40 डॉक्टरों के अलावा अस्पताल के 30 अन्य कर्मचारी भी है जिन्हें इस मरीज के कारण क्वारंटाइन किया गया। इनमें नर्स, अभिभावक और सफाईकर्मचारी शामिल हैं। इनके सैंपल भी टेस्ट के लिए भेजे गए हैं।
ये मुस्लिम भीड़ कभी स्वास्थ्यकर्मियों पर थूककर तो कभी उनके साथ मारपीट करके अपने जाहिलपने का लगातार उदहारण पेश कर रही हैं। हालत ये हो गई है कि ये लोग जिन्हें प्रशासन स्वास्थ्य सुविधा मुहैया करवाने की कोशिशों में जुटा है, वे लोग उनके लिए सिरदर्दी का सबब बन गए हैं। इनके बेहूदे रवैये से इस समय न केवल अस्पताल प्रशासन बल्कि पुलिस प्रशासन भी त्रस्त है।
बालाजी मंदिर में प्रधानमंत्री के आह्वान पर रूकमानंद सैनी, मनोज सैनी, जीनकूदेवी, कैलाश, सुशीलकुमार तथा भागूराम द्वारा दीपक जलाए जा रहे थे। तभी अचानक सद्दाम, शाहरुख, जावेद, अरशद, एजाज, जाबिर ने आकर उनसे दीपक जलाने से मना किया। इस पर विवाद शुरू हो गया। जिसके बाद मुस्लिम समुदाय के लोगों ने उन पर पथराव शुरू कर दिया।
ये सभी लोग दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में छुपे हुए थे। लॉकडाउन के दौरान भारत में फँसे अन्य मलेशियाई नागरिकों को स्वदेश पहुँचाने के लिए मलेशियाई उच्चायोग द्वारा विशेष विमान की व्यवस्था की गई थी। इन 8 जमातियों ने इस विशेष उड़ान का अनुचित लाभ उठाने की कोशिश की।
आँध्र प्रदेश के पूर्वी गोदावरी जिले में स्थित रयावरम गाँव से एक पादरी हिरासत में लिया गया। पादरी पर आरोप है कि उसने लॉकडाउन के बीच 100 से अधिक लोगों को एक जगह इकट्ठा कर प्रार्थना करवाई। ये कार्यक्रम इसाइयों के पवित्र सप्ताह शुरू होने से पहले आयोजित किया गया।
मेडिकल टीम के सदस्यों को स्थानीय लोगों ने दौड़ा दिया। गिरते-पड़ते किसी तरह टीम वहाँ से जान बचाकर भागी। भीड़ इतनी उग्र थी कि उनके पास भागने के अवाला कोई और विकल्प नहीं था। पहले तो स्थानीय लोगों ने गाली-गलौज की और फिर इन पर हमला कर दिया।
कल से आज तक 472 नए मामले सामने आए हैं, जिससे देश में कोरोना संक्रमित कुल मामलों की संख्या अब 3374 तक पहुँच चुकी है। अग्रवाल ने यह भी बताया कि अब तक देश के 274 जिलों से कोरोना संक्रमण के केसेस आ चुके हैं। जबकि भारत में अब तक कोरोना के कारण मरने वालों की संख्या 79 हो चुकी है, जिसमें से 11 शनिवार और रविवार को मिलाकर हुई हैं।
26 तबलीगी जमात के सदस्यों को दरियापुर से लाकर सोला के सिविल अस्पताल के आइसोलेशन वार्ड में भर्ती करवाया गया था। जब मेडिकल टीम ने उनकी जाँच करने की कोशिश की, तो उन्होंने जाँच करवाने से मना करते हुए हँगामा खड़ा कर दिया। इनका आरोप था कि सरकार इन्हें जान से मारने की कोशिश कर रही है।
जहाँ मरकज बना हुआ है, वहाँ पहले एक छोटा सा मदरसा होता था। मदरसा भी नाममात्र जगह में ही था। यहाँ क्षेत्र के ही कुछ लोग नमाज पढ़ने आते थे। लेकिन 1992 में मदरसे को तोड़कर बिल्डिंग बना दी गई।
10 इंडोनेशियाई नागरिकों के खिलाफ गाजियाबाद पुलिस ने FIR दर्ज कर ली है। इनके खिलाफ टूरिस्ट वीजा नियमों के उल्लंघन करने के आधार पर FIR दर्ज हुई। गाजियाबाद के एसएसपी कलानिधि मारन ने बताया कि एक लोकल गाइड और उन चार लोगों के खिलाफ भी केस दर्ज कर लिया गया है, जिन्होंने इन सभी को छुपाए रखने की कोशिश की थी।