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खून पर खून और खून के बदले खून: बिहार में जातीय नरसंहार के बूते लालू ने कुछ यूँ खड़ी की थी ‘सामाजिक न्याय’ की...

अगस्त 12-13, 1992 का दिन। गया जिला का बारा गाँव। माओवादियों ने इलाके को घेरा और 'भूमिहार' जाति के 35 लोग घर से निकाले गए। पास में एक नहर के पास ले जाकर उनके हाथ बाँधे गए और सबका गला रेत कर मार डाला गया। लालू राज में जाति के नाम पर ऐसी न जाने कितनी घटनाएँ हुईं।

नक्सलवाद कोरोना ही है, राजद-कॉन्ग्रेस नया कोरोना आपके बीच छोड़ना चाहते हैं: योगी आदित्यनाथ

नक्सलवाद को कोरोना बताते हुए योगी आदित्यनाथ ने कहा कि राजद और कॉन्ग्रेस भाकपा (माले) के रूप में आपके बीच एक नए कोरोना को छोड़ना चाहते हैं।

‘अर्नब इतने हताश हो जाएँगे कि उन्हें आत्महत्या करनी पड़ेगी’: स्टिंग में NCP नेता और उद्धव के मंत्री नवाब मलिक का दावा

NCP मुंबई के अध्यक्ष और उद्धव सरकार में अल्पसंख्यक विकास मंत्री नवाब मलिक ने कहा कि अर्नब इसमें स्पष्ट रूप से फँस चुके हैं और इसका असर उनकी मानसिक अवस्था पर पड़ेगा।

कराची में हुए बम धमाके में 3 की मौत: फौज और पुलिस में ठनी, सिंध पुलिस के सभी अधिकारियों की छुट्टियाँ रद्द

सिंध पुलिस का कहना है कि उसके आला अधिकारियों का जिस तरह से अपमान किया गया, उनके साथ बुरा वर्ताव किया गया, उससे पुलिस महकमा शॉक में है।

सूरजभान सिंह: वो बाहुबली, जिसके जुर्म की तपिश से सिहर उठा था बिहार, परिवार हो गया खाक, शर्म से पिता और भाई ने की...

कामदेव सिंह का परिवार को जब पता चला कि सूरजभान ने उनके किसी रिश्तेदार को जान से मारने की धमकी दी है तो सूरजभान को उसी के अंदाज में संदेश भिजवाया गया- “हमने हथियार चलाना बंद किया है, हथियार रखना नहीं। हमारी बंदूकों से अब भी लोहा ही निकलेगा।”

क्या India Today का खेल खत्म? CBI ने TRP घोटाले में दर्ज की FIR: यूपी सरकार द्वारा की गई थी जाँच की सिफारिश

सीबीआई ने टीआरपी घोटाले की जाँच के लिए एक FIR दर्ज कर ली है। शुरुआत में इस मामले के संबंध में मुंबई पुलिस की FIR में इंडिया टुडे चैनल का नाम सामने आया था।

लॉकडाउन भले चला गया हो, मगर वायरस नहीं गया, थोड़ी सी लापरवाही हमारी खुशियों को धूमिल कर सकती है: PM मोदी

"हमें ये भूलना नहीं है कि लॉकडाउन भले चला गया हो, मगर वायरस नहीं गया है। बीते 7-8 महीनों में, प्रत्येक भारतीय के प्रयास से, भारत आज जिस संभली हुई स्थिति में हैं, हमें उसे बिगड़ने नहीं देना है और अधिक सुधार करना है।"

BJP का गया दुर्ग कितना मजबूत, क्या लगातार 8वीं बार कामयाब रहेंगे प्रेम कुमार?

गया देश का सबसे गंदा शहर है। जाम, संकरी सड़कें शहर की पहचान हैं। बावजूद बीजेपी का यह दुर्ग क्यों अभेद्य दिख रहा?

बिहार का वो गाँव जहाँ कभी पूरे राज्य से आते थे कारोबारी, आज फेरी लगाने और पलायन को मजबूर

क्या बिहार से पलायन करने की मजबूरी को रोकने का इलाज बड़े कल-कारखाने ही हैं? क्या बड़ी इंडस्ट्रियों के बगैर राज्य में रोजगार का सृजन नहीं हो सकता?

हिन्दुओं की हत्या पर मौन रहने वाले हिन्दू ‘फ़्रांस की जनता’ होना कब सीखेंगे?

हमें वे तस्वीरें देखनी चाहिए जो फ्रांस की घटना के पश्चात विभिन्न शहरों में दिखती हैं। सैकड़ों की सँख्या में फ्रांसीसी नागरिक सड़कों पर उतरे यह कहते हुए - "हम भयभीत नहीं हैं।"

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