उस कॉन्सर्ट में उपस्थित महिलाओं में से एक ने यह भी कहा कि हिजाब में भी लड़कियों को कैसे परेशान किया गया था। वहीं, बॉलीवुड की स्टारकास्ट सोनम कपूर, जिनकी एक्टिंग स्किल भी उनके पाखंड का ही यह एक नमूना है.....
जिन लेखकों को मोदी सरकार से डर लगता था, क्या उनका डर अब ख़त्म हो गया है? क्या इन लेखकों के पास नैतिकता नहीं है या फिर नैतिकता को स्वार्थ और लोभ ने ढक लिया है?
इन सवालों के जवाब 8 जनवरी तक देने होंगे। एफएटीएफ की बैठक अगले साल फरवरी में होनी है। इस बैठक में पाकिस्तान को ब्लैक लिस्ट में शामिल करने पर फैसला होगा। बीते साल पाकिस्तान को ग्रे लिस्ट में डाला गया था।
करीब छह साल से जेल में बंद जुनैद का नाम अमेरिका के धार्मिक स्वतंत्रता आयोग ने हाल ही में अपने वैश्विक पीड़ितों के डेटाबेस में शामिल किया था। आयोग ने बताया था कि वे कितने भयावह संकट में हैं और किस हद तक उनकी जान को खतरा है।
थापा ने दुनिया के हिन्दुओं को वामपंथ के ख़िलाफ़ खड़े होने और सनातन धर्म के गौरव की रक्षा करने का आह्वान किया है। थापा ने कहा, "आइए दुनिया के सभी हिन्दू सनातन धर्म की महिमा को संरक्षित करने के लिए एकजुट हों।"
“हमारा अनुरोध है कि क्योंकि उन्होंने (वकार अहमद) खुद को मानसिक रूप से अयोग्य और अक्षम साबित कर दिया है, तो उन्हें तुरंत काम करने से रोका जाना चाहिए। हम सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों से अनुरोध करते हैं कि वे उन्हें किसी भी प्रशासनिक या न्यायिक कार्य करने से रोकें। वह 'मानसिक रूप से अस्वस्थ' हैं।”
असम में शुक्रवार (दिसंबर 20, 2019) को 10 दिन के बाद इंटरनेट सेवा बहाल कर दी गई। नागरिकता संशोधन कानून के कारण असम में हुए हिंसक प्रदर्शन के बाद सुरक्षा कारणों से इसे निलंबित किया गया था।
सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व पाक सेनाध्यक्ष जनरल मुशर्रफ को भगोड़ा बताते हुए कहा कि उसे सज़ा देना मुश्किल है क्योंकि वो भी काफ़ी ताक़तवर है। 167 पेज के फ़ैसले को कोर्ट ने लिखा है कि मुशर्रफ ने हमेशा अपनी बीमारी और सुरक्षा का हवाला देते हुए कोर्ट की कार्यवाही में हिस्सा नहीं लिया।
सीएए पर पूछे गए सवाल का जवाब देते हुए अमेरिका के स्टेट सेक्रेटरी माइक ने कहा कि सीएए को लेकर संसद में हुई लम्बी बहस को जिसने भी देखा-सुना होगा, उसे पता होगा कि इस क़ानून के द्वारा पड़ोसी देशों के पीड़ित अल्पसंख्यकों को अधिकार मिल रहा है।
सोशल मीडिया पर लोगों ने आशंका जताई कि इसके पीछे दो कारण हो सकते हैं। पहला कारण ये हो सकता है कि उन्होंने नए क़ानून को पढ़ने की जहमत ही नहीं उठाई और दूसरा कारण ये हो सकता है कि उन्हें पढ़ कर भी कुछ समझ नहीं आया। तभी उन्होंने 'दो बाप' वाली पहेली बुझाई।