पहले तो आप यह तय कीजिए कि आपको मतलब किस बात से है? पत्रकार/पीड़ित के फोन रिकॉर्ड होने से, या इस बात से कि वहाँ दंगा न फैले, पीड़ित परिवार को न्याय मिले?
हाथरस केस में हमने कुछ लीक ऑडियो पर रिपोर्ट की थी। इसमें से एक ऑडियो में इंडिया टुडे की पत्रकार तनुश्री पांडेय मृतका के भाई संदीप से ऐसा स्टेटमेंट देने के लिए बोल रही थीं, जिसमें मृतका के पिता आरोप लगाए कि उनके ऊपर प्रशासन की ओर से बहुत दबाव था।
बिहार के चुनावी आग की गर्मी इतनी तेज होती है कि बिहार से दिल्ली तक कुछ भी सुलग सकता है। अगर संभावनाओं की बात करें तो इससे किसी 'दलित' का झोंपड़ा जल सकता है और इलाके के तथाकथित सवर्णों पर आग लगाने का इल्जाम भी थोपा जा सकता है।
घटना के कुछ देर बाद रिकॉर्ड किए गए वीडियो में पीड़िता और उनकी माँ ने बलात्कार की बात नहीं कही लेकिन मुख्य अभियुक्त का नाम लिया है और हत्या के प्रयास की बात की है।
"..अपनी बेटी को PM पद के लिए तैयार किया जाना था, फिर मोरारजी देसाई और जगजीवन राम – दो महत्वाकांक्षी, सक्षम और प्रभावशाली प्रतिद्वंद्वियों को हटाना, और अंत में.."
जब शोषित समाज के वंचित कहे जाने वाले तबकों से हो और आरोपित तथाकथित ऊँची मानी जाने वाली जातियों से, तो मीडिया लिंचिंग के लिए एक बढ़िया मौका तैयार हो जाता है।