इस्लाम के समर्थकों और ईसाईयों को आत्म-विवेचन की जरूरत है- 'इनटॉलेरेंस' के लिए जिम्मेदार 'भगवाकरण' है, या हिन्दुओं को आक्रामकता अख्तियार करने के लिए मजबूर करने वाले उनके आचरण।
पेट्रोल पम्प कर्मचारियों ने टीम इंडिया की नई जर्सी को 'प्रेट्रोल पम्प वालों' की तरह बताने वालों को जवाब देते हुए कहा कि जब ये जर्सी पहन कर टीम इंडिया खेलने उतर रही है, ऐसे समय में उन्हें भी गर्व की अनुभूति हो रही है।
इमाम तौहीदी ने ट्विटर पर इस वीडियो शेयर करते हुए लिखा कि उन्हें तो बचपन में मदरसे के शिक्षक उँगलियों के बीच पेन्सिल फँसा कर सज़ा देते थे, अब वे क़ुरान की आयतें याद न होने पर उलटा लटका कर मारते हैं।
महात्मा गाँधी पूरे देश में शराब पर प्रतिबन्ध की वकालत करते रहे थे। गाँधी जी का कहना था कि अल्कोहल लेने के बाद व्यक्ति किसी जानवर की तरह हो जाता है और वो अपनी पत्नी और बहन में भी फ़र्क़ महसूस करने में विफल होता है। इसीलिए, यह ग़लत है।
"मंत्रालय तो पहले भी थे, योजनाएँ भी हैं लोकिन जब तक आप जिम्मेदारी फिक्स नहीं करेंगे, मंत्रालय तो मंत्री, सेक्रेटरी, इंजीनियर जुटाने का जरिया बन कर रह जाएगा। लोगों को शामिल करने से पहले सरकार को इस आपदा को बहुत गंभीरता से लेना चाहिए।"
यह एक विडंबना है कि ज़ायरा का यह निर्णय सिल्वर स्क्रीन पर उनके द्वारा जिए गए किरदारों के व्यक्तित्व से एकदम उलट है। ज़ायरा ने अपने संक्षिप्त करियर में सामाजिक रूढ़ियों को तोड़ कर आगे बढ़ने वाली महिलाओं का किरदार निभाया है। सीक्रेट सुपरस्टार तो मुस्लिम पिता की दकियानूसी सोच के ही खिलाफ एक लड़की के ग्लैमर जगत में प्रवेश करने और सफलता पाने की ही कहानी थी।
प्यारे खान की कहानी से प्रभावित होकर IIM-अहमदाबाद ने उन्हें बुला तो जरूर लिया लेकिन लैपटॉप, अंग्रेजी और पावरपॉइंट प्रेज़ेंटेशनों की बात तो दूर, खान को IIM क्या होता है, यह भी पता नहीं था। तो उन्होंने स्टेज पर जाकर अपनी कम्पनी की कहानी सुना दी, वह भी हिंदी में - और प्रथम पुरस्कार जीत लिया।
कॉन्ग्रेस नेता अहमद पटेल के करीबी माने जाने वाले संदेसरा ब्रदर्स ने फर्जी कंपनियाँ बनाकर कई बैंकों को करीब ₹14,500 करोड़ का चूना लगाया। जबकि हीरा कारोबारी नीरव मोदी और उसके मामा मेहुल चोकसी ने पीएनबी बैंक में ₹11,400 करोड़ का घोटाला किया था।
"केवल सीमित संख्या में शरणार्थियों को रहने देना चाहिए। यूरोप, यूरोपियों के लिए है और अगर अप्रवासी अपने देशों में वापस नहीं भेजे जाते हैं, तो पूरा यूरोप मुस्लिम देश या फिर अफ्रीकी देश बन सकता है।"
कानपुर में ब्राह्मण समाज के सैकड़ों लोगों ने इस फिल्म का जबरदस्त विरोध किया। इस दौरान लोगों ने फिल्म और आयुष्मान के खिलाफ नारेबाजी करते हुए सिनेमाघरों में लगे पोस्टरों को फाड़ दिया।