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आरजू, साइमा, हिना… UP में 3 मुस्लिम लड़कियों ने हिंदू युवकों से शादी कर की ‘घर वापसी’, लगाए जय श्रीराम के नारे: कहा- हलाला और बुर्का से चिढ़

उत्तर प्रदेश के 2 जिलों में 3 मुस्लिम युवतियों ने इस्लाम छोड़ कर हिन्दू धर्म अपनाया है। इसमें से 2 लड़कियाँ बरेली और 1 महोबा की है। इन सभी ने अपने-अपने हिन्दू प्रेमियों से वैदिक विधि-विधान से शादी कर ली है। विवाह के दौरान ‘जय श्री राम’ और ‘हर-हर महादेव’ के नारे लगाए गए हैं। हिन्दू संगठनों ने इन शादियों में शामिल हों कर वर-वधू को आशीर्वाद दिया है। ये तीनों विवाह हिन्दू देवस्थलों पर सोमवार (29 अप्रैल, 2024) को सम्पन्न हुए हैं।

महोबा में आरजू बनीं आरती

पहला मामला महोबा जिले का है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यहाँ के पनवाड़ी इलाके की रहने वाली आरजू का लम्बे समय से दिनेश जयसवाल से प्रेम प्रसंग चल रहा था। आरजू के अम्मी-अब्बा इस रिश्ते के खिलाफ थे। 2 साल पहले आरजू अपनी मर्जी से दिनेश के साथ दिल्ली चली गईं थीं। अब दिल्ली से वापस आ कर सोमवार (29 अप्रैल) को दिनेश जयसवाल और आरजू पनवाड़ी कस्बे के गौरेया दाई मंदिर पहुँचे। दिनेश के परिजन भी साथ थे। यहाँ दोनों ने शादी की इच्छा जताई।

दोनों की आपसी सहमति देख कर मंदिर के पुजारी ने वैदिक विधि-विधान से आरजू और दिनेश का विवाह सम्पन्न करवाया। इस मौके पर दिनेश के रिश्तेदार और दोस्त भी मौजूद थे। इन सभी ने मिल कर ‘जय श्री राम’ का उद्घोष किया। विवाह के बाद पुजारी ने नवदम्पति को सदा सुखी रहने का आशीर्वाद दिया। दिनेश और आरजू ने 7 जन्मों तक एक दूसरे का साथ निभाने का वादा किया। यहाँ आरजू को नया नाम आरती मिला। बाद में वर-वधू ख़ुशी-ख़ुशी अपने घर चले गए।

बरेली में हिना बनी आकांक्षा

‘घर वापसी’ का दूसरा मामला बरेली जिले से है। यहाँ के बहेड़ी थाना क्षेत्र की रहने वाली मुस्लिम लड़की हिना ने शपथ दे कर बताया है कि उन्हें पता है कि उनके पूर्वज हिन्दू थे जिन्होंने मुगल आक्रांताओं के दबाव में इस्लाम कबूल किया था। 25 वर्षीया हिना ने पहले से ही खुद को पूजा-पाठ में विश्वास करने वाली लड़की बताते हुए हिन्दू धर्म अपनाने की इच्छा जताई। सोमवार (29 अप्रैल) को हिना की ‘घर वापसी’ बरेली के अगस्त्य मुनि आश्रम में पंडित के के शंखधर के माध्यम से हुई।

‘घर वापसी’ के बाद हिना ने अपना नाम आकांक्षा गंगवार रखा। इसी दिन हिना ने बरेली के ही आकाश गंगवार को अपना जीवन साथी चुना और वैदिक रीति-रिवाज़ से अग्नि के 7 फेरे लिए। वर-वधू ने एक साथ हवन किया। इस दौरान हिन्दू संगठनों के कई सदस्य मौके पर मौजूद रहे। इन सभी ने ‘हर-हर महादेव’ और ‘जय श्री राम’ का उद्घोष किया। विवाह के बाद हिना अपने पति आकाश के साथ घर चली गईं।

अब साईना जानी जाएँगी सोनी नाम से

‘घर वापसी’ का तीसरा मामला बरेली से ही है। यहाँ के नवाबगंज थाना क्षेत्र की रहने वाले साइमा ने अपना शुद्धीकरण करवा के हिन्दू धर्म स्वीकार कर लिया है। यह शुद्धीकरण बरेली के अगत्स्य मुनि आश्रम में हुआ। घर वापसी बिना किसी दबाव में अपनी मर्जी से करने वाली 25 वर्षीया साइमा ने अपना नया नाम सोनी रखा है। साइमा ने अपने शपथ पत्र में लिखा है कि वो इस्लाम मत में तीन तलाक और हलाला जैसी कुप्रथाओं को देख कर काफी व्यथित थीं।

सोनी बनीं साइमा ने कहा कि उनकी हिन्दू धर्म में अपनी पहले से ही आस्था रही है। वो हिन्दू देवी-देवताओं की पूजा पहले ही करती आईं हैं। सोमवार को ही सोनी ने अगत्स्य मुनि आश्रम में पंडित के के शंखधर की मौजूदगी में हाफिजगंज के रहने वाले आकाश से विवाह कर लिया। यह विवाह वैदिक विधि-विधान से हुआ जिसमें हिन्दू देवी-देवताओं की जयकार की गई। हिन्दू संगठन से जुड़े सदस्य भी इस मौके पर मौजूद थे। उन्होंने वर-वधू को सदा सुखी रहने का आशीर्वाद दिया। साइमा ने पुलिस को प्रार्थना पत्र दे कर अपने परिवार से अपनी और अपने पति की सुरक्षा की गुहार लगाई है।

गृहमंत्री अमित शाह के फर्जी वीडियो मामले में एक्शन: गुजरात से कॉन्ग्रेस – AAP नेता गिरफ्तार, तेलंगाना के CM रेवंत रेड्डी समेत कई को नोटिस

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह का डीपफेक वीडियो वायरल करने के मामले में लगातार एक्शन हो रहा है। अब गुजरात से कॉन्ग्रेस और आम आदमी पार्टी के नेताओं की गिरफ्तारी हुई है। अहमदाबाद साइबर क्राइम टीम ने आम आदमी पार्टी और कॉन्ग्रेस से 2 नेताओं की गिरफ्तारी की है। इन लोगों पर आरोप है कि उन्होंने खास एजेंडे के तहत ये वीडियो वायरल किए थे।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अहमदाबाद साइबर क्राइम टीम ने जिन्हें गिरफ्तार किया है, उनके नाम सतीष वरसोला और आर बी बारिया हैं। सतीश वनसोला कॉन्ग्रेस विधायक जिग्नेश मेवानी का ऑफिस संभालता है। उसे कॉन्ग्रेस विधायक जिग्नेश मेवानी का पीए भी बताया जा रहा है। वहीं, आर बी बारिया आम आदमी पार्टी का दाहोद जिले का जिलाध्यक्ष है। दोनों ने गृहमंत्री अमित शाह के एडिटेड वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल किए थे।

असम में कॉन्ग्रेस नेता गिरफ्तार

बता दें कि ये उसी वीडियो से जुड़ा मामला है जिसे दो दिन पहले कॉन्ग्रेसी ये कहकर ट्वीट कर रहे थे कि अमित शाह ने चुनाव जीतने पर आरक्षण खत्म करने की बात कही है। इस मामले में असम के कॉन्ग्रेसी कार्यकर्ता ऋतम सिंह को गिरफ्तार किया जा चुका है। वो असम में कॉन्ग्रेस का सोशल मीडिया देखता है। इस गिरफ्तारी के बारे में खुद असम सीएम हिमंता बिस्वा सरमा ने अपने एक्स पर जानकारी देते हुए बताया था कि उसे गृह मंत्री का फेक वीडियो शेयर करने के मामले में पकड़ा गया है।”

दिल्ली पुलिस भी कर रही ताबड़तोड़ कार्रवाई

इस मामले में दिल्ली पुलिस ने FIR दर्ज की है और तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी को समन भेजा है। दिल्ली पुलिस ने सोमवार (29 अप्रैल, 2024) को उन्हें समन भेजा और 1 मई को अपना बयान दर्ज कराने के लिए कहा है। साथ ही ये भी कहा गया है कि जाँच के लिए वो अपने फोन-लैपटॉप इत्यादि जैसे इलेक्ट्रॉनिक उपकरण भी साथ लेकर आएँ। ‘इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर’ की शिकायत पर दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने ये FIR दर्ज की है।

इस मामले में सिर्फ रेवंत रेड्डी ही नहीं, बल्कि 5 अन्य लोगों को भी समन भेजा गया है जिनमें कुछ कॉन्ग्रेस के नेता हैं। इन सभी ने अमित शाह के डॉक्टर्ड वीडियो को शेयर किया था। केंद्रीय गृह मंत्रालय और भारतीय जनता पार्टी ने भी इस मामले में शिकायत दर्ज कराई थी। आरोप लगाया गया है कि समाज में विभिन्न समुदायों में वैमनस्य फैलाने के उद्देश्य से ये वीडियो प्रसारित किया गया, जिससे कानून-व्यवस्था और सार्वजनिक शांति के भंग होने की आशंका है।

JDS ने प्रज्वल रेवन्ना को पार्टी से निकाला, कहा- SIT जाँच पूरी होने तक रहेंगे निष्कासित: कर्नाटक सेक्स स्कैंडल पर बोली BJP- हम मातृशक्ति के साथ

कर्नाटक की हासन सीट से सांसद और पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा के पोते प्रज्वल रेवन्ना सेक्स स्कैंडल को सामने आने के बाद देश से फरार गए हैं। इसको लेकर आलोचना झेल रही जनता दल (सेक्युलर) (JDS) ने प्रज्वल रेवन्ना को SIT जाँच पूरी होने तक पार्टी से निलंबित कर दिया है। इसके साथ ही JDS की कोर कमिटी ने बैठक के बाद रेवान्ना को कारण बताओ नोटिस भी भेजा है।

जेडीएस ने कहा कि अगर प्रज्वल रेवन्ना पर लगे आरोप सही साबित होते हैं तो उनका पार्टी से निष्कासन बढ़ा दिया जाएगा। वहीं, अगर रेवन्ना निर्दोष साबित होते हैं तो उनका निष्कासन रद्द कर दिया जाएगा। बताते चलें कि कि रेवन्ना पर हजारों महिलाओं का यौन शोषण कर उनका वीडियो बनाने का मामला सामने आया है। इतना ही नहीं, रेवन्ना द्वारा बनाए गए लगभग 2900 वीडियो भी सामने आए हैं।

दरअसल, प्रज्वल रेवन्ना का वीडियो सामने आने के बाद कर्नाटक की राजनीति में भूचाल आ गया है। इसके बाद जेडीएस के ही विधायक शरणागौड़ा कांडपुर ने पार्टी के संस्थापक एचडी देवगौड़ा को सोमवार (29 अप्रैल 2024) को एक पत्र लिखा। उन्होंने पत्र में प्रज्वल रेवन्ना को पार्टी से निष्कासित करने की माँग की थी। उन्होंने कहा था कि इससे पार्टी को शर्मिंदगी उठानी पड़ी है।

शरणागौड़ा ने कहा था कि पिछले कुछ दिनों से सेक्स स्कैंडल का वीडियो पूरे राज्य में वायरल हो रहा है। वीडियो के कुछ हिस्सों में पार्टी सांसद प्रज्वल रेवन्ना भी दिखाई दे रहे हैं। इस वजह से ऐसा लगता है कि वे आरोपी हैं। इससे पार्टी को शर्मिंदगी उठानी पड़ रही है। विधायक ने पत्र में लिखा, “मैं आपसे अनुरोध करता हूँ कि उन्हें तुरंत पार्टी से बाहर निकाल देना चाहिए।”

वहीं, कर्नाटक में जेडीएस के साथ गठबंधन होने को लेकर भी लोग भाजपा की आलोचना कर रहे हैं। अब केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने इसका जवाब दिया है। उन्होंने कहा था कि जेडीएस प्रज्वल पर कार्रवाई करेगी। अमित शाह ने कहा, “प्रज्वल रेवन्ना का जो समाचार पत्रों और चैनल पर चल रहा है, वो बिलकुल आघातजनक है और बीजेपी का स्टैंड बहुत स्पष्ट है कि हम देश की ‘मातृ शक्ति’ के साथ खड़े हैं।”

उन्होंने आगे कहा, “वहाँ पर सरकार कॉन्ग्रेस पार्टी की है। उन्होंने अब तक कोई कार्रवाई क्यों नहीं की? कार्रवाई हमें नहीं करनी। यह राज्य की कानून व्यवस्था का मुद्दा है। राज्य सरकार को इस पर कार्रवाई करनी होगी… हम जाँच के पक्ष में हैं और हमारे सहयोगी जेडीएस ने भी इसके खिलाफ कार्रवाई करने की घोषणा की है। आज उनकी कोर कमेटी की बैठक है और कदम उठाए जाएँगे।”

इससे पहले जेडीएस नेता एचडी कुमारस्वामी ने कहा था, “हम रेवन्ना को बचाने नहीं जा रहे हैं। हम गंभीर कार्रवाई करेंगे, लेकिन जिम्मेदारी सरकार की है। न केवल एक चाचा के रूप में, बल्कि देश के एक आम आदमी के रूप में हमें आगे बढ़ना होगा। यह एक शर्मनाक मुद्दा है। सरकार कौन चला रहा है? उन्हें असली तस्वीर उजागर करनी है, जमीनी हकीकत सरकार को उजागर करनी है, मुझे नहीं।”

बता दें कि हसन लोकसभा सीट पर मतदान से ठीक दो दिन पहले एक वीडियो सामने आया था। आपत्तिजनक वीडियो में कथित रूप से हसन सांसद प्रज्वल रेवन्ना भी दिखाई दिए थे। इसके बाद कर्नाटक महिला आयोग ने सरकार को पत्र लिख कर एसआईटी बनाने की अपील की थी। कर्नाटक सीएम सिद्धारमैया ने 27 अप्रैल को एसआईटी बनाने का निर्देश दिया था।

बांग्लादेश में फिर हिंदू पर लगा ईशनिंदा का आरोप: गाने की पंक्ति लिखने पर मुस्लिम भीड़ भड़की, पुलिस ने गिरफ्तार किया

इस्लामी देशों में अल्पसंख्यक हिंदुओं पर होते अत्याचार कोई नई बात नहीं हैं। हाल में बांग्लादेश में एक हिंदू व्यापारी को एक गाने की चंद पंक्ति लिखकर साझा करने पर गिरफ्तार कर लिया गया और उस पर आरोप लगाया गया कि उसने मुस्लिम समुदाय के लोगों की मजहबी भावनाएँ आहत की हैं।

जानकारी के मुताबिक, संजय ने लिखा था, “सुन्नत ए खतना दिले जोड़ी होए मुसलमान, ताहोले नारी जातिर की होय बिधान ( यानी यदि खतना किसी पुरुष के लिए मुस्लिम बनने का तरीका है, तो, महिलाओं के लिए कौन सा नियम लागू होता है)”

ये गाना 18वीं सदी के बंगाली गायक ललन फकीर पर था। उन पर बंगाली लोक गायक कार्तिक दास ने 2016 में गीत लिखा था जिसका शीर्षक- सब लोके कोय लान की जात संसारे(जो ललन का विश्वास था वही सब लोग कहते हैं) था।

इसी पोस्ट को शेयर करने पर संजय के खिलाफ कार्रवाई हो गई। 40 वर्षीय हिंदू व्यापारी को 28 अप्रैल को शरियतपुर से गिरफ्तार किया गया। उनकी गिरफ्तारी बांग्लादेश की सीसीपी की धारा 54 के तहत हुई। इस धारा में व्यक्ति की गिरफ्तारी बिन वारंट की जाती है।

बताया जा रहा है कि संजय के अरेस्ट होने से पहले मुस्लिमों ने उनके घर के बाहर जमकर हंगामा किया था और यही सब देखते हुए किसी भी अनहोनी को रोकने के लिए पुलिस ने जल्दीबाजी में संजय को गिरफ्तार किया।

इस संबंध में एसपी महबूबउल आलाम बोले कि किसी भी प्रकार की हिंसा को रोकने के लिए उन्होंने जल्द से जल्द आरोपित पकड़ा और कोर्ट में पेशी के बाद उसे जेल भेजा। एसपी ने बताया कि स्थानीयों में इस पोस्ट के खिलाफ अभी भी गुस्सा है। इसलिए पुलिस लगातार स्थिति पर नियंत्रण बनाए हुए है।

वहीं 29 अप्रैल को दोबारा संजय की पेशी हुई जहाँ उनकी बेल मामले में सुनवाई हुई। इस बीच कई बांग्लादेशियों ने उनके पक्ष में समर्थन दिखाया और वही गाना गुनगुनाते हुए पुलिस को चुनौती दी थी कि वो आकर सबको गिरफ्तार करें।

बता दें कि इस्लामी मुल्कों में इस्लामी कट्टरपंथी अक्सर हिंदुओं पर अपना रौब बनाने के लिए उनपर अत्याचार करके दिखते हैं। इस बार इन लोगों ने संजय को शिकार बनाया है। संजय ने जिन ललन फकीर का गाना शेयर किया था वो एक समय के मशहूर गायब थे।

‘मिडिल क्लास की संपत्ति नीलाम, कॉरपोरेट लोन माफ’: बैंक की नीलामी विज्ञापन पर ‘द हिंदू’ की डिप्टी एडिटर ने किया गुमराह, जानिए सच

अंग्रेजी समाचार द हिन्दू की डिप्टी एडिटर विजेता सिंह लोन ‘वेव ऑफ’ करने और ‘राइट ऑफ’ करने को लेकर भ्रमित हो गईं। सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में विजेता सिंह ने बैंकों को निशाना बनाया। निशाना बनाने का कारण यह था कि बैंक उन संपत्तियों की नीलामी कर रहे थे जिनके कर्ज नहीं भरे गए थे। विजेता सिंह ने ऐतराज जताया कि कॉर्पोरेट के कर्जे ‘राइट ऑफ’ कर दिए जाते हैं जबकि बाकी लोगों की संपत्तियों की नीलामी की जा रही है।

विजेता सिंह ने लिखा, “कॉर्पोरेट लोन राइट ऑफ कर दिए जाते हैं, जबकि मध्यम वर्ग के लोगों के घर और जमीन, जिनका कर्जा नहीं भरा जाता है, बैकों द्वारा जब्त करके नीलाम कर दिए जाते हैं। यह बिहार में केनरा बैंक द्वारा नीलाम की जाने वाली संपत्तियों की सूची है।”

विजेता सिंह ने 28 अप्रैल, 2024 को इंडियन एक्सप्रेस में जारी की गई इस नीलामी विज्ञप्ति का फोटो भी डाला। इस फोटो में दिखता है कि जिन लोगों के घर-मकान नीलाम हो रहे हैं, उनके ₹4 लाख से लेकर ₹1 करोड़ तक के कर्ज नहीं जमा किए गए। हालाँकि, यह कोई पहली बार नहीं है कि विजेता सिंह इस मामले में भ्रमित हुई हों। 2016 में नोटबंदी के बाद भी उन्होंने एक ऐसा ही पोस्ट किया था। इसमें उन्होंने लिखा था कि जहाँ सामान्य लोग लाइनों में लग रहे हैं तो वहीं SBI ने विजय माल्या का ₹1201 करोड़ का ‘राइट ऑफ’ कर दिया।

हालाँकि, उनकी टाइमलाइन देखने पर पता चलता है कि उन्हें यह अंतर खूब अच्छे से पता है। उन्होंने दिसम्बर 2019 में एक ट्वीट में लिखा था, “किसानों के कर्ज माफ़ी पर ₹19,000 करोड़ से अधिक खर्च करने के बावजूद, 2015 से 2018 के बीच महाराष्ट्र में कुल 12,021 किसानों की आत्महत्या के कारण मौत हो गई, यह जानकारी महाराष्ट्र सरकार ने शुक्रवार को विधानसभा में दी।”

क्या जानबूझकर गलत शब्द लिखती हैं विजेता?

विजेता सिंह की टाइमलाइन से पता चला कि वह इन दोनों शब्दों का अंतर समझती हैं तब फिर 28 अप्रैल को ट्विटर पर उनके द्वारा की गई भ्रामक पोस्ट के पीछे आखिर क्या कारण हो सकता है? शायद बात को अधिक सनसनीखेज बनाने के लिए ऐसा किया जाता हो। वैसे पत्रकारिता की नैतिकता मीडिया रिपोर्टिंग के सनसनीखेज होने का समर्थन नहीं करती क्योंकि जनता इससे घबरा सकती है। लेकिन यहाँ ऐसा ही हुआ। मीडिया में किसी खबर को सनसनीखेज बनाया जाता है ताकि पाठकों का ध्यान खींचा जाए।

राइट ऑफ और वेव ऑफ में फर्क

'राइट-ऑफ' बैंकों द्वारा उनकी बैलेंस शीट की सफाई की प्रक्रिया है। इसका उद्देश्य होता है कि बैंक की असल देनदारी और उसकी सम्पत्ति साफ-साफ़ दिखें। बैंक उन कर्जों को बैलेंस शीट से हटा देते हैं जिनके वापस आने की उम्मीद कम होती है। ऐसा ना करने पर बैंकों की कमाई ज्यादा दिखेगी जिससे उसकी असल तस्वीर नहीं दिखेगी। यह काम बैंकों द्वारा हर साल किया जाता है जिससे उन्हें अपने लेनदेन में आसानी रहे।

राइट ऑफ असल में पूरी तरीके से तकनीकी चीज है। जिनके लोन सामान्य तरीके से भरे नहीं जाते वह राइट ऑफ होते हैं लेकिन ऐसा नहीं है कि इन्हें वापस वसूलने के लिए कदम नहीं उठाए जाते। बैंक इनको वापस वसूलने के लिए SARFESI एक्ट समेत तमाम प्रक्रिया अपनाती हैं ताकि उनका पैसा वापस मिले। इसके उलट वेव ऑफ माने कर्जामुक्ति होती है। उदाहरण किसानों की कर्जामफी है, इसे 'वेव ऑफ' करने की श्रेणी में रखा जाएगा।

गौरतलब है कि इस सरकार में कर्जों की वसूली भी तेज हुई है। जुलाई 2023 में वित्त मंत्रालय ने लोकसभा को बताया था कि वित्त वर्ष 2014 से 2023 के बीच देश के बैंकों ने लगभग ₹10 लाख करोड़ के एनपीए या खराब कर्जे वसूल किए हैं। वित्त मंत्रालय द्वारा यह जानकारी लोकसभा में सांसद ज्ञानथिरविअम एस और सांसद विजयकुमार उर्फ ​​विजय वसंत द्वारा पूछे गए अतारांकित प्रश्न के उत्तर में दी गई थी।

सेल्युलर जेल में हिंदुत्व को लेकर खुली वीर सावरकर की आँख, मुस्लिम कैदियों के अत्याचारों ने खोली ‘घर वापसी’ की राह: ‘नायक बनाम प्रतिनायक’ पुस्तक में अहम खुलासे

हिंदुत्व के प्रति झुकाव की प्रक्रिया सावरकर के जीवन की विषम परिस्थितियों की देन है। इसका स्फुरण और सघनीकरण बहुत धीरे-धीरे हुआ। इसकी शुरुआत होती है सेल्युलर जेल के दिनों से।

1857 से सीख लेकर अंग्रेजों ने भारतीयों के धार्मिक-सामाजिक मामलों में दखल न देने की नीति अपना ली थी। इसी नीति के तहत ईसाई पादरियों के धर्मांतरण अभियान को किसी भी तरह का सरकारी संरक्षण और प्रोत्साहन देना बंद हो गया था। कितु इसी नीति में ईस्ट इंडिया कंपनी के भारत आगमन के पहले से चले आ रहे मुसलमानों द्वारा हिंदुओं के धर्मांतरण में हस्तक्षेप न करने का रुख भी निहित था, खासकर कारागारों में यह धर्मांतरण आम हो गया था, जो अपराधी किस्म के मुस्लिम कैदियों के अहं को तुष्ट करता था। इसके लिए वे सीधे-सादे युवा राजनीतिक कैदियों को डराने-धमकाने और प्रताड़ित करने से भी बाज नहीं आते थे। सेल्युलर जेल की विशेष परिस्थितियों ने इसे और भयानक रूप दे दिया था।

आ चुका है कि सेल्युलर जेल में हिंदू क्रांतिकारी बहुसंख्यक थे। उनको नियंत्रित करने और यातनाएँ देने के मकसद से जेलर बारी ने मुसलमान अपराधी कैदियों को वार्डर, पहरेदार और हवलदार वगैरह नियुक्त कर दिया था। हिंदू कैदियों के साथ नरमी न बरते जाने के उद्देश्य से यह एक प्रशासनिक कदम के रूप में उचित हो सकता था। कितु सेल्युलर जेल में बंद अपराधी पश्चिमोत्तर में सीमा प्रांत के धर्मांध और दबंग कबीलाई पठान बहुतायत में थे। वे हट्टे-कट्टे और उत्पाती किस्म के अपराधी थे और मद्रास, बंगाल या बंबई प्रेजीडेंसी से आनेवाले मुसलमान कैदियों को भी आधा काफिर कहकर बेइज्जत करते थे। उन्हें अपने रंग में रंगने की कोशिश भी करते थे। कुछ तो उनकी नकल में उनसे भी आगे निकल जाते थे (Savarkar, My Transportation for Life, pfd pp.k~ 68&69/k386)। कुछ बलूच, सिंधी और पंजाबी मुसलमान कैदी भी पठानों की जमात में शामिल हो गए थे। बारी जैसे परपीड़क जेलर ने इन सबका इस्तेमाल क्रांतिकारी कैदियों में भय और आतंक उत्पन्न करने के एजेंट के तौर पर किया।

भारतीय कारागार समिति (Indian Jails Committee) के अध्यक्ष आलेक्जैंडर जी- खार्दिव (Alexander G Cardew, ICS) ने बारी के इन अनुचरों के बारे में लिखा है, ‘ये कर्मचारी, अपने प्राकृतिक दोषों के कारण सक्रिय एजेंटों की विकृत किस्म की प्रभुता का उपभोग करते थे।‘

आ चुका है कि मिर्जा खान नाम का एक कर्मचारी इन उत्पीड़कों का संरक्षक था। वह एक गैर-कैदी कर्मचारी था और बारी का दाहिना हाथ बन गया था। सावरकर ने उसकी सांप्रदायिक मानसिकता की एक झलक अपने संस्मरण में दी है। तेल पेरने के कोल्हू की ड्यूटी लगाए जाने पर नानी गोपाल भूख हड़ताल पर चले गए थे और डेढ़ महीने निराहर रहकर जान देने के लिए कृतसंकल्प थे। जब सावरकर के समझाने पर उन्होंने हड़ताल तोड़ी, मिरजा खान ने सावरकर से नानी गोपाल की तारीफ इस तरह की, ‘तुम्हारा शागिर्द नानी बहादुर है, उसकी हिम्मत पठानों के काबिल है, हिंदुओं के नहीं।’

यही पठान कर्मचारी अपनी स्थिति का फायदा उठाकर हिंदू कैदियों को उत्पीड़ित करते और उत्पीड़न से बचने के लिए उन्हें इस्लाम ग्रहण करने को विवश करते थे। सेल्युलर जेल के उन कठिन, निराश और बेबस दिनों में हिंदू कैदी धर्म-परिवर्तन का प्रतिरोध करके अपने कष्ट को और नहीं बढ़ाना चाहते थे। कुछ तो धर्म-परिवर्तन का महज वादा करके अधिक से अधिक समय तक उत्पीड़न से बचे रहने की कोशिश करते थे।

किसी भी हिंदू कैदी के इस तरह से किए गए धर्म-परिवर्तन की खबर को सावरकर सरकार द्वारा कैदियों पर किए गए अत्याचार के रूप में लेते थे और तिलमिला उठते थे। बारी के उकसावे पर इन एजेंटों द्वारा सावरकर की पिटाई करने और कत्ल तक की धमकी देने के बावजूद उन्होंने ऐसे कैदियों की सहायता करने का निर्णय लिया। पहले तो उन्होंने जेल में ही शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने लिखा कि यदि कोई अपनी मर्जी से या विचार-परिवर्तन के कारण धर्म बदलना चाहता है तो उन्हें कोई आपत्ति नहीं, कितु इस जेल में धर्म-परिवर्तन का चलन इन दोनों बातों से कोसों दूर है। सुपरिंटेंडेंट ने सावरकर से साफ-साफ पूछा, ‘आप लोग उन्हें हिंदू धर्म में वापस क्यों नहीं ले लेते?’ सावरकर ने जवाब तो दे दिया कि हिंदू धर्म धर्मांतरण में विश्वास नहीं रखता। कितु उनका दिमाग इस समस्या के इर्दगिर्द चक्कर काटने लगा।

पहले तो उन्होंने स्थिति के हर पहलू का सम्यक अध्ययन किया। उन्होंने पाया कि आने के दिन से ही हिंदू कैदी के साथ भेदभाव शुरू हो जाता था। मुस्लिम पहरेदार उन्हें अपने धर्मग्रंथ पढ़ने से रोकते थे। हिंदू धर्मग्रंथों में छपे चित्रों के बारे में अशिष्ट टिप्पणी करते थे और समूह में उनका पाठ होता तो समूह को तितर-बितर कर देते थे। कारागार में प्रवेश के दिन ही उनका यज्ञोपवीत तोड़ दिया जाता था, जबकि मुसलमानों की दाढ़ी और सिखों की पगड़ी पर कोई रोक नहीं थी। मुस्लिम पहरेदार हिंदू कैदियों से कठोर श्रम कराते और तरह-तरह के प्रलोभन देते। इस्लाम स्वीकार कर लेने पर उन्हें मुस्लिम नाम दे दिया जाता और वही नाम पंजीकृत हो जाता। जेल में हिंदुओं और मुस्लिमों के लिए अलग रसोई और अलग रसोइए थे। दोनों धर्मों के कैदी अलग-अलग बैठकर खाना खाते थे। धर्मांतरित कैदियों को मुसलमानों की रसोई में बना खाना, मुसलमानों के साथ बैठकर खाना पड़ता था। एक बार उनके साथ खाना खा लेने के बाद कोई हिंदू उन्हें अपने साथ बैठकर खाने नहीं देता था। अपने मूल समुदाय के तीव्र विरोध और निंदा के चलते उनके लिए वापसी का मार्ग हमेशा के लिए बंद हो जाता था।

सावरकर ने लिखा है कि लगभग हर हफ्ऱते वे किसी हिंदू कैदी को मुस्लिम साथियों के साथ बैठा देखते और समझ जाते कि उसका धर्म परिवर्तन होने वाला है। जब वे इस बाबत हिंदू कैदियों से बात करते तो उनका जवाब होताµजो लोग प्रताड़ना के डर से धर्म-परिवर्तन के लिए तैयार हो जाते हैं, हिंदू धर्म ऐसे लोगों के बिना बेहतर रहेगा। सावरकर ने उन्हें इसके दूरगामी परिणामों से अवगत कराया। इसके राजनीतिक निहितार्थ की ओर उनका ध्यान आकृष्ट किया। सावरकर ने उनसे कहा, मुस्लिम के हाथ का बना भोजन हिंदू क्यों नहीं खा सकता? इससे न उसका पेट फटेगा, न ही उसका धर्म भ्रष्ट होगा। उनके काफी प्रयास के बाद अंडमान के हिंदुओं को आभास हुआ कि हिंदू धर्म इतना कमजोर नहीं है कि ऐसे बाह्याचारों से भ्रष्ट हो जाए। (My Transportion for Life.pdf.k~ pp.k~ 218&19)।

अंततः हिंदू ऐसे कैदियों को अपने समुदाय में वापस स्वीकार करने को तैयार हो गए।

सावरकर का ध्यान स्वामी दयानंद सरस्वती (1824-1883) की ओर गया, जिन्होंने पंजाब और उत्तर भारत में शुद्धि अभियान चलाया था। धार्मिक विधि-विधानों में कोई आस्था न होने के बावजूद, अंडमान की खास परिस्थितियों में सावरकर ने उन्हीं की पद्धति अपनाई। कई धर्मांतरित कैदियों को शुद्धि की प्रक्रिया से वापस लाया गया।

इस दौरान पठान कैदियों द्वारा उन पर जानलेवा हमले हुए, एक बार विषाक्त भोजन देने का प्रयास भी हुआ। कितु बाबाराव की मुस्तैदी से हर प्रयास असफल रहा। (Babarav Savarkar.pdf.k~ pp.k~ 53&54)।

इसका असर यह हुआ कि सेल्युलर जेल में रहते हुए ही सावरकर हिंदू एकता और हिंदू संगठन की आवश्यकता पर चिंतन-मनन करने लगे थे। सनातनी, आर्यसमाजी, सिख, जैन और बौद्ध मत के लोगों को मिलाकर एक अखिल भारतीय संगठन बनाने की दिशा में सोचने लगे थे। उन्होंने ‘हिंदू’ होने के अर्थ को भी अपने ढंग से परिभाषित कर लिया था। उनके अनुसार हिंदू केवल उस धर्म को मानने वालों तक सीमित नहीं हैं, जिसे हिंदू धर्म कहा जाता है। उनके अनुसार इस देश को अपनी मातृभूमि और पुण्यभूमि मानने वाला हर व्यक्ति हिंदू है। उन्होंने लिखा कि उनकी यह परिभाषा समाज में और अधिक बिखराव व अलगाव को रोकने तथा हिंदुओं को भारत के लोगों का एक समुदाय बनाने में सशक्त भूमिका अदा करेगी (Savarkar, My Transportation for Life.k~ Pdf.pp 283&85)।

सावरकर जब भारत पहुँचे, वहाँ चारों तरफ खिलाफत असहयोग का धुआँ छाया हुआ था। खिलाफत आंदोलन को उन्होंने आफत का नाम दिया और उसके दौरान हुई दुर्भाग्यपूर्ण घटनाओं तथा उसकी असफल परिणति से जन्मे व्यापक मोहभंग, विग्रह, विखंडन और निराशा ने उनकी इस संज्ञा (आफत) में संगर्भित समस्त संभावनाओं को मूर्त कर दिया। इसने उनके विचारों के फलक का विस्तार किया और उसकी दिशा को और धार दी। उसी का हासिल रत्नागिरि जेल में लिखी उनकी पुस्तक ‘हिंदुत्व’ है।

(यह लेख ‘विनायक दामोदर सावरकर: नायक बनाम प्रतिनायक‘ पुस्तक का हिस्सा है, इसके लेखक हैं प्रसिद्ध कथाकार कमलाकांत त्रिपाठी।)

‘एक बड़े नेता ने डूबते सूरज की शपथ खाई थी कि वे सूखा क्षेत्र में पानी लाएँगे’: PM मोदी ने महाराष्ट्र में कॉन्ग्रेस और शरद पवार पर साधा निशाना

लोकसभा चुनाव 2024 की प्रक्रिया जारी है। इस बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी महाराष्ट्र में चुनाव प्रचार के लिए पहुँचे और एक जनसभा को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने कॉन्ग्रेस और शरद पवार पर जमकर हमला बोला। उन्होंने विदर्भ और मराठवाड़ा में सूखे की स्थिति के लिए कॉन्ग्रेस को पूरी तरह से जिम्मेदार ठहराया है।

महाराष्ट्र के माढ़ा में पीएम मोदी ने कहा, “15 साल पहले एक बहुत बड़े नेता यहाँ चुनाव लड़ने के लिए आए थे। कहते हैं कि तब उन्होंने डूबते सूरज की शपथ लेकर कहा था कि वे यहाँ के सूखा प्रभावित इलाकों में पानी पहुँचाएँगे। उन्होंने अपना वादा पूरा नहीं किया और अब उन्हें सजा देने का समय आ गया है। एक वो दिन था और एक ये दिन है। वो यहाँ से चुनाव लड़ने की हिम्मत नहीं जुटा पाए।”

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “चाहे विदर्भ हो या मराठवाड़ा… लोगों को बूँद-बूँद के लिए तरसाने का यह पाप वर्षों से होता रहा है। कॉन्ग्रेस को लोगों ने 60 साल तक राज करने का हक दिया… काम करने का मौका दिया। इन 60 सालों में दुनिया के कई देश पूरी तरह बदल से गए, लेकिन कॉन्ग्रेस किसानों के खेत तक पानी भी नहीं पहुँचा पाई।”

कॉन्ग्रेस पर हमला बोलते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आगे कहा, “साल 2014 में 99… करीब 100 सिंचाई योजनाएँ ऐसी थीं, जो दशकों-दशकों से अटकी हुई थीं। इनमें से भी सबसे ज्यादा 26 परियोजनाएँ महाराष्ट्र की थीं। सोचिए, कितना बड़ा धोखा इन लोगों ने महाराष्ट्र को दिया है।

भाजपा सरकार द्वारा किए गए कार्यों का खुलासा करते हुए पीएम मोदी ने कहा, “हर खेत तक पानी पहुँचाना, हर घर तक पानी पहुँचाना… यह मेरे जीवन का बहुत बड़ा मिशन है। 2014 में सरकार बनने के बाद मैंने अपनी पूरी शक्ति इन सिंचाई परियोजनाओं के ऊपर लगा दी। कॉन्ग्रेस की लटकाई करीब 100 परियोजनाओं में 63 परियोजनाएँ आज पूरी तरह कंप्लीट हो गई हैं।”

उन्होंने कहा, “जिस निलवांडे डैम का इंतजार 50 सालों से हो रहा था, उसे हमने पूरा करवाया। कौसीकुर परियोजना का ज्यादातर काम एकनाथ जी, अजित जी और देवेंद्र जी की टीम तेजी से पूरा कर रही है। हमारी सरकार पाँच साल में ही 11 करोड़ से ज्यादा घरों तक नल से जल पहुँचा चुकी है। दस साल में माइक्रो इरीगेशन का दायरा भी दोगुने से अधिक बढ़ा है।”

शरद पवार पर हमला बोलते हुए उन्होंने कहा, “10 साल पहले, जब रिमोट कंट्रोल वाली सरकार चलती थी, तब महाराष्ट्र के कद्दावर नेता कृषि मंत्री थे। जब यहां के कद्दावर नेता दिल्ली में राज करते थे, तब गन्ने का FRP करीब 200 रुपये था और आज मोदी के सेवाकाल में गन्ने का FRP करीब 350 रुपये है।”

‘AAP प्रत्याशी ने मुस्लिम नेता को परोसा सूअर का मांस’: वकार चौधरी के समर्थन में उतरा AIMIM, बोले – इसका नाम लेना भी हराम, कुलदीप कुमार मुस्लिमों के गुनहगार

दिल्ली की सत्ताधारी आम आदमी पार्टी के नेता वकार चौधरी ने आरोप लगाया है कि पूर्वी दिल्ली से पार्टी के लोकसभा प्रत्याशी कुलदीप कुमार ने उन्हें जंगली मीट परोस दिया। उन्होंने एक वीडियो के जरिए ये जानकारी दी और कहा कि वो बहुत दुःखी और आहत हैं। वकार चौधरी ने कहा कि वो सो नहीं पा रहे हैं, उन्हें सुकून नहीं मिल रहा है। उन्होंने बताया कि रात के समय चुनाव प्रचार निपटा कर वो कुलदीप कुमार के दफ्तर पहुँचे, उन्हें काफी तेज़ भूख लगी हुई थी तो कुलदीप कुमार से पूछा कि क्या कुछ खाने को है?

वकार चौधरी ने बताया कि कोंडली से AAP वधायक कुलदीप कुमार ने कहा कि नॉनवेज है, खा लीजिए। बकौल वकार चौधरी, कुलदीप कुमार ने कहा कि सब नॉनवेज एक तरह का ही होता है। वकार चौधरी का कहना है कि इसके बाद उन्हें शक हुआ, क्योंकि एक बार कुलदीप कुमार उनके घर भी आए थे और पूछा था कि आप तो जंगली का मांस खा लेते होंगे। वकार चौधरी के अनुसार, उन्होंने जवाब दिया कि इस तरह का मजाक ठीक नहीं है। वकार चौधरी ने कुलदीप कुमार की सोच को छोटी बताते हुए पूछा कि आप एक मुस्लिम को जंगली का गोश्त ऑफर कर रहे हैं?

वकार चौधरी ने कहा कि इसका नाम तक लेने से कई दिनों तक दुआएँ कबूल नहीं होती, और आप एक हाजी को जंगली का गोश्त खिलाना चाहते हैं। उन्होंने पार्टी आलाकमान से कहा कि कुलदीप कुमार को हटा कर किसी भी अन्य नेता को प्रत्याशी बना दिया जाए। इस मामले के सामने आने के बाद असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष शोएब जमाई अपने साथी नेताओं के साथ वकार चौधरी के यहाँ पहुँचे और उनके प्रति सहानुभूति जताई।

AIMIM नेताओं ने प्रेस कॉन्फ्रेंस भी किया। बता दें कि मुस्लिमों में सूअर का मांस हराम माना जाता है। इस दौरान वहाँ जुटे मुस्लिम कार्यकर्ताओं ने ‘कुलदीप कुमार वापस जाओ’ और ‘कुलदीप कुमार माफ़ी माँगो’ के नारे भी लगाए। वकार चौधरी ने समर्थन के लिए शोएब जमाई का समर्थन भी दिया। इसी तरह आंध्र प्रदेश के ‘नव रंग पार्टी’ के राष्ट्रीय अध्यक्ष जलील शेख़ ने कुलदीप कुमार के विरोध में वकार चौधरी को अपना और पूरी पार्टी का समर्थन दिया।

वकार चौधरी ने ट्विटर के माध्यम से कहा, “कुलदीप कुमार क्या खाते हैं, मुझे इससे कोई एतराज नहीं है पर में चाहता हूँ की वो मेरे मजहब की भी उसी तरह से इज्जत करे जैसे कि मैं उनके धर्म की इज्जत करता हूँ। मैं अपने हक़ और अपने मजहब को बचाने की लड़ाई लड़ रहा हूँ, आपसे दरखास्त है इस मुहीम में आप मेरा साथ दे मुझे इंसाफ चाहिए आप मेरा साथ देंगे।” उन्होंने कुलदीप कुमार को ‘मुस्लिमों का गुनहगार’ करार दिया। सभा में मंत्री आतिशी भी आने वाली थीं, लेकिन विरोध के कारण वो नहीं आईं।

‘पतंजलि आयुर्वेद’ और ‘दिव्य फार्मेसी’ के इन 14 दवाओं के लाइसेंस रद्द: फिर से माफीनामे के बाद भी नाराज़ हुआ सुप्रीम कोर्ट, पूछा – अख़बार का पूरा पेज रिकॉर्ड पर क्यों नहीं रखा?

हरिद्वार स्थित ‘पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड’ और ‘दिव्य फार्मेसी’ के 14 उत्पादों का मैन्युफैक्चरिंग लाइसेंस ‘उत्तराखंड स्टेट लाइसेंसिंग अथॉरिटी’ ने रद्द कर दिया है। संस्था ने बताया कि 15 फरवरी, 2024 को ये कार्रवाई की गई है। सोमवार (29 फरवरी, 2024) को दायर किए गए एक एफिडेविट में ये जानकारी दी गई है। ड्रग्स एन्ड कॉस्मेटिक रूल्स, 1954 के तहत त्वरित रूप से रद्द किए जाने की कार्रवाई की गई। 10 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट ने अवैध विज्ञापन के मामले में उत्तराखंड प्रशासन को फटकार लगाई थी।

अथॉरिटी ने ये भी बताया कि ‘पतंजलि आयुर्वेद’ के खिलाफ़ब आपराधिक शिकायत भी दर्ज कराई गई है। इसमें इसके प्रबंध निदेशक (MD) आचार्य बालकृष्ण और सह-संस्थापक स्वामी रामदेव के अलावा उनकी एक अन्य कंपनी ‘दिव्य फार्मेसी’ का भी नाम है। ये शिकायत हरिद्वार के चीफ जुडिशल मजिस्ट्रेट के समक्ष दर्ज कराई गई है। ‘ड्रग्स एन्ड मैजिक रेमेडीज (ऑब्जेक्शनेबल एडवर्टाइजमेंट्स)’ एक्ट, 1954 के तहत ये कार्रवाई की जा रही है।

जिन उत्पादों के लाइसेंस रद्द किए गए हैं, वो हैं – स्वसारी गोल्ड, स्वसारी वटी, ब्रोन्कोम, स्वसारी प्रवाही, स्वसारी अवलेह, मुक्त वटी एक्स्ट्रा पॉवर, लिपिडोम, बीपी ग्रिट, मधुग्रीत, मधुनाशिनी वटी एक्स्ट्रा वटी, लिवामृत एडवांस, लिवोग्रिट, आईग्रिट गोल्ड और पतंजलि दृष्टि आई ड्रॉप। साथ ही एजेंसी ने सुप्रीम कोर्ट से उसके आदेश के पालन में जाने-अनजाने में हुई किसी भी लापरवाही के लिए बिना शर्त माफ़ी भी माँगी है। उक्त प्रोडक्ट्स का निर्माण तत्काल रोकते हुए नए फॉर्मूले की शीट सौंपने को भी कहा गया है।

SLA ने उत्तराखंड में स्थित सभी आयुर्वेदिक दवा कंपनियों की फैक्ट्रियों को निर्देश दिया है कि वो 1954 के ड्रग्स एन्ड रेमेडीज एक्ट का पालन करें, कंज्यूमर प्रोटेक्शन एक्ट, 2019, केबल टेलीविजन नेटवर्क एक्ट, 1995, और एम्ब्लेम्स एन्ड नेम्स एक्ट, 1950 का पालन करने को भी कहा है। किसी भी उत्पाद के लिए ‘आयुष मंत्रालय द्वारा प्रमाणित’ लेबल प्रयोग में नहीं लाया जाएगा। लेबलिंग में ड्रग्स एन्ड कॉस्मेटिक्स एक्ट, 1945 का पालन करना होगा।

जस्टिस हिमा कोहली और जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह की पीठ इस मामले की सुनवाई कर रही है। सुनवाई में बाबा रामदेव और आचार्य बालकृष्ण भी पहुँचे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने अब ‘पतंजलि’ द्वारा दायर माफीनामे पर तो संतोष जताया है, लेकिन अख़बार का पूरा पेज रिकॉर्ड में न रखने पर नाराज़गी व्यक्त की। साथ ही बाबा रामदेव और आचार्य बालकृष्ण को अगली सुनवाई में व्यक्तिगत पेशी से छूट दी है। वहीं IMA (इंडियन मेडिकल एसोसिएशन) द्वारा एलोपैथी पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी की आलोचना पर जजों ने कहा कि वो इसे सख्ती से देखेंगे।

BJP खत्म करेगी मुस्लिम कोटा, SC/ST-OBC को मिलेगा आरक्षण का लाभ: अमित शाह ने कॉन्ग्रेस के दुष्प्रचारों का दिया जवाब, रेवन्ना मामले में बोले- हम मातृ शक्ति के साथ

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने आज (30 अप्रैल 2024) असम के गुवाहाटी में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इस कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्होंने उस फर्जी वीडियो पर बात की जिसमें कॉन्ग्रेसी ये झूठ फैला रहे थे कि गृह मंत्री ने आरक्षण खत्म करने को कहा है। इसके अलावा इस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने प्रज्वल रेवन्ना के मामले को लेकर कॉन्ग्रेस पर हमला बोला। साथ ही लोकसभा चुनावों पर बात करते हुए आश्वस्त किया कि भाजपा और उनके साथी दल मिलकर इस बार 400 पार करेंगे ही।

गुवाहाटी में हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में अमित शाह ने पहले तो देश में हो चुके दो चरणों के चुनावों पर बात की और कहा कि उन्हें ऐसा लग रहा है कि भाजपा ने अब तक 2 ही चरणों में 100 सीटों का आँकड़ा पार कर लिया है। इसके बाद उन्होंने कॉन्ग्रेस द्वारा किए जा रहे दुष्प्रचारों पर चर्चा की।

उन्होंने कहा, “कुछ दिन से कॉन्ग्रेस ने हमारे 400 पार के लक्ष्य को ट्विस्ट करना शुरू किया है। वो अपप्रचार कर रहे हैं कि भाजपा 400 पार करने के बाद संविधान बदल देगी और आरक्षण को समाप्त कर देगी। ये दोनों चीजें निराधार और तथ्यहीन हैं।” उन्होंने कहा, “कॉन्ग्रेस झूठ फैलाकर जनता के बीच में भ्रांति पैदा करना चाहती है। मैं एक बात स्पष्ट कर देना चाहता हूँ कि भाजपा SC/ST, OBC के आरक्षण की समर्थक है और हमेशा इसके संरक्षक के रूप में अपनी भूमिका निभाएगी।”

अमित शाह कहते हैं, “SC/ST, OBC के आरक्षण पर किसी राजनीतिक दल में अगर डाका डाला है, तो वो कॉन्ग्रेस पार्टी ने डाला है। सबसे पहले उन्होंने संयुक्त आंध्र प्रदेश में मुसलमानों को आरक्षण दिया, जिसके कारण OBC का रिजर्वेशन कटा। उसके बाद कर्नाटक में उन्होंने रातों-रात बिना किसी सर्वे, पिछड़ापन तय किए बगैर सारे मुसलमानों को OBC कैटेगरी में डालकर उनके लिए 4% का कोटा रिजर्व कर दिया, इससे भी पिछड़ा वर्ग का रिजर्वेशन कटा है।”

आगे वह स्पष्ट बोले- “भाजपा स्पष्ट रूप से मानती है कि धर्म के आधार पर आरक्षण गैर-संवैधानिक है और जब भी इन राज्यों में हमारे पास अधिकार आएगा, हम मजहब के आधार पर लादे गए आरक्षण को समाप्त करके SC/ST और OBC को न्याय दिलाने का काम करेंगे।”

उन्होंने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि विपक्ष की हताशा-निराशा इस स्तर पर पहुँच गई है कि वो फेक वीडियो बनाकर सार्वजनिक कर रहे हैं। आगे अमित शाह ने प्रज्वल रेवन्ना के अश्लील वीडियो वायरल होने के मामले पर कहा, “प्रज्वल रेवन्ना का जो समाचार पत्रों और चैनल पर चल रहा है वो बिलकुल आघातजनक है और बीजेपी का स्टैंड बहुत स्पष्ट है कि हम देश की ‘मातृ शक्ति’ के साथ खड़े हैं… मैं कॉन्ग्रेस से पूछना चाहता हूँ कि वहाँ पर सरकार किसकी है? सरकार कॉन्ग्रेस पार्टी की है। उन्होंने अब तक कोई कार्रवाई क्यों नहीं की? कार्रवाई हमें नहीं करनी। यह राज्य की कानून व्यवस्था का मुद्दा है, राज्य सरकार को इस पर कार्रवाई करनी होगी… हम जाँच के पक्ष में हैं और हमारे सहयोगी जद (एस) ने भी इसके खिलाफ कार्रवाई करने की घोषणा की है आज उनकी कोर कमेटी की बैठक है और कदम उठाए जाएँगे…”

गृह मंत्री इस कॉन्फ्रेंस में बताया कि कॉन्ग्रेस जो उन पर आरोप लगाती है वो सारे झूठे हैं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि 2014 और 2019 में भाजपा ने बहुमत से सरकार बनाई है लेकिन कभी इसका प्रयोग आपातकाल लागू करने के लिए नहीं किया, न लोकतंत्र खत्म करने के लिए, न लोकसभा सत्र बढ़ाने के लिए ताकि संविधान बदलें। भाजपा ने आर्टिकल 370, ट्रिपल तलाक हटाया, राम मंदिर बनाया और देश की तस्वीर बदली।