ज़िले में इतना बड़ा क़द रखने के बावजूद अगर उनकी हत्या की नौबत आ जाती है और हमलावरों की भीड़ में समुदाय विशेष के होने की बात मीडिया एवं प्रशासन द्वारा छिपाई जाती है (सांसद के दावे के अनुसार), तो यह एक बहुत ही गंभीर मामला है। सांसद की तरफ से ऑपइंडिया को बताया गया कि हमलावरों में 90% समुदाय विशेष से थे।
कम्युनिस्ट वे होते हैं, जो समाज की बराबरी के लिए काम करते हैं, दुनिया में सबके हको-हुकूक का झंडा बुलंद करते हैं, धर्मनिरपेक्ष समाज की स्थापना करते हैं, वगैरा-वगैरा। यह नैरेटिव नहीं 'जहर' है जो गढ़ा गया है, षड्यंत्र के तहत स्थापित किया गया है।
आदरणीय(?) प्रतीक सिन्हा जी, इंटरव्यू ऐसे ही होता है- यही नियम है इंटरव्यू का कि कोई भी औड़म-बौड़म सवाल झटके में नहीं पूछा जा सकता। पत्रकारिता के समुदाय विशेष को “ब्रेकिंग न्यूज़” का माल मत परोसिए। यहाँ सबकी पोल-पट्टी खोली जाएगी।
अभिनेता कमल हासन के लिए भारत एक धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र नहीं था, क्योंकि एक ख़ास समाज ने उनकी फ़िल्म की रिलीज रोक दी थी। राजनेता कमल हासन सामने मुस्लिमों को देखते ही गोडसे को आतंकी बताते हैं। उन्होंने कभी गोडसे का किरदार अदा किया था, लेकिन तब फ़िल्म की रिलीज नहीं रोकी गई।
थ्रेड में ट्रोल करने वाले अधम प्रकार के विस्तारवादी ट्रोल होते हैं। मध्यम कोटि के ट्रोल एक ट्वीट में चेतना शून्य कर देते हैं। उत्तम कोटि के ट्रोल एक वाक्य में ही अचेत कर देते हैं और सर्वोत्तम ट्रोल एक शब्द लिखकर ही नासिका लाल कर कर्णछिद्रों से धूम्र-वाष्प निष्कासन की प्रक्रिया का सूत्रपात कर देते हैं।
बीबीसी हिन्दी वालो, विकल्प है तुम्हारे पास: वेश्यावृति की ईमानदारी या पत्रकारिता के नाम पर वैचारिक दोगलापन, चुन लो। कारण जो भी हो, लेकिन जब आप वेश्यालय की ओर रुख़ करते हैं तो आपको पता होता है कि आपको वहाँ क्या मिलेगा। बीबीसी के साथ ऐसा नहीं है।
निरूपमा सुब्रह्मण्यन द्वारा इंडियन एक्सप्रेस में लिखे गए लेख की हेडलाइन ही स्पष्ट करती है कि प्रधानमंत्री मोदी आईएनएस विराट पर बात करके हमारे समक्ष सवाल छोड़े हैं ताकि हम पूछें कि वास्तव में अपने पद की शक्तियों का दुरुपयोग किसने किया है?
ग्रेटा कहती हैं कि इन समस्याओं से जूझने के लिए सबसे बड़ा उपाय है कि हर व्यक्ति को पढ़ना चाहिए और खुद को शिक्षित बनाना चाहिए। तभी लोग समझ पाएँगे कि उन्हें क्या करना है। वो कहती हैं कि वो सिर्फ़ एक बच्ची हैं और संदेशवाहक की भूमिका में है।
कमल हासन ने अपनी पार्टी मक्कल निधि मय्यम के उम्मीदवार के लिए चुनाव प्रचार के दौरान कहा कि आजाद भारत का पहला आतंकवादी एक हिंदू था और उसका नाम नाथूराम गोडसे था।
दिग्विजय के पैतृक क्षेत्र में भी आज छठे चरण के तहत मतदान हुआ, लेकिन भोपाल से लगभग 150 किलोमीटर दूर अपने गाँव में दिग्विजय वोट डालने के लिए नहीं गए। सोशल मीडिया पर लोगों ने इस पर गुस्सा ज़ाहिर करते हुए पूछा कि सबको वोट देने की अपील करने वाले कुछ नेता ख़ुद मतदान क्यों नहीं करते?