सबसे बड़ी संख्या में जमाती बिजनौर जिले में छिपे पाए गए। बिजनौर जिले से असम की पाँच महिलाओं सहित 35 जमातियों को पकड़कर क्वारंटाइन किया गया है। जिले में अब तक 487 जमाती पुलिस द्वारा तलाशे जा चुके हैं।
पलायन अवसर भी है और अभिशाप भी। लेकिन देश की हिंदी पट्टी के लिए यह मजबूरी ही दिखती है। आर्थिक सुरक्षा के लिए ही महानगरों में पहुॅंचने वाले लोगों को जब यह सुरक्षा खतरे में दिखी तो उन्होंने घर लौटने में भलाई समझी। लॉकडाउन बढ़ने और घर तक जाने के लिए बस की व्यवस्था की अफवाहों ने उन्हें सड़क पर उतार दिया।
भोपाल के ऐशबाग, मंगलवारा, श्यामला हिल्स और पिपलानी तलैया थानों में मामले दर्ज किए गए हैं। इनके ऊपर धारा 188, 269, 270 आईपीसी की धारा 51 राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन अधिनियम की धारा 13 और 14 एवं विदेशी विषयक अधिनियम 1964 के तहत केस दर्ज किया गया है।
हिंदपीढ़ी इलाके के लोगों से तंग आकर इंफोर्समेंट टीम के सदस्यों ने अधिकारियों से कहा है कि यदि इलाके में लोग यूँ ही उनके ऊपर थूकते रहेंगे तो वे उस क्षेत्र में सैनिटाइजेशन का काम कराने नहीं जाएँगे। उधर प्रशासन ने ऐसे लोगों को खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश दिया है।
“इस बारे में जाँच की जाएगी कि वाधवान परिवार के 23 सदस्यों को खंडाला से महाबलेश्वर की यात्रा करने की अनुमति कैसे मिली।” इसके साथ ही महाराष्ट्र सरकार द्वारा भारी शर्मिंदगी झेलने के बाद गृह विभाग के विशेष सचिव और एडिशनल डीजीपी अमिताभ गुप्ता को तत्काल प्रभाव से अनिवार्य अवकाश पर भेज दिया गया।
तमिलनाडु में पिछले 24 घंटे में कोरोना संक्रमण के 96 नए मामले सामने आए हैं, जिनमें से 84 संक्रमित लोग दिल्ली निजामुद्दीन में आयोजित तबलीगी जमात के कार्यक्रम से जुड़ हुए हैं।
उसने गाँव वालों से मरकज के मजहबी सभा में शामिल होने वाली बात को सबसे छुपाया। जब ग्रामीणों ने उससे इस संबंध में पूछा तो भी उसने झूठी और मनगढ़ंत कहानी सुनाकर उनको बरगलाया। लोगों ने भी आसानी से उसकी बातों को मान लिया और उसके साथ हिलने-मिलने लगे।
“गाँव में लोगों ने अफवाह उड़ा दी है कि हमने दूसरे मजहब के परिवार से 2 लाख रुपए लेकर मामले को रफा-दफा कर दिया है। ये बिल्कुल गलत बात है। हमने ऐसा कुछ भी नहीं किया है और न ही करेंगे। हम तो कहते हैं कि 1 लाख रुपया मेरे से और ले लो और दोषियों को सजा दो। हमें पैसे नहीं, इंसाफ चाहिए। हमारी माँ चली गई, उनकी मौत नहीं हुई, उनकी हत्या की गई। हमारा एक जान चला गया। हम पैसा लेकर क्या करेंगे? हमें तो बस इंसाफ चाहिए।”
देश में लगातार डॉक्टरों के साथ मारपीट करने की जमातियों की खबर पर वसीम रिजवी ने कहा कि डॉक्टरों को परेशान करके उनका मनोबल कम करने की कोशिश की जा रही है। यह भी इन सभी तबलीगी जमातियों की साजिश का एक हिस्सा है।
विशेष शाखा की रिपोर्ट में तीन ऐसे मोबाइल नंबर दर्ज हैं जो लोहरदग्गा के आदिवासियों के नाम हैं। जॉंच से पता चला है कि ये लोग कभी दिल्ली गए ही नहीं। इनमें से दो मोबाइल नंबर पर कॉल रिसीव नहीं हो रहा है। एक नंबर पर दिल्ली में कॉल रिसीव हो रहा है।