केरल में जन्मे शंकराचार्य ने बाल्यावस्था में ही गृह-त्याग कर के ओंकारेश्वर में शरण ली थी। मान्यता है कि वो 4 वर्षों तक यहाँ रहे थे। 12 वर्ष की उम्र में यहाँ से किया था प्रस्थान।
नरसिंहदेव द्वारा बनवाया गया कोणार्क का सूर्य मंदिर, साम्ब से जुड़ी सूर्य उपासना की कथा और मंदिर में लगे पहियों का जानिए महत्व। यूँ ही नहीं बना G20 की शान।