिछले दिनों अमेरिका का हवाला देते हुए विरासत टैक्स लागू करने की बात की थी। इसके बाद देश भर में जो उनकी फजीहत हुई उससे सब वाकिफ हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक ने इस टैक्स के खिलाफ लोगों को आगाह किया। अब इस संबंध में अमेरिकी अर्थशास्त्री गौतम सेन का बयान आया है। उन्होंने बताया है कि जिस अमेरिका का उदाहरण देकर कॉन्ग्रेस इस टैक्स की जरूरतें समझा रही है वो असल में कितना नुकसानदायक है।

गौतम सेन का कहना है कि राहुल गाँधी का संपत्ति का बँटवारा का फॉर्मूला भारत में काम नहीं करेगा। उन्होंने न्यूज एजेंसी ANI से बातचीत में कहा, “यह भारत में काम नहीं करेगा। यहाँ बड़ी दौलत वाले बहुत कम लोग हैं। इसके बाद जो हैं भी, उन लोगों ने अपनी पूंजी को कारोबार में लगा रखा है। यदि उस पूंजी को सरकार अधिग्रहित करें या फिर 55 फीसदी तक का विरासत टैक्स वसूला जाए तो धंधा ही रुक जाएगा।”

गौतम सेन ने आगे कहा, “मेरा पॉइंट है कि देश कि 0.5 फीसदी आबादी से टैक्स वसूलने के लिए आप बड़े पैमाने पर कारोबारों को नुकसान पहुँचाएँगे एवं और इससे उन गरीब लोगों को ही नुकसान होगा, जो उस पर निर्भर हैं।”

गौतम सेन बताते हैं, “अमेरिका में कोई विरासत टैक्स नहीं है। वहाँ एस्टेट ड्यूटी लगती है और गिफ्ट टैक्स है। अमेरिका में 2022 तक मरने वाले लोगों में से महज 0.22 फीसदी के परिजनों ने यह अदा किया था। पूरे अमेरिका में सिर्फ 4000 लोगों पर एस्टेट ड्यूटी लगती है। इसकी वजह यह है कि छूट की लिमिट इतनी ज्यादा है कि कम ही लोग इसके दायरे में आते हैं।”

गौतम सेन कहते हैं कि अमेरिका में भी अमीर लोगों ने अपनी ज्यादातर पूंजी ट्रस्ट्स में लगा रखी है। ऐसे में वहाँ का उदाहरण भारत में देना गलत है। इसके अलावा उन्होंने कहा कि भारत के सभी कारोबारों और लोगों का सर्वे कराना भी अव्यवहारिक है। भारत में 2.4 फीसदी से भी कम लोग इनकम टैक्स देते हैं। इस समूह में भी महज 12 लाख लोग ऐसे हैं, जिनके पास अथाह दौलत है। इन लोगों के पास भी पूंजी घर में नहीं रखी है। ऐसे में उन्हें सरेंडर करने के लिए कहना बिजनेस को ठप कराना होगा। इससे देश में एक अराजकता पैदा हो जाएगी।

उन्होंने विरासत टैक्स को लेकर बोला, “जिसने भी इस विचार के बारे में सोचा था, वह बहुत वास्तविक रूप से नहीं सोच रहा था। अब हमारे पास जो कुछ भी है उसमें पहले की तुलना में एक-एक बहुत बड़ा सुधार हुआ है। हमारे पास एक अविश्वसनीय संयोजन है जो लगभग कभी हासिल नहीं किया गया था। यह निवेश के माध्यम से धन जुटाने और बँटवाने के साथ बुनियादी ढांचे का संयोजन है।”

सेन कहते हैं, ” अगर इससे अगर कुछ हासिल भी करते हैं तो यह एक बहुत समझदारी वाली सोच नहीं है। यह आपको अपने बच्चों और पोते-पोतियों से दूर ले जाएगा। ऐसे में जो कोई ऐसा करना चाहता है, वह भारत का मित्र नहीं है। भारत की राजनीतिक और आर्थिक अराजकता तुरंत चीन-पाकिस्तान जैसे देशों को आक्रमण करने के लिए उकसाएगी, क्योंकि वे भारत के साथ हिसाब बराबर करने और भारतीय क्षेत्र को जब्त करने के अवसरों का इंतजार कर रहे हैं। इसलिए जो भी ऐसा करना चाहता है, वह भारत का दोस्त नहीं है।”

राहुल गाँधी के संपत्ति बँटवारे के विचार पर, अर्थशास्त्री गौतम सेन जोर देकर कहते हैं, “यह भारत में काम नहीं करेगा … मेरा तर्क यह है कि जिस व्यक्ति के पास संपत्ति है उनकी आबादी कुल आबादी के डेढ़ प्रतिशत से भी कम है। ऐसे में उनका सब कुछ छीनने से आपको जो कुल कर की राशि मिलेगी वह शेष 98-99% लोगों के जीवन को बेहतर बनाने के लिए पर्याप्त नहीं होगी। वे बस पीड़ित होंगे। ध्यान रहे, आपको यह सर्वे हर दो साल में करना होगा। हमारे यहाँ पिछले 10 वर्षों में विकास से, वास्तविक वस्तुओं से बेहतर पुनर्वितरण है।”

यूँ ही PM मोदी ने नहीं जताया राम मंदिर पर बाबरी ताले का खतरा, रामलला की मूर्ति हटवाने पर अड़ गए थे नेहरू: इंदिरा गाँधी ने भी लिया था बदला

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मंगलवार (7 मई, 2024) मध्य प्रदेश के धार में एक जनसभा को संबोधित कर रहे थे। इस जनसभा में पीएम मोदी ने राम मंदिर को लेकर बात करते हुए बताया कि उन्हें 400 सीट क्यों चाहिए। पीएम मोदी ने कहा है कि उनकी सरकार को 400 सीट इसलिए चाहिए ताकि कॉन्ग्रेस अयोध्या में राम मंदिर पर बाबरी ताला ना लगा दे।

पीएम मोदी ने कहा, “मोदी 400 सीटें क्यों माँग रहा है, यह देश को जानना जरूरी है। मोदी को 400 सीटें चाहिए ताकि मैं INDI गठबंधन की हर साजिश को रोक सकूँ। मोदी को 400 सीट चाहिए ताकि कॉन्ग्रेस अयोध्या में राम मंदिर पर बाबरी ताला ना लगा दे।”

पीएम मोदी के इस बयान से ठीक एक दिन पहले आचार्य प्रमोद कृष्णम ने भी इसी तरह की साजिशों का दावा किया था। तीन दशक तक कॉन्ग्रेस नेता रहे आचार्य प्रमोद कृष्णम ने बताया था राहुल गाँधी कॉन्ग्रेस सरकार बनने पर राम मंदिर को लेकर सुप्रीम कोर्ट के निर्णय को पलटने की योजना बना चुके थे। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का राम मंदिर को लेकर फैसला पलटने की बात राहुल गाँधी ने एक मीटिंग में की थी।

पीएम मोदी और आचार्य प्रमोद कृष्णम कॉन्ग्रेस की राम मंदिर की मंशा को लेकर जो आशंका व्यक्त कर रहे हैं, वह हवा-हवाई नहीं है। कॉन्ग्रेस का राम मंदिर को लेकर जो दृष्टिकोण रहा है और अतीत में उसने जो किया है, उससे लगता है कि यदि कॉन्ग्रेस सरकार में आती है तो तुष्टिकरण के एजेंडे को धार देने के लिए वह फिर से कोई तिकड़मी रास्ता अपना सकती है।

कॉन्ग्रेस आजादी के बाद से ही राम मंदिर को लेकर किए गए प्रयासों में रोड़ा अटकाते आई है और इसके लिए प्रयास करने वालों को दण्डित तक किया है। देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू तक राम मंदिर में मूर्तियाँ हटाने को लेकर पत्र लिख रहे थे।

कॉन्ग्रेस के इन प्रयासों का बड़ा उदाहरण ICS अधिकारी केके नायर को लेकर की गई कार्रवाई है। नायर को 1 जून, 1949 को  अयोध्या (फैजाबाद) के उपायुक्त सह जिला मजिस्ट्रेट के रूप में नियुक्त किया गया था। अयोध्या का वह दौर उनकी जिंदगी का अहम हिस्सा बन गया था। नायर को राम जन्मभूमि मुद्दे पर एक रिपोर्ट करने के लिए उत्तर प्रदेश की कॉन्ग्रेस सरकार की तरफ से एक पत्र मिला था।

इस मुद्दे पर रिपोर्ट को प्रस्तुत करने के लिए उन्होंने अपने सहायक गुरु दत्त सिंह को भेजा। जिसके बाद 10 अक्टूबर, 1949 को सिंह ने अपनी रिपोर्ट में, उस स्थान पर एक भव्य राम मंदिर के निर्माण की सिफारिश की। सिंह ने स्थल का दौरा कर यह देखा कि उस स्थल के लिए हिंदू और मुस्लिम आपस में लड़ रहे थे।

उन्होंने लिखा, ”हिंदू समुदाय ने इस आवेदन में एक छोटे मंदिर के बजाय एक विशाल मंदिर के निर्माण का सपना देखा है। इसमें किसी तरह की परेशानी नहीं है। उन्हें अनुमति दी जा सकती है। हिंदू समुदाय उस स्थान पर एक अच्छा मंदिर बनाने के लिए उत्सुक है, जहाँ भगवान रामचंद्र जी का जन्म हुआ था। जिस भूमि पर मंदिर बनाया जाना है, वह नजूल (सरकारी भूमि) है।” हालाँकि, हिन्दुओं को तब की कॉन्ग्रेस सरकार ने मंदिर बनाने की अनुमति नहीं दी। इसके उलट रामलला विराजमान की मूर्तियों को हटाने का आदेश जरूर दिया गया।

नेहरू का निर्देश, फिर भी नहीं झुके केके नायर

प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के निर्देश पर, उत्तर प्रदेश के कॉन्ग्रेसी मुख्यमंत्री गोविंद वल्लभ पंत ने राम मंदिर से हिंदुओं को बेदखल करने की कोशिश की। हालाँकि, केके नायर ने हिन्दुओं को राम मंदिर से हटाने का निर्णय मानने से इनकार कर दिया। उन्होंने प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री का आदेश नहीं माना। उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि हिंदू उस स्थल पर पहले से पूजा कर रहे हैं। नायर ने राम मंदिर से मूर्तियों को हटाने से भी इनकार कर दिया। कॉन्ग्रेस सरकार ने नायर को इसकी सजा दी और उन्हें जिला मैजिस्ट्रेट के पद से भी निलंबित कर दिया।

यानी जिस अधिकारी ने देश की बहुसंख्यक आबादी की आस्था को चोट पहुँचाने से इनकार कर दिया, उसे कॉन्ग्रेस ने निलम्बित करके अपना बदला लिया। हालाँकि,नायर ने कॉन्ग्रेस सरकार के खिलाफ मुकदमा लड़ा था और उन्हें अपना ICS का पद वापस मिल गया था। राम मंदिर के लिए प्रयास करने वाले नायर बाद में सांसद बने थे। उनकी पत्नी भी सांसद बनी थीं। हिन्दुओं के पूजा अधिकार को ना छीनना कॉन्ग्रेस को लम्बे समय तक चुभता रहा और इंदिरा गाँधी ने नायर और उनकी पत्नी को आपातकाल के दिनों में गिरफ्तार भी करवाया था।

लेकिन इन घटनाओं से समझा जा सकता है कि कॉन्ग्रेस यदि सत्ता में होती है तो वह राम मंदिर को लेकर कैसा रुख अपनाती है। इसका एक और उदाहरण 1992 में लाया गाया प्लेसेस ऑफ़ वरशिप एक्ट है, जो कि हिन्दुओं को उनसे छीने गए पूजास्थलों पर दावा करने से रोकता है।

ऐसे में पहले आचार्य प्रमोद कृष्णम का कॉन्ग्रेस की राम मंदिर को लेकर योजना बताना और फिर पीएम मोदी का इस शंका को लेकर चेताना, सामान्य बात नहीं है। पुराने उदाहरणों ने यह सिद्ध किया है कि कॉन्ग्रेस सत्ता में रहते हुए राम मंदिर के विरुद्ध काम करते आई है।

जिस जहाँगीर आलम के घर से ED को मिले ₹32.5 करोड़, उसकी सैलरी बस ₹15 हजार: बनियान में दिखता, पुरानी स्कूटी से घूमता

झारखंड में भ्रष्टाचार का बड़ा मामला उजागर हुआ है। कॉन्ग्रेस नेता और चंपई सरकार के मंत्री आलमगीर आलम के पीएस से जुड़े ठिकानों पर ईडी की रेड में 32 करोड़ रुपए अधिक की नकदी बरामद हो चुकी है, तो सोने का भी बड़ा भंडार मिला है। यही नहीं, आलमगीर आलम के PS संजीव लाल के जिस निजी नौकर से जहाँगीर आलम के फ्लैट से इतने रुपए मिले हैं, वो बेहद आम जिंदगी जीता था। वो फ्लैट पर जाने के लिए पुरानी स्कूटी का इस्तेमाल करता था और थैलों में पैसे भरकर फ्लैट में ले जाता था। वो फ्लैट में 1-2 घंटे रुकता था और खामोशी से निकल जाता था।

कौन है जहाँगीर आलम?

कॉन्ग्रेस नेता आलमगीर आलम के सरकारी PS संजीव लाल का निजी नौकर है, जो भ्रष्टाचार से मिले पैसों की रखवाली करता था। वो पैसों को फ्लैट में रखता था और फ्लैट की देखरेख करता था। अभी ईडी उसे गिरफ्तार कर चुकी है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, जहाँगीर आलम की सीधी पहुँच आलमगीर आलम तक थी। उसने फ्लैट के मालिक को 40 लाख रुपए नकद देकर 6 माह पहले राँची के गाड़ीखाना चौक स्थित सर सैयद रेसीडेंसी में फर्स्ट फ्लोर पर फ्लैट खरीदा था। उसने पैसे भी एक ही बार में दिए थे और वो आसपास और भी फ्लैट ढूँढ रहा था।

वेतन 15 हजार, पुरानी स्कूटी से चलता था जहाँगीर आलम

जहाँगीर आलम सर सैयद रेसीडेंसी में जब भी आता, अपने हाथ में थैला लिए रखता। इन थैलों में पैसे भरे होते। वो 8-10 दिन में एक बार आता, पैसों को ठिकाने लगाता और एक-2 घंटे में ही खामोशी से चला जाता था। उसने फ्लैट की सुरक्षा मजबूत करने के लिए गेट पर ही लोहे की ग्रिल लगवाई थी। वो आने-जाने के लिए पुरानी स्कूटी का इस्तेमाल करता था, इसलिए कभी किसी का ध्यान ही नहीं गया कि वो इसके पैसों की रखवाली कर रहा है।

बताया जा रहा है कि जिस जहाँगीर आलम के पास 32.5 करोड़ रुपए से ज्यादा की नकदी मिली है, उसका वेतन सिर्फ 15 हजार रुपए ही है। हालाँकि संजीव लाल के पास से जो 2 कारें मिली हैं, उनमें से एक कार जहाँगीर आलम के नाम से खरीदी गई थी, जबकि वो खुद पुरानी स्कूटी से चलता था। जहाँगीर आलम कई बार गंजी-बनियान पहनकर घूमता दिख जाता था। वो सामने पड़ जाने वाले आसपास के लोगों से बस दुआ-सलाम कभी कभार कर लेता था, बाकी किसी से सीधे तौर पर बात नहीं करता था। बताया जा रहा है कि वो मूल रूप से चतरा जिले का रहने वाला बताया जा रहा है।

कैसे जमा किया गया इतना पैसा?

झारखंड के ग्रामीण विकास विभाग में घूसखोरी और वसूली के इस खेल का लिंक जुड़ा है 13 नवंबर 2019 की एक गिरफ्तारी से, जब एंटी करप्शन ब्यूरो ने ग्रामीण विकास विभाग के चीफ इंजीनियर वीरेंद्र राम के अंदर काम करने वाले जेई सुरेश प्रसाद वर्मी को 10 हजार की रिश्वत लेते दबोचा था। सुरेश वर्मा वीरेंद्र राम के ही मकान में जमशेदपुर में रहता था। उसके घर पर 2.44 करोड़ कैश मिला था, जिसके बारे में सुरेश ने ही बताया था कि ये पैसे वीरेंद्र राम के हैं, जो उसके रिश्तेदार आलोक रंजन ने रखे थे। इसके बाद इस मामले की जाँच ईडी ने संभाल ली।

ईडी की जाँच में पता चला कि ग्रामीण विकास विभाग और ग्रामीण कार्य विभाग में तगड़ा खेल चल रहा है। हर ठेके पर 3.2 प्रतिशत का कमीशन सेट है। इसमें चीफ इंजीनियर वीरेंद्र राम के पास 0.3 प्रतिशत पैसा ही आता था, बाकी पैसा नेताओं, अधिकारियों और इंजीनियरों के गैंग में बंट जाता था। यहीं से आमलगीर आलम, संजीव लाल समेत अन्य की भूमिका की जाँच शुरू हो गई। आलमगीर आलम के खिलाफ ईडी अप्रैल 2022 से एक अन्य मामले में जाँच कर रही है, वो अवैध खनान से जुड़ा मामला था। हालाँकि अब उनके पीएस संजीव लाल के ठिकानों से जब्त नकदी के बाद उनकी मुसीबतें बढ़ सकती हैं।

10 लाख में केवल 7 पर साइडइफेक्ट्स, फिर भी कोरोना वैक्सीन वापस ले रही AstraZeneca: जानिए क्यों दुनिया भर में रोकी सप्लाई

ब्रिटेन फार्मा कंपनी एस्ट्राजेनेका ने दुनिया भर से अपनी कोविड-19 की वैक्सीन वापस मंगाने का फैसला किया है। ऐसा दावा द टेलिग्राफ की रिपोर्ट में है। रिपोर्ट में बताया गया है कि कंपनी अब वैक्सीन की मैन्युफैक्चरिंग और सप्लाई नहीं करेगी।

एस्ट्राजेनेका का यह फैसला ठीक उस समय आया है जब कंपनी द्वारा बनाई कोविड वैक्सीन के साइडइफेक्ट्स पर मीडिया में चर्चा हो रही थी। हालाँकि कंपनी का खुद का कहना है कि उन्होंने साइडइफेक्ट्स की वजह से ऐसा निर्णय नहीं लिया बल्कि वैक्सीन को व्यावसायिक कारणों से बाजार से हटाया गया है।

कंपनी के अनुसार, अब मार्केट में कई दूसरी एडवांस्ड वैक्सीन उपलब्ध हैं, जो वायरस के विभिन्न वैरिएंट्स से लड़ सकती है। ऐसे में एस्ट्राजेनेका की वैक्सीन की मैन्युफैक्चरिंग और सप्लाई बंद कर दी गई है।

इससे पहले एस्ट्राजेनेका ने इस साल 5 मार्च को वैक्सीन वापस लेने का आवेदन किया था, जो कि 7 मई से लागू हो गया है। इस निर्णय के बाद अब यूरोपीय संघ में इस वैक्सीन का उपयोग नहीं किया जा सकता है।

एस्ट्राजेनेका फार्मूले पर बनी कोविड वैक्सीन के साइड इफेक्ट

बता दें कि साल 2020 में ऑक्सफॉर्ड यूनिवर्सिटी के साथ मिलकर एस्ट्राजेनेका ने कोरोना वैक्सीन बनाई थी। इसके फॉर्मूले पर सीरम इंस्टीट्यूट ने भी कोविशील्ड वैक्सीन बनाई थी। एक आंकड़े के अनुसार भारत में कम से कम 175 करोड़ लोगों ने कोविशील्ड का टीका लिया था।

बाद में एस्ट्राजेनेका के फॉर्मूले पर बनी वैक्सीनों से होने वाले साइडइफेक्ट्स की चर्चा शुरू हुई। फरवरी में कंपनी ने ब्रिटिश हाईकोर्ट को बताया कि उनकी वैक्सीन से खतरनाक साइड इफेक्ट हो सकता है जैसे थ्रॉम्बोसिस थ्रॉम्बोसाइटोपेनिया सिंड्रोम यानी TTS आदि का। इस बीमारी से शरीर में खून के थक्के जम जाते हैं और प्लेटलेट्स की संख्या गिर जाती है।

क्यों नहीं है परेशान होने की जरूरत

कुछ लोग इस खबर को सुनने के बाद परेशान हो गए थे। हालाँकि वैक्सीन को लेकर मचे हल्ले के बीच इंडियन काउंसिल फॉर मेडिकल रिसर्च (ICMR) के वैज्ञानिक रमन गंगाखेड़कर ने मीडिया के जरिए लोगों को समझाया था कि ऐसी खबरें सुन लोगों को चिंता करने की आवश्यकता नहीं है।

उन्होंने बताया था कि वैक्सीन लेने वाले 10 लाख लोगों में से 7-8 को इसके साइड इफेक्ट का खतरा है। उन्होंने कहा कि पहली डोज लेने के बाद खतरा अधिक होता है, दूसरी दोसे लेने पर यह खतरा कम हो जाता है और तीसरे डोज के साथ यह और कम हो जाता है। उन्होंने यह भी कहा कि अगर कोई साइड इफेक्ट होता भी है तो यह दो-तीन महीने में सामने आते हैं।

उन्होंने यह भी बताया कि TTS साइड इफेक्ट कोई नई बात नहीं है और जब वैक्सीन को मंजूरी दी गई थी तो उसके 6 महीने के भीतर TTS को एक दुर्लभ साइड इफेक्ट के रूप में पहचान लिया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि जहाँ साइड इफेक्ट का खतरा मात्र 10 लाख में से 7-8 लोगों को है तो वहीं इसका फायदा करोड़ों को लोगों को मिला था।