'होली सेक्रामेंट' ईसाई धर्म की एक ऐसी प्रथा है, जिसमें गिरजाघरों में रोटी और शराब बाँटकर यीशु मसीह के 'लास्ट सपर' को स्मरण किया जाता है। लेकिन चर्च में पादरी हर सहभागी के मुँह में एक ही प्याली और चम्मच से शराब परोसते हैं। इसके कारण लार से होने वाली बीमारियाँ...
कई लोग मानते हैं कि 8वीं या 9वीं शताब्दी में माँ सरस्वती को जापान में बेंजाइटन के रूप में पूजा जाने लगा। लेकिन, पाँचवीं-छठी शताब्दी में लिखी गई बौद्ध पुस्तकों में बेंजाइटन का जिक्र है। उनकी प्रतिमाएँ सफ़ेद होती हैं और उनके हाथ में वीणा होता है।
राज्यपाल ने अपने सम्बोधन का पैराग्राफ 18 पढ़ने से इनकार कर दिया। इस पैराग्राफ में सीएए को असंवैधानिक और भेदभाव करने वाला बताया गया था। सीएए के बारे में इस तरह की बातें लिखे जाने पर राज्यपाल ने आपत्ति जताई।
रोहिंग्या संगठन ARSA ईसाइयों को प्रताड़ित कर रहा है। हालिया हमले में 12 रोहिंग्या ईसाई गंभीर रूप से घायल हो गए। कुछ के शरीर पर एसिड फेंक कर हमला किया गया। पीड़ितों में महिलाएँ एवं बच्चे भी शामिल हैं।
जोगेंद्रनाथ मंडल के साथ जो कुछ हुआ वह बताता है कि 'जय भीम-जय मीम' दलितों के छले जाने का ही नारा है। मजहबी उन्मादी उनकी आड़ लेते हैं। कॉन्ग्रेसी और वामपंथी उनकी लाशों पर चढ़ 'मीम' का तुष्टिकरण करते हैं। #CAA के नाम पर जो हो रहा है वह इससे अलग नहीं।
सीएए के समर्थन में आयोजित रैली में शामिल नीरज प्रजापति मुस्लिमों की हिंसा का शिकार बने थे। परिजनों ने ऑपइंडिया से बात करते हुए आरोप लगाया कि पुलिस व प्रशासन ने जल्दी-जल्दी अंतिम संस्कार कराने के चक्कर में धार्मिक रीति-रिवाज भी पूरा नहीं करने दिया।
"दंगाइयों ने मेरे पति को दौड़ा कर उनके सिर पर रॉड से वार किया। इसके बाद वो किसी तरह भागते हुए घर पहुँचे। वहाँ पहुँच कर उन्होंने मुझे सारी बातें बताईं। इसके बाद वो अचानक से बेहोश हो गए।" - क्या मुख्यमंत्री सोरेन सुन रहे हैं मृतक की पत्नी की दर्द भरी आवाज़?
अंतरराष्ट्रीय राजनीति के विद्वान जोसेफ नाइ के सॉफ्ट पॉवर की परिभाषानुसार प्रधानमंत्री मोदी भारत की वैश्विक पहुँच में बदलाव के वाहक बने हैं। PM मोदी ने अपनी विदेश नीति के 5 स्तंभों के माध्यम से भारत की सांस्कृतिक कूटनीति को बढ़ावा देने के लिए एक सफल प्रयास किया है। ये 5 स्तंभ - सम्मान, संवाद, समृद्धि, सुरक्षा एवं संस्कृति और सभ्यता हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पाकिस्तान में निकले रोजगार के एक विज्ञापन का जिक्र किया। इसमें सफाई के कामों के लिए कर्मचारियों की वैकेंसी निकाली गई थी। इस वैकेंसी में सिर्फ गैर-मुस्लिमों को ही पात्र बताया गया था।
"तवायफ के बच्चे की हिम्मत कैसे हुई औरतों और बच्चों के बारे में बोलने की।" - जब शोएब जमई ने यह कहा तो वीडियो में देखा जा सकता है कि इन शब्दों को सुनने के बाद अर्नब गोस्वामी काफी नाराज हो गए। उन्होंने तुरंत जमई को डिबेट से हटाने की माँग की और...