मुस्लिमों में शिया और सुन्नी, दोनों के ही तौर-तरीके अलग हैं। सुन्नी मुस्लिमों में तीन प्रमुख पंथ होते है- बरेलवी, देवबंदी और अहले हदीस। अयोध्या में मस्जिद के लिए 5 एकड़ ज़मीन दिए जाने के बाद भी इस पर बहस शुरू हो गई है कि ये मस्जिद किस पंथ का होगा, शिया या सुन्नी?
पुलिस ने बताया कि उन महिलाओं को मंदिर की परंपरा के बारे में पता नहीं था और उन्हें जैसे ही इसका भान हुआ, वो ख़ुद वापस चली गईं। पुलिस ने बताया कि उन महिलाओं को समझाने की कोई ज़रूरत ही नहीं पड़ी।
मजिस्ट्रेट के आदेश के बावजूद वहाँ बुधवार को मस्जिद के निर्माण का काम फिर से शुरू हो गया। आसपास के लोगों ने इसकी सूचना जब पुलिस को दी तो हयात नगर पुलिस स्टेशन के स्टेशन हाउस अफ़सर (SHO) रवीन्द्र कुमार मौक़े पर पहुँचे और परिसर में ताला लगा दिया गया।
इसके पहले, JNU के छात्र विश्वविद्यालय प्रशासन पर फीस बढ़ाने का आरोप लगा कर विरोध प्रदर्शन भी किया था। इस दौरान छात्रों ने न सिर्फ़ पुलिस के साथ झड़प की, बल्कि महिला प्रोफेसर के साथ भी बदतमीजी की। महिला प्रोफेसर के कपड़े फाड़ने की कोशिश की गई थी।
एनआइए ने दावा किया कि गगनेजा की हत्या की साजिश पाकिस्तान, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया, फ्रांस, इटली व यूएई सहित कई देशों में रची गई। साजिश के तहत अपराधियों को इटली, ऑस्ट्रेलिया व यूके से फंडिंग की गई थी। यह फंड हत्याकांड को अंजाम देने के लिए हथियार खरीदने व अन्य सामान खरीदने के लिए इस्तेमाल किया गया।
"एक महिला ज़िले हुमा के नेतृत्व में लगभग 110 मुस्लिम महिलाओं और लड़कियों ने ग़ैर-क़ानूनी रूप से इकट्ठा होकर ईदगाह मैदान में एकत्र होकर नमाज अता की। लगभग 20 मिनट की नमाज पूरी होने के बाद, हुमा ने माइक सँभाला और देश-विरोधी नारे लगाए।"
डॉ अशफाक पूर्व आर्मी मेजर है। वो विस्फोटक को मस्जिद तक पहुँचाने में प्रमुख भूमिका निभाया था। अशफाक इस विस्फोट मामले के मुख्य आरोपित हाजी कुतुबुद्दीन का पोता है, और मस्जिद में अक्सर नमाज अदा करता था।
"अगर मस्जिद को (1992 में) ध्वस्त नहीं किया जाता, तब भी क्या यही फ़ैसला आता? हमारी लड़ाई ज़मीन के टुकड़े के लिए नहीं थी। यह सुनिश्चित करना था कि मेरे क़ानूनी अधिकारों का ध्यान रखा जाए। SC ने यह भी स्पष्ट कहा कि मस्जिद बनाने के लिए किसी मंदिर को नहीं गिराया गया। मुझे अपनी मस्जिद वापस चाहिए।"
कोर्ट ने इन दोनों ही मंदिरों को हटाने का आदेश देते हुए कहा कि लॉ एन्फ़ोर्समेंट एजेंसी फ़ैसला लें कि यह कैसे और किस तरीक़े से संभव हो सकेगा। साथ ही कोर्ट ने इन आदेशों की एक तय अवधि के अंदर पूरा करने की ज़िम्मेदारी...
...जब अपने बेटे की क़रतूत की ख़बर सोनू के अब्बू तैबुल को लगी तो वो हथियार के साथ उसे बचाने के लिए अपने साथ कई लोगों को लेकर घटना-स्थल पर पहुँचा। तैबुल के साथ तनवीर, बाबरस राजा, अफ़सर, मुर्तजा और दिलशाद थे, जो हथियार के ज़ोर पर सोनू को वहाँ से बचाकर ले गए।