आनंद रंगनाथन ने अक्षय पात्र के समर्थकों से अपील की कि केवल जबानी समर्थन देने की बजाय अक्षय पात्र के कार्य के समर्थकों को अपना पैसा अपने समर्थन के रूप में लगाना चाहिए। तभी हिन्दूफ़ोबिक गिरोहों को जवाब मिलेगा।
अरुंधति राय द्वारा वित्तपोषित AltNews के संस्थापक प्रतीक सिन्हा क्या बिलकुल ही दिमाग से पैदल है या पूरी तरह सेंसलेस और संवेदनहीन है कि यदि कोई डेड बॉडी को भी बाहर सड़ने या जानवरों के खाने के लिए फेंक दे तो यह बर्बरता भी उसकी क्रूर और घृणित मानसिकता का स्पष्ट दस्तावेज नहीं कहा जा सकता?
इनकी बिलों में हाथ डालना पड़े तो बेशक डालिए, ये चिंचियाते रहें, इन्हें पूँछ पकड़ कर बाहर निकालिए और इनसे पूछिए कि वो जो ट्वीट तुमने लिखा है कि हमें इसका राजनीतिकरण नहीं करना चाहिए, वो तुम्हारे उसी बाप ने लिख कर दिया है जिसके नाम के कारण तुम हीरो और हीरोईन बने फिरते हो, या किसी पेड़ के नीचे नया ज्ञान प्राप्त हुआ है।
बीसीसीआई ने इस बात का भी खुलासा किया कि धोनी के दस्तानों के लिए बीसीसीआई ने आईसीसी से पहले ही इजाजत माँग ली थी। ऐसे में सवाल उठता है कि इजाजत देने के बाद आपत्ति क्यो जताई जा रही है।
सुरक्षाबलों को मिली जानकारी के अनुसार पता चला कि ये आतंकी रिहायशी इलाके में छिपे हुए है, जिसके बाद कार्रवाई की गई। मारे गए आतंकियों के पास से 3 एके राइफल्स बरामद की गई है।
यह गैंग न होने का कैसा सबूत है कि पिता खान मार्केट बँगले में रहे, पति भी उसी सर्विस, उसी सर्किल में, और उसके बाद आपके दामाद की तैनाती बैंक की खान मार्केट शाखा में ?
यह वीडियो राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रति चिंतित किसी भी सच्चे नागरिक को परेशान कर सकता है। क्योंकि, कश्मीर में बेशक आतंकी गतिविधियाँ वर्षों से संरक्षण पाती आ रही हों लेकिन पाकिस्तान की तरह खुलेआम आतंक और जिहाद के नाम पर उकसाते और चंदा इकठ्ठा करते आतंकी आने वाले किसी बड़े खतरे की आहट हैं।
तेलंगाना की 119 सदस्यीय विधानसभा में कॉन्ग्रेस विधायकों की कुल संख्या 18 है। इनमें से 12 विधायकों ने सत्तारूढ तेलंगाना राष्ट्र समिति (TRS) में शामिल होने के लिए विधानसभा अध्यक्ष को अर्जी दी है। 18 में से 12 यानी दो तिहाई। इसलिए पार्टी बदलने वाले इन MLAs पर दल-बदल विरोधी क़ानून का भी प्रावधान लागू नहीं होगा।
इस घोटाले के बारे में उन्हें तब मालूम चला था जब बीज निगम ने भुगतान के लिए अपना बिल कृषि विभाग के पास भेजा था। इस दौरान 99 लाख का फर्जी बिल पाया गया, जिसके बाद ही घोटाले की विभागीय जाँच शुरू हुई।