विचार

राजनीति के कालनेमि जप रहे लक्ष्मी-दुर्गा का नाम, गले में रामनामी-माथे पर चंदन: यूपी का चुनाव आया है क्या

राजनीति के कालनेमि जिस तरीके से चोले बदल अपने-अपने दड़बों से निकल रहे हैं, उससे ऐसा प्रतीत होता है कि उत्तर प्रदेश में चुनाव आ गया है।

हिजाब में माँ दुर्गा… और अभिव्यक्ति के नाम पर लिबरलों की ढिठाई का मारा सहिष्णु हिंदू: आखिर कब तक चलेगा ये सब?

इसे विडंबना ही कहेंगे कि हिंदू जिस त्यौहार में माँ दुर्गा के शक्ति रूप की पूजा करते हैं उसी त्यौहार के बहाने उन्हीं माँ दुर्गा को एक कलाकार हिजाब में दिखा रहा है।

दिल्ली-हरियाणा में प्रदर्शन करें किसान: कॉन्ग्रेसी ‘नैतिकता’ का ही दर्शन अमरिंदर सिंह का बयान, पर क्या इससे बुझेगी पंजाब की घरेलू आग

अमरिंदर सिंह द्वारा किसानों को दी गई सलाह इस बात का सबूत है कि कॉन्ग्रेस के लिए नैतिकता कभी भी राजनीतिक रोटी सेंकने के आड़े नहीं आती।

चलती से दौड़ती हिंदी, 1965 वाली बिंदी नहीं रही अब हिंदी: एक-दूसरे से जुड़े हिंदुस्तान, हिंदी भाषा और हिंदी का बाजार

संविधान सभा ने 14 सितंबर 1949 को हिंदी को राजभाषा का दर्जा प्रदान किया। इसी स्मृति में प्रतिवर्ष 14 सितंबर को हिंदी दिवस मनाया जाता है।

भारत की भाषा संबंधी बहस में हिंदी की भूमिका: मातृभाषा के लिए श्यामा प्रसाद मुखर्जी से लेकर अमित शाह तक का योगदान

हिंदी सभी भारतीय भाषाओं में सबसे व्यापक रूप से बोली जाने वाली भाषा है। यह एक एकीकृत भाषा के रूप में कार्य कर सकती है और गैर-देसी ज़बानों की भूमिका को बदल सकती है।

जन्मभूमि पर चाहिए थी यूनिवर्सिटी, भूमि घोटाले का ‘मनगढंत आरोप: अब वोट के लिए ‘राम भक्त’ बनें सिसोदिया-संजय, पहुँचे अयोध्या

अब आम आदमी पार्टी के नेताओं के लिए उत्तर प्रदेश में एंट्री मन ही मन "प्रविसि नगर कीजे सब काजा, हृदय राखि कोसलपुर राजा" के गायन से शुरू होती है।

मुस्लिम ही राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष क्यों? मोदी सरकार ने तोड़ी कॉन्ग्रेसियों की ‘परंपरा’, वाजपेयी ने भी किया था

इक़बाल सिंह लालपुरा की आयोग के अध्यक्ष पद पर नियुक्ति सरकार की नीयत और संविधान के प्रति उसकी आस्था, दोनों को दर्शाता है।

हिंदू वोट चाहिए, हिंदू भीड़ चाहिए लेकिन… देवी-देवता नहीं: कॉन्ग्रेसी राहुल गाँधी का यह राजनीतिक दर्शन या रणनीति?

हिंदू वोट लेने के लिए कॉन्ग्रेस असम में अपने मित्र बदरुद्दीन अज़मल से किनारा कर चुकी है पर उसके नेता हिंदुओं के साथ अपने संवाद में...

सभी धर्मों, उत्पीड़ितों और शरणार्थियों वाला स्वामी विवेकानंद का संदेश… अफगानिस्तान और US दोनों पर लागू

आज हमें विवेकानंद के 128 वर्ष पूर्व दिए उस संदेश को याद करने की आवश्यकता है, जो संसार को सहिष्णुता तथा सार्वभौम स्वीकृति की शिक्षा देता है।

झारखंड विधानसभा में नमाज के लिए कमरे का आवंटन सांप्रदायिक ध्रुवीकरण के नए अध्याय की शुरुआत, भविष्य और भी खतरनाक

प्रश्न यह है कि बार-बार ऐसा करने से जिस बात या माँग के सामान्यीकरण किए जाने का खतरा लगातार बढ़ेगा उसके हल का रास्ता कहाँ से होकर जाता है?

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