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TV पर प्रोपेगेंडा लेकर बैठे थे राजदीप सरदेसाई, पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त ने निकाल दी हवा: कहा- ये आपकी कल्पना, विपक्ष की मदद की कोशिश बंद करिए

राजदीप सरदेसाई की 1 मई को ऑन टीवी फिर फजीहत हुई। इस बार उन्हें पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एन गोपालस्वामी ने लताड़ा। सरदेसाई, पूर्व चुनाव आयुक्त को ये कहकर घेरने की कोशिश कर रहे थे कि दो चरण के चुनाव होने के बावजूद चुनाव आयोग ने फेज-1 और फेज-2 का डेटा जारी करने में देरी की।

सरदेसाई ने ये सवाल विपक्ष पार्टियों के कंधे पर रखकर पूछा था ताकि इसे कुछ सनसनीखेज बनाकर पेश कर सकें। उन्होंने कहा वोट शेयर 11 दिन बाद प्रकाशित होना चिंताजनक है, विपक्षी दल इसे लेकर सवाल कर रहे हैं। हालाँकि पूर्व सीईसी ने मुस्कुराते हुए सरदेसाई को समझाया कि अगर सरदेसाई ने डेटा को चेक नहीं किया है इसका मतलब ये बिलकुल भी नहीं है कि ईसीआई ने ही देरी कर दी है।

उन्होंने सरदेसाई को साफ कहा, “ग्यारह और चार दिन के बाद डेटा प्रकाशित हुआ… ये सिर्फ आपकी कल्पना है। दूसरे दिन ही जानकारी मिल जाती है। यह ईसीआई की वेबसाइट पर उपलब्ध भी है। हर कोई इसे देख सकते है। अगर आप इसे देखना नहीं चाहते तो कोई बात बात नहीं। वो लोग डेट जारी करने के बाद भी बदनाम हो रहे हैं।”

सरदेसाई को एन गोपालस्वामी ने टीवी पर उनकी बकवास बातें बंद करने की सलाह दी और सुझाव दिया कि वो इस तरह की हरकत करके विपक्ष की मदद करने की कोशिश करना बंद कर दें।

इतनी फजीहत होने के बावजूद राजदीप सरदेसाई शांत नहीं हुए। इसपर पूर्व सीईसी ने तंग होकर उन्हें समझाया कि मतदान समाप्त होने के बाद ईसीआई अधिकारी वास्तव में काम कैसे करते हैं।

उन्होंने कहा, “हर पोलिंग स्टेशन पर मतदान खत्म होने के बाद फॉर्म 17सी भरा जा रहा है जिसमें मतदान का आँकड़ा लिखते हैं। प्रतियों पर पोलिंग एजेंट के हस्ताक्षर किए जाते हैं, जो कि सभी के पास होती है। उसी रात तक अनुमानित आँकड़े सामने आ जाते हैं। इसके बाद जब ये सभी 17सी फॉर्म रिटर्निंग के पास जाते हैं तो वह इसे इकट्ठा कर लेते हैं तो सारा डेटा वहाँ रख दिया जाता है।”

गोपालस्वामी ने सारी बात सरदेसाई को समझाते हुए दावा किया कि इन कामों में कोई लापरवाही नहीं होती है, लेकिन सरदेसाई अपनी धूर्तता का प्रमाण देते हुए इस बात पर अड़े रहे कि सीईसी ने डेटा पब्लिश करने 11 दिन लेट किया। इतने के बावजूद संयम के साथ एन गोपालस्वामी उन्हें समझाते रहे कि अंतिम आधिकारिक डेटा साइट पर वोटिंग फेज के तीसरे दिन आ जाता है, जो 30 अप्रैल को आया वो संकलन मात्र था।

उन्होंने कहा कि ये बेहद दुर्भाग्यपूर्ण बात है कि एक तो चुनाव आयोग अतिरिक्त जानकारियाँ दे रहा है ऊपर से विपक्षी दल और उनके समर्थन में मीडिया उसमें भी गलतियाँ निकालने पर तुली हैं। उन्होंने बताया कि अगर किसी पर डेटा निकालने का समय नहीं है या देखने का समय नहीं है तो चुनाव आयोग सिर्फ ऐसे डेटा जारी करके सबकी मदद करने का प्रयास कर रहा है, ताकि अखबार या प्रेस सीधे उस हैंडआउट का इस्तेमाल कर सकें। बाकी डेटा पहले से उपलब्ध हैं।

राजदीप सरदेसाई इसके बाद भी नहीं मानें। उन्होंने ये साबित करने की कोशिश की कि 30 अप्रैल को ईसीआई ने डेट रिवाइज किया है जिसे 2-3 दिन में होना चाहिए। इसके बाद गोपालस्वामी ने उन्हें फटकारते गुए इस पर कड़ी आपत्ति जताई और कहा कि डेटा तीसरे दिन की उपलब्ध था और उसमें कोई बदलाव नहीं हुआ।

अजीब बात ये है कि इतनी फजीहत होने के बाद भी राजदीप सरदेसाई शांत नहीं हुए और पूछते रहे कि क्या पूर्व सीईसी इन बातों को विपक्ष को समझा सकते हैं। इस पर भी उन्हें पूर्व सीईसी से फटकार लगी। एन गोपालस्वामी ने कहा कि ये कहा कि वो ये बातें विपक्ष को क्यों समझाएँगे, उनका काम है ये समझाना कि डेटा कैसे कलेक्ट होता है और पब्लिश होता है इसके अलावा वो कुछ नहीं करेंगे।

विपक्ष ने फैलाया भ्रम

बता दें कि ये सारा मामला विपक्ष द्वारा उठाया गया है। कॉन्ग्रेस नेता जयराम रमेश और सीएम ममता बनर्जी समेत अन्य विपक्षी नेताओं ने दावा किया था कि डेटा आने में देर हुई। हालाँकि, ईसीआई ने इन दावों को कारिज किया। उन्होंने विपक्ष और मीडिया द्वारा पैलाए जा रहे झूठ पर बताया कि डेटा समय पर रिलीज हुए हैं।

राजदीप सरदेसाई की फजीहत होने की हिस्ट्री

वहीं राजदीप सरदेसाई की बात करें तो उनकी समय-समय पर फजीहत होती रही है। 2017 में मुकेश अंबानी ने उन्हें इंडिया कॉन्क्लेव पर कह दिया था कि वो उसे सीरियसली नहीं लेते। दिसंबर 2021 में सुनील गावस्कर ने उन्हें कह दिया था कि उन्हें मतलब नहीं है कि सरदेसाई उनसे सहमत हो या नहीं। जनवरी 2022 में महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम फडणवीस का पद बदले जाने पर सवाल उठाया था, तब उन्होंने सरदेसाई को कह दिया था कि पहले वो भी इंडिया टुडे में एडिटर-इन-चीफ थे, अब कंसल्टिंग एंटिर हैं।

बृजभूषण शरण सिंह का टिकट BJP ने काटा, कैसरगंज से बेटे करण भूषण लड़ेगे: रायबरेली के मैदान में दिनेश प्रताप सिंह को उतारा

भाजपा ने उत्तर प्रदेश की कैसरगंज और रायबरेली सीटों से अपने उम्मीदवार घोषित कर दिए। कैसरगंज से वर्तमान सांसद बृजभूषण शरण सिंह का टिकट काट दिया गया। उनकी जगह उनके बेटे करण भूषण सिंह को टिकट दिया गया। रायबरेली से उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री दिनेश प्रताप सिंह को टिकट दिया गया है। दोनों सीटों पर नामांकन की अंतिम तारीख शुक्रवार (3 मई, 2024) को है।

भाजपा ने गुरुवार (2 मई, 2024) को तमाम अटकलों पर लगाम लगाते हुए प्रत्याशियों के नामों की 17वीं सूची जारी की। इसमें केवल उत्तर प्रदेश की ही दोनों बहुप्रतीक्षित सीटों के उम्मीदवार बताए गए। इन सीटों पर अभी विपक्ष ने भी उम्मीदवार घोषित नहीं किए हैं।

कैसरगंज से वर्तमान सांसद बृजभूषण शरण सिंह की जगह उनके बेटे करण भूषण सिंह को टिकट दिया गया जो कि वर्तमान में उत्तर प्रदेश कुश्ती संघ के अध्यक्ष हैं। वह बृजभूषण शरण सिंह के छोटे बेटे हैं। उनके बड़े भाई प्रतीक भूषण सिंह गोंडा से विधायक हैं। करण भूषण सिंह के टिकट के कयास पहले से लगाए जा रहे थे। बृजभूषण शरण सिंह पहलवानों से विवाद के चलते चर्चाओं में थे, उसी की वजह से भाजपा ने उनका टिकट काटा है।

करण भूषण के टिकट की सुगबुगाहट शुक्रवार सुबह से ही हो गई थी। उनका अपने पिता का आशीर्वाद लेते हुए एक वीडियो भी सामने आया था। करण भूषण सिंह शुक्रवार (3 मई, 2024) को अपना नामांकन समर्थकों के साथ गोंडा कलेक्ट्रेट में दाखिल करेंगे। इससे पहले उनके भाई प्रतीक के चुनाव लड़ने की संभावनाएँ जताई जा रही थीं।

उधर हाई प्रोफाइल सीट रायबरेली से भाजपा ने अपने पुराने सिपाही और उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री दिनेश प्रताप सिंह पर भरोसा दिखाया है। दिनेश प्रताप सिंह इस इलाके के बड़े नेता माने जाते हैं। वह 2019 में भी रायबरेली सीट से लोकसभा चुनाव लडे थे लेकिन कॉन्ग्रेस नेता सोनिया गाँधी से हार गए थे।

रायबरेली सीट वर्तमान में खाली है और इस पर इस बार गाँधी परिवार का कोई सदस्य नहीं लड़ रहा है। सोनिया गाँधी कुछ समय पहले ही यहाँ की सदस्यता से त्यागपत्र देकर राजस्थान से राज्यसभा जा चुकी हैं। अभी तक इस सीट से प्रियंका गाँधी के चुनाव लड़ने के चर्चे बने हुए हैं। हालाँकि, अभी तक कॉन्ग्रेस ने इस सीट से अपने उम्मीदवार की घोषणा नहीं की है।

चीनी पोपट ‘न्यूजक्लिक’ का फाउंडर प्रबीर पुरकायस्थ भारत में लोकतंत्र के खात्मे के बुन रहा था सपने, हिज्बुल्ला-मुस्लिम ब्रदरहुड के ‘जिहाद’ में देख रहा था रास्ता

दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल ने न्यूजक्लिक के फाउंडर-एडिटर प्रबीर पुरकायस्थ के खिलाफ यूएपीए मामले में चार्जशीट दाखिल की है। प्रबीर पुरकायस्थ को न्यूजक्लिक के ठिकानों पर छापेमारी के बाद 3 अक्टूबर 2023 को न्यूजक्लिक के एचआर हेड अमित चक्रवर्ती के साथ गिरफ्तार किया गया था। न्यूजक्लिक, प्रबीर पुरकायस्थ और अमित चक्रवर्ती पर अमेरिका के रास्ते चीन से पैसा लेकर भारत विरोधी गतिविधियों में शामिल रहने का आरोप है। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने न्यूजक्लिक को भी आरोपित बनाया है।

न्यूजक्लिक-चीनी फंडिंग मामले में एफआईआर की खास बातें

प्रबीर पुरकायस्थ के खिलाफ दर्ज एफआईआर में दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने कई अहम दावे किए थे, जिसमें आतंकियों, नक्सलियों और दिल्ली में हिंदू-विरोधी दंगों के आरोपितों को फंडिंग देना, अपने कर्मचारियों का उपयोग पैसे पहुँचाने में करना, कथित किसान आंदोलन की फंडिंग, चीनी मोबाइल कंपनियों वीवो और श्याओमी जैसी कंपनियों के लिए कानूनी शील्ड तैयार करना, कोरोना से निपटने के लिए भारत सरकार के प्रयासों के बारे में दुष्प्रचार करना, भारतीय वैक्सीन के खिलाफ लोगों में गलत जानकारी फैलाना, अरुणाचल प्रदेश और कश्मीर को भारत का हिस्सा नहीं बताना जैसी अहम बातें शामिल हैं।

चार्जशीट के मुताबिक, चीन के प्रोपेगेंडा को बढ़ाने के लिए चीनी फंडिंग इस न्यूजक्लिक को मिला। ये फंडिंग पकड़ी न जाए, इसके लिए न्यूजक्लिक को प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के रूप में बदल दिया गया। यही नहीं, चीनी कम्युनिष्ट पार्टी से जुड़े नेविल रॉय सिंघम के माध्यम से करीब 91 करोड़ रुपए जो आए, उन्हें नक्सलियों तक पहुँचाया गया, ताकि भारत में हिंसक कार्रवाईयों को बढ़ावा दिया जा सके। इस मामले में गिरफ्तार किए गए न्यूजक्लिक के एचआर हेड अमित चक्रवर्ती बाद में सरकारी गवाह बन गए।

एफआईआर में दिल्ली पुलिस ने ‘सीक्रेट इनपुट’ की भी बात कही है। रिमांड के लिए कोर्ट में दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने बताया है कि ‘विदेशी फंडिंग की आड़ में 115 करोड़’ से अधिक की धनराशि न्यूजक्लिक को मिली, जिसके लिए प्रबीर पुरकायस्थ और विदेशी साजिशकर्ता एक-दूसरे के साथ सीधे संपर्क में थे। यही नहीं, प्रबीर पुरकायस्थ ने पीपल्स डिस्पैच पोर्टल का इस्तेमाल करते हुए पेड न्यूज छापने के बदले में करोड़ो रुपए दिए, ताकि भारत के खिलाफ माहौल बनाया जा सके। इन सारी बातों का उल्लेख एफआईआर, रिमांड रिक्वेस्ट में किया गया है।

800 पन्नों की चार्जशीट में चौकाने वाला खुलासा

रिमांड रिक्वेस्ट, एफआईआर से भी ज्यादा अहम दिल्ली पुलिस द्वारा फाइल की गई चार्जशीट है, जो 8000 पन्नों की है। इस चार्जशीट के कुछ अहम पन्ने ऑपइंडिया ने देखे हैं, जिसमें प्रबीर पुरकायस्थ, नेविल रॉय सिंघम और अन्य आरोपितों की सारी साजिशों पर से पर्दा उठता है। यही नहीं, इस साजिश की शुरुआत जब से हुई है, उस तथ्य को भी चार्जशीट के माध्यम से कोर्ट में रखा गया है।

चार्जशीट के मुताबिक, 29 जून 2016 से इस पूरे खेल की आधिकारिक शुरुआत होती है, जिसमें प्रबीर पुरकायस्थ ने नेविल रॉय सिंघम को एक मेल भेजा था। इस मेल को ईडी ने स्पेशल सेल के साथ शेयर किया है। इस ईमेल का विषय “भारत में सोशल मीडिया ग्रुप” था। इस ईमेल में मुख्य रूप से 7 बिंदुओं पर पर्चा की गई है।

इस ईमेल में प्रबीर ने नेविल को लिखा कि उसका एक मीडिया प्रोजेक्ट ‘ग्रुप’ सिर्फ टूल्स पर फोकस करे, जो डाटा इकट्ठा करे। उसने सुझाव दिया कि सोशल मीडिया कैंपेन के लिए एक डेडिकेटेड टीम होनी चाहिए। सोशल मीडिया कैंपेन का बजट 60,000 डॉलर से 80,000 डॉलर के बीच हो सकता है।

चार्जशीट में कहा गया है, ये ईमेल बेहद प्रासंगिक हो जाता है, क्योंकि इसके तुरंत बाद 17 सितंबर 2016 को न्यूजक्लिक का एक लेख ईमेल पर भेजा जाता है, जिसमें खास माओवादी शैली में जनांदोलन तैयार करने की बात कही गई थी। इस लेख में न्यूज़क्लिक ने लिखा कि वामपंथियों को ऐसे ‘संघर्षों’ में सबसे आगे रहने की ज़रूरत है।

इस सिर्फ 2 दिन बाद 19 सितंबर 2019 को एक और ईमेल भेजा गया, जिससे ये साफ हो जाता है कि भारत में लोकतंत्र को समाप्त करने के लिए क्या साजिशें रची जा रही थी। ये ईमेल नेविल ने प्रबीर पुरकायस्थ को भेजा था। इस ईमेल में नेविल ने भारत सहित विश्व स्तर पर वामपंथियों के सामने बढ़ती चुनौतियों का मुकाबला करने के लिए 7 विषयों पर चर्चा की।

1- कम्युनिस्ट दृष्टिकोण: नेविल का कहना है कि उन्हें समाज के लिए एक वैकल्पिक दृष्टिकोण के साथ आने की जरूरत है क्योंकि कम्युनिस्ट दृष्टिकोण अब “प्रोजेक्ट करना आसान” नहीं है। नेविल पूछता है कि जन आंदोलनों के घटते समर्थन का सामना कैसे किया जाए और कम्युनिस्टों-वामपंथियों के खिलाफ प्रचार का मुकाबला कैसे कर सकते हैं।

2- नए श्रमिक वर्ग की पहचान: उसने दुख जताया है कि यूनियनें खत्म हो रही हैं, जिन्हें ‘कम्युनिस्टों का भंडार’ माना जाता था। वो ये पूछता है कि कैसे “श्रमिक वर्ग के भीतर की टूट” से निपटें, क्योंकि मशीनीकरण के कारण अब हजारों श्रमिक एक साथ कारखानों में काम नहीं करते। ‘हम एक नए प्रकार के ग्रामीण संकट के संदर्भ में ग्रामीण सर्वहारा वर्ग को कैसे संगठित कर सकते हैं’ जिनमें पर्यावरणीय विनाश को लेकर जागरुकता भी हो।

3- नव-उदारवादी युग के बाद उभरते रणनीतिक मुद्दे: इसमें नेविल डीएमसी (डिजिटल मोनोपोली कैपिटल) के बारे में बात करता है। इसमें वो लिखता है कि Google, Apple, Amazon, Facebook और Microsoft जैसी कंपनियाँ एआई का उपयोग करके इंसानी निर्भरता को कम कर रही हैं, जिससे कम्युनिज्म को नुकसान पहुँच रहा है। वो चिंता जताता है कि कैसे दुनिया में पूँजी (पैसों) का प्रभाव बढ़ता है, जिसकी वजह से अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर श्रमिक वर्ग की एकजुटता में कमी आई है। वो एर्दोगन, पीएम मोदी, ट्रम्प और ट्रेमर की तुलना करते हुए पूछता है कि कैसे फाँसीवाद के प्रति बढ़ते समर्थन को करने करने की रणनीति बनाई जाए।

4- इसी तर्ज पर नेविल आगे बात को बढ़ाता है कि कैसे नए राजनीतिक मुद्दों को पहचान की जाए, क्योंकि पूरी दुनिया में पार्टी (कम्युनिष्टों का समर्थन) की पकड़ कमजोर होती जा रही है। ऐसे में हम किस तरह से लोगों को मूवमेंट (वामपंथ) से जोड़ा जाए।

5- नेविल लिखता है, “व्यावहारिक सवाल: कैसे हम अलगाववादियों या अन्य जातीय-पहचान संघर्षों के साथ खुद को जोड़ सकते हैं?” क्योंकि उनकी लड़ाई अलग है। पहचान की लड़ाई है। हम उन्हें कैसे अपने साथ जोड़कर आगे बढ़ सकते है। कैसे हम आंदोलन की मुख्यधारा में लिंग(पुरुष-महिला) और पहचान का मुद्दा आगे बढ़ा सकते हैं। बर्सिलोना, पोर्ट एलिजाबेथ और केरल में स्थानीय सरकारों को चलाते हुए असली रणनीति (कम्युनिष्टों की) क्या है? कैसे हम अपनी राजनीतिक विचारधारा को बढ़ाने के लिए शिक्षा का सहारा ले सकते हैं, खासकर स्कूलों और काडरों का।

6- दिलचस्प बात यह है कि इसी मुद्दे के विस्तार में नेविल वामपंथियों को हिज़्बुल्लाह और मुस्लिम ब्रदरहुड से सबक लेने की बात करता है। वो लिखता है “दुनिया भर में लोकप्रिय धर्मों के बढ़ते “सामूहिककरण” से वामपंथियों को क्या सीख मिलनी चाहिए? हिज़बुल्लाह और मुस्लिम ब्रदरहुड ने डॉक्टरों, चिकित्सा देखभाल और सेवाओं को आयोजन और सेवाएं प्रदान करने के केंद्रीय तत्वों के रूप में उपयोग किया है।” वह आगे पूछता है, “हम प्रिंट और टीवी के खात्मे के दौर में शक्तिशाली पक्षपातपूर्ण (एकतरफा) लोकप्रिय मीडिया केंद्रों का निर्माण कैसे करें और अपने संघर्षों में सोशल मीडिया का उपयोग कैसे करें?”

7-इस मुद्दे पर आखिर में वो ‘इंटरनेशनलाइजेशन’ के बारे में बात करता है और सवाल करता है कि वो लोग कैसे दुनिया भर के लोकप्रिय आंदोलनों को स्पष्ट रूप से वामपंथी वैचारिक ताकतों के साथ जोड़ सकते हैं। वो एक अंतरराष्ट्रीय रणनीति की भी बात करता है।

इन 7 बिंदुओं पर प्रबीर पुरकायस्थ और नेविल रॉय सिंघम की बातचीत बताती है कि न्यूजक्लिक, उसके फाउंडर और इस पूरे नेक्सन का नेविल रॉय के साथ क्या रिश्ता है और कैसे वो भारत की संप्रभुता और लोकतंत्र को नुकसान पहुँचाने की दिशा में काम कर रहे थे।

नेविल रॉय सिंघम और प्रबीर पुरकायस्थ की बातचीत से जो 7 अहम पहलू निकलकर सामने आते हैं, उनके बारे में भी जान लेते हैं-

1- चार्जशीट के हिसाब से देखें तो ईमेल में सबसे अहम बात जो सामने आ रही है, वो है भारत के लोकतंत्र को बदलना और सिंगल पार्टी सिस्टम जैसे चीन में अभी की सरकार है, उस तर्ज पर देश को हाँकना।

2- अंतर्राष्ट्रीय श्रमिक वर्ग की एकजुटता में गिरावट के बारे में बात करते हुए, नेविल ने पीएम मोदी को फासीवादी करार देकर उन्हें नीचा दिखाने की भी बात की। यह किसी ऐसे व्यक्ति द्वारा भारतीय लोकतांत्रिक प्रक्रिया को नष्ट करने की ओर इशारा करेगा जो चीन द्वारा वित्त पोषित साबित होता है और जो चीनी कथा को आगे बढ़ाने के लिए भारत के भीतर तत्वों को वित्त पोषित कर रहा है। यदि नेविल रॉय सिंघम पीएम मोदी को राज्य के प्रमुख के रूप में विस्थापित करने की बात कर रहे हैं, तो यह स्पष्ट है कि चीनी राज्य का एजेंडा वह परबीर पुरकायस्थ जैसे तत्वों के साथ बीज बोने का प्रयास कर रहा है।

3-वह फिर से जनता को अपने आंदोलनों में शामिल होने के लिए आकर्षित करने की बात करते हैं। यह देखते हुए कि उन्होंने पहले माओवादी शैली के आंदोलनों के बारे में कैसे बात की है, यह स्पष्ट हो जाता है कि वह हिंसक आंदोलनों का समर्थन करते हैं।

4-नेविल विशेष रूप से भारत में अलगाववादी आंदोलनों के साथ सहयोग के बारे में बात करते हैं। वह पहचान आंदोलनों के साथ सहयोग की भी बात करते हैं। यह स्पष्ट रूप से न्यूज़क्लिक और उसके पूरे गठजोड़ की ओर इशारा करता है जो आतंकवाद को बढ़ावा दे रहा है और साथ ही, चीन के इशारे पर भारत में मुस्लिमों को ख़तरे में बताया जा रहा है।

5-इसके बाद नेविल ने प्रबीर पुरकायस्थ और अन्य लोगों को हिज़्बुल्लाह और मुस्लिम ब्रदरहुड से सबक लेने के लिए कहकर और भी खतरनाक कहानी गढ़ी।

6-वह आगे “शक्तिशाली पक्षपातपूर्ण लोकप्रिय मीडिया” के निर्माण और भारत को तोड़ने की अपनी रणनीति को लागू करने के लिए सोशल मीडिया के उपयोग के बारे में बात कर रहे हैं।

7-अंत में वो दोनों वामपंथ को वैश्विक लोकप्रिय आंदोलनों के साथ जोड़ने की बात करते हैं। इसे ऐसे देख सकते हैं कि ब्लैक लाइव्स मैटर या इंतिफादा से भारत में भारतीय मुसलमानों से कैसे जुड़े थे।

ईमेल से प्राप्त उपरोक्ट जानकारियों को न्यूज़क्लिक केस में साजिश का शुरुआती प्वॉइंट मान सकते हैं। इसके हिसाब से लेफ्ट इकोसिस्टम का एकमात्र उद्देश्य भारत में लोकतंत्र को खत्म करके किसी भी तरह से चीनी स्टाइल वाली राजनीतिक व्यवस्था (एक पार्टी कम्युनिस्ट सिस्टम) को स्थापित करना है।

(यह लेख मूल रूप से अंग्रेजी भाषा में नुपूर जे शर्मा द्वारा लिखा गया है। मूल लेख पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।)

अमित शाह का डीपफेक वीडियो चलाया, फैलाई आरक्षण खत्म करने की अफवाह, पुलिस ने कॉन्ग्रेस आईटी सेल के पाँच लोगों को पकड़ा

गृह मंत्री अमित शाह का आरक्षण सम्बंधित फर्जी वीडियो चलाने चलाने के मामले में पुलिस ने हैदराबाद से पाँच लोगों को पकड़ा है। यह सभी कॉन्ग्रेस नेता और सोशल मीडिया टीम के सदस्य हैं। इस मामले में इससे पहले भी देश के अलग-अलग हिस्सों से गिरफ्तारी हो चुकी हैं।

जानकारी के अनुसार, यह गिरफ्तारियाँ भाजपा नेता की शिकायत के आधार पर दर्ज की गई हैं। इस शिकायत में कहा गया था कि अमित शाह का एडिटेड वीडियो चला कर आरक्षण के संबंध में गलत सूचना फैलाई गई। जिन लोगों को गिरफ्तार किया गया है, उनके नाम आसमा, गीता, नवीन, शिवा एवं एक अन्य हैं।

इस मामले में देश के अलग-अलग इलाकों से यह फर्जी वीडियो फैलाने के मामले में गिरफ्तारियाँ हुई थीं। अहमदाबाद से दो व्यक्तियों को गिरफ्तार किया गया था। अहमदाबाद साइबर क्राइम टीम ने जिन्हें गिरफ्तार किया था, उनके नाम सतीष वरसोला और आर बी बारिया हैं। सतीश वनसोला कॉन्ग्रेस विधायक जिग्नेश मेवानी का ऑफिस संभालता है।

उसे कॉन्ग्रेस विधायक जिग्नेश मेवानी का पीए भी बताया जा रहा है। वहीं, आर बी बारिया आम आदमी पार्टी का दाहोद जिले का जिलाध्यक्ष है। दोनों ने गृहमंत्री अमित शाह के एडिटेड वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल किए थे।

इस मामले में असम के कॉन्ग्रेसी कार्यकर्ता ऋतम सिंह को गिरफ्तार किया जा चुका है। वो असम में कॉन्ग्रेस का सोशल मीडिया देखता है। इस गिरफ्तारी के बारे में खुद असम सीएम हिमंता बिस्वा सरमा ने अपने एक्स पर जानकारी देते हुए बताया था कि उसे गृह मंत्री का फेक वीडियो शेयर करने के मामले में पकड़ा गया है।

इस मामले में तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी को भी दिल्ली पुलिस ने समन किया था। हालाँकि, उनकी जगह उनके वकील ने दिल्ली पुलिस को बताया कि मुख्यमंत्री का इस मामले से कोई लेना देना नहीं है। उनके वकील ने बताया था कि मुख्यमंत्री का वीडीयो शेयर करने से कोई लेना देना नहीं है। झारखंड के कॉन्ग्रेस अध्यक्ष को भी इस मामले में समन किया गया था।

मिलिए पत्रकार हरमन गोमेज से, हिंदुओं को कहता है- भ@वे, गां$… महिला ब्यूरोचीफ को बोलता है- मा@$द: माधवी लता को बताता है ‘ट्रांसजेंडर

भारत में हिन्दुओं से घृणा करने वाले पत्रकारों और बुद्धिजीवियों की कमी नहीं है। इनकी हिन्दू घृणा समय-समय पर सामने आते रहती है। इनमें से विदेश में रहने वाले पत्रकार और कर्थित बुद्धिजीवी हिन्दुओं के विरुद्ध सबसे अधिक जहर फैलाते हैं।

गोवा का निवासी एक ऐसा ही ईसाई पत्रकार इन दिनों हिन्दुओं को ‘गौमांस’ और ‘सती’ जैसे शब्दों का उपयोग करके गालियाँ दे रहा है। वह बड़े गर्व से बताता है कि उसने अपनी महिला ब्यूरो चीफ को ‘मा@रचो*द गाली दी थी। वह मात्र हिन्दू विरोधी ही नहीं बल्कि महिला विरोधी भी है। वह हैदराबाद से भाजपा प्रत्याशी को ‘ट्रांसजेंडर’ बताता है।

इस हिन्दू और महिला विरोधी पत्रकार का नाम हरमन गोमेज है। वह भारत के बड़े पत्रकारिता संस्थानों में काम कर चुका है। पिछले कुछ दिनों से वह मोदी सरकार की आलोचना के चक्कर में हिन्दुओं, भारतीयों और महिलाओं को गालियाँ दे रहा है।

वह हिन्दुओं को खुले तौर पर गालियाँ भी दे रहा है। वह भारत में रहने वाले हिन्दुओं के प्रति ही नहीं बल्कि विदेशों में रहने वाले हिन्दुओं के प्रति भी घृणा रखता है। उसका कहना है कि विदेशों में रहने वाले हिन्दू अपनी बीवियों को विदेशी नागरिकता के लिए दूसरों को सौंपते हैं।

हरमन गोमेज कौन है?

हरमन गोमेज गोवा का निवासी एक ईसाई पत्रकार है। उसके ट्विटर से पता चलता है कि वह अब पुर्तगाल की नागरिकता ले चुका है। पुर्तगाल के पासपोर्ट के आधार पर वह वर्तमान में इंग्लैंड की राजधानी लंदन में रह रहा है वहीं एक संस्थान में काम करता है। उसके लिंक्डइन प्रोफाइल से पता चलता है कि वह देश के शीर्ष अंग्रेजी समाचार संस्थानों में काम कर चुका है। उसकी प्रोफाइल दिखाती है कि वह टाइम्स नेटवर्क में पाँच साल काम कर चुका है। इसके अलावा वह CNN-NEWS18 में भी काम कर चुका है।

हर्मन गोमेस
हरमन गोमेज कई बड़े पत्रकारिता संस्थानों में काम कर चुका है

सबसे अधिक हैरानी की बात है कि वह वर्तमान में गोवा के बड़े अखबार हेराल्ड गोवा का पत्रकार है जबकि वह लगातार हिन्दू और महिला विरोधी रवैया अपनाए हुए है। उसके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई है। हरमन गोमेज के आचरण को लेकर ना संस्थान ने कोई सफाई पेश की है, ना ही उसने खुद भी अपने कारनामों के लिए माफ़ी माँगी है।

हरमन गोमेज का हिन्दू-महिला विरोधी चरित्र

हरमन गोमेज लगातर सोशल मीडिया पर अपना हिन्दू और महिला विरोधी चरित्र दिखा रहा है। वह एक ट्वीट में एक व्यक्ति को सती प्रथा चलाने वाला बताता है और गाली देता है।

वह एक हिन्दू महिला को कहता है कि गौमांस खाए।

वह पत्रकार सुशांत सिन्हा को जवाब देते हुए भारतीयों को ‘पजीत’ बताता है। पजीत शब्द का उपयग कई विदेशी भारतीयों का अपमान करने के लिए करते हैं। वह इस ट्वीट में ‘भ@वा’ की गाली भी देता है। इसके बाद वह कहता है कि उनके जैसे लोग भाभियों के साथ दुराचार करेंगे।

वह एक ट्वीट में गर्व से बताता है कि उसने अपनी सहकर्मी महिला ब्यूरो चीफ को खुले तौर पर ‘मा@रचो*’ कहा। इसके बाद वह इस बात पर जोर डालता है कि महिला यही थी।

वह भाजपा समर्थकों को गोबर खाने वाला और यौन अपराधी बताता है।

उसका कहना है कि विदेशों में रहने वाले भारतीय अपनी पत्नियों के सौदे के बदले नागरिकता लेते हैं। इसमें वह गुजरातियों को भी विशेष रूप से निशाना बनाता है।

वह ट्विटर पर हिन्दुओं को गौमूत्र पीने की बात कहता है।

गोमेज सिर्फ हिन्दुओं और भारतीयों का विरोध नहीं करता, वह महिला विरोधी भी है। वह हैदराबाद से भाजपा प्रत्याशी माधवी लता को ‘ट्रांसजेंडर’ बताता है। वह इन महिला विरोधी टिप्पणियों के बाद भी बचा हुआ है।

हेराल्ड का यह पत्रकार लगातार हिन्दुओं और महिलाओं को गालियाँ देकर बचता रहा है। यह इंग्लैंड में बैठ कर भारतीयों को नीचा दिखाता है जबकि कुछ साल पहले तक खुद यह भारतीय नागरिक था। उसकी हिन्दू घृणा दिन प्रति दिन बढती जा रही है। वह ट्विटर पर खुले आम अपशब्दों का प्रयोग करता है।

‘मोदी को दोबारा आने से रोको’: 400 पार की धमक से खौफ में आया पाकिस्तान, पूर्व मंत्री ने कहा- BJP को रोकना होगा, राहुल गाँधी कर कर चुके हैं तारीफ

पाकिस्तान के पूर्व मंत्री फवाद चौधरी का भारतीय राजनीति से लगाव बढ़ रहा है। हाल में वो राहुल गाँधी के भाषण की तारीफ करते दिखे तो चर्चा और बढ़ गई। अब वो लोकसभा चुनावों को लेकर भारतीय मीडिया के बीच कहते सुनाई पड़ रहे हैं कि कैसे भी करके मोदी सरकार को दोबारा सत्ता में आने से रोकना होगा, भाजपा को आने से रोकना होगा।

भारतीय मीडिया ने जब इसी चिंता पर उनसे सवाल किए तो वो कहने लगे कि वो भारत की राजनीति को हमेशा से फॉलो करते हैं और यही चाहते हैं कि मोदी को छोड़कर कोई भी सत्ता में आए क्योंकि मोदी सरकार की नीतियों से मुल्कों के बीच शांति प्रभावित हुई है। उनका कहना है कि जो कोई भी नरेंद्र मोदी की मुखालफत करता है उसके सत्ता में आने से कोई आपत्ति नहीं है।

अपने जवाब देते हुए फवाद खुद को शांति प्रिय और लिबरल दिखाने का प्रयास करते हुए कहते हैं कि उनका राहुल गाँधी से कोई खास लगाव नहीं है, लेकिन वो सिर्फ उसे सपोर्ट करेंगे जो कट्टरपंथ को बढ़ावा नहीं देगा चाहे वो पाकिस्तान में हो या फिर हिंदुस्तान। हालाँकि, उनकी इस टिप्पणी पर भाजपा प्रवक्ता शिवम त्यागी ने उन्हें खूब जवाब दिया।

शिवम ने कहा, “पाकिस्तान के ये एक्स मिनिस्टर ऐसी बातें हिंदुस्तान के चैनल पर इसलिए कर पा रहे हैं क्योंकि यहाँ मोदी सरकार है। इन्होंने देश की शांति पर सवाल उठाए तो इन्हें पता होना चाहिए कि हिंदुस्तान में शांति है, आतंकी हमलों पर लगाम है, हिंदुस्तान तो फल-फूल रहा है। यही साबित करता है कि राहुल गाँधी को चाहने वाला, कॉन्ग्रेस को चाहने वाला वही व्यक्ति है जो हिंदुस्तान को कमजोर करना चाहता है।”

शिवम ने इस बात पर भी गौर करवाया कि फवाद चौधरी जो कहते हैं कि राहुल गाँधी इज ऑन फायर… हमारे हिंदुस्तान में तो ये लोग मानते नहीं हैं, लेकिन इन लोगों को ऐसा लगता है। आगे शिवम ने बताया कि क्यों मोदी सरकार के आने से पाकिस्तान के हालत खराब हो गए हैं। इसके बाद फवाद चौधरी आगे कहते हैं कि मोदी सरकार की राजनीति गाँधी विचारधारा के खिलाफ है और अगर गाँधी को हटा दिया जाए तो भारत में बचता क्या है। इसके अलावा फवाद ने यहाँ तक कहा कि आज के समय में घुसकर मारने वाली बातें 2024 में कौन करता है।

इसके बाद फवाद ने फिर भारत के खिलाफ अनाप-शनाप बोलना शुरू किया। फवाद ने कहा कि चीन ने भारत को घर में घुसकर मारा था। कुछ दिन पहले पाकिस्तान की फौज ने आपको घर में घुसकर मारा था। लेकिन आपकी मर्जी आप अपने चैनल पर जो मन हो वो प्रोपगेंडा करें लेकिन हकीकत यही है कि हिंदुस्तान की सीमा इतनी कमजोर हैं कि चीन जब चाहे आ जाता है मारने। इसके बाद वो कश्मीर का मुद्दा भी उठाना शुरू करते हैं, लेकिन एंकर उन्हें फटकार देते हैं।

इसके बाद शिवम उन्हें कहते हैं कि कॉन्ग्रेसी नेता ऐसी बातें कर रहे हैं कि देश में गाँधी के अलावा है क्या, तो ये पता होना चाहिए कि उनके मुल्क की पैदाइश गाँधी के विचार के खिलाफ है। अगर उनकी बात सुनते तो ये पैदा भी नहीं होता। इतना ही नहीं शिवम ने इस प्रोपगेंडे को भी धराशायी किया जहाँ कहा जा रहा था चीन ने भारत को घुसकर मारा। ऐसी तमाम मीडिया रिपोर्ट दिखाने की बात हुई जहाँ भारतीय जवानों द्वारा मारे दए चीन के सैनिकों की कब्र दिखाने की बात हुई थी।

‘तुम (हिंदू) 30%, हम (मुस्लिम) 70%… 2 घंटे में भागीरथी में बहा दूँगा’: TMC विधायक हुमायूँ कबीर ने चुनाव प्रचार के दौरान धमकाया, BJP ने ममता बनर्जी पर उठाए सवाल

लोकसभा चुनाव 2024 के तीसरे चरण के लिए मतदान की तैयारियों के बीच पश्चिम बंगाल के तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) विधायक हुमायूँ कबीर ने हिंदुओं को धमकी दी है। चुनाव प्रचार करने के दौरान हुमायूँ कबीर ने कहा है कि वह हिंदुओं को दो घंटे में भागीरथी नदी (गंगा) में डूबो देंगे। कबीर के इस बयान की जमकर आलोचना हो रही है।

हुमायूँ कबीर भरतपुर विधानसभा सीट से विधायक हैं। भरतपुर मुर्शिदाबाद जिले में आता है। बीते दिनों उन्होंने बहरामपुर से TMC के उम्मीदवार यूसुफ पठान के लिए भी चुनाव प्रचार किया था। इसके अलावा, वे पार्टी के कई उम्मीदवारों के प्रचार में शामिल हुए। एक जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने यह विवादित टिप्पणी की है। इसका वीडियो भी वायरल हो रहा है।

चुनावी जनसभा को संबोधित करते हुए हुमायूँ कबीर ने कहा, “तुम लोग (हिंदू) 70 फीसदी हो और हम लोग भी 30 फीसदी हैं। यहाँ पर तुम काजीपाड़ा का मस्जिद तोड़ोगे और बाकी मुसलमान हाथ पर हाथ रखकर बैठे रहेंगे, यह कभी नहीं होगा। भाजपा को मैं यह बता देना चाहता हूँ कि यह कभी भी नहीं होगा। अगर 2 घंटे के अंदर भागीरथी नदी में बहा न दिया तो मैं राजनीति छोड़ दूँगा।”

बता दें कि पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी पार्टी TMC ने लोकसभा चुनाव के लिए क्रिकेटर यूसुफ पठान को बहरामपुर से अपना उम्मीदवार बनाया है। इसके बाद हुमायूँ कबीर ने कहा था कि अगर पार्टी ने उम्मीदवार नहीं बदला तो वह बहरामपुर से निर्दलीय चुनाव लड़ेंगे। कबीर ने कहा था कि दूसरे राज्य से किसी को लाकर कॉन्ग्रेस के अधीर रंजन चौधरी को नहीं हराया जा सकता है। 

मुर्शिदाबाद जिला मुस्लिम बहुल है। यहाँ की कुल जनसंख्या में लगभग 75 प्रतिशत मुस्लिम आबादी है। यहाँ की अधिकांश आबादी बीड़ी बनाने के व्यवसाय से जुड़ी हुई है। मुर्शिदाबाद कभी बंगाल की राजधानी भी रही थी। यहाँ का हजारद्वारी महल इसके गौरवशाली अतीत का आईना है, फिर भी अधिकांश लोग गरीबी में जीने को मजबूर हैं।

इसको लेकर भाजपा आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने बंगाल सरकार पर हमला बोला है। शक्तिपुर में बूथ कार्यकर्ता सम्मेलन में कबीर की टिप्पणी पर उन्होंने सोशल मीडिया साइट X पर लिखा, “मुर्शिदाबाद में हिंदू अल्पसंख्यक हैं। सिर्फ 28 प्रतिशत। अब यह उनके साथ किया जा रहा है। कल्पना कीजिए, अगर हिंदू बंगाल के बाकी हिस्सों में अल्पसंख्यक हो जाएँ तो क्या होगा।”

उन्होंने आगे कहा, “पश्चिम बंगाल में तुष्टीकरण की राजनीति नए निचले स्तर पर पहुँच गई है। ममता बनर्जी को धन्यवाद। बंगाल में हिंदू अब दोयम दर्जे के नागरिकों से भी बदतर हैं। क्या वह इस विधायक को पार्टी से बाहर निकालने की हिम्मत करेगी? क्या वे बुद्धिजीवी, जो नियमित रूप से हिंदुओं के खिलाफ जहर फैलाते हैं, एक शब्द भी बोलने का साहस कर सकते हैं?”

 

‘GB रोड की रं$’: महिला को नहीं भाया रणबीर कपूर का ‘रामायण’ लुक तो फैंस देने लगे गाली, गंदे वीडियो में चेहरा लगाकर कर रहे वायरल

बॉलीवुड अभिनेता रणवीर कपूर की आने वाली फिल्म ‘रामायण’ का लुक पिछले दिनों इंटरनेट पर खूब वायरल हुआ तो हर किसी ने इस पर प्रतिक्रिया दी। किसी ने कुछ अच्छा कहा तो किसी ने कुछ बुरा। ऐसे में अभिनेता ने इस पर कुछ रिएक्ट नहीं किया, लेकिन उनके फैन्स नेगेटिव प्रतिक्रिया देख भड़क गए और इस नीचता पर उतर आए कि उन्होंने रणवीर कपूर की बुराई करने वाली एक मध्य प्रदेश की महिला को बदनाम करने की कोशिशें शुरू कर दीं।

महिला ने अपने साथ हो रही हरकतों की जानकारी एक्स पर दी। उन्होंने बताया कि उनके अकॉउंट से पर्सनल फोटोज निकालकर, उसे एडिट करके उसे लीक करने का काम हो रहा है। उन्होंने कहा, “ये लोग मेरा लगातार शोषण कर रहे हैं और मेरी फोटो एडिट करके उसे अश्लील वीडियो से जोड़कर शेयर कर रहे हैं। मैंने इन्हें ऐसा करने से मना भी किया लेकिन ये लोग नहीं रुक रहे और मेरा लगातार शोषण किए जा रहे हैं।”

ट्वीट पर महिला ने बताया कि उन्होंने मध्यप्रदेश स्टेट साइबर पुलिस हेडक्वार्टर में शिकायत कराई है और कहा है कि वो इस मामले की जाँच में उनका तत्काल हस्तक्षेप का अनुरोध करती हैं। उन्होंने कुछ स्क्रीनशॉट अपने ट्वीट में साझा करते हुए ये भी बताया कि ये स्क्रीनशॉट और एडिटिड फोटोज के लिंक भी उन्होंने अपनी शिकायत के साथ पुलिस को दिए हैं। साझा कंटेंट में महिला के लिए अभद्र भाषा का प्रयोग हुआ है। उनकी फोटो जॉनी सिन्स के साथ जोड़ दी गई है। उनकी फोटो तस्वीर पर एडिट करके लिख दिया गया है- GB रोड की र$#।

महिला ने पुलिस से निवेदन किया है कि पुलिस बस कैसे भी उनकी ऐसी फोटोज और वीडियोज को बनाने वालों पर कार्रवाई कर ले, इसके लिए वह कैसी भी जानकारी और सहायता देने के लिए तैयार हैं। महिला ने अपनी शिकायत की कॉपी भी ट्वीट में शेयर की है।

जिसे कॉन्ग्रेस ने बनाया ‘पिंजरे में बंद तोता’, वो CBI मोदी राज में सरकारी नियंत्रण से मुक्त: सुप्रीम कोर्ट को केंद्र ने बताया, बंगाल सरकार ने दायर की थी याचिका

भ्रष्टाचार और अपराध पर जीरो टोलरेंस की नीति अपनाने वाली केंद्र की मोदी सरकार पर केंद्रीय एजेंसियों का दुरुपयोग करने का आरोप अक्सर विपक्षी दल लगाते रहते हैं। हालाँकि, केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि केंद्र के नियंत्रण में काम नहीं करतीं। केंद्र सरकार ने गुरुवार (2 मई 2024) को सुप्रीम कोर्ट को कहा कि सीबीआई उसके ‘नियंत्रण’ में नहीं है।

दरअसल, पश्चिम बंगाल सरकार ने एक मुकदमे में आपत्ति उठाई थी और कहा था कि केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) कई मामलों में राज्य सरकार उसकी अनुमति लिए बिना ही अपनी जाँच को आगे बढ़ा रही है। इस मामले में पश्चिम बंगाल सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की थी। इसी याचिका पर सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने यह बात कही।

पश्चिम बंगाल सरकार ने संविधान के अनुच्छेद 131 के तहत केंद्र के खिलाफ शीर्ष अदालत में एक मूल मुकदमा दायर किया है। अनुच्छेद 131 केंद्र और एक या अधिक राज्यों के बीच विवाद में सर्वोच्च न्यायालय के मूल क्षेत्राधिकार से संबंधित है। इसमें आरोप लगाया गया है कि राज्य द्वारा संघीय एजेंसी को दी गई सहमति वापस लेने के बावजूद CBI एफआईआर दर्ज कर रही है और जाँच कर रही है।

केंद्र की ओर से सुप्रीम कोर्ट में पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने न्यायमूर्ति बीआर गवई और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ को बताया कि संविधान का अनुच्छेद 131 सुप्रीम कोर्ट को प्रदत्त ‘सबसे पवित्र’ क्षेत्राधिकारों में से एक है और इस प्रावधान को दुरुपयोग करने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि राज्य के मुकदमे में संदर्भित मामले भारत संघ द्वारा दायर नहीं किए गए हैं।

तुषार मेहता ने कहा, “भारत संघ ने कोई मामला दर्ज नहीं किया है। इसे सीबीआई ने दर्ज किया है। सीबीआई भारत संघ के नियंत्रण में नहीं है।” बताते चलें कि 16 नवंबर 2018 को पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी की सरकार ने राज्य में जाँच करने या छापेमारी करने के लिए CBI को दी गई ‘सामान्य सहमति’ वापस ले ली थी।

दरअसल, सीबीआई भ्रष्टाचार एवं अन्य अपराध के मामलों की जाँच कर रही है। ऐसे में विपक्षी दल केंद्र पर सीबीआई के दुरुपयोग का आरोप लगाते रहे हैं। उनका कहना है कि सीबीआई और ईडी के जरिए केंद्र सरकार विपक्षी दलों को डरा-धमका रही है। हालाँकि, केंद्र ने कई बार स्पष्ट किया है कि केंद्रीय एजेंसी सिर्फ अपना काम कर रही है।

इन आरोपों के आधार पर विपक्षी दलों की सरकार वाली राज्य सरकारों ने अपने-अपने अधिकार क्षेत्र में मामलों की जाँच के लिए सीबीआई को दी गई सामान्य सहमति वापस ले ली है। जिन राज्यों ने ऐसा किया है, उनमें 10 राज्य शामिल हैं। ये राज्य हैं- पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, तेलंगाना, पंजाब, झारखंड, केरल, राजस्थान, छत्तीसगढ़, मिजोरम, और मेघालय।

दिसंबर 2023 को केंद्र की ओर से कार्मिक राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने लोकसभा को सूचित किया गया था इन दस राज्यों ने सीबीआई को दी गई सामान्य सहमति वापस ले ली है। दरअसल, दिल्ली विशेष पुलिस स्थापना (डीएसपीई) अधिनियम 1946 की धारा 6 के अनुसार सीबीआई को अपने अधिकार क्षेत्र में जाँच करने के लिए संबंधित राज्य सरकारों से सहमति की आवश्यकता होती है।

बताते चलें कि इसी सीबीआई को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने साल 2013 में कड़ी टिप्पणी की थी और उसे पिंजरे का तोता बताया था। दरअसल, यूपीए सरकार में हुए कोयला घोटाले पर सीबीआई की स्‍टेटस रिपोर्ट में तत्कालीन कानून मंत्री अश्विनी कुमार और प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) के हस्‍तक्षेप को लेकर सुप्रीम कोर्ट भड़क गया था।

सुप्रीम कोर्ट ने था कि सीबीआई के कई मास्‍टर हैं और जाँच एजेंसी एक तोते की तरह है। कोर्ट ने कहा था, “सीबीआई वो तोता है जो पिंजरे में कैद है। इस तोते को आजाद करना जरूरी है। सीबीआई एक स्‍वायत्त संस्‍था है और उसे अपनी स्‍वायत्तता बरकरार रखनी चाहिए। सीबीआई को एक तोते की तरह अपने मास्‍टर की बातें नहीं दोहरानी चाहिए।”

वक्फ बोर्ड की तरह दिल्ली महिला आयोग में भी भर्ती घोटाला? LG ने 223 कर्मचारियों को निकाला, 40 ही थे पद फिर भी स्वाति मालीवाल ने की बहाली

दिल्ली के उप राज्यपाल वीके सक्सेना ने दिल्ली महिला आयोग के 223 कर्मचारियों को नौकरी से हटा दिया है। इनकी नियुक्तियाँ दिल्ली महिला आयोग की पूर्व अध्यक्ष स्वाति मालीवाल ने गलत तरीके से की थी। दिल्ली महिला आयोग के पास सिर्फ 40 कर्मचारियों का कोटा है, लेकिन स्वाति मालीवाल ने नियमों को अनदेखा करते हुए बिना उपयुक्त मंजूरी के ही इनकी नियुक्ति की थी।

इस मामले का खुलासा वेतन देते समय हुआ था, जब एक महिला कर्मचारी ने हाई कोर्ट में याचिका दाखिल कर अपना वेतन माँगा था। अब एलजी ने जाँच के बाद इस पर एक्शन लिया है और गलत तरीके से की गई सभी भर्तियों को रद्द कर दिया है। इस भर्ती घोटाले का समय 2016 का है, जब दिल्ली के वक्फ बोर्ड में भर्ती घोटाले को अंजाम दिया गया था। उस मामले में वक्फ बोर्ड के दो बार अध्यक्ष रहे ओखला से आम आदमी पार्टी विधायक अमानतुल्लाह खान को जेल भी जाना पड़ा था। वक्फ बोर्ड में 2016 में फर्जी नियुक्तियों के बाद 2019 में भी अवैध तरीके से 32 नियुक्तियाँ की गई थी।

वहीं, दिल्ली महिला आयोग में 223 लोगों को अवैध तरीके से भर्तियाँ की गई थी, जिन्हें दिल्ली के एलजी ने नौकरी से निकाल दिया है। दिल्ली प्रशासन द्वारा जारी एलजी के आदेश पत्र में सभी बिंदुओं को विस्तार से बताया गया है। इन कर्मचारियों को स्वाति मालीवाल द्वारा वित्त विभाग/दिल्ली एलजी की मंजूरी के बिना नियुक्त किया गया था। यही नहीं, दिल्ली महिला आयोग के पास इन 223 लोगों को संविदा कर्मचारियों के रूप में नियुक्त करने की शक्ति भी नहीं थी, और न ही इतनी नियुक्तियों की जगह ही थी। दिल्ली महिला आयोग अधिनियम द्वारा इस विभाग में 40 पदों का ही सृजन किया गया था। ऐसे में स्वाति मालीवाल ने नियमों को अनदेखा कर इनकी नियुक्तियाँ की थी।

इस मामले में दिल्ली महिला आयोग के जुड़े सचिव ने उन्हें चेताया भी था और स्वाति मालीवाल को बताया भी था कि वो बिना वित्त विभाग की मंजूरी के नियुक्तियाँ नहीं कर सकती। पहले इसके लिए पद का सृजन होना चाहिए। लेकिन स्वाति मालीवाल ने सलाह को दरकिनार करते हुए ये भर्तियाँ की। इन भर्तियों की शिकायत सचिव ने की थी, साथ ही ये मामला दिल्ली हाई कोर्ट में भी गया था, जब वेतन न मिलने पर एक महिला कर्मचारी ने दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।

बता दें कि स्वाति मालीवाल साल 2015 में दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष बनी थी और अगले ही साल उन्होंने ये नियुक्तियाँ की थी। दिल्ली महिला आयोग नें 223 नियुक्तियों के बाद से वेतन का मामला लगातार उठता रहा था और कर्मचारियों को हाई कोर्ट की शरण में जाने के बाद वेतन मिल रहा था। इस मामले की जाँच के बाद ही अब एलजी ने ये कदम उठाया है। कुछ लोग इस मामले में भ्रष्टाचार का अंदेशा भी जता रहे हैं कि कहीं इन नियुक्तियों की आड़ में दिल्ली वक्फ बोर्ड की तरह भ्रष्टाचार तो नहीं किया गया।

वक्फ बोर्ड घोटाला क्या है?

बता दें कि जिस समय स्वाति मालीवाल ने दिल्ली महिला आयोग में भर्तियाँ की, ठीक उसी समय दिल्ली वक्फ बोर्ड के पहली बार अध्यक्ष रहे आप नेता और ओखला से विधायक अमनातुल्लाह खान ने वक्फ बोर्ड में नियुक्तियाँ की थी। उस मामले में सीबीआई की जाँच चल रही है। वहीं, साल 2018 में वक्फ बोर्ड का दोबारा अध्यक्ष बनने के बाद अमानतुल्लाह खान की अगुवाई में 32 लोगों की भर्तियाँ वक्फ बोर्ड में की गई। इन भर्तियों में अमानतुल्लाह खान के करीबी रिश्तेदार और ओखला से ही 24 लोगों को चुना गया। यही नहीं, अमानतुल्लाह के पैतृक गाँव से जुड़े लोगों को भी नौकरियाँ दी गई थी। कॉन्ग्रेस ने बाकायदा इन भर्तियों को लेकर प्रेस कॉन्फ्रेंस भी किया था।

अमानतुल्लाह खान को इस मामले में सीबीआई ने गिरफ्तार भी किया था और उन्हें जेल भी जाना पड़ा था। यही नहीं, वित्त विभाग ने पत्र जारी कर अमानतुल्लाह खान पर गंभीर आरोप लगाए थे, जिसके बाद अमानतुल्ला खान को वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष का पद भी छोड़ना पड़ा था। अमानतुल्लाह खान ने वक्फ बोर्ड का अध्यक्ष रहते और भी कई गंभीर आपराधिक कामों को अंजाम दिया, जिसमें उन्होंने वक्फ की संपत्तियों को अवैध तरीके से किराए पर देकर पैसे कमाए। वहीं, भर्तियों के माध्यम से भी उन पर पैसे बनाकर रियल इस्टेट में निवेश का आरोप है। सीबीआई के बाद अब ईडी ने अमानतुल्लाह खान को समन जारी किया है।