पांचालिमेडु (Panchalimedu), स्थानीय हिंदुओं के लिए एक पवित्र स्थान है, जिसका नाम पांचाली के नाम पर रखा गया है। ऐसा माना जाता है कि 12 साल के वनवास के दौरान वो पांडवों का निवास स्थान था। एक प्राचीन भुवनेश्वरी मंदिर भी अतिक्रमित भूमि के पास...
आज़म खान की पहचान ही इस बात से है कि वो निहायत ही घटिया बातें बोलते हैं। वो अगर बेहूदगी न करें तो देश को पता भी न चले कि खुद को समुदाय विशेष का ज़हीन नेता मानने वाला, और प्रोजेक्ट करने वाला, ये आदमी किस दर्जे का धूर्त है।
"मदरसों में धार्मिक शिक्षा दी जाती है... साथ ही वहाँ अंग्रेज़ी, हिन्दी तथा गणित भी पढ़ाया जाता है। मदरसों को हमेशा मिड-डे मील से महरूम रखा गया है। सरकार को इस बात का ऐलान करना चाहिए कि..."
जब अंकित के परिवार ने अपने घर के एकमात्र कमाऊ इंसान को खो देने की भरपाई करने के लिए केजरीवाल से मुआवज़े की माँग की, तो वो प्रार्थना सभा को बीच में ही छोड़ कर चल दिए। तंजील अहमद और एमएम खान के परिवार को 1-1 करोड़ रुपए दिए तो फिर अंकित के परिवार के साथ यह राजनीति क्यों?
जल जीवन मिशन 14 करोड़ घरों में पानी की आपूर्ति के लिए लॉंच किया गया है। इस मिशन का लक्ष्य 2024 तक 100 फीसद घरों में सप्लाई जल पहुँचाना है, जो अभी सिर्फ़ 18 फीसद घरों में पहुँचता है। नए मिशन 'नल से जल' के जरिए ये सुनिश्चित करेगी कि आने वाले पाँच सालों में हर घर में पानी पहुँचे।
कुख्यात नक्सली किरण कुमार और उसकी पत्नी अल्लूरी कृष्णा कुमारी को धर दबोचा गया है। दोनों ही पति-पत्नी 1994 से माओवादी गतिविधियों में सक्रिय थे और लगभग 150 पुलिस वालों की मौत के लिए ज़िम्मेदार हैं। इन पर 20 लाख रुपए का इनाम था।
बेगूसराय में महादलित परिवार के घर में घुस कर 2 महिलाओं के साथ बलात्कार की कोशिश की गई। आरोपितों में से एक लड्डू मियाँ को पीड़ितों ने पहचान लिया। लड्डू मियाँ महादलित परिवार को ज़मीन बेचने की धमकी देता रहता है। एक माह पूर्व भी उसने महिला की पिटाई की थी।
"क्राइम ब्रांच ने पूरे परिवार को बर्बाद करने की धमकी दी और लगातार दबाव बनाया कि बच्ची से दुष्कर्म और हत्या कबूल कर लो। क्राइम ब्रांच ने यातनाएँ देकर यह स्वीकार करने को कहा कि मैंने मेरठ में पेपर नहीं दिए, पेपर किसी और ने दिए थे।"
ज़मीन के विवाद में हुई मौत के बाद 'कुत्ते के काटने से कैसे बचें' पर चर्चा करना सही है क्या? इसी तरह जहाँ रैगिंग की समस्या पर चर्चा होनी चाहिए, गिरोह विशेष ने जाति घुसाकर एक मनगढ़ंत मोड़ दे दिया। 'पीकू' फ़िल्म का एक डायलॉग है- 'आप हर बात को पेट से कैसे जोड़ देते हैं?'
क्या हमारे पास इतना समय है कि ऐसे सड़कछाप पत्रकारों के ट्वीट पर उसके घर दो पुलिस वाले को भेज कर उठवा लिया जाए जबकि हर मिनट बलात्कार हो रहे हैं? क्या सरकारों की पुलिस या कोर्ट जैसी संस्थाओं को पास ऐसी बातों को लिए समय है जबकि करोड़ से अधिक गंभीर केस लंबित पड़े हैं?