कट्टरपंथियों के घर के ऊपर युद्ध लड़ने के मकसद से पेट्रोल बम, एसिड, पत्थर और आग लगाने का सामान इकट्ठा दिख रहा है, और फिर भी आपको बताया जा रहा है कि ये 'हिन्दुओं द्वारा मुस्लिमों के सफाए की साजिश है', 'ये मुस्लिमों का पोगरोम है', 'ये मुस्लिमों का नरसंहार है'।
दिलबर नेगी की उम्र महज 20 साल थी। दंगाइयों ने हाथ-पैर काट उन्हें जिंदा जला दिया था। मुस्लिम भीड़ की दरिंदगी को छिपाने के लिए प्रोपेगेंडा पोर्टल वायर ने लिखा है कि नेगी की मौत 'जलने के कारण हुए घाव से हुई'। न इस मामले में गिरफ्तार शाहनवाज का जिक्र है न नेगी के साथ हुई क्रूरता का।
पूतना और होलिका को खलनायिका से नायिका बनाने की कोशिश बाल-हत्या के महिमामंडन की कोशिश है। उसे ब्राह्मणवाद के विरोध के नाम पर ढका नहीं जा सकता। ब्राह्मण तो वे दधीचि थे, जिन्होंने वृत्रासुर को मारने के लिए अपनी अस्थियाँ दे दीं, वज्र का निर्माण करने वास्ते।
केंद्र सरकार का लक्ष्य नवगठित केंद्र शासित प्रदेश जम्मू और कश्मीर के अलावा असम, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर और नगालैंड राज्यों में संसदीय क्षेत्रों और विधानसभा क्षेत्रों का परिसीमन करना है।
कंटेनर और बोरियों में भरकर क्या भेजा जाता था, यह अभी स्पष्ट नहीं है। चश्मदीदों ने शाहीन बाग के अलावा यूपी के संभल भी लोग और सामान भेजे जाने की बात कही है। ताहिर का घर दंगों का हेडक्वार्टर बनकर उभरा है।
कॉन्ग्रेस अपने राजनैतिक विरोधियों को किस तरह प्रताड़ित करती है, यह संजय पाठक से सुनिए। वे हत्या की आशंका जता रहे हैं। कह रहे हैं कि कॉन्ग्रेस में शामिल होने के लिए दबाव बनाया जा रहा है। जब से कॉन्ग्रेस के खुद के MLA बागी हुए हैं वे निशाने पर हैं।
दिल्ली के शाहीन बाग़ इलाके से 3 शवों के मिलने की खबर से हड़कंप मच गया है। ये तीनों शव शाहीन बाग़ क्षेत्र के अलग-अलग इलाकों से मिले हैं, जिनमें से 1 की पहचान हो चुकी है।
अंग्रेजों की औपनिवेशिक, विभाजनकारी तथा जनजातीय नीतियों और ईसाई शिक्षा ने यह गढ़ा कि इस क्षेत्र की सभी जनजातियाँ मंगोल हैं, क्रूर, जंगली तथा हिंसक हैं। परन्तु उनमें प्रचलित अनेक रीतियाँ, लोक-मान्यताएँ, जीवन-मूल्य तथा परम्पराएँ शेष भारत की परम्पराओं से लेशमात्र भी अलग नहीं हैं। इसका उल्लेख वेदों से लेकर महाभारत और रामायण तक में...
दिल्ली और यूपी पुलिस की संयुक्त बैठक के बाद राजधानी से सटे इलाकों से भी दंगाइयों के आने की बात सामने आई है। कॉन्स्टेबल रतनलाल के हत्यारों की पहचान भी हो चुकी है। पुलिस पर हमला सोची-समझी साजिश के तहत किया गया था।
राह चलते किसी को पकड़ लो। उससे कुछ बुलवा दो। फिर उसे TV पर दिखाओ... और किसी को बदनाम कर दो। जब हंगामा हो तो सोशल मीडिया पर चुपके से एक ट्वीट डाल दो। - यह NDTV का फॉर्मूला है। दिल्ली में हुए हिंदू विरोधी दंगों में कपिल मिश्रा को बदनाम करने के लिए भी यही तरीका अपनाया NDTV ने, लेकिन दाँव उल्टा पड़ गया - बहुत गाली पड़ रही है।