"इस दौरान मैंने ड्राइवर से पूछा कि वो यहाँ कैसे आया? तो उसने मुझे बताया कि उसे कैंसर था। कोई दवाई नहीं थी, जिससे इलाज हो सके। आखिरकार उसे इस आश्रम आना पड़ा। इस आश्रम में उसे गोमूत्र दिया गया। उसे लेने के बाद बहुत आराम मिला और उसका कैंसर का इलाज हो गया।"
जहाँ एक तरह पीएम मोदी जनता कर्फ्यू की अपील कर लोगों को संक्रमण से बचाव के उपायों पर अमल करने को कह रहे हैं, वहीं कुछ नेता लगातार अफवाह फैलाने में लगे हैं। त्रिवेदी उनमें से ही एक हैं। कॉन्ग्रेस परस्त पत्रकार इसे आगे बढ़ाने में लगे हैं।
राहुल गाँधी ने बेशर्मी से दावा कर दिया कि एक-एक महिलाओं ने सुप्रीम कोर्ट में खड़े होकर मोदी सरकार को ग़लत साबित कर दिया। वे भूल गए कि इस मामले को सुप्रीम कोर्ट में मोदी सरकार नहीं, मनमोहन सरकार लेकर गई थी।
कॉन्ग्रेस नेता का फेसबुक प्रोफाइल देखने पर पता चलता है कि वह फेक न्यूज़ फैलाने में माहिर है। उसने गोडसे और सावरकर के शारीरिक सम्बन्ध होने की बात पोस्ट कर रखी है। एक पोस्ट में भारत का नक्शा दिखा कर दावा किया कि जहाँ-जहाँ भाजपा की सरकार है, वे राज्य गोबर हैं।
"...कमल के निशान पर जो वोट दबाओगे ना, वो नरेंद्र मोदी को मिलने वाला है... ये समझकर दबाना... मुझे 'हाँ हाँ' कर रहे हो, ये 20-25 हजार लोगों से जीत जाएँगे क्या? जीतेंगे क्या?... अरे भाई, क्या 'हाँ' कह रहे हो? मैं भी बनिया हूँ... मुझे मालूम है नहीं जीतेंगे यार..."
दिल्ली में 1 मई 2014 को ग़ैर-सब्सिडी वाले LPG की क़ीमत ₹928.50 थी और उसी साल जनवरी में इसकी क़ीमत ₹1241.00 थी। मौजूदा कीमत (₹681.50) से तुलना करें तो पता चलता है कि 2014 से यह ₹247.00 सस्ती है न कि ₹302.50 महॅंगी, जैसा सुरजेवाला ने दावा किया है।
थरूर ने नेहरू-इंदिरा की जो फोटो शेयर की वह न अमेरिका की थी और न 1954 की। फोटो मॉस्को की है जिसे 1955 में क्लिक किया गया था। नेहरू को महान और मोदी को नीचा दिखाने का थरूर का दाँव उलटा पड़ गया और उनसे लोगों के सवाल का जवाब देते नहीं बना।
अमेरिका में भारतीय प्रवासियों को संबोधित करते हुए, प्रधानमंत्री मोदी ने ट्रम्प द्वारा उपरोक्त अभियान के नारे को याद किया। कॉन्ग्रेस नेताओं और अन्य मीडिया गिरोहों ने मिलकर झूठ फैलाया कि पीएम मोदी ने 2020 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनावों के लिए राष्ट्रपति ट्रम्प का समर्थन किया।