केजरीवाल सरकार की अपील के बाद भी शाहीन बाग के प्रदर्शनकारियों का सीएए के खिलाफ विरोध प्रदर्शन जारी है। इक तरफ चीन के बुहान शहर से तेजी से फैली महामारी ने दुनियाँ को बंद कर दिया है। तो वहीं दूसरी ओर शाहीन बाग के प्रदर्शनकारी धरना स्थल पर कुरान पढ़ रहे हैं। यह मानते हुए कि अल्लाह उन्हें कोरोना के संकट से बचाएगा।
सुरेंद्र का सफदरगंज अस्पताल में पहले से ही इलाज चल रहा था। उन्हें रात के क़रीब 11 बजे हार्ट अटैक आया था। उन्हें अस्पताल ले जाते समय कालिंदी कुञ्ज मार्ग पूरी तरह बंद था।
तस्वीर में साफ देखा जा सकता है कि धरना स्थल पर कुछ मीटरों की दूरी पर जगह-जगह रहे तख्त पर इक्का-दुक्का महिलाएँ बैठी हुई दिखाई दे रही हैं। वहीं कुछ प्रदर्शनकारी मुँह पर मास्क पहने दिखाई दिए, लेकिन दिल्ली सरकार द्वारा कोरोना के खतरे को देखते हुए 50 से अधिक लोगों के एक स्थान पर एकत्र न होने की चेतावनी शाहीन बाग के काम नहीं आई।
चीन के बाद इस भयानक वायरस का कहर यूरोप में टूट रहा है। आँकड़ों के अनुसार, कोरोना के कारण सबसे ज्यादा मौत चीन (3,237) के बाद अभी तक इटली (2,503) में हुई हैं और ईरान (1,135) तीसरे नम्बर पर है।
इराक मूल इस्लामिक नेता अयातुल्ला सैयद हादी-अल-मुदारिसी ने भी एक विडियो संदेश में कहा था कि कोरोना वायरस चीन पर ‘अल्लाह का कहर’ है। बाद में उनके भी इस वायरस से संक्रमित होने की दुखद खबर सामने आई थी।
कोरोना संक्रमण का प्रसार रोकने के लिए लोगों से एक जगह जुटने को नहीं कहा जा रहा। लेकिन, तौहीद जमात जैसे कट्टरपंथी संगठनों को इन सबसे फर्क नहीं पड़ता। सीएए विरोध में चेन्नई हाई कोर्ट के पास प्रदर्शन कर उन्होंने यह बता दिया है।
ऐसे वक्त में जब कोरोना से लोग अपनी जान गँवा रहे हैं, माबुद अली जैसे लोग अफवाह और गलत जानकारी के नाम पर धंधा कर रहे हैं। क्विंट जैसे संस्थान उनके अपराध को भी हिन्दुओं का उपहास उड़ाने के मौके के तौर पर ले रहे हैं।
"मैं 20 साल तक वकील और 20 साल जज रहा हूॅं। मैंने कई अच्छे और कई बुरे जजों को देखा है। लेकिन मैं भारतीय न्यायपालिका में किसी भी न्यायाधीश को इस यौन विकृत रंजन गोगोई जितना बेशर्म और अपमानजनक नहीं मानता। शायद ही कोई दोष है, जो इस आदमी में नहीं था।"
आश्चर्य की बात यह कि ममता के बंगाल से छपने वाले इस अखबार में बंगाल के मजहबी दंगे दिखाई नहीं देते, बीजेपी और आरएसएस के कार्यकर्ताओं की आए दिन होती हत्याएँ नहीं दिखतीं, लेकिन दलितों को एक वायरस से तुलना करते हुए, राष्ट्रपति पर निशाना साधा जाता है, क्योंकि वो भाजपा-संघ से जुड़े हुए रहे हैं।
तोमर बीजेपी के मंडल अध्यक्ष थे। AIMIM के पश्चिमी यूपी के प्रभारी आरिफ की गिरफ्तारी के बाद इस हत्या में कुरैशी की भूमिका उजागर हुई थी। लेकिन वह फरार हो गया था।