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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अयोध्या में रामलला के किए दर्शन: हनुमानगढ़ी में आशीर्वाद लेने के बाद सरयू घाट पर सांध्य आरती में भी हुईं शामिल

देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू अयोध्या पहुँची। राष्ट्रपति ने सबसे पहले हनुमानगढ़ी में दर्शन किए। वहाँ पूजा-अर्चना के बाद राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू रामलला के दर्शन करने पहुंचीं। इससे पहले महर्षि वाल्मीकि एयरपोर्ट पर राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने राष्ट्रपति का स्वागत किया। राष्ट्रपति के अयोध्या आगमन को लेकर श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की ओर से खास तैयारी की गई। राम जन्मभूमि परिसर और हनुमान गढ़ी पर फूलों से द्वार सजाए गए। यही नहीं, मंदिर तक पहुँचने के रास्ते को भी सजाया गया।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने रामलला के दर्शन किए। राष्ट्रपति के दर्शन का वीडियो एएनआई ने जारी किया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के आगमन के समय मंदिर में आम भक्तों की एंट्री बंद रखी गई।

अयोध्या पहुँची राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सरयू घाट का भी दौरा किया। यहाँ वो सांध्य आरती में भी शामिल हुईं।

इससे पहले, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सबसे पहले हनुमान गढ़ी में दर्शन किए। उन्होंने हनुमान जी के दर्शन के बाद रामलला के आशीर्वाद लिए।

बता दें कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को रामलला की प्राण प्रतिष्ठा समारोह में भी आमंत्रित किया गया था, लेकिन वो किन्हीं कारणों से पहुँच नहीं पाई थी। इस बात को राहुल गाँधी और कॉन्ग्रेस ने मुद्दा बनाया और तमाम रैलियों, प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि द्रौपदी मुर्मू को इसलिए नहीं बुलाया गया, क्योंकि वो जनजातीय समुदाय से तालुक रखती हैं।

गौरतलब है कि 22 जनवरी 2024 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पूजन बाद 5 वर्षीय रामलला की दिव्या प्रतिमा अयोध्या में स्थापित की गई थी। इसके बाद से अब तक डेढ़ करोड़ लोग से अधिक लोग रामलला के दर्शन कर चुके हैं। देश के कई राज्यों के राज्यपाल, मुख्यमंत्री और वहां के कैबिनेट मंत्री भी रामलला के दर्शन कर चुके हैं।

प्रज्वल को पेश होने के लिए चाहिए 1 सप्ताह का समय, रेवन्ना कह रहे – जाँच में सहयोग को तैयार: सेक्स वीडियो केस में बाप-बेटे को ‘सत्य की जीत’ का यकीन

कर्नाटक के चर्चित सेक्स स्कैंडल में फँसे प्रज्वल रेवन्ना ने अपनी पहली प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने बताया कि वो फ़िलहाल बेंगलुरु में नहीं है। सत्य की जीत होने का भरोसा जताते हुए प्रज्वल ने अपने वकील के जरिए CID के आगे पेश होने की बात कही है। अपना जवाब पेश करने के लिए उन्होंने 7 दिनों का समय माँगा है। वहीं CID की नोटिस पाने वाले प्रज्वल के पिता एच डी रेवन्ना ने खुद को जाँच के लिए तैयार बताया है। पिता-पुत्र के ये बयान बुधवार (1 मई, 2024) को सामने आए हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रज्वल रेवन्ना ने CID की तरफ से मिली नोटिस पर अपने वकील के माध्यम से जवाब भिजवाया है। इस जवाब में 33 वर्षीय प्रज्वल को बेंगलुरु से बाहर की यात्रा पर बताया गया है। पत्र में रेवन्ना को जाँच दल के आगे पेश होने के लिए 7 दिनों का समय और माँगा गया है। हालाँकि, इस पत्र में प्रज्वल रेवन्ना की लोकेशन नहीं बताई गई है। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में उनके जर्मनी चले जाने का दावा किया गया था। वहीं प्रज्वल रेवन्ना ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ के जरिए अपनी पहली प्रतिक्रिया में सत्य की जीत होने की बात कही है।

वहीं प्रज्वल के पिता और JDS नेता एच डी रेवन्ना ने खुद को जाँच का सामना करने के लिए तैयार बताया है। बुधवार को उन्होंने मीडिया से बात करते हुए यह जानकारी दी है। जल्द ही CID इस मामले में 67 वर्षीय एच डी रेवन्ना से पूछताछ कर सकती है। बताते चलें कि मामले की जाँच के लिए SIT का गठन किया गया है।

गौरतलब है कि प्रज्वल रेवन्ना पूर्व प्रधानमंत्री एच दी देवगौड़ा के पोते और JDS से सांसद हैं। रेवन्ना के घर में काम करने वाली एक महिला ने रविवार (28 अप्रैल, 2024) को हासन जिले में पिता-पुत्र पर FIR दर्ज करवाई थी। यह FIR होलेनरसिपुरा पुलिस स्टेशन में दर्ज हुई है। इसी दौरान कई अश्लील वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो गए जिसमें रेवन्ना के होने का दावा किया गया। मामले का खुलासा होते ही प्रज्वल रेवन्ना के जर्मनी चले जाने के दावे किए जाने लगे। इस मामले में राजनीति भी शुरू हो चुकी है। फ़िलहाल रेवन्ना को JDS ने पार्टी ने निष्काषित कर दिया गया है।

‘BJP को बड़े मार्जिन से जिताना है’: ‘चाचा’ शिवपाल सिंह यादव ने अखिलेश के सामने ही मंच से कर दी अपील, बंगाल में अधीर रंजन ने भी कहा था – भाजपा को वोट देना बेहतर

समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता शिवपाल सिंह यादव ने उत्तर प्रदेश में अपनी पार्टी के लिए चुनावी रैली में भाजपा के लिए वोट डालने की अपील कर दी। उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के चाचा शिवपाल सिंह यादव जसवंतनगर में बुधवार (1 मई, 2024) को एक चुनावी जनसभा को संबोधित कर रहे थे। बता दें कि इटावा जिले में स्थित जसवंतनगर, मैनपुरी लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आता है। वहीं मैनपुरी, जहाँ पिछले 28 वर्षों और 10 चुनावों से सपा का ही कब्ज़ा है।

खुद मुलायम सिंह यादव यहाँ से 5 बार (1996, 2004, 2009, 2014, 2019) जीत दर्ज कर चुके हैं। हालाँकि, 2004 और 2014 में उन्होंने यहाँ से जीत के बाद इस्तीफा दे दिया था क्योंकि वो दूसरी सीट से भी जीते थे। उसके बाद हुए उपचुनावों में 2004 में अपने छोटे भाई अभयराम यादव के बेटे धर्मेंद्र यादव को जिताया था, वहीं 2014 के उपचुनाव में उन्होंने अपने बड़े भाई रणवीर सिंह यादव के पोते तेजप्रताप सिंह यादव की जीत सुनिश्चित की थी।

शिवपाल सिंह यादव ने ताज़ा रैली में कहा, “7 मई को भारतीय जनता पार्टी को बहुत बड़े मार्जिन से जिताना है। और इसीलिए भी जिताना है, क्योंकि आपके सामने कई बार बहुत चुनौतियाँ आई हैं।” खास बात ये है कि शिवपाल सिंह यादव जब ये बोल रहे थे, तब सपा के अध्यक्ष अखिलेश यादव मंच पर ही मौजूद थे। शिवपाल सिंह यादव ने सपा की जगह ज़बान स्लिप होने की वजह से भाजपा कह दिया, लेकिन सोशल मीडिया में वीडियो वायरल होने के बाद उनकी भट्ट पिट गई।

बताते चलें कि मैनपुरी की मौजूदा सांसद अखिलेश यादव की पत्नी डिंपल यादव हैं, जिन पर पार्टी ने इस बार फिर से भरोसा जताया है। उनका मुकाबला भाजपा के ठाकुर जयवीर सिंह से होगा, जो मैनपुरी सदर से एक बार और घिरोर मैनपुरी से 2 बार विधायक रह चुके हैं। ‘योगी 2.0’ सरकार में उन्हें पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री बनाया गया है। मायावती की सरकार में भी वो स्वतंत्र प्रभार के साथ सिंचाई राज्यमंत्री रह चुके हैं। उन्होंने ग्राम प्रधान से मंत्री तक का सफर तय किया है।

I.N.D.I. गठबंधन की हालत उत्तर प्रदेश ही नहीं, पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में भी खस्ता है। पश्चिम बंगाल में कॉन्ग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अधीर रंजन चौधरी ने एक भाषण के दौरान बंगाली में कहा, “TMC को वोट क्यों दें, बीजेपी को वोट देना बेहतर है।” अधीर रंजन चौधरी का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। भले ही कॉन्ग्रेस और अन्य विपक्षी दल I.N.D.I. गठबंधन के बैनर तले एकता का दावा कर रहे हैं, लेकिन ज़मीनी स्थिति उस बात से बहुत दूर है, जिस पर विपक्ष देश को विश्वास दिलाना चाहता है।

मनोज तिवारी-रवि किशन के गाने शेयर करने वाले राज बब्बर के बलात्कार वाले दृश्यों पर चुप: कॉन्ग्रेस ने गुरुग्राम से बनाया है उम्मीदवार, PM मोदी की माँ का कर चुके हैं अपमान

कॉन्ग्रेस ने राज बब्बर को हरियाणा के गुरुग्राम से लोकसभा चुनाव 2024 में अपना प्रत्याशी घोषित किया है। यहाँ से उनका मुकाबला केंद्रीय राज्यमंत्री राव इंद्रजीत सिंह से होगा। राव इंद्रजीत सिंह 2009, 2014 और 2019 के लोकसभा चुनावों में जीत दर्ज कर चुके हैं और लगातार चौथी बार मैदान में हैं। इससे पहले वो महेंद्रगढ़ से भी 2 बार सांसद रहे हैं। राव इंद्रजीत सिंह ने पिछले 2 चुनाव भाजपा से जीते हैं, वहीं उससे पहले वो कॉन्ग्रेस में हुआ करते थे।

राज बब्बर के पास भी 5 बार सांसदी का अनुभव है। वो 2 बार राज्यसभा सांसद रहे हैं। वहीं 3 बार उन्होंने लोकसभा में जीत दर्ज की है। 1999 और 2004 में जहाँ उन्हें आगरा लोकसभा सीट से जीत मिली, 2009 में वो फिरोजाबाद से सांसद बने। 1994-99 और 2015-20 में वो राज्यसभा सांसद रहे। राज बब्बर का फ़िल्मी करियर लगभग 50 वर्षों का रहा है। बीच-बीच में वो पंजाबी फिल्मों में भी काम करते थे। करियर के एक दौर में उन्होंने कई B ग्रेड फिल्मों में काम किया।

राज बब्बर को हिंदी फिल्मों के शौक़ीन लोग ‘इंसाफ का तराजू’ (1980), ‘निकाह’ (1982) और ‘आज की आवाज़’ (1984) जैसी फिल्मों के लिए जानते हैं। राज बब्बर ने 1989 में VP सिंह के नेतृत्व वाले ‘जनता दल’ के माध्यम से राजनीति में कदम रखा था, जहाँ से समाजवादी पार्टी होते हुए वो कॉन्ग्रेस में पहुँचे। जुलाई 2016 में पार्टी ने उन्हें उत्तर प्रदेश में प्रदेश अध्यक्ष बनाया, अक्टूबर 2019 तक वो इस पद पर रहे। 80 के दशक में 80 से भी अधिक फिल्मों में काम कर चुके राज बब्बर को उनके अभिनय और आवाज़ की वजह से भी जाना गया।

अब आते हैं मौजूदा माहौल पर। भाजपा ने उत्तर-पूर्वी दिल्ली लोकसभा क्षेत्र से भोजपुरी गायक मनोज तिवारी को टिकट दिया। वो लगातार तीसरी बार सांसद बनने के लिए चुनाव लड़ रहे हैं। वहीं गोरखपुर से रवि किशन को लगातार दूसरी बार मौका दिया गया। मनोज तिवारी का मुकाबला कॉन्ग्रेस के कन्हैया कुमार से होगा, वहीं रवि किशन के सामने समाजवादी पार्टी की काजल निषाद मैदान में हैं। जैसे ही इन दोनों की उम्मीदवारी का ऐलान हुआ, एक खास गिरोह सक्रिय हो गया।

इस गिरोह ने मनोज तिवारी और रवि किशन के पुराने गाने शेयर करने शुरू कर दिए। साथ ही उन पर अश्लील होने के आरोप मढ़ दिए गए। भोजपुरी में अधिकतर गाने द्विअर्थी होते रहे हैं और इसे स्वच्छ करने के लिए काफी पहले से अभियान चलाया जाता रहा है, लेकिन जानबूझकर मनोज तिवारी और रवि किशन के पुराने गानों को सोशल मीडिया पर वायरल किया जाने लगा। जबकि दोनों ने कई भजन भी गाए हैं। खासकर मनोज तिवारी ने सामान्यतः अच्छे-अच्छे गाने ही गए हैं।

भोजपुरी की पूरी की पूरी फिल्म इंडस्ट्री ही अश्लील और द्विअर्थी गानों के लिए बदनाम है, ऐसे में इसका असर इन दोनों पर न पड़ा हो ऐसा हो ही नहीं सकता। दोनों ही इस इंडस्ट्री के सबसे बड़े सुपरस्टार रहे हैं, गायक रहे हैं। हालाँकि, करियर में परिपक्वता आने के बाद इन दोनों ने कई बेहतरीन गाने गाए और कई अच्छी फ़िल्में बनाई। कला को प्रमोट करने के लिए काम किया। रवि किशन ने तो बॉलीवुड में भी एक से बढ़ कर एक किरदार किए, आप ‘तेरे नाम’ (2003) या ‘मुक्केबाज’ (2017) ही देख लीजिए।

‘यूपी में का बा’ गाने के जरिए उत्तर प्रदेश जैसे राज्य को बदनाम करने के लिए सोशल मीडिया पर अभियान चलाने वाली नेहा सिंह राठौड़ इस प्रोपेगंडा अभियान में सबसे आगे रहीं। खुद को लोकगायिका बताने वाली नेहा सिंह राठौड़ ने एक के बाद एक गाने ‘X’ (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट कर के दोनों अभिनेता-नेताओं को बदनाम किया। चर्चा चली कि नेहा सिंह राठौड़ कॉन्ग्रेस के टिकट के लिए ये सब कर रही हैं, हालाँकि पार्टी ने उन्हें टिकट नहीं दिया। इससे उनकी भद्द पिटी सो अलग।

खास बात ये है कि इसी गिरोह ने राज बब्बर को कॉन्ग्रेस द्वारा टिकट दिए जाने के बाद उनके इतिहास को नहीं खँगाला। सोशल मीडिया में एक से एक तस्वीरें हैं, जिनमें राज बब्बर अश्लील दृश्य में दिखाई दे रहे हैं। लड़का-लड़की अर्धनग्न हैं, रोमांस कर रहे हैं, लेकिन इन दृश्यों से समाज में स्वच्छता लाने का ड्रामा करने वाली नेहा सिंह राठौड़ को कोई फर्क नहीं पड़ता। आखिर वो भाजपा में थोड़े हैं, कॉन्ग्रेसी जो ठहरे। यही कारण है कि राज बब्बर पर नेहा सिंह राठौड़ एन्ड गैंग का मुँह बंद है।

राज बब्बर ने इन फिल्मों में बेहद ही वीभत्स तरीके से बलात्कार तक के दृश्य फिल्माए हैं। इससे समाज पर क्या असर पड़ेगा? एक तो ऐसा दृश्य है जिसमें राज बब्बर सूट-बूट में कुर्सी पर बैठे हुए हैं और एक लड़की को एक-एक कर अपने कपड़े उतारने के लिए मजबूर कर रहे हैं। वो लड़की लगातार उसे छोड़ देने की गुहार लगाती रहती है और वो उसे अपने पास बुलाते रहते हैं। वो उसे दोनों हाथ उठा कर चलने को कहते हैं। अर्धनग्न लड़की रोती रहती है, वो ये सब करवाते रहते हैं।

लेकिन मजाल कि नेहा सिंह राठौड़ या उनके गिरोह के किसी भी शख्स ने राज बब्बर के इस दृश्य को लेकर चूँ तक भी की हो। याद रखिए, कॉन्ग्रेस वही पार्टी है जिसकी राष्ट्रीय प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत तक ने अभिनेत्री कंगना रनौत के लिए आपत्तिजनक शब्दावली का इस्तेमाल किया था, जब उन्हें हिमाचल प्रदेश के मंडी से भाजपा द्वारा लोकसभा प्रत्याशी घोषित किया गया। बिकनी में कंगना रनौत की तस्वीरें शेयर की गईं। उनके व्यक्तिगत जीवन को भी निशाना बनाया गया।

जहाँ तक राज बब्बर की बात है, उन्होंने राजनीति में भी शुचिता का पालन नहीं किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ भी वो आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल कर चुके हैं। दिसंबर 2018 में भाजपा ने उनके खिलाफ चुनाव आयोग में शिकायत भी की थी। उन्होंने राजस्थान के उदयपुर में एक रैली के दौरान कह दिया था कि गुजरात के 2 लोग दिल्ली में दूसरों की हत्या के लिए एक गैंग चला रहे हैं। आज राज बब्बर का ये बयान भी लोग भूल चुके हैं।

और तो और, राज बब्बर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की माँ को भी नहीं छोड़ा। उन्होंने महिला विरोधी टिप्पणी तक की थी। नवंबर 2018 में उन्होंने मध्य प्रदेश के इंदौर में रुपए के गिरते भाव की तुलना पीएम मोदी की माँ की उम्र से की थी। आज हीराबेन मोदी जीवित नहीं हैं, लेकिन उस समय वो जीवित थीं। ऐसे में एक वयोवृद्ध महिला का अपमान करने वाले के लिए क्या कहा जाए? उनके अश्लील दृश्यों न सही, महिलाओं को लेकर उनकी सोच पर तो भाजपा विरोधी कुछ बोलेंगे?

जिस पर सलमान खान के घर पर हमले के लिए हथियार सप्लाई करने का आरोप, उसकी मौत: सुसाइड के प्रयास के बाद लाया गया था अस्पताल

बॉलीवुड अभिनेता सलमान खान के घर पर हमले के मामले में गिरफ्तार किए गए आरोपित अनुज थापन की बुधवार (1 मई, 2024) को अस्पताल में मौत हो गई। यहाँ उसका इलाज चल रहा था। थापन हमला करने वालों को हथियार उपलब्ध करवाने का आरोपित था।

जानकारी के अनुसार, बुधवार को ही अनुज थापन ने पुलिस कस्टडी में ही आत्महत्या की कोशिश की थी। उसे इसके बाद मुंबई ही के सेंट जॉर्ज अस्पताल ले जाया गया था। यहाँ अस्पताल में इलाज के दौरान ही उसने दम तोड़ दिया। उसकी मौत की पुष्टि डॉक्टरों ने कर दी। अभी उसका पोस्टमार्टम किया जाएगा, जिसमें मौत का कारण पता चलेगा।

अनुज थापन की मौत को लेकर पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और इसकी आगे जाँच की जा रही है। अनुज थापन ने आत्महत्या कैसे की, इसकी जानकारी सामने नहीं आई है। अनुज थापन को इस मामले में एक और आरोपित के साथ पंजाब से 25 अप्रैल को ही गिरफ्तार किया था। उस पर आरोप था कि उसने सलमान खान के घर पर हमला करने वालों को हथियार मुहैया करवाए।

गौरतलब है कि 14 अप्रैल 2024 को तडके सुबह मुंबई स्थित सलमान खान के अपार्टमेंट पर हमला हुआ था। CCTV फुटेज की जाँच में सामने आया था कि सलमान खान के घर पर दो बैक सवार हमलावरों ने गोलियाँ बरसाईं। इस हमले की जिम्मेदारी गैंगस्टर लॉरेंस विश्नोई के भाई अनमोल विश्नोई ने ली थी।

बाद में इन दोनों शूटरों को भी गुजरात के भुज से गिरफ्तार कर लिया गया था। इनकी पहचान 24 साल के विक्की साहब गुप्ता और 21 वर्षीय श्रीजोगेंद्र पाल के तौर पर हुई थी। बताया गया था कि दोनों शूटर लगभग 15 दिनों तक मुंबई के पनवेल इलाके में किराये के मकान में रुके थे।

इस किराये के मकान की दूरी सलमान के आवास से लगभग 10 किलोमीटर है। इस दौरान दोनों ने 4 बार सलमान के अपार्टमेंट की रेकी की थी। वो सलमान खान के फार्म हाउस भी गए थे। दोनों की मुलाक़ात लॉरेंस विश्नोई के ख़ास कहे जाने वाले रोहित गोदारा से भी हो चुकी थी।

TOI ने पुलिस सूत्रों के माध्यम से बताया था कि दोनों शूटरों का मकसद सलमान खान को मारने के बजाय डराना था। ये दोनों सलमान के घर पर तब गोलियाँ चलाना चाह रहे थे जब ईद के 2 दिन बाद अभिनेता अपने घर के बालकनी से प्रसंशकों का अभिवादन स्वीकार करने वाला था। 

जिंदा होते चंदा बाबू तो तेजाब से भी तेज उन्हें गलाता ज्ञानेश्वर की थेथरई, आतंकी की बेवा के लिए बिछने वाले को पत्रकार क्यों कहे

बिहार के एक ‘पत्रकार’ हैं- ज्ञानेश्वर। खुद को निष्पक्ष बताते हैं, पर सोशल मीडिया में आए दिन उनकी पीतकारिता दिख ही जाती है। इस बार उनकी पीतकारिता के प्रताप से धन्य हुईं हैं हिना शहाब। हिना शहाब आतंकी शहाबुद्दीन की बेवा हैं और सीवान से निर्दलीय मैदान में हैं।

एक्स/ट्विटर पर उम्मीदवारों के लिए पोस्ट करते वक्त अक्सर जमीनी फैक्ट और दलाली के बीच का अंतर भूल जाने वाले ज्ञानेश्वर ने हिना शहाब के लिए बैटिंग करते हुए शहाबुद्दीन का महिमामंडन किया है। उसे सेकुलर बताने के लिए गीता की गंगा तक बहा दी है।

ज्ञानेश्वर ने इस ट्वीट में शहाबुद्दीन की बेवा के चुनावी मैदान में चुन्नी-माला ओढकर निर्दलीय उतरने पर खुशी जताई। इसके अलावा सबसे हैरान करने वाली बात ये थी कि उन्होंने ट्वीट में शहाबुद्दीन के सारे दोषों को नकारते हुए उसे इतना हल्का दिखाया जैसे माफिया पर कोई छोटे-मोटे आरोप हों जिन्हें आसानी से नजर अंदाज किया जा सकता है। 

ट्वीट की भाषा देखें तो इसमें ज्ञानेश्वर ने लिखा शहाबुद्दीन को ‘दिवंगत’ लिखा। साथ ही पूरे सम्मान के साथ कहा-“उन्होंने जो कुछ किया, लेकिन कभी हिन्दू-मुस्लिम नहीं किया।” इतना ही नहीं ये भी कहा कि शहाबुद्दीन के रहते सीवान में दंगा कोई सोच भी नहीं सकता था। आगे पत्रकार महोदय ने शहाबुद्दीन के पढ़ने-लिखने की शौक की तारीफ की और उसे सेकुलर दिखाते हुए कहा कि ‘उनसे गीता-कुरान दोनों पर बात की जा सकती थी।’

जिस हिसाब से ज्ञानेश्वर का ये ट्वीट किया गया है उसे देख ऐसा लगता है कि वो शहाबुद्दीन के सारे गुनाहों को भुला चुके हैं और बीड़ा उठाया है कि हीना शहाब के प्रचार के लिए किसी भी तरह जनता की स्मृतियों से वो शहाबुद्दीन की दुर्दांत अपराधी की छवि बदल दें।

हालाँकि, ये काम इतना आसान नहीं है जितना ज्ञानेश्वर मानकर बैठे हैं। उनकी बेशर्मी है कि वो बिहार से होते हुए शहाबुद्दीन की याद सीवान के लोगों को दिला सकते हैं लेकिन इतना इमान उनमें नहीं बचा है कि वो हीना शहाब के मैदान में उतरने पर चंदा बाबू को याद करके जनता को बता दें कि इन दोनों नामों के बीच क्या कनेक्शन है। पर बिहार की जनता ऐसी नहीं है। उन्हें जितना शहाबुद्दीन याद है उससे ज्यादा बिहार के चंदा बाबू याद हैं।

अच्छा है आज वो चंदा बाबू दुनिया में नहीं हैं वरना खुद को एक पत्रकार कहने वाले शख्स के ऐसे विचार देख उन्हें अथाह दुख पहुँचता। ऐसा दुख, जिसकी भरपाई ज्ञानेश्वर की चाशनी में डूबी भाषा नहीं कर पाती। ज्ञानेश्वर की तरह चंदा बाबू भी बिहार से ही थे, उनका परिवार भी एक समय तक हँसता-खेलता साथ रहता था। मगर, ये सब तब तक था जब तक कि शहाबुद्दीन की नजर उनके परिवार पर नहीं पड़ी। जिस दिन ऐसा हुआ उस दिन ज्ञानेश्वर के ‘सेकुलर’ शहाबुद्दीन ने उनके दो बेटों को तेजाब से नहलाकर मौत के घाट उतार दिया और जब तीसरे बेटे ने न्याय लेने की कोशिश की तो उसकी भी हत्या करवा दी गई।

साल 2020 में लंबे समय से बीमारी से जूझ रहे चंदा बाबू आखिरी सांस लेने से पहले सालों तक न्याय की गुहार लिए दर-दर भटके थे। जब उनकी तस्वीर आती थी तो अपनी पत्नी के साथ तीनों बेटों की तस्वीर को हाथ में लिए दिखते थे। उनका दुख इतना बड़ा था कि सामान्य व्यक्ति अगर चंदा बाबू के दर्द को सोच ले तो आज भी उसकी रूह कांप जाए लेकिन उन्हें भुलाकर शहाबुद्दीन का महिमामंडन करना सिर्फ ज्ञानेश्वर जैसे पत्रकार ही कर सकते हैं जिन्हें चंदा बाबू के दर्द से कोई सरोकार तक नहीं और उनका प्रोफेशन सिर्फ ‘दलाली’ करना रह गया है।

अजीब बात ये है कि ज्ञानेश्वर ने जिस शहाबुद्दीन को हीरो दिखाकर पेश करने का प्रयास किया है उसके खिलाफ एक दो ममाले नहीं बल्कि पूरे 56 मुकदमे थे जिसमें से उसे 6 में सजा भी हो गई थी। उसने अपराध की दुनिया में पाँव जमाना अपने करियर के शुरुआती समय से शुरू कर दिया था लेकिन पहली एफआईआर उसके खिलाफ 1986 में हुई थी। इसके बाद 2016 में भी उसका नाम एक पत्रकार की हत्या में आया था।

2005 में जब सीवान के एसपी और डीएम ने शहाबुद्दीन के घर छापेमारी की तो उसके यहाँ पाकिस्तान निर्मित कई गोलियाँ, एके-47 सहित ऐसे उपकरण मिले था। इसके अलावा नाइट गॉगल्स और लेजर गाइडेड समेत कई चीजें मिली थीं, जिनपर पाकिस्तना ऑडिनेंस फैक्ट्री की मुहर लगी थी। छापेमारी के बाद बिहार के पूर्व डीजीपी ओझा ने अपने कार्यकाल में शहाबुद्दीन के आईएसआई कनेक्शन के बारे में खुलासा किया था। उन्होंने पूरी 100 पेज की रिपोर्ट सौंपी थीं। लेकिन उस समय राबड़ी देवी सरकार थी और उन्होंने उसे पद से हटा दिया था।

ये सिर्फ चंद मामले हैं जो शहाबुद्दीन के मीडिया के सामने हैं। इसके अलावा स्थानीय स्तर पर उसके खौफ की कहानी तमाम हैं। बावजूद उन सबके ज्ञानेश्वर जैसे पत्रकार चुनाव आने पर ऐसे माफियाओं का महिमामंडन करते मिलते हैं तो समझना मुश्किल होता है कि खुद को निष्पक्ष कहने वाले लोगों के लिए निष्पक्ष होने की परिभाषा क्या है।

तमिलनाडु में अरुणाचलेश्वर मंदिर के सामने नहीं बनेगा शॉपिंग कॉम्प्लेक्स, हाई कोर्ट में पीछे हटी स्टालिन सरकार : कहा – अब नहीं होगा कोई निर्माण

तमिल नाडु के तिरुवन्नामलाई जिले में विश्व प्रसिद्ध अरुणाचलेश्वर मंदिर (अन्नामलाईयार मंदिर) स्थित है, जो कई शताब्दियों पुरानी है। इसे यूनेस्को ने संरक्षित इमारतों की सूची में भी रखा है। इस मंदिर का गोपुरम 66 मीटर ऊँचा है और ये मंदिर भगवान शिव को समर्पित है। इस मंदिर के सबसे बड़े गोपुरम के सामने तमिलनाडु सरकार का हिंदू धार्मिक और धर्मार्थ बंदोबस्ती (HR&CE) विभाग 150 दुकानों का शॉपिंग कॉम्प्लेक्स बनवा रहा रहा था और इसपर निर्माण कार्य भी शुरू हो गया। हालाँकि इस पर तमाम तरह की रोक थी, इसके बावजूद निर्माण कार्य शुरू होने के बाद मद्रास हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की गई और अब इसपर निर्माण कार्य रुक गया है।

ये याचिका मंदिर कार्यकर्ता और इंडिक कलेक्टिव ट्रस्ट के अध्यक्ष टीआर रमेश ने दाखिल की। टीआर रमेश ने 30 अप्रैल 2024 को एक्स पर बताया कि अब तमिल नाडु सरकार ने अपने कदम पीछे खींच लिए हैं। तमिल नाडु के हिंदू धार्मिक और धर्मार्थ बंदोबस्ती (एचआरसीई) विभाग ने मद्रास उच्च न्यायालय को बताया है कि वह अरुणाचलेश्वर के परिसर में 150 दुकानों के अनधिकृत निर्माण को आगे नहीं बढ़ाएगा।”

टीआर रमेश ने एक्स पर लिखा, “इस मामले में हाई कोर्ट की बेंच के सामने जैसे ही सुनवाई शुरू हुई, वैसे ही HR&CE विभाग के वकील ने कोर्ट को बताया कि तिरुवन्नामलाई के प्रसिद्ध अरुणाचलेश्वर मंदिर के राजगोपुरम के सामने जो निर्माण कार्य होना था, उसकी योजना रद्द कर गई है। हाई कोर्ट ने राज्य सरकार द्वारा ये कदम वापस लेने पर खुशी जताई और उम्मीद भी जताई कि ऐसा वाकई में तुरंत हो जाना चाहिए।”

टी आर रमेश ने हाई कोर्ट में दाखिल अपनी याचिका में कहा था कि राज्य सरकार सिर्फ केयरटेकर की भूमिका में है, वो ऐतिहासिक स्थलों से छेड़छाड़ नहीं कर सकती। वो मंदिर में आने वाले भक्तों के अधिकारों का हनन करके मंदिर के बाहर शॉपिंग कॉम्प्लेक्स नहीं बनवा सकती। जिसके बाद सरकार ने मद्रास हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस एस वी गंगापुरवाला और जस्टिस जी चंद्रसेखरन जे ने कहा कि हमें इस मामले में अब कोई आदेश पास करने की जरूरत नहीं है। हमें खुशी है कि सरकार ने सही कदम उठाया।

जानकारी के मुताबिक, ये मंदिर 10 एकड़ से ज्यादा बड़े क्षेत्र में फैला हुआ है, जिसमें कई गोपुरम है। मुख्य गोपुरम राजगोपुरम है। इसी गोपुरम के सामने 6 करोड़ से ज्यादा की लागत से इन शॉपिंग कॉम्प्लेक्स के निर्माण की योजना बनाई थी और इस पर काम भी शुरू हो गया था। इसके लिए पैसे भी मंदिर के खाते से ही निकाले गए थे और सरकार ने ये पैसा विधानसभा में पास किया था, लेकिन अब सरकार इस पैसे को वापस मंदिर के खाते में डाल देगी।

अरुणाचलेश्वर मंदिर के बारे में जानिए

इस मशहूर मंदिर का निर्माण कई राजवंशों ने मिलकर कराया, जो पूरा हुआ चोल राजाओं के समय में। 9वीं शताब्दी में बनकर तैयार हुए इस मंदिर में महादेव की पूजा होती है। अरुणाचलेश्वर मंदिर (जिसे अन्नामलाईयार मंदिर भी कहा जाता है) अरुणाचला पहाड़ी की तली में स्थित है। अरुणाचल पहाड़ी को ‘शिवलिंग’ की मान्यता है। माना जाता है कि इसी जगह पर महादेव ने अर्धनारीश्वर अवतार धारण किया था। इस मंदिर में कार्तिकेय दीपम त्यौहार के समय 30 लाख से ज्यादा लोग एकत्रित होते हैं। इस मंदिर में अग्नि तीर्थम नाम का कुंड है, जिसे बेहद पवित्र माना जाता है। अरुणाचलेश्वर मंदिर शैव मत के अनुयायियों के लिए आस्था का प्रमुख केंद्र है।

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कॉन्ग्रेस को वोट नहीं दिया तो काट देंगे बिजली: कर्नाटक में कॉन्ग्रेस विधायक ने वोटरों को धमकाया, पहले कहा था- अगर मोदी मर गया तो…

कर्नाटक के कॉन्ग्रेस विधायक ने एक वोटरों को धमकी दी है कि अगर वह कॉन्ग्रेस को बड़े स्तर पर वोट नहीं देते तो बिजली काट दी जाएगी। उनकी इस धमकी का वीडियो भी वायरल हो रहा है। इससे पहले उन्होंने पीएम मोदी के मरने की बात कही थी।

कर्नाटक के बेलगावी से विधायक राजू कागे ने जुगुलातो गाँव में एक जनसभा में कहा, “मुझे 400 वोट कम मिले। मंगावती, शूलू में मुझे कम वोट मिले, शाहपुरा की तो बात ही छोड़ दो। मैं इस बारे में ज्यादा बात नहीं करूँगा। अगर मैं बोलूंगा तो मेरे मुँह में कीड़े पड़ जाएँगे। अगर मुझे ज्यादा वोट नहीं मिले तो तुमलोग की बिजली काट देंगे। इसलिए ऐसा नहीं होना चाहिए। मैं अपनी बात पर कायम रहने वाला हूँ।” कॉन्ग्रेस विधायक की धमकी देने वाली यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गई।

राजू कागे इससे पहले भी विवादित बयान दे चुके हैं। राजू कागे ने मंगलवार (30 अप्रैल, 2024) को कहा था,”मैं भी ग्रेजुएट हूँ, मेरे पास भी दिमाग है, क्या मैं अनपढ़ हूँ? मुझे भरोसा
है कि मैं भी देश अच्छे से चला सकता हूँ, कल अगर मोदी मर जाएँगे तो कोई और पीएम नहीं बनेगा? 140 करोड़ की आबादी है में कोई पीएम नहीं बनेगा।” इस बयान को लेकर खूब बवाल हुआ था। भाजपा ने भी उनके इस बयान को लेकर हमला बोला है।

भाजपा ने कहा कि कॉन्ग्रेस विधायक पीएम मोदी की मृत्यु चाहते हैं। कर्नाटक भाजपा ने लिखा,”कागवाड विधायक राजू कागे ने एक बार फिर अपनी बेलगाम जुबान चलाई है। अब उनके पास आलोचना के लिए मुद्दे नहीं है तो यह डरपोक लोग पीएम मोदी की मौत चाहते हैं। पीएम मोदी को 140 करोड़ भारतीयों का आशीर्वाद प्राप्त है। जितना अधिक कॉन्ग्रेसी उनकी मौत के लिए कामना करेंगे, वह उतने ही लम्बी आयु तक जीवित रहेंगे।”

इससे पहले भाजपा ने कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार पर आरोप जड़ा था कि उन्होंने बेंगलुरु हाउसिंग सोसायटी के लोगों को धमकाया। भाजपा आईटी सेल के मुखिया अमित मालवीय ने डीके शिवकुमार का बयान एक्स पर डाला था। उन्होंने लिखा, “मैं यहाँ एक बिजनेस डील के लिए आया हूँ। यहाँ 2,500 घर हैं और 6,000 वोट हैं… आपको सीए साइट और कावेरी का पानी चाहिए… अगर मैं यह काम करवा दूँ, तो आप मुझे क्या देंगे?”

जोधपुर, जयपुर, दौसा, अलवर… जहाँ-जहाँ राहुल-प्रियंका गाँधी ने किया प्रचार, उन-उन जगहों पर मतदान घटा: 8.5% तक की गिरावट

देश में लोकसभा चुनाव 2024 की प्रक्रिया जारी है। सात चरणों में होने वाले मतदान में दो चरण के मतदान खत्म हो चुके हैं। इन दो चरणों में राजस्थान की कुल 25 लोकसभा सीटों पर मतदान खत्म हो चुका है। यहाँ पहले चरण में 19 अप्रैल को हुए मतदान में 12 लोकसभा सीटों पर वोट डाले गए गए थे, जबकि 26 अप्रैल को हुए दूसरे चरण के मतदान में 13 सीटों पर वोट डाले गए थे।

अगर इस लोकसभा चुनाव में मतदान की बात करें तो पिछले लोकसभा चुनाव में इस बार उत्साह देखने को कम मिला। इसमें सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि जहाँ-जहाँ कॉन्ग्रेस के सुपर स्टार प्रचारक राहुल गाँधी और उनकी बहन प्रियंका गाँधी ने चुनाव प्रचार किए, वहाँ मतदान में भारी गिरावट देखी गई है।

कॉन्ग्रेस के प्रत्याशियों के पक्ष में राहुल गाँधी और प्रियंका गाँधी ने 6 लोकसभा सीटों पर प्रचार किया था। इन सभी सीटों पर मतदान प्रतिशत में 3 से लेकर 8.50 प्रतिशत तक की गिरावट इस बार देखी गई है। पहले चरण में राहुल गाँधी ने राजस्थान की दो लोकसभा सीटों- श्रीगंगानगर लोकसभा सीट के अनूपगढ़ और जोधपुर लोकसभा सीट के फलोदी में जनसभा की थी।

श्रीगंगानगर में इस बार पिछले लोकसभा चुनाव की तुलना में मतदान में 8.51 प्रतिशत की गिरावट हुई है। इस सीट पर इस बार 66.25 प्रतिशत मतदान हुआ है, जबकि साल 2019 के लोकसभा चुनावों में मतदान का प्रतिशत 74.77 था। उससे पहले साल 2014 के लोकसभा चुनावों में यह प्रतिशत 73.17 था। इस तरह 2014 की तुलना में 2019 में बढ़ोतरी हुई, लेकिन 2024 में भारी गिरावट हुई।

अगर जोधपुर लोकसभा क्षेत्र की बात करें तो 2024 के लोकसभा चुनाव में 63.89 प्रतिशत मतदान हुआ है। इससे पहले वाले साल 2019 के चुनाव में 68.89 प्रतिशत मतदान हुआ था। इस तरह पिछले चुनाव की तुलना में इस बार के मतदान में 5 प्रतिशत की गिरावट देखी गई है। वहीं, साल 2014 के लोकसभा चुनाव में 62.43 प्रतिशत मतदान हुआ था।

वहीं, पहले ही चरण में प्रियंका गाँधी ने सबसे पहले अपनी माँ सोनिया गाँधी के साथ 6 अप्रैल 2024 को जयपुर में एक सभा को संबोधित किया था। जयपुर के बाद प्रियंका गाँधी ने दौसा और जालोर में जनसभा की। उन्होंने अलवर में कॉन्ग्रेस प्रत्याशी के पक्ष में रोड शो किया। हालाँकि, दूसरे चरण में राहुल गाँधी या प्रियंका गाँधी ने कोई जनसभा नहीं की।

जयपुर लोकसभा में इस बार 63.48 प्रतिशत मतदान हुआ। पिछली बार यह प्रतिशत 68.48 प्रतिशत था। इस तरह पिछले लोकसभा चुनाव की तुलना में इस बार मतदान में 5 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। अगर इस सीट पर साल 2014 के लोकसभा चुनाव की बात करें तो उस दौरान 66.35 प्रतिशत मतदान हुआ था।

भारतीय चुनाव आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक, दौसा लोकसभा में भी इस बार पिछली बार की तुलना में 5.63 प्रतिशत कम मतदान हुआ। दौसा सीट पर इस बार 55.87 प्रतिशत मतदान हुआ है। पिछले लोकसभा चुनाव में यहाँ 65.50 प्रतिशत मतदान हुआ था। साल 2014 के लोकसभा चुनाव में यहाँ 61.08 प्रतिशत मतदान हुआ था।

जालौर लोकसभा सीट पर हालाँकि अपेक्षाकृत कम गिरावट हुई है। जालौर लोकसभा सीट पर इस साल 62.56 प्रतिशत मतदान हुआ है। पिछले लोकसभा चुनाव में यहाँ 65.74 प्रतिशत मतदान हुआ था। इस तरह पिछले लोकसभा चुनाव की तुलना में इस बार 3.18 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। साल 2014 में इस सीट पर 59.62 प्रतिशत मतदान हुआ था।

इसी तरह अलवर लोकसभा सीट पर भी इस बार 6.84 प्रतिशत कम मतदान हुआ है। इस सीट पर इस बार 60.32 प्रतिशत मतदान हुआ है। साल 2019 के लोकसभा चुनावों में यह प्रतिशत 67.17 था। इसी तरह अगर 2014 के लोकसभा चुनावों की बात करें तो इस सीट पर 65.36 प्रतिशत मतदान हुआ था।

बता दें कि राजस्थान के दोनों चरणों के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कुल 9 दौरे कि और 10 लोकसभा सीटों पर चुनाव प्रचार किया। इन 10 सीटों में से 9 सीटों पर इस बार मतदान प्रतिशत में पिछले लोकसभा चुनाव की तुलना में गिरावट दर्ज की गई है। वहीं, केवल एक सीट पर इस बार मतदान प्रतिशत बढ़ा है। जिस सीट पर वोट प्रतिशत बढ़ा है वह बाड़मेर है। यहाँ 0.95 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।

कोविशील्ड पर सुप्रीम कोर्ट पहुँचा वकील, कहा- साइडइफेक्ट की हो जाँच: ICMR के वैज्ञानिक बोले- चिंता ना करें, 10 लाख में सिर्फ 7 ही प्रभावित

एस्ट्राजेनेका निर्मित वैक्सीन कोविशील्ड के साइड इफेक्ट की जाँच के लिए सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका लगाई गई है। यह याचिका कंपनी के यह स्वीकारने के बाद लगाई गई है कि इसकी वैक्सीन के कुछ दुर्लभ साइड इफ़ेक्ट हो सकते हैं। इस रिपोर्ट के बाद वैज्ञानिकों ने लोगों से अपील की है कि वह घबराए नहीं और इसका वैज्ञानिक आधार भी दिया है।

सुप्रीम कोर्ट में लगाई गई याचिका में माँग की गई है कि कोविशील्ड वैक्सीन की जाँच के लिए एक विशेषज्ञ पैनल बनाया जाए। इसमें AIIMS के डॉक्टर शामिल किए जाएँ और इसकी निगरानी सुप्रीम कोर्ट के रिटायर जज करें। इसके अलावा यह भी माँग की गई है कि जिन लोगों को इस वैक्सीन की वजह से कोई बीमारी या मौत हुई, इन सभी मामलों में सरकार की तरफ से मुआवजा दिया जाए। इसके लिए अमेरिका का उदारहण दिया गया। यह याचिका एक वकील विशाल तिवारी ने लगाई है।

याचिका में कहा गया है कि देश में 170 करोड़ लोगों को यह वैक्सीन लगाई गई थी इसका निर्माण लाइसेंस के तहत सीरम इंस्टिट्यूट ने किया था। याचिका में दावा है कि देश में लोगों को यह वैक्सीन लगाए जाने के बाद हेरात अटैक के मामलों में वृद्धि देखी गई है।

वहीं वैक्सीन को लेकर मचे हल्ले के बीच इंडियन काउंसिल फॉर मेडिकल रिसर्च (ICMR) के वैज्ञानिक रमन गंगाखेड़कर ने मीडिया को बताया है कि लोगों को चिंता करने की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने बताया है कि वैक्सीन लेने वाले 10 लाख लोगों में से 7-8 को इसके साइड इफेक्ट का खतरा है। उन्होंने कहा कि पहली डोज लेने के बाद खतरा अधिक होता है, दूसरी दोसे लेने पर यह खतरा कम हो जाता है और तीसरे डोज के साथ यह और कम हो जाता है। उन्होंने यह भी कहा कि अगर कोई साइड इफेक्ट होता भी है तो यह दो-तीन महीने में सामने आते हैं।

उन्होंने यह भी बताया कि TTS साइड इफेक्ट कोई नई बात नहीं है और जब वैक्सीन को मंजूरी दी गई थी तो उसके 6 महीने के भीतर TTS को एक दुर्लभ साइड इफेक्ट के रूप में पहचान लिया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि जहाँ साइड इफेक्ट का खतरा मात्र 10 लाख में से 7-8 लोगों को है तो वहीं इसका फायदा करोड़ों को लोगों को मिला था।

गौरतलब है कि हाल ही में एक रिपोर्ट में बताया गया था कि एस्ट्राजेनेका ने अपनी वैक्सीन के कारण कुछ दुर्लभ मामलों में TTS होने की बात स्वीकारी थी। एस्ट्राजेनेका ने यह बात यूके के हाई कोर्ट में दिए गए कागजों में स्वीकार की थी। एस्ट्राजेनेका ने माना था कि इससे खून के थक्के जमने की समस्या हो सकती है। एस्ट्राजेनेका के विरुद्ध यूके में 51 लोगों ने मामला दायर कर रखा है कि इस कम्पनी की वैक्सीन लेने के बाद उनको नुकसान हुआ। इन्होने एस्ट्राजेनेका से हर्जाने की माँग की है।