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चाँद हसन ने महिला प्रोफेसर पर चाकू से किया हमला, लूटे जेवरात: दिल्ली पुलिस ने दबोचा, पहले से 5 मामलों में है आरोपित

दिल्ली के पूर्वी इलाके शाहदरा में नमिता जैन नाम की महिला प्रोफेसर को चाकू मारकर उनके जेवरात छिन लिए गए। इस मामले में दिल्ली पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज के आधार पर आरोपित की पहचान करते हुए बुधवार (1 मई 2024) को चाँद हसन उर्फ सानू नाम के आरोपित को गिरफ्तार कर लिया। चाँद हसन दिलशाद गार्डन का निवासी है। घायल महिला का वीडियो भी वायरल हो रहा है।

घटना 29 अप्रैल 2024 की बताई जा रही है। जानकारी के मुताबिक, 47 साल की नमिता जैन उत्तर प्रदेश के बागपत स्थित दिगंबर जैन कॉलेज में प्रोफेसर हैं। वह मानसरोवर मार्केट स्थित डीडीए फ्लैट में अपने परिवार के साथ रहती हैं। घटना वाले दिन वह रात करीब 9 बजे अप्सरा बॉर्डर पर घर जाने के लिए ई रिक्शे में बैठीं।

उस ई-रिक्शे में कुछ सवारियाँ पहले से बैठी हुई थीं। ई-रिक्शा जब शाहदरा फ्लाईओवर पर पहुँचा तो उसमें पहले से ही सवार एक शख्स ने रिक्शा रुकवाया। नमिता जैन को लगा को वह रिक्शे से उतरने के लिए रुकवाया है। हालाँकि, आरोपित चाँद हसन रिक्शे से उतरते ही नमिता को अपनी चेन और अंगूठी देने के लिए कहा।

नमिता जैन ने मना किया तो बदमाशों ने चाकू निकाल लिया और उनकी बाजू पर हमला कर दिया। इस हमले में वह घायल हो गईं। इसके बाद आरोपित उनका चेन लूटकर फरार हो गए। नमिता जैन ने बताया कि उनका चेन आर्टिफिशियल था। इसकी जानकारी किसी राहगीर ने पुलिस को दी। सूचना मिलते ही जीटीबी एनक्लेव थाना पुलिस की टीम मौके पर पहुँची।

घायल प्रोफेसर को पुलिस पहले जीटीबी अस्पताल लेकर गई और वहाँ उनका इलाज कराया। इसके बाद नमिता जैन की शिकायत पर पुलिस ने मामला दर्ज करके आरोपित की पहचान करनी शुरू कर दी। सीसीटीवी फुटेज के आधार पर पुलिस ने आरोपित चाँद हसन की पहचान की और उसे सीमापुरी इलाके से गिरफ्तार कर लिया गया।

आरोपित चाँद हसन पर पुलिस ने भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है। उसकी पहचान के लिए पुलिस ने 40 से अधिक सीसीटीवी फुटेज खंगाले। पुलिस का कहना है कि आरोपित चाँद हसन ड्रग्स का लती है। वह लूटपाट, घर में घुसने, डकैती और दूसरों को नुकसान पहुँचाने के पाँच मामलों में पहले से ही आरोपित है।

‘नरेंद्रभाई राष्ट्र को समर्पित हैं’: गुजरात के 45 राजपरिवारों ने प्रधानमंत्री को दिया समर्थन, कहा- लोकशाही के दिव्य सिंहासन के रूप में 400+ कमल की भेंट करें

केंद्रीय मंत्री परषोत्तम रूपाला सहित भाजपा के कई नेताओं द्वारा क्षत्रिय समाज के खिलाफ की गई टिप्पणी के खिलाफ गुजरात सहित देश भर में नाराजगी है। गुजरात में क्षत्रिय समाज के लोग भाजपा के खिलाफ प्रदर्शन भी कर रहे हैं। इस बीच गुरुवार (2 मई 2024) को लगभग 45 राजपरिवारों ने एक बैठक के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना समर्थन देने का एलान किया है।

घोषणा के समय 15-16 राजपरिवार के सदस्य उपस्थित रहे। अन्य लोगों ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर अपने समर्थन का एलान किया है। बैठक के बाद गुजरात के राजकोट के महाराजा मंधाता सिंह जडेजा ठाकोर साहेब जी ने एक बयान देकर राष्ट्रहित प्रथम रखते हुए पीएम मोदी को वोट देने की अपील की है। इस दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी की जमकर तारीफ भी की।

मंधाता सिंह जडेजा ने कहा, “गुजरात और कच्छ के राजवियों, आज रणजीत विलास पैलेस के प्रांगण में… राजकोट राजपरिवार के आंगन में और आदिशक्ति माँ आशापुरा के सान्निध्य में जब हम इकट्ठे हुए हैं, तब हमने एक राष्ट्र प्रथम भावना को समर्थन देते हुए भारतीय धर्म एवं संस्कृति के चेतन के लिए गहनतापूर्वक विचार विमर्श हुआ।”

उन्होंने कहा, “इसमें सभी लोगों की भावना, विचार और दृष्टिकोण से यह प्रस्थापित हुआ है कि आदरणीय श्री नरेंद्र भाई मोदी में जो योग्यता है… अनुपमता है… जो भारत की संस्कृति एवं धर्म के रक्षक के तौर पर एक ऐसी पर्सनालिटी हैं कि जो राष्ट्र को इंटरनेशनल एरिना के ऊपर विश्वगुरु के रूप में रखकर उस दिशा में हम जा सकते हैं… तो ये वही एक विरल व्यक्तित्व हैं, जो इस देश को उस स्तर से चला सकते हैं।”

महाराजा मंधाता सिंह ने कहा, “इसी लिए राजशाही युग के तेजस्वी, त्यागी, पराक्रमी और राष्ट्र को संपूर्ण समर्पित ऐसे क्षत्रिय समाज और राजा-महाराजाओं के जैसे ही हमारे तपस्वी, तेजस्वी, ओजस्वी और राष्ट्र को ही समर्पित गुजरात के व्यक्ति का नाम नरेंद्र दामोदर दास मोदी हैं, जो 145 करोड़ देशवासियों के सर्वांगीण सुखकारी और विकास एवं सुरक्षा के लिए जो कार्यरत हैं… जो लगातार 16 और 18 घंटे तक अविरत कार्य करते हैं।”

पीएम मोदी की तारीफ करते हुए उन्होंने कहा, “वसुधैव कुटुंबकम की वैदिक भावना के साथ सबका साथ सबका विकास और सबका विश्वास लेके जो पुरुषार्थ की पराकाष्ठा वह कर रहे हैं, तब हम सब भारतवासियों का एक नैतिक कर्तव्य बनता है कि इस 2024 के वर्तमान लोकशाही चुनाव में हम सब मिलके हम प्रचंड मतदान के माध्यम से हम दिव्य सिंहासन के रूप में 400+ कमल की भेंट हम अर्पण करके एक बहुमत वाली सरकार आदरणीय नरेंद्र भाई को सौंपें।”

राजस्थान के डीग में मिले महाभारत काल के अवशेष, मौर्यकालीन मातृदेवी का सिर भी मिला: तमिलनाडु में शोधार्थियों को मिला चोल राजा का शिलालेख

राजस्थान के डीग जिले के बहज गाँव में खोदाई के दौरान भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) को महाभारत कालीन, महाजनपद कालीन, मौर्य कालीन, कुषाण कालीन अवशेष मिले हैं। गाँव में पिछले 4 महीने से खोदाई का काम जारी है। वहीं, तमिलनाडु के तिरुवेन्नईलालुर के पास के पास शोधकर्ताओं की एक टीम को चोल राजा आदित्य करिकालन से जुड़ा एक शिलालेख मिला है।

ब्रज क्षेत्र में आने वाले डीग जिले के बहज गाँव में खोदाई के दौरान हड्डियों से बने सुई के आकार के औजार मिले हैं। इन्हें जयपुर पुरातत्व विभाग को भेज दिया गया है। ASI का कहना है कि इस तरह के अवशेष और औजार अब तक भारत में कहीं नहीं मिले हैं। खोदाई में अब तक 2,500 साल से भी ज्यादा पुराने अवशेष मिल चुके हैं हैं।

इन अवशेषों में महाभारत कालीन मिट्टी के बर्तनों के टुकड़े, यज्ञ कुंड, धातु के औजार, सिक्के, अश्विनी कुमारों की मूर्ति, मौर्यकालीन मातृदेवी प्रतिमा का सिर, फलक, अस्थियों से निर्मित उपकरण और मिले हैं। अश्विनी कुमारों का नाम महाभारत काल में द्रस्त्र और नास्त्य था। अश्विनी कुमारों को नकुल और सहदेव का मानस पिता माना जाता है।

बताया जा रहा है कि खुदाई में बहज गाँव से 700 ईसा पूर्व अश्विनी कुमारों के प्रमाण ही नहीं, बल्कि हजारों साल पहले यज्ञ, धार्मिक अनुष्ठान होने के प्रमाण भी मिले हैं। हवन कुंड से निकली मिट्टी को अलग रखा जा रहा है। इसका विशेष महत्व बताया जा रहा है। हवन कुंड से धातु के सिक्के भी मिले हैं। 

इतिहास के जानकारों का मानना है कि डीग को स्कंद पुराण में दीर्घपुर कहा गया है। डीग की मथुरा से 25 मील दूरी है। द्वापर युग से लेकर कुषाण, मौर्य, गुप्त, मुगल काल तक के चिह्न इस क्षेत्र में मिल चुके हैं। यहाँ कुषाण नरेश हुविष्क एवं वासुदेव के भी सिक्के यह से मिले हैं।

जयपुर मंडल के अधीक्षण पुरातत्वविद डॉक्टर विनय गुप्ता ने बताया कि अब ब्रज क्षेत्र में लगभग 50 साल के लम्बे अंतराल के बाद बड़े स्तर पर खोदाई का कार्य हुआ है। इससे पहले हुई खोदाई में इस तरह के प्रमाण नहीं मिले थे। उन्होंने यह भी कहा कि खोदाई का काम अभी कुछ दिन और जारी रहेगा। इस दौरान अन्य अवशेष मिलने की भी संभावना है।

वहीं, तमिलनाडु के तिरुवेन्नईलालुर में हिंदू धार्मिक और धर्मार्थ बंदोबस्ती विभाग के शोधकर्ताओं ने एक शिलालेख की खोज की है। यह शिलालेख चोल राजा आदित्य करिकालन के राज्य पर प्रकाश डालेगा।
तिरुवेन्नईलालुर के पास इमप्पुर में हजारों साल पुराने वेदपुरीसावरर मंदिर का निरीक्षण का काम चल रहा है।

टीम के सदस्य रमेश ने कहा, “हमें सुंदर चोल के बेटे और राजा राजा चोल के छोटे भाई आदित्य करिकालन के शासन काल का एक शिलालेख मिला है। इसके पहले चेपेडु (ताँबा शिलालेख) तिरुवलंगाडु, चेन्नई और एसलाम में पाया गया था। जर्मनी के एक संग्रहालय में रखे इस शिलालेख में पांडियन राजा वीरपांडियन को हराने और तंजौर के महल में उसका सिर रखने के उनके कृत्य का उल्लेख है।”

विल्लुपुरम क्षेत्रों में उनके शिलालेखों की उपस्थिति के बारे में बताते हुए उन्होंने आगे कहा, “सुंदर चोल ने थोंडाईमंडलम और थिरुमुनैपडी क्षेत्रों को करिकालन के शासन को सौंपा। हमने पहले पेरंगियूर और तिरुमुंडीश्वरम में शिलालेख खोजे हैं और अब यह हालिया खोज हमारी समझ को बढ़ाने में मदद करेगी।”

एमाप्पुर में पाए गए नए शिलालेख के बारे में बताते हुए रमेश ने कहा, “यह स्वस्ति श्री वीरपांडियन थलाई कोंडा कोप्पारा केसरी से शुरू होता है और 960 ईस्वी का है। इसमें इस क्षेत्र का उल्लेख एमाप्पेरुर नट्टू एमाप्पेरुर देश के थिरुमुनैपडी के रूप में वर्णित है, जो इसका मुख्यालय था। समय के साथ यह एमाप्पुर में विकसित हुआ।”

उन्होंने आगे कह, “एक चरवाहे ने मंदिर में तिरुवलंदुरई अज़वार के लिए नंदा विलाक्कु (एक तेल का दीपक) को बनाए रखने के लिए 96 बकरियों का योगदान दिया था, जो सूर्य और चंद्रमा के अस्तित्व तक चलने वाली परंपरा को दर्शाता है। इन बकरियों को मंदिर के ट्रस्टी पान मेगेश्वर को सौंप दिया गया था।”

हैदर से हरि नारायण बनने पर इस्लामिक कट्टरपंथी देने लगे जान से मारने की धमकी, घर पर किया पथराव: इंदौर में पड़ोसी जीने नहीं दे रहे, सुरक्षा की गुहार

मध्य प्रदेश के इंदौर में सनातन धर्म से प्रभावित होकर हैदर शेख ने इस्लाम त्याग दिया एवं पूरे विधि-विधान ने कानूनी रूप से हिंदू धर्म अपना लिया और हैदर शेख से हरि नारायण बन गए। लेकिन अब उन्हें उनके कट्टरपंथी मुस्लिम पड़ोसी ही जीने नहीं दे रहे हैं। उन्हें जान से मारने की धमकी दी जा रही है। यही नहीं, उनके घर पर पथराव भी किया गया। उन्होंने पुलिस में सुरक्षा से गुहार लगाई है। हरि नारायण का कहना है कि वो अपने घर भी नहीं जा रहे हैं।

बता दें कि इंदौर जिले के खजराना मंदिर में 27 अप्रैल 2024 को 8 मुस्लिम व्यक्तियों ने हिंदू धर्म अपना लिया। अब धर्म परिवर्तन कर हैदर शेख से हरि नारायण बने एक शख्स ने आरोप लगाया है कि कुछ अज्ञात बदमाशों ने उनके घर पर हमला किया है। इस हमले के बाद हरि नायायण ने शिकायती आवेदन भी दिया है। हरि नारायण खजराना क्षेत्र में रहते हैं। हरि नारायाण ने अब इस मामले में थाने में शिकायत दी है। इस शिकायत में हरि नारायण ने कहा है कि धर्म परिवर्तन करने की वजह से मुस्लिम समुदाय के कुछ लोगों ने उनको धमकी दी गई और उनके घर पर पत्थर से हमला किया गया।

अपनी शिकायत में हरि नारायण ने कहा है कि मुस्लिम समुदाय के लोगों ने उन्हें जान से मारने की धमकी दी है। धमकी मिलने की वजह से उन्हें कही आने-जाने में काफी दिक्कत हो रही है। हरि नारायण ने अपने आवेदन में कहा है कि उसने 27 अप्रैल को खजराना मंदिर परिसर में धर्म परिवर्तन किया था और वो हैदर से हरि नारायण बन गए थे। जिसके बाद से लगातार उन्हें मुस्लिम समुदाय के लोगों द्वारा जान से मारने की धमकी  दी जा रही है।

उसने बताया है कि इस घटना को लेकर उसने इंदौर कलेक्टर को भी 29 अप्रैल को जानकारी दी थी। लेकिन इसके बाद उनके घर पर कुछ अज्ञात व्यक्तियों द्वारा पथराव किया गया और उन्हें मारने की कोशिश भी की गई। घर पर पत्थर फेंकने के बाद कई शीशे भी टूट गए।

TV पर प्रोपेगेंडा लेकर बैठे थे राजदीप सरदेसाई, पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त ने निकाल दी हवा: कहा- ये आपकी कल्पना, विपक्ष की मदद की कोशिश बंद करिए

राजदीप सरदेसाई की 1 मई को ऑन टीवी फिर फजीहत हुई। इस बार उन्हें पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एन गोपालस्वामी ने लताड़ा। सरदेसाई, पूर्व चुनाव आयुक्त को ये कहकर घेरने की कोशिश कर रहे थे कि दो चरण के चुनाव होने के बावजूद चुनाव आयोग ने फेज-1 और फेज-2 का डेटा जारी करने में देरी की।

सरदेसाई ने ये सवाल विपक्ष पार्टियों के कंधे पर रखकर पूछा था ताकि इसे कुछ सनसनीखेज बनाकर पेश कर सकें। उन्होंने कहा वोट शेयर 11 दिन बाद प्रकाशित होना चिंताजनक है, विपक्षी दल इसे लेकर सवाल कर रहे हैं। हालाँकि पूर्व सीईसी ने मुस्कुराते हुए सरदेसाई को समझाया कि अगर सरदेसाई ने डेटा को चेक नहीं किया है इसका मतलब ये बिलकुल भी नहीं है कि ईसीआई ने ही देरी कर दी है।

उन्होंने सरदेसाई को साफ कहा, “ग्यारह और चार दिन के बाद डेटा प्रकाशित हुआ… ये सिर्फ आपकी कल्पना है। दूसरे दिन ही जानकारी मिल जाती है। यह ईसीआई की वेबसाइट पर उपलब्ध भी है। हर कोई इसे देख सकते है। अगर आप इसे देखना नहीं चाहते तो कोई बात बात नहीं। वो लोग डेट जारी करने के बाद भी बदनाम हो रहे हैं।”

सरदेसाई को एन गोपालस्वामी ने टीवी पर उनकी बकवास बातें बंद करने की सलाह दी और सुझाव दिया कि वो इस तरह की हरकत करके विपक्ष की मदद करने की कोशिश करना बंद कर दें।

इतनी फजीहत होने के बावजूद राजदीप सरदेसाई शांत नहीं हुए। इसपर पूर्व सीईसी ने तंग होकर उन्हें समझाया कि मतदान समाप्त होने के बाद ईसीआई अधिकारी वास्तव में काम कैसे करते हैं।

उन्होंने कहा, “हर पोलिंग स्टेशन पर मतदान खत्म होने के बाद फॉर्म 17सी भरा जा रहा है जिसमें मतदान का आँकड़ा लिखते हैं। प्रतियों पर पोलिंग एजेंट के हस्ताक्षर किए जाते हैं, जो कि सभी के पास होती है। उसी रात तक अनुमानित आँकड़े सामने आ जाते हैं। इसके बाद जब ये सभी 17सी फॉर्म रिटर्निंग के पास जाते हैं तो वह इसे इकट्ठा कर लेते हैं तो सारा डेटा वहाँ रख दिया जाता है।”

गोपालस्वामी ने सारी बात सरदेसाई को समझाते हुए दावा किया कि इन कामों में कोई लापरवाही नहीं होती है, लेकिन सरदेसाई अपनी धूर्तता का प्रमाण देते हुए इस बात पर अड़े रहे कि सीईसी ने डेटा पब्लिश करने 11 दिन लेट किया। इतने के बावजूद संयम के साथ एन गोपालस्वामी उन्हें समझाते रहे कि अंतिम आधिकारिक डेटा साइट पर वोटिंग फेज के तीसरे दिन आ जाता है, जो 30 अप्रैल को आया वो संकलन मात्र था।

उन्होंने कहा कि ये बेहद दुर्भाग्यपूर्ण बात है कि एक तो चुनाव आयोग अतिरिक्त जानकारियाँ दे रहा है ऊपर से विपक्षी दल और उनके समर्थन में मीडिया उसमें भी गलतियाँ निकालने पर तुली हैं। उन्होंने बताया कि अगर किसी पर डेटा निकालने का समय नहीं है या देखने का समय नहीं है तो चुनाव आयोग सिर्फ ऐसे डेटा जारी करके सबकी मदद करने का प्रयास कर रहा है, ताकि अखबार या प्रेस सीधे उस हैंडआउट का इस्तेमाल कर सकें। बाकी डेटा पहले से उपलब्ध हैं।

राजदीप सरदेसाई इसके बाद भी नहीं मानें। उन्होंने ये साबित करने की कोशिश की कि 30 अप्रैल को ईसीआई ने डेट रिवाइज किया है जिसे 2-3 दिन में होना चाहिए। इसके बाद गोपालस्वामी ने उन्हें फटकारते गुए इस पर कड़ी आपत्ति जताई और कहा कि डेटा तीसरे दिन की उपलब्ध था और उसमें कोई बदलाव नहीं हुआ।

अजीब बात ये है कि इतनी फजीहत होने के बाद भी राजदीप सरदेसाई शांत नहीं हुए और पूछते रहे कि क्या पूर्व सीईसी इन बातों को विपक्ष को समझा सकते हैं। इस पर भी उन्हें पूर्व सीईसी से फटकार लगी। एन गोपालस्वामी ने कहा कि ये कहा कि वो ये बातें विपक्ष को क्यों समझाएँगे, उनका काम है ये समझाना कि डेटा कैसे कलेक्ट होता है और पब्लिश होता है इसके अलावा वो कुछ नहीं करेंगे।

विपक्ष ने फैलाया भ्रम

बता दें कि ये सारा मामला विपक्ष द्वारा उठाया गया है। कॉन्ग्रेस नेता जयराम रमेश और सीएम ममता बनर्जी समेत अन्य विपक्षी नेताओं ने दावा किया था कि डेटा आने में देर हुई। हालाँकि, ईसीआई ने इन दावों को कारिज किया। उन्होंने विपक्ष और मीडिया द्वारा पैलाए जा रहे झूठ पर बताया कि डेटा समय पर रिलीज हुए हैं।

राजदीप सरदेसाई की फजीहत होने की हिस्ट्री

वहीं राजदीप सरदेसाई की बात करें तो उनकी समय-समय पर फजीहत होती रही है। 2017 में मुकेश अंबानी ने उन्हें इंडिया कॉन्क्लेव पर कह दिया था कि वो उसे सीरियसली नहीं लेते। दिसंबर 2021 में सुनील गावस्कर ने उन्हें कह दिया था कि उन्हें मतलब नहीं है कि सरदेसाई उनसे सहमत हो या नहीं। जनवरी 2022 में महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम फडणवीस का पद बदले जाने पर सवाल उठाया था, तब उन्होंने सरदेसाई को कह दिया था कि पहले वो भी इंडिया टुडे में एडिटर-इन-चीफ थे, अब कंसल्टिंग एंटिर हैं।

बृजभूषण शरण सिंह का टिकट BJP ने काटा, कैसरगंज से बेटे करण भूषण लड़ेगे: रायबरेली के मैदान में दिनेश प्रताप सिंह को उतारा

भाजपा ने उत्तर प्रदेश की कैसरगंज और रायबरेली सीटों से अपने उम्मीदवार घोषित कर दिए। कैसरगंज से वर्तमान सांसद बृजभूषण शरण सिंह का टिकट काट दिया गया। उनकी जगह उनके बेटे करण भूषण सिंह को टिकट दिया गया। रायबरेली से उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री दिनेश प्रताप सिंह को टिकट दिया गया है। दोनों सीटों पर नामांकन की अंतिम तारीख शुक्रवार (3 मई, 2024) को है।

भाजपा ने गुरुवार (2 मई, 2024) को तमाम अटकलों पर लगाम लगाते हुए प्रत्याशियों के नामों की 17वीं सूची जारी की। इसमें केवल उत्तर प्रदेश की ही दोनों बहुप्रतीक्षित सीटों के उम्मीदवार बताए गए। इन सीटों पर अभी विपक्ष ने भी उम्मीदवार घोषित नहीं किए हैं।

कैसरगंज से वर्तमान सांसद बृजभूषण शरण सिंह की जगह उनके बेटे करण भूषण सिंह को टिकट दिया गया जो कि वर्तमान में उत्तर प्रदेश कुश्ती संघ के अध्यक्ष हैं। वह बृजभूषण शरण सिंह के छोटे बेटे हैं। उनके बड़े भाई प्रतीक भूषण सिंह गोंडा से विधायक हैं। करण भूषण सिंह के टिकट के कयास पहले से लगाए जा रहे थे। बृजभूषण शरण सिंह पहलवानों से विवाद के चलते चर्चाओं में थे, उसी की वजह से भाजपा ने उनका टिकट काटा है।

करण भूषण के टिकट की सुगबुगाहट शुक्रवार सुबह से ही हो गई थी। उनका अपने पिता का आशीर्वाद लेते हुए एक वीडियो भी सामने आया था। करण भूषण सिंह शुक्रवार (3 मई, 2024) को अपना नामांकन समर्थकों के साथ गोंडा कलेक्ट्रेट में दाखिल करेंगे। इससे पहले उनके भाई प्रतीक के चुनाव लड़ने की संभावनाएँ जताई जा रही थीं।

उधर हाई प्रोफाइल सीट रायबरेली से भाजपा ने अपने पुराने सिपाही और उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री दिनेश प्रताप सिंह पर भरोसा दिखाया है। दिनेश प्रताप सिंह इस इलाके के बड़े नेता माने जाते हैं। वह 2019 में भी रायबरेली सीट से लोकसभा चुनाव लडे थे लेकिन कॉन्ग्रेस नेता सोनिया गाँधी से हार गए थे।

रायबरेली सीट वर्तमान में खाली है और इस पर इस बार गाँधी परिवार का कोई सदस्य नहीं लड़ रहा है। सोनिया गाँधी कुछ समय पहले ही यहाँ की सदस्यता से त्यागपत्र देकर राजस्थान से राज्यसभा जा चुकी हैं। अभी तक इस सीट से प्रियंका गाँधी के चुनाव लड़ने के चर्चे बने हुए हैं। हालाँकि, अभी तक कॉन्ग्रेस ने इस सीट से अपने उम्मीदवार की घोषणा नहीं की है।

चीनी पोपट ‘न्यूजक्लिक’ का फाउंडर प्रबीर पुरकायस्थ भारत में लोकतंत्र के खात्मे के बुन रहा था सपने, हिज्बुल्ला-मुस्लिम ब्रदरहुड के ‘जिहाद’ में देख रहा था रास्ता

दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल ने न्यूजक्लिक के फाउंडर-एडिटर प्रबीर पुरकायस्थ के खिलाफ यूएपीए मामले में चार्जशीट दाखिल की है। प्रबीर पुरकायस्थ को न्यूजक्लिक के ठिकानों पर छापेमारी के बाद 3 अक्टूबर 2023 को न्यूजक्लिक के एचआर हेड अमित चक्रवर्ती के साथ गिरफ्तार किया गया था। न्यूजक्लिक, प्रबीर पुरकायस्थ और अमित चक्रवर्ती पर अमेरिका के रास्ते चीन से पैसा लेकर भारत विरोधी गतिविधियों में शामिल रहने का आरोप है। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने न्यूजक्लिक को भी आरोपित बनाया है।

न्यूजक्लिक-चीनी फंडिंग मामले में एफआईआर की खास बातें

प्रबीर पुरकायस्थ के खिलाफ दर्ज एफआईआर में दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने कई अहम दावे किए थे, जिसमें आतंकियों, नक्सलियों और दिल्ली में हिंदू-विरोधी दंगों के आरोपितों को फंडिंग देना, अपने कर्मचारियों का उपयोग पैसे पहुँचाने में करना, कथित किसान आंदोलन की फंडिंग, चीनी मोबाइल कंपनियों वीवो और श्याओमी जैसी कंपनियों के लिए कानूनी शील्ड तैयार करना, कोरोना से निपटने के लिए भारत सरकार के प्रयासों के बारे में दुष्प्रचार करना, भारतीय वैक्सीन के खिलाफ लोगों में गलत जानकारी फैलाना, अरुणाचल प्रदेश और कश्मीर को भारत का हिस्सा नहीं बताना जैसी अहम बातें शामिल हैं।

चार्जशीट के मुताबिक, चीन के प्रोपेगेंडा को बढ़ाने के लिए चीनी फंडिंग इस न्यूजक्लिक को मिला। ये फंडिंग पकड़ी न जाए, इसके लिए न्यूजक्लिक को प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के रूप में बदल दिया गया। यही नहीं, चीनी कम्युनिष्ट पार्टी से जुड़े नेविल रॉय सिंघम के माध्यम से करीब 91 करोड़ रुपए जो आए, उन्हें नक्सलियों तक पहुँचाया गया, ताकि भारत में हिंसक कार्रवाईयों को बढ़ावा दिया जा सके। इस मामले में गिरफ्तार किए गए न्यूजक्लिक के एचआर हेड अमित चक्रवर्ती बाद में सरकारी गवाह बन गए।

एफआईआर में दिल्ली पुलिस ने ‘सीक्रेट इनपुट’ की भी बात कही है। रिमांड के लिए कोर्ट में दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने बताया है कि ‘विदेशी फंडिंग की आड़ में 115 करोड़’ से अधिक की धनराशि न्यूजक्लिक को मिली, जिसके लिए प्रबीर पुरकायस्थ और विदेशी साजिशकर्ता एक-दूसरे के साथ सीधे संपर्क में थे। यही नहीं, प्रबीर पुरकायस्थ ने पीपल्स डिस्पैच पोर्टल का इस्तेमाल करते हुए पेड न्यूज छापने के बदले में करोड़ो रुपए दिए, ताकि भारत के खिलाफ माहौल बनाया जा सके। इन सारी बातों का उल्लेख एफआईआर, रिमांड रिक्वेस्ट में किया गया है।

800 पन्नों की चार्जशीट में चौकाने वाला खुलासा

रिमांड रिक्वेस्ट, एफआईआर से भी ज्यादा अहम दिल्ली पुलिस द्वारा फाइल की गई चार्जशीट है, जो 8000 पन्नों की है। इस चार्जशीट के कुछ अहम पन्ने ऑपइंडिया ने देखे हैं, जिसमें प्रबीर पुरकायस्थ, नेविल रॉय सिंघम और अन्य आरोपितों की सारी साजिशों पर से पर्दा उठता है। यही नहीं, इस साजिश की शुरुआत जब से हुई है, उस तथ्य को भी चार्जशीट के माध्यम से कोर्ट में रखा गया है।

चार्जशीट के मुताबिक, 29 जून 2016 से इस पूरे खेल की आधिकारिक शुरुआत होती है, जिसमें प्रबीर पुरकायस्थ ने नेविल रॉय सिंघम को एक मेल भेजा था। इस मेल को ईडी ने स्पेशल सेल के साथ शेयर किया है। इस ईमेल का विषय “भारत में सोशल मीडिया ग्रुप” था। इस ईमेल में मुख्य रूप से 7 बिंदुओं पर पर्चा की गई है।

इस ईमेल में प्रबीर ने नेविल को लिखा कि उसका एक मीडिया प्रोजेक्ट ‘ग्रुप’ सिर्फ टूल्स पर फोकस करे, जो डाटा इकट्ठा करे। उसने सुझाव दिया कि सोशल मीडिया कैंपेन के लिए एक डेडिकेटेड टीम होनी चाहिए। सोशल मीडिया कैंपेन का बजट 60,000 डॉलर से 80,000 डॉलर के बीच हो सकता है।

चार्जशीट में कहा गया है, ये ईमेल बेहद प्रासंगिक हो जाता है, क्योंकि इसके तुरंत बाद 17 सितंबर 2016 को न्यूजक्लिक का एक लेख ईमेल पर भेजा जाता है, जिसमें खास माओवादी शैली में जनांदोलन तैयार करने की बात कही गई थी। इस लेख में न्यूज़क्लिक ने लिखा कि वामपंथियों को ऐसे ‘संघर्षों’ में सबसे आगे रहने की ज़रूरत है।

इस सिर्फ 2 दिन बाद 19 सितंबर 2019 को एक और ईमेल भेजा गया, जिससे ये साफ हो जाता है कि भारत में लोकतंत्र को समाप्त करने के लिए क्या साजिशें रची जा रही थी। ये ईमेल नेविल ने प्रबीर पुरकायस्थ को भेजा था। इस ईमेल में नेविल ने भारत सहित विश्व स्तर पर वामपंथियों के सामने बढ़ती चुनौतियों का मुकाबला करने के लिए 7 विषयों पर चर्चा की।

1- कम्युनिस्ट दृष्टिकोण: नेविल का कहना है कि उन्हें समाज के लिए एक वैकल्पिक दृष्टिकोण के साथ आने की जरूरत है क्योंकि कम्युनिस्ट दृष्टिकोण अब “प्रोजेक्ट करना आसान” नहीं है। नेविल पूछता है कि जन आंदोलनों के घटते समर्थन का सामना कैसे किया जाए और कम्युनिस्टों-वामपंथियों के खिलाफ प्रचार का मुकाबला कैसे कर सकते हैं।

2- नए श्रमिक वर्ग की पहचान: उसने दुख जताया है कि यूनियनें खत्म हो रही हैं, जिन्हें ‘कम्युनिस्टों का भंडार’ माना जाता था। वो ये पूछता है कि कैसे “श्रमिक वर्ग के भीतर की टूट” से निपटें, क्योंकि मशीनीकरण के कारण अब हजारों श्रमिक एक साथ कारखानों में काम नहीं करते। ‘हम एक नए प्रकार के ग्रामीण संकट के संदर्भ में ग्रामीण सर्वहारा वर्ग को कैसे संगठित कर सकते हैं’ जिनमें पर्यावरणीय विनाश को लेकर जागरुकता भी हो।

3- नव-उदारवादी युग के बाद उभरते रणनीतिक मुद्दे: इसमें नेविल डीएमसी (डिजिटल मोनोपोली कैपिटल) के बारे में बात करता है। इसमें वो लिखता है कि Google, Apple, Amazon, Facebook और Microsoft जैसी कंपनियाँ एआई का उपयोग करके इंसानी निर्भरता को कम कर रही हैं, जिससे कम्युनिज्म को नुकसान पहुँच रहा है। वो चिंता जताता है कि कैसे दुनिया में पूँजी (पैसों) का प्रभाव बढ़ता है, जिसकी वजह से अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर श्रमिक वर्ग की एकजुटता में कमी आई है। वो एर्दोगन, पीएम मोदी, ट्रम्प और ट्रेमर की तुलना करते हुए पूछता है कि कैसे फाँसीवाद के प्रति बढ़ते समर्थन को करने करने की रणनीति बनाई जाए।

4- इसी तर्ज पर नेविल आगे बात को बढ़ाता है कि कैसे नए राजनीतिक मुद्दों को पहचान की जाए, क्योंकि पूरी दुनिया में पार्टी (कम्युनिष्टों का समर्थन) की पकड़ कमजोर होती जा रही है। ऐसे में हम किस तरह से लोगों को मूवमेंट (वामपंथ) से जोड़ा जाए।

5- नेविल लिखता है, “व्यावहारिक सवाल: कैसे हम अलगाववादियों या अन्य जातीय-पहचान संघर्षों के साथ खुद को जोड़ सकते हैं?” क्योंकि उनकी लड़ाई अलग है। पहचान की लड़ाई है। हम उन्हें कैसे अपने साथ जोड़कर आगे बढ़ सकते है। कैसे हम आंदोलन की मुख्यधारा में लिंग(पुरुष-महिला) और पहचान का मुद्दा आगे बढ़ा सकते हैं। बर्सिलोना, पोर्ट एलिजाबेथ और केरल में स्थानीय सरकारों को चलाते हुए असली रणनीति (कम्युनिष्टों की) क्या है? कैसे हम अपनी राजनीतिक विचारधारा को बढ़ाने के लिए शिक्षा का सहारा ले सकते हैं, खासकर स्कूलों और काडरों का।

6- दिलचस्प बात यह है कि इसी मुद्दे के विस्तार में नेविल वामपंथियों को हिज़्बुल्लाह और मुस्लिम ब्रदरहुड से सबक लेने की बात करता है। वो लिखता है “दुनिया भर में लोकप्रिय धर्मों के बढ़ते “सामूहिककरण” से वामपंथियों को क्या सीख मिलनी चाहिए? हिज़बुल्लाह और मुस्लिम ब्रदरहुड ने डॉक्टरों, चिकित्सा देखभाल और सेवाओं को आयोजन और सेवाएं प्रदान करने के केंद्रीय तत्वों के रूप में उपयोग किया है।” वह आगे पूछता है, “हम प्रिंट और टीवी के खात्मे के दौर में शक्तिशाली पक्षपातपूर्ण (एकतरफा) लोकप्रिय मीडिया केंद्रों का निर्माण कैसे करें और अपने संघर्षों में सोशल मीडिया का उपयोग कैसे करें?”

7-इस मुद्दे पर आखिर में वो ‘इंटरनेशनलाइजेशन’ के बारे में बात करता है और सवाल करता है कि वो लोग कैसे दुनिया भर के लोकप्रिय आंदोलनों को स्पष्ट रूप से वामपंथी वैचारिक ताकतों के साथ जोड़ सकते हैं। वो एक अंतरराष्ट्रीय रणनीति की भी बात करता है।

इन 7 बिंदुओं पर प्रबीर पुरकायस्थ और नेविल रॉय सिंघम की बातचीत बताती है कि न्यूजक्लिक, उसके फाउंडर और इस पूरे नेक्सन का नेविल रॉय के साथ क्या रिश्ता है और कैसे वो भारत की संप्रभुता और लोकतंत्र को नुकसान पहुँचाने की दिशा में काम कर रहे थे।

नेविल रॉय सिंघम और प्रबीर पुरकायस्थ की बातचीत से जो 7 अहम पहलू निकलकर सामने आते हैं, उनके बारे में भी जान लेते हैं-

1- चार्जशीट के हिसाब से देखें तो ईमेल में सबसे अहम बात जो सामने आ रही है, वो है भारत के लोकतंत्र को बदलना और सिंगल पार्टी सिस्टम जैसे चीन में अभी की सरकार है, उस तर्ज पर देश को हाँकना।

2- अंतर्राष्ट्रीय श्रमिक वर्ग की एकजुटता में गिरावट के बारे में बात करते हुए, नेविल ने पीएम मोदी को फासीवादी करार देकर उन्हें नीचा दिखाने की भी बात की। यह किसी ऐसे व्यक्ति द्वारा भारतीय लोकतांत्रिक प्रक्रिया को नष्ट करने की ओर इशारा करेगा जो चीन द्वारा वित्त पोषित साबित होता है और जो चीनी कथा को आगे बढ़ाने के लिए भारत के भीतर तत्वों को वित्त पोषित कर रहा है। यदि नेविल रॉय सिंघम पीएम मोदी को राज्य के प्रमुख के रूप में विस्थापित करने की बात कर रहे हैं, तो यह स्पष्ट है कि चीनी राज्य का एजेंडा वह परबीर पुरकायस्थ जैसे तत्वों के साथ बीज बोने का प्रयास कर रहा है।

3-वह फिर से जनता को अपने आंदोलनों में शामिल होने के लिए आकर्षित करने की बात करते हैं। यह देखते हुए कि उन्होंने पहले माओवादी शैली के आंदोलनों के बारे में कैसे बात की है, यह स्पष्ट हो जाता है कि वह हिंसक आंदोलनों का समर्थन करते हैं।

4-नेविल विशेष रूप से भारत में अलगाववादी आंदोलनों के साथ सहयोग के बारे में बात करते हैं। वह पहचान आंदोलनों के साथ सहयोग की भी बात करते हैं। यह स्पष्ट रूप से न्यूज़क्लिक और उसके पूरे गठजोड़ की ओर इशारा करता है जो आतंकवाद को बढ़ावा दे रहा है और साथ ही, चीन के इशारे पर भारत में मुस्लिमों को ख़तरे में बताया जा रहा है।

5-इसके बाद नेविल ने प्रबीर पुरकायस्थ और अन्य लोगों को हिज़्बुल्लाह और मुस्लिम ब्रदरहुड से सबक लेने के लिए कहकर और भी खतरनाक कहानी गढ़ी।

6-वह आगे “शक्तिशाली पक्षपातपूर्ण लोकप्रिय मीडिया” के निर्माण और भारत को तोड़ने की अपनी रणनीति को लागू करने के लिए सोशल मीडिया के उपयोग के बारे में बात कर रहे हैं।

7-अंत में वो दोनों वामपंथ को वैश्विक लोकप्रिय आंदोलनों के साथ जोड़ने की बात करते हैं। इसे ऐसे देख सकते हैं कि ब्लैक लाइव्स मैटर या इंतिफादा से भारत में भारतीय मुसलमानों से कैसे जुड़े थे।

ईमेल से प्राप्त उपरोक्ट जानकारियों को न्यूज़क्लिक केस में साजिश का शुरुआती प्वॉइंट मान सकते हैं। इसके हिसाब से लेफ्ट इकोसिस्टम का एकमात्र उद्देश्य भारत में लोकतंत्र को खत्म करके किसी भी तरह से चीनी स्टाइल वाली राजनीतिक व्यवस्था (एक पार्टी कम्युनिस्ट सिस्टम) को स्थापित करना है।

(यह लेख मूल रूप से अंग्रेजी भाषा में नुपूर जे शर्मा द्वारा लिखा गया है। मूल लेख पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।)

अमित शाह का डीपफेक वीडियो चलाया, फैलाई आरक्षण खत्म करने की अफवाह, पुलिस ने कॉन्ग्रेस आईटी सेल के पाँच लोगों को पकड़ा

गृह मंत्री अमित शाह का आरक्षण सम्बंधित फर्जी वीडियो चलाने चलाने के मामले में पुलिस ने हैदराबाद से पाँच लोगों को पकड़ा है। यह सभी कॉन्ग्रेस नेता और सोशल मीडिया टीम के सदस्य हैं। इस मामले में इससे पहले भी देश के अलग-अलग हिस्सों से गिरफ्तारी हो चुकी हैं।

जानकारी के अनुसार, यह गिरफ्तारियाँ भाजपा नेता की शिकायत के आधार पर दर्ज की गई हैं। इस शिकायत में कहा गया था कि अमित शाह का एडिटेड वीडियो चला कर आरक्षण के संबंध में गलत सूचना फैलाई गई। जिन लोगों को गिरफ्तार किया गया है, उनके नाम आसमा, गीता, नवीन, शिवा एवं एक अन्य हैं।

इस मामले में देश के अलग-अलग इलाकों से यह फर्जी वीडियो फैलाने के मामले में गिरफ्तारियाँ हुई थीं। अहमदाबाद से दो व्यक्तियों को गिरफ्तार किया गया था। अहमदाबाद साइबर क्राइम टीम ने जिन्हें गिरफ्तार किया था, उनके नाम सतीष वरसोला और आर बी बारिया हैं। सतीश वनसोला कॉन्ग्रेस विधायक जिग्नेश मेवानी का ऑफिस संभालता है।

उसे कॉन्ग्रेस विधायक जिग्नेश मेवानी का पीए भी बताया जा रहा है। वहीं, आर बी बारिया आम आदमी पार्टी का दाहोद जिले का जिलाध्यक्ष है। दोनों ने गृहमंत्री अमित शाह के एडिटेड वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल किए थे।

इस मामले में असम के कॉन्ग्रेसी कार्यकर्ता ऋतम सिंह को गिरफ्तार किया जा चुका है। वो असम में कॉन्ग्रेस का सोशल मीडिया देखता है। इस गिरफ्तारी के बारे में खुद असम सीएम हिमंता बिस्वा सरमा ने अपने एक्स पर जानकारी देते हुए बताया था कि उसे गृह मंत्री का फेक वीडियो शेयर करने के मामले में पकड़ा गया है।

इस मामले में तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी को भी दिल्ली पुलिस ने समन किया था। हालाँकि, उनकी जगह उनके वकील ने दिल्ली पुलिस को बताया कि मुख्यमंत्री का इस मामले से कोई लेना देना नहीं है। उनके वकील ने बताया था कि मुख्यमंत्री का वीडीयो शेयर करने से कोई लेना देना नहीं है। झारखंड के कॉन्ग्रेस अध्यक्ष को भी इस मामले में समन किया गया था।

मिलिए पत्रकार हरमन गोमेज से, हिंदुओं को कहता है- भ@वे, गां$… महिला ब्यूरोचीफ को बोलता है- मा@$द: माधवी लता को बताता है ‘ट्रांसजेंडर

भारत में हिन्दुओं से घृणा करने वाले पत्रकारों और बुद्धिजीवियों की कमी नहीं है। इनकी हिन्दू घृणा समय-समय पर सामने आते रहती है। इनमें से विदेश में रहने वाले पत्रकार और कर्थित बुद्धिजीवी हिन्दुओं के विरुद्ध सबसे अधिक जहर फैलाते हैं।

गोवा का निवासी एक ऐसा ही ईसाई पत्रकार इन दिनों हिन्दुओं को ‘गौमांस’ और ‘सती’ जैसे शब्दों का उपयोग करके गालियाँ दे रहा है। वह बड़े गर्व से बताता है कि उसने अपनी महिला ब्यूरो चीफ को ‘मा@रचो*द गाली दी थी। वह मात्र हिन्दू विरोधी ही नहीं बल्कि महिला विरोधी भी है। वह हैदराबाद से भाजपा प्रत्याशी को ‘ट्रांसजेंडर’ बताता है।

इस हिन्दू और महिला विरोधी पत्रकार का नाम हरमन गोमेज है। वह भारत के बड़े पत्रकारिता संस्थानों में काम कर चुका है। पिछले कुछ दिनों से वह मोदी सरकार की आलोचना के चक्कर में हिन्दुओं, भारतीयों और महिलाओं को गालियाँ दे रहा है।

वह हिन्दुओं को खुले तौर पर गालियाँ भी दे रहा है। वह भारत में रहने वाले हिन्दुओं के प्रति ही नहीं बल्कि विदेशों में रहने वाले हिन्दुओं के प्रति भी घृणा रखता है। उसका कहना है कि विदेशों में रहने वाले हिन्दू अपनी बीवियों को विदेशी नागरिकता के लिए दूसरों को सौंपते हैं।

हरमन गोमेज कौन है?

हरमन गोमेज गोवा का निवासी एक ईसाई पत्रकार है। उसके ट्विटर से पता चलता है कि वह अब पुर्तगाल की नागरिकता ले चुका है। पुर्तगाल के पासपोर्ट के आधार पर वह वर्तमान में इंग्लैंड की राजधानी लंदन में रह रहा है वहीं एक संस्थान में काम करता है। उसके लिंक्डइन प्रोफाइल से पता चलता है कि वह देश के शीर्ष अंग्रेजी समाचार संस्थानों में काम कर चुका है। उसकी प्रोफाइल दिखाती है कि वह टाइम्स नेटवर्क में पाँच साल काम कर चुका है। इसके अलावा वह CNN-NEWS18 में भी काम कर चुका है।

हर्मन गोमेस
हरमन गोमेज कई बड़े पत्रकारिता संस्थानों में काम कर चुका है

सबसे अधिक हैरानी की बात है कि वह वर्तमान में गोवा के बड़े अखबार हेराल्ड गोवा का पत्रकार है जबकि वह लगातार हिन्दू और महिला विरोधी रवैया अपनाए हुए है। उसके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई है। हरमन गोमेज के आचरण को लेकर ना संस्थान ने कोई सफाई पेश की है, ना ही उसने खुद भी अपने कारनामों के लिए माफ़ी माँगी है।

हरमन गोमेज का हिन्दू-महिला विरोधी चरित्र

हरमन गोमेज लगातर सोशल मीडिया पर अपना हिन्दू और महिला विरोधी चरित्र दिखा रहा है। वह एक ट्वीट में एक व्यक्ति को सती प्रथा चलाने वाला बताता है और गाली देता है।

वह एक हिन्दू महिला को कहता है कि गौमांस खाए।

वह पत्रकार सुशांत सिन्हा को जवाब देते हुए भारतीयों को ‘पजीत’ बताता है। पजीत शब्द का उपयग कई विदेशी भारतीयों का अपमान करने के लिए करते हैं। वह इस ट्वीट में ‘भ@वा’ की गाली भी देता है। इसके बाद वह कहता है कि उनके जैसे लोग भाभियों के साथ दुराचार करेंगे।

वह एक ट्वीट में गर्व से बताता है कि उसने अपनी सहकर्मी महिला ब्यूरो चीफ को खुले तौर पर ‘मा@रचो*’ कहा। इसके बाद वह इस बात पर जोर डालता है कि महिला यही थी।

वह भाजपा समर्थकों को गोबर खाने वाला और यौन अपराधी बताता है।

उसका कहना है कि विदेशों में रहने वाले भारतीय अपनी पत्नियों के सौदे के बदले नागरिकता लेते हैं। इसमें वह गुजरातियों को भी विशेष रूप से निशाना बनाता है।

वह ट्विटर पर हिन्दुओं को गौमूत्र पीने की बात कहता है।

गोमेज सिर्फ हिन्दुओं और भारतीयों का विरोध नहीं करता, वह महिला विरोधी भी है। वह हैदराबाद से भाजपा प्रत्याशी माधवी लता को ‘ट्रांसजेंडर’ बताता है। वह इन महिला विरोधी टिप्पणियों के बाद भी बचा हुआ है।

हेराल्ड का यह पत्रकार लगातार हिन्दुओं और महिलाओं को गालियाँ देकर बचता रहा है। यह इंग्लैंड में बैठ कर भारतीयों को नीचा दिखाता है जबकि कुछ साल पहले तक खुद यह भारतीय नागरिक था। उसकी हिन्दू घृणा दिन प्रति दिन बढती जा रही है। वह ट्विटर पर खुले आम अपशब्दों का प्रयोग करता है।

‘मोदी को दोबारा आने से रोको’: 400 पार की धमक से खौफ में आया पाकिस्तान, पूर्व मंत्री ने कहा- BJP को रोकना होगा, राहुल गाँधी कर कर चुके हैं तारीफ

पाकिस्तान के पूर्व मंत्री फवाद चौधरी का भारतीय राजनीति से लगाव बढ़ रहा है। हाल में वो राहुल गाँधी के भाषण की तारीफ करते दिखे तो चर्चा और बढ़ गई। अब वो लोकसभा चुनावों को लेकर भारतीय मीडिया के बीच कहते सुनाई पड़ रहे हैं कि कैसे भी करके मोदी सरकार को दोबारा सत्ता में आने से रोकना होगा, भाजपा को आने से रोकना होगा।

भारतीय मीडिया ने जब इसी चिंता पर उनसे सवाल किए तो वो कहने लगे कि वो भारत की राजनीति को हमेशा से फॉलो करते हैं और यही चाहते हैं कि मोदी को छोड़कर कोई भी सत्ता में आए क्योंकि मोदी सरकार की नीतियों से मुल्कों के बीच शांति प्रभावित हुई है। उनका कहना है कि जो कोई भी नरेंद्र मोदी की मुखालफत करता है उसके सत्ता में आने से कोई आपत्ति नहीं है।

अपने जवाब देते हुए फवाद खुद को शांति प्रिय और लिबरल दिखाने का प्रयास करते हुए कहते हैं कि उनका राहुल गाँधी से कोई खास लगाव नहीं है, लेकिन वो सिर्फ उसे सपोर्ट करेंगे जो कट्टरपंथ को बढ़ावा नहीं देगा चाहे वो पाकिस्तान में हो या फिर हिंदुस्तान। हालाँकि, उनकी इस टिप्पणी पर भाजपा प्रवक्ता शिवम त्यागी ने उन्हें खूब जवाब दिया।

शिवम ने कहा, “पाकिस्तान के ये एक्स मिनिस्टर ऐसी बातें हिंदुस्तान के चैनल पर इसलिए कर पा रहे हैं क्योंकि यहाँ मोदी सरकार है। इन्होंने देश की शांति पर सवाल उठाए तो इन्हें पता होना चाहिए कि हिंदुस्तान में शांति है, आतंकी हमलों पर लगाम है, हिंदुस्तान तो फल-फूल रहा है। यही साबित करता है कि राहुल गाँधी को चाहने वाला, कॉन्ग्रेस को चाहने वाला वही व्यक्ति है जो हिंदुस्तान को कमजोर करना चाहता है।”

शिवम ने इस बात पर भी गौर करवाया कि फवाद चौधरी जो कहते हैं कि राहुल गाँधी इज ऑन फायर… हमारे हिंदुस्तान में तो ये लोग मानते नहीं हैं, लेकिन इन लोगों को ऐसा लगता है। आगे शिवम ने बताया कि क्यों मोदी सरकार के आने से पाकिस्तान के हालत खराब हो गए हैं। इसके बाद फवाद चौधरी आगे कहते हैं कि मोदी सरकार की राजनीति गाँधी विचारधारा के खिलाफ है और अगर गाँधी को हटा दिया जाए तो भारत में बचता क्या है। इसके अलावा फवाद ने यहाँ तक कहा कि आज के समय में घुसकर मारने वाली बातें 2024 में कौन करता है।

इसके बाद फवाद ने फिर भारत के खिलाफ अनाप-शनाप बोलना शुरू किया। फवाद ने कहा कि चीन ने भारत को घर में घुसकर मारा था। कुछ दिन पहले पाकिस्तान की फौज ने आपको घर में घुसकर मारा था। लेकिन आपकी मर्जी आप अपने चैनल पर जो मन हो वो प्रोपगेंडा करें लेकिन हकीकत यही है कि हिंदुस्तान की सीमा इतनी कमजोर हैं कि चीन जब चाहे आ जाता है मारने। इसके बाद वो कश्मीर का मुद्दा भी उठाना शुरू करते हैं, लेकिन एंकर उन्हें फटकार देते हैं।

इसके बाद शिवम उन्हें कहते हैं कि कॉन्ग्रेसी नेता ऐसी बातें कर रहे हैं कि देश में गाँधी के अलावा है क्या, तो ये पता होना चाहिए कि उनके मुल्क की पैदाइश गाँधी के विचार के खिलाफ है। अगर उनकी बात सुनते तो ये पैदा भी नहीं होता। इतना ही नहीं शिवम ने इस प्रोपगेंडे को भी धराशायी किया जहाँ कहा जा रहा था चीन ने भारत को घुसकर मारा। ऐसी तमाम मीडिया रिपोर्ट दिखाने की बात हुई जहाँ भारतीय जवानों द्वारा मारे दए चीन के सैनिकों की कब्र दिखाने की बात हुई थी।