भारत की बात

समझिए गणित के 100 समीकरणों से कैसे बना माँ दुर्गा का चित्र: प्राचीन भारत, जिसने गणित से ईश्वर को प्राप्त करना सिखाया

100 समीकरणों से माँ दुर्गा की तस्वीर कैसे बनी, यहाँ ये जानने के साथ-साथ हम भारत के समृद्ध प्राचीन इतिहास की ओर चलेंगे, जहाँ ऋषि-मुनियों ने हमें गणित के माध्यम से प्रकृति को पढ़ कर ईश्वर को प्राप्त करना सिखाया।

जब महात्मा गाँधी ने अपने बेटे मणिलाल को कहा: फातिमा से विवाह अधर्म है, तुम्हारे बच्चों का धर्म क्या होगा?

मणिलाल फातिमा से विवाह करना चाहते थे लेकिन एमके गाँधी ने उन्हें पत्र में लिखा कि जिस शादी के बारे में वो सोच रहा है, वो धर्म नहीं बल्कि अधर्म है।

‘मुसलमानों ने मजहब नहीं भारत को चुना’ – यह एक मिथक है, यकीन न हो तो सरदार पटेल का 1948 वाला यह भाषण सुनिए

सरदार पटेल ने जनवरी 1948 में कोलकाता में अपने भाषण में उन भावनाओं को आवाज़ दी जो हमारे ‘धर्मनिरपेक्ष’ नेताओं को गहरा मानसिक आघात दे सकते हैं।

जब पैदा होते ही अपराधी घोषित हो जाते थे बच्चे… अंग्रेजों का वो कानून, जिसने 160 जनजातियों को हाशिए पर धकेला

अंग्रेजों के 'आपराधिक जनजाति अधिनियम (Criminal Tribes Act, 1871)' के तहत भारत की कई जनजातियों को 'आदतन अपराधी' घोषित कर दिया गया।

सुपर कम्युनिस्ट शास्त्री: बेटी इंदिरा के हाथ में देश सौंपने के लिए नेहरू ने मृत्यु से पहले ही कर लिए थे पूरे इंतजाम

"..अपनी बेटी को PM पद के लिए तैयार किया जाना था, फिर मोरारजी देसाई और जगजीवन राम – दो महत्वाकांक्षी, सक्षम और प्रभावशाली प्रतिद्वंद्वियों को हटाना, और अंत में.."

गायत्री मंत्र जपते थे भगत सिंह, आर्य समाजी था परिवार, सावरकर के थे प्रशंसक: स्वीकार करेंगे आज के वामपंथी?

भगत सिंह का वामपंथ टुकड़े-टुकड़े वाला नहीं था। न ही उन्होंने कभी ऐसा लिखा कि वे हिन्दू धर्म को नहीं मानते या फिर वे हिन्दू देवी-देवताओं से घृणा करते हैं।

भगत सिंह को उनके दादाजी ने जनेऊ संस्कार के समय ही दान कर दिया था… वो ऐलान, जिसे ‘शहीद’ ने जिंदगी भर निभाया

“मिस्टर मजिस्ट्रेट, आप भाग्यशाली हैं कि आपको यह देखने को मिल रहा। भारत के क्रांतिकारी किस तरह अपने आदर्शों के लिए फाँसी पर भी झूल जाते हैं।”

पूना पैक्ट: समझौते के बावजूद अंबेडकर ने गाँधी जी के लिए कहा था- मैं उन्हें महात्मा कहने से इंकार करता हूँ

अंबेडकर ने गाँधी जी से कहा, “मैं अपने समुदाय के लिए राजनीतिक शक्ति चाहता हूँ। हमारे जीवित रहने के लिए यह बेहद आवश्यक है।"

हथियारों से लैस होना जरूरी, वरना भेड़िये तो राह चलते साधुओं पर भी अकारण झपट्टा मारते हैं: दिनकर ने क्यों कहा था ऐसा?

फ़रवरी 21, 1963 को राज्यसभा में दिए अपने भाषण में राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर ने समझाया था कि अहिंसा का अर्थ क्या होता है।

स्वामी विवेकानंद का शिकागो संदेश: 3 भविष्यवाणी में 2 पूरे, आखिरी को भी हकीकत बनाने की ओर भारत

127 साल पूर्व 11 सितंबर के दिन ही शिकागो शहर का ‘पार्लियामेंट ऑफ़ रिलीजन’ सभागार में स्वामी विवेकानंद ने अपना वह ऐतिहासिक भाषण दिया था।

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