जवाहिरी ने आतंकियों को यह हिदायत भी दी कि मस्जिदों व मुस्लिम बहुल स्थलों को निशाना न बनाएँ। ज़वाहिरी ने कहा कि पाकिस्तान जिहादियों का इस्तेमाल अपना राजनीतिक हित साधने के लिए करता है और बाद में धोखा दे देता है।
बंगाल में हाल ही में पाठ्यक्रम में बदलाव किया गया है, जिसमें ममता बनर्जी के नेतृत्व में हुए सिंगुर आंदोलन के अलावा उनके द्वारा किए गए अन्य आन्दोलनों को जगह दी गई है। कई ऐसी पुस्तकों के सामने आने की ख़बर है, जिसमें भारतीय विभूतियों को ग़लत तरीके से पेश किया गया है।
भारत के लिए एक टेस्ट मैच और 6 वनडे खेलने वाले योगराज सिंह ने रायडू के संन्यास का कारण महेंद्र सिंह धोनी को बताया है। उन्होंने कहा कि सौरव गाँगुली युवाओं को मौका देते थे, जबकि धोनी ने ऐसा नहीं किया।
हिन्दू धर्म और प्रथाओं, परम्पराओं के प्रचार-प्रसार में शामिल लोगों को भी हमेशा सचेत रहना चाहिए कि हमारे ज्ञान और प्रणालियों को इतना धूमिल या व्यवसायीकृत न किया जाए कि उनके मूल रूप, उनकी आत्मा से छेड़-छाड़ होने लगे या वह क्षीण हो जाए।
48 दिनों तक चलने वाली दर्शन की प्रक्रिया को सफलतापूर्वक संचालित करने के लिए स्थानीय प्रशासन ने पूरी व्यवस्था की है। ढाई हज़ार से भी अधिक पुलिसकर्मियों की देखरेख में महोत्सव चल रहा है। राज्यपाल बनवारी लाल ने पूजा-अर्चना में हिस्सा लिया। इसके पीछे की कहानी जानिए।
"शमी को श्रीलंका के खिलाफ मैच में इसलिए आराम दिया गया, क्योंकि भाजपा का एजेंडा मुस्लिमों को आगे नहीं बढ़ने देना है। मोहम्मद शमी शानदार प्रदर्शन कर रहे थे, वो 15 विकेट ले चुके थे। वो रिकॉर्ड बनाने के बेहद करीब थे। लेकिन अचानक से उन्हें बैठा दिया गया क्योंकि..."
"एयर इंडिया सभी हजयात्रियों को अपने साथ 5 लीटर के डब्बे में जमजम का पानी लेकर आने देने को बाध्य है क्योंकि यह हज कमिटी और एयर इंडिया के बीच हुई करार का हिस्सा है।"
रामायण और राम के नए विशेषज्ञ पैदा हुए हैं, जो झूठ की खेती से उपजे मक्कारी भरे फ़सल को दिखा कर हमें यह बता रहे हैं कि 'श्री' ग़लत है और 'सिया' सही है। अब हिन्दुओं को इनसे सीखना पड़ेगा कि शिव को 'महादेव' कहना है या 'भोलेनाथ'। ग़लत इतिहास बताने वाले ट्रिब्यून के लेख का भंडाफोड़।
"हम तो सिर्फ जुल्म सह रहे हैं। अभी तो हम घरों में बैठे हैं, घरों से निकले नहीं हैं। क्योंकि हमारे अल्लाह-ताला ने पहले हमें जुल्म सहना सिखाया है। हम जुल्म सहते जाएँगे, सहते जाएँगे और एक बार जब वॉलकैनो बन कर फटेंगे न... तो इंशाअल्लाह सब कहेंगे - ला इलाहा इल्लल्लाह मुहम्मदुन रसूलुल्लाह"
उच्चतम न्यायालय ने कारण यह बताया कि याचिकाकर्ता खुद मुस्लिम नहीं है, इसलिए इस याचिका पर सुनवाई का कोई औचित्य नहीं है। सुप्रीम कोर्ट का यह रुख सबरीमाला मामले में उसके फैसले के ठीक उलट है। सबरीमाला के याचिकाकर्ताओं में भी किसी का संबंध न तो केरल से था न ही...