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प्रज्वल रेवन्ना के खिलाफ लुकआउट नोटिस, भारत आते ही होंगे गिरफ्तार: कर्नाटक सेक्स स्कैंडल में SIT ने जल्द पेश होने को कहा

यौन शोषण सांसद प्रज्वल रेवन्ना के खिलाफ यौन शोषण मामले की जाँच कर रही SIT ने उन्हें लुकआउट नोटिस जारी किया है। इससे पहले SIT ने उनको पूछताछ के लिए नोटिस भेजा था। प्रज्वल रेवन्ना वर्तमान में विदेश में हैं।

जानकारी के अनुसार, महिला आयोग के पत्र के बाद यौन शोषण के आरोपों पर बनाई गई SIT ने देश के सभी एयरपोर्ट, समुद्री पोर्ट और सीमाओं पर उनकी तलाश के लिए यह लुकआउट नोटिस जारी किया है।

SIT ने उन्हें यौन शोषण के मामले में पूछताछ के लिए पेश होने को कहा था। हालाँकि, उन्होंने इसका जवाब एक पत्र से दिया था कहा था कि वह अपना बचाव अपने वकील के माध्यम से करेंगे। उनके वकील ने SIT से सात दिन का समय माँगा था।

गौरतलब है कि कर्नाटक के हासन से जेडीएस के सांसद और 2024 लोकसभा चुनावों के लिए प्रत्याशी प्रज्वल रेवन्ना के आपत्तिजनक वीडियो कथित तौर पर सामने आए हैं। इन वीडियो में उनके महिलाओं से दुराचार करने का आरोप है। उन पर महिलाओं को धमकाने और प्रताड़ित करने का भी आरोप है। उनके खिलाफ इस मामले में एक शिकायत भी दर्ज करवाई गई है।

प्रज्वल रेवन्ना हासन में मतदान के बाद बेंगलुरु से जर्मनी चले गए थे। इस मुद्दे के तूल पकड़ने के बाद कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्दारमैया ने इस मामले में SIT जाँच के आदेश दिए थे। जेडीएस ने भी प्रज्वल को पार्टी से निलंबित कर दिया है। प्रज्वल रेवन्ना के खिलाफ जाँच के लिए महिला आयोग ने भी पत्र लिखा था।

प्रज्वल रेवन्ना मामले में कॉन्ग्रेस पर ढिलाई बरतने के आरोप भी लगे हैं। प्रज्वल के पूर्व ड्राइवर ने एक मीडिया संस्थान को बताया था कि उसने प्रज्वल की यह वीडियो कई महीने पहले कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार को दी थी लेकिन इस पर कार्रवाई नहीं की गई और अब मामला सामने आया है।

‘कुछ लोग स्नैक्स खाने पार्टी दफ्तर आ जाते हैं’: पप्पू यादव ने प्रियंका गाँधी का चुनाव प्रचार करने का दिया ऑफर तो बोली कॉन्ग्रेस, कहा- वे पार्टी के सदस्य नहीं

बिहार के बाहुबली नेता पप्पू यादव ने लोकसभा चुनाव 2024 की घोषणा के तुरंत बाद 20 मार्च को अपनी जन अधिकार पार्टी का कॉन्ग्रेस में विलय कर दिया और खुद कॉन्ग्रेस की सदस्यता ले ली थी। अब कॉन्ग्रेस ने पप्पू यादव को स्नैक्स खाने के लिए कॉन्ग्रेस दफ्तर में आने वाला नेता बता दिया है। कॉन्ग्रेस ने कहा है कि पप्पू यादव ने कॉन्ग्रेस की कभी सदस्यता ली ही है। पार्टी ने पप्पू यादव से सदस्यता पर्ची दिखाने की माँग की है।

कॉन्ग्रेस के इस रूख से पप्पू यादव की स्थिति ‘न घर के ना घाट के’ वाली हो गई। उनकी पार्टी और पार्टी के नेताओं का कॉन्ग्रेस में विलय हो गया और अब कॉन्ग्रेस उन्हें पहचानने से इनकार कर रही है। दरअसल, पार्टी का विलय करते हुए पप्पू यादव ने पूर्णिया से चुनाव लड़ने की इच्छा जताई थी। हालाँकि, INDI गठबंधन में यह सीट राजद के खाते में चला गया।

लालू यादव की पार्टी राजद ने यहाँ से बीमा भारती को अपना उम्मीदवार घोषित किया है। वहीं, कॉन्ग्रेस से बगावत करके पप्पू यादव ने पूर्णिया सीट से निर्दलीय लड़ने की घोषणा कर दी। इसके बाद बिहार कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष अखिलेश प्रसाद सिंह ने पप्पू से अपना नामांकन पत्र वापस लेने के लिए कहा था। उन्होंने कहा था कि कॉन्ग्रेस अपने सदस्यों को निर्दलीय के रूप में लड़ने की अनुमति नहीं देती है।

निर्दलीय चुनाव लड़ने के बावजूद पप्पू यादव ने खुद को कॉन्ग्रेस, राहुल गाँधी और प्रियंका गाँधी वाड्रा का सिपाही कहते हैं। बता दें कि पप्पू यादव की पत्नी रंजीत रंजन कॉन्ग्रेस की राज्यसभा सदस्य हैं और वह खुद को ‘आखिरी साँस तक कॉन्ग्रेस, राहुल गाँधी और प्रियंका गाँधी का सिपाही’ बताती रही हैं। राहुल गाँधी और प्रियंका गाँधी के समर्थन में पप्पू यादव ने सोशल मीडिया साइट X पर ट्वीट भी किया।

पप्पू ने मंगलवार (30 अप्रैल 2024) को पोस्ट किया, “अमेठी रायबरेली से राहुल गाँधी जी और प्रियंका गाँधी जी चुनाव लड़ेंगे तो मैं अपनी पूरी टीम के साथ अपने संसाधन से चुनाव प्रचार करने जाऊँगा। पाँच लाख से अधिक मतों से उनकी विराट विजय सुनिश्चित है। इस रावणराज के विनाश में एक गिलहरी के रूप में अपनी भूमिका निभाऊँगा।”

हालाँकि, पप्पू यादव ने कॉन्ग्रेस की बात नहीं मानी और वे अपना चुनाव प्रचार जारी रखे हुए हैं। इसके बाद कॉन्ग्रेस ने बुधवार (1 मई 2024) को आधिकारिक तौर पर कह दिया है कि पप्पू यादव ने ना ही पार्टी की सदस्यता ली है और ना ही अपनी पार्टी का कॉन्ग्रेस में विलय किया है। कॉन्ग्रेस के प्रवक्ता आलोक शर्मा ने तो पप्पू यादव पर तंज भी कस दिया।

आलोक शर्मा ने कहा, “मुझे नहीं लगता कि पप्पू ने अपनी पार्टी का कॉन्ग्रेस में विलय किया है। उन्होंने पटना में सदस्यता पर्ची भी नहीं ली, जो बिहार से पार्टी में शामिल होने वाले किसी भी व्यक्ति को लेनी पड़ती है।” उन्होंने यहाँ तक कह दिया कि बहुत से लोग प्रेस कॉन्फ्रेंस में स्नैक्स लेने (नाश्ता करने) आते हैं। उन्होंने कहा, “मैं जो कहना चाह रहा हूँ वह यह है कि प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी।”

बता दें कि कॉन्ग्रेस के बिहार प्रभारी मोहन प्रकाश और मीडिया एवं प्रचार विभाग के प्रमुख पवन खेड़ा की उपस्थिति में पप्पू यादव ने 20 मार्च 2024 को अपनी पार्टी का कॉन्ग्रेस में विलय किया था। इसके साथ ही उन्होंने कॉन्ग्रेस की सदस्यता की घोषणा की थी। प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पप्पू यादव का पार्टी में स्वागत किया गया था और उनकी जन अधिकार पार्टी के विलय की घोषणा की गई थी।

दरअसल, बिहार में 40 लोकसभा सीटें हैं। इनमें से 23 सीट पर राष्ट्रीय जनता दल (RJD) चुनाव लड़ रही है। कॉन्ग्रेस नौ सीटों पर, सीपीआई (एमएल) और विकासशील इंसान पार्टी तीन-तीन सीटों पर चुनाव लड़ रही है। वहीं, सीपीआई और सीपीआई (एम) एक-एक सीट पर चुनाव लड़ रही है। ये सभी बिहार में महागबंधन का हिस्सा हैं।

पाकिस्तान ‘शहजादे’ को PM बनाने के लिए उतावला: कॉन्ग्रेस के ‘पाक प्रेम’ पर बरसे PM मोदी, पड़ोसी मुल्क के नेता को राहुल गाँधी में दिखा है ‘फायर’

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज (2 अप्रैल 2024) गुजरात आणंद में विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए राहुल गाँधी की क्लास लगा दी। इस रैली में उन्होंने कॉन्ग्रेस पर निशाना तो साधा ही। साथ में पाकिस्तान से जो राहुल गाँधी को सपोर्ट मिल रहा है, उस पर भी खूब हमला बोला। उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस सत्ता में लौटे इसके लिए पाकिस्तान में दुआ हो रही है और शहजादे को पीएम बनाने के लिए पाकिस्तान उतावला हुआ जा रहा है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, “कॉन्ग्रेस के शहजादे आजकल माथे पर संविधान रखकर नाच रहे हैं। लेकिन, कॉन्ग्रेस ये जवाब दे कि जिस संविधान को आज माथे पर रखकर नाच रहे हो, क्यों 75 साल तक हिंदुस्तान के सभी हिस्सों पर ये संविधान लागू नहीं होता था।”

उन्होंने कहा, “मोदी के आने से पहले इस देश में 2 संविधान, 2 झंडे थे। शहजादे की पार्टी कॉन्ग्रेस ने, इनके परिजनों ने देश में संविधान लागू नहीं होने दिया था। कश्मीर में हिंदुस्तान का संविधान लागू नहीं होता था। धारा 370 दीवार बनकर बैठी थी। सरदार पटेल की भूमि से आए इस बेटे ने उस 370 को जमींदोज कर दिया और सरदार साहब को श्रद्धांजलि दी। कॉन्ग्रेस की कमजोर सरकार आतंक के आकाओं को डोजियर देती थी। लेकिन, मोदी की मजबूत सरकार आतंकियों को घर में घुसकर मारती है।”

पीएम मोदी ने इस बात पर गौर करवाया- “संयोग देखिए, आज भारत में कॉन्ग्रेस कमजोर हो रही है। मजा ये है कि यहाँ कॉन्ग्रेस मर रही है और वहाँ पाकिस्तान रो रहा है। कॉन्ग्रेस के लिए अब पाकिस्तानी नेता दुआ कर रहे हैं। शहजादे को प्रधानमंत्री बनाने के लिए पाकिस्तान उतावला है। और कॉन्ग्रेस तो पाकिस्तान की मुरीद है ही। पाकिस्तान और कॉन्ग्रेस की ये पार्टनरशिप अब पूरी तरह एक्सपोज हो गई है।”

बता दें कि पीएम मोदी ने राहुल गाँधी पर यह ताना इसलिए कसा है क्योंकि हाल में पाकिस्तान के पूर्व मंत्री फवाद चौधरी ने राहुल गाँधी के भाषण की तारीफ करते हुए कहा था- Rahul on Fire… अब भाजपा ने पाकिस्तान की इसी पसंद पर सवाल खड़े किए हैं।

भारत में शरिया शासन चाहता है CNN, मुखालफत करने वालों को बताता है इस्लाम विरोधी: हिंदू घृणा से भरा अमेरिकी मीडिया का लेख पढ़ा आपने

भारत में लोकसभा चुनावों के दौर के बीच पश्चिमी मीडिया पूरी तरह से इस प्रयास में लगा हुआ है कि कैसे भारतीय वोटर पीएम मोदी की सरकार के विरोध में आ जाएँ। पश्चिमी मीडिया में लगातार ऐसे लेख प्रकाशित हो रहे हैं जिनमें दावा किया जा रहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी हिन्दू हार्डलाइनर हैं और उनका तीसरा कार्यकाल भारत को हिन्दू राष्ट्र बनाएगा। भारत विरोधी और हिन्दू विरोधी नैरेटिव चलाने के चक्कर में लगातार यह मीडिया हाउस लगातर झूठ परोस रहे हैं। हाल ही में CNN ने ऐसा ही एक लेख प्रकाशित किया।

1 मई, 2024 को अमेरिकी मीडिया संस्थान CNN ने ‘भारत के पवित्र शहर में बढ़ते हिंदू राष्ट्रवाद से मुसलमान डरे हुए हैं’ (Rising Hindu nationalism leaves Muslims fearful in India’s holy city) शीर्षक से एक लेख प्रकाशित किया। शीर्षक से ही पता चलता है कि इस लेख के जरिए वाराणसी (काशी) में मुस्लिम डरे हुए हैं कि कहीं पीएम मोदी को तीसरा कार्यकाल ना मिला जाए।

CNN का दावा: मुस्लिमों को निशाने पर लेने के लिए हिन्दुओं को ऊँचे पदों पर बिठाया जा रहा

ऐश्वर्या एस अय्यर, रिया मोगुल, कुणाल सहगल और विल रिप्ले द्वारा लिखे गए इस लेख में इस बात पर समस्या जताई गई है कि मोदी के भारत में कैसे ‘हिंदू राष्ट्रवादियों’ को सरकारी संस्थानों में ऊँचे पदों पर नियुक्त किया जा रहा है। अपने दावे को मजबूती देने के लिए, CNN ने यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से एक रिपोर्ट लिंक कर दी। हालाँकि, CNN ने साफ रूप से CM योगी का नाम नहीं लिया, लेकिन इसने साफ रूप से यह कहा कि बड़े पदों पर हिन्दुओं को इसलिए बैठाया जा रहा है ताकि वह मुस्लिमों को निशाना बना सकें।

CNN को अनुच्छेद 370 और CAA से दिक्कत

CNN के लेख में जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 को हटाए जाने को लेकर भी प्रलाप किया गया है। इसमें दावा गया कि कि मोदी सरकार ने भारत के अकेले मुस्लिम बहुल राज्य की स्वायत्तता छीन ली। हालाँकि, CNN ने यह नहीं बताया कि आतंक, देश विरोधी प्रदर्शनों और भारतीय सुरक्षाबलों पर पथराव से त्रस्त एक अस्थिर क्षेत्र अब विकास के रास्ते पर चल दिया है। मोदी सरकार ने जम्मू कश्मीर में बुनियादी इन्फ्रा, शिक्षा, पर्यटन और विकास में बड़ा निवेश किया है।

इसके अलावा CNN ने 2019 में लाए गए नागरिकता क़ानून का भी जिक्र क्या। CNN ने पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान के प्रताड़ित अल्पसंख्यकों को नागरिकता देने वाले कानून को मुस्लिम विरोधी बताने का प्रयास दिया। इसका आधार CNN ने इस कानून के विरोध में हुए दंगों को बता दिया और कहा कि यह कानून मुस्लिमों को नागरिकता के बाहर करता है।

CNN ने इसमें यह छुपाया कि यह दंगे इस पर फैलाई गई अफवाह के चलते हुए थे। क़ानून किसी भी मुस्लिम को नागरिकता ने बाहर नहीं करता और कोई भी मुस्लिम इस कानून के बाद भी भारत की नागरिकता के लिए आवेदन दे सकता है। CAA कानून केवल इन देशों में रहने वाले अल्पसंख्यकों की सुरक्षा के लिए लाया गया है।

2020 के दिल्ली हिन्दू विरोधी दंगों को मुस्लिमों पर हमला मानता है CNN

CNN ने 2020 के दिल्ली हिन्दू विरोधी दंगों के एक पीड़ित नासिर अली का उदाहरण दिया। इसमें दावा किया गया कि नासिर को मुस्लिम होने के कारण आँख में गोली मारी गई। CNN का यह प्रोपेगेंडा पुराना है और हिन्दू विरोधी वामपंथी लम्बे समय से यही करते आए हैं कि मुस्लिमों के खिलाफ हुई हिंसा को बढ़ा चढ़ा कर पेश किया जाए। हालाँकि, CNN ने इसी के साथ IB अफसर अंकित शर्मा का नाम नहीं लिया, जिनकी लाश एक नाले से बरामद हुई थी। इस दंगे में 53 लोग मारे गए थे और 200 से ज्यादा घायल हुए थे।

CNN ने एक कश्मीरी मुस्लिम के लिए प्रलाप किया जिसको कथित तौर पर उसकी मुस्लिम पहचान के कारण राजस्थान में हफ़्तों तक कमरा नहीं मिला। CNN के लिए यह बात अधिक गंभीर है कि एक व्यक्ति को कमरा नहीं मिला बजाय कि दंगों में गरीब हिन्दू मारे गए। CNN अपराध को तब ज्यादा खतरनाक घोषित करता है जब वह मुस्लिमों के खिलाफ हों। CNN ने अपने दावों को मजबूती के लिए एमनेस्टी और ह्यूमन राइट्स वाच जैसी संस्थाओं का नाम लिया जो पहले ही हिन्दू विरोधी रवैये के लिए कुख्यात हैं।

CNN में पीएम मोदी पर फैलाया झूठ

CNN ने पीएम मोदी को लेकर विपक्षी दलों के प्रोपेगेंडा पर काम किया और उसे बढ़ाने का प्रयास किया। इसने दावा किया कि पीएम मोदी ने एक रैली में मुस्लिमों को घुसपैठिया बताया। बयान को तोड़ मरोड़ कर पेश करते हुए CNN ने इसे मुस्लिम विरोधी बताया। हालाँकि, सच्चाई यह थी कि पीएम मोदी ने मुस्लिमों को घुसपैठिया ना कह कर उन पर हमला किया था जो अवैध रूप से देश में प्रवेश करते हैं।

CNN नहीं चाहता ज्ञानवापी वापस ले हिन्दू, इससे खराब सेक्यूलर होने पर होगा असर

CNN यह भी चाहता है कि हिन्दू काशी के ज्ञानवापी ढांचे पर से अपना दावा छोड़ दें ताकि देश सेक्यूलरिज्म की रक्षा हो सके। CNN का कहना है कि हिन्दुओं का ज्ञानवापी पर दावा लोगों के विश्वास पर ज्यादा टिका है ना कि असल सबूतों पर। हाल ही में आई ASI सर्वे की रिपोर्ट इसी तरफ इशारा करती है। इसके लिए एक स्थानीय मुस्लिम का बयान भी CNN लगाता है। यह मुस्लिम कहता है कि उसे अब न्यायपालिका और पुलिस पर कोई भरोसा नहीं रहा।

राम मंदिर को लेकर भी CNN प्रलाप किया, उसने बताया कि राम मंदिर के निर्माण से देश के सेक्युलर फैब्रिक को नुकसान पहुँचा है। ऐसे में यह सोचा जा सकता है कि यदि हिन्दू अपने अधिकारों के लिए इस लिए ना लड़ें कि इससे सेक्युलर फैब्रिक खतरे में आएगी तो आखिर फिर यह एक छलावा ही है।

यह लेख अंग्रेजी में यहाँ क्लिक करके पढ़ा जा सकता है।

‘साइड इफेक्ट का पता चलते ही मोदी ने अपनी फोटो हटवाई’: कोविड वैक्सीन सर्टिफिकेट से PM की तस्वीर हटते ही झूठ फैलाने लगा गैंग, जानिए सच्चाई

लोकसभा चुनावों के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ फर्जी जानकारी फैलाने का काम जारी है। इस दौरान मोदी विरोधी लोग फैला रहे हैं कि जब से कोविशील्ड के बारे में जानकारी आई है उसके बाद वैक्सीन सर्टिफिकेट से उनकी तस्वीर गायब हो गई है।

देख सकते हैं कि कैसे स्क्रीनशॉट लेकर पीएम मोदी पर उंगली उठाई जा रही है। सुप्रीम कोर्ट के वकील प्रशांत भूषण ने भी इसे शेयर किया हुआ है। अपने ट्वीट में उन्होंने दावा किया है कि जैसे ही कोविड वैक्सीन के घातक परिणामों के बारे में पता चला, मोदी ने अपनी फोटो वैक्सीन सर्टिफिकेट से हटवा ली है। आगे प्रशांत भूषण लिखते हैं- ये मोदी का कमाल है।

अब हकीकत क्या है? क्या सच में नरेंद्र मोदी ने कोविशील्ड पर जानकारी आने के बाद अपनी फोटो हटवाई है और उनके ऊपर उठाई जा रही उंगलियाँ सही है या फिर ये एक प्रोपगेंडा का हिस्सा है जिसे लोकसभा चुनावों में चलाया जा रहा है।

हमारी पड़ताल में सामने आया है कि वैक्सीनेशन सर्टिफिकेट से पीएम मोदी की तस्वीर इसलिए हटाई गई है, क्योंकि लोकसभा चुनाव को लेकर आदर्श आचार संहिता लागू है। यानी, हकीकत यह है कि पीएम मोदी ने या भाजपा ने इस फोटो को नहीं हटवाया है बल्कि आचार संहिता लागू होने के कारण यह तस्वीर हटाई गई है।

दिलचस्प बात ये है कि ये तस्वीर पहली बार कोविड वैक्सीन से नहीं रिमूव हुई है। साल 2022 में भी ऐसा हो चुका है। 2022 में गोवा, मणिपुर, उत्तराखंड, पंजाब और उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव के दौरान भी प्रधानमंत्री की तस्वीर सर्टिफिकेट से हटा दी गई थी।

जो है बच्चों के हत्यारों/ बलात्कारियों की समर्थक, जिसके लिए हिंदू हैं भिखमंगा… उस परवीन शेख के लिए जागा इंडियन एक्सप्रेस का मजहब

मुंबई के सबसे नामी स्कूलों में से एक सोमैया स्कूल की प्रिंसिपल पर ऑपइंडिया ने पिछले दिनों रिपोर्ट करके बताया था कि कैसे वो हिंदू घृणा से सनी हुई हैं और अभिव्यक्ति व्यक्त करने के नाम पर हमास आतंकी संगठन का समर्थक करती हैं… हमारी उस रिपोर्ट के बाद अब खबर है कि स्कूल प्रशासन ने परवीन शेख की एक्टिविटीज को देखते हुए उनसे इस्तीफा माँगा है, लेकिन परवीन शेख इसे देने से मना करने लगीं… इस संबंध में कई मीडिया संस्थानों ने अपनी रिपोर्ट की है, मगर इन सारी रिपोर्टों में जिसने सबसे ज्यादा तथ्यों को छिपाया है वो इंडियन एक्सप्रेस की खबर है।

इंडियन एक्सप्रेस ने अपनी रिपोर्ट में दिखाया है जैसे स्कूल प्रशासन सिर्फ फिलीस्तीन और हमास-इजरायल के बीच तनाव पर प्रतिक्रिया देने के कारण परवीन शेख से इस्तीफा माँग रहा है। रिपोर्ट में बताया जा रहा है कि परवीन के साथ ऐसा तब हो रहा है जब वो सोमैया स्कूल से 12 साल से जुड़ीं हैं और 7 साल से प्रिंसिपल भी हैं। रिपोर्ट में शेख का पक्ष डालते हुए कहा गया कि 26 अप्रैल को प्रशासन ने मुझे बुलाकर कहा था कि उनके (प्रशासन के) ऊपर दबाव बनाया जा रहा है कि वो मुझसे रिजाइन माँगें इसलिए मुझे रिजाइन देना ही होगा।”

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में प्रकाशित रिपोर्ट

आगे परवीन शेख द्वारा लोकतांत्रिक देश में रहने का हवाला दिया गया है और विचार व्यक्त करने की आजादी जैसी बातें की गई हैं। शायद ऐसा कहते हुए और इंडियन एक्सप्रेस उनका ये पक्ष छापते हुए भूल गए कि इसी लोकतांत्रिक देश में वो हिंदू भी रहते हैं जिनके प्रति खुद को काबिल प्रिंसिपल कहने वाली मास्टरनी के मन में अथाह घृणा है। परवीन शेख के एक्स अकॉउंट पर रिप्लाई और लाइक देख पता चलता है कि वो मुस्लिमों द्वारा किए गए अपराधों को कैसे जस्टिफाई करने में विश्वास रखती हैं और समय-समय पर हिंदुओं का मजाक बनाने से नहीं चूँकती।

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट्स में मास्टरनी का सारा पक्ष डाला गया है लेकिन ये जानकारी नहीं डाली गई कि आखिर क्यों उनकी निष्ठा पर सवाल उठे हैं। उन्होंने कैसे पोस्टों को लाइक किया है और कैसे विचारों को प्रसारित करने का काम करती आई हैं। कहने को कोई भी कह सकता है कि ये सारे विचार निजी होते हैं और इनका इतना बवाल नहीं बनाया जाना चाहिए… पर एक बार इस पक्ष को सोचकर देखिए कि सबसे बड़े स्कूलों में से एक की प्रिंसिपल होने के नाते, जिनके आचार-विचार पर हजारों बच्चों का भविष्य टिका है उनके द्वारा इस तरह की बातें किया जाना क्या देश के भविष्य के लिए, यहाँ के लोकतंत्र के लिए सुरक्षित हो सकता है?

टीचर के विचारों से छात्रों का प्रभावित होना कोई ऑपइंडिया द्वारा गढ़ी हुई बात नहीं है। अभिभावक अपने बच्चों को स्कूल भेजते इसीलिए हैं ताकि टीचरों से ज्ञान ले सकें। अब ऐसे में अगर ज्ञान ये दिया जाएगा कि हमास ने जो 7 अक्तूबर को किया वो एक विरोध मात्र था कोई आतंकी हमला नहीं… तो क्या हम अपेक्षा कर सकते हैं कि बच्चे ये समझें कि दुनिया में आतंक की परिभाषा क्या है और उससे लड़ने कैसे होगा, उस मानसिकता से बचना कैसे होगा।

परवीन शेख द्वारा लाइक पोस्ट

आतंकी संगठन के लिए संवेदना जाहिर कर छात्रों को ऐसी शिक्षा देना कि हमास द्वारा 7 अक्टूबर को किया गया इजरायल में हमला (जिसमें बच्चे मरे और महिलाओं से रेप किया गया) एक विरोध का तरीका हो सकता है… तो ये कितना सही है इस पर आप खुद फैसला कीजिए।

इंडियन एक्सप्रेस ने रिपोर्ट को बैलेंस दिखाने के लिए उन लोगों का पक्ष भी छापा है जो कह रहे हैं परवीन शेख एक अच्छी प्रिंसिपल हैं और उनके निजी विचारों को देखते हुए उनके इस्तीफा नहीं माँगा जाना चाहिए। हकीकत जबकि ये है कि इस मामले में एक पक्ष वो भी है जो साफ कह रहा है कि परवीन शेख के विचार स्कूल के छात्रों के लिए घातक हो सकते हैं क्योंकि वो एक टीचर हैं और उनकी दी शिक्षा से बच्चे अपनी सोच बनाएँगे।

टाइम्स नाऊ में प्रकाशित अभिभावक का पक्ष

आज के समय में पोस्ट लाइक करना आपकी सोच को समझने का एक तरीका बन गया है। ऐसे में जब परवीन की लाइक वाली लिस्ट में ऐसे हिंदू घृणा से सने तमाम ट्वीटों को लाइक होते देखा जाए, पीएम मोदी को गाली देने का काम किया जाए, छात्रों को हिजाब पहनकर शिक्षा लेने देने की पैरवी की जाए, मंदिर जाने का विरोध किया जाए… तो इससे क्या संदेश जाएगा?

इतना ही नहीं आप अगर उनके ट्वीट देखेंगे तो पता चलेगा कि वो अपने ट्वीट में मीम के माध्यम से हिंदुओं को मजाक बनाती आई हैं। एक मीम शेयर किया था जिसमें दिखाया गया था कि हिंदू भारत में रहकर मुस्लिम बॉयकॉट का नारा लगाते हैं और मिडल ईस्ट में भीख माँगते हैं।

आपको क्या लगता है कि ये सोच लोकतंत्र के दायरे में आती है या फिर हिंदू घृणा में? ऐसे ही हिंदुओं को काफिर-काफिर बताने वाले जाकिर नाइक के प्रति झुकाव क्या दर्शाता है?

इस पूरे मामले में एक सबसे बड़ी बात ये ध्यान देने वाली है कि भले ही परवीन शेख के समर्थन में इंडियन एक्प्रेस जैसे संस्थान एकतरफा पक्ष चला दें, लेकिन सच तो ये है कि ऑपइंडिया की रिपोर्ट पर उसके आलोचक भी ये मान रहे हैं कि परवीन शेख के विचार स्कूल के लिए घातक हैं।

ऑपइंडिया के आलोचक भी कर रहे परवीन शेख की सोच का विरोध

एक यूजर की प्रतिक्रिया से समझ सकते हैं कि वो भले ऑपइंडिया के विचारों से नहीं जुड़ता लेकिन उसे पता चल रहा है कि हमास आतंकी संगठन ने 7 अक्तूबर को इजरायल में जो किया उसे कोई विरोध नहीं कह सकता। लोग नरसंहार के विरोधी और इजरायल विरोधी हो सकते हैं, मगर उसके लिए उन्हें आतंकी संगठन का समर्थन करने की जरूरत नहीं। पर, परवीन शेख ने जो किया वो खुले तौर पर आतंकी संगठन की सोच को बढ़ावा देने वाला है।

इस मामले में जैसे एक धड़ा यह बताने में लगा है कि परवीन शेख अच्छी प्रिंसिपल हैं और निजी विचारों पर न ध्यान दिया जाए। दूसरा पक्ष ये भी है जो मानता है कि मुंबई जैसे शहर के स्कूल की प्रिंसिपल की यह सोच व्यापक स्तर पर प्रभाव डाल सकती है क्योंकि मुंबई ही वो शहर है जिसने 26/11 के रूप में सबसे बड़ा आतंकी हमला झेला हुआ है।

सेक्स पावर बढ़ाने वाली ‘वियाग्रा’ के लिए चल रहा झगड़ा दिल्ली हाई कोर्ट में फरिछाया, माना फाइजर का ही है अधिकार-रेनोविजन पर लगा जुर्माना

दिल्ली हाई कोर्ट ने अपने एक निर्णय में कहा है कि अमेरिकी फार्मा कम्पनी फाइजर को ही ‘वियाग्रा’ नाम से अपने उत्पाद बेचने का अधिकार है। हाई कोर्ट ने कहा कि कोई अन्य कम्पनी इससे मिलते जुलते नाम से उत्पाद नहीं बेच सकती। हाई कोर्ट ने इसको लेकर एक कम्पनी को फाइजर को ₹3 लाख देने का भी आदेश दिया।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, फाईजर ने दिल्ली हाई कोर्ट में एक याचिका लगा कर कह था कि एक अन्य कम्पनी रेनोविज़न भी वियाग्रा से मिलते जुलते नाम से अपने उत्पाद बेच रही है। फाइजर ने इसकी बिक्री प्रतिबंधित करने की माँग की थी। फाइजर ने रेनोविजन के ‘विगोरा’ नाम से बेचे जाने वाले उत्पादों के खिलाफ यह याचिका दायर की थी।

दिल्ली हाई कोर्ट ने अपने निर्णय में कहा कि फाइजर के वियाग्रा नाम से उत्पाद बेचने से पहले यह नाम कहीं और नहीं था और ना ही इसका कोई शाब्दिक अर्थ होता है। इसके अलावा उनके द्वारा प्रस्तुत किए गए साक्ष्य भी इसी बात की गवाही देते हैं। कोर्ट ने कहा कि फाइजर ने भारत में भी इस नाम का पंजीकरण करवाया है जो कि उन्हें यह नाम उपयोग करने का एकल अधिकार देता है। हाई कोर्ट ने रेनोविजन की दलीलें भी इस मामले में में खारिज कर दी।

रेनोविजन ने कहा कि विगोरा के नाम से बिकने वाले उसके उत्पाद वियाग्रा से अलग हैं और उनके बनने तथा उनके असर करने की विधि भी अलग है। रेनोविजन ने कोर्ट से दावा किया कि जहाँ फाइजर का वियाग्रा उत्पाद पुरुषों की शक्तिवर्धक दवाई है तो वहीं उसका विगोरा उत्पाद होम्योपैथिक है और महिलाओं की मासिक धर्म सम्बन्धित समस्याओं को सही करने के लिए है। कम्पनी ने विगोरा 1000, विगोरा 2000 और विगोरा 5000 के नाम से बेचे जाने वाले उत्पादों को फाइजर के उत्पादों से अलग बताया।

हाई कोर्ट ने फाइजर की दलीलों को सही मानते हुए कहा कि रेनोविजन के उत्पादों के नाम फाइजर के उत्पादों से मिलते हैं। हाई कोर्ट ने इनके निर्माण, वितरण और बिक्री पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाने का आदेश दिया। हाई कोर्ट ने रेनोविजन को यह भी आदेश दिया कि वह ₹3 लाख फाइजर को चुकाए।

राम, शिव और अब कृष्ण… हिंदू देवताओं से इतनी घृणा क्यों करती है कॉन्ग्रेस

कर्नाटक की कॉन्ग्रेस सरकार के एक मंत्री रामप्पा तिम्मापुर ने यौन शोषण और सेक्स वीडियो के आरोपित निलम्बित जेडीएस सांसद प्रज्वल रेवन्ना की तुलना हिन्दू देवता श्रीकृष्ण से कर दी है। कॉन्ग्रेस नेता का कहना है कि प्रज्वल रेवन्ना भगवान कृष्ण का रिकॉर्ड तोड़ना चाहते थे। इससे पहले कॉन्ग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे श्रीराम का मुकाबला शिव से करवा रहे थे।

टाइम्स नाउ की एक रिपोर्ट के अनुसार, कर्नाटक सरकार में मंत्री रामप्पा तिम्मापुर ने कहा,”हमने आज तक देश में ऐसा घृणित विचार नहीं देखा है, शायद प्रज्वल कोई गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाना चाहते हों। महिलाएँ श्रीकृष्ण के साथ निष्ठा के कारण रहतीं थी, लेकिन ऐसे नहीं, लगता है प्रज्वल रेवन्ना उनका ही रिकॉर्ड तोड़ना चाहते थे।”

रामप्पा तिम्मापुर ने यहाँ महिलाओं को धमकाने, उन्हें प्रताड़ित करने और उनका यौन शोषण करने वाले आरोपित सांसद प्रज्वल रेवन्ना की तुलना भगवान श्रीकृष्ण से की। कॉन्ग्रेस नेता का इशारा संभवतः भगवान कृष्ण से सम्बन्धित उस कहानी से था, जिसमें कहा जाता है कि उनके 16000 रानियाँ थीं।

यहाँ मंत्री ने यह कहने की कोशिश भी की कि हिन्दुओं के लिए आराध्य श्रीकृष्ण यौन शोषण जैसे घृणित कृत्य में लिप्त थे और उसका उन्होंने रिकॉर्ड बनाया था। इसी रिकॉर्ड को यौन शोषण आरोपित सांसद प्रज्वल रेवन्ना तोड़ना चाहता था।

उनके इस बयान पर ना ही कॉन्ग्रेस पार्टी ने कोई एक्शन लिया है और ना ही सिद्दारमैया सरकार ने उन पर कोई कार्रवाई की है, ऐसे में यह माना जा सकता है कि उनकी इस घृणित टिप्पणी के पीछे पार्टी और सरकार का मूक समर्थन है। रामप्पा ने स्वयं भी ना ही अपने बयान पर कोई सफाई दी है और ना ही माफ़ी माँगी है।

हालाँकि, यह पहली बार नहीं है कि कॉन्ग्रेस नेता ने हिन्दू देवी देवताओं का अपमान किया हो। कॉन्ग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने लोकसभा प्रचार के लिए आयोजित एक जनसभा में कहा, “खड़गे ने कहा, “इनका भी नाम शिव है, ये बराबर में राम का मुकाबला कर सकते हैं। क्योंकि ये शिव हैं, मेरा नाम भी मल्लिकार्जुन है यानी मैं भी शिव हूँ।” इस दौरान उन्होंने भी ध्यान दिलाया कि आंध्र प्रदेश के श्रीशैलम में मल्लिकार्जुन नाम से एक ज्योतिर्लिंग भी है।”

इस दौरान मल्लिकार्जुन खड़गे भूल गए कि राम और शिव का मुकाबला कराने की बात कह कर उन्होंने हिन्दू समाज की भावनाओं को ठेस पहुँचाया है। वो हिन्दू समाज, जिसने कभी राम और शिव को अलग-अलग कर के नहीं देखा। तमिलनाडु में स्थित ‘रामेश्वरम’ ज्योतिर्लिंग के भी 2 अर्थ हैं – पहले, राम जिसके ईश्वर हैं और दूसरा, राम के जो ईश्वर हैं।”

कॉन्ग्रेस नेता रामप्पा और खरगे की हिन्दू देवी देवताओं के प्रति यह संवेदनहीनता दिखाती है कि उनकी पार्टी को देश की बहुसंख्यक आबादी की भावनाओं की कोई कद्र नहीं है। वह हिन्दू देवी देवताओं को यौन शोषण आरोपित के समकक्ष खड़ा कर सकते हैं, देवताओं को आपस में लड़ाने की बात कर सकते हैं।

गौरलतब है कि हासन से जेडीएस सांसद और पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा के पोते प्रज्वल रेवन्ना के कई वीडियो कथित तौर पर सामने आए हैं। उन पर आरोप है कि उन्होंने बड़ी सँख्या में महिलाओं का यौन शोषण किया और उसका वीडियो बनाया। उन पर महिलाओं को प्रताड़ित करने का भी आरोप है। वह अपने ऊपर यह आरोप लगने के बाद यूरोप चले गए थे।

कर्नाटक सरकार ने उनके खिलाफ SIT जाँच के आदेश दिए हैं। उनको जेडीएस ने पार्टी से भी निलंबित कर दिया है। उन्होंने विदेश से ही एक बयान जारी करके कहा है कि वह अपने वकील के जरिए जाँच में सहयोग करेंगे।

महिला शिक्षिका ने चर्च में 15 साल के छात्र को बनाया शिकार: 10 बार किया मुँह वाला सेक्स, भेजती थी नग्न तस्वीरें

अमेरिका के आर्कन्सा में एक महिला टीचर पर 15 साल के बच्चे के यौन शोषण का आरोप लगा है। 26 वर्षीया इस टीचर का नाम रीगन ग्रे है। रीगन ग्रे लिटिल रॉक इमैनुएल बैपटिस्ट चर्च में बच्चों को बतौर वालेंटियर पढ़ाती हैं। उन पर लगभग 4 साल तक नाबालिग छात्र को झाँसा दे कर ओरल सेक्स करने का आरोप है। खबर सामने आने एक बाद रीगन को चर्च ने सस्पेंड कर दिया है। पुलिस ने अरोपिता को गिरफ्तार कर लिया है। फिलहाल उन्हें बाद में जमानत भी मिल गई है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पीड़ित छात्र की रीगन ग्रे से मुलाक़ात साल 2020 की सर्दियों में चर्च में हुई थी। दोनों की पहली मुलाकात चर्च में एक संगीत समारोह के दौरान हुई थी। तब से रीगन ने पीड़ित छात्र को अपनी नग्न तस्वीरें भेजनी शुरू कर दी थी। बाद में मई 2021 में रीगन पीड़ित छात्र से अपनी कार और आपर्टमेंट में मिलीं। बताया जा रहा है कि 2020 से 2021 के बीच रीगन ने पीड़ित से लगभग 10 बार ओरल सेक्स (मुख मैथुन) किया। हालाँकि, खुद को ‘शुद्ध रखने के लिए’ अरोपिता ने संभोग (रति क्रिया) नहीं किया।

इस मामले का खुलासा तब हुआ जब पीड़ित छात्र के माता-पिता ने एक दिन अपने बेटे का मोबाइल चेक किया। पीड़ित के व्हाट्सएप्प पर रीगन ग्रे की कई अश्लील तस्वीरें और मैसेज पाए गए। पीड़ित के अभिभावकों ने चर्च के पादरी स्टीवन स्मिथ को सूचना दी। पादरी ने अपनी पत्नी एश्ले के माध्यम से रीगन ग्रे को समझाने की कोशिश की। हालाँकि थोड़े समय चुप रहने के बाद रीगन ग्रे ने फिर से छात्र को मैसेज भेजने शुरू कर दिए। ये मैसेज अब व्हाट्सएप के बजाय स्नैपचैट पर भेजे जा रहे थे।

रीगन ग्रे की दोबारा शुरू हुई इस करतूत की जानकारी जब पीड़ित छात्र के परिजनों को हुई तो वो नाराज हो गए। उन्होंने पहले चर्च के पादरी को सूचित किया। फरवरी 2024 में रीगन की हरकतों की जाँच पुलास्की काउंटी स्पेशल स्कूल डिस्ट्रिक्ट द्वारा की गई। जाँच में आरोप सही पाए जाने पर रीगन ग्रे को चर्च में पढ़ाई के कार्य से सस्पेंड कर दिया। निलंबन काल में भी आरोपित ने पीड़ित को मैसेज भेजने जारी रखे तो छात्र के परिजनों ने पुलिस में शिकायत कर दी।

इस बीच पादरी स्टीवन द्वारा हुई पूछताछ में रीगन ने 15 वर्षीय छात्र के साथ ओरल सेक्स करना स्वीकार किया। पुलिस ने पीड़ित छात्र से पूछताछ की तो उसने भी अपनी टीचर द्वारा अपने यौन शोषण की बात कबूली। पुलिस ने रीगन पर एक नाबालिग के यौन शोषण का केस दर्ज किया। अप्रैल 2024 में रीगन ग्रे को अदालत से जमानत मिल गई। यह जमानत 20,000 डॉलर के मुचलके पर दी गई है। कोर्ट में रीगन खुद पर लगे आरोपों से मुकर गईं। उनके वकील जॉन ओगल्स ने आशा जताई है कि उन्हें न्यायिक व्यवस्था पर पूरा भरोसा है जहाँ से रीगन जल्द बाइज्जत बरी होंगी।

बंगाल, आंध्र प्रदेश, केरल, तमिलनाडु…. हर जगह OBC का हक मार रहे मुस्लिम, यूँ ही PM मोदी को नहीं कहना पड़ा- मेरे जीते जी नहीं चलेगा मजहबी आरक्षण

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा चुनाव 2024 के प्रचार के दौरान स्पष्ट कर दिया है कि भाजपा अनुसूचित जनजाति (ST), अनुसूचित जाति (SC) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) का आरक्षण मुस्लिमों में बाँटने नहीं देगी। पीएम मोदी ने विपक्षी दलों पर धर्म के आधार पर आरक्षण देने की विपक्षी दलों की घोषणा का पुरजोर विरोध किया।

तेलंगाना के जहीराबाद में एक रैली को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने मंगलवार (30 अप्रैल 2024) को कहा, “कॉन्ग्रेस वाले सुन लें… उनके चट्टे-बट्टे सुन लें… उनकी पूरी जमात सुन ले… जब तक मोदी जिंदा है, मैं दलितों का, एससी, एसटी और ओबीसी का आरक्षण धर्म के आधार पर मुसलमानों को नहीं देने दूँगा… नहीं देने दूँगा।”

प्रधानमंत्री ने आगे कहा, “कॉन्ग्रेस फिर से देश को उन्हीं पुराने दिनों में ले जाना चाहती है। अगर कॉन्ग्रेस सत्ता में आ गई तो वे विरासत कर लाएँगे। कॉन्ग्रेस विरासत (माता-पिता से प्राप्त धन-संपत्ति) पर टैक्स लगाकर आपकी 55 प्रतिशत संपत्ति पर कब्जे की योजना बना रही है।” इससे पहले भी पीएम मोदी ने कॉन्ग्रेस पर वोट बैंक की राजनीति करने का आरोप लगाया था।

पीएम मोदी ने स्पष्ट रूप से कहा कि वह धर्म के आधार पर देश में आरक्षण लागू नहीं होने देंगे। भारत का संविधान भी धर्म के आधार पर आरक्षण देने की व्यवस्था पर रोक लगाता है। राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग ने भी कहा है कि कर्नाटक सरकार ने मुस्लिम समुदाय की सभी जातियों को ओबीसी में शामिल कर लिया है जो संवैधानिक रूप से गलत है।

दरअसल, देश में आरक्षण की व्यवस्था धर्म के आधार पर ना होकर सामाजिक और आर्थिक रूप से वंचित लोगों के लिए है। भारत में जिन मुस्लिमों को आरक्षण का लाभ मिल रहा है, वे मुस्लिमों की वो जातियाँ हैं, जिन्हें राज्य सरकारों ने पिछड़े वर्ग में शामिल कर लिया है। यह व्यवस्था संविधान के अनुच्छेद 16(4) के तहत की गई है। इसमें कहा गया है कि राज्य जिन नागरिकों को पिछड़ा वर्ग मानता है, उन्हें ओबीसी में शामिल कर आरक्षण का लाभ दे सकता है। 

हालाँकि, देश में कुछ ऐसे भी राज्य हैं, जहाँ मुस्लिमों को अब भी आरक्षण दिया जा रहा है। हालाँकि, इन राज्यों में मुस्लिमों को आरक्षण देने के लिए उन्हें अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) की कैटेगरी में शामिल किया गया है। इस तरह जिन राज्यों में मुस्लिमों को आरक्षण दिया जा रहा है, वह अन्य पिछड़ा वर्ग के हिस्से में सेंधमारी कर रहे हैं। भाजपा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसी नीति का विरोध कर रहे हैं।

जिन राज्यों में धर्म के आधार पर दिया जा रहा है, उनमें दक्षिण भारत के तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और केरल शामिल हैं। इसके अलावा पश्चिम बंगाल और बिहार में मुस्लिमों की पिछड़ी जातियों को आरक्षण मिल रहा है। इसके कर्नाटक में भी मुस्लिमों को चार प्रतिशत आरक्षण दिया जाता था, लेकिन राज्य में जब भाजपा की सरकार आई तो उसने इसे खत्म कर दिया।

हालाँकि, कॉन्ग्रेस की सरकार बनने के बाद इस आरक्षण को दोबारा देने की कोशिश की गई, लेकिन मामला कोर्ट में चला गया और कोर्ट ने फिलहाल इस पर स्टे लगा रखा है। भाजपा का कहना है कि उसने राज्य में मुस्लिम आरक्षण को समाप्त करके भारत के संविधान की रक्षा करने का काम किया है। धर्म के आधार पर आरक्षण का गृहमंत्री अमित शाह ने भी विरोध किया है।

वहीं, तेलंगाना में भारत राष्ट्र समिति (BRS) की सरकार में मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव ने राज्य के मुस्लिमों को OBC श्रेणी में 4 प्रतिशत आरक्षण दिया था। वे इस आरक्षण को बढ़ाकर 12 प्रतिशत करना चाहते थे। इसके लिए वो तेलंगाना की विधानसभा में एक प्रस्ताव भी पास करा चुके हैं, लेकिन केन्द्र सरकार ने प्रस्ताव को अपनी मंज़ूरी देने से इनकार कर दिया। अभी तेलंगाना में कॉन्ग्रेस की सरकार है।

इसी तरह आंध्र प्रदेश में सीएम वाईएस राजशेखर रेड्डी की अगुवाई में कॉन्ग्रेस सरकार ने साल 2004 में मुस्लिमों की कई जातियों को ओबीसी में शामिल कर लिया और इन्हें 5 प्रतिशत आरक्षण देने की सिफारिश की। दो माह बाद आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट ने इस पर रोक लगा दी थी। इसके बाद जून 2005 में कॉन्ग्रेस ने अध्यादेश लाकर 5 प्रतिशत कोटे का ऐलान कर दिया।

वहीं, साल 2011 में पश्चिम बंगाल की सत्ता में आने के बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मुस्लिमों को अधिक से अधिक फायदा पहुँचाने के लिए मुस्लिमों की कई जातियों को ओबीसी की लिस्ट में जोड़ा। इसका परिणाम यह हुआ कि राज्य की नौकरी या अन्य सरकारी योजनाओं में आरक्षण का 90% से अधिक फायदा मुस्लिमों को मिला है। इसको लेकर ओबीसी आयोग ने सरकार पर सवाल भी उठाए।

पश्चिम बंगाल में सरकारी संस्थाओं और नौकरियों में 45% आरक्षण का प्रावधान है, जिसमें 17% ओबीसी, 28% फीसदी आरक्षण समाज के एससी/एसटी जातियों को दिया जाता है। बंगाल में ओबीसी की दो कैटेगरी- A और B है। दरअसल, A कैटेगरी के अति पिछड़ा वर्ग में 81 जातियों में से 73 जातियाँ मुस्लिम हैं, जबकि मात्र 8 जातियाँ हिंदू हैं।

वहीं, ओबीसी के B कैटेगरी की 98 जातियों में से 45 मुस्लिम हैं। पश्चिम बंगाल में इस तरह कुल 179 जातियों में 118 जातियाँ मुस्लिम हैं। पश्चिम बंगाल की वामपंथी सरकार ने रंगनाथ मिश्रा कमिटी की सिफारिशों के आधार पर मुस्लिम आरक्षण को लागू किया, जिसमें ममता बनर्जी की सरकार ने समय-समय पर मुस्लिमों की जातियों को इसमें जोड़ा।

तमिलनाडु में धर्म के आधार पर आरक्षण की व्यवस्था की गई है। तमिलनाडु सरकार ने मुस्लिमों और ईसाइयों में प्रत्येक के लिए 3.5 प्रतिशत आरक्षण की व्यवस्था की है। इस तरह ओबीसी आरक्षण को 30 प्रतिशत से बढ़ाकर 23 प्रतिशत कर दिया गया है। मुस्लिमों या ईसाइयों से संबंधित अन्य पिछड़े वर्ग को इससे हटा दिया गया था। इसके पीछे सरकार की दलील थी कि यह उप-कोटा धार्मिक समुदायों के पिछड़ेपन पर आधारित है न कि खुद धर्मों के आधार पर। दरअसल, द्रमुक सरकार ने इसे आगे बढ़ाया।

धर्म के आधार पर आरक्षण देने का सबसे पहला मामला केरल से आया। 1956 में केरल के पुनर्गठन के बाद वामपंथी सरकार ने आरक्षण का प्रतिशत बढ़ाकर 50 कर दिया गया, जिसमें ओबीसी के लिए आरक्षण 40% शामिल था। सरकार ने ओबीसी के भीतर एक उप-कोटा पेश किया जिसमें मुस्लिम हिस्सेदारी 10% थी।

वर्तमान में केरल की सरकारी नौकरियों में मुस्लिम हिस्सेदारी बढ़कर 12% और व्यावसायिक शैक्षणिक संस्थानों में 8% हो गई है। उनकी सामाजिक और आर्थिक स्थिति के बावजूद केरल में सभी मुसलमानों को ओबीसी के रूप में वर्गीकृत किया गया है। इसके आधार पर उन्हें ओबीसी कैटेगरी में शामिल किया गया है।

बिहार में गरीब मुस्लिमों को पिछड़ी जातियों में शामिल किया गया है। बिहार में 1970 के दशक से पिछड़ी जातियों के लिए कोटा है। उस समय कर्पूरी ठाकुर मुख्यमंत्री थे। यहाँ जनता पार्टी की सरकार थी। बिहार में जिन मुस्लिमों को पिछड़ा कहा गया है, उमें अंसारी, मंसूरी, इदरीसी, दफाली, धोबी, नालबंद, आदि शामिल हैं। उन्हें नौकरी आदि में 3% कोटा का लाभ मिलता है। पंचायत निकायों में भी ईबीसी के लिए आरक्षित 20% में मुस्लिम हैं।