पुलिस ने मौलाना को समझाया कि पहले कुछ दिनों में तो किसी को कोरोना हो भी तो इसके लक्षण पता नहीं चलते, इसीलिए ये पता करना मुश्किल हो जाता है कि कौन संक्रमित है और कौन नहीं। मौलवी ने दावा किया कि अल्लाह का घर बंद नहीं होगा और मस्जिद में आने वाले किसी भी व्यक्ति को नहीं रोका जाएगा।
पुलिस अधिकारी ने बताया कि मुदीब मोहम्मद ने सोशल मीडिया पर कट्टरपंथी इस्लामी उपदेशक जाकिर नाइक को फॉलो कर रखा है, वो उसके भाषण को देखता और उसे लाइक और शेयर भी करता है। पुलिस अधिकारी ने दावा किया कि ऐसे पोस्ट करना उसकी आदतों में शुमार है, जो अन्य समुदाय की धार्मिक भावनाओं को आहत करती है।
डफली बजाने से अगर कोरोना से लड़ाई लड़ ली जाती तो शायद आज JNU के वामपंथी ब्रिगेड से ही सबसे ज्यादा डॉक्टर और वैज्ञानिक निकलते। अगर प्रोपेगेंडा पोर्टलों में लेख लिखने से कोरोना भाग जाता तो राणा अयूब, सदानंद धुमे और बरखा दत्त जैसे लोगों ने अब तक वैक्सीन का अविष्कार कर लिया होता।
इन नए मामलों के आने के बाद से वहाँ का स्वास्थ्य विभाग अब इस जाँच-पड़ताल में लगा है कि इन 10 कोरोना संक्रमित लोगों के सम्पर्क में कौन कौन आया था। जाँच का दायरा बढ़ता जा रहा है।
एक तरफ जहाँ पूरा देश कोरोना वायरस के महामारी से जूझ रहा है, वहीं दूसरी तरफ सोमवार को कोलकाता में दो वार्ड पार्षदों के खिलाफ मापीट करने के आरोप में मामला दर्ज किया गया है। जानकारी के मुताबिक शहर के वार्ड नंबर 134 और 137 की सड़कों पर पूरी रात तक भयंकर लड़ाई चली।
“कोरोना वायरस महामारी से संघर्ष में सरकार व समाज की सम्मिलित शक्ति की आवश्यकता है। मेरी आप सभी से अपील है कि 'मुख्यमंत्री पीड़ित सहायता कोष' द्वारा पीड़ितों की सहायता व उन्हें राहत प्रदान करने हेतु अपनी सामर्थ्य के अनुसार सहयोग करें और हम सभी के इस महासंघर्ष को शक्ति प्रदान करें।”
बुखार से काँपते हुए उसने नागपुर में 5 घंटे रुक कर ट्रेन बदली थी। महाराष्ट्र सरकार को पत्र लिख कर उसकी यात्रा के बारे में सूचित कर दिया गया है। छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस से सफर करने वाले उस यात्री के बारे में कहा जा रहा है कि उसने नागपुर में भी कई लोगों में संक्रमण फैलाया होगा। रविवार को वो हॉस्पिटल से भाग निकला, जिसके बाद उसे घर से उठा कर लाया गया।
मवाना में दारोगा नरेंद्र सिंह ने शहर काजी मौलाना नफीस, एडवोकेट असलम, नईम सौफी समेत अन्य के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की है। पुलिस ने आईपीसी की धारा 188, 269, 270 व 14 विदेशी अधिनियम, महामारी एक्ट के तहत केस दर्ज किया है।
पूछताछ में सभी विदेशी नागरिकों ने बताया है कि वो सभी तबलीग जमात के लिए राँची आए थे। कुछ लोगों ने इसकी सूचना डीसी को दी, जिसके बाद उन्हें शिकंजे में लिया गया। इन सभी को हिरासत में लेकर क्वारंटाइन किया गया है। साथ ही एक मेडिकल टीम ने इन सबकी जाँच भी की है।