'द वायर' की 'पत्रकार' आरफा खानम शेरवानी से दिल्ली आतंकी हमले को लेकर पूछे गए सवाल को उन्होंने 'मजेदार' बताकर टाल दिया। इससे लेफ्ट-लिबरल की मानसिकता उजागर हो गई।
रवीश कुमार ने नई वीडियो में बांग्लादेश में शेख हसीना की सरकार गिरने के समय हुई हिंसा में हिंदुओं पर हुए अत्याचार को झुठलाया है और मीडिया पर अनाप-शनाप खबरें चलाने का आरोप लगाया है।
बंगाल में चिकन पैटीज बेचने वाले रियाजुल के लिए वामपंथी आवाज उठा रहे हैं लेकिन उनके लिए संदेशखाली के गवाह भोला घोष की आपबीती चर्चा करने का विषय नहीं है।
आरफा को कभी भी हलाला, तीन तलाक जैसे मुद्दे विरोध के लायक नहीं लगे, उन्हें दिक्कत हुई तो राम मंदिर से, वहाँ फहराते केसरिया झंडे से और भगवा कपड़ों में वहाँ पहुँचे भक्तों से।
वामपंथी प्रोपेगैंडा मशीन के रूप में कुख्यात वेबसाइट 'द वायर हिंदी' ने हिड़मा की मौत पर आर्टिकल पब्लिश किया, जिसकी हेडलाइन थी- "मोस्ट वांटेड या आदिवासी नायक?"
पत्रकार वीर सांघवी ने 'द प्रिंट' में छपे अपने लेख में तर्क दिया है कि 'गोडसे की महिमा गाने की कोशिशें इसलिए बढ़ गई हैं क्योंकि देश में हिंदुत्व का असर बढ़ा है'।