कानपुर डीआईजी ने कहा था धरने का चेहरा बने और उपद्रवियों को पनाह देने के आरोपितों पर रासुका के तहत कार्रवाई की जाएगी। मोहम्मद अली पार्क और फूल पार्क में धरने को बाहर से लोग आकर समर्थन देने के साथ धरने पर बैठे लोगों को उकसा भी रहे हैं।
सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस संजय किशन कौल और जस्टिस केएम जोसेफ की बेंच ने सुनवाई करते हुए कहा कि विरोध ऐसा हो कि किसी दूसरे को कोई परेशानी न हो। सुनवाई को दौरान जजों ने तीखी टिप्पणी भी की और कहा कि अनिश्चित समय के लिए कोई कैसे पूरी सड़क को जाम कर सकता है?
“हमें ध्यान रखना है कि हमें इतना भी न्यूट्रल (तटस्थ) नहीं होना है कि हमारी पहचान ही खत्म हो जाए। पहले हम मुस्लिम हैं और उसके बाद कुछ और हैं। हमारे अंदर का जो दीन है, जो इमान है, वह जिंदा रहना चाहिए। कहीं ऐसा न हो कि हम अल्लाह को भी मुँह दिखाने लायक न रह जाएँ।”
एससी-एसटी एक्ट के प्रावधानों में पिछले साल केंद्र सरकार द्वारा किए गए संशोधनों को सुप्रीम कोर्ट ने मान लिया है। अर्थात यदि किसी के खिलाफ इस कानून के तहत केस दर्ज किया जाता है, तो बगैर जाँच के उसकी गिरफ्तारी हो सकेगी।
बल्लीमारान में 71.6% मतदान दर्ज किया गया, जबकि सबसे कम मतदान दिल्ली छावनी में 45.4% हुआ है। दिल्ली में मतदान के बाद शनिवार को आए एग्जिट पोल के नतीजों में AAP को आसानी से जीत मिलती दिखाई दे रही है।
पीड़िता शाम को जब ऑफिस का काम खत्म करने के बाद निकलने वाली थीं, तभी शराब के नशे में धुत्त प्रधान लिपिक महमूद आलम ने उन्हें पीछे से पकड़ लिया और दुष्कर्म करने का प्रयास किया। CCTV से पता चला कि वह पूरे दिन 4 बार पीड़िता के कमरे में गया था, और शाम को तो...
उग्र भीड़ ने थाने के बगल में स्थित झोपड़ी को भी जला डाला। सरकारी कागज़ात फाड़ डाले और कम्प्यूटरों व फर्नीचरों को तोड़ डाला। दंगाई भीड़ ने पूरे थाने को आगे के हवाले कर दिया। रिकॉर्ड रूम और और मालखाना को भी फूँक दिया। भीड़ में कम से कम 1000 लोग शामिल थे।
"राज्य सरकार आरक्षण देने के लिए बाध्य नहीं है। कोई भी मूलभूत अधिकार ऐसा नहीं है, जो प्रमोशन में आरक्षण के किसी व्यक्तिगत दावे को मान्यता प्रदान करता हो। कोर्ट राज्य सरकारों को प्रमोशन में आरक्षण देने के लिए आदेश जारी नहीं कर सकता।"
रुक-रुककर नारेबाजी का ये सिलसिला आधी रात तक चलता रहा। यहाँ कुछ एएमयू की छात्राओं ने भी तकरीर के जरिए महिलाओं को सीएए वापस होने तक डटे रहने और आमजन से धरने को सहयोग करने की अपील की।
पुलिस ने बताया कि गिरफ्तार बांग्लादेशियों की पहचान ढाका के नादौर सिंगरा निवासी मामून शेख, मिलन शेख, मुकुल शेख, मोनू वैध, सीजर शेख, असलम शेख, पालन शेख के रूप में हुई है। इसके साथ ही इनके परिवार से संपर्क करने की कोशिश की जा रही है। फिलहाल सातों बांग्लादेशियों को जेल भेज दिया गया है।