पिछले कुछ सालों में जमीन और पानी की लड़ाई ने यहाँ एक भयंकर मजहबी रूप ले लिया है। जिसके चलते जनवरी 2019 से अब तक 1000 ईसाई मारे जा चुके हैं। जबकि पिछले 4 सालों में ये आँकड़ा 6000 से ज्यादा का है।
"कुछ खिलाड़ियों ने मुझसे कहा कि दानिश कनेरिया हमारे साथ खाना क्यों खाता है? मैंने उन सभी से कहा कि मैं तुम्हें उठाकर बाहर फेंक दूँगा। वो खिलाड़ी तुम्हें 6-6 विकेट लेकर दे रहा है। इंग्लैंड में दानिश और शमी ने ही हमें सीरीज जिताई थी।"
"नए संस्करण में ऐसी कोई भी बात नहीं होनी चाहिए जो कि कम्युनिस्ट पार्टी के विश्वासों के ख़िलाफ़ जाती हो। जो भी पैराग्राफ ग़लत समझे जाएँगे, उनमें या तो बदलाव किया जाएगा या फिर उनका फिर से अनुवाद करवाया जाएगा।"
एक होटल को भी जला डाला गया क्योंकि उसका मालिक मुस्लिम था। दरअसल, इस घटना से पहले सोशल मीडिया में एक वीडियो काफ़ी सर्कुलेट हुआ था। उन वीडियोज में ईसाईयों के साथ ग़लत व्यवहार करने के लिए मुस्लिमों व इस्लाम की निंदा की गई थी।
ऐसे समय में जब विश्व के लगभग सभी देशों ने पाकिस्तान का साथ छोड़ दिया है। उस समय चीन पाकिस्तान का सबसे बड़ा साझेदार है और शाहिद अफरीदी का चीन के खिलाफ़ बोलना और प्रधानमंत्री इमरान खान को इस मुद्दे पर बोलने के लिए उकसाना उन्हें महंगा पड़ सकता है।
राष्ट्रपति ने 2 दिनों का शोक घोषित किया है। अभी तक किसी आतंकी संगठन ने हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है। सेना ने बताया है कि हमले में 8 जवान भी शहीद हुए हैं।
आज से सवा सौ साल पहले निकोलस नोतोविच ने एक अनुभवी लामा से मुलाक़ात की। उसने प्राचीन पाली भाषा में लिखे कुछ ऐसे दस्तावेज दिखाए, जिससे निकोलस के होश उड़ गए। सिल्क रूट से हिमालय पर पहुँचे ईसा मसीह ने बौद्ध भिक्षुओं से आत्म व परमात्मा के गुर सीखे।
अमजद के अलावा गिरफ्तार किए गए अन्य आरोपितों में वकास, नदीम, साजिद, वसीम, मेटाब इस्लाम, रिजवान, इश्तियाक, असद महमूद, अरफ महमूद, अरफ मीर, यूनिस खान, नदीम नासिर, शहज़ाद नवाज़, शाज़ाद नज़ीर, सोहेल जफ़र और क्रिस्टोफर ईस्टवुड का नाम शामिल है।
वरुण ग्रोवर भले ही सरकार को कागज़ न दिखाने की बात करते हों और दूसरों को भी ऐसा ही सलाह देते हों लेकिन उनके शो में जाने वाले लोगों को कागज़ दिखाना ही पड़ेगा। सोशल मीडिया में लोगों ने वरुण ग्रोवर के इस दोहरे रवैये को आड़े हाथों लिया।
जानकी ने अपने निबंध में लिखे कुछ वाक्यों को शेयर किया। साथ ही बहार की किताब का स्क्रीनशॉट भी ट्वीट में डाला। हैरानी की बात यह थी कि जानकी के आर्टिकल और बहार की किताब में लिखे शब्दों में कोई फर्क नहीं है।