केरल में जन्मे शंकराचार्य ने बाल्यावस्था में ही गृह-त्याग कर के ओंकारेश्वर में शरण ली थी। मान्यता है कि वो 4 वर्षों तक यहाँ रहे थे। 12 वर्ष की उम्र में यहाँ से किया था प्रस्थान।
नरसिंहदेव द्वारा बनवाया गया कोणार्क का सूर्य मंदिर, साम्ब से जुड़ी सूर्य उपासना की कथा और मंदिर में लगे पहियों का जानिए महत्व। यूँ ही नहीं बना G20 की शान।
कान्हा जी हमें छोटे-छोटे क्षणों का आनन्द उठाना सिखलाते हैं। भविष्य की चिंता न कर वर्तमान में जीना सिखलाते हैं। हर प्रतिकूल परिस्थितियों में स्वयं पर नियंत्रण, विधाता पर विश्वास, सकारात्मकता, शांति और आनंद बनाए रखना ही रास कहलाता है।
गुजरात के सालंगपुर मंदिर की दीवालों पर बने हनुमानजी के विवादित चित्रों को हटा दिया गया है। संतों और हिन्दू संगठन से जुड़े लोगों की बैठक में सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया था।