समस्या तब पैदा होने लगती है जब रावण को 'महान' दिखाने के चक्कर में भगवान श्रीराम के किरदार से खेल दिया जाता है और उन्हें नीचा दिखाया जाता है। प्रतीक गाँधी की 'रावण लीला' में यही किया गया है।
"अरे वाह! कश्मीरी पंडितों को नरसंहार कराकर उनका बलात धर्म परिवर्तन कराकर उन्हें कश्मीर से बेघर करके अब उनका हमदर्द बन रहे हो.. बेशर्मी की भी हद पार कर दी!"