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दरबारियों सोनिया जी के बेटे पर कुछ तो रहम करो, थू-थू करवाकर बता रहे हो ‘मास्टरस्ट्रोक’: रायबरेली की जीत से भी नहीं धुलेगा ये दाग

कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी ने उत्तर प्रदेश की रायबरेली लोकसभा सीट से नामांकन दाखिल कर दिया है। उनके रायबरेली लड़ने का निर्णय शुक्रवार (3 मई, 2024) को कॉन्ग्रेस ने सार्वजनिक किया। राहुल ने इसी के साथ अपनी पुरानी सीट अमेठी को छोड़ दिया जहाँ से वह 2019 में स्मृति ईरानी के हाथों हार गए थे। उनके इस निर्णय पर कहा जा रहा है कि राहुल गाँधी हार से डरे हुए हैं तो वहीं उनकी पार्टी के नेता इसे मास्टरस्ट्रोक बताने में जुटे हैं।

राहुल गाँधी के रायबरेली से पर्चा भरते समय माँ सोनिया गाँधी, बहन प्रियंका गाँधी और कॉन्ग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे मौजूद रहे। राहुल गाँधी यहाँ भाजपा के दिनेश प्रताप सिंह से मुकाबला करेंगे। अक्सर कॉन्ग्रेस समर्थक मीडिया और विपक्षी दल पीएम मोदी के बराबर में राहुल गाँधी को खड़ा करते हैं। वह राहुल गाँधी को पीएम मोदी के विकल्प के तौर पर पेश करते हैं। जबकि असल सच्चाई इस बात से कोसों दूर है, यह उनके अमेठी छोड़ने के निर्णय ने और पुख्ता कर दी है।

दरअसल, कॉन्ग्रेस और उसके समर्थकों को यह बात समझनी होगी कि राहुल गाँधी को पीएम मोदी के समकक्ष खड़ा करने से ही वह उनके बराबर राजनीतिक कौशल और परिपक्वता नहीं पा जाएँगे। इसके लिए उन्हें बड़ा नेता बनना और बड़े नेता वाला सन्देश देना होगा। कॉन्ग्रेस जैसी पुरानी और बड़ी पार्टी के दो शीर्ष नेताओं में से एक होने के नाते राहुल गाँधी को वायनाड और रायबरेली जैसी तुलनात्मक रूप से सेफ सीट चुनने के बजाय अमेठी का किला ही बचाना चाहिए था। इससे कार्यकर्ताओं में सन्देश जाता कि पार्टी चुनाव से पहले ही हार नहीं मान रही।

राहुल ने ऐसा नहीं किया। राहुल के इस कृत्य से कॉन्ग्रेस के कार्यकर्ताओं का मनोबल टूटा है। अमेठी में कॉन्ग्रेस पर विश्वास करने वाले कार्यकर्ता भी अब सोचने को मजबूर हैं कि आखिर एक हार के बाद ही राहुल गाँधी इतना भयभीत हो गए कि उन्होंने अमेठी से मुंह मोड़ लिया। इसका असर मात्र अमेठी ही नहीं बल्कि बाकी जगह के कॉन्ग्रेस के कार्यकर्ताओं पर भी पड़ा है। उनके मन में भी यह बात आई होगी कि उनका नेता स्वयं ही बड़ी लड़ाई करने से बच रहा है।

राहुल गाँधी को कॉन्ग्रेसी उन नरेन्द्र मोदी के विरुद्ध खड़ा करना चाहते हैं जो कि दो बार पानी पार्टी को केंद्र की सत्ता और साथ ही अनेकों राज्यों में सता में ला चुके हैं। पीएम मोदी के पार्टी के शीर्ष पर होने के दौरान ही यह एक ऐसी जिताऊ मशीन बन गई है जो कि 24×7 संगठन मजबूत करने में जुटी रहती है।

दूसरी तरफ राहुल गाँधी हैं जो कि अपनी पार्टी को केंद्र की सत्ता में लाना दूर, उसके लोकसभा में सीटो के आँकड़े को 60 के पार नहीं ले जा पाए हैं। राज्यों में हार का तो उनके नाम रिकॉर्ड है ही। वह मोदी सरकार की कैबिनेट में एक महिला मंत्री से चुनाव नहीं लड़ पा रहे हैं और सीट छोड़ कर सेफ सीट की तलाश में दक्षिण से लकर उत्तर भारत की यात्रा कर रहे हैं।

अमेठी से राहुल गाँधी चुनाव लड़ कर यदि हार भी जाते तो कम से कम यह कहा जाता कि उन्होंने लड़ाई लड़ने में कसर नहीं छोड़ी। लेकिन खुद लड़ाई लड़ना छोडिए, राहुल और कॉन्ग्रेस अमेठी से किशोरी लाल शर्मा को प्रत्याशी बनाया है। इसे राजनीतिक विश्लेषक चुनावी केकवॉक की तरह देख रहे हैं। स्मृति ईरानी की जीत की संभावनाएँ अब और पुख्ता हो गई हैं। ऐसे में राहुल गाँधी कार्यकर्ताओं को विश्वास देने और मनोबल बढ़ाने में तो विफल ही रहे हैं, वह लड़ने लायक एक उम्मीदवार भी नहीं दे पाए।

राहुल गाँधी ने जो भी किया हो, उनको बचाने के लिए हमेशा एक फ़ौज खड़ी रहती है। कॉन्ग्रेस के प्रवक्ता-नेता लगातार यह साबित करने में लगे रहते हैं कि राहुल गाँधी एक सफल राजनेता भले ही पार्टी इतिहास अपने इतिहास के सबसे निचले स्तर पर आ गई हो। राहुल गाँधी के अमेठी छोड़ने को फैसले को भी अब दरबारी एक मास्टरस्ट्रोक साबित करने में जुट गए हैं। इसके लिए कॉन्ग्रेस के मीडिया प्रमुख जयराम रमेश और प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने बीड़ा उठाया है। राहुल गाँधी को शतरंज का बड़ा खिलाड़ी बताया जा रहा है।

सुप्रिया श्रीनेत ने मास्टरस्ट्रोक का यह आधार अपने ट्वीट में बताया है। उन्होंने लिखा है-

• रायबरेली सिर्फ़ सोनिया जी की नहीं, ख़ुद इंदिरा गांधी जी की सीट रही है. यह विरासत नहीं ज़िम्मेदारी है, कर्तव्य है।

• रही बात गांधी परिवार के गढ़ की, तो अमेठी-रायबरेली ही नहीं, उत्तर से दक्षिण तक पूरा देश गांधी परिवार का गढ़ है। राहुल गांधी तो तीन बार उत्तरप्रदेश से और एक बार केरल से सांसद बन गये, लेकिन मोदी जी विंध्याचल से नीचे जाकर चुनाव लड़ने की हिम्मत क्यों नहीं जुटा पाये?

• एक बात और साफ़ है कि कांग्रेस परिवार लाखों कार्यकर्ताओं की अपेक्षाओं उनकी आकांक्षाओं का परिवार है। कांग्रेस का एक साधारण कार्यकर्ता ही बड़े बड़ों पर भारी है। कल एक मूर्धन्य पत्रकार अमेठी के किसी कार्यकर्ता से व्यंग में कह रही थी कि “आप लोगों का नंबर कब आएगा टिकट मिलने का”? लीजिए, आ गया!

• प्रियंका जी धुआँधार प्रचार कर रही हैं और अकेली नरेंद्र मोदी पर भारी पड़ रही हैं। इसको देखते हुए ज़रूरी था कि उन्हें सिर्फ़ अपने चुनाव तक सीमित ना रखा जाए। प्रियंका जी तो कोई भी उपचुनाव लड़कर सदन पहुँच जायेंगी।

• आज स्मृति ईरानी की सिर्फ़ यही पहचान है कि वो राहुल गांधी के ख़िलाफ़ अमेठी से चुनाव लड़ती हैं। अब स्मृति ईरानी से वो शोहरत भी छिन गई।

• अब बजाय व्यर्थ की बयानबाज़ी के, स्मृति ईरानी स्थानीय विकास के बारे में जवाब दें, जो बंद किए अस्पताल, स्टील प्लांट और IIIT हैं – उसपर जवाब देना होगा। • शतरंज की कुछ चालें बाक़ी हैं, थोड़ा इंतज़ार कीजिए।

हालाँकि, कॉन्ग्रेस के प्रवक्ता अपनी नेतागीरी की तकाजे में कितना भी मास्टरस्ट्रोक बताने की कोशिश करें असल में राहुल के इस कदम से यह सिद्ध हुआ है कि वह स्मृति ईरानी के खिलाफ नहीं लड़ सकते। इससे पार्टी का चुनाव के पहले ही हथियार डालने वाला रूप भी सामने आ गया है। राहुल गाँधी कभी डरो मत के नारे दिया करते थे, वह खुद ही अपनी परम्परागत सीट से चुनाव लड़ने से डर गए हैं। अब इसे चाहे मास्टरस्ट्रोक बताया जाए चाहे शतरंज की चाल, माना इसे राजनीतिक हार ही जाएगा।

और समस्या सिर्फ यहीं नहीं खत्म होती कि राहुल गाँधी अमेठी छोड़ रायबरेली लड़ने पहुँचे हैं। असल में समस्या रायबरेली से ही शुरू होती है। रायबरेली कॉन्ग्रेस का गढ़ माना जाता रहा है। 2019 के चुनाव में सोनिया गाँधी को यहाँ दिनेश प्रताप सिंह के विरुद्ध लगभग 2 लाख वोटों से जीत मिली थी।

थोड़ी देर के लिए मान लिया जाए कि बिल्ली के भाग से छींका फूटा, राहुल गाँधी किसी तरह रायबरेली से जीतने में कामयाब भी रहते हैं पर इससे वह दाग नहीं धुलेगा जो बताता है कि उनमें अमेठी के मैदान में अब स्मृति ईरानी का मुकाबला करने की हिम्मत नहीं है।

लिहाजा उनके इस फैसले ने पहले से ही हताश निराश, देश भर के कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं के मनोबल को और दुर्बल काम किया है। रायबरेली और वायनाड, दोनों ही सीटों पर जीत हासिल करके भी इस मनोबल को गर्त से बाहर नहीं निकाला जा सकता। बल्कि दोनों सीटों पर जीत कॉन्ग्रेस के लिए आगे कुआँ-पीछे खाई वाली स्थिति लेकर आएगा।

यदि वह वायनाड सीट छोड़ते हैं तो केरल में उनकी पार्टी को नुकसान होगा। कॉन्ग्रेस केरल में वैसे ही विपक्ष में है और पिछले विधानसभा चुनाव में सत्ता का ट्रेंड तोड़ने में विफल रही है। राहुल गाँधी यदि वायनाड छोड़ते हैं तो उन पर केरल में मुस्लिम वोटरों को भी अनदेखा करने का आरोप लगेगा। वायनाड में मुस्लिम वोटरों का उनकी जीत में बड़ा योगदान रहता है।

इसी के साथ वायनाड सीट छोड़ने पर यह सन्देश जाएगा कि राहुल गाँधी इस सीट को मात्र यूज एंड थ्रो के लिए उपयोग किया है। दूसरी तरफ रायबरेली की सीट छोड़ने पर और बड़ी समस्या का सामना उन्हें करना होगा। यदि वह रायबरेली सीट छोड़ते हैं तो एक तो उन पर अमेठी के बाद रायबरेली के वोटरों और कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं को धोखा देने का आरोप लगेगा और साथ ही पार्टी के साथ से यह सीट भी जा सकती है। इसके अलावा जो लोग अभी रायबरेली में उनके लड़ने को लेकर कर्तव्य निभाना बता रहे हैं वह तब इसका भी जवाब नहीं दे पाएँगे।

हेमंत सोरेन की याचिका हाई कोर्ट में खारिज, ED की गिरफ्तारी को बताया था गलत: चाचा के श्राद्ध में शामिल होने के लिए 1 दिन की मिली राहत

झारखंड हाई कोर्ट में पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को तगड़ा झटका लगा है। उन्होंने ईडी द्वारा अपनी गिरफ्तारी को गलत बताते हुए याचिका दाखिल की थी, लेकिन उसे हाई कोर्ट ने खारिज कर दिया है। झारखंड हाई कोर्ट ने हेमंत सोरेन की गिरफ्तारी को सही बताया है। इस मामले में हेमंत सोरेन ने सुप्रीम कोर्ट में भी याचिका दाखिल की थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें हाई कोर्ट का रुख करने का निर्देश दिया था।

लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक, झारखंड हाई कोर्ट के कार्यवाहक चीफ जस्टिस श्री चंद्रशेखर और जस्टिस नवनीत कुमार की बेंच ने ये फैसला सुनाया। झारकंड हाई कोर्ट ने ये फैसला सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई शुरू से पहले दिया है, जिसमें 6 मई को सुनवाई होनी थी। हेमंत सोरेन ने सुप्रीम कोर्ट का रुख ये कहते हुए किया था कि हाई कोर्ट इस मामले में फैसला सुनाने में देरी कर रही है। दरअसल, झारखंड हाई कोर्ट इस मामले में सुनवाई 28 फरवरी 2024 को ही पूरी कर ली थी और अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।

वहीं, हेमंत सोरेन को 31 जनवरी को ईडी ने गिरफ्तार कर लिया था। वो तभी से ईडी की हिरासत में हैं। 2 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट ने ईडी की गिरफ्तारी को चुनौती दी थी। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि वो पहले हाई कोर्ट में जाएँ।

चाचा के श्राद्ध में शामिल होने के लिए 1 दिन की छूट

इस बीच, हाई कोर्ट ने हेमंत सोरेन को एक दिन की अंतरिम जमानत दी है, ताकि वो अपने चाचा राजा राम सोरेन के श्राद्ध समारोह में शामिल हो सके। राजा राम सोरेन का निधन पिछले महीने हुआ था। जस्टिस आर मुखोपाध्याय की बेंट ने सोरेन को न्यायिक हिरासत में रहते हुए श्राद्ध कर्मी में शामिल होने की अनुमति दी है, साथ ही निर्देश भी दिया है कि उन्हें मीडिया से बातचीत करने की अनुमति नहीं होगी।

इस मामले में उन्होंने पीएमएलए कोर्ट में 27 अप्रैल को अंतरिम जमानत की याचिका दाखिल की थी, जो कोर्ट ने खारिज कर दी थी। सोरेन ने याचिका में अपने शिबू सोरेन के भाई यानी अपने चाचा के अंतिम संस्कार में शामिल होने की अनुमति माँगी थी।

गौरतलब है कि राँची में जमीन घोटाले और मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में हेमंत सोरेन के खिलाफ जाँच चल रही है। इस मामले में 8.5 करोड़ की संपत्ति अपराधिक स्रोतों से जमा किए गए पैसों से खरीदी गई, जिसपर सोरेन ने अवैध तरीके से कब्जा कर लिया। इस मामले में जमीन के मूल रिकॉर्ड को छिपाने और इस आपराधिक रिकॉर्ड को छिपाने में भानु प्रताप व अन्य लोगों के साथ मिलीभगत की।

बता दें कि पिछले साल सितंबर में झारखंड मुक्ति मोर्चा के अध्यक्ष ने मनी लॉन्ड्रिंग के केस में ईडी के समन को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। हालाँकि सुप्रीम कोर्ट ने अनुच्छेद 226 के तहत इस मामले में सुनवाई नहीं की और कहा कि इसकी अपील अन्य केसों में की जा सकती है। इसके बाद सोरेन ने अपनी याचिका वापस ले ली ती।

जिसको लिया गोद, उसके साथ ही बिस्तर में नग्न पकड़ी गई महिला नेता: पति ने ही किया भंडाफोड़, Video वायरल होते ही पार्टी ने निकाला

थाईलैंड में एक नेता के पति ने उसे एक बौद्ध भिक्षु के साथ बेड में रंगरलियाँ मनाते हुए पकड़ लिया। यह बौद्ध भिक्षु महिला का गोद लिया हुआ बेटा है। नेता के पति ने अपनी पत्नी के इस कारनामे की वीडियो भी बना ली। यह अब सोशल मीडिया पर वायरल है। यह मामला पूरी दुनिया में चर्चा में है।

जानकारी के अनुसार, थाईलैंड की 45 वर्षीय नेता प्रापापोर्न चोइवाडकोह (Prapaporn Choeiwadkoh) को उनके पति ‘टी’ बेड रूम में एक 24 वर्षीय बौद्ध भिक्षु के साथ पकड़ा। इस बौद्ध भिक्षु को के वर्ष पहले ही दम्पत्ति ने गोद लिया था। महिला ने अपने पति से कहा था कि उसे बौद्ध भिक्षु की हालत पर तरस आता है, ऐसे में उसे गोद लिया जाए।

इसके बाद महिला घंटों कमरा बंद करके भिक्षु के साथ बिताने लगी, पति के पूछने पर वह इसे प्रार्थना का नाम दे देती थी। इसके बाद उसके पति ने इस पूरे मामले का खुलासा करने की सोची। वह लगभग साढ़े पाँच घंटे गाड़ी चला कर घर पहुँचा और वीडियो बनाते हुए बेडरूम में घुसा।

यहाँ नेता प्रापापोर्न बौद्ध भिक्षु के साथ एकदम नग्न सोई हुई थी। पति के पहुँचने पर यहाँ बवाल हो गया। उसने महिला पर चिल्लाना चालू कर दिया। महिला भी उठ कर भागने लगी। इस पूरी घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।

बताया गया कि महिला का पति एक कारोबारी है और काफी अमीर है। वहीं महिला प्रापापोर्न को उसके समर्थक मैडम प्ले के नाम से जानते हैं। उसने 2023 में थाई डेमोक्रेट पार्टी की सदस्यता ली थी और सुखोताई राज्य में बड़े पद पर थी। उसके प्रशंसकों की लम्बी लिस्ट है।

उसके अपने गोद लिए हुए बेटे के साथ ही संबंध बनाने के इस मामले के सामने आने के बाद उसे पार्टी से निलंबित कर दिया गया है। महिला के पति ने बताया कि उसकी पत्नी हमेशा से धार्मिक रही है और मंदिर जाती है लेकिन बीते कुछ समय से वह बौद्ध भिक्षुओं के साथ ज्यादा समय गुजार रही थी।

महिला के पति ने बताया कि उसने महिला को कई महंगे गिफ्ट दिए है। पति ने आरोप लगाया है कि बौद्ध भिक्षु ने उनकी पत्नी को भ्रमित किया है। वहीं महिला ने बताया है कि बेड में नग्न होकर वह और भिक्षु केवल बातचीत कर रहे थे।

मैट्रिमोनियल साइट को बनाया हथियार, एक-दो नहीं 20+ महिलाओं को इमरान अली खान ने बनाया शिकार: मुंबई पुलिस ने किया गिरफ्तार

मुंबई की पाइधोनी पुलिस ने मैट्रिमोनियल वेबसाइट के जरिए महिलाओं को धोखा देने वाले जालसाज इमरान अली खान को हैदराबाद से गिरफ्तार किया है। उसने पाइधोनी इलाके की एक 42 वर्षीय महिला से 22 लाख रुपये की ठगी की। इमरान खान के खिलाफ धोखाधड़ी का केस दर्ज हुआ है। माना जा रहा है कि उसने देश भर की 20 से अधिक महिलाओं को निशाना बनाया है, जिनमें मुंबई के परभरी, धुले और सोलापुर की 10 से 12 महिलाएँ शामिल हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, शिकायतकर्ता 42 वर्षीय महिला है जो टीचर के तौर पर काम करती है। महिला ने साल 2023 में एक मैट्रिमोनियल वेबसाइट पर अपनी प्रोफाइल बनाई थी, जहाँ से कुछ प्रोफाइल के बारे में सुझाव मिला था। इसमें से एक हैदराबाद का इमरान अली खान भी शामिल था। महिला ने जब इमरान अली खान से संपर्क किया, तो उसने बताया कि वो कंस्ट्रक्शन का काम करता है। उसके पाता-पिता की मौत हो चुकी है और हैदराबाद में अपनी चाची के साथ रहता है। उसके दोनों भाई कनाडा में पढ़ रहे हैं। दोनों ने एक-दूसरे को पसंद किया। महिला के पास अचानक इमरान ने 10 मई 2023 को फोन किया और बताया कि उसने दोनों के रिश्ते के बारे में अपने दोस्तों को बताया है और वो उसके साथ पार्टी करना चाहते हैं। इसके लिए इमरान ने महिला से 1000 रुपए ऑनलाइन ही मँगा लिए।

एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि महिला ने कुछ दिन बाद इमरान को मुंबई बुलाया, ताकि उसे अपनी माँ से मिलवा सके। मुंबई आने के लिए भी इमरान ने महिला ने 10 हजार रुपए लिए और कहा कि उसके पैसे फँस गए हैं। कुछ दिन वो मुंबई में रहा और फिर उसने भायखला में प्लॉट खरीदने के नाम पर महिला ने 15 लाख रुपए ले लिए। इसके बाद इमरान ने महिला से बताया कि जो जमीन उसने खरीदी वो वन विभाग की थी, इसके लिए उसे पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। उसने महिला से खुद को छुड़ाने केलिए फिर से पैसे लिए और कुल मिलाकर 21.73 लाख रुपए ऐंठ लिए। इमरान ने वो पैसे महिला को नहीं लौटाए, जिसके बाद महिला ने पुलिस ने संपर्क किया और शिकायत दर्ज कराई।

पुलिस ने एक्शन लेते हए इमरान अली खान को हैदराबाद से गिरफ्तार कर लिया। जाँच में पता चला कि इमरान पर कई मामले पहले से दर्ज हैं। उस पर हत्या का भी इल्जाम है। वो पहले से शादीशुदा है और उसकी बीवी ने उसके खिलाफ घरेलू हिंसा का केस दर्ज कराया गया है। यही नहीं, उसने मुंबई, सोलापुर, धुले की 10-12 महिलाओं को भी इसी तरह से ठगा है। वो इतना शातिर है कि वो सिर्फ महाराष्ट्र ही नहीं, बल्कि कोलकाता, लखनऊ, दिल्ली और देहरादून की भी कई महिलाओं के साथ ठगी कर चुका है। पुलिस उसके नंबर की जाँच कर ये पता लगाने की कोशिश कर रही है कि उसने इस तरह से कितनी महिलाओं को अपना शिकार बनाया।

शहजादा अमेठी से इतना डरा हुआ है कि रायबरेली भाग गया, उनकी नेता राजस्थान भागी, अरे डरो मत-भागो मत: पीएम मोदी का गाँधी परिवार पर हमला

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी और सोनिया गाँधी पर हमला बोला है। पीएम मोदी ने कहा है कि कॉन्ग्रेस की बड़ी नेता सोनिया गाँधी पहले रायबरेली छोड़ कर राजस्थान भाग गईं और अब शहजादा डर के कारण अमेठी की जगह रायबरेली से लड़ रहा है। पीएम मोदी ने यह हमला राहुल गाँधी के रायबरेली से कॉन्ग्रेस प्रत्याशी घोषित किए जाने के बाद किया है।

पीएम मोदी ने कॉन्ग्रेस पर यह हमला पश्चिम बंगाल के बर्धमान में बोला। यहाँ वह एक रैली को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने यहाँ अमेठी छोड़ने के राहुल गाँधी के निर्णय पर कहा, “मैंने तो पहले ही संसद में तक कहा था कि इनकी बड़ी नेता (सोनिया गाँधी) चुनाव लड़ने की हिम्मत नहीं करेगी और डर कॉग्केरेस मारे भाग जाएगी। वह भाग करके राजस्थान गई और राजस्थान से राज्यसभा में आई। मैंने पहले ही बताया था कि शाहजादे वायनाड में हारने वाले हैं और हार के डर से जैसे ही मतदान होगा वह तीसरी सीट खोजने लग जाएँगे।”

पीएम मोदी ने आगे और हमला बोलते हुए कहा, “अब दूसरी सीट पर उनके चेले चपाटे कह रहे थे कि अमेठी आएँगे, लेकिन वह अमेठी से इतना डर गए कि रायबरेली से चुनाव लड़ रहे हैं। ये लोग घूम घूम कर सबसे कहते हैं कि डरो मत, मैं भी आज उन्हें कहता हूँ, अरे डरो मत, भागो मत।”

पीएम मोदी ने कहा कि कॉन्ग्रेस पहले से कम सीटों पर लड़ रही है और वह इस बार कम सीटों पर सिमट जाएँगे। पीएम मोदी ने कॉन्ग्रेस पर आरोप लगाया कि वह केवल देश बाँटने के लिए चुनाव लड़ रही है। पीएम मोदी ने यहाँ अपनी उपलब्धियां भी गिनाई। आप पीएम मोदी का यह भाषण यहाँ सुन सकते हैं।

उन्होंने बंगाल की ममता बनर्जी की TMC सरकार पर भी हमला बोला। पीएम मोदी ने कहा, “बंगाल में हिन्दुओं की क्या हालत हो गई है, लगता है TMC सरकार ने हिन्दुओं को दोयम दर्जे का नागरिक बना दिया है। इनके जय श्री राम से आपत्ति है, बोल दो तो बुखार आ जाता है। इनको राम मंदिर के निर्माण और रामनवमी से आपत्ति है।”

पीएम मोदी ने इस रैली में संदेशखाली का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि TMC सरकार दलित बहनों पर अत्याचार करने वाले को बचाती रही। उन्होंने कहा कि क्या केवल उसे इसलिए बचाया गया कि उसका नाम शाहजहाँ शेख था। पीएम मोदी ने वोट जिहाद वाले बयान का मुद्दा भी यहाँ उठाया।

राहुल गाँधी के रायबरेली से लड़ने की घोषणा शुक्रवार (3 मई सुबह) को की गई।

जिस रोहित वेमुला के नाम पर इकोसिस्टम ने काटा था बवाल, वह दलित नहीं था: रिपोर्ट में बताया- पोल खुलने के डर से किया सुसाइड, तेलंगाना पुलिस ने बंद की फाइल

हैदराबाद विश्वविद्यालय के छात्र रोहित वेमुला की आत्महत्या के मामले में तेलंगाना पुलिस ने बताया है कि वह दलित नहीं था। तेलंगाना पुलिस ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि रोहित वेमुला अपनी असल जाति को छुपा रहा था और इसके उजागर होने के डर के चलते उसने आत्महत्या की होगी। तेलंगाना पुलिस ने इस मामले की फाइल बंद करने का निर्णय लिया है।

यह जानकरी द न्यूज मिनट ने दी है। तेलंगाना पुलिस यह रिपोर्ट शुक्रवार (3 मई, 2024) को तेलंगाना हाई कोर्ट में रखी जाएगी। पुलिस ने कहा है कि रोहित की माँ ने उसे फर्जी अनुसूचित जाति का प्रमाण पत्र बनवा के दिया और रोहित को लगातार यह डर बना रहता था कि यदि उसका भेद खुला तो उसकी डिग्रियाँ खत्म हो जाएँगी।

पुलिस रिपोर्ट में कहा गया है कि रोहित वेमुला वद्देरा जाति से ताल्लुक रखता था जो कि पिछड़ा वर्ग में आती है। रिपोर्ट में कहा गया है कि रोहित वेमुला की मौत के लिए अन्य कोई व्यक्ति जिम्मेदार नहीं था। यह भी बताया गया कि रोहित वेमुला की जाति की असल पहचान के लिए जब उनकी माँ राधिका से DNA टेस्ट के विषय में बात की गई तो उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया।

पुलिस रोहित की माँ के DNA सैंपल को उनके परिवार के अन्य सदस्यों के साथ मिलाकर देखना चाहती थी ताकि जाति के विषय में कोई जानकारी जुटाई जा सके। रिपोर्ट में कहा गया है कि रोहित वेमुला पढ़ने से अधिक छात्र राजनीति में ध्यान देता था।

तेलंगाना पुलिस इस रिपोर्ट को हाई कोर्ट में रख कर मामले को बंद करने की माँग करेगी। गौरतलब है कि हैदराबाद विश्वविद्यालय के छात्र रोहित वेमुला ने जनवरी, 2016 में फाँसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। वह यहाँ पीएचडी का छात्र था।

उसने आत्महत्या पर आरोप लगाया था कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने उसे परेशान किया था। इस मामले को लेकर कॉन्ग्रेस समेत तमाम विपक्षी दलों ने खूब हल्ला मचाया था। इस मामले में भाजपा सांसद बंडारू दत्तात्रेय के खिलाफ भी FIR दर्ज की गई थी।

दरअसल, उन्होंने विश्वविद्यालय कैम्पस में होने वाली गुंडागर्दी को रोकने के लिए एक पत्र लिखा था। यह भी आरोप लगाया गया था कि रोहित का मासिक मानदेय ₹25,000 रोक दिया गया था। रोहित वेमुला समेत उनके संगठन पर आरोप लगा था कि वह आतंकी याकूबी मेमन की फाँसी का विरोध कर रहे थे।

इस पूरे मामले के बीच रोहित वेमुला को दलित छात्र के रूप में पेश किया गया था और उसकी आत्महत्या का जिम्मेदार सरकारी नीतियों को बता दिया गया था। हालाँकि, अब पुलिस जाँच में सामने आया है कि रोहित ना तो दलित और ना ही उसने किसी से परेशान होकर आत्महत्या की थी।

डरो मत! मेरी तरह भाग जाओ… ‘शहजादे’ की नेटिजन्स कर रहे धुलाई, बोले- ये डर अच्छा लगा

कॉन्ग्रेस ने शुकवार (3 मई, 2024) को ऐलान किया कि राहुल गाँधी अमेठी से नहीं बल्कि रायबरेली से चुनाव लड़ेंगे। इसका अर्थ है कि वह भाजपा नेता स्मृति ईरानी का मुकाबला नहीं करेंगे। उनके इस निर्णय पर अब सोशल मीडिया उनके मजे ले रहा है और उनकी मैदान छोड़ने वाला बता रहा है। उनके एक पुराने बयान ‘डरो मत’ को भी फिर से शेयर किया जा रहा है और ‘FattuPappu’ नाम से ट्रेंड चलाया जा रहा है।

राहुल गाँधी रायबरेली से अपनी माँ सोनिया गाँधी की जगह चुनाव लड़ेंगे जबकि अमेठी से कॉन्ग्रेस ने किशोरी लाल शर्मा को उतारा है। राहुल 2019 में अमेठी का चुनाव केन्द्रीय मंत्री स्मृति ईरानी से हार गए थे और वायनाड से सांसद बने थे। इस बार उन्होंने पहले केवल वायनाड से पर्चा भरा था और अब उनके रायबरेली से चुनाव लड़ने की घोषणा की गई है।

उनके इस कदम पर सोशल मीडिया में लोग मजे ले रहे हैं और ‘FattuPappu’ ट्रेंड चला रहे हैं। यह ट्रेंड चलाने वालों का कहना है कि राहुल गाँधी स्मृति ईरानी के सामने इसलिए लड़ने नहीं आए क्योंकि उन्हें हार का डर साफ़ दिख रहा था। उन पर कई मीम भी वायरल हो रहे हैं।

राजनीतिक मामले पर टीका-टिप्पणी करने वाले Mr. Sinha ने लिखा, “अब साफ़ हो गया कि राहुल गाँधी अमेठी की जगह रायबरेली से लड़ेंगे। वह एक बार फिर स्मृति ईरानी जी का सामना करने की हिम्मत नहीं जुटा पाए।”

एक और यूजर ने उनका डरो मत वाला पुराना फोटो डालते हुए लिखा, “डरो मत, रायबरेली बचाओ, अमेठी से लड़ो मत”

एक और यूजर ने लिखा, “डरो मत, बस भाग जाओ”

एक यूजर ने लिखा, “मेरी तरह भाग जाओ, चमचों इसी में भलाई है।”

कुछ लोग उनके भागने वाले वीडियो लगाकर मजे ले रहे हैं।

एक यूजर ने लिखा ‘ये डर अच्छा लगा’

गौरतलब है कि इससे पहले चर्चा थी कि प्रियंका गाँधी रायबरेली से चुनाव लड़ सकती हैं। हालाँकि, अब इन अटकलों पर विराम लग गया है। प्रियंका गाँधी दूसरी तरफ अमेठ के फुर्सतगंज हवाई अड्डे पर पहुँच गई हैं। यहाँ वह कॉन्ग्रेस के चुनाव प्रचार में भाग लेंगी। वह अमेठी में नामांकन में भी हिस्सा लेंगी।

अमेठी और रायबरेली में शुक्रवार (3 मई, 2024) को नामांकन की आखिरी तिथि है। यहाँ 20 मई को मतदान होना है।

congress announces amethi raebareli loksabha candidate name rahul gandhi fattu pappu trends in social media

फोन दिल्ली के पालम में छोड़ा, बदले कई रिक्शे… 10 दिन से गायब हैं ‘तारक मेहता के उलटा चश्मा’ वाले सोढ़ी भाई: साजिश या खुद लापता हुए गुरुचरण सिंह?

पॉपुलर टीवी शो तारक मेहता का उल्टा चश्मा (TMKOC) फेम सोढ़ी उर्फ़ गुरुचरण सिंह की गुमशुदगी उनका खुदका प्लान हो सकती है। 10 दिन से गायब टीवी अभिनेता का अभी तक कोई पता नहीं चला है। वह 22 अप्रैल को आखिरी बार दिल्ली में देखे गए थे, तब से उनके विषय में कोई जानकारी नहीं है। दिल्ली पुलिस अब दूसरे एंगल से इस मामले की कड़ियाँ जोड़ रही है।

गुरुचरण सिंह सोढ़ी के पिता ने 26 अप्रैल, 2024 को दिल्ली पुलिस के पास एक शिकायत दर्ज करवाई थी। शिकायत में कहा गया था कि 22 अप्रैल को सोढ़ी अपने घर से मुंबई जाने के लिए निकले थे। उन्हें दिल्ली एयरपोर्ट से फ्लाइट पकड़नी थी। हालाँकि, वह ना इस दिन दिल्ली एयरपोर्ट पहुँचे और ना ही मुंबई। वह वापस घर भी नहीं आए।

उनका फोन भी बंद आ रहा था। इसके बाद पुलिस ने उनके अपहृत होने की शिकायत दर्ज की। पुलिस जाँच में सामने आया कि उन्होंने 24 अप्रैल को ATM से ₹7000 निकाले थे। वह 24 तारीख तक दिल्ली में ही थे और इस दिन तक उनका फ़ोन भी ऑन था। इसके बाद उनका फोन ऑफ आने लगा और उनकी कोई लोकेशन भी नहीं मिली।

CCTV जाँच में वह कई ई रिक्शा बदलते हुए देखे गए थे लेकिन उनकी अब उनके विषय में कोई जानकारी नहीं है। यह भी मालुम हुआ था कि वह आर्थिक समस्या से जूझ रहे थे, लेकिन परिवार ने इस बात का खंडन किया था। अब इस मामले में नया खुलासा हुआ है। न्यूज18 की एक रिपोर्ट में पुलिस सूत्रों के हवाले से दावा किया गया है कि संभवतः सोढ़ी ने खुद की गुमशुदगी कि प्लानिंग की हो।

पुलिस सूत्रों ने इस मामले में बताया है, “उन्होंने अपना फोन पालम इलाके में छोड़ दिया था। हम उन्हें खोजने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन इस कारण से हमारे लिए गुरुचरण सिंह का पता लगाना और भी मुश्किल हो गया है, क्योंकि फोन अभिनेता के पास नहीं है। हमने जो सीसीटीवी फुटेज बरामद की है, उसमें वह एक ई-रिक्शा से दूसरे ई-रिक्शा पर जाते हुए दिखाई दे रहे हैं। ऐसा लगता है कि उन्होंने सब कुछ पहले से प्लान कर रखा था और दिल्ली से बाहर चले गए हैं।”

गुरुचरण सिंह TMKOC में 2020 तक काम करते थे और उन्होंने इसी साल यह शो छोड़ दिया था। वह इसमें सोढ़ी का किरदार निभाते थे। इस शो के डायरेक्टर असित मोदी ने बताया है कि उनका पूरा भुगतान कर दिया गया था। उन्होंने उनके सकुशल होने की भी कामना की है। इसके लावा तारक मेहता शो के अन्य कई कलाकारों ने भी उनके जल्द वापस लौटने की उम्मीद जताई है।

स्मृति ईरानी से मुकाबले की हिम्मत नहीं जुटा पाए राहुल गाँधी, माँ सोनिया की छोड़ी सीट रायबरेली से लड़ेंगे चुनाव: बहन प्रियंका भी मैदान में उतरने से पीछे हटी

कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी अमेठी लोकसभा सीट से चुनाव नहीं लड़ेंगे। इसकी जगह कॉन्ग्रेस ने उन्हें रायबरेली लोकसभा से प्रत्याशी बनाया है। कॉन्ग्रेस ने राहुल गाँधी की जगह अमेठी से किशोरी लाल शर्मा को प्रत्याशी बनाया है। इन दोनों जगह शुक्रवार (3 मई, 2024) को नामांकन की आखिरी तिथि है।

कॉन्ग्रेस की शुक्रवार को जारी गई सूची में राहुल गाँधी के नाम का रायबरेली से ऐलान किया गया है। इससे पहले उनके अमेठी से चुनाव लड़ने के कयास लगाए जा रहे थे। अमेठी से वह 2019 तक सांसद थे लेकिन 2019 लोकसभा चुनाव में केन्द्रीय मंत्री स्मृति ईरानी से हार गए थे। वह इस दौरान केरल के वायनाड से चुनाव लड़े थे जहाँ से उन्हें जीत हासिल हुई थी।

राहुल गाँधी ने इस बार अमेठी सीट से सांसद स्मृति ईरानी से मुकाबला ना करने का निर्णय लिया है। रायबरेली से अब तक सोनिया गाँधी सांसद थी लेकिन वह हाल ही में राजस्थान से राज्यसभा चली गई थीं, इसके बाद यह सीट खाली हो गई थी। पहले रायबरेली से प्रियंका गाँधी को लोकसभा लड़ाए जाने की चर्चा थी लेकिन उन्होंने भी अपने हाथ खींच लिए हैं।

राहुल गाँधी भाजपा के प्रत्याशी दिनेश प्रताप सिंह का मुकाबला करेंगे। दिनेश प्रताप सिंह उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री हैं। उनके नाम का ऐलान गुरुवार (2 मई, 2024) को किया गया। वह 2019 में भी सोनिया गाँधी के विरुद्ध चुनाव लड़े थे लेकिन हार गए थे।

दूसरी तरफ कॉन्ग्रेस ने अमेठी से किशोरी लाल शर्मा को प्रत्याशी बनाया है। वह केन्द्रीय मंत्री स्मृति ईरानी का मुकाबला करेंगे। बताया जा रहा है कि किशोरी लाल शर्मा गाँधी परिवार के पुराने विश्वस्त रहे हैं और राजीव गाँधी के समय से अमेठी और रायबरेली क्षेत्र में गाँधी परिवार के प्रतिनिधि के तौर पर काम करते आए हैं।

किशोरी लाल शर्मा मूल रूप से पंजाब के रहने वाले हैं और उनकी गाँधी परिवार के प्रति निष्ठा को देखकर ही उन्हें अमेठी से उतारा गया है। वह यहाँ गाँधी परिवार के चुनाव प्रबन्धन की जिम्मेदारी भी देखते रहे हैं, इसके अलावा वह पंजाब कॉन्ग्रेस कमिटी के सदस्य और बिहार के प्रभारी भी रहे हैं।

CAA विरोधी प्रदर्शन में हिंसा भड़काने के लिए NewsClick ने चीन के पैसे का किया इस्तेमाल, अमेरिका के रास्ते तीस्ता सीतलवाड़ को मिला पैसा: रिपोर्ट

न्यूज़क्लिक केस में बड़ा खुलासा हुआ है। न्यूजक्लिक के साथ काम करने वाले लोगों ने जाँच के दौरान चौंकाने वाले बयान दर्ज कराए हैं। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल द्वारा दाखिल की गई चार्जशीट में इन गवाहों के बयान को रखा गया है, जिसमें बताया गया है कि न्यूजक्लिक ने CAA विरोधी हिंसा के दौरान मुस्लिमों को हिंसा और दंगों में शामिल होने के लिए उकसाने के लिए उन्हें ‘आदेश’ दिया था। इसके लिए उन्हें सीएए विरोधी प्रदर्शनकारियों तक पैसे पहुँचाने के लिए भारी मात्रा में नकदी दी गई थी।

इन गवाहों ने बताया है कि दिल्ली के हिंदू-विरोधी दंगों में इस्तेमाल किए गए हथियारों को खरीदने के लिए न्यूजक्लिक के माध्यम से चीनी पैसों का इस्तेमाल किया गया। इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, कश्मीर में आतंकवादियों को भी पैसे पहुँचाए गए थे।

इन गवाहों की पहचान छिपाई गई है। ये गवाह न्यूजक्लिक में काम करते थे। यूएपीए की धारा 41 के तहत इनकी पहचान को छिपाते हुए दिल्ली पुलिस ने इनके बयानों को चार्जशीट के माध्यम से कोर्ट में पेश किया है। इन गवाहों ने बताया है कि उन्हें धर्म विशेष (हिंदुओं) के खिलाफ हिंसा भड़काने के लिए सीएए विरोधी और शाहीन बाग के प्रदर्शनों में भेजा गया था। इसके लिए न्यूजक्लिक ने अपने कर्मचारियों को पैसे देकर बाँटने के लिए कहा, ताकि अराजकता और हिंसा को भड़काया जा सके।

इस दौरान कई वॉट्सऐप ग्रुपों का इस्लेमात किया गया, खासतौर पर 2 ग्रुपों के बारे में बताया गया है, जिसमें एक ग्रुप का इस्तेमाल CAA विरोधी प्रदर्शनों, किसानों के प्रदर्शनों और शाहीन बाग के प्रदर्शनकारियों को हिंसा के लिए उकसाया गया। दूसरा ग्रुप कश्मीर में हिंसा और तनाव भड़काने में लगा था। ये लोग न्यूजक्लिक में पत्रकार के रूप में काम कर रहे थे और न्यूजक्लिक का एजेंडा आगे बढ़ा रहे थे। इन्हीं लोगं ने संवेदनशाली कश्मीर और अरुणाचल प्रदेश के नक्शों में छेड़छाड़ भी की थी।

जिन लोगों तक पैसे पहुँचाए गए, उसमें से एक नाम शरजील इमाम का है। वो सीएए-विरोधी प्रदर्शनों के दौरान हिंसा का मुख्य आरोपित है। उसने प्रबीर पुरकायस्थ से पैसे लिए और अपने नापाक एजेंडे को आगे बढ़ाता रहा। इस चार्जशीट में सभी गवाहों के बायन दर्ज हैं और उन्हें दिल्ली पुलिस कोर्ट में पेश कर चुकी है।

नेविल रॉय सिंघम से मिला पैसा तीस्ता सीतलवाड तक पहुँचाया

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, न्यूजक्लिक को विदेश से आए पैसों को तीस्ता सीतलवाड़ तक पहुँचाए गए। चार्जशीट में पुलिस ने बताया है कि अमेरिका से मिले पैसों को तीस्ता सीतलवाड़ के पोर्टल ‘सबरंग इंडिया’ को नया जीवन देने में किया गया। चार्जशीट के मुताबिक, ‘न्यूज सिंडिकेशन स्कैम’ के माध्यम से आर्टिकल लेखकों और स्तंभकारों को न्यूजक्लिक से मिले पैसे दिए गए और इन लेखों का इस्तेमाल सबरंग इंडिया पर प्रकाशित करने के लिए किया गया।

खास बात ये है इन आर्टिकल्स को सबरंग इंडिया पर प्रकाशित करते समय इन्हें ‘सबरंग इंडिया’ द्वारा लिखा दिखाया गया, और असली लेखकों के नाम छिपा लिए गए। चार्जशीट के मुताबिक, इससे तीस्ता सीतलवाड़ को करीब 3 लाख, 1 करोड़ से ज्यादा रुपए उनके कर्मचारियों के लिए और 39 लाख रुपए उनके परिवार के निजी खर्च के लिए मिले।

दिल्ली पुलिस ने अपनी चार्जशीट में बताया है कि जाँच एजेंसियों के रडार पर होने के बावजूद तीस्ता सीतलवाड़ द्वारा दागी विदेशी धन पाने का यह “सबसे सुविधाजनक तरीका” था। पुलिस ने कहा कि ई-मेल, गवाहों की जाँच, वित्तीय उकसावे और संरक्षित गवाहों की गवाही के विश्लेषण से यह स्थापित हुआ कि तीस्ता सीतलवाड, प्रबीर पुरकायस्थ और नेविल रॉय सिंघम एक “खास तिकड़ी” का हिस्सा थे। बता दें कि नेविल रॉय सिंघम न्यूजक्लिक के संस्थापक-संपादक प्रबीर पुरकायस्थ का लंबा समय से साथी है और एक अमेरिकी करोड़पति है। उसका जुड़ाव चीन की कम्युनिस्ट पार्टी से है और वो चीनी एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए प्रबीर पुरकायस्थ और न्यूजक्लिक के माध्यम से भारत के अंदर काम कर रहा था।

चार्जशीट के मुताबिक, तीनों लोग (प्रबीर पुरकायस्थ, तीस्ता सीतलवाड़ और नेविल रॉय सिंघम) एक-दूसरे की जरूरतों को पूरा करते हुए साथ में काम कर रहे थे। इसमें नेविल रॉय सिंघम की ओर से पैसा आता और सभी लोग मिलकर लेफ्ट विंग अतिवाद (LWE) एजेंडे को आगे बढ़ा रहे थे। पुलिस के मुताबिक, तीस्ता सीतलवाड़ और नेविल रॉय सिंघम के बीच ई-मेल्स का जो आदान प्रदान हुआ, उसमें इस बात का खुलासा हुआ है कि नेविल रॉय सिंघम ने तीस्वा सीतलवाड़ के पोर्टल सबरंग इंडिया और तीस्ता के एनजीओ सिटिजन्स फॉर जस्टिस एंड पीस (CJP) को प्रबीर पुरकायस्थ के माध्यम से फंडिंग दी।

चार्जशीट के मुताबिक, इस मामले की जाँच के लिए 13 दिसंबर 2023 को दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल की टीम ने मुंबई जाकर जाँच की और तीस्ता सीतलवाड़ और उसके शौहर जावेद आनंद को नोटिस भी थमाया था। जावेद आनंद सबरंग इंडिया का सह-संपादक भी है। स्पेशल सेल ने इन लेन-देन की जानकारी भी माँगी। स्पेशल सेल ने सबरंग इंडिया और न्यूजक्लिक के फाउंडर-एडिटर के बीच मैनपॉवर शेयरिंग, सैलरी डिटेल्स और आर्टिकल/वीडियो के प्रोडक्शन को लेकर साइन हुए एग्रीमेंट की भी जाँच की।

न्यूजक्लिक पर चीनी माध्यम से 80 करोड़ प्राप्त करने के आरोप हैं। एफआईआर में इस बात का जिक्र है कि न्यूजक्लिक ने भारत की संप्रभुता पर चोट करने और देश में नफरत का माहौल तैयार करने के लिए चीनी संगठनों से पैसे लिए। कुछ दिन पहले ही दिल्ली की कोर्ट ने प्रबीर पुरकायस्थ की 10 दिनों की कस्टडी बढ़ा दी थी। बता दें कि इस मामले में अमित चक्रवर्ती, जिसे प्रबीर के साथ ही गिरफ्तार किया गया था, वो अब सरकारी गवाह बन चुका है।

गौरतलब है कि दिल्ली पुलिस ने पिछले साल 3 अक्टूबर को गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम के तहत न्यूज़क्लिक के संस्थापक और संपादक प्रबीर पुरकायस्थ और एचआर प्रमुख अमित चक्रवर्ती को गिरफ्तार किया था। इस दौरान दिल्ली पुलिस ने न्यूजक्लिक के दफ्तर को छापेमारी के बाद सील कर दिया गया था। पुलिस ने बताया कि अक्टूबर 2023 में दिल्ली और सात अन्य राज्यों में 88 स्थानों पर छापे मारे गए, जिसमें एफआईआर में शामिल व्यक्तियों के साथ-साथ डेटा विश्लेषण के दौरान सामने आए लोगों को भी निशाना बनाया गया। इसके अलावा, प्रबीर पुरकायस्थ पर 2019 के लोकसभा चुनावों में तोड़फोड़ करने की साजिश रचने और पीपुल्स अलायंस फॉर डेमोक्रेसी एंड सेक्युलरिज्म (पीएडीएस) के साथ सहयोग करने का आरोप है।

यह लेख मूल रूप से अंग्रेजी भाषा में लिखा गया है। मूल लेख पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।