हिंदीभाषियों ने दक्षिण भारतीय भाषाओं की फ़िल्मों को एक ऐसा मार्केट दिया है, जिसकी व्यापकता देख कर हिंदी का विरोध करने वाले बेहोश हो जाएँ। बंधन प्यार से बनता है। जब वो टूटता है, तो विदेशी चीजें हमें अपना गुलाम बनाती हैं। इसे तोड़ने वालों, सावधान!
ऐसे समय में जब लोग अपनी ग़लती को सुधारने के लिए तैयार हैं और आगे की तरफ बढ़ रहे हैं, इस तरह की फ़िल्में जातिगत पहचान के पुराने ढकोसले को अपने गले से नीचे उतारने का एक बेशर्म प्रयास है, जिसकी जितनी निंदा की जाए वो कम है।
केंद्रीय मंत्री ने यह भी कहा कि सरकार 5G का प्रयोग विकासोन्मुखी कार्यों के लिए करने का पूरा प्रयास करेगी। उन्होंने बताया कि इस तकनीक का प्रयोग वंचित वर्गों और ग्रामीणों के हित में होगा। साथ ही उन्होंने शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में विभिन्न प्रकार के जनहितकारी कार्यों के लिए 5G तकनीक का इस्तेमाल करने की बात कही।
मार्क्स कभी उसे देखने भी नहीं जाते थे, जिस कारण फ्रेडिक देमुथ की शिक्षा-दीक्षा अच्छे से नहीं हो पाई। वो जिंदगी भर मजदूर और कल-पूर्जे बनाने वाला काम करता रहा। आखिरकार 1929 में 78 वर्ष की उम्र में फ्रेडिक देमुथ की मृत्यु हुई, लंदन की एक ग़रीब बस्ती में - वो भी इस विश्वास के साथ कि उसकी माँ...
विवेक अग्निहोत्री ने अपनी अगली फ़िल्म की घोषणा कर दी है। पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की मृत्यु के पीछे से जुड़ा सच सामने लाने के लिए 'द ताशकंद फाइल्स' नामक फ़िल्म का निर्देशन करने के बाद उनका अगला प्रोजेक्ट कश्मीरी पंडितों के विस्थापन पर आधारित होगा।
रूमा गुहा ने साल 1944 में हिंदी फिल्म 'ज्वार-भाटा' से बॉलीवुड डेब्यू किया था। इसके बाद उन्होंने बंगाली फिल्मों की ओर रुख कर लिया था। रूमा ने ‘एंटोनी फिरंगी’, ‘गंगा ओभीजान’, ‘बालिका वधू’ और ‘अभिजान’ समेत कई बंगाली फिल्मों में काम भी किया।
मुस्लिमों के घरों में जाकर भी देखा जा रहा है कि कहीं वे नमाज़ वगैरह तो नहीं पढ़ रहे या अपने मज़हब की चीजों को तो नहीं प्रैक्टिस कर रहे। कैम्पों में 30 लाख के लगभग उइगरों को नज़रबंद रखा गया है।
जिसे धार्मिक कर्मकांडों को ढकोसला मानना है, वह काहे का हिन्दू, काहे का ब्राह्मण? उसके विचारों का बोझ हिन्दू क्यों उठाए? उसके विचारों के आधार पर ब्राह्मणों को क्यों निशाना बनाया जा रहा है, जो हिन्दू ही नहीं है?
रोहिंग्या का मुद्दा काफी पुराना है। म्यांमार से अवैध रूप से रोहिंग्या भारत में प्रवेश करते रहे हैं। मोदी सरकार ने इन पर कठोर कार्रवाई करते हुए पिछले साल रोहिंग्या नागरिकों को वापस उनके देश म्यांमार वापस भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी थी।
शुक्रवार को हुई यह घटना इस साल की 150वीं ऐसी घटना है जिसमें चार से ज्यादा लोगों पर हमला हुआ या फिर उनकी मौत हुई। मेयर बॉबी दायर ने इस घटना के बारे में कहा है कि ये दिन वर्जिनिया बीच के इतिहास का सबसे काला/विनाशकारी दिन है।