जनता कर्फ्यू के दिन थाली बजाने पर पड़ोस में रहने वाले मुस्लिम युवकों ने रेवंत सिंह को धमकाया। कहा कि यहाँ मोदी का नहीं हमारा कानून चलता है। फिर 4 अप्रैल को उन पर घात लगाकर हमला किया। 5 दिन कोमा में रहने के बाद उनकी मौत हो गई।
सीवान के एक ही परिवार के इतने लोगों के संक्रमित होने की बात सामने आने के बाद राज्य में हड़कंप मचा हुआ है। इस परिवार का एक शख्य ओमान से लौटा था। तीन जिलों सीवान, बेगूसराय और नवादा की सीमाएंँ सील कर दी गई हैं।
"अब अस्पताल में भर्ती संक्रमित जमातियों को अपनी भूल का एहसास हो गया है। इससे पहले वे संक्रमण फैलाने के लिए तरह-तरह के तरीके अपना रहे थे, लेकिन बिगड़ते हालात को देख उनके व्यवहार में बदलाव आया है। अब आसानी से वे दवाइयाँ खा रहे हैं, क्योंकि यह उनके भले के लिए ही है।"
थोड़ी आगे जाकर नईम अपना संतुलन खो बैठा और धुरत के साथ बाइक से गिर गया। बाइक भी दूर जा गिरी। इस वाकये में धुरत के हाथ, पैर और कंधे में चोटें आईं। बाद में उन्हें नजदीकी अस्पताल ले जाया गया और मौक़े पर ड्यूटी पर तैनात अन्य पुलिस कर्मियों द्वारा नईम को गिरफ्तार कर लिया गया।
बुधवार को आशा वर्करों की एक टीम पुलिस की टीम को साथ लेकर इंदिरा कॉलोनी में डोर टू डोर जाकर सर्वे कर रही थी। लेकिन सर्वे के दौरान कुछ युवकों ने टीम का विरोध करना शुरू कर दिया। उग्र युवकों ने आशा वर्करों व पुलिस के समझाने पर भी उनकी बात नहीं मानी और उन पर हमला बोल दिया। इस हमले में महिला पुलिस कर्मी घायल हो गई।
काफी संख्या में युवक कब्रिस्तान की तरफ जा रहे थे। एक साथ जाने से रोके जाने पर वे पुलिस से उलझ गए। पहले गाली-गलौज की और फिर हाथापाई करने लगे। कुछ ही देर में उन्होंने पुलिस पर पथराव शुरू कर दिया।
दिल्ली के निजामुद्दीन स्थित तबलीगी जमात के मरकज से 651 लोग पंजाब लौटे हैं। अमरिंदर सिंह ने बताया कि इनमें से 636 ट्रेस कर लिए गए हैं जबकि 15 अन्य की तलाश जारी है।
छिंदवाड़ा में अब तक 4 कोरोना पॉजिटिव केस सामने आ चुके हैं। एक की मौत हो चुकी है। बावजूद इसके एक मस्जिद में बड़ी तादाद में लोग नमाज पढ़ने के लिए इकट्ठा हो गए।
सबसे बड़ी संख्या में जमाती बिजनौर जिले में छिपे पाए गए। बिजनौर जिले से असम की पाँच महिलाओं सहित 35 जमातियों को पकड़कर क्वारंटाइन किया गया है। जिले में अब तक 487 जमाती पुलिस द्वारा तलाशे जा चुके हैं।
पलायन अवसर भी है और अभिशाप भी। लेकिन देश की हिंदी पट्टी के लिए यह मजबूरी ही दिखती है। आर्थिक सुरक्षा के लिए ही महानगरों में पहुॅंचने वाले लोगों को जब यह सुरक्षा खतरे में दिखी तो उन्होंने घर लौटने में भलाई समझी। लॉकडाउन बढ़ने और घर तक जाने के लिए बस की व्यवस्था की अफवाहों ने उन्हें सड़क पर उतार दिया।