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‘संजय राउत ने मेरे पीछे जासूस छोड़े, अब मिल रही धमकी’: ₹1000 करोड़ के घोटाले की मुख्य गवाह का खुलासा

उद्धव ठाकरे ग्रुप की शिवसेना के राज्यसभा सांसद संजय राउत मुंबई के पात्रा चॉल घोटाला मामले में मनी लॉन्ड्रिंग के मुख्य आरोपित हैं। ईडी इस केस की जाँच कर रही है। अब इस केस की मुख्य गवाह ने आरोप लगाया है कि संजय राउत उन्हें और उनके परिवार को धमका रहे हैं। यही नहीं, उनकी जासूसी कराई जा रही है। इस केस की मुख्य गवाह डॉ स्वप्ना पाटकर ने बाकायदा पत्र लिखकर कार्रवाई की माँग की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मुंबई के पात्रा चॉल घोटाले में मुख्य गवाह स्वप्ना पाटकर ने शिवसेना नेता संजय राउत पर धमकाने का आरोप लगाया है। उन्होंने विधान परिषद की उपाध्यक्ष को लिखे पत्र में आरोप लगाया है कि वे उनके परिवार को परेशान कर रहे हैं। उन्होंने मामले में विधान परिषद की उपाध्यक्ष नीलम ताई गोरहे से खुद की सुरक्षा करने की गुहार लगाई है। पाटकर ने यह भी बताया कि पहले राउत ने उनके पीछे जासूस लगाए अब उन्हें परेशान कर रहे हैं। 1034 करोड़ के इस घोटाले की जाँच ईडी कर रही है।

मुंबई के पात्रा चॉल मनी लॉन्ड्रिंग मामले में मुख्य गवाह पाटकर ने पत्र में लिखा, “संजय राउत मुझे और मेरे परिवार को परेशान कर रहे हैं। मैं जहाँ भी जाती हूँ, मेरा पीछा किया जाता है। 3 मई को बीकेसी में भी मेरा पीछा किया गया था। मुझ पर पहले भी हमला हो चुका है। एक मामला दर्ज किया गया था, लेकिन कुछ नहीं हुआ।”

उन्होंने दावा किया कि संजय राउत ने उन पर नजर रखने के लिए जासूसों को काम पर रखा था। “एक जासूस को भी गिरफ्तार किया गया था, लेकिन राउत के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई। मुझे धमकी दी और मेरे साथ दुर्व्यवहार किया, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई। उन्हें पुलिस स्टेशन नहीं बुलाया गया। मुझे दुबई और पाकिस्तान से धमकी भरे कॉल आए। मेरे वाहन पर हमला किया गया। घर पर शराब की बोतलें फेंकी गईं।”

गौरतलब बै कि मुंबई के गोरेगांव में एक इलाका सिद्धार्थ नगर है। इसे पॉल चात्रा के नाम जाना जाता है। यहां 47 एकड़ में 672 घर बने हैं। 2008 में म्हाणा ने पात्रा चॉल को रीडेवलप के लिए प्रोजेक्ट शुरू किया। इस प्रोजेक्ट के तहत लोगों को 672 फ्लैट दिए जाने थे और बची जमीन को प्राइवेट डेवलपर्स को बेचना था। इतने साल बीत जाने के बाद लोगों को अपने फ्लैट का इंतजार है। ईडी ने 1034 करोड़ रुपये के पात्रा चॉल भूमि घोटाला मामले में संजय राउत को 1 अगस्त को गिरफ्तार भी किया था लेकिन, वो जमानत पर बाहर आ गए।

अब विद्यार्थियों के माता-पिता को उठाना होगा स्कूल में AC का खर्च: दिल्ली हाईकोर्ट का आदेश, कहा – ये भी स्मार्ट क्लास और लैब के ही जैसा

पहले से ही भारी फीस वसूल रहे दिल्ली के निजी स्कूल अब एयर कंडीशन के नाम पर और शुल्क ले सकेंगे। दिल्ली हाई कोर्ट ने इसकी इजाजत दे ही है। दरअसल, एक मामले की सुनवाई में दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा कि स्कूल में एयर कंडीशन (AC) का खर्च विद्यार्थियों के माता-पिता को उठाना होगा। इसका आर्थिक बोझ अकेले स्कूल मैनेजमेंट पर नहीं डाला जा सकता है।

दरअसल, दिल्ली में पढ़ाई के लिए या दो सरकारी स्कूल हैं या प्राइवेट स्कूल। प्राइवेट स्कूल बेहद महँगे हैं। निजी स्कूलों की औसत फीस आमतौर पर 6,000 रुपए प्रतिमाह है। अगर इसमें बस का किराया भी जोड़ दिया जाए तो यह 8-8.5 हजार रुपए प्रतिमाह पहुँच जाता है। ऐसे में अगर कोई स्कूल AC के नाम पर प्रतिमाह 2000 रुपए अतिरिक्त वसूलता है तो यह उन पर भारी बोझ बन जाता है।

ऐसा ही एक मामला 2 मई 2024 को कोर्ट के समक्ष आया। माता-पिता ने अपनी याचिका में कहा कि उनका लड़का दिल्ली के एक प्राइवेट स्कूल में कक्षा 9 का छात्र है। स्कूल प्रशासन बच्चों की क्लास में AC उपलब्ध कराने के लिए उनसे हर महीने 2,000 रुपए फीस वसूल रहा है। बच्चे के माता-पिता का तर्क था कि AC की सुविधा देने की जिम्मेदारी स्कूल मैनेजमेंट की है।

इस पर सुनवाई करते हुए दिल्ली हाई कोर्ट के एक्टिंग चीफ जस्टिस मनमोहन और जस्टिस मनमीत अरोड़ा की बेंच ने कहा कि AC का चार्ज लेबोरेटरी और स्मार्ट क्लास के लिए दी जाने वाली फीस की तरह है। कोर्ट ने कहा कि स्कूल ने जो फीस रसीद जारी की है, उसमें एयर कंडीशनर के लिए अलग से पैसों का जिक्र है। इसलिए स्कूल चुनते समय वहाँ की सुविधाओं और कीमत का ध्यान रखना चाहिए।

कोर्ट ने कहा कि यह माता-पिता की जिम्मेवारी है कि इन सब बातों का वह ध्यान रखें। कोर्ट ने कहा कि क्लास में एयर कंडीशन की सुविधा देने का आर्थिक बोझ अकेले स्कूल मैनेजमेंट पर नहीं डाला जा सकता। इसके साथ ही कोर्ट ने माता-पिता द्वारा दायर याचिका खारिज कर दी। वहीं, दिल्ली का शिक्षा निदेशालय ने कोर्ट में कहा कि इस तरह की मिल रही शिकायतों पर वह जाँच कर रहा है।

पाकिस्तानी जासूसों के लिए जुटाता था पैसे, इनामी ISI एजेंट जियाउल हक को यूपी ATS ने दबोचा: ISI को भेज रहा था भारतीय सेना की ख़ुफ़िया सूचनाएँ

उत्तर प्रदेश के आतंकवाद निरोधक दस्ते (ATS) ने भारतीय सेना की सूचनाएँ पाकिस्तान को भेज रहे एक ISI एजेंट को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार एजेंट का नाम जियाउल हक है। जियाउल पर 50 हजार रुपए का इनाम घोषित था। मूल रूप से बिहार के निवासी जियाउल हक को शनिवार (4 मई, 2024) को उत्तर प्रदेश के संतकबीरनगर जिले से पकड़ा गया है। जियाउल हक से पूछताछ के बाद उसके नेटवर्क से जुड़े अन्य संदिग्धों का खुलासा होने की उम्मीद जताई जा रही है। ATS मामले की जाँच कर रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, शनिवार को UP ATS को फरार चल रहे जियाउल हक के संतकबीरनगर जिले में होने की सूचना मिली थी। इस सूचना पर ATS ने जिले में अपना जाल बिछाया। सूचना सही पाई गई और जियाउल हक खलीलाबाद रेलवे स्टेशन के पास पुलिस को मिल गया। ATS ने जियाउल हक को दबोच लिया और विस्तृत पूछताछ के लिए अपने साथ ले गई। आरोपित मूल रूप से बिहार के पश्चिम चम्पारण का निवासी बताया जा रहा है। वह भारतीय सेना की ख़ुफ़िया जानकारियाँ पाकिस्तान को भेजने वाली ISI टीम का सदस्य है।

क्या था मामला

बताते चलें कि उत्तर प्रदेश ATS ने शुक्रवार (10 नवम्बर, 2023) को इजहारुल हुसैन और रियाजुद्दीन नाम के 2 ISI एजेंटों के खिलाफ FIR दर्ज की थी। तब ATS ने पता लगाया था कि मार्च से अप्रैल 2022 के बीच गाजियाबाद के रियाजुद्दीन के खाते में संदिग्ध तौर पर 60 से 70 लाख रुपए ट्रांसफर किए गए थे। इन खातों में बिहार के पश्चिम चम्पारण निवासी इजहारुल हुसैन का मोबाइल नंबर ऑपरेट हो रहा था। तब ATS ने गहराई से जाँच में पाया था कि ये पैसे भारत की सेना के साथ अन्य महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों की जानकारियाँ हासिल करने के मकसद से भेजे जा रहे थे।

इसके अलावा यह फंडिंग भारत सरकार को अस्थिर करने और सुरक्षा तंत्र को प्रभावित करने के भी काम आने वाले थे। जानकारी में यह भी सामने आया था कि पाकिस्तान के इशारे पर देश के महत्वपूर्ण ठिकानों की रेकी कर रहे इस गिरोह में रियाजुद्दीन और इजहारुल के अलावा अन्य मेंबर भी मौजूद थे। इसी केस की जाँच में बिहार के जियाउल हक का भी नाम सामने आया था। बताया जा रहा है कि जियाउल न सिर्फ खुद सैन्य प्रतिष्ठानों की ख़ुफ़िया जानकारियाँ पाकिस्तान को भेज रहा था बल्कि ISI एजेंटों के लिए फंड भी जुटा रहा था।

सुरक्षा एजेंसियों को चकमा देने के लिए जियाउल नेपाल की सिम का प्रयोग करता था। वह इसी सिम से अपने सोशल हैंडल भी बना रखा था। जियाउल ISI एजेंटों के लिए पैसे पहुँचाने के लिए कई बैंक खातों का प्रयोग भी करता था। जाँच में नाम आने के बाद से जियाउल हक फरार हो गया था। ATS ने उसकी गिरफ्तारी पर 50 हजार का इनाम घोषित कर रखा था। आखिरकार 4 मई, 2024 को जियाउल हक को गिरफ्तार कर लिया गया।

‘118 की स्ट्राइक से रन बना कर चाहते हो कि तालियाँ बजे: विराट कोहली के साथ-साथ स्टार स्पोर्ट्स पर भी नाराज़ हुए सुनील गावस्कर, कहा – हमें नीचा दिखाया जा रहा

भारतीय क्रिकेट के महानतम खिलाड़ियों में शुमार सुनील गावस्कर ने फिर से विराट कोहली पर निशाना साधा है। उन्होंने विराट कोहली के स्ट्राइक रेट पर फिर से गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने गुजरात टाइटंस और रॉयल चैलेंजर्स बेंगलोर के बीच मैच के दौरान कहा कि अगर कोई 118 की स्ट्राइक रेट से रन बनाता है और 14वें-15वें ओवर में बिना मैच बचाए आउट हो जाता है, इसके बावजूद वो चाहता है कि लोग तारीफ करे, तो फिर ये अलग बात है। दरअसल, विराट कोहली ने इस आईपीएल जमकर रन बनाए हैं, लेकिन उनकी धीमी बल्लेबाजी की वजह से कई करीबी मैचों में आरसीबी को हार झेलनी पड़ी थी।

दरअसल, अपनी धीमी बल्लेबाजी पर निशाने पर आए विराट कोहली ने गुजरात टाइटंस और आरसीबी के मैच में अच्छी बल्लेबाजी की थी। उन्होंने 44 गेंदों पर 70 रन बनाए थे। इसके बाद उनसे पूछा गया था कि वो धीमे स्ट्राइक रेट और स्पिनरों के सामने दिक्कत को लेकर उठ रहे सवालों पर क्या सोचते हैं। इसके जवाब में विराट कोहली ने कहा था कि वो मैदान से बाहर हो रही बातों पर ध्यान नहीं देते। मेरा मानना है कि आज की बैटिंग से सारे सवालों के जवाब मिल गए होंगे।

उन्होंने अपनी बुराई करने वाले कमेंटेटरों पर निशाना साधा था, जिसे बार-बार टीवी पर दिखाया जा रहा था। इस बात से सुनील गावस्कर नाराज हो गए। उन्होंने स्टार स्पोर्ट्स चैनल की भी आलोचना की थी कि एक खिलाड़ी के बयान को बार-बार दिखाकर कमेंटेटरों को नीचा दिखाया जा रहा है। इसी दौरान उन्होंने विराट कोहली पर और भी तीखे हमले बोले।

गावस्कर ने न केवल विराट की आलोचना की, बल्कि टेलीविजन पर ओपनर बल्लेबाज के उस बयान को ‘दर्जन बार’ दिखाने के लिए ब्रॉडकास्टर स्टार स्पोर्ट्स पर भी कटाक्ष किया। उन्होंने कहा, “अगर आपका स्ट्राइक रेट 118 है, आप आते हैं और पहली गेंद का सामना करते हैं, और फिर आप 14वें या 15वें ओवर में आउट हो जाते हैं और आपका स्ट्राइक रेट 118 है। इसके बावजूद अगर आप इसके लिए तालियाँ चाहते हैं, तो यह थोड़ा अलग है।”

गावस्कर ने आगे कहा, “लेकिन स्टार स्पोर्ट्स के लिए यह दिखाना कि कोई व्यक्ति अपने ही कमेंटेटरों को नीचा दिखा रहा है, मुझे यकीन नहीं है कि यह बहुत अच्छी बात है। इसलिए मुझे लगता है कि स्टार स्पोर्ट्स को यह समझने की जरूरत है कि उन्होंने इसे कई बार दिखाया है, हर किसी को संदेश मिल गया है।”

गावस्कर ने कोहली की बातों पर जवाब में कहा, “कमेंटेटरों ने सवाल तब उठाया, जब स्ट्राइक रेट 118 का था। मैं दूसरे कमेंटेटरों के बारे में नहीं जानता कि उन्होंने क्या कहा, लेकिन अगर आप 14-15वें ओवर में आउट होते हैं और तालियाँ चालते हैं, तो ये बिल्कुल अलग बात है।” उन्होंनेकहा कि हम जो देखते हैं, वही बोलते हैं। जरूरी नहीं कि हम किसी को पसंद या नापसंद करें तभी बोलें। हम तो तथ्यों पर बात कर रहे हैं।

बता दें कि आईपीएल 2024 में विराट कोहली ने सर्वाधिक 542 रन बनाए हैं और वो ऑरेंज कैप होल्डर हैं लेकिन ESPN क्रिकेटइंफो के इंपैक्ट प्वॉइंट्स के मुताबिक, उनके 542 रन महज 475 रनों के बराबर हैं। ऐसा कम स्ट्राइक रेट की वजह से भी हो सकता है। वहीं, सीएसके के कप्तान ऋतुराज गायकवाड़ ने 509 रन ही बनाए हैं, लेकिन इंपैक्ट प्वॉइंट के हिसाब से ये रन 505 रनों के बराबर हैं। वहीं, ट्रेविस हेड ने 396 रन ही बनाए हैं, लेकिन ये रन 480 रनों के बराबर हैं।

‘तुहो पागले हाउ’: जेल से निकलते ही ‘छोटे सरकार’ ने लालू यादव के धोखे को किया याद, बोले – गरीब को खाना और किसान को पैसा दे रहे PM मोदी, वो अच्छे लगते हैं

मोकामा के पूर्व विधायक अनंत सिंह के जेल से बाहर निकलने के साथ ही बिहार की राजनीति में एक नया मोड़ आ गया है। उनके सहारे न सिर्फ मुंगेर से जदयू के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष ललन सिंह बड़ी जीत का सपना देख रहे हैं, बल्कि पार्टी कई अन्य सीटों पर भी उनका इस्तेमाल करेगी। पैरल पर निकले अनंत सिंह ने समर्थकों के साथ दौरा भी शुरू कर दिया है। मोकामा सीट पर अनंत सिंह जदयू, निर्दलीय और राजद से जीत दर्ज कर चुके हैं। फ़िलहाल वहाँ से उनकी पत्नी नीलम देवी विधायक हैं।

नीलम देवी जीती तो RJD के टिकट पर थीं, लेकिन अब दोनों पति-पत्नी खुल कर NDA के लिए बल्लेबाजी कर रहे हैं। 2005 से ही पटना के मोकामा विधानसभा सीट पर अनंत सिंह का ही कब्ज़ा है। जेल से निकलने के बाद ‘ABP News’ को दिए गए इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि वो हमेशा से नीतीश कुमार के साथ थे, लेकिन पुलिस ने उन्हें फँसा दिया तो लालू यादव के बुलाने पर वो राजद सुप्रीमो के पास गए। बकौल अनंत सिंह, लालू यादव ने उनका साथ नहीं दिया, एक बकार नहीं बोला (यानी उनके समर्थन में चूँ तक नहीं किया)।

अनंत सिंह ने कहा कि जनता उनका भगवान है और विधायक बनने के लिए किसी के भी दरवाजे पर जाने की ज़रूरत उन्हें नहीं है, वो निर्दलीय भी जीतते हैं। लालू यादव पर धोखे का आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि लालू यादव ने उन्हें मदद का आश्वासन दिया था, मदद नहीं मिली तो वो हट गए। आशा क्षीण होने के सवाल पर अनंत सिंह ने कहा कि कोई आशा लेकर जाएगा और सामने वाला मदद नहीं करेगा तो बुरा नहीं लगेगा क्या? मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मुलाकात के सवाल पर उन्होंने दो टूक कहा कि कोई ज़रूरत नहीं है।

अनंत सिंह ने कहा कि उन्हें केवल जनता से मतलब रहता है, नेता-फेता वगैरह से नहीं। उन्होंने कहा कि जनता उनकी मालिक है, सब कुछ वही है, लोग इसी कारण उन्हें जानते हैं। आगे की रणनीति के सवाल पर अनंत सिंह ने कहा कि वो जनता से भेंट-मुलाकात करेंगे। मतदान के सवाल पर मोकामा के पूर्व विधायक ने कहा कि एक वोट से क्या होगा, वो वोट नहीं देते हैं। हालाँकि, बाद में उन्होंने कहा कि वोट दे देंगे। अनंत सिंह ने जदयू की सीटों में नुकसान के सवाल पर कहा कि ललन सिंह 5 लाख वोट से जीतेंगे।

जब पत्रकार निधि श्री ने पूछा कि आपके कह देने से, तो अनंत सिंह बोले – जनता बोलेगी, चुनाव में ज़्यादा दिन नहीं है। जब उनसे उनके दुःख, कष्ट और संघर्ष के दिनों को लेकर सवाल पूछा गया तो अनंत सिंह ने कहा, “हमरा कभी दुःख होबे नहीं करता है। हमरा जो होता है सब सुखे लगता है। दुःख हमको पता लगे तब न।” फँसाए जाने के अपने बयान की याद दिलाने पर उन्होंने कहा कि वो कहाँ कह रहे हैं कि उनको बचाया गया है? हालाँकि, अनंत सिंह ने कहा कि वो 20 वर्षों से घर नहीं गए।

अगरा बनाम पिछड़ा के नैरेटिव पर अनंत सिंह ने कहा कि सब कोई साथ है। उन्होंने अपने समर्थकों की तरफ भी इशारा किया और कहा कि इनमें सभी जाति के लोग हैं। उन्होंने जाति की राजनीति को गलत बताते हुए कहा कि राजनीति जाति नहीं बल्कि समाज से होता है। अनंत सिंह ने कहा कि नरेंद्र मोदी उन्हें अच्छे लगते हैं, वो फिर से प्रधानमंत्री बनेंगे क्योंकि वो गरीब को खाना देते हैं और किसान को पैसा देते हैं। अनंत सिंह ने सांसद बनने के सवाल पर कहा कि फ़िलहाल उनका क्षेत्र छोटा है।

जब उनसे दिल्ली में बड़ा घर-बँगला होने के सपने की बात की गई तो महिला पत्रकार से उन्होंने कहा, “तुहो पागल हाउ।” उन्होंने कहा कि किसे बड़ा घर अच्छा नहीं लगता है, किसे झोपड़ी अच्छा लगता है। उन्होंने कहा कि दिल्ली में उनका घर और फार्महाउस है, उन्हें इसके लिए सेहाय (तरसने) की ज़रूरत नहीं है। उन्होंने जनता से मिलने को अपना एकमात्र शौक करार दिया। वहीं ‘यूपी तक’ पर उन्होंने कहा कि लोग जब उनके हैं तो भीड़ किसके लिए रहेगा। उन्होंने कहा कि वो मुंगेर से राजद प्रत्याशी अशोक महतो को जानते तक नहीं हैं।

‘मुस्लिमों को आरक्षण देना देशद्रोह’: प्रोफेसर दिलीप मंडल ने बताया किसने संविधान को सबसे ज्यादा बदला, कहा – मनमोहन कैबिनेट में सिर्फ 1 OBC मंत्री था

कॉन्ग्रेस बार-बार मुस्लिमों को धर्म के आधार पर मुस्लिमों आरक्षण देने की बात करती है। जबकि भारत के संविधान में यह स्पष्ट रूप से कहा गया है कि धर्म के आधार पर रिजर्वेशन नहीं दिया जा सकता है। अगर धर्म के आधार के कोई आरक्षण देने की बात करता है तो वह संविधान विरोधी बात करता है। हालाँकि, वरिष्ठ पत्रकार दिलीप मंडल इसे देशद्रोही कहते हैं।

दरअसल, हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आरोप लगाया कि कॉन्ग्रेस पार्टी SC, ST और OBC समाज का आरक्षण छीनकर मुस्लिमों को देना चाहती है। कर्नाटक के आँकड़े इसकी पुष्टि भी करते हैं। वहाँ सभी शैक्षिणक संस्थानों एवं सरकारी नौकरियों में मुस्लिमों की सभी जातियों को OBC (अन्य पिछड़ा वर्ग) के अंतर्गत आरक्षण की सुविधा दी गई है।

पीएम मोदी ने कहा था कि जो हक़ बाबासाहेब ने दलितों, पिछड़ों एवं जनजातीय समाज को दिया, कॉन्ग्रेस और I.N.D.I. गठबंधन वाले उसे मजहब के आधार पर मुस्लिमों को देना चाहते हैं। एक चुनावी जनसभा के दौरान उन्होंने कहा कि वो वादा करे कि संविधान में ST, SC और OBC को जो आरक्षण मिला है, उसे वो कम कर के मुस्लिमों में नहीं बाँटेगी। इस बयान के बाद कॉन्ग्रेसियों ने पीएम मोदी की आलोचना शुरू कर दी थी।

बात 1994 की है जब वीरप्पा मोईली की नेतृत्व वाली कॉन्ग्रेस सरकार ने एक आदेश के बाद सारे मुस्लिमों को अन्य पिछड़ा वर्ग की सूची में डालकर आरक्षण दिया था। ये फैसला उन्होंने रेड्डी कमीशन की दी गई सिफारिश पर लिया था। इसमें 6 फीसद आरक्षण कैटेगरी 2बी के लोगों के लिए था जिन्हें ‘अधिक पिछड़ा’ कहा गया था। इस 6% में भी 4% रिजर्वेशन मुस्लिमों को दिया गया था।

इसके अलावा, 2% बौद्ध और ईसाई धर्म के ऐसे लोगों को दिया गया था, जो मूलत: अनुसूचित जाति के थे। इस आदेश को 24 अक्टूबर 1994 के बाद लागू होना था। हालाँकि इस बीच इस आरक्षण को सुप्रीम कोर्ट चुनौती दी गई और कर्नाटक सरकार के इस फैसले पर रोक लग गई। इसके बाद साल 1995 में देवगौड़ा की सरकार आई और मुस्लिमों के लिए ओबीसी कोटा दोबारा से आया।

ANI की संपादक स्मिता प्रकाश के साथ पॉडकास्ट में रिजर्वेशन को लेकर प्रोफेसर दिलीप मंडल ने कहा कि साल 2014 में जब प्रधानमंत्री के पद से जब मनमोहन सिंह जाते हैं, उस समय उनकी पूरी कैबिनेट में ओबीसी का सिर्फ मंत्री था। उन्होंने कहा कि पता नहीं कॉन्ग्रेस ओबीसी के हित की बात किस आधार पर कर रही है।

संविधान में बदलाव के लिए 400 पार सीट की बात पर उन्होंने कहा कि मोदी सरकार में कुल 8 संशोधन हुए हैं, जबकि इंदिरा गाँधी के शासन के पहले 10 साल में कुल 25 संशोधन हुए हैं। अगर संविधान बदलना होता तो मोदी सरकार बदल देती, क्योंकि 98 प्रतिशत मामलों में संविधान संशोधन के लिए बहुमत ही काफी है।

उन्होंने कहा, “भाजपा ने कास्ट सेंसस को सपोर्ट किया, बीजेपी ने प्रोमोशन में रिजर्वेशन का विरोध नहीं किया, बीजेपी ने लोगों को डिमोट नहीं किया। उनका पॉलिटिकल इक्वेशन अलाउ ही नहीं करता कि वे एसटी, एससी और ओबीसी के विरोध में खड़े हों। जिस दिन वो दिख गए, उस दिन बीजेपी की पॉलिटिक्स खत्म हो गई।”

प्रोफेसर मंडल ने कहा, “जिस सीबीआई कोर्ट अटल बिहारी वाजपेयी के समय लालू यादव को दोषी नहीं ठहराती है, वह सीबीआई कोर्ट मनमोहन सिंह के समय लालू को दोषी ठहरा देती है। राहुल गाँधी इंश्योर करते हैं कि ये आदमी (लालू यादव) जिंदगी में कभी पार्लियामेंट में वापस लौटकर ना आ पाए।”

72 साल के कमर अंसारी ने 9 साल की बच्ची से किया बलात्कार: चॉकलेट देने के बहाने दुकान के अंदर बुलाया, बोला – किसी को बताई तो माँ-बाप का क़त्ल कर दूँगा

महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई सटे ठाणे जिले में 9 साल की एक बच्ची से रेप का मामला सामने आया है। दुष्कर्म का आरोप कमर अंसारी पर लगा है जिसकी उम्र 72 वर्ष बताई जा रही है। कमर अंसारी बेकरी की दुकान चलाता है। घटना के समय पीड़िता उसकी दुकान से कुछ सामान खरीदने गई थी। बच्ची का रेप रेप दुकान के अंदर चॉकलेट के बहाने ले जा कर किया गया है। पुलिस ने FIR दर्ज कर के आरोपित बेकरी मालिक को गिरफ्तार कर लिया है। घटना गुरुवार (30 अप्रैल 2024) की बताई जा रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, घटना ठाणे शहर जिले के थानाक्षेत्र महात्मा फुले चौक की है। इस क्षेत्र में 72 साल का कमर अंसारी लम्बे समय से बेकरी की दुकान चलाता है। 30 अप्रैल की शाम बेकरी के पास की झुग्गी-झोपडी में रहने वाली एक 9 वर्षीया बच्ची दूध खरीदने कमर अंसारी की दुकान पर गई। आरोप है कि कमर अंसारी ने पहले पीड़िता को इधर-उधर की बातों में फँसाया और बाद में चॉकलेट खिलाने का लालच दे कर दुकान के अंदर वाले हिस्से में ले गया। यहाँ उसने पीड़िता से दुष्कर्म किया।

घटना के समय दुकान में कोई और मौजूद नहीं था। रेप के बाद कमर अंसारी ने पीड़िता को मुँह बंद रखने के लिए 10 रुपए थमाए। आरोप है कि कमर अंसारी ने बच्ची को धमकाते हुए कहा कि अगर उसने कहीं मुँह खोला तो उसके मम्मी-पापा दोनों का कत्ल कर दिया जाएगा। घर आ कर बच्ची ने अपने परिजनों को पूरी बात बता दी। बच्ची की 42 वर्षीया माँ ने इस घटना की शिकायत महात्मा फुले चौक पुलिस थाने में की। इस तहरीर में आरोपित पर कड़ी कार्रवाई की माँग की गई थी। पुलिस ने इस तहरीर पर 1 मई 2024 (बुधवार) को केस दर्ज कर के कमर अंसारी को गिरफ्तार कर लिया है।

इंस्पेक्टर शैलेश साल्वी ने मीडिया से बातचीत के दौरान इस घटना की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि आरोपित कमर अंसारी पर IPC की धारा 376, 376 (ए, बी), 506 और पॉक्सो एक्ट की धारा 4/6 के तहत कार्रवाई की गई है। पुलिस ने आरोपित को अदालत में पेश कर के 2 दिनों का कस्टडी रिमांड लिया। रिमांड की अवधि पूरी हो जाने के बाद शनिवार (4 मई) को कमर अंसारी को जेल भेज दिया गया। पीड़िता का मेडिकल परीक्षण और काउंसिलिंग करवाई गई है। मामले में जाँच और अन्य कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

रेस्टॉरेंट में घुस कर ब्यूटी क्वीन को मारी गोली, जान देकर चुकानी पड़ी इंस्टाग्राम पर लोकेशन अपडेट करने की कीमत: दुर्दांत तस्कर से था प्रेम संबंध

सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर और इक्वाडोर की ब्यूटी क्वीन की गोली मार कर हत्या कर दी गई है। मृतका का नाम पर्रागा गोयबुरो है जिनका पूर्व में रिलेशन 2022 में मारे जा चुके एक दुर्दांत गैंगस्टर से बताया जा रहा है। पर्रागा गोयबुरो पर भ्रष्टाचार के भी आरोप लग चुके हैं। मिस इक्वाडोर प्रतियोगिता में भाग ले चुकीं 23 वर्षीया पर्रागा गोयबुरो की हत्या क्वेवेदो शहर के एक रेस्टॉरेंट में हुई। मृतका की इंस्टाग्राम पोस्ट ने कातिलों को उनकी लोकेशन बताई। पुलिस मामले की जाँच कर रही है। घटना रविवार (28 अप्रैल, 2024) की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इक्वाडोर की 23 वर्षीया मॉडल पर्रागा गोयबुरो 28 अप्रैल को क्वेवेदो शहर में मौजूद थीं। यहाँ दोपहर वो एक रेस्टोरेंट में खाना खाने पहुँची थीं। रेस्टोरेंट में पहुँचने के दौरान उन्होंने अपनी लोकेशन ऑन की। यहाँ से पर्रागा गोयबुरो अपनी तस्वीरें सोशल मीडिया पर शेयर करनी शुरू कर दीं। पर्रागा गोयबुरो रेस्टोरेंट में किसी से बात कर रहीं थीं। इसी दौरान 2 बंदूकधारी हमलावर रेस्टोरेंट में घुसे। उन्होंने पर्रागा गोयबुरो पर निशाना साध कर ताबड़तोड़ गोलियाँ बरसानी शुरू कर दीं।

इस घटना का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। अचानक हुए हमले से रेस्टोरेंट में अफरातफरी मच जाती है। कुछ ही देर में हमलावर भाग निकले। गोली लगने से बुरी तरह से घायल पर्रागा गोयबुरो जमीन में गिर पड़ीं। उनका काफी खून फर्श पर बह गया। उनको अस्पताल ले जाया गया जहाँ उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। गोलीबारी में पर्रागा गोयबुरो से बात कर रहा व्यक्ति भी घायल हो जाता है जिसका इलाज अस्पताल में चल रहा है। मामले की जाँच कर रही पुलिस प्रथम दृष्टया यह मान कर चल रही है कि कातिलों को पर्रागा गोयबुरो की लोकेशन उनके सोशल मीडिया हैंडल से मिली होगी।

फिलहाल अभी तक इक्वाडोर की पुलिस किसी भी हमलावर को गिरफ्तार नहीं कर पाई है। हत्या की वजह का भी पता नहीं चल पाया है। पर्रागा गोयबुरो इक्वाडोर की ब्यूटी क्वीन होने के साथ वहाँ की प्रसिद्ध सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर भी मानी जाती हैं। पर्रागा गोयबुरो का इक्वाडोर के कुख्यात तस्कर लिएंड्रो नोरेरो से अफेयर भी था। साल 2022 में जेल एक अंदर हुई एक हिंसा में लिएंड्रो नोरेरो की हत्या हो गई थी।

इसके अलावा पर्रागा गोयबुरो पर पूर्व में भ्रष्टाचार का भी आरोप लग चुका है। जाँच में यह आरोप संगठित अपराध से जुड़े पाए गए थे। हत्याकांड की जाँच कर रही पुलिस इन सभी पहलुओं का भी परीक्षण कर रही है।

पेरिस ओलंपिक से बाहर हो सकते हैं बजरंग पूनिया, एंटी-डोपिंग एजेंसी ने लगाया बैन: ट्रायल में हार के बाद भाग खड़े हुए, अब कह रहे – मेरा वकील जवाब देगा

ओलंपिक पदक विजेता बजरंग पूनिया पेरिस ओलंपिक से बाहर हो सकते हैं। उन पर डोपिंग टेस्ट में शामिल न होने के लिए नाडा ने अस्थाई प्रतिबंध लगा दिए हैं। बजरंग पूनिया के पास प्रतिबंधों के खिलाफ अपील करने का समय 7 मई तक का है, इसके बाद उनपर कार्रवाई को आगे बढ़ाया जाएगा। इसके साथ ही अब उनके ओलंपिक में हिस्सा लेने की कोशिशों पर काले बादल मंडराने लगे हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, राष्ट्रीय एंटी-डोपिंग एजेंसी ने बजरंग पूनिया को अस्थाई रूप से सस्पेंड कर दिया है, क्योंकि उन्होंने मार्च महीने में सोनीपत में हुए ट्रायल में हार के बाद न तो अगले मुकाबलों में हिस्सा लिया था और न ही डोप सैंपल दिया था। नियमों के मुताबिक, हर खिलाड़ी के लिए डोप सैंपल देना अनिवार्य होता है। नाडा ने 23 अप्रैल को ही पत्र लिख कर बजरंग पूनिया को नोटिस जारी किया था। नाडा ने 7 मई तक जवाब देने का समय दिया था, लेकिन इस पत्र के बारे में जानकारी सार्वजनिक अब हुई है।

नाडा ने क्यों की इतनी बड़ी कार्रवाई?

बता दें कि पेरिस ओलंपिक के लिए अभी क्वालिफायर्स होने बाकी हैं। उससे पहले सोनीपत में ट्रायल्स का आयोजन किया गया था। यह ट्रायल्स सोनीपत में स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ़ इंडिया (SAI) की एकेडमी में हुए थे। इसमें बजरंग पूनिया का मुकाबला रोहित कुमार से हुआ। रोहित कुमार ने इन ट्रायल में बंजरंग पूनिया को 9-1 के अंतर से पटखनी दे दी। इसी के बाद स्पष्ट हो गया कि वह क्वालिफायर्स में हिस्सा नहीं ले सकेंगे।

इस मुकाबले के बाद उन्हें आगे भी मुकाबलों में हिस्सा लेना था, लेकिन बजरंग पूनिया ने ट्रायल्स छोड़ दिए थे। यही नहीं, उन्होंने अधिकारियों के कई बार अनुरोध करने के बाद भी डोपिंग टेस्ट के लिए सैंपल नहीं दिए और ट्रायल वाली जगह से बाहर चले गए थे। इसी के बाद अब नाडा ने उन पर अस्थाई प्रतिबंध लगाया है कि जबतक इस मामले का निपटारा नहीं हो जाता, वो किसी भी टूर्नामेंट में हिस्सा नहीं ले सकते।

हालाँकि बजरंग पूनिया ने दावा किया है कि उन्होंने कभी सैंपल देने से इनकार नहीं किया, बल्कि सैंपल लेने के लिए एक्सपायर्ड किट लाई गई थी, मैंने उसका विरोध किया। पूनिया ने कहा कि नाडा के पत्र का जवाब उनके वकील देंगे।

गौरतलब है कि हाल के समय में बजरंग पूनिया के प्रदर्शन में काफी गिरावट देखी गई है। इससे पहले वह 2023 एशियन गेम्स में भी हार चुके हैं। उन्हें जापान के एक पहलवान के यामागुची ने 10-0 से शिकस्त दी थी। वह एशियन गेम्स से बिना मेडल लिए ही लौट आए थे। हालाँकि पहलवान बजरंग पूनिया भारत के लिए ओलंपिक में कांस्य पदक जीत चुके हैं। टोक्यो ओलंपिक 2020 में उन्होंने 65 किलो ग्राम भार वर्ग में कांस्य पदक जीता था। अब अगर उनके उपर लगा यह बैन नहीं हटा तो पेरिस ओलंपिक के लिए होने वाले फाइनल ट्रायल में हिस्सा नहीं ले पाएँगे।

बजरंग पूनिया पिछले काफी समय से खेल के लिए प्रैक्टिस करने की जगह प्रदर्शन करते देखे गए हैं। वो कभी किसी नेता से मुलाकात करते हैं, तो कभी किसी नेता के लिए सोशल मीडिया पर बयान जारी कर रहे होते हैं। ऐसे में उनके खेल में गिरावट आने की सबसे बड़ी वजह वो खुद ही बनते चले गए।

‘हिंदुत्व ताकतों’ से लेकर ‘RSS की साजिश’ तक, कसाब को कलावा वाला ‘समीर’ बनाने में पाकिस्तान ही नहीं कॉन्ग्रेस का भी हाथ: तुष्टिकरण देख अमेरिका भी रह गया था हैरान

2008 में जब 26/11 का मुंबई हमला हुआ था और 166 लोगों को अपनी जान गँवानी पड़ी थी, उस समय केंद्र में UPA की सरकार थी और सोनिया गाँधी ‘सुपर PM’ हुआ करती थीं। इन हमलों को लेकर दुनिया को कॉन्ग्रेस की गठबंधन सरकार सबूत दिखाती रह गई, पाकिस्तान अपनी थेथरई पर कायम रहा। दिग्विजय सिंह जैसे नेताओं ने इसे RSS की साजिश बताया। इसी तरह महाराष्ट्र में कॉन्ग्रेस नेता विजय वडेट्टीवार रह-रह कर इन हमलों में ‘हिन्दू आतंकवाद’ खोजते हैं।

मुस्लिम तुष्टिकरण कॉन्ग्रेस की पहचान

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार लोकसभा चुनाव 2024 के प्रचार के दौरान अपनी जनसभाओं में कॉन्ग्रेस पर निशाना साधते हुए कह रहे हैं कि पार्टी की विचारधारा ‘मुस्लिम लीग’ वाली हो गई है। इसका कारण ये है कि कॉन्ग्रेस पार्टी ने बिना मुस्लिमों का नाम लिए अपने घोषणा-पत्र में ये इंगित कर दिया है कि वो मुस्लिम समाज का आरक्षण बढ़ाएगी। इतना ही नहीं, पार्टी पर आरोप है कि इसके लिए वो SC, ST और OBC समाज का आरक्षण भी छीन लेगी। पीएम मोदी इसके खिलाफ मुखर हैं।

ये हुई कॉन्ग्रेस की मुस्लिम तुष्टिकरण की बात। वैसे इसमें कुछ भी नया नहीं है, यूपीए काल में भी सांप्रदायिक हिंसा को लेकर एक बिल लाया गया था जो अगर कानून बन जाता तो हर एक दंगे में हिन्दुओं को ही सज़ा होती और मुस्लिम सब कुछ कर के भी बच निकलते। देश का सौभाग्य रहा कि ये बिल कानून का रूप नहीं ले पाया और इसका जम कर विरोध हुआ। कर्नाटक जैसे राज्यों में कॉन्ग्रेस सरकार ने पहले से ही पिछड़ों के कोटा में मुस्लिमों को आरक्षण दे रखा है।

26/11 मुंबई हमला: पाकिस्तान की साजिश, कॉन्ग्रेस का साथ

अब आते हैं 26/11 मुंबई हमले पर, जिसमें द ताजमहल पैलेस होटल, लियोपोल्ड कैफे, छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस, ओबेरॉय ट्रिडेंट, कामा हॉस्पिटल, नरीमन हाउस, मेट्रो सिनेमा और सेंट जेवियर्स कॉलेज को पाकिस्तान से आए 10 आतंकियों ने निशाना बनाया था। उनमें से 9 को मार गिराया गया, लेकिन तुकाराम ओम्बाले जैसे बहादुर कॉन्स्टेबल के बलिदान के कारण अजमल कसाब पकड़ा गया। अजमल कसाब अगर गिरफ्तार नहीं होता तो शायद सारे सबूत होने के बावजूद इस घटना को ‘भगवा आतंकवाद’ का तमगा दे दिया जाता और कोई कुछ नहीं कर पाता।

पाकिस्तान की भी तो यही तैयारी थी, जो कॉन्ग्रेस पार्टी ने किया। अजमल कसाब को ‘समीर दिनेश चौधरी’ नाम दिया गया था, उसकी पहचान बेंगलुरु के एक छात्र की बनाई गई थी और उसे कलावा पहनाया गया था। ये सब इसीलिए, ताकि वो हिन्दू दिखे। IPS (रिटायर्ड) राकेश मारिया ने भी बताया था कि कैसे अगर पाकिस्तान की साजिश सफल हो जाती तो सारे अख़बार ‘हिन्दू आतंकवाद’ की सुर्ख़ियों से भर जाते और बेंगलुरु में अजमल कसाब के कथित परिवार को खोजने और उनका इंटरव्यू लेने के लिए मीडिया वालों की लाइन लगती।

अजमल कसाब को ‘अरुणोदय डिग्री कॉलेज’ के छात्र की नकली पहचान दी गई थी। वो हमले से कुछ दिन पहले सिद्धिविनायक मंदिर भी पहुँचा था, वहाँ तस्वीरें क्लिक करवाई थी और 15-20 कलावा खरीदे थे। उसने पाकिस्तान जाकर साजिशकर्ता साजिद मीर को ये सारा कलावा दिया था और उसे भी लगा कि ये एक अच्छा विचार है। सोचिए, अगर अजमल कसाब नहीं पकड़ा जाता तो फिर पाकिस्तान की साजिश सफल हो जाती, कॉन्ग्रेस का साथ उसे मिल तो रहा ही था।

कौन हैं विजय वडेट्टीवार, मुंबई हमलों पर क्यों उनका बयान निंदनीय

आगे बढ़ने से पहले जान लेते हैं कि विजय नामदेवराव वडेट्टीवार कौन हैं और उन्होंने कहा क्या है। वो कॉन्ग्रेस के नेता हैं, जिन्हें पार्टी ने महाराष्ट्र विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बनाया है। कॉन्ग्रेस से वो दशकों से जुड़े हुए हैं, 1980 में उन्होंने पार्टी के छात्र संगठन NSUI से अपनी राजनीति की शुरुआत की थी। 90 के दशक की शुरुआत में गढ़चिरौली से जिला परिषद सदस्य रहे हैं, फिर 2010 में चंद्रपुर स्थित डिस्ट्रिक्ट कोऑपरेटिव सेन्ट्रल बैंक के अध्यक्ष रहे।

1998 में वो MLC बने थे। इससे पहले 2019 में भी वो विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष रहे हैं। चंद्रपुर स्थित ब्रह्मपुरी से लगातार दूसरी बार विधायक हैं। उद्धव ठाकरे की MVA सरकार में उनके पास एक दर्जन मंत्रालय थे। खैर, ये सब बताने का कारण ये है कि बयान कॉन्ग्रेस के किसी छुटभैये नेता की तरफ से नहीं आया है। उन्होंने कहा है कि IPS हेमंत करकरे की जिस गोली से हत्या हुई वो अजमल कसाब या अन्य आतंकियों नहीं बल्कि एक RSS को समर्पित पुलिस अधिकारी के हथियार से चली थी।

असल में वो अधिवक्ता उज्जवल निकम पर निशाना साध रहे थे। वो उज्ज्वल निकम ही थे जिन्होंने अजमल कसाब को फाँसी के फंदे तक पहुँचाया था। उस समय वो महाराष्ट्र के स्पेशल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर थे, अब भाजपा ने उन्हें मुंबई नॉर्थ-सेन्ट्रल से लोकसभा उम्मीदवार बनाया है। दिवंगत दिग्गज नेता प्रमोद महाजन की बेटी पूनम महाजन की जगह उन्हें लाया गया है। उज्जवल निकम ने कई आतंकियों को आजीवन कारावास और फाँसी की सज़ा दिलाई है। लेकिन, कॉन्ग्रेस नेता विजय नामदेवराव वडेट्टीवार उन्हें ‘देशद्रोही’ कहते हैं।

भाजपा ने इस बयान का करारा जवाब दिया है। महाराष्ट्र के उप-मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा है कि कॉन्ग्रेस अजमल कसाब का पक्ष ले रही है। वहीं उज्जवल निकम ने कहा कि वो ऐसे बेबुनियाद आरोप से दुःखी हैं जिससे उनकी ईमानदारी पर प्रश्नचिह्न लगाया जा रहा है। उन्होंने इसे मुंबई हमले के मृतकों का अपमान बताते हुए कहा कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि राजनेता इस हद तक गिर जाएँगे, राजनीतिक लाभ के लिए इस तरह की हरकत की जाएगी।

भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने भी पलटवार किया है। उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस के लिए पाकिस्तान से दुआएँ आने के पीछे का कारण समझ में आ गया है, पार्टी के सबसे वरिष्ठ नेता पाकिस्तान को 26/11 पर क्लीन चिट दे रहे हैं। शहजाद पूनावाला ने कहा कि उज्जवल निकम ने राष्ट्रहित में वकालत का इस्तेमाल किया, उन्हें ‘देशद्रोही’ कहा जा रहा है। उन्होंने कहा कि नक्सलियों को ‘बलिदानी’ कहने वाले, सेना को ‘बलात्कारी’ कहने वाले और आतंकियों की मौत पर आँसू बहाने वाले असली देशद्रोही हैं।

बता दें कि पाकिस्तान के पूर्व मंत्री चौधरी फवाद हुसैन ने राहुल गाँधी का समर्थन करते हुए उन्हें समाजवादी बताया है। राहुल गाँधी लगातार सत्ता में आने के बाद सबकी संपत्ति की जाँच और बँटवारे का वादा कर रहे हैं, जिस पर पलटवार करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि लोगों की गाढ़ी कमाई से बने घर और महिलाओं के मंगलसूत्र पर कॉन्ग्रेस की नज़र है, सबका सर्वे कर के छीन लिया जाएगा। अब पाकिस्तान की तरफ से भी कॉन्ग्रेस को खुलेआम समर्थन मिल रहा है।

अमेरिका ने भी माना था – 26/11 पर कॉन्ग्रेस ने की मजहबी राजनीति

यहाँ तक कि अमेरिका के एक लीक हुए केबल से भी खुलासा हुआ था कि 166 लोगों की लाशों पर कॉन्ग्रेस पार्टी ने मजहबी राजनीति का घिनौना खेल खेला। तब अल्पसंख्यक मामलों के केंद्रीय एंट्री रहे AR अंतुले ने हमले के कुछ ही दिनों बाद कहा था कि इसके पीछे ‘हिंदुत्व ताकतों’ का हाथ है। 23 दिसंबर, 2008 को अमेरिका के स्टेट डिपार्टमेंट को भेजे गए केबल में एम्बेस्डर डेविड मुल्फोर्ड ने कहा था कि एआर अंतुले के दावों को भारत के मुस्लिम समुदाय में समर्थन भी मिला।

उन्होंने ये भी लिखा था कि आगामी लोकसभा चुनावों में मुस्लिम समाज के समर्थन के लिए कॉन्ग्रेस ने ‘कंस्पिरेसी थ्योरी’ को हवा दी। मुस्लिम समाज में ये भय बिठा दिया गया कि उन्हें पक्षपात कर के निशाना बनाया जा रहा है, जाँच एजेंसियाँ सच्चाई दबाने के लिए ये सब कर रही है। अमेरिका तक ने माना था कि कॉन्ग्रेस जाति-मजहब की राजनीति करती है, जानबूझकर AR अंतुले की टिप्पणी का सहारा लेकर मुस्लिम समाज में माहौल बनाने की कोशिश की गई, ये सब अचानक नहीं हुआ या फिर बिना सोचे-समझे नहीं किया गया।

इसी तरह पाकिस्तान के विश्लेषक ज़ैद हामिद ने एक पूरी की पूरी किताब लिख कर मुस्लिम हमलों को हिन्दुओं की साजिश बता दिया। दुनिया भर के शीर्ष 500 मुस्लिमों में शुमार किए जा चुके ज़ैद हामिद ने हिन्दुओं की तुलना यहूदियों से की। उसने अजमल कसाब को ‘अमर सिंह’ नाम का एक सिख बता दिया और कहा कि वो R&AW के लिए जासूसी करता था। भारत के कॉन्ग्रेस नेताओं ने एक तरह से ज़ैद हामिद जैसों का काम और आसान ही कर दिया।

पुलवामा पर भी कॉन्ग्रेस पार्टी का था वही रुख

हम 26/11 पर ही क्यों रुके रहें? पुलवामा हमला, जिसमें फरवरी 2019 में 40 CRPF जवान बलिदान हो गए थे, उसे लेकर कॉन्ग्रेस ने जो संवेदनहीनता दिखाई उसकी चर्चा भी आवश्यक है। जम्मू कश्मीर के पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक, जो पद से हटते ही विपक्ष की गोद में खेलने लगे, उन्होंने दावा किया था कि केंद्र सरकार ने एयरक्राफ्ट नहीं दिए इसीलिए जवान बलिदान हुए। इस बयान को आधार बना कर कॉन्ग्रेस पार्टी ने देश भर में प्रदर्शन किया।

पंजाब के उप-मुख्यमंत्री रहे सुखजिंदर सिंह रंधावा ने पुलवामा हमले को भाजपा की साजिश तक बता दिया। उन्होंने कहा कि लोकसभा चुनाव जीतने के लिए पुलवामा का हमला कराया गया। राहुल गाँधी ने तो पुलवामा हमले को पाकिस्तान और PM नरेंद्र मोदी के बीच की ‘मैच फिक्सिंग’ तक करार दिया था। कॉन्ग्रेस नेता नवजोत सिंह सिद्धू जाकर पाकिस्तान के सेना प्रमुख से गले मिल रहे थे, लेकिन कॉन्ग्रेस पुलवामा में भाजपा की साजिश देख रही थी।