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कहीं भाँजे की शादी में मामा गिरे, कहीं नाचते-नाचते दुल्हन की बहन की मौत, कहीं दूल्हे की ही रुक गई धड़कनें: फिर डरा रही हार्ट अटैक की घटनाएँ

बीते कुछ दिनों से हार्ट अटैक के मामलों में अचानक वृद्धि देखी जा रही है। बीते कुछ दिनों में ऐसे कई वीडियो सामने आए जिनमें सामान्य दिख रहे लोग एकाएक गिर गए और हार्ट अटैक के कारण काल के गाल में समा गए। बीते तीन दिनों में तीन ऐसी घटनाएँ सामने आई हैं।

ऐसा ही एक चौंकाने वाला मामला मेरठ से सामने आया जहाँ एक युवती नाचते हुए गिर गई। इसके बाद उसकी मौत भी हो गई। बाद में पता चला कि उसे हार्ट अटैक पड़ा था। इसका एक वीडियो भी सामने आया। युवती का नाम रिम्शा था और वह अपनी बहन की शादी से पहले मेहँदी रस्म में ख़ुशी से नाच रही थी। वीडियो में दिखता है कि युवती पहले नाच रही होती है और फिर इकट्ठे गिर जाती है, उसके घरवाले उसको आवाज देते हैं। उसे बाद में अस्पताल भी ले जाया गया लेकिन उसके बचाया नहीं जा सका।

मेरठ के ही पड़ोसी जनपद बिजनौर से भी एक ऐसा ही मामला सामने आया। यहाँ एक व्यक्ति की मौत उसकी शादी के रस्मों से पहले ही हो गई। मृतक युवक का नाम नीतू बताया गया। बताया गया कि उसकी शादी की रस्में चालू होती, उससे पहले ही उसे सीने में दर्द महसूस हुआ और फिर वह एकाएक गिर गया। इसके बाद घर वालों ने उसे बचाने की कोशिश की लेकिन असफल रहे। अस्पताल ले जाए जाने पर उसकी मौत हो गई। घरवालों ने बताया कि उसे पहले से कोई बीमारी नहीं थी।

इसी तरह का एक मामला राजस्थान से भी सामने आया। यहाँ एक व्यक्ति का नाचते हुए गिरने का वीडियो सामने आया। बताया गया कि झुंझनु जिले के नवलगढ़ तहसील में कमलेश ढाका नाम का व्यक्ति अपने भांजे की शादी में आया हुआ था। यहाँ कुछ रस्मों के पूरा होने के बाद वह डीजे की धुन पर नाच रहा था। इस बीच वह अचानक से गिर गया। कमलेश अपने सर पर मटकी रख कर नाच रहे थे जो कि गिर कर फूट गई। कमलेश ढाका को इसके बाद अस्पताल ले जाया गया जहाँ उन्हें मृत घोषित कर दिया गया।

इसके अलावा भी बीते दिनों में कई ऐसी ही खबरें आई जहाँ युवाओं को हार्ट अटैक हुए। उत्तर प्रदेश के लखीमपुर में भाजपा के युवा नेता अमिय त्रिपाठी की भी हार्ट अटैक से मृत्यु हुई। उनके जानने वालों ने बताया कि वह कुछ देर पहले तक स्वस्थ थे और उनकी एकाएक ही मौत हो गई। अमिय की मौत पर हर कोई स्तब्ध रह गया।

‘PM मोदी पर लगे 6 साल का प्रतिबंध’: हाईकोर्ट ने ख़ारिज की ‘ग़लतफ़हमी भरी’ याचिका, कहा – चुनाव आयोग को नहीं दे सकते आदेश

दिल्ली हाई कोर्ट ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विरुद्ध लगाई गई एक याचिका को खारिज कर दिया। यह याचिका पीएम मोदी द्वारा दिए गए एक बयान के आधार पर लगाई गई थी और इसमें दावा किया गया था कि पीएम मोदी ने चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन किया है।

दिल्ली हाई कोर्ट की जस्टिस सचिन दत्ता की एकल सदस्यीय बेंच ने इस मामले में की सुनवाई की। हाई कोर्ट ने कहा कि यह याचिका एकदम गलतफहमी भरी हुई थी क्योंकि याचिकाकर्ता ने पहले ही मान लिया कि चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन हुआ है। कोर्ट ने कहाकि वह चुनाव आयोग को कार्रवाई के लिए आदेश नहीं दे सकता। कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता पहले ही इस मामले की चुनाव आयोग के पास शिकायत कर चुका है। चुनाव आयोग इस मामले में एक्शन लेने के लिए स्वतंत्र है।

चुनाव आयोग के वकील ने कोर्ट को बताया कि वह याचिकाकर्ता की शिकायत पर नियामानुसार आगे की कार्रवाई करेगा। चुनाव आयोग ने कहा कि यह शिकायत 21 अप्रैल की है और उसके पास रोज ऐसी कई शिकायत आ रही हैं, ऐसे में वह इस पर काम करेगा क्योंकि वह एक संवैधानिक संस्था है।

दरअसल, आनंद जोंधाले नाम के एक वकील ने दिल्ली हाई कोर्ट के सामने एक याचिका लगाई थी कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को चुनाव लड़ने से 6 साल के लिए प्रतिबंधित कर दिया जाए क्योंकि उन्होंने कथित तौर पर धर्म के नाम पर वोट माँगे हैं। याचिकाकर्ता ने इसके लिए पीलीभीत में हुई एक रैली के भाषण का उदाहरण दिया था।

जोंधाले ने अपने याचिका में कहा था कि कोर्ट चुनाव आयोग को पीएम मोदी के विरुद्ध कार्रवाई को लेकर आदेश दे। उनको चुनावों से प्रतिबंधित कर दिया जाए और उन्हें वोट भी ना माँगने दिया जाए। जोंधाले का कहना था कि यह सब कुछ लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत किया जाए।

जोंधाले का यह भी कहना था कि उसने चुनाव आयोग से भी ऐसे ही एक्शन की माँग की थी लेकिन कुछ नहीं हुआ इसलिए वह कोर्ट आया है। हालाँकि, उसे कोर्ट से इस मामले में कोई राहत नहीं मिली और उसकी याचिका खारिज कर दी गई।

10 घंटे 5 राज्य, 1800 km… कुछ ऐसे पुलिस के शिकंजे में आए अभिनेता साहिल खान: इंस्टाग्राम पर बिकनी गर्ल्स के साथ तस्वीरें, नमाज पढ़ते वीडियो

‘महादेव ऑनलाइन बेटिंग’ ऐप मामले में बॉलीवुड के अभिनेता साहिल खान की रविवार (28 अप्रैल 2024) को गिरफ्तारी हुई, लेकिन इस गिरफ्तारी से पहले उन्होंने पुलिस को खूब चकमा दिया। छत्तीसगढ़ के जगदलपुर इलाके से एक्टर को पकड़ने से पहले पुलिस को 40 घंटे 5 राज्यों में घूमना पड़ा। इस बीच साहिल बार-बार अपनी लोकेशन बदलते रहे जिससे उनका पीछा करने में भी दिक्कत आई।

सामने आई जानकारी के अनुसार, महादेव बेटिंग ऐप मामले में फँसे एक्टर की जमानत याचिका 25 अप्रैल को खरिज हुई थी। इसके बाद उन्हें पुलिस से बचने का कोई उपाय नहीं मिला तो उन्होंने अपने ड्राइवर को बुलाया और मुंबई से गोवा निकल लिए और फिर वहाँ से कर्नाटक चले गए। थोड़ी देर बाद वह तेलंगाना में हैदराबाद गए और फिर छत्तीसगढ़ गए।

बताया जा रहा है कि साहिल सिर्फ थोड़ी-थोड़ी देर के लिए अपना फोन ऑन कर रहे थे। उसके अलावा उनका फोन ऑफ ही था। पुलिस के पास जो थोड़ी बहुत सूचनाएँ आ रही थीं उसी के आधार पर उन्होंने साहिल को चेज किया और देखते ही देखते 40 घंटे बीत गए और 5 राज्यों में 1800 किमी का सफर तय हो गया। सूचना में ये भी सामने आया कि साहिल खान के ड्राइवर ने गढ़चिरौली में नक्सल प्रभावित इलाकों से होकर गुजरने के लिए साफ मना कर दिया था। हालाँकि फिर भी साहिल ने उनपर दबाव बनाया और जाकर छत्तीसगढ़ के जगदलपुर के होटल में रुके।

ह्यूमन और टेक्निकल इंटेलिजेंस के आधार पर जब पुलिस को साहिल की लोकेशन का पता चला तो उन्होंने दरवाजा खटखटाया। साहिल ने गेट खोला तो वो भी हैरान थे और अपना चेहरा छिपाने के लिए मास्क लगाकर पूरे मुँह पर तौलिया लपेटने लगे। इसके बाद पुलिस ने उन्हें पकड़ा और बताया कि उन्हें महादेव बेटिंग केस में गिरफ्तार कर लिया गया है। मुंबई लाकर उन्हें कोर्ट में पेश किया गया जिसके बाद उनकी कस्टडी 1 मई तक पुलिस को दी गई। अजीब बात यह है कि पुलिस को इतना चकमा देकर भागे साहिल खान जब मीडिया के सामने आए तो वो मुस्कुरा रहे थे। उन्होंने मीडिया से कहा कि उन्हें न्याय व्यवस्था पर पूरा भरोसा है जल्द ही सच सामने आएगा।

बता दें कि साहिल खान को सोशल मीडिया पर द लायन बुक नाम का एक ऐप प्रमोट करते देखा गया था जिसका कनेक्शन महादेव बेटिंग ऐप से है। उन्होंने यूएई में ऐप लॉन्च का इवेंट भी किया था और उसकी सेलीब्रेशन पार्टियों में भी नजर आए थे। इसी के कारण उनके ऊपर जाँच बढ़ाई गई।

उनके ऊपर लोटस 24/7 नाम की ऐप से जुड़े होने का भी आरोप है जो कि सट्टेबाजी का गैरकानूनी ऑनलाइन प्लेटफॉर्म है। पुलिस को संदेह है कि इस ऐप से साहिल को अवैध मुनाफा हुआ है। अब जाँच में उसी के बारे में पता लगाया जा रहा है।

गौरतलब है कि साहिल खान ने बॉलीवुड की फिल्म एक्सक्यूज मी और स्टाइल जैसी फिल्मों में काम किया है। इन दिनों वह सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहते हैं। उनके सोशल मीडिया पर उनके इवेंट्स की वीडियो डाली जाती हैं।

इसके अलावा वो अपनी पार्टनर और अपनी लाइफ स्टाइल की भी फोटोज वीडियोज डालते रहते हैं। उनके इंस्टा पर ईद पर नमाज पढ़ने की भी फोटो है और छुट्टी के समय में बिकनी पहनी लड़कियों के साथ घूमने-फिरने की भी।

लंका के जिस अशोक वाटिका में कैद थीं माता सीता, वहीं बन रहा है उनका भव्य मंदिर: सरयू से भेजा जाएगा पवित्र जल, बोला राम मंदिर ट्रस्ट – मजबूत होंगे संबंध

अयोध्या में सरयू नदी का जल श्रीलंका में बन रहे सीता माता के मंदिर के अभिषेक समारोह के लिए भेजा जाएगा। राम मंदिर ट्रस्ट और अयोध्या जिला प्रशासन ने सीता अम्मा मंदिर के निर्माण के पीछे के लोगों के अनुरोध पर पवित्र जल उपलब्ध कराने का वादा किया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह समारोह 19 मई को होने वाला है। उत्तर प्रदेश राज्य सरकार ने अयोध्या में अधिकारियों को श्रीलंका में मंदिर को पवित्र सरयू जल की आपूर्ति करने की अपनी प्रतिबद्धता का सम्मान करने का निर्देश दिया है।

जानकारी के मुताबिक, अयोध्या में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के बाद अब श्रीलंका में माता सीता का विशाल मंदिर बन रहा है। इस मंदिर में सीता अम्मा की 19 मई को प्राण प्रतिष्ठा होने है, जिसके लिए अयोध्या की पवित्र सरयू नदी का जल श्रीलंका भेजा जाएगा। पवित्र सरयू नदी का जल मँगाने के लिए श्रीलंका के प्रतिनिधिमंडल की ओर से उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार को पत्र लिखा था और माँ जानकी की मूर्ति की प्रतिष्ठा के लिए जल भेजने का अनुरोध किया था। उत्तर प्रदेश सरकार को पत्र मिलने के बाद सरकार ने पर्यटन विभाग को जल भेजने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

श्रीराम मंदिर ट्रस्ट का कहना है कि इस पहल से दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंध मजबूत होंगे और सांस्कृतिक संबंधों को बढ़ावा देने में इसके महत्व पर जोर देते हुए इस पहल की सराहना की है। इस बारे में अयोध्या तीर्थ विकास परिषद के सीईओ संतोष कुमार शर्मा ने कहा कि श्रीलंका में सीता अम्मा मंदिर का निर्माण किया जा रहा है। सीता अम्मा मंदिर में माँ जानकी की प्राण प्रतिष्ठा का उद्देश्य दोनों देशों के दिलों को एकजुट करना है।

न्यूज 18 की रिपोर्ट के मुताबिक, सीता अम्मन मंदिर श्रीलंका के नुवारा एलिया इलाके में है। यहाँ नुवारा एलिया इलाके से पाँच किलोमीटर दूर सीता एलिया गाँव में ये मंदिर बनकर लगभग तैयार हो चुका है। माना जाता है कि यही जगह रामायण में अशोक वाटिका के नाम से थी, जहाँ माता सीता को अपहरण के बाद रावण ने बंदी बनाकर रखा था। सीता एलिया आज इस जगह का नाम है।

इससे पहले, 23 अप्रैल 2024 को श्रीलंका के प्रधान मंत्री दिनेश गुणवर्धने और भारतीय उच्चायुक्त गोपाल बागले ने नुवारा एलिया में सीता मंदिर (सीता एलिया) के लिए एक विशेष स्मारक कवर जारी किया था। इस खास मौके पर इस ऐतिहासिक मंदिर में एक ध्यान केंद्र की आधारशिला भी रखी गई थी।

‘एक आदमी (शाहजहाँ शेख) को बचाने के लिए क्यों आ रहे?’: ममता सरकार को सुप्रीम कोर्ट की फटकार, संदेशखाली मामले में नहीं चाहती थी CBI जाँच

सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल की ममता सरकार को कड़ी फटकार लगाई है। सुप्रीम कोर्ट में संदेशखाली में जमीन हड़पने और यौन उत्पीड़न के मामले में सीबीआई जाँच पर रोक लगाने की माँग वाली याचिका को लेकर बंगाल सरकार की खूब किरकिरी हुई है।

सुप्रीम कोर्ट ने बंगाल की ममता बनर्जी सरकार की संदेशखाली सम्बन्धित CBI जाँच को लेकर एक याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा टिप्पणी की, “आखिर राज्य एक याचिकाकर्ता बन कर एक आदमी के हितों को बचाने के लिए क्यों आ रहा है?” यह टिप्पणी जस्टिस बी आर गवई ने की।

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में गर्मी को छुट्टियों के बाद सुनने का निर्णय किया है। सुप्रीम कोर्ट से बंगाल सरकार ने अपील की थी कि इसे बाद में सुना जाए। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस याचिका के लंबित होने का फायदा किसी और मामले में नहीं उठाया जाएगा। इस बात को लेकर बंगाल सरकार के वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने सुप्रीम कोर्ट के सामने रजामंदी दी।

सुप्रीम कोर्ट में बंगाल सरकार ने संदेशखाली मामले में CBI जाँच को रोकने की माँग की थी। इसको लेकर एक याचिका लगाई गई थी। बंगाल सरकार ने यह याचिका कलकत्ता हाई कोर्ट के निर्णय के विरुद्ध डाली थी, हाई कोर्ट ने संदेशखाली में जमीन हडपने और यौन शोषण के आरोपों की जाँच CBI को करने का आदेश दिया था।

कलकत्ता हाई कोर्ट ने संदेशखाली में जमीन हड़पने और यौन शोषण के आरोपों को लेकर जाँच के निष्पक्ष हो, इसके लिए बंगाल सरकार को CBI को सहयोग देने को कहा था। इसके बाद संदेशखाली मामले की जाँच राज्य पुलिस के हाथों से CBI के पास आ गई थी।

गौरतलब है कि जनवरी 2024 में प्रवर्तन निदेशालय की एक टीम संदेशखाली में स्थानीय तृणमूल कॉन्ग्रेस नेता शाहजहाँ शेख से पूछताछ करने गई थी। यह पूछताछ राशन घोटाला मामले में होनी थी। इस टीम पर शाहजहाँ के गुंडों ने हमला कर दिया था। इस हमले में कई अधिकारी घायल हो गए थे।

इसके एक माह बाद संदेशखाली की पूरी सच्चाई बाहर आनी चालू हुई थी। संदेशखाली की महिलाओं ने बताया था कि शाहजहाँ शेख और उसके आदमी महिलाओं का यौन शोषण करते थे। इसके अलावा शाहजहाँ शेख ने यहाँ के कई लोगों की जमीन हथियाई हुई थी।

वह उनकी जमीन पर मछली पालता था। लोगों को जमीन का ना उचित पैसा दिया गया था और ना ही उन्हें मजदूरी मिलती थी। अपना पैसा माँगने पर लोगों को मारने की धमकी मिलती थी। यह पूरा मामला सामने आने के बाद शाहजहाँ शेख को गिरफ्तार कर लिया गया था।

तेलंगाना CM रेवंत रेड्डी को दिल्ली पुलिस का समन, कहा – मोबाइल भी लेकर आइए: कॉन्ग्रेस ने वायरल किया था अमित शाह का फर्जी वीडियो, असम से पार्टी नेता गिरफ्तार

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का एक डीपफेक वीडियो वायरल हुआ था, जिसके आधार पर कॉन्ग्रेस ने दावा किया था कि वो आरक्षण को खत्म करने की बातें कर रहे हैं। अब इस मामले में दिल्ली पुलिस ने FIR दर्ज करने के बाद तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी को समन भेजा है। रेवंत रेड्डी, दिसंबर 2023 से न सिर्फ CM हैं, बल्कि पिछले 3 वर्षों से पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष भी हैं। 54 वर्षीय रेवंत रेड्डी TDP 2017 में कॉन्ग्रेस में शामिल हुए थे और पार्टी ने उन्हें नेतृत्व देकर भरोसा जताया।

अब सोमवार (29 अप्रैल, 2024) को दिल्ली पुलिस ने उन्हें समन भेजा है। कहा गया है कि वो 1 मई को पेश होकर अपना बयान दर्ज कराएँ। साथ ही ये भी कहा गया है कि जाँच के लिए वो अपने फोन-लैपटॉप इत्यादि जैसे इलेक्ट्रॉनिक उपकरण भी साथ लेकर आएँ। ‘इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर’ की शिकायत पर दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने ये FIR दर्ज की है। तेलंगाना कॉन्ग्रेस ने सबसे पहले अमित शाह के वीडियो से छेड़छाड़ कर उनका झूठा बयान प्रकाशित किया था।

इस मामले में सिर्फ रेवंत रेड्डी ही नहीं, बल्कि 5 अन्य लोगों को भी समन भेजा गया है जिनमें कुछ कॉन्ग्रेस के नेता हैं। इन सभी ने अमित शाह के डॉक्टर्ड वीडियो को शेयर किया था। केंद्रीय गृह मंत्रालय और भारतीय जनता पार्टी ने भी इस मामले में शिकायत दर्ज कराई थी। आरोप लगाया गया है कि समाज में विभिन्न समुदायों में वैमनस्य फैलाने के उद्देश्य से ये वीडियो प्रसारित किया गया, जिससे कानून-व्यवस्था और सार्वजनिक शांति के भंग होने की आशंका है।

रेवंत रेड्डी को दिल्ली पुलिस के IFSO (साइबर सेल) के समक्ष पेश होने के लिए कहा गया है। असल में अमित शाह ने आरोप लगाया था कि कॉन्ग्रेस सत्ता में आएगी तो SC, ST और OBC का आरक्षण छीन कर मुस्लिमों को दे देगी, जबकि कॉन्ग्रेस ने वीडियो को एडिट कर कुछ और ही झूठ दुष्प्रचारित करवा दिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कई बार कह चुके हैं कि वो पिछड़ों के आरक्षण की रक्षा करेंगे। वो कह चुके हैं कि आरक्षण कोई नहीं हटा सकता। इस मामले में पुलिस ने असम से रीतम सिंह नामक एक शख्स को गिरफ्तार भी किया है, जो असम में कॉन्ग्रेस का सोशल मीडिया देखता है।

गैर-मुस्लिमों पर शरिया लागू होगा या नहीं? – अब सुप्रीम कोर्ट करेगा फैसला, याचिका में बलि केरल की महिला – हमें भारत के सेक्युलर कानून के तहत आने का मौका मिले

पूर्व मुस्लिमों पर शरिया कानून लागू होना या नहीं? अब सुप्रीम कोर्ट इस बड़े मुद्दे पर सुनवाई करने वाला है। सवाल है कि या Ex Muslims 1937 के शरीयत कानून के तहत ही प्रशासित किए जाते रहेंगे या फिर उन पर भारत का धर्मनिरपेक्ष कानून लागू होगा? खासकर, संपत्ति और वसीयत के संबंध में। केरल की एक महिला द्वारा दायर रिट याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने नोटिस भी जारी किया। सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस DY चंद्रचूड़ के नेतृत्व वाले 3 सदस्यीय पीठ ने इस मामले पर सुनवाई की।

साफिया पीएम ने ये याचिका दायर की है। ‘एक्स मुस्लिम्स ऑफ केरल’ संगठन की जनरल सेक्रेटरी सफिया ने सुप्रीम कोर्ट से ये आदेश पारित करने का निवेदन किया है कि इस्लाम मजहब छोड़ चुके जो लोग शरीयत की जगह भारत के सेक्युलर कानून के अंतर्गत आना चाहें, उन्हें इसकी अनुमति दी जाए। यानी, संपत्ति एवं वसीयत के मामले में उन्हें इंडियन सक्सेशन एक्ट, 1925 के अंतर्गत आया जाए। सुप्रीम कोर्ट ने इसे महत्वपूर्ण मसला बताते हुए अटॉर्नी जनरल से कहा कि वो एक कानूनी अधिकारी को नियुक्त करे, जो सुप्रीम कोर्ट की सहायता करे।

पहले तो सुप्रीम कोर्ट की पीठ इस मामले को सुनने से हिचक रही थी, साथ ही ये भी कहा कि जब तक अपनी वसीयत बना रहा शख्स ‘मुस्लिम पर्सनल लॉ (शरीयत) एप्लिकेशन एक्ट’, 1937 के सेक्शन-3 के तहत खुद घोषणा न की हो तब तक ये कानून लागू होगा। एडॉप्शन में भी शरिया ही लागू होगा। अगर घोषणा नहीं की गई तो फिर पर्सनल लॉ के तहत ही चीजों का फैसला होगा। पीठ में जस्टिस मनोज मिश्रा और जस्टिस JB पार्डीवाला भी शामिल थे।

CJI डीवाई चंद्रचूड़ ने साफिया के वकील प्रशांत पद्मनाभन से सहमति जताते हुए कहा, “यहाँ एक समस्या है। क्योंकि, अगर आप घोषणा नहीं करते हैं तो तब भी यहाँ एक शून्य है क्योंकि सेक्युलर लॉ अप्लाई होगा ही नहीं। जब हमने पढ़ना शुरू किया तो कहा कि ये भला किस तरह की याचिका है। अब जब आप इसके भीतर घुस चुके हैं, ये एक महत्वपूर्ण बिंदु है। हमलोग नोटिस जारी करेंगे।” याचिकाकर्ता का कहना है कि उसका जन्म इस्लाम में हुआ था, उसके अब्बा एक नॉन-प्रैक्टिसिंग मुस्लिम हैं।

याचिका के मुताबिक, उसके मुस्लिम अब्बा ने आधिकारिक रूप से मजहब नहीं छोड़ा है, ऐसे में वो अपनी बेटी के अधिकारों को सुरक्षित रखने में समस्या का सामना कर रहे हैं। वो चाहती है कि उस पर शरिया न लागू हो, लेकिन कानून में ऐसा कोई प्रावधान ही नहीं है। यानी, एक शून्य है जिस पर न्यायपालिका ही कुछ कर सकती है। अगर वो नो-रिलिजन या नो-कास्ट सर्टिफिकेट ले ले, तब भी भारत के धर्मनिरपेक्ष कानून के तहत विरासत और वसीयत का अधिकार उसे नहीं मिलेगा।

बस स्टेशन पर साफ़ करती हैं गन्दगी, वीडियो हुआ था वायरल: साधारण महिला नहीं हैं फल बेचने वाली मोहिनी गौड़ा, जिनसे कर्नाटक में मिले PM मोदी

कर्नाटक में चुनाव प्रचार के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फल बेचने वाली मोहिनी गौड़ा से मुलाकात की। मोहिना गौड़ा फल बेचती हैं और इस दौरान छूट गए फल के छिलकों और कूड़े को उठाकर कूड़ेदान में डाल देती हैं।

मोहिनी गौड़ा द्वारा कूड़ा और फलों के छिलके को बोटकर कूड़ेदान में डालने का वीडियो किसी ने शूट कर लिया था और सोशल मीडिया पर वो वीडियो वायरल हो गया था। देश के जाने माने लोगों ने मोहिनी के हौसले की तारीफ की थी। अब प्रधानमंत्री ने उनसे मुलाकात करके तारीफ की है।

कर्नाटक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का हेलीकॉप्टर जब लैंड हुआ, तब उन्होंने मोहिनी से मुलाकात की और उनका हौसला बढ़ाया। पीएम मोदी ने मोहिनी गौड़ा की तारीफ करते हुए कहा कि उन्होंने समाज के सामने अच्छा उदाहरण पेश किया है।

बता दें कि मोहिनी गौड़ा कर्नाटक के अंकोला बस स्टेशन पर फल बेचने का काम करती है। वह फलों को पत्तियों में बाँधकर बेचती है। वहीं जब कोई फल खरीदकर पत्तों को बस की खिड़की से नीचे फेंक देता है तो वो पत्तों को उठाकर कचरे के डिब्बे में फेंकती है। वीडियो को सोशल मीडिया पर आदर्श हेगड़े ने अपने ट्विटर अकाउंट से शेयर किया था।

इस वीडियो ने उद्योगपति और महिंद्रा एंड महिंद्रा के चेयरमैन आनंद महिंद्रा को भी काफी प्रभावित किया। आदर्श हेगड़े के ट्वीट को रीट्वीट करते हुए उन्होंने लिखा- ‘ये हैं भारत के स्वच्छ बनाने वाले असली हीरो।’ इसके साथ ही उन्होंने महिला की काफी सराहना भी की थी।

वीडियो को देखने के बाद अन्य सोशल मीडिया यूजर्स ने भी महिला की तारीफ की। ऐसे में अब पीएम मोदी ने मोहिनी गौड़ा से मुलाकात कर उनकी तारीफ की है।

अतीक, मुख्तार और शहाबुद्दीन जैसे ‘माफियाओं’ की याद में समाजवादी पार्टी को डालें वोट: चुनावी रैली में सपा नेता उस्मान की अपील; अखिलेश यादव ने बताया ‘सौहार्द’

उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जिले में समाजवादी पार्टी की जनसभा में उत्तर प्रदेश और बिहार के माफियाओं के नाम से वोट माँगे गए हैं। अखिलेश यादव की मौजूदगी में हुई इस जनसभा में मर चुके शहाबुद्दीन, अतीक अहमद, अशरफ और मुख़्तार अंसारी जैसे ‘माफियाओं’ की याद में वोट डालने की अपील की गई है। रैली में आजम खान को भी याद करके उन पर हो रही कानूनी कार्रवाई को जुल्म बताया गया है। सपा समर्थकों और मंच पर मौजूद पदाधिकरियों ने विरोध करने के बजाय तालियाँ बजा कर इस भाषण का स्वागत किया है। यह जनसभा रविवार (28 मार्च 2024) को आयोजित हुई थी।

मिली जानकारी के मुताबिक, यह जनसभा संभल लोकसभा क्षेत्र के चुनाव प्रचार के दौरान हुई थी। यहाँ से समाजवादी पार्टी ने जियाउर्रहमान को चुनावी मैदान में उतारा है। जियाउर्रहमान विवादित बयानों ने लिए कुख्यात रहे हैं और महरूम हो चुके शफीकुर्रहमान के पोते हैं। वह फिलहाल समाजवादी पार्टी के टिकट पर कुंदरकी विधानसभा से विधायक हैं। मंच पर अखिलेश यादव सहित सपा के तमाम वरिष्ठ नेता मौजूद थे। इसी दौरान सीनियर समाजवादी नेता मोहम्मद उस्मान ने माइक संभाला।

मोहम्मद उस्मान ने माइक संभालने पर पहले अखिलेश सहित तमाम लोगों का अभिवादन किया। इसके बाद उन्होंने आपत्तिजनक बयानबायजी करनी शुरू कर दी। अपने सम्बोधन के दौरान मोहम्मद उस्मान ने पहले 2 बार माइक पर जोर-जोर से खाँसा। फिर लम्बी साँस भरी और फिर माफियाओं का महिमामंडन करना शुरू कर दिया। उन्होंने पहले अपराधियों की काली कमाई कुचल रहे बुलडोजर एक्शन को निशाने पर लिया। उस्मान ने अपील की है कि सपा समर्थक बुलडोजर की कार्रवाई के खिलाफ समाजवादी पार्टी को वोट दें। उस्मान का यह वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

मोहम्मद उस्मान ने बुलडोजर के खिलाफ यह लाइन बोल कर मंच पर मौजूद अपनी पार्टी के नेताओं का मन भाँपा। उनके चेहरे पर मुस्कान देख कर उस्मान और जोश में आ गए। उन्होंने कभी उत्तर प्रदेश से लेकर बिहार तक में फैले उन सभी माफियाओं को गिना दिया जो किसी न किसी कारण से अब दुनिया में नहीं हैं। उस्मान ने कहा, “शहाबुद्दीन, अतीक, अशरफ, मुख़्तार को याद करते हुए, उनको ध्यान करते हुए वोट करें।” उस्मान की इन लाइनों पर भी मंच और नीचे जोर-जोर से तालियाँ बजीं।

बताते चलें कि शहाबुद्दीन, अतीक अहमद, मुख़्तार अंसारी और अशरफ जैसे माफियाओं पर न सिर्फ हिन्दू समुदाय बल्कि अपने ही इस्लाम मत को मानने वालों पर तमाम जुल्म करने के केसों की फाइलें आज भी मौजूद हैं। जुल्म के शिकार लोगों में इन माफियाओं के रिश्तेदार भी शामिल हैं। अपने नेताओं से समर्थन मिलता देख मोहम्मद उस्मान का जोश और बढ़ गया। उन्होंने आजम खान पर चल रही कानूनी और न्यायिक कार्रवाई को भी जुल्म घोषित कर दिया और इसके नाम पर भी वोट माँगे। यहाँ जानना जरूरी है कि मोहम्मद उस्मान बिलारी से सपा विधायक मोहम्म्द फहीम इरफ़ान के चाचा हैं।

उस्मान ने दिल्ली में सड़क पर नमाज पढ़ रही भीड़ को बल प्रयोग कर के हटाने वाले सब इंस्पेक्टर मनोज तोमर का भी जिक्र इशारों में किया। उन्होंने कहा कि सपा समर्थक उस घटना को वोट देने से पहले याद करें। उस्मान जैसे नेताओं की बयानबाजी को सौहार्द घोषित करते हुए अखिलेश यादव ने इस सभा के चित्र अपने X हैंडल पर शेयर किए हैं। उन्होंने PDA की जीत का भरोसा जताया है।

कोई वीडियो को बता रहा Deepfake, को कह रहा एडिटेड… राजा-महाराजाओं पर राहुल गाँधी के बयान के बाद बैकफुट पर कॉन्ग्रेस, जातिवादी हैंडल्स भी कर रहे बचाव

कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी की राजा-महाराजों को लेकर अपमानजनक वीडियो के सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद कॉन्ग्रेस अब बैकफुट पर है। इस पर डैमेज कंट्रोल का प्रयास हो रहा है। राहुल गाँधी के इस बयान पर गुजरात में चर्चा जोरों पर है क्योंकि इससे पहले क्षत्रिय समाज का एक धडा भाजपा नेता परषोत्तम रुपाला के राजा महाराजों को लेकर ऐसे ही बयान पर भाजपा का बहिष्कार कर रहा था।

अब यह प्रश्न उठ रहा है कि जब परषोत्तम रुपाला की टिप्पणियों के कारण भाजपा के बहिष्कार का अभियान कई समूहों ने चलाया, तो क्या अब ऐसा ही अभियान कॉन्ग्रेस और राहुल गाँधी के विरुद्ध चलाया जाएगा। वहीं इस बीच सोशल मीडिया पर दावा किया जा रहा है कि राहुल गाँधी का यह वीडियो फर्जी है और इसे साजिश के तहत बनाया गया है।

फेसबुक और व्हाट्सएप पर भी ऐसी कई पोस्ट घूम रही हैं जिनमें लिखा है, “क्षत्रिय समाज जोग का यह विशेष सन्देश है। क्षत्रिय समाज की एकता और क्षत्रिय समाज को दूसरे समाज से मिले समर्थन को देख कर भाजपा को अपनी हार स्पष्ट रूप से दिख रही है। भाजपा हार से बचने के लिए किसी भी हद तक जा सकती है।”

इसके बाद दावा किया गया कि भाजपा के आईटी सेल ने कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी का एक फर्जी वीडियो वायरल करना चालू किया है जो कि डीपफेक है और हैक करके बनाया गया है। इस सन्देश में आगे लिखा गया कि हम इस वीडियो के कारण रास्ते से भटकेंगे नहीं और हमारा लक्ष्य निष्पक्ष रहना है। यह सन्देश कई सोशल मीडिया पोस्ट की कमेंट्स में दिख रहा है लेकिन यह तथ्यों से परे है।

दरअसल, सोशल मीडिया पर वायरल होने वाले राहुल गाँधी के जिस बयान को झुठलाने की बात हो रही है, वह एकदम सच है। ऐसा भी नहीं है कि यह वीडियो पुराना है और अब वायरल किया जा रहा है। यह वीडियो हाल का ही है, राहुल गाँधी ने राजा महाराजों से सम्बन्धित यह बयान कर्नाटक के बेल्लारी में शुक्रवार (26 अप्रैल, 2024) को दिया था।

राहुल गाँधी ने यहाँ कहा था, “संविधान देश के लोगों को आरक्षण और अधिकार देता है। संविधान से पहले गरीब, पिछड़ों, दलितों और जनजातियों को इस देश में कोई भी अधिकार नहीं मिला हुआ था। यहाँ राजा महाराजों का राज था, जो उनकी मर्जी में आता था, करते रहते थे। अगर उनको किसी को जमीन चाहिए होती थी, तो वह उसे ले लेते थे।”

यह बोलते राहुल गाँधी की वीडियो उनके यूट्यूब चैनल पर अपलोड भी की गई है। यह वीडियो 26 अप्रैल को अपलोड की गई है। राहुल गाँधी का बयान नीचे लगे वीडियो में 3 मिनट 39 सेकंड के बाद सुना जा सकता है। इसका स्पष्ट अर्थ है कि यह वीडियो भाजपा आईटी सेल या अन्य किसी द्वारा एडिट नहीं किया गया और ना ही डीपफेक बनाया गया ।

निष्कर्ष के रूप में यह कहा जा सकता है कि यह दावा कि राहुल गाँधी का राजा-महाराजों पर दिया गया बयान फर्जी या डीपफेक नहीं है। इसका वीडियो भी यूट्यूब पर पड़ा हुआ है जिस्मने जिसमें यह हिस्सा स्पष्ट से सुना जा सकता है।