वेम्पती ने बीबीसी की योगिता लिमये की उस रिपोर्ट का भी हवाला दिया है जिसमें दिल्ली पुलिस को एकपक्षीय बताया गया है। लेकिन, उस दंगाई भीड़ का जिक्र नहीं है जिसने हेड कॉन्स्टेबल रतनलाल की जान ली।
ऐसा लगता है कि दिल्ली के हिंदू विरोधी दंगों की आड़ में अंकित शर्मा की जानबूझकर हत्या की गई। घटनाक्रम, प्रथम दृष्टया मिली जानकारी, कुछ बयान और डॉक्टरों की शुरुआत राय इसी ओर इशारा कर रहे हैं। उनकी हत्या के तार बांग्लादेशी आतंकियों से जुड़ रहे हैं।
दिल्ली में हिंदू विरोधी दंगे हुए। लेकिन प्रोपेगेंडा पोर्टलों और अंतरराष्ट्रीय मीडिया ने दंगाइयों को बचाने के लिए हिंदुओं के खिलाफ घृणा परोसी। इसका असर अब दिखने लगा है। हिंदुओं को उनकी पहचान के लिए निशाना बनाया जा रहा है।
वहाँ टी स्टॉल के बगल में स्थित रजाई-गद्दों की एक दुकान को भी जला डाला गया। वहाँ स्थित एक ग़रीब की ठेले को भी आग के हवाले कर दिया गया। सूरज जी अपनी चाय की दुकान जलाए जाने के बाद से लगातार भटक रहे हैं और उन्हें अब न्याय की उम्मीद है।
"चाँदबाग चौराहे के पास ही दुर्गा फकीरी मंदिर है। पेट्रोल पंप फूँकने के बाद दंगाई तेजी से चारो तरफ आग लगा रहे थे। शाम का समय था। दहशत और शोर बढ़ता जा रहा था। जैसे ही भारी संख्या में दंगाइयों की नजर मंदिर की तरफ पड़ी तो सबसे पहले मंदिर बचाने के लिए मंदिर के पुजारी प्रार्थना करने लगे। दंगाइयों ने मंदिर पर पत्थरबाजी शुरू कर दी थी।"
दिग्गज क्रिकेटर रहे जॉन्टी रोड्स ने ऋषिकेश में गंगा में डुबकी लगाई। ट्विटर पर इस पल को साझा करते हुए लिखा कि पवित्र माँ गंगा में डुबकी लगाने से न सिर्फ़ भौतिक बल्कि दैविक रूप से भी मोक्ष की प्राप्ति होती है।
सब कुछ सुनियोजित तरीके से अंजाम दिया गया। कुछ भी अचानक नहीं हुआ। हिंदुओं की संपत्ति को चुन-चुनकर निशाना बनाया गया। निर्मम तरीके से हत्या की गई। रूह कॅंपाने वाली चुनिंदा कहानियॉं ताकि सनद रहे उस कथित 'डरी हुई भीड़' की बर्बरता।
दयालपुर थाने में अजय गोस्वामी ने उसके खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है। उन्होंने कहा है कि ताहिर हुसैन के मकान से गोलियॉं चल रही थी। पत्थरबाजी और पेट्रोल बम भी फेंके जा रहे थे। पुलिस उसके खिलाफ लुक आउट नोटिस जारी करने की भी तैयारी कर रही है।
"बंगाल में चूहा भी काट ले तो ये लोग (BJP वाले) सीबीआई जाँच की माँग करते हैं। वहीं, दिल्ली में इतने लोगों की हत्या हुई, इसको लेकर कोई न्यायिक जाँच नहीं हुई। मैं सुप्रीम कोर्ट के जजों के द्वारा न्यायिक जाँच की माँग करती हूँ।"
कविता ने मुश्किल वक्त में भी हौसला नहीं छोड़ा। फिर भी अपना सुहाग नहीं बचा पाई। उसके सास-ससुर तो इतने डरे हुए हैं कि श्मशान घाट से ही गॉंव लौट गए। शिव विहार के उस घर तक जाने की हिम्मत नहीं जुटा पाए जहॉं उनका लाडला रहता था।