इस ड्रोन को सीडी स्पेस रोबॉटिक्स लिमिटेड नाम की एक फ़र्म ने बनाया था और इसके मालिक निखिल उपाधे हैं जो आईआईटी कानपुर के छात्र रह चुके हैं। उपाधे के अनुसार, “हमने जो ड्रोन बनाए हैं उनमें कूलिंग किट के साथ-साथ आपातकालीन दवाओं और ब्लड यूनिट को ट्रांसपोर्ट करने की क्षमता है।”
आनंद रंगनाथन ने अक्षय पात्र के समर्थकों से अपील की कि केवल जबानी समर्थन देने की बजाय अक्षय पात्र के कार्य के समर्थकों को अपना पैसा अपने समर्थन के रूप में लगाना चाहिए। तभी हिन्दूफ़ोबिक गिरोहों को जवाब मिलेगा।
शुक्रवार (जून 7, 2019) को बीसीसीआई ने आईसीसी को पत्र लिखकर धोनी को ‘बलिदान बैज’ लगे ग्लव्स पहनकर विकेटकीपिंग करने की इजाजत देने की माँग की थी। मगर आईसीसी ने नियमों का हवाला देते हुए इजाजत देने से इनकार कर दिया है।
बीसीसीआई ने इस बात का भी खुलासा किया कि धोनी के दस्तानों के लिए बीसीसीआई ने आईसीसी से पहले ही इजाजत माँग ली थी। ऐसे में सवाल उठता है कि इजाजत देने के बाद आपत्ति क्यो जताई जा रही है।
अब उज्ज्वला के एक ऐसे फायदे के बारे में पता चला है, जो एक रिसर्च के बाद सामने आया है। इसनें स्वास्थ्य में भी योगदान दिया है। जहाँ-जहाँ एलपीजी का प्रयोग होता है, वहाँ श्वाँस रोगियों की संख्या में 20% कमी पाई गई।
आँखों के सामने पति को खो देने के एहसास ने दिल और दिमाग पर जो गहरा असर छोड़ा होगा वो संध्या के लिए किसी सदमें से कम तो बिल्कुल नहीं होगा। वहीं दूसरी तरफ़ आशीष की माँ की निगाहें बेटे की घर वापसी की आस लगाए बैठी थीं, जो अब कुछ बोलने की स्थिति में नहीं। एक माँ का इस क़दर चुप हो जाना उनके अपार दु:ख को प्रकट करने के लिए काफ़ी है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि जो गाँव खुले में शौच से पूरी तरह मुक्त नहीं हुए हैं उनका भूजल उन गाँवों से अधिक गंदा है जहाँ अब लोग खुले में शौच करने नहीं जाते।
पैरा स्पेशल फ़ोर्स के लिए धोनी का प्यार कोई नई बात नहीं है। वर्ल्ड कप से पहले IPL के दौरान भी धोनी ने इनके बलिदान बैज वाली टोपी पहनी थी। धोनी के पास एक मोबाइल केस भी है, जिसके पीछे यह बैज बना हुआ है।
59 वर्षीय प्रकाश पंत ने अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ टैक्सस के अस्पताल में अपनी आखिरी साँस ली। 30 मई को उन्हें कैंसर के इलाज के लिए अमेरिका ले जाया गया था।