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‘एक आदमी (शाहजहाँ शेख) को बचाने के लिए क्यों आ रहे?’: ममता सरकार को सुप्रीम कोर्ट की फटकार, संदेशखाली मामले में नहीं चाहती थी CBI जाँच

सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल की ममता सरकार को कड़ी फटकार लगाई है। सुप्रीम कोर्ट में संदेशखाली में जमीन हड़पने और यौन उत्पीड़न के मामले में सीबीआई जाँच पर रोक लगाने की माँग वाली याचिका को लेकर बंगाल सरकार की खूब किरकिरी हुई है।

सुप्रीम कोर्ट ने बंगाल की ममता बनर्जी सरकार की संदेशखाली सम्बन्धित CBI जाँच को लेकर एक याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा टिप्पणी की, “आखिर राज्य एक याचिकाकर्ता बन कर एक आदमी के हितों को बचाने के लिए क्यों आ रहा है?” यह टिप्पणी जस्टिस बी आर गवई ने की।

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में गर्मी को छुट्टियों के बाद सुनने का निर्णय किया है। सुप्रीम कोर्ट से बंगाल सरकार ने अपील की थी कि इसे बाद में सुना जाए। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस याचिका के लंबित होने का फायदा किसी और मामले में नहीं उठाया जाएगा। इस बात को लेकर बंगाल सरकार के वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने सुप्रीम कोर्ट के सामने रजामंदी दी।

सुप्रीम कोर्ट में बंगाल सरकार ने संदेशखाली मामले में CBI जाँच को रोकने की माँग की थी। इसको लेकर एक याचिका लगाई गई थी। बंगाल सरकार ने यह याचिका कलकत्ता हाई कोर्ट के निर्णय के विरुद्ध डाली थी, हाई कोर्ट ने संदेशखाली में जमीन हडपने और यौन शोषण के आरोपों की जाँच CBI को करने का आदेश दिया था।

कलकत्ता हाई कोर्ट ने संदेशखाली में जमीन हड़पने और यौन शोषण के आरोपों को लेकर जाँच के निष्पक्ष हो, इसके लिए बंगाल सरकार को CBI को सहयोग देने को कहा था। इसके बाद संदेशखाली मामले की जाँच राज्य पुलिस के हाथों से CBI के पास आ गई थी।

गौरतलब है कि जनवरी 2024 में प्रवर्तन निदेशालय की एक टीम संदेशखाली में स्थानीय तृणमूल कॉन्ग्रेस नेता शाहजहाँ शेख से पूछताछ करने गई थी। यह पूछताछ राशन घोटाला मामले में होनी थी। इस टीम पर शाहजहाँ के गुंडों ने हमला कर दिया था। इस हमले में कई अधिकारी घायल हो गए थे।

इसके एक माह बाद संदेशखाली की पूरी सच्चाई बाहर आनी चालू हुई थी। संदेशखाली की महिलाओं ने बताया था कि शाहजहाँ शेख और उसके आदमी महिलाओं का यौन शोषण करते थे। इसके अलावा शाहजहाँ शेख ने यहाँ के कई लोगों की जमीन हथियाई हुई थी।

वह उनकी जमीन पर मछली पालता था। लोगों को जमीन का ना उचित पैसा दिया गया था और ना ही उन्हें मजदूरी मिलती थी। अपना पैसा माँगने पर लोगों को मारने की धमकी मिलती थी। यह पूरा मामला सामने आने के बाद शाहजहाँ शेख को गिरफ्तार कर लिया गया था।

तेलंगाना CM रेवंत रेड्डी को दिल्ली पुलिस का समन, कहा – मोबाइल भी लेकर आइए: कॉन्ग्रेस ने वायरल किया था अमित शाह का फर्जी वीडियो, असम से पार्टी नेता गिरफ्तार

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का एक डीपफेक वीडियो वायरल हुआ था, जिसके आधार पर कॉन्ग्रेस ने दावा किया था कि वो आरक्षण को खत्म करने की बातें कर रहे हैं। अब इस मामले में दिल्ली पुलिस ने FIR दर्ज करने के बाद तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी को समन भेजा है। रेवंत रेड्डी, दिसंबर 2023 से न सिर्फ CM हैं, बल्कि पिछले 3 वर्षों से पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष भी हैं। 54 वर्षीय रेवंत रेड्डी TDP 2017 में कॉन्ग्रेस में शामिल हुए थे और पार्टी ने उन्हें नेतृत्व देकर भरोसा जताया।

अब सोमवार (29 अप्रैल, 2024) को दिल्ली पुलिस ने उन्हें समन भेजा है। कहा गया है कि वो 1 मई को पेश होकर अपना बयान दर्ज कराएँ। साथ ही ये भी कहा गया है कि जाँच के लिए वो अपने फोन-लैपटॉप इत्यादि जैसे इलेक्ट्रॉनिक उपकरण भी साथ लेकर आएँ। ‘इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर’ की शिकायत पर दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने ये FIR दर्ज की है। तेलंगाना कॉन्ग्रेस ने सबसे पहले अमित शाह के वीडियो से छेड़छाड़ कर उनका झूठा बयान प्रकाशित किया था।

इस मामले में सिर्फ रेवंत रेड्डी ही नहीं, बल्कि 5 अन्य लोगों को भी समन भेजा गया है जिनमें कुछ कॉन्ग्रेस के नेता हैं। इन सभी ने अमित शाह के डॉक्टर्ड वीडियो को शेयर किया था। केंद्रीय गृह मंत्रालय और भारतीय जनता पार्टी ने भी इस मामले में शिकायत दर्ज कराई थी। आरोप लगाया गया है कि समाज में विभिन्न समुदायों में वैमनस्य फैलाने के उद्देश्य से ये वीडियो प्रसारित किया गया, जिससे कानून-व्यवस्था और सार्वजनिक शांति के भंग होने की आशंका है।

रेवंत रेड्डी को दिल्ली पुलिस के IFSO (साइबर सेल) के समक्ष पेश होने के लिए कहा गया है। असल में अमित शाह ने आरोप लगाया था कि कॉन्ग्रेस सत्ता में आएगी तो SC, ST और OBC का आरक्षण छीन कर मुस्लिमों को दे देगी, जबकि कॉन्ग्रेस ने वीडियो को एडिट कर कुछ और ही झूठ दुष्प्रचारित करवा दिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कई बार कह चुके हैं कि वो पिछड़ों के आरक्षण की रक्षा करेंगे। वो कह चुके हैं कि आरक्षण कोई नहीं हटा सकता। इस मामले में पुलिस ने असम से रीतम सिंह नामक एक शख्स को गिरफ्तार भी किया है, जो असम में कॉन्ग्रेस का सोशल मीडिया देखता है।

गैर-मुस्लिमों पर शरिया लागू होगा या नहीं? – अब सुप्रीम कोर्ट करेगा फैसला, याचिका में बलि केरल की महिला – हमें भारत के सेक्युलर कानून के तहत आने का मौका मिले

पूर्व मुस्लिमों पर शरिया कानून लागू होना या नहीं? अब सुप्रीम कोर्ट इस बड़े मुद्दे पर सुनवाई करने वाला है। सवाल है कि या Ex Muslims 1937 के शरीयत कानून के तहत ही प्रशासित किए जाते रहेंगे या फिर उन पर भारत का धर्मनिरपेक्ष कानून लागू होगा? खासकर, संपत्ति और वसीयत के संबंध में। केरल की एक महिला द्वारा दायर रिट याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने नोटिस भी जारी किया। सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस DY चंद्रचूड़ के नेतृत्व वाले 3 सदस्यीय पीठ ने इस मामले पर सुनवाई की।

साफिया पीएम ने ये याचिका दायर की है। ‘एक्स मुस्लिम्स ऑफ केरल’ संगठन की जनरल सेक्रेटरी सफिया ने सुप्रीम कोर्ट से ये आदेश पारित करने का निवेदन किया है कि इस्लाम मजहब छोड़ चुके जो लोग शरीयत की जगह भारत के सेक्युलर कानून के अंतर्गत आना चाहें, उन्हें इसकी अनुमति दी जाए। यानी, संपत्ति एवं वसीयत के मामले में उन्हें इंडियन सक्सेशन एक्ट, 1925 के अंतर्गत आया जाए। सुप्रीम कोर्ट ने इसे महत्वपूर्ण मसला बताते हुए अटॉर्नी जनरल से कहा कि वो एक कानूनी अधिकारी को नियुक्त करे, जो सुप्रीम कोर्ट की सहायता करे।

पहले तो सुप्रीम कोर्ट की पीठ इस मामले को सुनने से हिचक रही थी, साथ ही ये भी कहा कि जब तक अपनी वसीयत बना रहा शख्स ‘मुस्लिम पर्सनल लॉ (शरीयत) एप्लिकेशन एक्ट’, 1937 के सेक्शन-3 के तहत खुद घोषणा न की हो तब तक ये कानून लागू होगा। एडॉप्शन में भी शरिया ही लागू होगा। अगर घोषणा नहीं की गई तो फिर पर्सनल लॉ के तहत ही चीजों का फैसला होगा। पीठ में जस्टिस मनोज मिश्रा और जस्टिस JB पार्डीवाला भी शामिल थे।

CJI डीवाई चंद्रचूड़ ने साफिया के वकील प्रशांत पद्मनाभन से सहमति जताते हुए कहा, “यहाँ एक समस्या है। क्योंकि, अगर आप घोषणा नहीं करते हैं तो तब भी यहाँ एक शून्य है क्योंकि सेक्युलर लॉ अप्लाई होगा ही नहीं। जब हमने पढ़ना शुरू किया तो कहा कि ये भला किस तरह की याचिका है। अब जब आप इसके भीतर घुस चुके हैं, ये एक महत्वपूर्ण बिंदु है। हमलोग नोटिस जारी करेंगे।” याचिकाकर्ता का कहना है कि उसका जन्म इस्लाम में हुआ था, उसके अब्बा एक नॉन-प्रैक्टिसिंग मुस्लिम हैं।

याचिका के मुताबिक, उसके मुस्लिम अब्बा ने आधिकारिक रूप से मजहब नहीं छोड़ा है, ऐसे में वो अपनी बेटी के अधिकारों को सुरक्षित रखने में समस्या का सामना कर रहे हैं। वो चाहती है कि उस पर शरिया न लागू हो, लेकिन कानून में ऐसा कोई प्रावधान ही नहीं है। यानी, एक शून्य है जिस पर न्यायपालिका ही कुछ कर सकती है। अगर वो नो-रिलिजन या नो-कास्ट सर्टिफिकेट ले ले, तब भी भारत के धर्मनिरपेक्ष कानून के तहत विरासत और वसीयत का अधिकार उसे नहीं मिलेगा।

बस स्टेशन पर साफ़ करती हैं गन्दगी, वीडियो हुआ था वायरल: साधारण महिला नहीं हैं फल बेचने वाली मोहिनी गौड़ा, जिनसे कर्नाटक में मिले PM मोदी

कर्नाटक में चुनाव प्रचार के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फल बेचने वाली मोहिनी गौड़ा से मुलाकात की। मोहिना गौड़ा फल बेचती हैं और इस दौरान छूट गए फल के छिलकों और कूड़े को उठाकर कूड़ेदान में डाल देती हैं।

मोहिनी गौड़ा द्वारा कूड़ा और फलों के छिलके को बोटकर कूड़ेदान में डालने का वीडियो किसी ने शूट कर लिया था और सोशल मीडिया पर वो वीडियो वायरल हो गया था। देश के जाने माने लोगों ने मोहिनी के हौसले की तारीफ की थी। अब प्रधानमंत्री ने उनसे मुलाकात करके तारीफ की है।

कर्नाटक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का हेलीकॉप्टर जब लैंड हुआ, तब उन्होंने मोहिनी से मुलाकात की और उनका हौसला बढ़ाया। पीएम मोदी ने मोहिनी गौड़ा की तारीफ करते हुए कहा कि उन्होंने समाज के सामने अच्छा उदाहरण पेश किया है।

बता दें कि मोहिनी गौड़ा कर्नाटक के अंकोला बस स्टेशन पर फल बेचने का काम करती है। वह फलों को पत्तियों में बाँधकर बेचती है। वहीं जब कोई फल खरीदकर पत्तों को बस की खिड़की से नीचे फेंक देता है तो वो पत्तों को उठाकर कचरे के डिब्बे में फेंकती है। वीडियो को सोशल मीडिया पर आदर्श हेगड़े ने अपने ट्विटर अकाउंट से शेयर किया था।

इस वीडियो ने उद्योगपति और महिंद्रा एंड महिंद्रा के चेयरमैन आनंद महिंद्रा को भी काफी प्रभावित किया। आदर्श हेगड़े के ट्वीट को रीट्वीट करते हुए उन्होंने लिखा- ‘ये हैं भारत के स्वच्छ बनाने वाले असली हीरो।’ इसके साथ ही उन्होंने महिला की काफी सराहना भी की थी।

वीडियो को देखने के बाद अन्य सोशल मीडिया यूजर्स ने भी महिला की तारीफ की। ऐसे में अब पीएम मोदी ने मोहिनी गौड़ा से मुलाकात कर उनकी तारीफ की है।

अतीक, मुख्तार और शहाबुद्दीन जैसे ‘माफियाओं’ की याद में समाजवादी पार्टी को डालें वोट: चुनावी रैली में सपा नेता उस्मान की अपील; अखिलेश यादव ने बताया ‘सौहार्द’

उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जिले में समाजवादी पार्टी की जनसभा में उत्तर प्रदेश और बिहार के माफियाओं के नाम से वोट माँगे गए हैं। अखिलेश यादव की मौजूदगी में हुई इस जनसभा में मर चुके शहाबुद्दीन, अतीक अहमद, अशरफ और मुख़्तार अंसारी जैसे ‘माफियाओं’ की याद में वोट डालने की अपील की गई है। रैली में आजम खान को भी याद करके उन पर हो रही कानूनी कार्रवाई को जुल्म बताया गया है। सपा समर्थकों और मंच पर मौजूद पदाधिकरियों ने विरोध करने के बजाय तालियाँ बजा कर इस भाषण का स्वागत किया है। यह जनसभा रविवार (28 मार्च 2024) को आयोजित हुई थी।

मिली जानकारी के मुताबिक, यह जनसभा संभल लोकसभा क्षेत्र के चुनाव प्रचार के दौरान हुई थी। यहाँ से समाजवादी पार्टी ने जियाउर्रहमान को चुनावी मैदान में उतारा है। जियाउर्रहमान विवादित बयानों ने लिए कुख्यात रहे हैं और महरूम हो चुके शफीकुर्रहमान के पोते हैं। वह फिलहाल समाजवादी पार्टी के टिकट पर कुंदरकी विधानसभा से विधायक हैं। मंच पर अखिलेश यादव सहित सपा के तमाम वरिष्ठ नेता मौजूद थे। इसी दौरान सीनियर समाजवादी नेता मोहम्मद उस्मान ने माइक संभाला।

मोहम्मद उस्मान ने माइक संभालने पर पहले अखिलेश सहित तमाम लोगों का अभिवादन किया। इसके बाद उन्होंने आपत्तिजनक बयानबायजी करनी शुरू कर दी। अपने सम्बोधन के दौरान मोहम्मद उस्मान ने पहले 2 बार माइक पर जोर-जोर से खाँसा। फिर लम्बी साँस भरी और फिर माफियाओं का महिमामंडन करना शुरू कर दिया। उन्होंने पहले अपराधियों की काली कमाई कुचल रहे बुलडोजर एक्शन को निशाने पर लिया। उस्मान ने अपील की है कि सपा समर्थक बुलडोजर की कार्रवाई के खिलाफ समाजवादी पार्टी को वोट दें। उस्मान का यह वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

मोहम्मद उस्मान ने बुलडोजर के खिलाफ यह लाइन बोल कर मंच पर मौजूद अपनी पार्टी के नेताओं का मन भाँपा। उनके चेहरे पर मुस्कान देख कर उस्मान और जोश में आ गए। उन्होंने कभी उत्तर प्रदेश से लेकर बिहार तक में फैले उन सभी माफियाओं को गिना दिया जो किसी न किसी कारण से अब दुनिया में नहीं हैं। उस्मान ने कहा, “शहाबुद्दीन, अतीक, अशरफ, मुख़्तार को याद करते हुए, उनको ध्यान करते हुए वोट करें।” उस्मान की इन लाइनों पर भी मंच और नीचे जोर-जोर से तालियाँ बजीं।

बताते चलें कि शहाबुद्दीन, अतीक अहमद, मुख़्तार अंसारी और अशरफ जैसे माफियाओं पर न सिर्फ हिन्दू समुदाय बल्कि अपने ही इस्लाम मत को मानने वालों पर तमाम जुल्म करने के केसों की फाइलें आज भी मौजूद हैं। जुल्म के शिकार लोगों में इन माफियाओं के रिश्तेदार भी शामिल हैं। अपने नेताओं से समर्थन मिलता देख मोहम्मद उस्मान का जोश और बढ़ गया। उन्होंने आजम खान पर चल रही कानूनी और न्यायिक कार्रवाई को भी जुल्म घोषित कर दिया और इसके नाम पर भी वोट माँगे। यहाँ जानना जरूरी है कि मोहम्मद उस्मान बिलारी से सपा विधायक मोहम्म्द फहीम इरफ़ान के चाचा हैं।

उस्मान ने दिल्ली में सड़क पर नमाज पढ़ रही भीड़ को बल प्रयोग कर के हटाने वाले सब इंस्पेक्टर मनोज तोमर का भी जिक्र इशारों में किया। उन्होंने कहा कि सपा समर्थक उस घटना को वोट देने से पहले याद करें। उस्मान जैसे नेताओं की बयानबाजी को सौहार्द घोषित करते हुए अखिलेश यादव ने इस सभा के चित्र अपने X हैंडल पर शेयर किए हैं। उन्होंने PDA की जीत का भरोसा जताया है।

कोई वीडियो को बता रहा Deepfake, को कह रहा एडिटेड… राजा-महाराजाओं पर राहुल गाँधी के बयान के बाद बैकफुट पर कॉन्ग्रेस, जातिवादी हैंडल्स भी कर रहे बचाव

कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी की राजा-महाराजों को लेकर अपमानजनक वीडियो के सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद कॉन्ग्रेस अब बैकफुट पर है। इस पर डैमेज कंट्रोल का प्रयास हो रहा है। राहुल गाँधी के इस बयान पर गुजरात में चर्चा जोरों पर है क्योंकि इससे पहले क्षत्रिय समाज का एक धडा भाजपा नेता परषोत्तम रुपाला के राजा महाराजों को लेकर ऐसे ही बयान पर भाजपा का बहिष्कार कर रहा था।

अब यह प्रश्न उठ रहा है कि जब परषोत्तम रुपाला की टिप्पणियों के कारण भाजपा के बहिष्कार का अभियान कई समूहों ने चलाया, तो क्या अब ऐसा ही अभियान कॉन्ग्रेस और राहुल गाँधी के विरुद्ध चलाया जाएगा। वहीं इस बीच सोशल मीडिया पर दावा किया जा रहा है कि राहुल गाँधी का यह वीडियो फर्जी है और इसे साजिश के तहत बनाया गया है।

फेसबुक और व्हाट्सएप पर भी ऐसी कई पोस्ट घूम रही हैं जिनमें लिखा है, “क्षत्रिय समाज जोग का यह विशेष सन्देश है। क्षत्रिय समाज की एकता और क्षत्रिय समाज को दूसरे समाज से मिले समर्थन को देख कर भाजपा को अपनी हार स्पष्ट रूप से दिख रही है। भाजपा हार से बचने के लिए किसी भी हद तक जा सकती है।”

इसके बाद दावा किया गया कि भाजपा के आईटी सेल ने कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी का एक फर्जी वीडियो वायरल करना चालू किया है जो कि डीपफेक है और हैक करके बनाया गया है। इस सन्देश में आगे लिखा गया कि हम इस वीडियो के कारण रास्ते से भटकेंगे नहीं और हमारा लक्ष्य निष्पक्ष रहना है। यह सन्देश कई सोशल मीडिया पोस्ट की कमेंट्स में दिख रहा है लेकिन यह तथ्यों से परे है।

दरअसल, सोशल मीडिया पर वायरल होने वाले राहुल गाँधी के जिस बयान को झुठलाने की बात हो रही है, वह एकदम सच है। ऐसा भी नहीं है कि यह वीडियो पुराना है और अब वायरल किया जा रहा है। यह वीडियो हाल का ही है, राहुल गाँधी ने राजा महाराजों से सम्बन्धित यह बयान कर्नाटक के बेल्लारी में शुक्रवार (26 अप्रैल, 2024) को दिया था।

राहुल गाँधी ने यहाँ कहा था, “संविधान देश के लोगों को आरक्षण और अधिकार देता है। संविधान से पहले गरीब, पिछड़ों, दलितों और जनजातियों को इस देश में कोई भी अधिकार नहीं मिला हुआ था। यहाँ राजा महाराजों का राज था, जो उनकी मर्जी में आता था, करते रहते थे। अगर उनको किसी को जमीन चाहिए होती थी, तो वह उसे ले लेते थे।”

यह बोलते राहुल गाँधी की वीडियो उनके यूट्यूब चैनल पर अपलोड भी की गई है। यह वीडियो 26 अप्रैल को अपलोड की गई है। राहुल गाँधी का बयान नीचे लगे वीडियो में 3 मिनट 39 सेकंड के बाद सुना जा सकता है। इसका स्पष्ट अर्थ है कि यह वीडियो भाजपा आईटी सेल या अन्य किसी द्वारा एडिट नहीं किया गया और ना ही डीपफेक बनाया गया ।

निष्कर्ष के रूप में यह कहा जा सकता है कि यह दावा कि राहुल गाँधी का राजा-महाराजों पर दिया गया बयान फर्जी या डीपफेक नहीं है। इसका वीडियो भी यूट्यूब पर पड़ा हुआ है जिस्मने जिसमें यह हिस्सा स्पष्ट से सुना जा सकता है।

फिलीस्तीन की आजादी चिल्ला रहे थे प्रदर्शनकारी, युवक ने जोर-जोर से लगाए ‘जय श्रीराम’ के नारे: जानें कौन हैं वायरल शयान, इस्लाम छोड़ अपना चुके हैं सनातन

अमेरिका की यूनिवर्सिटियों में चल रहे फिलीस्तीन की आजादी के लिए चल रहे प्रदर्शन के खिलाफ एक तरफ जहाँ प्रशासन सख्त है तो दूसरी ओर अन्य लोगों में भी इसका गुस्सा दिखने लगा है। हाल में वहाँ प्रदर्शनकारियों को उग्र होता देख एक व्यक्ति ने अकेले खड़े होकर फिलीस्तीन समर्थकों का विरोध किया। उसकी एक वीडियो भी सामने आई है। इसमें वह जोर-जोर से ‘जय श्रीराम’ का नारा लगाते सुनाई पड़ रहा है।

वीडियो में देख सकते हैं कि व्यक्ति ने अपने तन पर इजरायली झंडा लपेटा हुआ है और हाथ में भी इजरायली झंडा ले रखा है। बताया जा रहा है कि अमेरिकी सड़कों पर जब फिलीस्तीन के समर्थक आए, तो भारत विरोधी नारेबाजी भी सुनाई पड़ी, ऐसे में तो भारत के साथ एकजुटता दिखाने के लिए इस युवक ने बिन डरे जोर-जोर से जय श्रीराम का नारा लगाना शुरू कर दिया।

ये वीडियो अब सोशल मीडिया पर भारतीय धड़ल्ले से शेयर कर रहे हैं। उनकी हिम्मत के लिए उनकी तारीफ की जा रही है। लोग उनके बारे में भी जानना चाहते हैं कि आखिर वो व्यक्ति कौन है और कहाँ रहता है आदि-आदि।

बता दें कि वीडियो में जय श्रीराम के नारे बुलंद करने वाले इस व्यक्ति का नाम शयान कृष्णा है और शयान एक पाकिस्तानी हैं जिन्होंने कुछ समय पहले ही इस्लाम छोड़कर हिंदू धर्म अपनाया था। उनका मानना है कि श्रीकृष्ण के कारण उनका मार्ग दर्शन हुआ। ऐसे में उन्होंने हिंदू धर्म स्वीकारा। हालाँकि इसके बाद उन्हें पाकिस्तान छोड़ना पड़ा। साल 2023 में उन्होंने बताया कि पाकिस्तानी खुफिया एजेंसियाँ लगातार उनपर दबाव बनाती थीं जिसकी वजह से उन्होंने पाकिस्तान छोड़ दिया। अब उनके एक्स बायो में भी ‘प्रो अमेरिकन’ और ‘प्रो इंडियन’ लिखा हुआ है।

‘मुझे पता है आपलोग दबाव में हैं’: कपिल सिब्बल की दलीलों के बावजूद सुप्रीम कोर्ट ने हेमंत सोरेन को नहीं दी राहत, पत्नी ने सरफराज़ के पाँव छूकर दाखिल किया पर्चा

झारखण्ड के पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं मिली है। ‘झारखण्ड मुक्ति मोर्चा’ (JMM) के नेता फ़िलहाल फ़िलहाल मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में जेल में बंद हैं। उन्हें ED (प्रवर्तन निदेशालय) ने गिरफ्तार किया था। उन्होंने इस मामले में राहत के लिए सुप्रीम कोर्ट का दर्जा खटखटाया था। जस्टिस संजीव खन्ना ने इस दौरान हेमंत सोरेन का प्रतिनिधित्व कर रहे अधिवक्ता व समाजवादी पार्टी के सांसद कपिल सिब्बल से पूछा कि वो क्या चाहते हैं?

इस पर कपिल सिब्बल ने कहा कि वो अंतरिम जमानत के लिए अर्जी लेकर आए हैं। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने अगले सप्ताह में नोटिस जारी करने की बात की। जब कपिल सिब्बल ने कहा कि शुक्रवार को ही मामला सुना जाए, तो सुप्रीम कोर्ट के जजों ने पूछा कि ये क्या है? उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा कि हमें थोड़ा विवेकाधिकार दीजिए। इस पर कपिल सिब्बल ने कहा कि उन्हें पता है कि जज लोग दबाव में हैं। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वो 6 मई से शुरू होने वाले सप्ताह में ये मामला सुनेंगे।

हेमंत सोरेन ने अपनी गिरफ़्तारी को चुनौती दी है, जिस पर सोमवार (29 अप्रैल, 2024) को सुप्रीम कोर्ट ने ED को नोटिस भी जारी किया। जस्टिस संजीव खन्ना और जस्टिस दीपांकर दत्ता ने इस मामले की सुनवाई की। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ED का जवाब आने तक उच्च न्यायालय रिजर्व मामले में जजमेंट सुना सकता है। JMM का कहना था कि झारखण्ड हाईकोर्ट इस मामले में फैसला सुनाने में देरी कर रहा है। वहाँ गिरफ़्तारी को चुनौती देने वाली याचिका दायर है।

इससे पहले भी वो सुप्रीम कोर्ट पहुँचे थे, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें झारखण्ड हाईकोर्ट जाने के लिए कहा था। 31 जनवरी, 2024 को हेमंत सोरेन ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। उसके बाद चम्पई सोरेन झारखण्ड के सीएम बने थे। उधर उनकी पत्नी कल्पना सोरेन ने गांडेय विधानसभा उपचुनाव के लिए पर्चा दाखिल कर दिया है। गांडेय के MLA रहे डॉ सरफराज अहमद के पाँव छूकर उन्होंने आशीर्वाद लिया। उससे पहले कल्पना अपने ससुर शिबू सोरेन और सास से आशीर्वाद लेने भी पहुँची थीं।

16 साल की दलित नाबालिग को उठा ले गया नाई हारून, रात भर किया रेप: गाँव के बाहर छोड़ कर भागा, यूपी पुलिस ने दबोचा

उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले में एक दलित नाबालिग को मुस्लिम युवक ने बंधक बना कर रात पर रेप किया। नाबालिग के विरोध करने पर उसे गाँव के बाहर छोड़ कर भाग गया। पीड़िता के पिता ने पुलिस के पास इस मामले में शिकायत दर्ज की है। पुलिस ने आरोपित युवक को गिरफ्तार कर लिया है।

जानकारी के अनुसार, मोहम्मदी कोतवाली क्षेत्र के मूडा ग़ालिब गाँव की रहने वाली एक 16 वर्षीय दलित नाबालिग शनिवार (27 अप्रैल, 2024) की रात को खेतों की तरफ गई हुई थी। इसी दौरान पास के ही गाँव छेड़िपुर का निवासी हारून यहाँ बाइक से आया और नाबालिग को अपने साथ जोर जबरदस्ती से ले गया। हारून यहीं पास में नाई की दुकान करता है।

हारून ने इसके बाद शनिवार की रात भर दलित नाबालिग के साथ रेप किया और धमकी दी। जब बालिका ने इसका विरोध किया तो वह उसे सुबह गाँव के बाहर छोड़ गया। नाबालिग ने अपने घर आकर पूरी बात बताई, जिसके बाद उसके पिता ने कार्रवाई के लिए पुलिस से गुहार लगाई।

पीड़ित नाबालिग के पिता ने इस सम्बन्ध में मोहम्मदी कोतवाली में मामला दर्ज करवाया। पुलिस ने इस घटना की जाँच के बाद हारून को गिरफ्तार कर लिया। हारून के विरुद्ध बलात्कार और POCSO एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया है।

इस विषय में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक नेपाल सिंह ने बताया है कि मामले की जानकारी के बाद FIR दर्ज करके तुरंत कार्रवाई करके युवक हारून को गिरफ्तार कर लिया गया था। पुलिस टीम ने घटनास्थल का निरीक्षण भी किया था। मामले में अग्रिम कार्रवाई जारी है।

दलित नाबालिग के रेप के आरोपी के मुस्लिम होने के कारण इलाके में तनाव की स्थिति भी बनी हुई थी। हालाँकि, अतिरिक्त पुलिस बल तैनात करके इस पर नियन्त्रण पा लिया गया है और किसी भी प्रकार की अशांति नहीं हुई है। पुलिस अब हारून को कोर्ट में पेश कर आगे की कार्रवाई कर रही है।

इंदौर में कॉन्ग्रेस के साथ हो गया खेला: आखिरी दिन पर्चा वापस लेकर BJP में शामिल हुए उम्मीदवार, गुजरात के बाद अब MP में बिगड़ी पार्टी की ‘सूरत’

मध्य प्रदेश की इंदौर लोकसभा सीट पर कॉन्ग्रेस के साथ ‘खेल’ हो गया है। यहाँ से कॉन्ग्रेस प्रत्याशी अक्षय कांति बम ने नामांकन वापसी के आखिरी दिन अपना नाम ही वापस ले लिया और अब इंदौर में कॉन्ग्रेस लड़ाई से बाहर हो गई है।

बीजेपी विधायक रमेश मेंदोला के साथ कलेक्टरी पहुँचकर कॉन्ग्रेस उम्मीदवार अक्षय कांति बम ने नॉमिनेशन वापस लिया है। यह कॉन्ग्रेस के लिए बड़ा झटका है। बीजेपी ने इंदौर से शंकर लालवानी को उम्मीदवार बनाया है। बाद में बीजेपी के वरिष्ठ नेता कैलाश विजयवर्गीय के साथ अक्षय कांति बम कार में घूमते नजर आए और इसकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल भी हो रही हैं।

यही नहीं, अक्षय कांति बम ने कॉन्ग्रेस को न सिर्फ झटका दिया, बल्कि पार्टी भी छोड़ दी और वो बीजेपी में शामिल हो गए। बीजेपी के वरिष्ठ नेता और मध्य प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने इसकी जानकारी दी है कि अब अक्षय कॉन्ग्रेस नहीं, बल्कि बीजेपी का हिस्सा बन चुके हैं।

कैलाश विजयवर्गीय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक पर लिखा, “इंदौर से कॉन्ग्रेस के लोकसभा प्रत्याशी अक्षय कांति बम जी का माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी, राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री जेपी नड्डा जी, मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादन जी व प्रदेश अध्यक्ष श्री वीडी शर्मा जी के नेतृत्व में भाजपा में स्वागत है।”

जानकारी के मुताबिक, अक्षय कांति बम ने विधानसभा चुनाव में इंदौर की चार नंबर सीट से कॉन्ग्रेस की ओर से टिकट की दावेदारी की थी, लेकिन तब कॉन्ग्रेस ने उन्हें टिकट नहीं दिया और लोकसभा चुनाव के लिए उन्हें मैदान में उतार दिया। कांति बम को कॉन्ग्रेस ने पहली बार उम्मीदवार बनाया था।

अक्षय कांति बम पेशे से कारोबारी हैं। नामांकन फॉर्म भरने के दौरान अक्षय कांति बम ने खुलासा किया था कि वह 14 लाख की घड़ी पहनते हैं। उनके पास पत्नी को मिलाकर करीब 87 करोड़ रुपए की संपत्ति है।

मध्य प्रदेश की 29 में से 2 सीटों पर बीजेपी के सामने चुनौती खत्म

बता दें कि मध्य प्रदेश में कुल 29 विधानसभा सीटें हैं। इसमें से खजुराहो सीट को इंडी एलायंस के नाम पर समाजवादी पार्टी को दे दिया गया था, जिसपर सपा ने दो बार उम्मीदवारों के नाम बदले। हालाँकि बाद में सपा प्रत्याशी का नामांकन ही खारिज हो गया था। खजुराहो सीट पर बीजेपी के लिए कोई बड़ी चुनौती नहीं है, वहीं, इंदौर में भी कुछ ऐसा ही हुआ, जहाँ कॉन्ग्रेस उम्मीदवार ने अपना पर्चा ही वापस ले लिया। ये नामांकन के लिए नाम वापसी के आखिरी दिन किया गया, ऐसे में कॉन्ग्रेस के पास इंदौर में भी कोई कैंडिडेट नहीं बचा। इस तरह से 29 में से 2 सीटों पर बीजेपी को पहले ही बढ़त मिलती दिख रही है।