शरजील ने देश को तोड़ने की पूरी तैयारी कर चुका था, जिसने प्लान तैयार किया था कि सीएए के विरोध में देश के सभी प्रमुख राजमार्गों पर चक्का जाम कर दिया जाए। इससे पूरे देश में अराजकता का माहौल पैदा हो जाएगा और इसके दवाब में आकर सरकार सीएए और एनआरसी को वापस ले लेगी।
सत्यान्वेषी पत्रकार रवीश कालजयी मुस्कान लेकर जरा देर से अपने प्राइम टाइम में आए लेकिन इससे पहले ही उनकी घातक टुकड़ियों के सिपहसालार ध्रुव राठी से लेकर शेहला रशीद और स्वरा भास्कर ट्विटर पर गोडसे और गो** में तालमेल बैठाते नजर आए।
“ये जो आप देख रहे हैं वो CAA का विरोध नहीं है। इनको दर्द है अनुच्छेद 370 का, इनको दर्द है राम मंदिर का, इनको दर्द है बालाकोट एयरस्ट्राइक का। लेकिन इतना मैं बता दूँ कि 200 रुपए के बिजली बिल के लिए अपने देश को मत नीलाम करो।"
खबर है कि प्रदर्शनकारियों का एक गुट सड़क का एक हिस्सा खोले जाने के पक्ष में है। दूसरा इसका विरोध कर रहा। मतभेद उभरने के बाद एक-दूसरे पर स्टेज से चप्पलें फेंकी जाने की भी सूचना है।
आखिर हिन्दू धर्म को मानने वाला कट्टर क्यों बनना चाह रहा है? वो सोच क्या रहा है? क्या ऐसे बच्चे और भी हैं? क्या इस्लामी कट्टरपंथियों और आतंकियों के आतंक से इस समाज के बच्चे अब डरने लगे हैं?
नीरज प्रजापति की मृत्यु तब हुई जब उनके सर पर CAA के समर्थन में लोहे की रॉड से हमला किया गया। पुलिस का कहना है कि उनकी मृत्यु इस चोट की वजह से अत्यधिक खून बहने और घाव पर सेप्टिक होने से हुई।
इसमें गौर करने वाली बात यह है कि शख्स ने अपनी आईडी से एजाज़ ख़ान और भीम आर्मी का शेर जैसे पेजों को लाईक किया हुआ है। और, ताज़ा समाचार मिलने तक वो ID डिलीट कर दी गई है, और नई सामने आ गई।
राजद्रोह के केस होने के बाद दो दिन से बिहार में छापेमारी करने पहुँचे पाँच सदस्यों के पुलिस दल को यह बात पता चली की शरजील अपनी प्रेमिका के संपर्क में है। जिसके बाद पुलिस ने शरजील की प्रेमिका से संपर्क किया और उसकी मदद से शरजील इमाम गिरफ्तार हो पाया।
पूछताछ में शरजील ने कबूला है कि उसकी किसी वीडियो के साथ छेड़छाड़ नहीं हुई है। उसे अपनी गिरफ्तारी का पछतावा नहीं है। इस्लामिक यूथ फेडरेशन और पॉपुलर फ्रंट आफ इंडिया के साथ उसके संपर्कों की पुलिस पड़ताल कर रही है।
धर्मनिरपेक्ष देश के एक धर्मनिरपेक्ष राज्य की अदालत में गॉंधी की प्रतिमा स्थापित नहीं हो पाई। ऐसा करने वाले ही गाँधी के नाम को भुनाने के फेर में लगे रहते हैं। तो क्या उनके लिए गॉंधी प्रतीक से ज्यादा कुछ भी नहीं?