फारुख ने बताया कि वह कुछ साल पहले एक इज्तमा में शामिल हुआ था। इसमें तकरीर से प्रभावित होकर उसने दाढ़ी बढ़ा ली थी। अब कुछ दिन से गर्मी अधिक होने के कारण वह दाढ़ी से परेशान था और दाढ़ी कटवाना चाह रहा था। लेकिन, समाज व धर्म का भय था। इसलिए उसने जबरदस्ती दाढ़ी कटवाने की झूठी कहानी बनाई।
भारत के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर से पाकिस्तान पर बने दवाब के चलते पीड़िता को सुरक्षित उसके घर पहुँचा दिया गया है। वहीं, पाकिस्तानी पंजाब प्रांत की ननकाना साहिब पुलिस ने इस मामले में 8 आरोपितों को गिरफ़्तार कर लिया है।
दीनी तालीम के नाम पर चल रहे मदरसों में गरीब लोग इस उम्मीद से अपने बच्चे भेज रहे कि वह बड़ा होकर इमाम बनेगा। पर मौलवी उनसे भीख मॅंगवा रहे। पैसा लेकर नहीं आने पर पीटते हैं। गुलामों की तरह रह रहे मदरसों के एक लाख बच्चों को मौलवियों से बचाएगा कौन?
रवीश कुमार ने बीजगणित के अध्याय की तरह सब कुछ अब 'मान लिया' है। इससे बड़ी हानि यह है कि वो चाहते हैं कि उनके इसी 'मान लेने' को बाकी लोग भी मान लें, जबकि उनकी यह बीजगणित एकदम ऊसर है, इससे कुछ भी सृजन नहीं हो सकता है।
प्रपंच फैलाया जा रहा है कि अस्पतालों में लोग मर रहे हैं, जीवनरक्षक दवाइयाँ नहीं हैं। आप सोचिए कि आखिर यही चार-पाँच मीडिया वाले, इसी एक तरह की रिपोर्टिंग क्यों कर रहे हैं? आखिर दो लोगों के बयान के आधार पर पूरी सेना को बर्बर कहने की रिपोर्टिंग का लक्ष्य क्या है? अमेरिकी अखबार को भारत के एक हिस्से के अस्पतालों पर झूठ लिखने की क्यों जरूरत पड़ती है?
विशेष सीबीआई अदालत ने आईएनएक्स मीडिया केस में आरोपित कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम की सीबीआई हिरासत 2 सितंबर तक के लिए बढ़ा दी है। हालाँकि जाँच एजेंसी ने मामले में चिदंबरम की हिरासत की अवधि 5 दिन बढ़ाने की माँग की थी।
"वह लोगों से बातचीत कर रहे थे। उसी समय स्थानीय पार्षद के नेतृत्व में करीब 250 तृणमूल गुंडे एकत्र हुए और उन पर हमला कर दिया। उन्हें बचाने की कोशिश में भाजपा के दो कार्यकर्ता गंभीर रूप से घायल हो गए।"
दो-चार कठमुल्ले पाकिस्तान का झंडा लेकर सड़क बंद करने खड़े तो हो गए, लेकिन उनकी कोई सुन ही नहीं रहा था। यहाँ तक कि सामने से आ रहीं गाड़ियों के न रुकने पर वे खुद कुचले जाने से बचने के लिए इधर-उधर सरकते नज़र आए।
"यदि सिंधिया को मध्य प्रदेश की राजनीति से दूर किया गया तो 500 कार्यकर्ताओं के साथ दिल्ली के 10 जनपद स्थित कॉन्ग्रेस कार्यालय जाकर प्रदर्शन करेंगे और फिर भी अगर बात नहीं मानी गई तो सामूहिक रूप से अपने पदों से इस्तीफ़ा दे देंगे।"
18 वर्षों से फरार चल रहे प्रशांत ठाकुर की झारखंड पुलिस और छत्तीसगढ़ पुलिस को लंबे समय से तलाश थी। लेकिन नाम बदलकर अपनी लोकेशन बदलते रहने के कारण वह पकड़ में नहीं आ रहा था। इन दोनों ही राज्यों में उसका नाम मोस्ट वांटेड अपराधियों की सूची में था।