इस हिंसा में ना सिर्फ हिन्दुओं को चिह्नित कर मारा गया, बल्कि उनके परिवार के साथ बसलूकी भी की गई, परिवार की महिलाओं और बेटियों के साथ अश्लील हरकत करने से लेकर पवित्र मंदिरों को भी हिंसक मुस्लिम भीड़ ने अपना निशाना बनाया। इन दंगों में एक सबसे बड़ा नाम आम आदमी पार्टी नेता ताहिर हुसैन का भी आया है।
हमें यकीन है कि ये महिलाएँ अपनी ऊर्जा बेफिजूल चिल्लाकर बर्बाद नहीं करती होंगी। इन्हें सरकारी योजना के तहत केवल दियासलाई की लालसा नहीं रहती होगी। ये पारिवारिक आय के लिए सिर्फ़ किसी पुरूष पर आश्रित नहीं रहती होंगी।
शाहीन बाग़ ने अपने चहेते मीडियाकारों के साथ मिलकर रोज थोड़ा-थोड़ा प्रयासों से दिल्ली में हिन्दुओं के खिलाफ नरसंहार की तैयारियाँ शुरू की। बीस साल के दिलबर नेगी की मौत हो, चाहे आईबी अधिकारी अंकित शर्मा का चार सौ बार चाकुओं से गोदा गया शरीर हो, इस सबकी पटकथा शाहीनबाग ने ही आधार दिया इसमें कोई संदेह नहीं होना चाहिए।
2018 में आई बाढ़ से प्रभावित लोगों की मदद के लिए राहत कोष बनाया गया। लेकिन, इसका पैसा एक स्थानीय वामपंथी नेता के खाते में भेज दिया गया। उसने इसका इस्तेमाल एक पॉल्ट्री फॉर्म खरीदने के लिए। भेद खुला तो फरार हो गया।
कमलनाथ सरकार का संकट गहराता ही जा रहा है। कॉन्ग्रेस ने जिन विधायकों को छुड़ाकर लाने का दावा किया है वे ही बंधक बनाए जाने की खबरों को नकार रहे हैं। साथ ही कह रहे हैं कि यह कॉन्ग्रेस की अंदरूनी लड़ाई है।
24 फरवरी की उस काली रात को याद कर बबीता की आवाज थम जाती है। बुजुर्ग नरेश चंद्र फूट-फूटकर रोने लगते हैं। सुधा उस वक्त को याद कर अब भी सिहरने लगती है। दंगाइयों से इन्होंने जान भले बचा ली, पर उनके दिए जख्म शायद ही भरे।
डॉ. खान और उनके जैसे हर जिहादी की असली दिक्कत है काफ़िरों से उनकी नफ़रत। काफिरों को हिकारत भरी नज़रों से देखने और अपने जूतों तले रौंदने की 1200 साल पुरानी आदत। इसके आगे आज का काफ़िर झुकने से इनकार कर रहा है।
महबूब पाशा ने हथियार खरीदे। शरीफ ने अपने घर में इन्हें इकट्ठा किया। मोइदीन और उसके साथी बीते साल ट्रेनिंग के लिए देश से बाहर गए। फिर हिंसक जिहाद छेड़ने के लिए लौट आए। इससे पहले कि वे अपने मॅंसूबे में कामयाब होते दबोच लिए गए।
मंदर के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई करने और उनकी याचिका खारिज करने अपील शीर्ष अदालत से की गई है। इस बीच कथित सामाजिक कार्यकर्ता का एक और विडियो भी सामने आया। इसमें भी वे सुप्रीम कोर्ट की अवमानना करते दिख रहे हैं।
विडियो में देखा जा सकता है कि पुलिस कार्रवाई के बाद वहाँ मौजूद भीड़ आगे की तरफ भागती है। तभी दूसरी ओर से आई उपद्रवियों की भारी भीड़ पुलिस पर हमला कर देती है। भीड़ में शामिल बुर्का धारी महिलाएँ भी पुलिस पर हमला करते हुए नजर आती हैं।